Saturday, 9 September 2017

पारिवारिक संबंध

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मन मंदिर में बस रहे, बाबा जी के भाव,

उनसे ले कर प्रेरणा, चलती जीवन नाव. 

सुबह शाम की संध्या, और हवन के मंत्र, 

सही बात पर डाँटते, नहीं कहीं छल-तंत्र. 

साझा शिक्षा, ज्ञान से, लोक कथा भंडार, 

बच्चों को संस्कार की, कहानी बारंबार. 

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लाल ठिठोली कर रहा, अपनी माँ के साथ, 

माता भी है मानती, उसकी सारी बात. 

लाड़ लड़ाता हर समय, पाता माँ का प्यार, 

उसे लगे सबसे अधिक, माता पर अधिकार.

माता से मस्ती करे, बदला माँ का प्यार.

कभी कभी यदि झिड़क दे, फिर भी करे दुलार. 

माँ तो बस माँ ही रही, रहे किसी भी लोक, 

गलत बात पर टोकती, सुख मानो या शोक. 

उसकी बातें याद कर, दे देना सम्मान,

नमन करो उसको सदा, दिल से अपना मान. 

माँ, माता, अम्मा कहो, मतलब सबका एक, 

पाओ ममता एक सी, करो करम जब नेक.

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रिद्धू के मामा, पहन पजामा,
चले बरात में, खरामा खरामा.

रिद्धू के ताऊ, बड़े खाऊ,
चले बरात में, पहन खड़ाऊँ.

रिद्धू के भाई, करे लड़ाई,
चले बरात में, ओढ़ रजाई,

रिद्धू के दादा, करते वादा,
चले बरात में, लाद लबादा.

रिद्धू के नाना, बड़ा सयाना,
चले बरात में, खाने खाना.

रिद्धू के चाचा, जड़े तमाचा,
चले बरात में, भरे कुलाचा.

रिद्धू के फूफा, खिलाएँ शिगूफा,
चले बरात में, बैठ कर सोफा.

रिद्धू के मौसा, खाएँ समोसा,
चले बरात में, खाने को दोसा.
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रोहित की शादी

दिल से देते आशीष, प्रणय परिचय बाद,
रोहित संग ऐबी चली, जनम जनम का शाद.
आप सब के स्वागत हेतु, तैयार प्रसाद परिवार,
खुले दिल से, मस्त रह, करें रोहित का बेड़ा पार.

मोहिनी मूरत, सूरत भली, रही ऊँचाई,
करी पढ़ाई, खेल कूद में नाम कमाई.
अच्छी क्षिक्षा, संस्कृति पाई, परम्परा भली निभाई,
चरण स्पर्श, प्रणाम की प्रथा अपनाई, सब को आदर देते भाई,
सबका प्यारा और दुलारा,  हर एक की आँखों का तारा,
कला पारखी, मृदु भाषी, सही समय पर लावै हाँसी,
मित्र, हरफन मौला, सोच समझ कर वाणी बोला,
साइकिल, तैराकी में नाम कमाया, विदेश में प्रतिभा दिखाया,

स्वस्थ, सुखी जीवन जिएँ, पा सब का आशीर्वाद,
शादी की शुभकामनाएँ, सत्कार का धन्यवाद.
ढेरों अरमान रख, वर वधू पर लुटाते प्यार,
सारे संबंधी मित्र, गोवा आने को तैयार.
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दो देवी दर्शन दे गईं, पावन पर्व पुनीत,
मिल गईं साक्षात लक्ष्मी, स्थापित नव प्रीत,
स्थापित नव प्रीत, खुशियों से भरा जीवन,
किलकारी दे वह हँसें, मुस्काए अपना प्रांगन,
महकें सब परिवार, फूले फले समग्र समाज,
इतिहास में जुड़ गया, यह अनुपम पर्व आज.
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शादी कर संसार में, बँध गए दो तन मन,
इक दूजे पर न्योछावर, करते जीवन अर्पन,
करते जीवन अर्पन, जग में बन जाएँ मिसाल,
संग संग विचरण करें, चलें मिला कर ताल,
आशीर्वाद औ शुभकामनाएँ, पाने के हैं आदी,
धन्यवाद हम दे रहे, सफल रहे यह शादी.
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तुम्हारी यह हरकतें, हमको नहीं पसंद,
खिझा, रिझा, चिढ़ा कर, मन में भरें द्वंद,
मन में भरें द्वंद, कभी प्यार तो होय कभी रार,
वास्तविकता जान न पाऊँ, जितना करूँ  विचार,
तुम संग चलती जाए, यह जीवन पारी,
तुम्हारी बिन जी न पाऊँ, सदा रहूँ तुम्हारी.
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दुआएँ देने को दिल से, दिल हो जाता आतुर,
गिरगिट माँहि बदल रंगत, दीखे अक्सर शातिर,
दीखे अक्सर शातिर, केहि बिधि संदेस पहुँचाऊँ, 
कासे दुखड़ा कहूँ आपना, मन को कैसे समझाऊँ.
रस्ते सारे बंद करे हैं, क्योंकर गले लगाएँ,
व्यग्र सदा मिलने को, उनको दे दूँ आज दुआएँ.
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मेकअप कर पत्नी सजी, निखर गया स्वरूप,
गहनों के शृंगार से, पाया लक्ष्मी रूप,
पाया लक्ष्मी रूप, साड़ी की छवि न्यारी,
नजर पड़ोसन की पड़ी, झुरक गई वो बेचारी,
मेरे मुस्काने के पहले पूछा, कैसा है यह गैटअप,
देवी साक्षात लग रही, करके सुंदर मेकअप.

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लल्ला पत्नी ले आया, पा सब का आशीष,
सुबह शाम वह छेड़ता, रात में दाबे शीश,
रात में दाबे शीश, प्यार बहुत वह जतलाता,
बाल सुलभ हरकतों से, सबको बहुत खिझाता,
जन्मदिन की शुभकामनाएँ दे चले, झाड़ के सबसे पल्ला,
सुखी, स्वस्थ, संपन्न रहे, हमारा प्यारा लल्ला.
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पुत्रवधू ने आन कर, जुड़ा दिए परिवार,
पृष्ठभूमि की सभ्यता से, रचे नव संस्कार,
रचे नव संस्कार, अपुन की बढ़ गई मस्ती,
व्रत में दोहरा भोजन खाएँ, अच्छी हो गई दोस्ती,
पत्नी न हड़का पाए, जब हम बन गए साधु,
स्वस्थ तन, मन प्रसन्न, सदा मुस्कुराए  हमारी पुत्रवधू.

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प्यारी अम्मा ने बाँट दिए, जिगर के टुकड़े चार,
चारों दिशाएँ सुवासित रहें, उनकी बेटी करें प्रसार,
उनकी बेटी करें प्रसार, जग में जम कर धूम मचाएँ,
मुन्नी, चुन्नी, बेबी, गुड्डो, नाम से जानी जाएँ,
सब मिल याद करें जब, बीती बातें न्यारी,
ऊपर से आशीष बरसाएँ, अपनी अम्मा प्यारी.
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चाचीश्री के श्रीचरणों में, करते हैं प्रणाम,
सारे दायित्व निभाय के, अब करतीं हैं आराम,
अब करतीं हैं आराम, चचा संग मौज मनाएँ,
सुविधा, इच्छा से, विदेश भ्रमण भी कर आएँ,
तन रहे स्वस्थ, सुघड़, अरु मन रहे तनाव फ़्री,
जन्मदिन की शुभकामनाएँ, करें स्वीकार चाचीश्री.
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मेहमान रूप में पधारे हैं, अपने प्रिय भगवान,
परिजन में आई भूमिका, बढ़ गया सम्मान,
बढ़ गया सम्मान, चेहरे पर मुस्कान आली,
सब की प्रिय, शैंकी-अनुजा, विश्रुत की साली,
प्रथम आगमन का श्रेय, उसको मिलता है श्रीमान,
सुखद भविष्य की कामना, आते रहें
मेहमान.
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