Thursday, 25 November 2021
कैकेयी चरित
Saturday, 31 July 2021
दोहा रामायण
Monday, 5 April 2021
महत्वपूर्ण ऐतिहसिक दिवस (निश्चित)
जनवरी 25 - मतदाता दिवस
---------
------
आज किया सरकार ने, मतदाता का ध्यान,
वोट बैंक भी चाहते, उनका कर सम्मान.
मतदाता को चाहिए, करे वोट अधिकार,
बिना स्वार्थ मतदान से, सुखमय हो संसार.
हक का मौका जब मिले, चुन कर नेता लाय,
अच्छा नेता वह नहीं, जो सब को भरमाय.
------
-------
जनवरी -10 - विश्व हिंदी दिवस
--------
------
दिवा स्वपन था अटल का, गूँजी थी आवाज,
विश्व दिवस हिंदी मने, खोले मन के राज.
मान विदेशों में मिला, देखो जमती धाक,
हिंदी के उपयोग से, ऊँची होती नाक.
जन मन की भाषा बने, करिए व्यक्त विचार,
सही ढंग से कह सको, अंतस के उद्गार.
जमे समझ में, ठीक से, करते रहो प्रयास,
भाषा चाहे जो रहे, मूल भाव आभास.
अच्छे से करिए प्रकट, मन की पूरी बात,
श्रोता के मन को छुए, कटती तामस रात.
हिंदी में भी कह सकें, अपने मन के भाव,
गर्व सभी बोली करें, कोई नहीं दुराव.
-------
जग में हिंदी को मिला, उसका सम्यक स्थान,
अपने भारत देश में, कुछ करते अपमान.
हिंदी में भाषण दिया, बढ़ा अटल का मान,
मना विश्व हिंदी दिवस, भारत का सम्मान.
हिंदी में सोचें, लिखें, और करें सब बात,
सरल ढंग से व्यक्त हों, टल जाएं अपघात.
------
विश्व हृदय दिवस - 21 सितम्बर
-------
------
दिल को काबू में रखें, इसका कर उपचार,
वरना इसके खेल से, होगा अत्याचार.
समय समय पर कीजिए, रक्त चाप की जाँच,
नहीं कभी ऐसा घटे, आए उस पर आँच.
सेवन कम चीनी, नमक, घी, मक्खन उपयोग
सावधान आघात से, जीवन भर का रोग.
अच्छी सेहत के लिए, कसरत, श्रम, व्यायाम,
बढ़ी आयु में कीजिए, आवश्यक आराम.
लें अंग्रेजी ही दवा, ऐसा नहीं हुजूर,
देसी का भी फायदा, देगी लाभ जरूर.
होम्योपैथी है भली, नहीं असर कुछ और,
क्वाथ, लेप भी कर सकें, करिए थोड़ा गौर.
------
सितम्बर 15 - अभियंता दिवस
-------
------
सृजन सृष्टि समान करें, ब्रह्मा का वरदान,
अभियंता उनको कहें, बढ़ता मानस मान.
मोक्षगुंडम लगा दिए, प्रतिभा, अनुभव ज्ञान,
भारत रत्न उन्हें मिला, किया देश कल्यान.
जन्म दिवस समर्पित है, अभियंता के नाम,
बारंबार नमन करें, यही बड़ा ईनाम.
------
सितंबर 14 - राजभाषा दिवस
+++++++
-------
कहने को सरकार ने, भाषा हिंदी नाम,
दे आश्वासन कह दिया, होगा सारा काम.
केवल कागज पर दिखा, यह सरकारी काम,
पता चला व्यवहार में, हिंदी को विश्राम.
बोल रहे सबसे अधिक, हिंदी अपने देश,
राजनीति ला कह रहे, यह मेरा संदेश.
हो हिन्दी अब लोकप्रिय, बने हमारी शान,
हिंदी में सब काम हो, बढ़े देश का मान.
हिंदी में हस्ताक्षर हों, नहीं कठिन यह काम,
निर्णय न्यायालय लिखें, हिंदी में हो काम.
बढ़े मनोबल आप का, करें हर्ष से काम,
उत्साहित हों देख कर, हिंदी में परिणाम.-
------
दिल से हिंदी चाहिए, चिंतन को विश्राम,
जो सोचें, वही करें, नहीं दिखावा काम.
कठिन शब्द से बच सकें, कर के सरल प्रभाव,
बिन आडंबर के कहें, अपने मन केंंँऔ भाव.
जन मानस की बात हो, बिन बोले कह जाय,
भाषा बाधा ना बने, शब्दों को उलझाय.
एक दिवस हल्ला करें, बाकी दिन आराम,
शासक वृंद मौज करें, लें हिंदी का नाम.
शोर मचा कर नाम दें, हिंदी को सम्मान,
केवल बढ़े प्रचार ही, मिले मुफ़्त में दान.
उस दिन हिंदी का दिखे, गुंजन चारों ओर,
नाटक, सम्मेलन किए, भूले अगली भोर.
---------
भाषा अपने देश की, आती है नित याद,
स्वतः स्फूर्त विचार कहें, निज भाषा संवाद.
हिंदी भाषा शुद्ध हो, कहें सभी विद्वान,
मन में आया, बोल दें, फिसली नहीं जुबान.
एक दिवस ही साल में, हिंदी का गुणगान,
बाकी सारे समय हो, अंग्रेज़ी पय पान.
अंग्रेज़ी दीमक लगी, मन होता कमजोर,
लगते भाव उधार के, भीतर है कुछ और.
सीख दूसरों को भली, कहते जिम्मेदार,
बढ़-चढ़ कर भाषण करो, काफी लच्छेदार.
बोलो वह, जो दिल कहे, मत पीटो तुम ढोल,
दे कर भाषण एक दिन, हो जाओगे गोल.
----------
अपनी भाषा छोड़ कर, गैरों को सम्मान,
अपना जन मानस रहा, अंग्रेजी वरदान.
नाम राजभाषा हुआ, अंग्रेजी में काम,
भारत की भाषा सकल, ढूँढें उसका नाम.
गौरव अपनी सोच का, कर देता अभिभूत,
चिंतन मातृ भाषा में, सार्थक करें सपूत.
एक दिवस नाटक रचें, कर सरकारी काम,
बाकी सारे साल भर, हिंदी को विश्राम.
दक्षिण तो बदनाम है, दिखता नहीं विरोध,
अपने लगते हैं सभी, जब हो जाए बोध.
करता हूँ अनुरोध यह, हो सब भाषा मान,
माध्यम बनी विचार की, अभिव्यक्ति प्रतिमान.
-----
हिंदी भाषी कर रहे, अंग्रेजी में बात,
झूठी शान दिखा, करें, हिंदी पर आघात.
हिंदी का प्रचार करो, लो लाखों अनुदान,
भाषा का प्रचार नहीं, बस, सरकारी शान.
मूल लक्ष्य को भूल कर, कुछ भी करें बखान,
लिख कर झूठे आंकड़े, पा लेते सम्मान.
अब तो बाहर भी मिला, हिंदी को सम्मान,
पर, भारत में घट रहे, हिंदी के कदरदान.
जब से गूगल आ गया, बहुत हुआ आराम,
हिंदी में संभव हुआ, सब तकनीकी काम.
राजभाषा में कर सको, अपना पूरा काम,
ऊपर से सहयोग पा, कस कर रखो लगाम.
--------
धीमी गति से हो रहा, राजभाषा प्रयोग,
हिंदी में लेखन नहीं, यह कैसा दुर्योग.
अंग्रेजी में काम कर, फाइल आगे जाय,
हिंदी में लिख टिप्पणी, हीन भावना आय.
लाखों का खर्चा करें, होता नहीं प्रसार,
राजभाषा को मान दें, सच्चा हो श्रंगार.
हिंदी पखवाड़ा मना, पिछले बासठ साल,
ऐसी आँधी चले अब, सबको लगे मिसाल.
नाटक और न कीजिए, पखवाड़ा मन जाय,
मूल भाव मन में रहे, हिंदी को अपनाय.
हिंदी अधिकारी बनूँ, पाऊँ सकल पगार,
महज़ सितम्बर माह में, करूँ हिंदी प्रचार.
हर जन फाइल में लिखे, हिंदी का रख मान,
सार्थक राजभाषा हो, मिल जाए पहचान.
नराकास रखती व्यस्त, ले कर सबके हाल,
हिंदी-सेल बता रही, नया मसाला डाल.
हिन्दी के प्रसार में, उदार भाषा नीत,
भाषा अपने क्षेेत्र में, होती प्रथम प्रतीत.
भाषा के उपयोग में, अँग्रेज़ी का स्थान,
गरिमा, शुचिता में नहीं, हिंदी का सम्मान.
----------
मोहपाश में बँध गए, प्यारी लागे, पराई बानी,
अपनी भाषा बोलन में, लागत लाज लजानी.
---------
दिवस एक ही में खुश है, हिंदी पाकर के सम्मान,
शेष दिनों में होता है, अंग्रेजी का गुण गान,
अंग्रेजी का गुण गान, रटा रटा कर करते प्रतिभा कुंठित,
ज्ञान हिंदी का होने पर भी, कभी न होते गर्वित,
राजभाषा के प्रयोग से, बढ़ाओ अपना साहस,
हर रोज़ गर्व से मना सकें, हम हिंदी दिवस.
------
सितम्बर 5 - शिक्षक दिवस
---------
--------
जीवन भर हम सीखते, कैसे बनें हम आर्य,
इसको संभव कर सकें, मात, पिता आचार्य.
शेष जगत के लोग भी, देते हमको ज्ञान,
बल, चातुर्य, विवेक का, रखें सदा ही ध्यान.
अनुभव जो देता हमें, मानें गुरू समान,
आज देश में मिल रहा, यारों को भी मान.
विद्या से मिलती हमें, समझ, बूझ संदेश.
उसे बढ़ाने के लिए, गुरुजन दें उपदेश.
गुरू सिखाते हैं सदा, न्याय, शक्ति और धर्म,
आगे जीवन-पथ चलें, करके अच्छे कर्म.
करें याद, हम ले सकें, गुरुजन से आशीश,
देव कृपा सब पर रहे, भली करें जगदीश.
-------
गौरवमय अतीत रहा, कहता है इतिहास,
तैंतिस प्रतिशत मात्र में, हो जाते हम पास.
जो कुछ भी हम आज हैं, शिक्षक का था हाथ,
उन से शिक्षा ले बढ़े, पा कर उनका साथ.
शिक्षा नहीं किताब की, देते नैतिक ज्ञान,
बात भली जिस से मिले, उसको गुरु लो मान.
मुरगा बन हम ने रखा, अपने गुरु का मान,
लाज नहीं हमको लगी, जब होता है भान.
उत्सुकता में हम करें, नित नव भिन्न प्रयोग,
सीख उसी से मिली हमें, भागे मन के रोग.
खेल-खेल में सिखा कर, किया हमें मजबूत,
वह सब तो अब भूलते, कोई नहीं सुबूत.
------
याद करें इतिहास को, लेते अनुपम सीख,
अहंकार के दमन से, मिलती श्रम की भीख.
नमन करो गुरुदेव को, मन में भक्ति लाय,
सच्चे मन से याद हो, हरि दर्शन हो जाय.
गुरूकुल में बच्चे पढ़ें, मिले अद्वितीय ज्ञान,
गर्व करें संस्कार पर, भारत का अभिमान.
शिक्षक से शिक्षा नहीं, तुम पाओ संस्कार,
गूढ़ बात बतला सके, करे शिष्य को प्यार.
सब कुछ संभव ज्ञान से, अर्जन मान सम्मान,
मिलता अधिक समाज में, जो होता विद्वान.
राधा कृष्णन जन्म पर, करते आदर मान,
शिक्षक दिवस पुकार कर, करते हम सम्मान.
--------
क्या-क्या सीखा आप से, नहीं हमें है ज्ञान,
अब हमारा नंबर है, कर लें कुछ सम्मान.
मात-पिता के बाद है, गुरु का गुरु स्थान,
पहले चरणों में नमन, करें बाद में ध्यान.
सीख गुरू की मान लें, आते उच्च विचार,
जीवन में अपना सकें, कर उनका आभार.
शिक्षक दिवस मना रहे, देखो हम हर साल,
हल रखते हर बात का, कुछ भी करें सवाल.
पाँच सितम्बर आ गया, कर लो उनको याद,
भारत के इतिहास में, शिक्षक की फरियाद.
राधाकृष्णन याद हैं, मंद मुदित मुस्कान,
शिक्षा उनकी प्रेरणा, स्वयंं गुणों की खान.
++++++
माता पहली शिक्षिका, दूजा पिता का स्थान,
गुरु की कृपा बिन न मिटे, मति का भ्रम, अज्ञान,
मति का भ्रम अज्ञान, छटें संशय के बादल,
बदले नज़रिया, खुले ज्ञान चक्षु, हों खुशी से पागल,
बढ़ी जानकारी, सद्भाव, संबंध सभी से जुड़ जाता,
घर परिवार की प्रथम शिक्षिका, सबसे आगे माता.
----------
शिक्षक समाधान कर रहे , अपने अनुभव के साथ ,
प्रशस्त मार्ग कर रहे , अपने ज्ञान के साथ ,
अपने ज्ञान के साथ , छात्रों पर प्यार लुटाते ,
नव तकनीक के साथ में , अपना क्षेत्र बढ़ाते ,
खुद सीखते , हमें सिखाते, संस्कृति के ये रक्षक ,
गर्व, सम्मान बढ़ाते हमारा, सुखी हमारे प्रिय शिक्षक .
अगस्त 21 - वरिष्ठ नागरिक दिवस
------
++++++
उमर बढ़ी, हम भी बढ़े, बूढ़ा हुआ शरीर,
बढ़ी समय के साथ ही, अपने तन की पीर.
अनुभव पाया आयु से, पाया जीवन सार,
प्रेम, भाव भी पा सके, भावों के उद्गार.
भारत में भी मिल रहा, बूढ़ों को सम्मान,
करें भले ना नौकरी, अलग बनी पहचान.
पहले जन सुविधा मिले, लगती अलग कतार,
टीका भी पहले लगा, आदर का व्यवहार.
चालू वय वंदन रहे, सोच रही सरकार,
युवा वर्ग भी सोचता, वे पाए उपहार.
बूढ़ों की सेवा करें, रख लें छोटे ध्यान,
आदर उनको हर जगह, मिल जाए सम्मान.
+++++
उम्र अधिक हो साठ से, पाओ खास स्थान,
देती है सरकार भी, उन्हें विशेष सम्मान.
बढ़ी आयु में तन रखें, अपने मन अनुकूल,
बचें सभी अपघात से, दुस्साहस को भूल.
अनुभव का उपयोग कर, रखें विचार महान,
सीख दूसरे ले सकें, इस पर करें गुमान.
+++++
बड़े जनों का ध्यान भी, रखती है सरकार,
लाभ अधिक मिलते कहीं, बिना किसी तकरार.
वायुयान की यात्रा, हों रियायती दाम,
आरक्षण भी रेल का, देता है आराम.
अपनी पूँजी पर मिले, थोड़ा ज़्यादा ब्याज,
जल्दी से निपटाइए, रहे अधूरे काज.
तनिक बड़े जब हो गए, साठ साल के पार,
सेवा से छुट्टी मिली, हो पेंशन आधार.
अधिक आयु के जन करें, अपने अनुभव गान,
याद ज़माने की करें, रख कर मृदु मुस्कान.
नाती पोते व्यस्त हैं, सुनें न उनकी बात,
जीवन शैली अलग है, कौन कहे जज्बात.
वरिष्ठ पाते रियायतें, जो देती सरकार,
रेल किराया कम लगे, उसके वह हकदार.
जमा आपकी बचत पर, मिले अधिक कुछ ब्याज,
श्वेत-केश को मान दे, साथी और समाज.
लगें बुढ़ापे में अधिक, तन-मन के कुछ रोग,
रखिए स्वस्थ शरीर को, कर रोजाना योग.
-----------
अगस्त 15 - स्वतंत्रता दिवस
--------
---------
घटना दुर्घटना बनी, अभी छिहत्तर साल,
देश विभाजन हो गया, नेता करें कमाल.
आज़ादी के नाम पर, माता पाती घाव,
एक तिरंगा खोल कर, खेले कितने दांव.
कहने को आज़ाद हैं, नहीं मूल अधिकार,
कोर्ट, पुलिस के फेर में, हो जीवन बेकार.
नहीं देश का ध्वज रहे, नहीं कहीं कानून,
विद्रोही तत्पर खड़े, चढ़ने लगा जुनून.
जज भी नेता पालते, दोषी हैं आज़ाद,
तारीखें लगती रहीं, चमचे करें फसाद.
कहने को तो नियम हैं, पर पालन लाचार,
धन वालों की चल रही, है निर्धन बेजार.
--------
अंग्रेजों ने दी हमें, कहने को आज़ाद,
आदत तो बदली नहीं, जो करती बरबाद.
जाति, धर्म के फेर ने, खूब कराया भेद,
कुचल भाव संस्कार को, भूले चारों वेद.
कहने को आजाद हैं, विचार रहे गुलाम.
रिश्वत, अशिक्षा करती, भारत को बदनाम.
वोटों की खातिर मिला, दलबदलू का नाम,
आश्वासन दें मुफ़्त का, राजनीति बदनाम.
चोरी, हत्या लूट के, खेल दाँव पर दाँव,
कौन सज़ा दे बाद में, पूरे हुए चुनाव.
सच्ची आजादी कहें, सबका हो सम्मान,
रहें सुरक्षित भेद बिन, पा अधिकार समान.
-------
माता के बंधन खुले, भारत था आज़ाद,
पंद्रह अगस्त को मिली, बड़ी प्रतीक्षा बाद.
बापू, चाचा ने लड़ा, एक विकट संग्राम,
भूल गए हम बीच में, लाल, पाल के नाम.
अमर हुए इतिहास में, बोस और आज़ाद,
भीम, गोखले, तिलक भी, सदा रहेंगे याद.
सपने देख शहीद हुए, भारत माँ के लाल,
उनको बिसराएं नहीं, जल कर बने मशाल.
अपने नेता चुन सकें, जनता का विश्वास,
संसाधन अपने रहें, समुचित करें विकास.
भारत माँ को नमन करें, बन कर वीर सपूत.
सोचो स्वर्णिम काल की, करो याद मत भूत.
------
आजादी से खुश सभी, बने नए संबंध,
संविधान अपना रहे, खत्म हुए प्रतिबंध.
झूठ-मूठ में रूठते, करते गलत प्रचार,
वोटों की गणना प्रबल, कुरसी का आधार.
ग्रहण जाति का लग गया, रोज करें अपमान,
स्वयं देश को लूट कर, डालें नित व्यवधान.
सीमा पर रक्षा करें, सैनिक वीर जवान,
खेतों में पैदा करें, अन्न देव भगवान.
आती सुख-सुविधा नई, हो तकनीक विकास,
सब को सब कुछ मिल सके, होगा यही प्रयास.
सबको खुशहाली मिले, सबका हो अधिकार,
राग द्वेष को दूर कर, बढ़ता जाए प्यार.
-------
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
अनुभव की हैं, साँसें, न कोई मुश्किल झेली है.
विकसित हुए विज्ञान के आयाम, हर क्षेत्र में नाम कमाया है,
गौरवमय अतीत की समृद्धि को नव सोपान दिखाया है.
प्रयास किया जाति, धर्म, भाषा मुक्त समाज बनाने का,
स्वर्णिम इतिहास रचा कर, यश, मान कमाने का,
शिक्षाकलम से, एक सच्चाई लिखी है,
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
करे प्रयास दूर गरीबी हो, श्रम कण चमकें,
सुरक्षित सीमाएँ हों, केसर की घाटी महके.
श्रमिक रोजगार संभालें, मिले हाथ को काम,
तन मन स्वस्थ रहे सदा, सर्दी हो या घाम,
समय से वर्षा भरपूर हो, नहीं बाढ़ की चिंता,
अद्भुत न्याय प्रक्रिया से, रहें सम्मान से जिंदा.
हर व्यक्ति की जीवन शैली, आदर्श नागरिक सरीखी है
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
पर, कब घुन लग गया, माँ की सेहत प्यारी में,
सत्तर वर्षों की परवरिश, सिमट गई मक्कारी में,
ग़द्दार सब कुछ चाट गए, खाकर माल मलाई,
जनता लुटती विवश सी, हुई नहीं कोई सुनवाई.
भाषा, जाति धर्म के बंधन में, स्रोत हो गए रीते,
संसाधनों का शोषण कर, अपनी खातिर जीते,
अंतरात्मा तक सो गई, तब जाकर वह चीखी है,
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
आओ, आज करें आह्वान, सुंदर स्वच्छ भारत का,
जाति, धर्म, प्राँत, भाषा से मुक्त बनाने का,
सच्चाई, ईमानदारी, सहयोग की रोटी खाने का,
हो गर्व हमें अपनी संस्कृति, धरोहर, सम्मान का,
सुधरें संबंधी पड़ोसी से, अन्तर्मन में हो सद्भाव,
रिश्वतखोरी, स्वार्थ मिटे, जिए हर इंसान बाइज़्जत,
कर समाप्त घृणित राजनीति, प्यार मुहब्बत परखी है.
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
-----------
सात दशक पूर्व रचा गया, एक नया इतिहास,
फिरंगियों की दासता गई, जागा नव विश्वास,
जागा नव विश्वास, विकास के सुखद आयाम,
कृषि, विज्ञान, तकनीक में, खूब कमाया नाम,
उपलब्धियों की चर्चा भली, करें प्रयास दिन रात,
गरिमामय स्वर्णिम अतीत की, याद करें जन्मों तक सात.
---------
अगस्त 14 - ओ.एन.जी.सी. दिवस
--------
पिछले अड़सठ साल में, रचें नव कीर्तिमान,
इसका यह इतिहास है, गौरवमय अभिमान.
चमका ओ.एन.जी.सी., कहता है दास्तान,
तेल, गैस की खोज में, अनोखा योगदान.
खोजा जल, थल हर जगह, छोड़ा कोई स्थान,
कई सपूतों ने दिया, जीवन का बलिदान.
किया सुरक्षित स्वयं को, स्वदेश का प्रतिमान,
अर्थ व्यवस्था ठीक हो, बढ़ता गौरव मान.
क्रूड ऑयल शोधन कर, खुद की बन पहचान,
अपना नव तकनीक को, बना नए कीर्तिमान.
रखा रिटायर बाद भी, सब अपनों का ध्यान,
बीमा, पेंशन है नहीं, पर मेडिकल प्रमान.-
--------
तेल कंपनी बन गई, पहले सड़सठ साल,
चुने सिपाही लग गए, बिछा कूप का जाल.
ओ.यन.जी.सी. कर रही, हर विधा में कमाल,
तेल गैस की खोज से, हम सब मालामाल.
शेष नहीं जल-थल में, भारत का भू-भाग,
वेधन, उत्पादन करें, चमके सबके भाग्य.
इतर देश के पा सकें, हम ऊर्जा भंडार,
साहस श्रम अपना रहे, बढ़ा सकें व्यापार.
नहीं और दोहन करें, तेल गैस के स्रोत,
खोजें और विकल्प भी, शक्ति से ओतप्रोत.
एक कंपनी रूप में, बढ़ा लें शुद्ध लाभ,
तिमिर भूत का काट कर, चमकें ज्यों अमिताभ.
------
सन छप्पन से आज तक, बना एक इतिहास,
कितने वीरों ने किए, मिल कर सभी प्रयास.
महारत्न संज्ञा मिली, बढ़ा हमारा मान,
तेल, गैस की खोज में, भारत बना महान.
जंगल-जंगल सूँघते, भू-विज्ञानी संत,
महक तेल की पा सकें, सहें कष्ट अनंत.
नगर, बाग, तालाब में, करते हैं विस्फोट.
सेस्मिक लहरें भेदतीं, अंदर पाएँ खोट.
धरती पर वेधन करें, मिले जहाँ पर तेल,
सागर भी छोड़ा नहीं, लहरें करती खेल.
तेल, गैस निकले मगर, रहे सुरक्षा खास,
बचे रहें अपघात से, ऐसा है विश्वास.
-------