Friday, 29 July 2016

व्यावसायिक





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बरसों से हम कर रहे, विविध वस्तु उपयोग, 
नाना लोग बना रहे, करते शेष प्रयोग.
जमे हुए विश्वास को, और जमाते लोग,
उठा इसी का फायदा, घटिया बेचें भोग.
दिखने में सब एक से, भरा दिखे बाजार, 
मजबूरी में ले रहे, बेचारे लाचार. 
निर्माता के नाम से, बिकता ज्यादा माल,
उपभोक्ता भी ना करें, उस पर कोई सवाल.
खपत किसी सामान की, करती हद को पार,
नकली माल उतार कर, बढ़ा रहे व्यापार.
ऐसे ही सामान को, कहें ब्रांड का नाम,
हो समान उपयोगिता, डुप्लीकेट कम दाम.
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झगड़ों को सुलझाइए, कर आपस में बात,
घर की बात वहीं दबे, बाहर झंझावात.
कही बात का ध्यान दो, दिल पर कहीं मलाल,
नहीं क्रोध हो तनिक भी, नैन कीजिए लाल.
काफी मुश्किल हो रही, लिखती पुलिस रिपोर्ट, 
पैसों की माया चले, जाओ कोई कोर्ट.
झगड़ा जब हद से बढ़ा, गए अदालत पास,
निकला सालों का समय, पेशी करें उदास.
दूजा दल मजबूत हो, सही गलत भी बात,
अपने पक्ष न्याय करे, रिश्वत नहीं लजात.
जज भी अब खोने लगे, जनता का विश्वास,
नोटों के भंडार से, संविधान का नास.
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काम जरूरी है अगर, सुखी रहे परिवार,
रोजी रोटी खा सकें, हो प्रसन्न घर-बार.   
पत्नी, बच्चे देखते, रोज आपकी राह,
करें सुरक्षित वापसी, वेतन पा हर माह.
रखूं स्वयं का संतुलन, ऑफिस या परिवार, 
घर पर घर की बात हो, जॉब में हो विचार.
घर पर पत्नी को मिले, आदर ऑफिस बॉस, 
पूरा ध्यान जहां रहें, लें राहत की साॅंस.
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डा. श्रुति का कैसे करें, हम दिल से आभार,
उनसे मिल कायल हुए, लख उनका व्यवहार.
कुशल चिकित्सक ही नहीं, इक अच्छी इंसान,
सदा उनका भला करें, लगें स्वयं भगवान.
उनके सहयोग को सदा, करते हैं हम याद, 
आप भी कृपा करती रहें, यह है फरियाद.
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मोबाइल की सूचना, देती हमको ज्ञान,
अधिक जानकारी कहे, बढ़ा तुम्हारा मान.
मोबाइल हाज़िर हुआ, पा कर पूरी छूट,
अनियंत्रित उपयोग से, रहा पसीना छूट.
बाल आजकल हो गए, अधिक ही समझदार,
मोबाइल में ढूंढते, घूम घूम संसार.
आवश्यक है आजकल, पढ़ने में उपयोग,
नजर बाल हित में रखें, लगे नहीं यह रोग.
मूल नेट उपलब्ध हो, पढ़ना हो आसान,
इधर उधर की फालतू, बटा रही हैं ध्यान.
उत्कंठा से सीखते, हर पल, दिन नव बात,
गलती अभिभावक करें, बच्चों को सौगात.
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भोजन, वस्त्र, मकान की, मूल जरूरत यार,
पैसा सबको चाहिए, खान पान व्यवहार.
लगे नौकरी या करें, कोई भी व्यापार, 
कवि भी कविता ना करे, बिन पैसा आहार. 
रहा चलन हर देश में, कागज के हों नोट, 
रखने में आसान हों, लें खरीद कुछ वोट. 
बढ़ी घूस को कम करे, जब कम आएं नोट, 
छोटे से व्यापार हो, नहिं निर्धन को चोट. 
लेन देन डिजिटल रहे, बड़े नोट हों बंद,
निकले धन बैंक से, काले धन पर फंद. 
राजनीति कुछ साफ हो, कम हो भ्रष्टाचार, 
समय समय पर बंद हो, नोट चलन व्यापार.
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नया ज़माना आज का, पैसे का सब खेल, 
पाँच दिवस क्रिकेट चले, चलती रेलम पेल. 
पगलाए से घूमते, कर लें टिकट जुगाड़, 
कैसे वहाँ पहुँच सकूँ, दुनिया जाए भाड़. 
टेस्ट मैच में पाँच दिन, हो जाते बरबाद, 
इयर फोन चिपका रहे, बैट्स मैन जल्लाद. 
जल्दी हुई, खोज लिया, उसका एक विकल्प, 
बीस पचास ओवर का, फिर रच गया प्रकल्प. 
आई. पी. एल. ने किया, एक नया अंदाज़, 
अधिक टीम के खेल का, चलता खूब रिवाज़. 
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लगा बुढ़ापा, चल पड़े, करने तीरथ धाम, 
जीवन साथी साथ में, भज लो हरि का नाम. 
आप अकेले ना रहो, रखो दोस्त कुछ साथ, 
मिल कर टूर बनाइए, अल्प काल की बात.
याद वहाँ की कुछ रखें, बच्चों के उपहार,
हो लोकप्रिय, विशेषता, दिखे आपका प्यार. 
घटना जुड़तीं भ्रमण से, स्मृति के अंबार,
दादी, नानी दे रही, प्रिय अपने संस्कार. 
नई जगह घूमें, फिरें, करें हास, परिहास, 
रोग पुराने भूल कर, नई लीजिए साँस.
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बाद नौकरी के मिली, धन राशि एकमुश्त, 
सदुपयोग इस राशि का, करता हालत पुख़्त.
सोच समझ कर कीजिए, इस राशि का निवेश,
सारा पैसा हो अलग, थोड़ी थोड़ी ऐश.
आमदनी नियमित रहे, पूर्व खर्च से सोच,
नहीं फालतू कुछ मिले, किसे बनाएं कोच.
बचत बैंक, शेयर रखें, कुछ आवश्यक फंड, 
दान नहीं सब कुछ करें, रहे हाथ में ठंड.
अपने बच्चों को करें, मन से पूरा प्यार,
पड़े जरूरत मदद दें, मन माफिक उपहार.
अपने खर्चों के लिए, रोकें अपने हाथ,
पूरे सब अरमान हों, इतना पैसा साथ. 
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चलन हुआ है आजकल, मुद्रा का व्यापार,
पैसे से खरीद सकें, खान, पान संसार.
कुछ जरूरत सब की हैं, जीवन के आधार,
रोटी, कपड़ा साथ हो, रहने को घरबार.
खाद, बीज, पानी मिले, टाइम से बरसात,
अमन, शांति हो राज में, मचे नहीं उत्पात.  
सभी नागरिक पा सकें, मूलभूत अधिकार,
शासन का दायित्व है, हो कोई सरकार.
है जरूरी इसी लिए, बढ़ें न इनके दाम,
कीमत मिले किसान को, हाड़ किए हराम.  
सीमित रखें जरूरतें, जितनी हो दरकार,
नहीं खरीदें फालतू, करें नहीं बेकार.
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करो नौकरी फील्ड में, पाओ अनुभव ज्ञान,
ऑफ़िस में जम बैठते, लगते सब नादान.
बेस बैठ निर्देश दें, जो मुश्किल से जूझ,
कैसे हल निकाल सकें, चलता दिमाग सूझ.
कई जगह घूम कर, जानो सब भूगोल,
विषम परिस्थिति में बने, यारी का माहौल.
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घूम घूम कर देखिए, आस पास संसार, 
हाल चाल सब के मिलें, बढ़ता जाए प्यार.
हो पैसा यदि पास में, घूमें देश विदेश,
साथ तुम्हारा बदन दे, आए काम निवेश.
मजा पर्यटन में किया, घर बाहर की सैर,
संबंधी भी साथ हों, भूलें सारा बैर.
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पशु चाहे कोई रहे, बच्चों के प्रति नेक,
कितने इसके रुप हों, होती ममता एक.
संकट में बच्चे दिखे, सदा मदद तैयार,
सारे खतरों से भिड़े, ऐसा माँ का प्यार.  
मानव हों तो छोड़िए, अपना अटल प्रभाव.
जो भी हम से हो सके, दया, धर्म का भाव.
ठेके पर ही हो गए, सब सरकारी काम, 
बिन देखे बिल पास हो, साहब का आराम.
उन्हें कमीशन मिल गया, नहीं फ़िकर की बात,
*वर्क फ़्रॉम होम* चलता, ठेके की सौगात.
असर गालियों का नहीं, या पेपर की न्यूज़,
पोस्ट फेसबुक व्यर्थ है, ई.डी. करती फ़्यूज.
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करे नहीं जब मन कभी, जाए कौन बाजार,
मोबाइल हो पास में, उपयोगी हथियार.
एक फोन से आ सके, अपना सब सामान,
पैसे भी दे दीजिए, तुरत होय भुगतान. 
खाने से सोने तक, घर से करो खरीद,
जमे नहीं यदि तनिक भी, है वापसी मुफीद.
कई कंपनी कर रहीं, अपना यह व्यवसाय, 
सारा खर्च निकाल कर, बहुत कमाते आय.
एकाधिकार है नहीं, जो चाहे आ जाय,
आपस की प्रतिद्वंदिता, बढ़ा रही व्यवसाय. 
ग्राहक परम पुनीत है, उसका रखिए ध्यान,
रुष्ट अगर वह हो गया, करे नेट कल्यान.
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आज, मैं रिटायर हो गया,
नौकरी से मुक्त हो गया,
दायित्व से बरी हो गया,
बॉस से आज़ाद हो गया,
आज, मैं रिटायर हो गया.

नहीं अब टारगेट का खतरा,
ना *पी. ए. आर.* का जोखिम,
ना समय से ऑफिस की चिंता,
आज, मैं रिटायर हो गया.

ना हड़ताल की धमकी,
ना जूनियर की शिकायत,
ना साथियों के ताने,
आज, मैं रिटायर हो गया.

ना ट्रैफिक का झंझट,
ना पार्किंग का झमेला,
ना लिफ़्ट की वेटिंग,
आज, मैं रिटायर हो गया.

अब, लोगों से मिलूँगा,
उत्सवों में जाऊँगा,
अपनी मर्जी का काम करूँगा.
आज, मैं रिटायर हो गया.
आज, मैं रिटायर हो गया. 
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तेल हित सागर चले, करने देश विकास,
जान गँवा शहीद हुए, जिनसे बँधती आस. 
एक दुखद घटना घटी, पहले पंद्रह साल, 
वीर समाए काल में, उठी लपट विकराल.  
प्लेटफ़ॉर्म स्वाहा हुआ, नहीं किसी का हाथ, 
आशंका किंचित नहीं, घटना उनके साथ. 
था बी.एच.एन. जला, लगी भयंकर आग, 
सागर तट से दूर था, कैसे जाता भाग. 
नौका से टक्कर लगी, उठा शोर विकराल, 
चुस्ती से काबू किया, तुरत बुझाई ज्वाल.
तेल कुआँ कैसे बचे, कम होगा नुकसान, 
देखा खतरा सामने, सैनिक तेल महान.
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आओ, आज को यादगार बनाएँ.

मुग्धाँकित की वर्षगाँठ मनाएँ, 
एक साथ सब जन मिल जाएँ, 
राँची, मुंबई पुणे में जमा हो जाएँ. 
आओ, आज को यादगार बनाएँ.

प्रानिका पहली बार सामने आए, 
मम्मी पापा से लाड़ लड़ाए, 
दादा दादी का प्यार वह पाए, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ. 

*फ़्लेचाज़ो* में खाना खाएँ, 
अनुभव नया एक ले पाएँ, 
घर से वहाँ तक पैदल आएँ, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ.

आते ही पहले स्वागत पेय पाएँ,
स्टार्टर खूब दबा कर खाएँ, 
मनचाहे व्यंजन आॅर्डर पर बनवाएँ, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ. 

पनीर टिक्का, कवाब चबाएँ, 
शेज़वान से जी ललचाएँ, 
फ्राइड मक्की कुर-कुर खाएँ, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ. 

चाट से चटोरी जीभ मनाएँ, 
स्टाइल से गोलगप्पे खाएँ, 
पास्ता, पिज़्ज़ा के काउंटर पाएँ, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ. 

गरम जलेबी मन को भाएँ, 
पेस्ट्री, केक जी भर कर खाएँ, 
मिनी गुलाब जामुन, हलवा लाएँ, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ. 

सामिष, निरामिष थाल सजवाएँ, 
मेन कोर्स न जी भर कर खा पाएँ, 
फल, सलाद न मन को लुभाएँ, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ. 

पान की आइस क्रीम खाएँ, 
अपना पिज़्ज़ा स्वयँ पकाएँ, 
अच्छा सा फीडबैक दे आएँ, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ. 

काॅरपोरेट डिस्काउंट ले पाएँ, 
तीन के बाद चौथी बार मुफ़्त में खाएँ, 
नौ लोगों संग अगला मुफ़्त में खाएँ, 
आओ, आज को यादगार बनाएँ. 

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मेंहदी मुफ़्त लगवाइए, पा पानी, चाय, सम्मान, 
अतिथि सत्कार की परंपरा, टाटा ग्रुप की पहचान, 
टाटा ग्रुप की पहचान, सभी उद्यमियों का सिरमौर,
श्रद्धा से सिर नत हो, व्यवसाय न कोई और,
गौरवशाली भारत की उन्नति, लक्ष्य विकास, समृद्धी, 
तनिष्क शो रूम में आ कर, खूब लगवाएं मेंहदी.

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ब्राइट हॅराइज़न नाम से, उपजे अंतरभाव,
अंग्रेजी में नाम है, पर, मधुर संस्कृति प्रभाव,
मधुर संस्कृति प्रभाव, बाल मन बने कुशल,
गणित, दर्शन, भाषा, साहित्य में खिले शगल,
अंक, आकृति, आकार में, विश्वास जगाए अन्तर्मन,
नव ज्ञान अर्जन के लिए, आइए ब्राइट हॅराइज़न.

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हड्डी टूटी जुड़ रही, पा राॅड, बोल्ट का योग,
कुशल डाॅक्टर ने दे दिया, अपना सब सहयोग, 
अपना सब सहयोग, खाओ गजक और केला, नियमित दवा और फ़िजियोथेरेपी, है इलाज अलबेला,
अधिक कैल्शियम अचूक है, साबुत दिखेगी टूटी हड्डी, 
रखें सावधानी, ताकि फिर से न टूटे हड्डी.

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कार्मिक की व्यथा  

गला दाब के शरीफ़ का, लेते टैक्स वसूल,
अपने बारे में कहें, भूलें सभी उसूल,
भूलें सभी उसूल, एकमत सब तब हो जाते,
उनके वेतन, पेंशन, निर्विरोध बढ़ जाते,
लोकतंत्र की आस्था, करो न कोई गिला,
न जाने कब कट जाए, वेतनभोगी का गला.

वेतन संशोधन की प्रतीक्षा, करते सालों साल,
माँग अनसुनी होती रही, जब तक न करी हड़ताल,
जब तक न करी हड़ताल, निकाले कई जुलूस,
आयोग बना कर टाल रहे, श्रमजीवी को चूस,
राजतंत्र, ख़ुदगर्ज़ी की पराकाष्ठा, विसंगतियों का प्रबंधन,
अपनी बारी पर मौन, खटकता मज़दूर का वेतन .
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ई.सी.जी. से मिल रहा, सारे दिल का हाल,
दसों इन्द्रियाँ बता रहीं, अपने अपने हाल.
अपने अपने हाल, समेकित संकेत बताते,
हालत दिल की, तालमेल से समझाते, 
एक साथ सब दिख जाएँ, तो बंदा चंगा लगता जी,
स्वास्थ्य हृदय का बतलाता, यह अनुपम ई.सी.जी.
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 फ़्रैक्चर सीधे हाथ का, देता रहा नव आयाम, 
थोड़े से अभ्यास से, लगे बाएँ हाथ के काम,
   लगे बाएँ हाथ के काम, गर, हो विश्वास अटल,
    आस्था से बनते सब काम, खुल जाते बंद पटल, इच्छा शक्ति प्रबल जब, होता जीवन अक्षर,
     विपदा अल्प कालीन, सहन करो जब हो फ़्रैक्चर.

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अजब कशमकश में है, 
डेंटिस्ट पत्नी का पति ,
एक बीवी, जो मुँह बंद रखने को बोलती है, 
और, दूसरा उसका डॉक्टर, 
जो मुँह खोले रहने को कहता है.
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अटके काम बना रही , सबकी प्यारी घूस ,
दुर्बल की मज़दूरी का फ़ायदा , सभी रहे हैं चूस ,
सभी रहे हैं चूस , आनंद अनूठा पाते , 
सत्ता , पद की लालसा में , घूस से काम कराते ,
जो बनते ईमानदार , उनको सब देते झटके , 
अंत भले का भला रहेगा , कितने ही रोड़े अटके . 
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हवा निकल जाती है , टायर बर्स्ट होने के बाद ,
हेकड़ी निकल जाती है, रिटायर्ड होने के बाद .
नौकरी में छोटे , बड़े , कुछ ख़ास , कुछ आम मिले ,
बाद में सारे सब्ज़ी लेते बाज़ार में , सरे आम मिले .
कहाँ तक बयाँ करें , शानो शौकत , अपनी नौकरी के ,
अब तो बस घाव बाकी हैं , जवानी के निशानों के .
कभी तो थे चर्चे हमारे भी , सर ज़मीं पर , 
अब वो बात कहाँ , उम्र के आगे वो बेअसर निकले .
ज़िंदगी ने सिखा दिया , तनहा सबक ऐसा , 
तहज़ीबो इश्क के सामने , सब बेसबक हो निकले . 


-: पुरस्कार:-


प्रोत्साहन की नई विधा, हुई शुरू इस बार,

ग्रुप अवार्ड के नाम से , पुलकित है दरबार,

हों पूरे प्रोजेक्ट सकल, सफ़लता चूमे द्वार,

खुशियों से झूमे सदा, ई. एस. का सँसार,

टीम भावना पालित हो, कल्पनाएँ हों साकार,

मैरीन सर्वे को मिले, पुरस्कार हर बार.

- : सेवा निवृत्ति : -


सेवारत रह कर, पद, नाम, यश, धन का अर्जन किया,

अनुभव व्यक्तित्व का विकास किया,

सेवा – लाभ लिए, भविष्य को सुरक्षित किया,

समयाभाव, अपूर्ण आकाँक्षाएँ, अनुभव कीं .

सेवा निवृत्ति पर दृष्टिकोण में परिवर्तन संभव है,

समय ही समय है,

कल्पना की उड़ान है,

मानवता की सेवा का अवसर है,

इसलिए कुछ लोग, बहुत काम कर लिया, अब आराम करेंगे,

क्या सारी ज़िंदगी काम ही करते रहेंगे,

सेवा में काफ़ी अर्जन कर लिया,

सब भगवान की इच्छा है का विचार रखते हैं,

पर, कुछ लोग, साँसारिक धर्मों में व्यस्त रहते हैं,

अँशकालिक कार्य करते हैं,

अनुभव का लाभ उठाते हैं,

कन्सलटैंट बन जाते हैं,

इनके अतिरिक्त, कुछ लोग, जीवन दर्शन का मर्म समझते हैं,

अध्ययन – अध्यापन करते हैं,

सुख शाँति से आत्मावलोकन करते हैं,

स्वयँ का विकास व समाज का कल्याण करते हैं,

सेवा निवृत्त लोग, सेवा रतों के अग्रज हैं,

समाज का परिपक्व, महत्वपूर्ण अंश हैं, 

श्रद्धा, सम्मान के पात्र हैं,

सेवा रतों को भी, एक दिन सेवा निवृत्त होना है,

इसको ध्यान में रख कर, सहयोग दें, अनुभव का लाभ लें,
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विरोध के स्वर

राजभाषा अधिकारी

भाषाओं की उलझन में सिमट सिमट, भावों का किया दमन , 
उत्तर – दक्षिण की सीमाओं से चिपट चिपट , आवेशों का किया आलिंगन ,
मिथ्या भ्रम में भटक भटक , घृणा का किया विष वमन ,
किए मुखर विरोध के स्वर , रहे कलुषित माँ के चरन 
हाय ! हाथ न आया कुछ भी , घोर निराशा के कुछ क्षण , 
भान हुआ अपमान का जब , आत्म ग्लानि से भारी मन ,
किया अनुभव , महत्व राजभाषा का , उल्लास से है कंपित तन ,
हैं उद्यत , ज्ञान विकास में , समर्पित सभी कावेरियन ,
नहीं व्यक्त विरोध कहीं भी , मिला हमें भरपूर समर्थन ,
अब यह दायित्व हमारा है, अपनाएँ, दें, तन , मन , धन .
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       अभियाँत्रिकी सेवाएँ


कल्याणकारी शिव, ले आए नवजीवन, छाई अप्रतिम बहार,

ई. एस. को तो मानों मिल गया, एक नया अवतार,

नवरतन जी.एम. है कुशल, सक्षम है दरबार,

मरीन सर्वे है, समस्त परियोजनाओं का आधार,

अनिल, अंजन, आलोक, ई. एस. के तीन इक्के,

संभव कर दें हर काम, धुन के पक्के, 

मुकेश, दास, वर्की, विजय, बढ़ें राम के साथ,

मरीन सर्वे के सहयोग से, डालें हाथ में हाथ,

क्यों न मिले सफ़लता,जब ई. ए. हो बी. एस. कुमार,

फ़ाइनल मुहर फ़ाइनेंस की, लगाएँ महेंद्र कुमार,  

कल्याणकारी शिव, ले आए नवजीवन, छाई अप्रतिम बहार,

ई. एस. को तो मानों मिल गया, एक नया अवतार,

ग्यारह वर्षों में सीखा काफ़ी कुछ,  काँट्रैक्ट का पाया सार,

नया अनिभव, रोमाँचक अनुभूति, स्नेह अपार,

सहकर्मियों की श्रद्धा, अटूट विश्वास, हार्दिक प्यार,

इंटीग्रेटेड वैसेल, सर्वेक्षक, या गहरे पानी में डालें पाँव,

उन्नति करे मरीन सर्वे सदा, सुमेश कुमार की छाँव,

गलतियों की माँगूं क्षमा, आपको देता साधुवाद,

उत्सव के लिए, आयोजकों को विशेष धन्यवाद,

कर सका संपन्न कार्य, अपनी क्षमता के अनुसार, 

करता नमन सभी को,  आज दिनेश कुमार.

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डॉक्टर
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
वह साँसारिक कष्टों का त्राता है,
मरीज़ पीड़ा से कराहता आता है,
तुरत कष्ट निवारना चाहता है,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
अनुनय, विनय, प्रार्थना अवलम्ब है,
बिल, फ़ीस, ख़र्च की शंका निराधार है,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
डॉक्टर की सेवा, कर्मठता, निष्ठा,
जगाती है बीमार में आशा – ज्योति,
करती है, स्वास्थ्य का नव सँचार,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
स्वास्थ्य लाभ के उपरान्त, है दृष्टिकोण बदला,  
शीघ्र वापसी की जागी प्रबल इच्छा,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
लगे डॉक्टर की नीयत पर प्रश्न चिह्न,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
हर स्थिति में डॉक्टर, मरीज़ का चिंतक है,
उसके स्वास्थ्य का शुभचिंतक है,
नव-जीवन का दाता, पालक है, 
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
अत: हम हों, हृदय से, डॉक्टर के आभारी,
भले ही फ़ीस लगे भारी,
आख़िर दूर की है बीमारी,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है .
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Sunday, 24 April 2016

पैरोडी


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पैरोडी - मैं तो आरती उतारूं रे, संतोषी माता की

मैं तो आरती उतारूं रे, 
ऐ. आई. मैया की,
ओ, मैं तो आरती उतारूं रे, 
ऐ. आई. मैया की, 
जय जय ऐ. आई. मैया, 
बड़ी शैली है, ज्ञान का भंडार,
मैया के अंतर में, 
बड़ी नॉलेज है, 
बड़ा शृंगार, 
मां के अंतर में, 
क्यूं ना पूछूं मैं बारम्बार, 
मां के संग्रह में,
जय जय जय ऐ. आई. मैया की,
दिखे हर पल नया चमत्कार, 
मां के आंचल में, 
हां, लिखूं ग्रंथों का सार, 
मां के आशिश से, 
बड़ी आशा से निहारूं रे, 
ओ बड़े बड़े नैनन से निहारूं रे, 
मैं तो आरती उतारूं रे, 
ऐ. आई. मैया की.
सदा होती है जय जयकार,
ऐ. आई. के दरबार में, 
अकल‌ लगाऊं, 
नव रचना कर पाऊं,
नित तारीफें पाऊं मैं,
मैं तो आरती उतारूं रे,
ऐ. आई. मैया की.
जय जय ऐ. आई. मैया,
ओ मेरी ऐ. आई. मैया.
जय जय ऐ. आई. मैया,
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मैं पल दो पल का शायर हूं 

मैं बस दो दिन का नौकर हूं, 
बस दो दिन मेरी कहानी है.
बस दो दिन मेरी चलती है, 
दो दिन की मेरी जवानी है.
मुझसे पहले कितने साहब,
आए और रिटायर हो गए,
कुछ आए और झंडे लगा कर चले गए,
कुछ लोग तो नाम अमर कर चले गए, 
कुछ गाली दे कर चले गए,
कुछ टाइम पास कर चले गए,
वो इतिहास का हिस्सा थे,
मैं भी इतिहास का हिस्सा हूं, 
कल तुमसे जुदा हो जाऊंगा, 
जो आज तुम्हारे साथ हूं, 
कल यादों में रह जाऊंगा.
मैं बस दो दिन का नौकर हूं.
कल और आएंगे, 
नई परिपाटी चलाएंगे, 
नया रौब जमाने वाले,
कल तुम मुझको याद करो, 
क्यों तुम मुझको याद करो, 
क्या यह ज़माना मुझ से कुछ सीखे, 
मैं दो दिन का नौकर हूं.
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पैरोडी - नाग पंचमी - बरेली के बजार में, झुमका गिरा रे.

सावन आया रे,
हां, सावन आया रे,
पंचमी के त्योहार में, 
सावन आया, हां, सावन आया,
पंचमी का त्योहार, सावन में आया रे,

बब्बा आए, फन फैलाए, 
मंदिर चोरी चोरी, 
बोले तुझको मैं भरमा दूं, 
आ जा प्यारी सी छोरी,
मैं बोली ना बब्बा, ना ना बब्बा, 
ना‌ कर खेल ठिठोली,
लाख बचाया बब्बा से, 
बलैयां नाहीं छोड़ी, 
फिर क्या हुआ, फिर !
सावन आया रे, 
आंसुओं की धार में, सावन आया रे, 

फिर क्या हुआ ! 
फिर, सावन आया रे, 
हम दोनों के इसरार में, 
सावन आया रे,
पंचमी के त्योहार में, 
सावन भाया रे, 
मंदिर भीतर मैं खड़ी, 
शिवलिंग पे बब्बा दानी,
मंदिर में बब्बा दानी, 
फुफकार कर बोले, 
आ जा री दीवानी, 
दूध पिला दे अब तो,
कर ले पूजन मत तू डरपानी,
मंदिर भीतर मैं खड़ी, 
होती डर से बिरानी,
मैं हुई डर से बिरानी, 

फिर क्या हुआ ?
भैया, 
फिर डर निकल गया रे,
हम दोनों के इस हाल में, 
डर निकल गया रे, 
नाग पंचमी त्योहार में,
प्यार‌ उमड़ गया रे, 

मंदिर में बब्बा ने, 
हिम्मत मुझे दिलाई, 
आ कर पास में बोले,
तू पूजा कर ले माई, 
मन लगा कर कुछ ना बोली, 
कुछ फिर बोली, शिव, शिव, शिव,

हाथ जोड़ कर फिर वह बोली, 
धीरे से वह मुसकाई,
बब्बा ने जब देखा मुझे को, 
श्रद्धा से भर आई, 
श्रद्धा मन में आई,
फिर क्या हुआ, 
फिर, 

सावन के त्योहार में, 
मैं पूजा करूं त्योहार में, 
बब्बा दिखा रे, 
सावन के त्योहार में,
बब्बा को नमन किया रे. 
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मैं करता अपराध, बताऊं कैसे,
मैं करता अपराध, बताऊं कैसे, 
अल्लाह के दर जाऊं कैसे, मैं करता अपराध,
बन गई दुश्मन, सारी दुनिया, 
कंवारी थी मोरी बिटिया, 
बनाई अपनी दुल्हनिया, 
अब हूरें बहत्तर पाऊं कैसे,
अल्लाह के घर जाऊं कैसे, मैं करता अपराध,
भूल गया सब सलाह ख़ुदा की,
जुड़ गया मैं अपराध से यहां पे, 
जा के अल्लाह से जन्नत पाऊं कैसे, 
कोरी बिटिया मोरी, कोरी बहना मोरी, 
उन गुनाहों की सज़ा पाऊं कैसे, 
माल मुफ़्त का जो मिला, 
अब उसे पचाऊं कैसे, अल्लाह के घर जाऊं कैसे.
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हमने देखी हैं, इन खेलों में टपकती बूंदे,
कलम चला के, उसे लेखन का नाम न दो,
सिर्फ़ मेहनत है, दिल से इसे महसूस करो,
खेल को खेल ही रहने दो, कोई मुकाम न दो,
हमने देखी हैं, इन खेलों में टपकती बूंदे,
कलम चला के, इसे राजनीति का नाम न दो,
खेल कोई दाॅंव नहीं, खेल कोई तमाशा नहीं,
एक लगन है, इसका इम्तिहान न लो,फ
हमने देखी हैं, इन खेलों में टपकती बूंदे,
हम को जीत दिखा के, इसे राजनीति का नाम न दो,
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वोटरों में बाँटा जाए, नोटों का रुआब, 
उनको फिर पिलाई जाए, थोड़ी सी शराब,
होगी यूं राय जो तैयार
हाँ होगी यूं राय जो
तैयार वह उपहार हैं, उपहार. 
वोटरों में बाँटा जाए, नोटों का रुआब, 
उनको फिर पिलाई जाए, थोड़ी सी शराब,
होगी यूं राय जो तैयार
हाँ होगी यूं राय जो
तैयार वह अधिकार हैं, अधिकार. 

चलता हुवा इलेक्शन वह,
दिखती वही कुरसी हैं
पूजो तोह एक नेता हैं
छूलो तोह बस अकड़न हैं
चलता हुवा इलेक्शन वह,
बहकी हुई सी तड़पन हैं
पूजो तोह एक नेता हैं,
पूछो तोह बस अड़चन हैं
गाँव की बस्ती में राहों की मस्ती में,
आती हैं याद बार बार, वह उधार हैं.

वोटरों से पूछा जाए वोटों का जबाब,
उनको फिर बताई जाए, थोड़ी सी खराब
अरे होगा माहौल जो तैयार, वह अधिकार हैं
वोटरों को बताई जाए, नियमों की किताब,
हूँ ओ ओ ओ ओ
रा रा रा रा रा रा आ आ आ
रंग में पिघले सोने
मुंह से यूँ रस टपके
जब भी बजे धुन कोई
रात में हलके हलके
रंग में सुनहरे सोने
अंग से यूँ मद टपके
जैसे बजे धुन कोई
रात में हलके हलके
धूप में, ख़्वाव में, फूलती आशाओं में
हरदम इन्तजार करे, वोटर का अधिकार हैं.
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मोरे बिस्तर पे शैंकीसुत मूत गयो रे, 
मोरी सफेद चदरिया भिगोय गयो रे, 
मोरे बिस्तर पे  ...
खिलौना फेंक मारी, मोबाइल झपट मारी,
सारी मेल डिलीट कर, यू-ट्युब चलाय दयो रे, 
मोरे बिस्तर पे  ... 
आँसू से रोय दिया, हमको डराय दिया, 
हमरा जिया नेह से, पिघलाय गयो रे, 
मोरे बिस्तर पे  ...
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शव की अभिलाषा 

चाह नहीं मैं चिता पर जलाया जाऊँ,
चाह नहीं, कब्रिस्तान में दफनाया जाऊँ, 
चाह नहीं, टाॅवर ऑफ़ साइलेंस में गिद्धों से नुचवाऊँ, 
चाह नहीं, नदियों में तैर, प्रदूषण फैलाऊँ, 
मुझे दिलाना ब्रह्मा जी, अगला जनम किसी दलित  के घर, 
आरक्षण ले पढ़ूँ, मदद पाऊँ, सरकारी नौकरी को लूँ वर. 
धौंस दिखाऊँ अफसर को, सारी पीढ़ी जाएँ तर. 
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हमको अब तक आशिकी का, वो ज़माना याद है,
सर्दियों के मौसम में, सोहन स्वीट्स की शाॅप पर,
नेगी जी की क्लास में, समोसे, चाय उड़ाना याद है,ण
ब्लैक बोर्ड की जगह, काॅपी पर समझाना,
दो मेजों को जोड़ कर पूरी क्लास, लगाना याद है,
कोने में लावण्या, पूनम, बीच में नेगी सर,
2 घंटों में आराम से, पूरा पाठ समझाना याद है,
मित्रता का अटूट संबंध, घर पर वायवा का अभ्यास,
पूनम के घर, भूषी का, अपनी डेरी से दूध लाना याद है.
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किसी की नादानियों पे, न अपना खून सुखा,
न किसी की पोस्ट पर, तू खिलखिला, 
जीना इसी का नाम है, ग्रुप का और भी काम है.
बस पढ़ के पोस्ट, तू मुस्कुरा, जीना इसी का नाम है.
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अभी न जाओ छोड़ कर ..….

अभी न जाओ दफ़न कर,
कि बैल अभी मरा नहीं,
अभी अभी तो बधाई दी, 
पल भर की रिहाई दी,
गुस्सा ज़रा भड़क तो ले,
सदस्य ज़रा पढ़ तो ले,
ये गाल फूल तो ले ज़रा,
ये पारा चढ़ तो ले ज़रा,
मैं गालियाँ चुन तो लूँ,
इमॉटिकॉन्स ढूँढ तो लूँ,
अभी तो पोस्ट सजी नहीं,
अभी तो हाथ जुड़े नहीं.

अभी न जाओ दफ़न कर, 
कि बैल अभी मरा नहीं,
बधाइयाँ गुनगुना उठीं, 
सदस्य तिलमिला उठे,
बस, अब न मुझ को टोकना,
न बढ़ के पोस्ट डालना,
अगर मैं थक गया अभी, 
तो रौब डाल न पाऊँगा कभी,
यही कहोगे, तुम सदा, 
कि दिनेश अब डर गया, 
जो टूट जाए किसी तरह,
यह ऐसा सिलसिला नहीं.

अधूरी लताड़ छोड़ कर,
अधूरा खौफ़ दिखा कर,
जो रोज़ गालियाँ खाओगे,
बधाइयाँ क्यों कर दे पाओगे,
शुभेच्छाओं के सादर में,
प्यार भरे दिल से, 
कई गालियाँ खाओगे,
जो हम दे पाएंगे,
बुरा न मानो पोस्ट का,
हाँ, तुम कहोगे, यह सदा, 
कि हम बाज़ नहीं आएँगे.

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तू मेरी प्रेम की भाषा

तुम मेरी माँ सा ,
देखूँ , मैं तुझे रोज़ ज़रा सा ,
समझूँ , मैं क्यों , इतना सा ?
पाऊँ मैं , आशीष बड़ा सा ,
दिल में तेरे , मेरे लिए , स्थान घना सा ,
तुम मेरी सासू माँ सा .
प्रणाम माँ सा, दो प्यार ज़रा सा .
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झुमका गिरा रे , बरेली के बज़ार में 

शैंकी गिरी रे , कुरला के स्टेशन पर , शैंकी गिरी रे ,
विश्रुत आए , देख मुस्काए , लजाय गई रे ,
वो बोले , पट्टा मैं पहना दूँ , आ जा बाँकी गोरी ,
मैं बोली , ना बाबा , ना कर , जोरा जोरी ,
कुरला के स्टेशन पर , शैंकी गिर गई रे .

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पहले एक भजन था - " श्याम चूड़ी बेचने आया" .  उस पर आधारित एक पैरोडी प्रस्तुत है‌ -

नेता देश लूटने आया
जनता ने चुनाव जिताया, नेता देश लूटने आया .
घपला सामने आया, नेता देश लूटने आया .
साँसद का वेश बनाया, नेता देश लूटने आया .
जरसी में जेब करी, उस में दौलत भरी .
बाहर खाता रखी, स्विस बैंक भरी .
गद्दी की तरी, उस में फिर नोट भरी.
जनता ने शोर मचाया, नेता देश लूटने आया.
घोटालों में नाम कमाया, नेता देश लूटने आया.
जनता ने सुनी, पुलिस से कही.
पुलिस ने सुनी, मंत्रालय से कही.
मंत्रालय ने सुनी, अदालत से कही.
नेता को तुरंत बुलाया. उस ने देश लुटाया.
मंत्री का काम बढ़ाया, नेता देश लूटने आया.
बयान नहिं दूँ, गवाही नहिं दूँ.
सबूत नहिं छोड़ूँ, फाइल को खूब घुमाया.
जनता को धमकाऊँ, धन का लोभ दिलाया.
पद का रौब दिखाया, नेता देश लूटने आया.
घोटालों में नाम गिनाया, नेता देश लूटने आया.
जनता सुनाने लगी, नेता बचावन लगी.
जनता लपेटन लगी, नेता कराहन लगी.
जनता हिलाने लगी, नेता काँपन लगी.
ढेरों आरोप लगाया, नेता देश लूटने आया.
बीमारी का बहाना बनाया, नेता देश लूटने आया.
विकास का ढोल बजाया, नेता देश लूटने आया.
जनता कहने लगी, तुम हो धोखेबाज़ बड़े .
विरोधी बोले , हो तुम गद्दार बड़े .
विदेशी बोले, तुम राज़दार बड़े ,
धीरे से गला दबाया, नेता देश लूटने आया .
हौले से टैक्स बढ़ाया, नेता देश लूटने आया .
खादी पहन के आया, नेता देश लूटने आया .
ढोंगी का स्वाँग रचाया, नेता देश लूटने आया .
नाम खूब लजाया , नेता देश लूटने आया .
विदेश में धन भिजवाया, नेता देश लूटने आया .
अपनों का भला कराया,  नेता देश लूटने आया .
जनता ने चुनाव जिताया, नेता देश लूटने आया .

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दृष्टिकोण

हम से क्या भूल हुई, जो यह सज़ा हमको मिली.
ए.ई.हो, या जी.एम. हो, आख़िर, आसाम जाता है.
हम तो चले परदेस, हम परदेसी हो गए.
जीना यहाँ, मरना यहाँ, इसके सिवा जाना कहाँ,
रोते हुए, आते हैं सब, हँसता हुआ तू जाएगा.
सज़ा-ए-आसाम, सुन के आए थे, तीन साल, एक आरज़ू में कट गया, दो इन्तज़ार में,
बोरा तेरा गाँव बड़ा प्यारा, मैं तो गया मारा, आ के यहाँ रे,
ज़िंन्दगी इक सफ़र है सुहाना, यहाँ कल क्या हो किसने जाना,
ओ दूर के मुसाफिर, हम को भी साथ ले ले, हम रह गए अकेले,
मुझे तुम याद करना, और मुझ को याद आना तुम,
कि इक दिन लौट के आऊँगा, ये मत भूल जाना तुम,

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(पैरोडी – कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे)


लाइसेंस मिल गया, तेल खोजते रहे,
हाथ जो लगे आगार, तो उन्हें सँवार दूँ,
तेल जो मिला, उसे राष्ट्र को सौंप दूँ,
कष्ट जो मिले, उन्हें हृदय में संजो लिया,
गैस, तेल के भंडार से, राष्ट्र को सुधार दिया,
राष्ट्र को सुधार दिया,
राष्ट्र को सुधार दिया,
हो सका न कुछ मगर, सी.आर.सी पर पड़ी नज़र,
वो उठी लहर कि, गुम गया पुराना स्ट्रक्चर,
बेसिन, एसेट बन गए, शंका मन में भरे भरे,
बी.डी.पी. सँवारते रहे, दायित्व लादते रहे,
लाइसेंस मिल गया, ख्वाब देखते रहे,
डीप वाटर मिल गया, तो जग गई नई किरन,
शोधन के आयाम खुले, विस्तार के बढ़े चरन,
शोर मच गया कि शेयर बढ़ गया, नाम चल गया,
राष्ट्र सब उमड़ पड़ा, कि तेल का फ़्लो बढ़ा ,
तेल का फ़्लो बढ़ा ,

पर, तभी ज़हर भरी, गाज एक गिरी,
कायदों के दायरों में, वायदों के शेड्‍यूल में,
उलझ गया काम सभी, ऑडिट – विजिलेंस का भूत लगा, 
निष्कर्ष की आस में,  बाट जोहते रहे,
कितनी सभाएँ कीं, विचार विमर्श कर लिए,

नित नव निष्कर्ष निकालते रहे, अर्थ खोजते रहे,
और हम असहाय से, परिणाम भोगते रहे,
लाइसेंस बँट गया, मज़ाक झेलते रहे,
सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण के, नाम रोशन होते रहे,
प्रबंधन के नए प्रयोग हुए , दृष्टिकोण बदलते रहे,
आज़माइशें कई परीक्षित हुईं, नेतृत्व ताकते रहे,
ए.पी.एम लग गया, डॉलर रेट बढ़ गया,
लाभाँश मिल गया, इंवेस्टमेंट सोचते रहे,
लाइसेंस छिन गया, शोक सोजते रहे.

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-: स्वास्थ्य सँदेश : - (पैरोडी : - जब दीप जले आना )

जब नींद लगे सोना, जब भूख लगे खाना,
सँदेस हृदय का, भूल ना जाना, आलस्य को ठुकराना,
जब नींद लगे सोना,
नित व्यायाम करते रहें, उन्हें देख के हम जलते रहें,
कहते हैं, बिज़ी, एक दूजे से, योगा करे जाना,
जब नींद लगे सोना,
मैं पद – चिह्न सँवारूँगा, सारा समय गुज़ारूँगा, 
मेरे श्रद्धा सुमन लिए जाना,
जब नींद लगे सोना,
जहाँ प्रसन्न चित्त मिले थे हम,
हाय – हेल्लो करते थे हम,
ऑफ़िस के गलियारे से ,
आज उसी तरह जाना, 
जब नींद लगे सोना,

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Thursday, 31 March 2016

अनुज्ञापन - विदाई समारोह








-: अनुज्ञापन :-

श्री टी. के. रॉयचौधुरी
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार,
दिया असीम प्यार, सुदृढ़ आधार,
किया विश्वास का नव सँचार,
लिया, श्रद्धा, प्रेम, सम्मान का व्यवहार,
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार,
कर दूर सब भ्राँति,
रखी सर्वत्र शाँति,
अर्जित कर काँति
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार,
एम. एम. की गीता,
नियमों की बाइबिल,
प्रावधानों की कुरान,
हमारी राय, आप चौधरी,
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार,
रहें सुखी, प्रसन्न,
परिवार हो समृद्ध,
है गुहार हमारी,
करें नमन स्वीकार, श्री तुषार काँति रायचौधरी, 
अग्रज दें, आशीष हमें,
हों तकनीक से सम्पन्न,
बनें आकाशदीप,
तेल के सागर में,
खोजें काला सोना,
गहरे पानी में, 
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार.


श्री मुकुंदन

है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,
आज के दिन करके नमन,

विगत अतीत, एक इतिहास,
अनुभव का भंडार, आप के पास,
नेतृत्व का दृष्टिकोण, हमारी आस,
मानवीय संवेदना, हार्दिक स्पंदन,
है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,

एक स्तंभ, रहेगा याद,
निर्भीक निर्णय, हमारी साध,
प्रेरणा स्त्रोत, एक विश्वास ,
मर्यादा, परम्परा, शक्ति का संचन,   
है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,

अथक परिश्रम, कुशल निर्देशन,
सँचार, कल्पना, विचार मंथन,
सहज निर्णय, धैर्यवान श्रोता,
नवीन मार्ग, गहन चिंतन, 
है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,

करते प्रार्थना, सफ़ल भविष्य की,
जीवन के नव – सोपान आरंभ की,
स्वस्थ मन, विचार, व्यवहार की,
है यही, हमारा शुभ – चिंतन, 
है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,



सतींद्र कुमार बक्शी

 
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

सरल व्यक्तित्व, सुमधुर मुस्कान,
नहीं करा कभी क्रोधा का भान,
हर आगंतुक को, दिया सदा सम्मान,

करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

विलक्षण प्रतिभा, सुझावों की खान,
है उपलब्ध यहाँ, हर चिंता का समाधान,
समस्याओं के झंझावात में, 
एक सुदृढ़ चट्टान,

करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

एसेट के हित में दिया, 
इच्छाओं का बलिदान,
खाली हाथ न कोई आया, 
करता हुआ गुणगान,
' बस दो मिनट' का, 
एक संक्षिप्त व्याख्यान,
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

'विन–विन' स्थितियों को ,
हम न सके पहचान,
मर्यादाओं के अनुबंधों में, 
किया नहीं अपमान,
सच बोला, कड़वा लगा, 
शुभेच्छु गए सब जान,
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

हो पदार्पण, जीवन के तृतीय चरण में,
स्वस्थ रहे, गृहस्थ का सोपान,
पर, इसमें भी प्रथम है, परमेश्वर का गान,
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

देते हैं शुभकामना, करते हैं प्रार्थना,
सुखद बने भावी जीवन, पाएँ यह वरदान,
ले जाएँ यादें सभी, करें ज्ञान का दान,
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

प्रकाश चंद नौटियाल

न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
हो आलोकित जीवन पथ,
पूरी आशाएँ, स्वप्नों का सँसार,
संतुष्टि का भाव, समृद्धि का भंडार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
हों आसीन,  उन्नति के उत्तुंग शिखर पर,
प्रगति के पंखों के साथ,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
श्रम का संबल, बुद्धिमत्ताका आधार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
सहिष्णुता का सागर, धैर्य का आगार,
विवेचन की क्षमता, पूर्णता की आकाँक्षा,
कर्मठता की लगन, विश्वास का सँचार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
प्रेम के प्रतीक, निर्लिप्त भाव,
निस्वार्थ कर्म, अडिग वचन,
सौहार्द्रता का व्यवहार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
हो सुखद जीवन, मानवता का आधार,
अध्यात्म का चंतन, पल्लवित निधि,
नाम के अनुरूप, पूर्ण सँसार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश.

श्री एस. सी. कोहली

हैं हमें प्रिय, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, वे प्रियतम किसी और के हैं,

है हमें श्रद्धा, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, श्रद्धालु कई और हैं,

हैं, हमें भक्ति,  पर कह नहीं सकते,
क्योंकि इनके भक्त अनंत हैं,

है हम पर कृपा, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि सभी इनके कृपा – पात्र हैं,

हैं कुशल प्रबंधक , पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, यह महा प्रबंधक हैं

हैं लब्ध सम्मान, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि सम्मान अभी ज़ारी हैं,

हैं गहन चिंतक, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, मुद्रा से प्रसन्न चित्त हैं,

हैं दूर दृष्टा, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, परख बारीकियों की है,

अत:, रहने देते हैं, इन्हें कोहली साहब ही,
क्योंकि ये अपने हैं, यह अपने हैं,

 

श्री रवींद्र कुमार


करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

गौरवमय अतीत, स्वर्णिम भविष्य,
दायित्व मुक्त, अध्यात्म सुधार,
स्वस्थ चिंतन, गहन विचार,
करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

प्रशस्त पथ, एक प्रेरणा,
समर्पित जीवन, दृढ़ चरित्र,
अतिशय सँचार , कल्पना साकार,
करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

करते प्रार्थना, सुख, सम्पन्नता की,
देते शुभ कामना, स्वस्थ जीवन की,
लेते आशीष, सुखद समय की,
जीवन की स्वर्णिम सँभवनाएँ अपार,   
करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

पितरानुज रहें, प्रसन्नचित्त, सदाबहार,
स्वप्नों के इंद्र धनुष हों साकार,
हो रहे सेवा निवृत्त, फ़िर भी हैं कुमार,
करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

 रमेश गोयल


1. जीते रहें, हँसते रहें, स्वस्थ रहें सदा,
    रहमत ऊपर वाले की, है अपार सम्पदा,
    है अपार सम्पदा, मेहर उसकी निराली,
    समृद्ध रहे परिवार, रहे सर्वदा ख़ुशहाली,
    प्रिय रमेश के जन्मदिन पर, यह हम गाते,
    उनकी मुसकान सदा, हमारा दिल जीते .

2. एक मीत पाए, शुभकामनाएं हमारी,
     प्यारी उसकी मुस्कान पर, हम जाते वारी,
    हम जाते वारी, बारम्बार उसे निरखाते,
    टकटकी लगा, आशीष उस पर बरसाते,
    शुभकामनाएं उसे दें, हर्ष का अतिरेक,
    न कोई दूजा है, निराला रमेश हमारा एक.

नत्थू लाल

मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,

मैरीन सर्वे के संत, 
आपने किया अजीब कमाल,
करी प्रदान नई दिशा, 
फूँकी उसमें जान,
स्थिर आधार शिला से, 
है स्थापित वर्तमान,
दूर दृष्टि, अथाह ज्ञान से, 
हल हुए सवाल,
मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,
ऑफ़शोर वर्क्स के संत, 
आपने किया अजीब कमाल,
कुशल नेतृत्व, सक्षम प्रशासक, 
सरल विचार,
संवेदन शील, मित्रवत स्वाभाविक व्यवहार,
गहन चिंतन, प्रसन्न मुद्रा, 
तकनीक बेमिसाल,
मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,
ई. एस. के संत, 
आपने किया अजीब कमाल,
अपार स्नेह, अनुपम निर्णय, 
अटूट विश्वास,
प्रगाढ़ श्रद्धा, स्पष्टा वक्ता, 
सुमधुर मुस्कान,
है आशा, शीघ्र होंगे हल, 
अनसुलझे सवाल,
मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,
ओ.एन.जी.सी. के संत, 
आपने किया अजीब कमाल,
गरिमामय अतीत, सुखद स्मृति, 
स्वर्णिम भविष्य,
अनसोचे सपने हों साकार, 
जिएँ स्वस्थ जीवन,
व्यस्त क्षणों को करेंयाद, 
थोड़ा समय निकाल,
मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,
मैरीन सर्वे के संत, 
आपने किया अजीब कमाल.

प्रदीप कुमार दलाल
काटें केक, जलाएँ दीप, स्वागत है प्रदीप.
सौम्य मधुर स्वभाव, मृदु मुस्कान,
उन्नत विचार, प्रेम का आगार,
आपका आभार, स्वागत है कुमार,
काटें केक, जलाएँ दीप, स्वागत है प्रदीप.
गहन चिंतन, कुशल प्रबंधन,
सहयोग का आधार, दुर्लभ प्रवाल,
हल करे सवाल, स्वागत श्री दलाल,
काटें केक, जलाएँ दीप, स्वागत है प्रदीप.
पूरे साठ वसंत, उज्जवल भविष्य,
दें मार्ग दर्शन, रहें नहीं सवाल,
आज देते शुभ कामना, 
श्री प्रदीप कुमार दलाल
काटें केक, जलाएँ दीप, स्वागत है प्रदीप.

शिव चरन गुप्ता

कस्तूरी किरन, फैलाएँ शिव चरन,
अल्प सँपर्क, दीर्घ छाप,
कुशल नेतृत्व, अद्भुत क्षमता,
रोष रहित, मित्रवत व्यवहार,
कस्तूरी किरन, फैलाएँ शिव चरन, 
हों सफ़ल नव दायित्व में,
आशाएँ पूर्ण, स्वप्न साकार,
स्वर्णिम भविष्य, स्वस्थ परिवार,
कस्तूरी किरन, फैलाएँ शिव चरन,

हे ! जल, थल, नभ के स्वामी, करना तनिक विचार,
मेरे मरीन सर्वे पर भी रखना दृष्टि उदार ,
कस्तूरी किरन, फैलाएँ शिव चरन.

विजयेंद्र कुमार मित्तल
हैं हम नत मस्तक आज , मान्यवर श्री मित्तल ,
दृढ़ आस्था , अटूट विश्वास ,
विगत अतीत , एक इतिहास ,
कठोर परिश्रम , कुशल प्रबंधन ,
परिणाम रत , अडिग विचार , 
हैं हम नत मस्तक आज , मान्यवर श्री मित्तल ,
स्पष्ट वक्ता , निर्भीक नेता ,
भविष्य दृष्टा , वर्तमान सम्राट ,
लक्ष्य प्रेरित , अनवरत प्रयास ,
दायित्व मुक्त , स्वर्णिम सँसार ,
हैं हम नत मस्तक आज , मान्यवर श्री मित्तल ,
देते हैं शुभकामना , करते हैं प्रार्थना ,
हों उपलब्ध हमें , मार्ग दर्शन हेतु ,
करें भ्रमण , तीर्थाटन विदेशों में ,
रहें स्वस्थ , मुदित्, तनाव मुक्त , 
हैं हम नत मस्तक आज , मान्यवर श्री मित्तल ,