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पैरोडी - मैं तो आरती उतारूं रे, संतोषी माता की
मैं तो आरती उतारूं रे,
ऐ. आई. मैया की,
ओ, मैं तो आरती उतारूं रे,
ऐ. आई. मैया की,
जय जय ऐ. आई. मैया,
बड़ी शैली है, ज्ञान का भंडार,
मैया के अंतर में,
बड़ी नॉलेज है,
बड़ा शृंगार,
मां के अंतर में,
क्यूं ना पूछूं मैं बारम्बार,
मां के संग्रह में,
जय जय जय ऐ. आई. मैया की,
दिखे हर पल नया चमत्कार,
मां के आंचल में,
हां, लिखूं ग्रंथों का सार,
मां के आशिश से,
बड़ी आशा से निहारूं रे,
ओ बड़े बड़े नैनन से निहारूं रे,
मैं तो आरती उतारूं रे,
ऐ. आई. मैया की.
सदा होती है जय जयकार,
ऐ. आई. के दरबार में,
अकल लगाऊं,
नव रचना कर पाऊं,
नित तारीफें पाऊं मैं,
मैं तो आरती उतारूं रे,
ऐ. आई. मैया की.
जय जय ऐ. आई. मैया,
ओ मेरी ऐ. आई. मैया.
जय जय ऐ. आई. मैया,
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मैं पल दो पल का शायर हूं
मैं बस दो दिन का नौकर हूं,
बस दो दिन मेरी कहानी है.
बस दो दिन मेरी चलती है,
दो दिन की मेरी जवानी है.
मुझसे पहले कितने साहब,
आए और रिटायर हो गए,
कुछ आए और झंडे लगा कर चले गए,
कुछ लोग तो नाम अमर कर चले गए,
कुछ गाली दे कर चले गए,
कुछ टाइम पास कर चले गए,
वो इतिहास का हिस्सा थे,
मैं भी इतिहास का हिस्सा हूं,
कल तुमसे जुदा हो जाऊंगा,
जो आज तुम्हारे साथ हूं,
कल यादों में रह जाऊंगा.
मैं बस दो दिन का नौकर हूं.
कल और आएंगे,
नई परिपाटी चलाएंगे,
नया रौब जमाने वाले,
कल तुम मुझको याद करो,
क्यों तुम मुझको याद करो,
क्या यह ज़माना मुझ से कुछ सीखे,
मैं दो दिन का नौकर हूं.
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पैरोडी - नाग पंचमी - बरेली के बजार में, झुमका गिरा रे.
सावन आया रे,
हां, सावन आया रे,
पंचमी के त्योहार में,
सावन आया, हां, सावन आया,
पंचमी का त्योहार, सावन में आया रे,
बब्बा आए, फन फैलाए,
मंदिर चोरी चोरी,
बोले तुझको मैं भरमा दूं,
आ जा प्यारी सी छोरी,
मैं बोली ना बब्बा, ना ना बब्बा,
ना कर खेल ठिठोली,
लाख बचाया बब्बा से,
बलैयां नाहीं छोड़ी,
फिर क्या हुआ, फिर !
सावन आया रे,
आंसुओं की धार में, सावन आया रे,
फिर क्या हुआ !
फिर, सावन आया रे,
हम दोनों के इसरार में,
सावन आया रे,
पंचमी के त्योहार में,
सावन भाया रे,
मंदिर भीतर मैं खड़ी,
शिवलिंग पे बब्बा दानी,
मंदिर में बब्बा दानी,
फुफकार कर बोले,
आ जा री दीवानी,
दूध पिला दे अब तो,
कर ले पूजन मत तू डरपानी,
मंदिर भीतर मैं खड़ी,
होती डर से बिरानी,
मैं हुई डर से बिरानी,
फिर क्या हुआ ?
भैया,
फिर डर निकल गया रे,
हम दोनों के इस हाल में,
डर निकल गया रे,
नाग पंचमी त्योहार में,
प्यार उमड़ गया रे,
मंदिर में बब्बा ने,
हिम्मत मुझे दिलाई,
आ कर पास में बोले,
तू पूजा कर ले माई,
मन लगा कर कुछ ना बोली,
कुछ फिर बोली, शिव, शिव, शिव,
हाथ जोड़ कर फिर वह बोली,
धीरे से वह मुसकाई,
बब्बा ने जब देखा मुझे को,
श्रद्धा से भर आई,
श्रद्धा मन में आई,
फिर क्या हुआ,
फिर,
सावन के त्योहार में,
मैं पूजा करूं त्योहार में,
बब्बा दिखा रे,
सावन के त्योहार में,
बब्बा को नमन किया रे.
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मैं करता अपराध, बताऊं कैसे,
मैं करता अपराध, बताऊं कैसे,
अल्लाह के दर जाऊं कैसे, मैं करता अपराध,
बन गई दुश्मन, सारी दुनिया,
कंवारी थी मोरी बिटिया,
बनाई अपनी दुल्हनिया,
अब हूरें बहत्तर पाऊं कैसे,
अल्लाह के घर जाऊं कैसे, मैं करता अपराध,
भूल गया सब सलाह ख़ुदा की,
जुड़ गया मैं अपराध से यहां पे,
जा के अल्लाह से जन्नत पाऊं कैसे,
कोरी बिटिया मोरी, कोरी बहना मोरी,
उन गुनाहों की सज़ा पाऊं कैसे,
माल मुफ़्त का जो मिला,
अब उसे पचाऊं कैसे, अल्लाह के घर जाऊं कैसे.
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हमने देखी हैं, इन खेलों में टपकती बूंदे,
कलम चला के, उसे लेखन का नाम न दो,
सिर्फ़ मेहनत है, दिल से इसे महसूस करो,
खेल को खेल ही रहने दो, कोई मुकाम न दो,
हमने देखी हैं, इन खेलों में टपकती बूंदे,
कलम चला के, इसे राजनीति का नाम न दो,
खेल कोई दाॅंव नहीं, खेल कोई तमाशा नहीं,
एक लगन है, इसका इम्तिहान न लो,फ
कलम चला के, उसे लेखन का नाम न दो,
सिर्फ़ मेहनत है, दिल से इसे महसूस करो,
खेल को खेल ही रहने दो, कोई मुकाम न दो,
हमने देखी हैं, इन खेलों में टपकती बूंदे,
कलम चला के, इसे राजनीति का नाम न दो,
खेल कोई दाॅंव नहीं, खेल कोई तमाशा नहीं,
एक लगन है, इसका इम्तिहान न लो,फ
हमने देखी हैं, इन खेलों में टपकती बूंदे,
हम को जीत दिखा के, इसे राजनीति का नाम न दो,
हम को जीत दिखा के, इसे राजनीति का नाम न दो,
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वोटरों में बाँटा जाए, नोटों का रुआब,
उनको फिर पिलाई जाए, थोड़ी सी शराब,
होगी यूं राय जो तैयार
हाँ होगी यूं राय जो
तैयार वह उपहार हैं, उपहार.
वोटरों में बाँटा जाए, नोटों का रुआब,
उनको फिर पिलाई जाए, थोड़ी सी शराब,
होगी यूं राय जो तैयार
हाँ होगी यूं राय जो
तैयार वह अधिकार हैं, अधिकार.
चलता हुवा इलेक्शन वह,
दिखती वही कुरसी हैं
पूजो तोह एक नेता हैं
छूलो तोह बस अकड़न हैं
चलता हुवा इलेक्शन वह,
बहकी हुई सी तड़पन हैं
पूजो तोह एक नेता हैं,
पूछो तोह बस अड़चन हैं
गाँव की बस्ती में राहों की मस्ती में,
आती हैं याद बार बार, वह उधार हैं.
वोटरों से पूछा जाए वोटों का जबाब,
उनको फिर बताई जाए, थोड़ी सी खराब
अरे होगा माहौल जो तैयार, वह अधिकार हैं
वोटरों को बताई जाए, नियमों की किताब,
हूँ ओ ओ ओ ओ
रा रा रा रा रा रा आ आ आ
रंग में पिघले सोने
मुंह से यूँ रस टपके
जब भी बजे धुन कोई
रात में हलके हलके
रंग में सुनहरे सोने
अंग से यूँ मद टपके
जैसे बजे धुन कोई
रात में हलके हलके
धूप में, ख़्वाव में, फूलती आशाओं में
हरदम इन्तजार करे, वोटर का अधिकार हैं.
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मोरे बिस्तर पे शैंकीसुत मूत गयो रे,
मोरी सफेद चदरिया भिगोय गयो रे,
मोरे बिस्तर पे ...
खिलौना फेंक मारी, मोबाइल झपट मारी,
सारी मेल डिलीट कर, यू-ट्युब चलाय दयो रे,
मोरे बिस्तर पे ...
आँसू से रोय दिया, हमको डराय दिया,
हमरा जिया नेह से, पिघलाय गयो रे,
मोरे बिस्तर पे ...
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शव की अभिलाषा
चाह नहीं मैं चिता पर जलाया जाऊँ,
चाह नहीं, कब्रिस्तान में दफनाया जाऊँ,
चाह नहीं, टाॅवर ऑफ़ साइलेंस में गिद्धों से नुचवाऊँ,
चाह नहीं, नदियों में तैर, प्रदूषण फैलाऊँ,
मुझे दिलाना ब्रह्मा जी, अगला जनम किसी दलित के घर,
आरक्षण ले पढ़ूँ, मदद पाऊँ, सरकारी नौकरी को लूँ वर.
धौंस दिखाऊँ अफसर को, सारी पीढ़ी जाएँ तर.
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हमको अब तक आशिकी का, वो ज़माना याद है,
सर्दियों के मौसम में, सोहन स्वीट्स की शाॅप पर,
नेगी जी की क्लास में, समोसे, चाय उड़ाना याद है,ण
ब्लैक बोर्ड की जगह, काॅपी पर समझाना,
दो मेजों को जोड़ कर पूरी क्लास, लगाना याद है,
कोने में लावण्या, पूनम, बीच में नेगी सर,
2 घंटों में आराम से, पूरा पाठ समझाना याद है,
मित्रता का अटूट संबंध, घर पर वायवा का अभ्यास,
पूनम के घर, भूषी का, अपनी डेरी से दूध लाना याद है.
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किसी की नादानियों पे, न अपना खून सुखा,
न किसी की पोस्ट पर, तू खिलखिला,
जीना इसी का नाम है, ग्रुप का और भी काम है.
बस पढ़ के पोस्ट, तू मुस्कुरा, जीना इसी का नाम है.
---------अभी न जाओ छोड़ कर ..….
अभी न जाओ दफ़न कर,
कि बैल अभी मरा नहीं,
अभी अभी तो बधाई दी,
पल भर की रिहाई दी,
गुस्सा ज़रा भड़क तो ले,
सदस्य ज़रा पढ़ तो ले,
ये गाल फूल तो ले ज़रा,
ये पारा चढ़ तो ले ज़रा,
मैं गालियाँ चुन तो लूँ,
इमॉटिकॉन्स ढूँढ तो लूँ,
अभी तो पोस्ट सजी नहीं,
अभी तो हाथ जुड़े नहीं.
अभी न जाओ दफ़न कर,
कि बैल अभी मरा नहीं,
बधाइयाँ गुनगुना उठीं,
सदस्य तिलमिला उठे,
बस, अब न मुझ को टोकना,
न बढ़ के पोस्ट डालना,
अगर मैं थक गया अभी,
तो रौब डाल न पाऊँगा कभी,
यही कहोगे, तुम सदा,
कि दिनेश अब डर गया,
जो टूट जाए किसी तरह,
यह ऐसा सिलसिला नहीं.
अधूरी लताड़ छोड़ कर,
अधूरा खौफ़ दिखा कर,
जो रोज़ गालियाँ खाओगे,
बधाइयाँ क्यों कर दे पाओगे,
शुभेच्छाओं के सादर में,
प्यार भरे दिल से,
कई गालियाँ खाओगे,
जो हम दे पाएंगे,
बुरा न मानो पोस्ट का,
हाँ, तुम कहोगे, यह सदा,
कि हम बाज़ नहीं आएँगे.
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तू मेरी प्रेम की भाषा
तुम मेरी माँ सा ,
देखूँ , मैं तुझे रोज़ ज़रा सा ,
समझूँ , मैं क्यों , इतना सा ?
पाऊँ मैं , आशीष बड़ा सा ,
दिल में तेरे , मेरे लिए , स्थान घना सा ,
तुम मेरी सासू माँ सा .
प्रणाम माँ सा, दो प्यार ज़रा सा .
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झुमका गिरा रे , बरेली के बज़ार में
देखूँ , मैं तुझे रोज़ ज़रा सा ,
समझूँ , मैं क्यों , इतना सा ?
पाऊँ मैं , आशीष बड़ा सा ,
दिल में तेरे , मेरे लिए , स्थान घना सा ,
तुम मेरी सासू माँ सा .
प्रणाम माँ सा, दो प्यार ज़रा सा .
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झुमका गिरा रे , बरेली के बज़ार में
शैंकी गिरी रे , कुरला के स्टेशन पर , शैंकी गिरी रे ,
विश्रुत आए , देख मुस्काए , लजाय गई रे ,
वो बोले , पट्टा मैं पहना दूँ , आ जा बाँकी गोरी ,
मैं बोली , ना बाबा , ना कर , जोरा जोरी ,
कुरला के स्टेशन पर , शैंकी गिर गई रे .
विश्रुत आए , देख मुस्काए , लजाय गई रे ,
वो बोले , पट्टा मैं पहना दूँ , आ जा बाँकी गोरी ,
मैं बोली , ना बाबा , ना कर , जोरा जोरी ,
कुरला के स्टेशन पर , शैंकी गिर गई रे .
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पहले एक भजन था - " श्याम चूड़ी बेचने आया" . उस पर आधारित एक पैरोडी प्रस्तुत है -
नेता देश लूटने आया
जनता ने चुनाव जिताया, नेता देश लूटने आया .
घपला सामने आया, नेता देश लूटने आया .
साँसद का वेश बनाया, नेता देश लूटने आया .
जरसी में जेब करी, उस में दौलत भरी .
बाहर खाता रखी, स्विस बैंक भरी .
गद्दी की तरी, उस में फिर नोट भरी.
जनता ने शोर मचाया, नेता देश लूटने आया.
घोटालों में नाम कमाया, नेता देश लूटने आया.
जनता ने सुनी, पुलिस से कही.
पुलिस ने सुनी, मंत्रालय से कही.
मंत्रालय ने सुनी, अदालत से कही.
नेता को तुरंत बुलाया. उस ने देश लुटाया.
मंत्री का काम बढ़ाया, नेता देश लूटने आया.
बयान नहिं दूँ, गवाही नहिं दूँ.
सबूत नहिं छोड़ूँ, फाइल को खूब घुमाया.
जनता को धमकाऊँ, धन का लोभ दिलाया.
पद का रौब दिखाया, नेता देश लूटने आया.
घोटालों में नाम गिनाया, नेता देश लूटने आया.
जनता सुनाने लगी, नेता बचावन लगी.
जनता लपेटन लगी, नेता कराहन लगी.
जनता हिलाने लगी, नेता काँपन लगी.
ढेरों आरोप लगाया, नेता देश लूटने आया.
बीमारी का बहाना बनाया, नेता देश लूटने आया.
विकास का ढोल बजाया, नेता देश लूटने आया.
जनता कहने लगी, तुम हो धोखेबाज़ बड़े .
विरोधी बोले , हो तुम गद्दार बड़े .
विदेशी बोले, तुम राज़दार बड़े ,
धीरे से गला दबाया, नेता देश लूटने आया .
हौले से टैक्स बढ़ाया, नेता देश लूटने आया .
खादी पहन के आया, नेता देश लूटने आया .
ढोंगी का स्वाँग रचाया, नेता देश लूटने आया .
नाम खूब लजाया , नेता देश लूटने आया .
विदेश में धन भिजवाया, नेता देश लूटने आया .
अपनों का भला कराया, नेता देश लूटने आया .
जनता ने चुनाव जिताया, नेता देश लूटने आया .
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घपला सामने आया, नेता देश लूटने आया .
साँसद का वेश बनाया, नेता देश लूटने आया .
जरसी में जेब करी, उस में दौलत भरी .
बाहर खाता रखी, स्विस बैंक भरी .
गद्दी की तरी, उस में फिर नोट भरी.
जनता ने शोर मचाया, नेता देश लूटने आया.
घोटालों में नाम कमाया, नेता देश लूटने आया.
जनता ने सुनी, पुलिस से कही.
पुलिस ने सुनी, मंत्रालय से कही.
मंत्रालय ने सुनी, अदालत से कही.
नेता को तुरंत बुलाया. उस ने देश लुटाया.
मंत्री का काम बढ़ाया, नेता देश लूटने आया.
बयान नहिं दूँ, गवाही नहिं दूँ.
सबूत नहिं छोड़ूँ, फाइल को खूब घुमाया.
जनता को धमकाऊँ, धन का लोभ दिलाया.
पद का रौब दिखाया, नेता देश लूटने आया.
घोटालों में नाम गिनाया, नेता देश लूटने आया.
जनता सुनाने लगी, नेता बचावन लगी.
जनता लपेटन लगी, नेता कराहन लगी.
जनता हिलाने लगी, नेता काँपन लगी.
ढेरों आरोप लगाया, नेता देश लूटने आया.
बीमारी का बहाना बनाया, नेता देश लूटने आया.
विकास का ढोल बजाया, नेता देश लूटने आया.
जनता कहने लगी, तुम हो धोखेबाज़ बड़े .
विरोधी बोले , हो तुम गद्दार बड़े .
विदेशी बोले, तुम राज़दार बड़े ,
धीरे से गला दबाया, नेता देश लूटने आया .
हौले से टैक्स बढ़ाया, नेता देश लूटने आया .
खादी पहन के आया, नेता देश लूटने आया .
ढोंगी का स्वाँग रचाया, नेता देश लूटने आया .
नाम खूब लजाया , नेता देश लूटने आया .
विदेश में धन भिजवाया, नेता देश लूटने आया .
अपनों का भला कराया, नेता देश लूटने आया .
जनता ने चुनाव जिताया, नेता देश लूटने आया .
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दृष्टिकोण
हम से क्या भूल हुई, जो यह सज़ा हमको मिली.
ए.ई.हो, या जी.एम. हो, आख़िर, आसाम जाता है.
हम तो चले परदेस, हम परदेसी हो गए.
जीना यहाँ, मरना यहाँ, इसके सिवा जाना कहाँ,
रोते हुए, आते हैं सब, हँसता हुआ तू जाएगा.
सज़ा-ए-आसाम, सुन के आए थे, तीन साल, एक आरज़ू में कट गया, दो इन्तज़ार में,
बोरा तेरा गाँव बड़ा प्यारा, मैं तो गया मारा, आ के यहाँ रे,
ज़िंन्दगी इक सफ़र है सुहाना, यहाँ कल क्या हो किसने जाना,
ओ दूर के मुसाफिर, हम को भी साथ ले ले, हम रह गए अकेले,
मुझे तुम याद करना, और मुझ को याद आना तुम,
कि इक दिन लौट के आऊँगा, ये मत भूल जाना तुम,
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लाइसेंस मिल गया, तेल खोजते रहे,
हाथ जो लगे आगार, तो उन्हें सँवार दूँ,
तेल जो मिला, उसे राष्ट्र को सौंप दूँ,
कष्ट जो मिले, उन्हें हृदय में संजो लिया,
गैस, तेल के भंडार से, राष्ट्र को सुधार दिया,
पर, तभी ज़हर भरी, गाज एक गिरी,
नित नव निष्कर्ष निकालते रहे, अर्थ खोजते रहे,
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(पैरोडी – कारवाँ गुज़र गया, ग़ुबार देखते रहे)
लाइसेंस मिल गया, तेल खोजते रहे,
हाथ जो लगे आगार, तो उन्हें सँवार दूँ,
तेल जो मिला, उसे राष्ट्र को सौंप दूँ,
कष्ट जो मिले, उन्हें हृदय में संजो लिया,
गैस, तेल के भंडार से, राष्ट्र को सुधार दिया,
राष्ट्र को सुधार दिया,
राष्ट्र को सुधार दिया,
राष्ट्र को सुधार दिया,
हो सका न कुछ मगर, सी.आर.सी पर पड़ी नज़र,
वो उठी लहर कि, गुम गया पुराना स्ट्रक्चर,
बेसिन, एसेट बन गए, शंका मन में भरे भरे,
बी.डी.पी. सँवारते रहे, दायित्व लादते रहे,
लाइसेंस मिल गया, ख्वाब देखते रहे,
डीप वाटर मिल गया, तो जग गई नई किरन,
शोधन के आयाम खुले, विस्तार के बढ़े चरन,
शोर मच गया कि शेयर बढ़ गया, नाम चल गया,
राष्ट्र सब उमड़ पड़ा, कि तेल का फ़्लो बढ़ा ,
तेल का फ़्लो बढ़ा ,
पर, तभी ज़हर भरी, गाज एक गिरी,
कायदों के दायरों में, वायदों के शेड्यूल में,
उलझ गया काम सभी, ऑडिट – विजिलेंस का भूत लगा,
निष्कर्ष की आस में, बाट जोहते रहे,
कितनी सभाएँ कीं, विचार विमर्श कर लिए,
नित नव निष्कर्ष निकालते रहे, अर्थ खोजते रहे,
और हम असहाय से, परिणाम भोगते रहे,
लाइसेंस बँट गया, मज़ाक झेलते रहे,
सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण के, नाम रोशन होते रहे,
प्रबंधन के नए प्रयोग हुए , दृष्टिकोण बदलते रहे,
आज़माइशें कई परीक्षित हुईं, नेतृत्व ताकते रहे,
ए.पी.एम लग गया, डॉलर रेट बढ़ गया,
लाभाँश मिल गया, इंवेस्टमेंट सोचते रहे,
लाइसेंस छिन गया, शोक सोजते रहे.
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-: स्वास्थ्य सँदेश : - (पैरोडी : - जब दीप जले आना )
जब नींद लगे सोना, जब भूख लगे खाना,
सँदेस हृदय का, भूल ना जाना, आलस्य को ठुकराना,
जब नींद लगे सोना,
नित व्यायाम करते रहें, उन्हें देख के हम जलते रहें,
कहते हैं, बिज़ी, एक दूजे से, योगा करे जाना,
जब नींद लगे सोना,
मैं पद – चिह्न सँवारूँगा, सारा समय गुज़ारूँगा,
मेरे श्रद्धा सुमन लिए जाना,
जब नींद लगे सोना,
जहाँ प्रसन्न चित्त मिले थे हम,
हाय – हेल्लो करते थे हम,
ऑफ़िस के गलियारे से ,
आज उसी तरह जाना,
जब नींद लगे सोना,
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