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बरसों से हम कर रहे, विविध वस्तु उपयोग,
नाना लोग बना रहे, करते शेष प्रयोग.
जमे हुए विश्वास को, और जमाते लोग,
उठा इसी का फायदा, घटिया बेचें भोग.
दिखने में सब एक से, भरा दिखे बाजार,
मजबूरी में ले रहे, बेचारे लाचार.
निर्माता के नाम से, बिकता ज्यादा माल,
उपभोक्ता भी ना करें, उस पर कोई सवाल.
खपत किसी सामान की, करती हद को पार,
नकली माल उतार कर, बढ़ा रहे व्यापार.
ऐसे ही सामान को, कहें ब्रांड का नाम,
हो समान उपयोगिता, डुप्लीकेट कम दाम.
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झगड़ों को सुलझाइए, कर आपस में बात,
घर की बात वहीं दबे, बाहर झंझावात.
कही बात का ध्यान दो, दिल पर कहीं मलाल,
नहीं क्रोध हो तनिक भी, नैन कीजिए लाल.
काफी मुश्किल हो रही, लिखती पुलिस रिपोर्ट,
पैसों की माया चले, जाओ कोई कोर्ट.
झगड़ा जब हद से बढ़ा, गए अदालत पास,
निकला सालों का समय, पेशी करें उदास.
दूजा दल मजबूत हो, सही गलत भी बात,
अपने पक्ष न्याय करे, रिश्वत नहीं लजात.
जज भी अब खोने लगे, जनता का विश्वास,
नोटों के भंडार से, संविधान का नास.
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काम जरूरी है अगर, सुखी रहे परिवार,
रोजी रोटी खा सकें, हो प्रसन्न घर-बार.
पत्नी, बच्चे देखते, रोज आपकी राह,
करें सुरक्षित वापसी, वेतन पा हर माह.
रखूं स्वयं का संतुलन, ऑफिस या परिवार,
घर पर घर की बात हो, जॉब में हो विचार.
घर पर पत्नी को मिले, आदर ऑफिस बॉस,
पूरा ध्यान जहां रहें, लें राहत की साॅंस.
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डा. श्रुति का कैसे करें, हम दिल से आभार,
उनसे मिल कायल हुए, लख उनका व्यवहार.
कुशल चिकित्सक ही नहीं, इक अच्छी इंसान,
सदा उनका भला करें, लगें स्वयं भगवान.
उनके सहयोग को सदा, करते हैं हम याद,
आप भी कृपा करती रहें, यह है फरियाद.
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मोबाइल की सूचना, देती हमको ज्ञान,
अधिक जानकारी कहे, बढ़ा तुम्हारा मान.
मोबाइल हाज़िर हुआ, पा कर पूरी छूट,
अनियंत्रित उपयोग से, रहा पसीना छूट.
बाल आजकल हो गए, अधिक ही समझदार,
मोबाइल में ढूंढते, घूम घूम संसार.
आवश्यक है आजकल, पढ़ने में उपयोग,
नजर बाल हित में रखें, लगे नहीं यह रोग.
मूल नेट उपलब्ध हो, पढ़ना हो आसान,
इधर उधर की फालतू, बटा रही हैं ध्यान.
उत्कंठा से सीखते, हर पल, दिन नव बात,
गलती अभिभावक करें, बच्चों को सौगात.
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भोजन, वस्त्र, मकान की, मूल जरूरत यार,
पैसा सबको चाहिए, खान पान व्यवहार.
लगे नौकरी या करें, कोई भी व्यापार,
कवि भी कविता ना करे, बिन पैसा आहार.
रहा चलन हर देश में, कागज के हों नोट,
रखने में आसान हों, लें खरीद कुछ वोट.
बढ़ी घूस को कम करे, जब कम आएं नोट,
छोटे से व्यापार हो, नहिं निर्धन को चोट.
लेन देन डिजिटल रहे, बड़े नोट हों बंद,
निकले धन बैंक से, काले धन पर फंद.
राजनीति कुछ साफ हो, कम हो भ्रष्टाचार,
समय समय पर बंद हो, नोट चलन व्यापार.
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नया ज़माना आज का, पैसे का सब खेल,
पाँच दिवस क्रिकेट चले, चलती रेलम पेल.
पगलाए से घूमते, कर लें टिकट जुगाड़,
कैसे वहाँ पहुँच सकूँ, दुनिया जाए भाड़.
टेस्ट मैच में पाँच दिन, हो जाते बरबाद,
इयर फोन चिपका रहे, बैट्स मैन जल्लाद.
जल्दी हुई, खोज लिया, उसका एक विकल्प,
बीस पचास ओवर का, फिर रच गया प्रकल्प.
आई. पी. एल. ने किया, एक नया अंदाज़,
अधिक टीम के खेल का, चलता खूब रिवाज़.
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लगा बुढ़ापा, चल पड़े, करने तीरथ धाम,
जीवन साथी साथ में, भज लो हरि का नाम.
आप अकेले ना रहो, रखो दोस्त कुछ साथ,
मिल कर टूर बनाइए, अल्प काल की बात.
याद वहाँ की कुछ रखें, बच्चों के उपहार,
हो लोकप्रिय, विशेषता, दिखे आपका प्यार.
घटना जुड़तीं भ्रमण से, स्मृति के अंबार,
दादी, नानी दे रही, प्रिय अपने संस्कार.
नई जगह घूमें, फिरें, करें हास, परिहास,
रोग पुराने भूल कर, नई लीजिए साँस.
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बाद नौकरी के मिली, धन राशि एकमुश्त,
सदुपयोग इस राशि का, करता हालत पुख़्त.
सोच समझ कर कीजिए, इस राशि का निवेश,
सारा पैसा हो अलग, थोड़ी थोड़ी ऐश.
आमदनी नियमित रहे, पूर्व खर्च से सोच,
नहीं फालतू कुछ मिले, किसे बनाएं कोच.
बचत बैंक, शेयर रखें, कुछ आवश्यक फंड,
दान नहीं सब कुछ करें, रहे हाथ में ठंड.
अपने बच्चों को करें, मन से पूरा प्यार,
पड़े जरूरत मदद दें, मन माफिक उपहार.
अपने खर्चों के लिए, रोकें अपने हाथ,
पूरे सब अरमान हों, इतना पैसा साथ.
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चलन हुआ है आजकल, मुद्रा का व्यापार,
पैसे से खरीद सकें, खान, पान संसार.
कुछ जरूरत सब की हैं, जीवन के आधार,
रोटी, कपड़ा साथ हो, रहने को घरबार.
खाद, बीज, पानी मिले, टाइम से बरसात,
अमन, शांति हो राज में, मचे नहीं उत्पात.
सभी नागरिक पा सकें, मूलभूत अधिकार,
शासन का दायित्व है, हो कोई सरकार.
है जरूरी इसी लिए, बढ़ें न इनके दाम,
कीमत मिले किसान को, हाड़ किए हराम.
सीमित रखें जरूरतें, जितनी हो दरकार,
नहीं खरीदें फालतू, करें नहीं बेकार.
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करो नौकरी फील्ड में, पाओ अनुभव ज्ञान,
ऑफ़िस में जम बैठते, लगते सब नादान.
बेस बैठ निर्देश दें, जो मुश्किल से जूझ,
कैसे हल निकाल सकें, चलता दिमाग सूझ.
कई जगह घूम कर, जानो सब भूगोल,
विषम परिस्थिति में बने, यारी का माहौल.
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घूम घूम कर देखिए, आस पास संसार,
हाल चाल सब के मिलें, बढ़ता जाए प्यार.
हो पैसा यदि पास में, घूमें देश विदेश,
साथ तुम्हारा बदन दे, आए काम निवेश.
मजा पर्यटन में किया, घर बाहर की सैर,
संबंधी भी साथ हों, भूलें सारा बैर.
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पशु चाहे कोई रहे, बच्चों के प्रति नेक,
कितने इसके रुप हों, होती ममता एक.
संकट में बच्चे दिखे, सदा मदद तैयार,
सारे खतरों से भिड़े, ऐसा माँ का प्यार.
मानव हों तो छोड़िए, अपना अटल प्रभाव.
जो भी हम से हो सके, दया, धर्म का भाव.
ठेके पर ही हो गए, सब सरकारी काम,
बिन देखे बिल पास हो, साहब का आराम.
उन्हें कमीशन मिल गया, नहीं फ़िकर की बात,
*वर्क फ़्रॉम होम* चलता, ठेके की सौगात.
असर गालियों का नहीं, या पेपर की न्यूज़,
पोस्ट फेसबुक व्यर्थ है, ई.डी. करती फ़्यूज.
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करे नहीं जब मन कभी, जाए कौन बाजार,
मोबाइल हो पास में, उपयोगी हथियार.
एक फोन से आ सके, अपना सब सामान,
पैसे भी दे दीजिए, तुरत होय भुगतान.
खाने से सोने तक, घर से करो खरीद,
जमे नहीं यदि तनिक भी, है वापसी मुफीद.
कई कंपनी कर रहीं, अपना यह व्यवसाय,
सारा खर्च निकाल कर, बहुत कमाते आय.
एकाधिकार है नहीं, जो चाहे आ जाय,
आपस की प्रतिद्वंदिता, बढ़ा रही व्यवसाय.
ग्राहक परम पुनीत है, उसका रखिए ध्यान,
रुष्ट अगर वह हो गया, करे नेट कल्यान.
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आज, मैं रिटायर हो गया,
नौकरी से मुक्त हो गया,
दायित्व से बरी हो गया,
बॉस से आज़ाद हो गया,
आज, मैं रिटायर हो गया.
नहीं अब टारगेट का खतरा,
ना *पी. ए. आर.* का जोखिम,
ना समय से ऑफिस की चिंता,
आज, मैं रिटायर हो गया.
ना हड़ताल की धमकी,
ना जूनियर की शिकायत,
ना साथियों के ताने,
आज, मैं रिटायर हो गया.
ना ट्रैफिक का झंझट,
ना पार्किंग का झमेला,
ना लिफ़्ट की वेटिंग,
आज, मैं रिटायर हो गया.
अब, लोगों से मिलूँगा,
उत्सवों में जाऊँगा,
अपनी मर्जी का काम करूँगा.
आज, मैं रिटायर हो गया.
आज, मैं रिटायर हो गया.
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तेल हित सागर चले, करने देश विकास,
जान गँवा शहीद हुए, जिनसे बँधती आस.
एक दुखद घटना घटी, पहले पंद्रह साल,
वीर समाए काल में, उठी लपट विकराल.
प्लेटफ़ॉर्म स्वाहा हुआ, नहीं किसी का हाथ,
आशंका किंचित नहीं, घटना उनके साथ.
था बी.एच.एन. जला, लगी भयंकर आग,
सागर तट से दूर था, कैसे जाता भाग.
नौका से टक्कर लगी, उठा शोर विकराल,
चुस्ती से काबू किया, तुरत बुझाई ज्वाल.
तेल कुआँ कैसे बचे, कम होगा नुकसान,
देखा खतरा सामने, सैनिक तेल महान.
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आओ, आज को यादगार बनाएँ.
मुग्धाँकित की वर्षगाँठ मनाएँ,
एक साथ सब जन मिल जाएँ,
राँची, मुंबई पुणे में जमा हो जाएँ.
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
प्रानिका पहली बार सामने आए,
मम्मी पापा से लाड़ लड़ाए,
दादा दादी का प्यार वह पाए,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
*फ़्लेचाज़ो* में खाना खाएँ,
अनुभव नया एक ले पाएँ,
घर से वहाँ तक पैदल आएँ,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
आते ही पहले स्वागत पेय पाएँ,
स्टार्टर खूब दबा कर खाएँ,
मनचाहे व्यंजन आॅर्डर पर बनवाएँ,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
पनीर टिक्का, कवाब चबाएँ,
शेज़वान से जी ललचाएँ,
फ्राइड मक्की कुर-कुर खाएँ,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
चाट से चटोरी जीभ मनाएँ,
स्टाइल से गोलगप्पे खाएँ,
पास्ता, पिज़्ज़ा के काउंटर पाएँ,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
गरम जलेबी मन को भाएँ,
पेस्ट्री, केक जी भर कर खाएँ,
मिनी गुलाब जामुन, हलवा लाएँ,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
सामिष, निरामिष थाल सजवाएँ,
मेन कोर्स न जी भर कर खा पाएँ,
फल, सलाद न मन को लुभाएँ,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
पान की आइस क्रीम खाएँ,
अपना पिज़्ज़ा स्वयँ पकाएँ,
अच्छा सा फीडबैक दे आएँ,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
काॅरपोरेट डिस्काउंट ले पाएँ,
तीन के बाद चौथी बार मुफ़्त में खाएँ,
नौ लोगों संग अगला मुफ़्त में खाएँ,
आओ, आज को यादगार बनाएँ.
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मेंहदी मुफ़्त लगवाइए, पा पानी, चाय, सम्मान,
अतिथि सत्कार की परंपरा, टाटा ग्रुप की पहचान,
टाटा ग्रुप की पहचान, सभी उद्यमियों का सिरमौर,
श्रद्धा से सिर नत हो, व्यवसाय न कोई और,
गौरवशाली भारत की उन्नति, लक्ष्य विकास, समृद्धी,
तनिष्क शो रूम में आ कर, खूब लगवाएं मेंहदी.
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ब्राइट हॅराइज़न नाम से, उपजे अंतरभाव,
अंग्रेजी में नाम है, पर, मधुर संस्कृति प्रभाव,
मधुर संस्कृति प्रभाव, बाल मन बने कुशल,
गणित, दर्शन, भाषा, साहित्य में खिले शगल,
अंक, आकृति, आकार में, विश्वास जगाए अन्तर्मन,
नव ज्ञान अर्जन के लिए, आइए ब्राइट हॅराइज़न.
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हड्डी टूटी जुड़ रही, पा राॅड, बोल्ट का योग,
कुशल डाॅक्टर ने दे दिया, अपना सब सहयोग,
अपना सब सहयोग, खाओ गजक और केला, नियमित दवा और फ़िजियोथेरेपी, है इलाज अलबेला,
अधिक कैल्शियम अचूक है, साबुत दिखेगी टूटी हड्डी,
रखें सावधानी, ताकि फिर से न टूटे हड्डी.
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कार्मिक की व्यथा
गला दाब के शरीफ़ का, लेते टैक्स वसूल,
अपने बारे में कहें, भूलें सभी उसूल,
भूलें सभी उसूल, एकमत सब तब हो जाते,
उनके वेतन, पेंशन, निर्विरोध बढ़ जाते,
लोकतंत्र की आस्था, करो न कोई गिला,
न जाने कब कट जाए, वेतनभोगी का गला.
वेतन संशोधन की प्रतीक्षा, करते सालों साल,
माँग अनसुनी होती रही, जब तक न करी हड़ताल,
जब तक न करी हड़ताल, निकाले कई जुलूस,
आयोग बना कर टाल रहे, श्रमजीवी को चूस,
राजतंत्र, ख़ुदगर्ज़ी की पराकाष्ठा, विसंगतियों का प्रबंधन,
अपनी बारी पर मौन, खटकता मज़दूर का वेतन .
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ई.सी.जी. से मिल रहा, सारे दिल का हाल,
दसों इन्द्रियाँ बता रहीं, अपने अपने हाल.
अपने अपने हाल, समेकित संकेत बताते,
हालत दिल की, तालमेल से समझाते,
एक साथ सब दिख जाएँ, तो बंदा चंगा लगता जी,
स्वास्थ्य हृदय का बतलाता, यह अनुपम ई.सी.जी.
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फ़्रैक्चर सीधे हाथ का, देता रहा नव आयाम,
थोड़े से अभ्यास से, लगे बाएँ हाथ के काम,
लगे बाएँ हाथ के काम, गर, हो विश्वास अटल,
आस्था से बनते सब काम, खुल जाते बंद पटल, इच्छा शक्ति प्रबल जब, होता जीवन अक्षर,
विपदा अल्प कालीन, सहन करो जब हो फ़्रैक्चर.
------
अजब कशमकश में है,
डेंटिस्ट पत्नी का पति ,
एक बीवी, जो मुँह बंद रखने को बोलती है,
और, दूसरा उसका डॉक्टर,
जो मुँह खोले रहने को कहता है.
-----------
अटके काम बना रही , सबकी प्यारी घूस ,
दुर्बल की मज़दूरी का फ़ायदा , सभी रहे हैं चूस ,
सभी रहे हैं चूस , आनंद अनूठा पाते ,
सत्ता , पद की लालसा में , घूस से काम कराते ,
जो बनते ईमानदार , उनको सब देते झटके ,
अंत भले का भला रहेगा , कितने ही रोड़े अटके .
-----
हवा निकल जाती है , टायर बर्स्ट होने के बाद ,
हेकड़ी निकल जाती है, रिटायर्ड होने के बाद .
नौकरी में छोटे , बड़े , कुछ ख़ास , कुछ आम मिले ,
बाद में सारे सब्ज़ी लेते बाज़ार में , सरे आम मिले .
कहाँ तक बयाँ करें , शानो शौकत , अपनी नौकरी के ,
अब तो बस घाव बाकी हैं , जवानी के निशानों के .
कभी तो थे चर्चे हमारे भी , सर ज़मीं पर ,
अब वो बात कहाँ , उम्र के आगे वो बेअसर निकले .
ज़िंदगी ने सिखा दिया , तनहा सबक ऐसा ,
तहज़ीबो इश्क के सामने , सब बेसबक हो निकले .
-:
पुरस्कार:-
प्रोत्साहन की नई विधा,
हुई शुरू इस बार,
ग्रुप अवार्ड के नाम से , पुलकित है दरबार,
हों पूरे प्रोजेक्ट सकल,
सफ़लता चूमे द्वार,
खुशियों से झूमे सदा,
ई. एस. का सँसार,
टीम भावना पालित हो,
कल्पनाएँ हों साकार,
मैरीन सर्वे को मिले,
पुरस्कार हर बार.
- : सेवा निवृत्ति : -
सेवारत रह कर, पद, नाम, यश, धन का
अर्जन किया,
अनुभव
व्यक्तित्व का विकास किया,
सेवा –
लाभ लिए, भविष्य को सुरक्षित किया,
समयाभाव, अपूर्ण
आकाँक्षाएँ, अनुभव कीं .
सेवा निवृत्ति
पर दृष्टिकोण में परिवर्तन संभव है,
समय ही समय है,
कल्पना की उड़ान है,
मानवता की सेवा का अवसर है,
इसलिए कुछ लोग, बहुत
काम कर लिया, अब आराम करेंगे,
क्या सारी ज़िंदगी काम ही करते रहेंगे,
सेवा में काफ़ी अर्जन कर लिया,
‘सब भगवान की
इच्छा है’ का
विचार रखते हैं,
पर, कुछ लोग,
साँसारिक धर्मों में व्यस्त रहते हैं,
अँशकालिक कार्य करते हैं,
अनुभव का लाभ उठाते हैं,
कन्सलटैंट बन जाते हैं,
इनके अतिरिक्त, कुछ लोग, जीवन
दर्शन का मर्म समझते हैं,
अध्ययन – अध्यापन करते हैं,
सुख शाँति से आत्मावलोकन करते हैं,
स्वयँ का विकास व समाज का कल्याण करते हैं,
सेवा निवृत्त
लोग, सेवा रतों के अग्रज हैं,
समाज का परिपक्व, महत्वपूर्ण अंश
हैं,
श्रद्धा, सम्मान के पात्र हैं,
सेवा रतों को भी, एक दिन
सेवा निवृत्त होना है,
इसको ध्यान में
रख कर, सहयोग दें, अनुभव का लाभ
लें,
--------------
विरोध के स्वर
राजभाषा अधिकारी
भाषाओं की उलझन में सिमट सिमट, भावों का किया दमन ,
उत्तर – दक्षिण की सीमाओं से चिपट चिपट , आवेशों का किया आलिंगन ,
मिथ्या भ्रम में भटक भटक , घृणा का किया विष वमन ,
किए मुखर विरोध के स्वर , रहे कलुषित माँ के चरन
उत्तर – दक्षिण की सीमाओं से चिपट चिपट , आवेशों का किया आलिंगन ,
मिथ्या भ्रम में भटक भटक , घृणा का किया विष वमन ,
किए मुखर विरोध के स्वर , रहे कलुषित माँ के चरन
हाय ! हाथ न आया कुछ भी , घोर निराशा के कुछ क्षण ,
भान हुआ अपमान का जब , आत्म ग्लानि से भारी मन ,
किया अनुभव , महत्व राजभाषा का , उल्लास से है कंपित तन ,
हैं उद्यत , ज्ञान विकास में , समर्पित सभी कावेरियन ,
नहीं व्यक्त विरोध कहीं भी , मिला हमें भरपूर समर्थन ,
अब यह दायित्व हमारा है, अपनाएँ, दें, तन , मन , धन .
भान हुआ अपमान का जब , आत्म ग्लानि से भारी मन ,
किया अनुभव , महत्व राजभाषा का , उल्लास से है कंपित तन ,
हैं उद्यत , ज्ञान विकास में , समर्पित सभी कावेरियन ,
नहीं व्यक्त विरोध कहीं भी , मिला हमें भरपूर समर्थन ,
अब यह दायित्व हमारा है, अपनाएँ, दें, तन , मन , धन .
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अभियाँत्रिकी सेवाएँ
अभियाँत्रिकी सेवाएँ
कल्याणकारी शिव,
ले आए नवजीवन, छाई अप्रतिम बहार,
ई. एस. को तो मानों मिल गया, एक नया अवतार,
नवरतन जी.एम. है कुशल,
सक्षम है दरबार,
मरीन सर्वे है,
समस्त परियोजनाओं का आधार,
अनिल, अंजन, आलोक, ई. एस. के तीन इक्के,
संभव कर दें हर काम,
धुन के पक्के,
मुकेश, दास, वर्की, विजय, बढ़ें राम के साथ,
मरीन सर्वे के सहयोग से,
डालें हाथ में हाथ,
क्यों न मिले सफ़लता,जब
ई. ए. हो बी. एस. कुमार,
फ़ाइनल मुहर फ़ाइनेंस की,
लगाएँ महेंद्र कुमार,
कल्याणकारी शिव,
ले आए नवजीवन, छाई अप्रतिम बहार,
ई. एस. को तो मानों मिल गया, एक नया अवतार,
ग्यारह वर्षों में सीखा काफ़ी कुछ, काँट्रैक्ट का पाया
सार,
नया अनिभव, रोमाँचक
अनुभूति, स्नेह अपार,
सहकर्मियों की श्रद्धा,
अटूट विश्वास, हार्दिक प्यार,
इंटीग्रेटेड वैसेल,
सर्वेक्षक, या गहरे पानी में डालें पाँव,
उन्नति करे मरीन सर्वे सदा, सुमेश कुमार की छाँव,
गलतियों की माँगूं क्षमा, आपको देता साधुवाद,
उत्सव के लिए,
आयोजकों को विशेष धन्यवाद,
कर सका संपन्न कार्य,
अपनी क्षमता के अनुसार,
करता नमन सभी को, आज दिनेश कुमार.
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डॉक्टर
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
वह साँसारिक कष्टों का त्राता है,
मरीज़ पीड़ा से कराहता आता है,
तुरत कष्ट निवारना चाहता है,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
अनुनय, विनय, प्रार्थना अवलम्ब है,
बिल, फ़ीस, ख़र्च की शंका निराधार है,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
डॉक्टर की सेवा, कर्मठता, निष्ठा,
जगाती है बीमार में आशा – ज्योति,
करती है, स्वास्थ्य का नव सँचार,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
स्वास्थ्य लाभ के उपरान्त, है दृष्टिकोण बदला,
शीघ्र वापसी की जागी प्रबल इच्छा,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
लगे डॉक्टर की नीयत पर प्रश्न चिह्न,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
हर स्थिति में डॉक्टर, मरीज़ का चिंतक है,
उसके स्वास्थ्य का शुभचिंतक है,
नव-जीवन का दाता, पालक है,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
अत: हम हों, हृदय से, डॉक्टर के आभारी,
भले ही फ़ीस लगे भारी,
आख़िर दूर की है बीमारी,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है .
वह साँसारिक कष्टों का त्राता है,
मरीज़ पीड़ा से कराहता आता है,
तुरत कष्ट निवारना चाहता है,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
अनुनय, विनय, प्रार्थना अवलम्ब है,
बिल, फ़ीस, ख़र्च की शंका निराधार है,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
डॉक्टर की सेवा, कर्मठता, निष्ठा,
जगाती है बीमार में आशा – ज्योति,
करती है, स्वास्थ्य का नव सँचार,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
स्वास्थ्य लाभ के उपरान्त, है दृष्टिकोण बदला,
शीघ्र वापसी की जागी प्रबल इच्छा,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
लगे डॉक्टर की नीयत पर प्रश्न चिह्न,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
हर स्थिति में डॉक्टर, मरीज़ का चिंतक है,
उसके स्वास्थ्य का शुभचिंतक है,
नव-जीवन का दाता, पालक है,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है,
अत: हम हों, हृदय से, डॉक्टर के आभारी,
भले ही फ़ीस लगे भारी,
आख़िर दूर की है बीमारी,
दैहिक ताप में डॉक्टर याद आता है .
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