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बिल्लन को कहते पिता, सत्यवती को मात,
दो सुत विनय दिनेश थे, भगिनी पंच कहात,
भगिनी पंच कहात, तुलना शिव परिवार से,
रितु वन्दना हैं वधू, विशू, वरतू हैं सुत से,
समता आज घर की, शैंकी बन गई चिलमन,
मांगें हम आशीश, सुखी रखें सदा बिल्लन.
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आज दिवस पुरखे गए, छोड़ी अपनी याद,
विचित्र,आशा, सत्य थे, करते नहीं प्रमाद,
करते नहीं प्रमाद, थोड़ा और रुक जाते,
पोता, पोती युगल, उन से आशीश पाते,
उन्हें मिल याद करें, दोहराता जो समाज,
नमन श्रद्धांजलि दें, दिल से उन सबको आज.
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दादा शैंकी के गए, गईं विनय की मात,
एक साल अंतर रहा, गहरा था आघात,
गहरा था आघात, उनकी यादें सताती,
प्यार की बातों से, मन में हुलस उठ आती,
हाथ सदा सर रहे, यही होता था वादा,
कृपा हम सब पर हो, शांति से मम्मी दादा.
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नमन पिता को हम करें, दें समुचित सम्मान,
उनके आदर्श हमें दें, अनुपम समाज स्थान,
अनुपम समाज स्थान, याद रखें सीखें सदा,
आज उन्हें दें श्रेय, उनके सद्गुण सर्वदा,
डांट भले के लिए, कर लें मन ही मन मनन.
पाएं अपने लक्ष्य, आओ करें उन्हें नमन.
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आज मात हम से हुईं, सदा के लिए दूर,
वर्ष हुए नौ अब तलक, काल छीनता क्रूर,
काल छीनता क्रूर, पाए हम मधुर दुलार,
नहीं कमी कुछ रखी, आंचल भर कर दिया प्यार,
याद संजो कर रखें, दिल में जाइए विराज,
नमन सदा हम करें, देते श्रद्धांजलि आज.
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छोड़ गईं दीदी हमें, दे कर अपनी याद,
अटल स्थान उनका बने, करते हैं फरियाद.
नहीं कल्पना उन बिना, कैसा हो संगीत,
कौन करे पूरा उन्हें, रहे अधूरे गीत.
फिल्मों में उनका रहा, योगदान स्मरणीय,
भारत रत्न उन्हें मिला, सबकी आदरणीय.
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नमन पिता को नित करें, आज दिवस कुछ खास,
आशिष वह देते रहें, ऐसा है विश्वास.
पहुँच सके खुद हम यहाँ, ले उनसे संस्कार,
बने हमारी प्रेरणा, मान रहे उपकार.
नाना कष्ट जीवन में, सहे अनेकों बार,
बच्चों के कल्याण में, कर दीं खुशियाँ वार.
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ममता मूरत मात की, नहिं उसका कुछ दाम,
कभी सोचना भी नहीं, उनको सदा प्रणाम,
उनको सदा प्रणाम, बाँह दुआ में पसारे,
दिल से करती प्यार, खुश रहें बच्चे सारे,
नहीं करे बरदाश्त, कोई बुराई करता,
नमन सदा मात को, सदा उछालतीं ममता.
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मा सी मासी थी मिली, मा सी दे आशीश,
चाहे हर दम भला ही, गईं पास जगदीश.
जीवन मूरत त्याग का, एक सजग प्रतिमान,
ऊँचाई छू लीं बहुत, नहीं ज़रा अभिमान.
रही हमारी प्रेरणा, सिखा गईं संस्कार,
अच्छी शिक्षा दी सदा, बना दिया आधार.
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बड़े जोश से मन सके, विजय दिवस त्योहार,
याद शहीदों को करें, जान करें निसार.
वीर गति को पा गए, ले रक्षा का भार,
बारंबार नमन उन्हें, जो परलोक सिधार.
रक्षा करते देश की, दे कर अपनी जान,
सदा बढ़ाते ही रहे, भारत माँ का मान,
समर कारगिल याद है, हतप्रभ, विश्व अवाक,
आत्म समर्पण करा कर, जीत लिया था पाक,
जीती दुश्मन भूमि को, वापस दे दी दान,
नया देश बांग्ला बना, पहला पाकिस्तान.
नेता कुछ ऐसे हुए, मन के बड़े उदार,
अलग देश को मान्यता, पाए कंटक हार.
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नमन पिता को कर सकें, सोचें उनकी याद,
जीवन अपना दे दिया, हों बच्चे आबाद,
हों बच्चे आबाद, साहस से कर सामना,
संकट की घड़ी से, सीखा धीरज धारना,
रही विचार धारा, करो वही, दे मन अमन,
मानें शिक्षा सभी, करें पिता श्री को नमन.
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नमन मात को हम करें, धर के उनका ध्यान,
आभारी जीवन बना, कैसे हो सम्मान,
कैसे सम्मान हो, आई हमारी बारी,
माफी हम माँगते, जो गलती थी हमारी,
जीवन में हो शाँति, पूरे सारे हों स्वपन,
याद उन्हें हम करें, हृदय से हो सदा नमन.
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एक साथ दो माँ गईं, करके भली सलाह,
रहा तकाजा उमर का, बुला लिए अल्लाह,
बुला लिए अल्लाह, निभा दी जिम्मेदारी,
बिना अधिक कष्ट के, करी प्रयाण तैयारी,
होश रहा अंत तक, बिन खोए कहीं विवेक,
हमें आशीष मिले, जब भी होते दिल एक.
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भाषण की क्षमता गजब, बात कहें पुरजोर,
कायल उनके तर्क से, करे बिना कुछ शोर.
ममता की मूरत रहीं, नारी का सम्मान,
काम राष्ट्र हित में सदा, उनका चरित महान.
संसद में गरिमा बढ़ी, सुना लगा कर ध्यान,
अर्थ पूर्ण बातें करीं, रख कर सबका मान.
प्रतिभा का डंका बजा, सारे देश-विदेश,
मौन सदा को हो गई, नारी अद्भुत शेष.
भारत की विदुषी रहीं, कहते उन्हें स्वराज,
आँखों से आँसू झरें, रोक न पाएं आज.
सुषमा से गौरव बढ़ा, पा भारत का प्यार,
आहत उनके निधन से, आज सकल संसार.
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भारत माँ का चल बसा, लायक एक सपूत,
गर्व करें उस पर सभी, होता अनुपम, मूर्त.
सेवा की मूरत रहा, ऊँचा करता भाल,
एक पार्रिकर खो गया, भारत माँ का लाल.
करते उनको याद हम, नमन करोड़ों बार,
बड़े सरल मानव रहे, मिलें नहीं दो बार.
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मात द्वय ऊपर गईं, छोड़ हमारा साथ,
सीख हमें उनकी मिले, रख लें अपने माथ,
रख लें अपने माथ, माँ ममता का प्रतिमान,
दे सके नहीं कभी, कहीं कोई भी प्रमान,
हमें दें आशीष सदा, संध्या और प्रभात,
निष्ठा से उनका करें, मनन, नमन हे मात.
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मन मंदिर में बस रहे, बाबा जी के भाव,
उनसे ले कर प्रेरणा, चलती जीवन नाव.
सुबह शाम की संध्या, और हवन के मंत्र,
सही बात पर डाँटते, नहीं कहीं छल-तंत्र.
शिक्षाप्रद ज्ञान दें, लोक कथा भंडार,
बच्चों को संस्कार की, कहानी बारंबार.
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रहती आशा काम में, नव-जीवन संचार,
सुखी रहें वे जन सदा, मिला पिता का प्यार,
मिला पिता का प्यार, सालती उनकी यादें,
अनुभव ने सिखाया, किए जो सबसे वादे,
सीखें जो चुभी कभी, अब अच्छी वही लगती,
करते उन्हें प्रणाम, शकल यादों में रहती.
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गोस्वामी को बुला कर, गो-स्वामी ने पास,
अपनी कृपा सदा करी, जब तक चलती साँस.
मीत हमारा हो गया, सदा-सदा को मौन,
अब सुख-दुख में हाल ले, ऐसा परिचित कौन.
विलग गए तन से भले, मन के रहे करीब,
ईश बुला कर कर गए, हमको बहुत गरीब.
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नाती-पोता देख कर, गए ईश के धाम,
ऐसे कुछ हालात थे, रहे अधूरे काम.
पढ़ा-लिखा कर बाल को, दिला दिया आराम,
बरकरार नौकरी में, रखो काम से काम.
रिश्तों के सम्मान से, भले दिए संस्कार,
सब कुछ सह कर भी नहीं, किया कभी प्रतिकार.
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*बिल्लन* बोलें प्यार से, सारे नातेदार,
आत्मा उनकी कह रही, सुखी रहे परिवार,
सुखी रहे परिवार, कष्ट में बीता जीवन,
उनकी अमर आत्मा, दे दुआ फूले उपवन,
नमन उन्हें सब करें, हमको याद है बचपन,
सुखी रखा हर तरह, अमर रहें पिता *बिल्लन*.
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भले गरीबी में रहे , पर जिए स्वाभिमान से ,
अपने बूते पर लड़े , जीते रहे शान से ,
जीते रहे शान से , न किसी का रखा उधारा ,
सीमित आवश्यकताएँ रखीं , कहीं न हाथ पसारा ,
पाल पोस के बड़ा किया , संस्कारों में न कभी टले ,
नमन करूँ नेक जनक को , सबको रखें भले .
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