Sunday, 31 July 2022

धार्मिक




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होती गड़बड़ देश में, दोषी मुल्ले लोग,
राजनीति ने साथ दे, बढ़ा दिया यह रोग.
काम अनैतिक हो कहीं, सब में इनका साथ,
जड़ में हर अपराध के, मिले इन्हीं का हाथ.
गलत काम में एकता, दिख रही भेड़ चाल,
शिक्षित भी विध्वंस में, अकल का इस्तेमाल. 
हो हल्ला हुड़दंग में, दिखती भारी भीड़,
बुलडोजर को देख कर, घुसते घर की नीड़.
लालच पा लूं वोट मैं, गलत काम आगाज, 
नाश व्यवस्था देश की, दे कर दोष समाज.
गलत काम आलोचना, रहती इनकी थीम,
मौन साधते कृत्य पर, मस्जिद की तालीम.
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जीवन सुंदर जी सकें, उत्तम रखें विचार,
तन मन से हम स्वस्थ हों, नहीं पड़ें बीमार.
मीठा बोलें प्यार से, दें सबको सम्मान,
बढ़ती आयु का भी रखें, अपना पूरा ध्यान.
नहीं तनाव हो मन में, नहीं दखल, पड़ताल,
मतलब अपने काम से, आलोचना सवाल.
सभी काम हो समय से, हेरा फेरी त्याग,
काम करें ईमान से, जगता रहे दिमाग.
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सभी जगह मौजूद है, सेवा को तैयार,
उसी रूप अनुभव करो, मान ईश अवतार. 
अपना उसको मानिए, काम सफल हो जाय,
पूजन चिंतन भक्ति से, अपना लेय बनाय.
साहस से आरंभ हो, कैसा, कोई काम, 
मन में रख विश्वास जब, लीजै राम का नाम.
तन मन से सच्चे बनें, करें नेक सब काम,
दूर रहें छल झूठ से, ना होवैं बदनाम.
मन में भ्रम ना पालिये, मिल जाए एकांत, 
तके नहीं कोई हमें, है ईश्वर विश्रांत.
घोर निराशा छा गई, विपदा चारों ओर,
याद करो तुम ईश को, मत होना कमजोर.
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बातें सभी प्रकार की, मिल जातीं इतिहास, 
गौरव का हम को हुआ, एक सुखद अहसास.
धर्म भाव जगते रहे, मानें सच्ची बात,
पूर्वज हमको दे गए, यह अनुपम सौगात.
उसका कुछ मंडन करें, कुछ का खंडन काम,
सही बात झुठला सकें, हर पल का यह काम.
अपने ढंग, रूप करें, अपनी बात बखान,
बढ़ा चढ़ा कर कुछ कहें, जिनसे बढ़ता ज्ञान.
सुन सुन कर विश्वास हो, होती संस्कृति महान,
नालायक कुछ यूं मिले, करें सदा अपमान.
तथ्य सब वैज्ञानिक हैं, नहीं कहीं कुछ ढोंग,
चिंतन गहन कर पा सके, कथन नहीं कुछ रॉंग.
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माल बटे जब मुफ्त का, इनकी दिखे कतार,
जन कल्याण भुला दिया, काफिर का संसार.
रक्त या अंग दान हो, इनका दिखे न नाम,
त्याग, भले की बात हो, कहे कुरान हराम.
मुल्ला, मौलाना सभी, पाते शह कांग्रेस,
मुस्लिम दल भी पा रहे, गड़बड़ के संदेश.
जबरन हर संभव करो, अराजकता प्रचार,
लूट, बलात्कार, हत्या, बन जाए हथियार.
शिक्षा हिंसा की मिले, सेक्स बने आधार,
नाना जिहाद छेड़ कर, अपराधी भरमार.
दें दुहाई कुरान की, नेकी बने हराम,
गलत काम करके कहें, अल्ला का पैगाम.
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लिया जनम दिसम्बर में, तिथि रही पच्चीस,
आए महापुरुष कई, देने हमें अशीश.
महामना या अटल हों, रच पाए इतिहास,
बी.एच.यू. बना दिया, मालवीय विश्वास.
नेता विश्व पटल हुए, संसद में थी धाक,
बैठे विरोध पक्ष में, सत्ता पक्ष अवाक.
धर्मवीर बन भारती, हिंदी भक्ति विशेष,
कामेडी राजू सुनी, कहता नाम अशेष.
तुलसी दिवस पवित्रता, हिंदू पूज समाज,
घटनाएं काफी घटीं, दिन खास रहा आज.
इसी काल में हो गए, शहीद चार कुमार,
जोरावर, फतेह, अजित, और गुरु सुत जुझार.
याद आज को कीजिए, होता नहीं अकाल, 
बाहर के त्योहार को, कहते सब नाताल.
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छठ पूजा के बांकुरे, बने भक्ति के रुप,
निष्ठा, श्रद्धा अनकही, खिलता रंग अनूप.
खिलता रंग अनूप, नहाय खाय से पूजा,
खरना अगले दिवस, निराहार व्रत न दूजा,
देते दर्शन सूर्य, व्रती का लख अद्भुत हठ,
हो कल्याण जग का, ऊर्जा का संचार छठ.
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गणपति आओ,
मोदक खाओ,
गणपति आओ,
स्वास्थ्य दे जाओ,
गणपति आओ,
बुद्धि दे जाओ,
गणपति आओ,
समृद्धि दे जाओ,
गणपति आओ, 
अब तो आ जाओ.
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अनुभव हो जब आप को, कौन किया उपकार,
मन से उसका कीजिए, धन्यवाद आभार.
ऊपर मन भी यदि कहें, हार्दिक धन्यवाद,
अंतर्मन से निकलता,  सदा हर्ष आह्लाद.
बिना कहे यदि मिल सके, मानो ईश प्रसाद,
ऐसा हो उपकार यदि, सदा रहेगा याद.
आएं याद वह जन कभी, उपजें श्रद्धा भाव,
अहित न उनका खुद करो, कितने रहें अभाव.
मानो मन की बात को, कर दो तुम कल्यान,
याद करेगा दूसरा, सदा बढ़ेगा मान.
हो अनुभव उपकार का, रहे नहीं कुछ दर्प,
श्रद्धा भी बढ़ जायगी, कुचल अहं का सर्प.
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ऊपर वाले ने लिखी, हम सब की तकदीर,
जन्म समय से पूर्व ही, राजा तथा फकीर.
घटना सारी घट रही, विधना के अनुसार,
साक्षी हम तो कर्म के, रखें भला व्यवहार.
गीता में कान्हा कहें, कर तू अपना काम,
फल की इच्छा मत करो, भली करेंगे राम.
पौधे भी बढ़ पेड़ हों, मिले समय परिणाम,
उचित हाल में हों बड़े, लगें समय पर आम.
जो कुछ भी हम आज हैं, कृपा ईश महान,
बड़े लोग आशीष दें, हो सबका सम्मान.
अंत भले का हो भला, सभी करें तारीफ़,
बुरा करे, गाली मिले, बोले नहीं शरीफ़.
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अस्थाई इस जगत में, सब कुछ है बेकार,
सुख दुख निकले जा रहे, यह जीवन का सार.
ना ही सुख रहता सदा, ना ही दुख का जोर,
कुछ हर्षित सुख में दिखे, करते दुख में शोर.
अपने सुख में सब सुखी, दुख में सारे चोर, 
इन लोगो से दूर हों, ये दिल मांगे मोर.
काल कठिन भी निकलता, रहा समय का फेर, 
समय भला आए कभी, लगे न कोई बेर.
जीवन दिया भगवान ने, जियो खुशी के साथ,
ईश रखे जिस हाल में, सब पल उसके हाथ. 
नहीं दोष दें भाग्य को, नहीं बहाएं नीर, 
सभी समय कट जाएगा, मन माने ना पीर.
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शादी के जोड़े बने, विधना के अनुसार,
ब्रह्मा जी ने लिख दिया, किससे होगा दीदार.
नहीं जरूरी युगल का, पहले साक्षात्कार,
पहले जमें छतीस गुण, पूरे मिलें विचार.
पहले शादी को कहें, सात जन्म का साथ,
अग्नि सामने परिक्रमा, डाल हाथ में हाथ.
नहीं देव विवाह रचा, मान बड़ों की राय,
दिल में जो भी बस गया, केवल वही उपाय.
आज बड़े भी सोचते, क्यों हम करें क्लेश,
अपने बच्चे खुश रहें, उत्तम हो परिवेश.
करें प्रेम विवाह भले, नहीं कभी विच्छेद,
साथ बैठ सुलझाइए, रखें बिना कुछ भेद.
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महज़ भवन मंदिर नहीं, आस्था के आयाम,
अंतर का विश्वास है, घट घट बसते राम.
राम, कृष्ण, हनुमान हों, या शंकर भगवान,
शीश नवाते हम रहे, प्राणी सभी समान.
कोई मूर्ति दिखे नहीं, निराकार आह्वान,
मन में मानो ब्रह्म को, सभी जीव भगवान.
सदियों से हम मानते, मंदिर ऊर्जा स्रोत, 
दर्शन से हम में भरे, आशा, दायित्व बोध. 
आईं नाना आपदा, रहे सुरक्षित स्थान,
आततायी आघात से, नहीं कहीं नुकसान.
रक्षा करें संस्कृति की, बढ़े प्रेम सद्भाव,
मिल जुल कर सब रह सकें, बदल सके बर्ताव.
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भारत का वर्णन करें, बड़ा कठिन यह काम,
शब्दों की होती कमी, वाणी को विश्राम.
अनेकता में एकता, भारत का संयोग,
मूल मंत्र सबका यही, परमेश्वर है योग.
भाषा, भोजन अलग है, पूजा भाव समान,
राम, कृष्ण तो बड़े हैं, एक रहे हनुमान.
अलग भले जलवायु हो, रहे अलग पोशाक,
भीतर से मन एक हैं, कहें बात बेबाक.
भारत में छाए खुशी, सबका हो विकास,
लक्ष्य रहे परमार्थ का, ऐसा करें प्रयास.
शाँति और कल्याण हित, कर लें संभव शोध,
हानि किसी की हो नहीं, रहे सदा ही बोध.
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सदा एक सा सच रहे, छुपा नहीं कुछ राज,
बिना लाग लपेट कहें, लगे न कोई लाज.
गलती एक छिपाइए, झूठ बोल सौ बार,
नीची नजर हर पल हो, घटता मन का प्यार.
एक सत्य भारी रहे, सौ झूठ लगातार,
ग्लानि सदा मन में रहे, बोल झूठ बेकार.
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ईश्वर तो दिखता नहीं, फिर भी है विश्वास,
आती जाती पता नहीं, कहते उसको श्वास.
कोई रास्ता ना दिखे, हो जाए लाचार,
रहे अवलंब ईश का, बदल जाय व्यवहार.
केवल अनुभव कर सकें, ऐसा है भगवान,
मान सको तो मान लो, ना मानो अज्ञान.
सारे कामों में रहा, ईश कृपा का हाथ,
मर्जी बिना पत्ता हिले, कैसे संभव पार्थ.
धर्म किसी का कुछ रहे, विनती भी हो और,
उसके आगे सब झुकें, बढ़ा धर्म का दौर.
मानो ईसा या खुदा, या बुद्ध, महावीर.
नानक नाम जहाज है, मानस की तकदीर.
ना मानो पाहन लगें, मानो तो भगवान,
आस्था बढ़ती जब दिखे, डिग जाए ईमान.
फव्वारा वह कह रहे, हम कहें विश्वनाथ,
सच का पर्दाफाश हो, जज साहब के हाथ.
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