Monday, 26 August 2024

विविध












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जीवन में सभी करते, अपने ही संघर्ष,
आगे जो जन आ गए, पाते निश्चित हर्ष.
होता जीवन सभी का, सैनिक फौज समान, 
जीते हैं संयोग से, प्रेम भाव भगवान.
देश प्रेम सबसे प्रमुख, खतरा चारों ओर, 
रहे समर्पित जान जब, दुश्मन लगता चोर.
नहीं भौतिक प्रेम कहीं, सोच दूर की बात,
याद रखो आनंद पल, खत्म हुए जज़्बात.
होती नियति सैनिक की, राष्ट्र हेतु बलिदान, 
धन्य भाग्य उसका रहा, हो जाए कुर्बान.
जो चाहो होना सफल, रखो आत्म विश्वास,
जुट जाओ प्राण पण से, जब तक चलती श्वास.
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सही बात सब ने कही, ऐका में ही शक्ति,
मिल कर जो भी रह रहे, दुनिया करती भक्ति.
कुछ परिवार, मजहब हों, गलत करें सब काम, 
साहस कोई कर सके, उनको करें विराम.
सभी अनैतिक काम में, रहता इनका साथ,
शेष नहीं कुछ काम है, जिसमें ना हो हाथ.
सारे वकील कचहरी, सुनते इनकी बात,
तुरत फैसला हो सके, है इनकी औकात.
लाठी ले कर घूमते, खोलें सबकी भैंस,
देख रहे सहमे हुए, निराश, भूले केस.
देखें हित परिवार का, ले मजहब का नाम, 
संविधान दुहाई दे, बाधा अच्छे काम .
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जो मन को बहला सके, वही उचित संगीत,
उठता आनंद तन में, यही जगत की रीत.
सुनते ही संगीत को, मुख पर हो मुस्कान,
झूमा तन बदन जिनका, वही भाती पहचान.
गायन, वादन नृत्य हैं, संगीत के प्रकार,
खास समझ उसमें लगे, आ जाए रस धार,
गायन को पसंद करें, सखा, भक्तजन, यार,
गीत, गज़ल या शायरी, भजन साथ हैं चार.
लगते सुर किस क्रम में, रागों का आधार,
आधारित है ताल पर, वादन यंत्र बहार.
कदम थिरकते, देख कर, वह नर्तन कहलाय,
तन की भी कसरत करो, मंत्र मुग्ध हो जाय.
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मन में रहते हर समय, नाना रोग विकार,
बुरे भले सब तरह के, विविध भांति विचार.
इन्हीं विचारों से बने, चरित्र का निर्माण,
यही रचें मानसिकता, प्रकट करे सम्मान.
व्यक्त इसी से हो सके, हर पल का व्यवहार,
इसे बदलने के लिए, लें संगीत आधार.
गायन, वादन, नृत्य हैं, संगीत के प्रकार,
सुर, लय, ताल प्रदान करें, मस्ती भरी बहार.
सुना संगीत, छा गया, हृदय भरा आह्लाद,
बदला मूड, रोष हटा, होता दूर विषाद. 
तन बदन सब झूम गया, सुन मोहक संगीत,  
दूर उदासी हो गई, वैरी बनते मीत.
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देते दोष कुदरत को, करते नहीं प्रयास,
छोड़ा सब कुछ भाग्य पर, रही नहीं कुछ आस.
बिन प्रयास मिलता नहीं, टपके ना आकाश,
कोशिश कर के देखिए, होना नहीं निराश.
बरसों की हो साधना, आज, कल लगातार,
लगन लगी हो लक्ष्य की, बनें सभी आसार.
निकला अवसर हाथ से, चूक गए जब आप,
बीता समय वापस नहीं, केवल पश्चाताप.
सदुपयोग हो समय का, लो अवसर पहचान,
शुद्ध मति से कार्य करें, बढ़े मान सम्मान.
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सोच समझ कर कीजिए, उचित समय पर काज,
जग हंसाई हो नहीं, आदर करे समाज.
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महफ़िल यारों की जमे, करें बात दिल खोल,
आलोचना करिए नहीं, खुले नहीं कुछ पोल.
व्हाट्सैप पर सब मिलें, पा सभी समाचार.
सबसे मिल कर बात हो, अच्छा हो व्यवहार.
रोड़ा नहीं हों किसी का, रखें न कोई वैर, 
सब मिलकर आगे बढ़ें, पूरे सपने सैर.
ग्रुप की गतिविधि पर रहे, सबका पूरा ध्यान,
एक दूसरे का करें, बढ़ चढ़ कर सम्मान.
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स्वागत करते आपका, मंगल दिन है आज,
ग्यारह साल पूर्व मिले, बनाने इक समाज.
जोड़ बनाया मीत का, कह व्हाट्सैप समूह,
बढ़ता परिचित दायरा, बोलते चक्र व्यूह.
वरिष्ठ सभी सदस्य हैं, बसते नाना स्थान,
ग्रुप में सब आकर मिले, सब पाते सम्मान.
मुश्किल का हल खोजते, सब मिल करते बात,
बनें सहारा शेष का, सह जाते आघात.
नाना गतिविधियां चलें, भरतीं उन में जोश, 
प्रतिभाजन उत्साह में, खोते अपने होश.
चाहें हम सब आप से, दें ऐसी आशीश,
मिल जुल कर आगे बढ़ें, कृपा करें जगदीश.
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टाल सकें सब आपदा, लें धीरज से काम,
मीठा फल हो सब्र का, रटें राम का नाम.
कैसी भी मुश्किल पड़े, रखिए धीरज साथ,
रहा काम शैतान का, बनता सबका नाथ.
समय भले कुछ अधिक लें, मन में रखिए शांति,
आएगा आनंद ही, मुखड़ा छाए कांति.
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आंख लगी आने लगे, मन में बहुत विचार,
पंख लगा कर कल्पना, घूमे बारम्बार.
सोने वाली अवस्था, निद्रा के हालात,
सपने सारे देखते, कुछ होवें साक्षात. 
कहें स्वप्न उनको सभी, कैसे हों साकार,
निष्ठा से प्रयास करें, हो गंभीर विचार.
सपनों से जोड़ा गया, चेतन चिंतन ज्ञान,
जगते पर जो सोचते, सुप्तावस्था मान.
लोगों को अनुभव लगे, अटकल या संज्ञान,
शगुन भले हों या बुरे, सपनों से अनुमान.
चिंता मुक्त, स्वस्थ रहें, होवें शुद्ध विचार, 
ईश्वर इतना दे हमें, करते हैं आभार.
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पीढ़ी - दर - पीढ़ी हुआ, संस्कृति का विकास, 
अंतर दो पीढ़ी रहा, बढ़ गया अविश्वास.
दोनों पीढ़ी मत सही, अलग उनका स्थान, 
भेद विचारों का रहा, आपस का सम्मान.
इच्छा रही सुधार की, हो जीवन आसान,
प्रेम परस्पर पनप ले, दुर्गुण निवृत्तमान.
इक दूजे के भाव से, दूर करें व्यवधान, 
बढ़े समझ की श्रेष्ठता, जीवन उच्च प्रमान.
दूषित परंपरा मिटे, रूढ़ियां होवें लुप्त,
जागे नवीन चेतना, रही अभी तक सुप्त.
बढ़िया जीवन जी सकें, जीने का अंदाज,
समझ आपसी बढ़ सके, रहते दूर दराज.
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जीवन यापन के लिए, करते हम कुछ काम,
पेट कहीं भरता नहीं, केवल जप लो नाम.
बात अलग हालात की, कर सकते क्या काम,
कैसे और कहां करें, हो जिसमें आराम.
घूम घूम कर कुछ करें, कुछ ऑफिस बदनाम,
कभी घर या ऑफिस में, मचा रहे कुहराम.
हो दिनचर्या एक सी, सबकी रहती चाह,
घर बैठे हो नौकरी, पत्नी कहती वाह.
कोरोना ने सीख दी, घर से करिए काम,
सभी लोग सतर्क रहें, घर रह कर विश्राम.
ऑफिस भी चालाक हैं, रखें समय का ध्यान, 
कमी कहीं भी दिख गई, घटता वेतनमान.
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सैंतिस हुए तिहत्तर में, जीते रहो जवान,
पाले शौक नए नए, अपने ग्रुप की शान.
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आन मिले हम आप से, फिर यहां एक बार,
स्वागत है नव वर्ष का, बहु भांति नव प्रकार.
अपने अपने ढंग से, मना रहे त्योहार,
दे कर शुभकामनाएं, बढ़ा रहे व्यवहार.
गायन, वादन, नृत्य के, लगा रहे अंबार,
चाट, मिठाई, केक को, अपनाता संसार.
कामेडी भी कर रहे, नौटंकी आचार,
रखें व्यवहार एक सा, बिना किसी प्रतिकार.
नहीं रखें दुर्भाव कभी, मधुर रहे व्यवहार,
करते हैं शुभकामना, झलके दिल से प्यार.
बीत चला चौबीस अब, पच्चीस इंतजार,
नया साल आगमन में, हम सब हैं तैयार.
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गर्व उपजता शक्ति से, करता अत्याचार, 
दिखता है इतिहास में, उसका दुष्प्रचार.
देवों ने संतुष्ट हो, नाना विधि वरदान,
अहंकार में झूमते, कहते स्वयं भगवान.
शक्ति जिसे भी मिल गई, कर लिया दुरुपयोग,
नाश उसी का हो गया, जो करता उपभोग.
अंदर मन में छल रखे, कर प्रसन्न भगवान, 
भोले भाले देवता, दे देते वरदान.
फिर भी रखते साथ में, उन सब का कुछ तोड़,
नष्ट शक्ति को कर सकें, सब वरों का निचोड़.
अपने श्रम से जो मिले, उसमें रहें प्रसन्न,
नहीं अधिक की कामना, उससे हों संपन्न.
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घर के चौबारे खिला, सुंदर सा इक फूल,
आया याद वरामदा, दिखी नहीं कुछ धूल, 
दिखी नहीं कुछ धूल, पपड़ी वाली दीवार,
बच्चे गए विदेश, मात पिता हैं बीमार, 
देता ऊर्जा नई, धूप खिली फूल सुंदर,
मुदित इसे देख कर, अपना प्यारा सा घर.
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बंधन रहा विवाह का, जनम जनम का साथ,
परिचय अति पुनीत बने, भले जनम लो सात.
लड़ें भिड़ें पर प्रेम में, तनिक नहीं हो ह्लास,
मरने को तैयार हैं, जब तक रहती श्वास.
बीते शादी की अवधि, बढ़ता प्यार दुलार,
अक्सर रहें शिकायतें, फिर भी हो मनुहार.
लगा बुढ़ापा उमर से, घेरें नाना रोग,
बी.पी., सुगर काफी रहे, प्रतिबंधित हो भोग.
त्याग, समर्पण भावना, हो प्रबल अधिकार, 
टांग खिंचाई भी बने, मनोरंजन प्रकार.
मिल जुल कर कटता रहे, यह जीवन निस्सार,
खुशी खुशी कर दो विदा, तज पागल संसार.
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आवागमन सुख दुख का, रहता थोड़ी देर, 
दूर रखें अवसाद को, मान नियति का फेर.
बुरा समय कट जाएगा, धरिए थोड़ी धीर,
आपा मन का खोइए, बढ़ जाती है  पीर.
चिंता रक्तचाप करे, पनपें नाना रोग, 
मस्त रहो मस्ती करो, हॅंसते अपने लोग. 
योग, प्राणायाम भले, साथ उचित आहार,
व्यस्त रखो खुद को सदा, हो विनम्र व्यवहार.
रखें नियंत्रित भाव को, लगे चित्त भगवान,
तप से काबू में रहे, अपना मन नादान.
मेल-जोल सब से करें, करिए नहीं विवाद,
दुर्लभ मानव हैं जहां, वह जन हैं अपवाद.
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युग तकनीकी हो रहा, रखें समय का ध्यान,
सब को जल्दी है पड़ी, घड़ी सभी की जान.
चलना हो दूरी अधिक, लें बस, रेल, जहाज,
आवागमन की सुविधा, सबको मिलती आज.
उचित एक ही नगर में, मेट्रो, मोनो रेल,
कम से कम पैदल चलें, सब पैसे का खेल.
साधन यातायात के, विचार करे सरकार,
वित्त, सुरक्षा देख कर, खर्चा हो अपार.
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गलती कोई भी करे, बना मानव स्वभाव,
अक्सर ही गलती दिखे, रहा खोजता ख़्वाब.
केवल ब्रह्म पूर्ण रहे, शिव ही हैं उस्ताद,
नहीं कहीं गलती मिले, शिव होते अपवाद.
अपनी गलती की क्षमा, नहीं मांग में हानि,
ईश्वर बहुत उदार है, बिना देर के मानि.  
सदा बोलिए सत्य ही, कोई नहीं छुपाव,
आती नहीं आंच कभी, होता नहीं दुराव.
कड़वा लगता सत्य कभी, पर मन में संतोष,
झूठ कहे या सुने से, अक्सर होता रोष.
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भोजन उतना कीजिए, जो तन को लग जाय,
खाना अधिक व्यर्थ रहे, लेवे रोग बुलाय.
भोजन के पहले करें, थोड़ा प्राणायाम.
आसन बैठें बाद में, वज्रासन है नाम.
आधा घंटा ना पिएं, पानी भोजन बाद,
अच्छे से भोजन पचे, कैसा भी हो स्वाद.
खाना जीवन के लिए, मिले स्वास्थ्य में लाभ,
जो खाने के हित जिएं, देती तोंद दवाब.
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सब मानव पैदा हुए, सब का अलग दिमाग,
काम करें उसको लगा, गाएं अपना राग.
अकल किसी में अधिक है, रहे किसी में भाव,
ई. क्यू., आई. क्यू. कहें, हो कैसा बर्ताव.
अकल बीरबल में अधिक, बना नहीं सम्राट,
अकबर लोहा मानता, जोहे उसकी बाट.
शक्ति अधिक हनुमान में, करें युक्ति से काम,
भाव विभीषण के अधिक, रटते हरदम राम.
दोनों बख्शे अपुन को, साथ अकल के भाव, 
ईश कृपा ऐसी रही, मिला जुला परभाव.
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सात दशक से देश में, होते कई विकास,
सभी क्षेत्र में कर रहे, हम निरंतर प्रयास.
साधन यातायात के, राकेट का कमाल,
कोरोना समाप्त हुआ, सुलझे सभी सवाल.
आई. आई. टी. खुले, शुरू किए नव कोर्स,
मिले सभी को दाखिला, लगे न कोई सोर्स.
नई रेल लाइन बिछीं, वंदे भारत रेल, 
थ्री सेवन्टी को हटा, पूरा भारत मेल.
अंतरिक्ष के क्षेत्र में, भेज दिए कुछ यान,
भेजें मानव योजना, ग्रह शोध अभियान. 
राज मार्ग विकास दिखा, बनते एअर पोर्ट,
आवागमन सुगम हुआ, दर्शन करिए फोर्ट.
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भोजन जो कुछ हम करें, अगले दिन पच जाय,
स्वास्थ्य आप का हो भला, सबसे सही उपाय.
बढ़ी आयु के साथ में, आते विविध विकार,
क्षमता घटी शरीर की, करें दिमाग विचार.
पूरा मल विसर्जन हो, मन प्रसन्न हो जाय,
कह *कर ली* या *हो गई*, बच्चे देय बताय.
कारण सारे रोग का, बनता पापी पेट,
खाता भक्ष्य अभक्ष्य को, फिर होता लमलेट.
भोजन कर के टहलिए, फिर थोड़ा आराम,
कसरत कभी न छोड़िए, थोड़ा प्राणायाम.
बहुत जरूरी मान कर, खाएं चूरन आप,
क्रीमाफिन से भी मिटें, कई पेट संताप.
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नहीं रुधिर मुझमें ज़रा, फिर भी दिखता लाल,
कच्चा भी मीठा लगूं, सब्जी बने कमाल.
*चुकंदर*

राम की पहचान बनूं, नहीं कृष्ण के पास,
जंगल में भी साथ थी, उस बिन राम उदास.
*तीर कमान*

नली बनी मैं बांस की, मुझ में नौ नौ छेद,
फूंकन से चिल्ला रही, खोलूं मन के भेद.
*बांसुरी*

चढ़ता हरदम नाक पर, देखूं वस्तु महीन,
दोनों हाथों से करूं, जैसे काम मशीन.
*चश्मा*

गोरे काले हो लिए, इक बरतन में साथ,
दही डाल कर खाइए, चाट उंगली हाथ.
*उड़द की दाल की खिचड़ी*

दूध भात से मैं बना, मीठा सा पकवान,
काजू, किशमिश भी पड़े, बन जाए वरदान.
*खीर*

चार पैर बिन सींग के, दूं सबको आराम,
चाहे हर कोई मुझे, सारे करें सलाम.
*कुर्सी*

तीन हाथ पर घूम कर, रखती सुख की छांह,
चलूं नहीं बिजली बिना, भरती ठंडी आह.
*सीलिंग फैन*

चलूं सदा मैं समय पर, घूमें तीनों हाथ,
कांच जेल में बंद हूं, चलती मैं दिन रात.
*घड़ी*

लंबा हूं मैं बांस सा, मीठे की मैं खान,
रस निचोड़ कर पी रहे, बालक, वृद्ध, जवान.
*गन्ना*
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चली साथ पत्नी जहां, राह बने आसान,
छोड़ मायका आ गई, रखे आप का मान.
बात उसी की मानिए, हो जाए कल्यान,
रुष्ट अगर वह हो गई, जीवन नर्क समान.
पल पल वह देती रही, सुंदर नेक सलाह,
सहमति चाहे आप से, सुलझे जीवन राह.
शादी से उसको मिली, संबंधों की सीख,
दिल होता उदास तभी, निकले उस से चीख.
जीवन मधुर बनाइए, करें प्रेम से बात,
बिना बात झिड़कें नहीं, रहे सुहानी रात.
आपस में सुलझाइए, बनी रहेगी शान,
बाहर वाले भी करें, पत्नी का सम्मान.
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मन में उठे भाव जहां, मुखर हो करो व्यक्त,
दिल में रख कर हानि है, हो उदासी सशक्त.
घुट - घुट कर जीते रहें, होता दिल अवसन्न,
दिल की बात दबे नहीं, रहता चित्त प्रसन्न.
मौन रहें, आंसू बहें, दिल होता बेजार,
गाता हरदम दिल रहे, ऑफिस या बाजार.
बाथ रूम में गाइए, जैसे उठें विचार,
देश, काल परिस्थिति हो, इनकी जिम्मेदार.
ठंडी में जाड़ा लगे, गर्मी करे अधीर,
बिना नहाए आइए, देखे कौन फ़कीर.
भजन, गज़ल या शेर हो, या फिर फिल्मी गीत,
जोर लगा कर गाइए, सब सुनते संगीत.
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खाना खा कर स्वस्थ हों, बनता तन मजबूत,
सुंदर बदन दिख सके, लग रहे देवदूत.
केवल भोजन ही नहीं, अच्छी सेहत राज,
रहे जरूरी पच सके, कर सकें भले काज.
समय समय पर खाइए, ले कर भोजन स्वाद,
उचित समय पानी पिएं, रहे नहीं अवसाद.
कसरत भी हो साथ में, खाना पचे जरूर,
मोटापा भी ना चढ़े, दिखने में मगरूर.
बैठे हों जब साथ में, मारें नहीं डकार,
गैस छोड़ कर हो नहीं, अपनी जय जयकार.
भोजन विरुद्ध ना करें, सब खाया बर्बाद, 
असर करे विष की तरह, प्राणों की फरियाद.
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मानव बन जन्मे जहां, कहें हम जन्म स्थान,
बीता बचपन खेल कर, होते बड़े जवान.
नाना यादें साथ रख, पहुंचे यौवन द्वार,
व्यस्त नौकरी में हुए, छूट गया घर-बार.
बचपन में की हरकतें, आतीं हमको याद,
लगा नहीं हम ने कभी, किया समय बर्बाद.
अपने दादा से सुना, जन्म स्थान इतिहास,
बच्चों को भी कह सकें, सुना सुना परिहास.
पाई छुट्टी नौकरी, हो जीवन में शांति,
रहें कहीं भी चैन से, गतिविधियों में क्रांति.
सुविधा आवागमन की, रिश्ते बनते खास,
नहीं बड़ा वह नगर हो, बच्चों के भी पास.
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अपने प्रिय को ना कहें, कोई भी अपशब्द,
मन में हो जब रोष तो, सबको करते स्तब्ध.
एक मिनट आवेश में, कह जाते कुछ बात,
जीवन भर पछता रहे, रिश्ते बिगड़े जात.
नहीं भूल से भी कहें, गलत शब्द दुर्वाद,
अपनों का दिल ना दुखे, उससे बढ़ें विवाद.
आपस में कुछ भी कहें, मिलें यार जब चार, 
सब संबोधन उचित हैं, दिखता केवल प्यार.
नालायक, उल्लू, गधा, संबोधन का प्यार,
नहीं बात दिल से कहें, केवल दिखे दुलार.
माता कहे दुलार से, बच्चों को उपदेश,
मृदु संभाषण डांट का, घर का हो परिवेश.
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रोज सुबह कर लीजिए, फल का शाकाहार,
अपना मन प्रसन्न रहे, उत्तम बनें विचार.
चुन चुन कर फल खाइए, जो मीठे मिल जाय,
मौसम के फल भा रहे, स्वास्थ्य भला हो जाय.
वांछा शेष रहे नहीं, मन संतुष्ट बन जाय,
कर्म करें फल के बिना, यह गीता कहलाय.
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साइड इफेक्ट 

हर नया कार्य करने में, 
कुछ झिझक होती है,
असंभाव्य हालात में, 
काम की ललक होती है.
होता है संकोच, 
कहीं काम बिगड़ ना जाए,
आशंका के बीच, 
असफलता की कसक होती है. 
हर नया कार्य  ....
नई दवा लेने से पहले, 
हम डाॅक्टर से उसके 
साइड इफेक्ट पूछते हैं,
उसके मना करने पर भी,
गूगल को खंगालते हैं.
हर नया कार्य  ....
इतना भय हमें दिखाते हैं,
साइड इफेक्ट खूब डराते हैं,
औषधि अपना प्रभाव दिखाते हैं,
एक की जगह दूसरा रोग बुलाते हैं, 
हर नया कार्य  ....
इसी प्रकार हमारे कर्म भी, 
हर पल फल का आभास कराते हैं,
वह जीवन के साइड इफेक्ट बताते हैं,
सही कर्म की प्रेरणा दे जाते हैं,
हर नया कार्य  ....
जीवन तो इक दिन ढल जाएगा,
कर्म फल अपना रंग दिखलाएगा,
लोगों को हमारी याद दिलाएगा,
कर्म और फल का संबंध बताएगा.
कर्म के साइड इफेक्ट गाएगा.
हर नया कार्य  ....
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मानव जन्म हमें मिला, देखा समय कठोर,
रही अधूरी लालसा, क्षुधित अतृप्त चकोर.
बंधन मिले समाज से, घेरें चारों ओर,
शिक्षा और चरित्र से, बनती जीवन डोर.
ऐसे जालों से बुनें, अपनी जीवन रीत,
इनमें बैठे संतुलन, ढूंढें अपने मीत.
नहीं जरूरी एक से, मिल पाएं सब लोग,
रिश्ते अटूट बन सकें, मिटते मन के रोग.
संयम और धैर्य करें, चरित्र का निर्मान,
उससे खुद संवारिए, अपना जीवन मान.
तज कर रोष, मीत बनें, सबसे सहज व्यवहार,
जीवन संतुलन कहता, यह जीवन आधार.
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नई तकनीक आ गई, ले लो सबका हाल,
कंप्यूटर से काम हो, मिलता अंतर्जाल.
देखो सूरत पौत्र की, वीडियो का कमाल,
अज्ञानी हैं सोचते, कैसा मायाजाल.
बातें ही बस हों नहीं, लेन देन व्यापार,
करती सोशल मीडिया, हम सब पर उपकार.
नहीं ठीक हर समय हो, मोबाइल उपयोग,
अधिक बुरी हर चीज़ है, लगते नाना रोग.
लगातार उपयोग से, होते नयन खराब,
चिंतित दिल, दिमाग रहे, बढ़ता रहे तनाव.
रहे क्लेश परिवार में, बढ़ने लगे विरोध,
हानि अधिक हो लाभ से, जीवन में अवरोध.
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रहे कृपा भगवान की, उसका है आभार,
याद करो उपलब्धियां, उसका है उपकार.
हृदय से धन्यवाद दें, बन जाएं कृतज्ञ,
उन सबका ध्यान धर कर, बन जाएं सर्वज्ञ.
जिसने थोड़ा भी किया, कभी कहीं उपकार,
निष्छल प्रेम दिखाइए, उसको सदा बहार.
माता का संतान से, सबसे पावन प्यार,
भेद भाव, छल कपट का, करती नहीं विचार.
प्रेम नहीं कहते उसे, लगो ऑंकने मोल,
होता है निःस्वार्थ ही, इक तरफा अनमोल.
अपना ही हित देख कर, करते हैं जो प्यार,
अपनी भाषा में कहें, उनको हम मक्कार.
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बहुत कठिन उसके लिए, जो खुद पर हॅंस जाय,
सदमें में रोए नहीं, मुखड़ा सदा मुस्काय.
उसकी देखें भंगिमा, कॉमेडी बन जाय,
अंतर उसका झाॅंकिए, नयनन अश्रु बहाय.
सार्थक बातें कह सकें, कम शब्द का प्रयोग,
उस को लोग सराहते, हरता मन के लोग.
कुछ बातें ऐसी करो, मन थोड़ा हरषाय,
करें सभी के दूर दुख, सबको देय हॅंसाय.
याद कभी घटना करो, मुख पर आए हास, 
उसे सजा दिमाग रखो, पुनः नहीं परिहास.
कॉमेडी मजाक नहीं, दिल पर करती चोट,
मुक्त हृदय से लीजिए, हॅंसते जाओ लोट.
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नवयुग में हम को मिला, एक नया हथियार,
लोहा उसका मानते, बड़ी करारी मार.
मोबाइल कहते उसे, है हर कर की शान,
साथी जन के बीच में, बढ़ जाता है मान.
करो बात संपर्क से, खूब बढ़ी पहचान,
दुरुपयोग भी हो सके, पहले से लो जान.
लेन देन भी कर सकें, बने नेट के दास,
बिना नेट सर पीट लो, मन हो जाय उदास.
बच्चे तक आदी हुए, देख रहे कार्टून,
अपनी आंखें फोड़ते, ऐसा चढ़ा जुनून.
अपनी स्थिति जान सकें, दुनिया का भूगोल,
बड़े जतन संभाल रखें, बहुत कीमती मोल.
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झंझट हैं फास्ट फूड में, चना कुरमुरा खाय, 
आग जला कर यह बने, वह डब्बे में पाय. 
फास्ट फूड से बढ़ रही, बाहर की पहचान, 
चना कुरमुरा यह कहें, मुझको अपना मान. 
खेल कूद कर हजम हो, पड़े नहीं बीमार, 
पिज़्ज़ा, बर्गर फेर में, लुटने को तैयार. 
मोटापा भी छा गया, थुलथुल हुआ शरीर,
नाना रोग पाल लिए, बढ़ती जाए पीर. 
चाट, पकौड़ी से नहीं, भरा किसी का पेट,  
मूँगफली खा कर कहें, अब जाओ तुम लेट. 
खाने में गर गुड़ मिले, आ जाता है स्वाद,
मन में हो इसके बिना, फीका सा अवसाद.
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मानव तन जीवित रहे, जब तक रक्त प्रवाह, 
उसमें बहते लाल कण, दें जीवन की चाह. 
रही प्रकृति कुछ खून में, खास अम्ल या क्षार,
उसको पी.एच. कहते, जाने सब संसार. 
सारी क्रिया ठीक चलें, रहे सात के पास,
विविध व्याधि घेर लें, मन हो जाए उदास. 
जब भी कम हो सात से, पी. एच. का मान, 
घातक उतना ही रहे, सात से कमी जान. 
कारक ताँबा, स्वर्ण जो, पी. एच. दें बढ़ाय,
नीर आर. ओ. का पिएँ, बदन स्वस्थ हो जाय. 
भोजन में कम अम्ल लें, ज़्यादा खाएँ क्षार, 
मूली, खीरा, काकड़ी, अधिक करें व्यवहार.
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लो खाने खेलने के मजे, लड़ो जिंदगी जंग, 
जीने का आनंद है, अगर यार हों संग. 
उन से मिल कर भूलिए, अपनी सब तकलीफ़, 
सारे मिल हर दम करें, खुद की ही तारीफ़. 
कोई फ़र्क पड़े नहीं, होवें कुछ नाराज़, 
मन की बातें कह सकें, खोलें दिल के राज. 
लगा ठहाका हँस पड़ो, नहीं जरूरी बात, 
किलकारी शावक करे, हँस लो सारी रात. 
पूरा खुल कर हँस सकें, यही भली सौगात,
रोगों का भी शमन हो, हरे पित्त, कफ़, वात. 
बढे़ मनोबल यार का, हँस ले वह भी साथ, 
कर लो तुम अठखेलियाँ, डाल हाथ में हाथ. 
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खाने खरचे से बचे, करिए नहीं गुरूर, 
ज़्यादा पैसा हो जमा, करो निवेश जरूर.
दान धरम भी कीजिए, खुद ही अपने हाथ, 
पुण्य कर्म बस साथ में, जाएं अपने साथ. 
सारा धन रखिए नहीं, कभी कहीं इक साथ, 
अलग ढंग से कीजिए, रख कर हाथों हाथ. 
सोने में है सुरक्षा, समय रहे विपरीत,
आता काम विपत्ति में, यही पुरानी रीत. 
जो कुछ खर्चा आपने, बढ़ता जाता दाम, 
बैंक दरों से अधिक ही, मिलता लाभ तमाम.
फिर भी मन में डर रहे, कोई लेगा लूट, 
पूरी उसकी सुरक्षा, पड़े भाग में फूट. 
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कोस रहे संसार को, घटना घटे विचित्र, 
कैसा यह व्यवहार है, कैसा बना चरित्र. 
अपने बच्चों को नहीं, दी शिक्षा संस्कार,
देख, सीख घर में सके, वैसा था व्यवहार. 
बचपन से ही हम रहे, बच्चों के भगवान, 
नकल हमारी कर लिए, बिना किसी परमान. 
अच्छे दें संस्कार हम, यदि चाहें कल्यान, 
लज्जित नहीं समाज में, बच्चों को वरदान. 
दैनिक व्यवहार में, दिखे अपना स्वभाव, 
जो आएं संपर्क में, उन पर पड़े प्रभाव. 
नेता, अफ़सर, मिल करें, पूरा भ्रष्टाचार,
नहीं कहीं ईमान है, लालच, घूस प्रचार. 
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परशुराम बन, 
परशुराम बन. 
गलत दृश्य देख कर, 
झूठी बात सुन कर, 
चापलूसी सुन कर, 
परशुराम बन.
कूद न किसी झंझट में, 
सुन आर्त नाद को, 
करना हो मदद जब, 
परशुराम बन.
भक्ति करना उचित लगे, 
शक्ति संग्रह आवश्यक हो, 
आसक्ति  किसी में रहे नहीं, 
परशुराम बन.
जब किसी पर अत्याचार हो, 
झूठा किसी पर आक्षेप हो, 
व्यर्थ का आरोप हो, 
परशुराम बन. 
सत्य को उजागर करो, 
अन्याय का प्रतिकार करो, 
शत्रु का समूल संहार करो,
परशुराम बन, परशुराम बन. 
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मिले धर्म, विश्वास में, आस्था के आयाम, 
उनसे हम मजबूत हों, भजें राम का नाम. 
साधारण जीवन चले, सब कुछ रहता ठीक, 
आई विपदा जब कभी, थाली भगवत लीक. 
आपत समय याद करें, कोई भी भगवान, 
भूलें अपने इष्ट को, छानें खाक जहान. 
संकट में सुमिरन करें, घट सके चमत्कार,
मन अपना कमजोर हो, मिले एक अवतार. 
आप पूजिए भूत को, गर अटके हों काम, 
अपने मतलब के लिए, भजो खुदा या राम.
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शिक्षा पा कर नौकरी, यह भारत की रीत, 
जीवन यापन कर सकें, चले बाद में प्रीत. 
भली नौकरी मिल गई, करता मान समाज, 
पैसे से सब क्रय करो, रीत बनी है आज. 
मान बढ़ा परिवार का, बच्चे चले विदेश, 
भूल गए संस्कार सब, बाहर का परिवेश. 
बाहर की मुद्रा मिले, रहे सुरक्षित हाल, 
देश आत्म निर्भर बने, कोई नहीं मलाल. 
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मन करना हो शुद्ध तो, रख लीजै उपवास,
सोच हमारी हो नई, वाणी बने सुभाष.
तन की भी हो शुद्धता, रहें नहीं बीमार,
रोग व्याधि को हर सकें, रहा भला उपचार.
जप, तप, व्रत लगते भले, जब शरीर हो स्वस्थ,
रहे मजा उपवास में, मन रहे नहीं व्यस्त.
कुछ परहेज भोजन का, रख कर शुद्ध विचार,
अंतः करण सुधर सके, हो दोस्ती व्यवहार.
काबू में दिल, ताप रहे, पीड़ा, सुगर सुधार,
मेटाबॉलिज्म तन का, हो नियमित आधार.
लाभ नहीं उपवास का, भोजन करें असीम,
रखें नियंत्रण जीभ पर, टाइम से लें जीम.
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खबरें देश विदेश की, हमें दें लगातार,
करें विश्वास समझ सच, जो कहें पत्रकार.
पत्रकारिता स्तंभ है, लोकतंत्र आधार,
हो निर्भीक बात करें, रख सकें सत्य विचार.
राजनीति ने क्रय करीं, अपने हित की बात,
झूठ बताया सत्य को, झूठ सत्य बन जात. 
लालच में अंधे हुए, बेच दिया ईमान,
खातिर पैसा, प्रतिष्ठा, दिल को कर कुरबान.
चिपक लिए किसी दल से, चमचे पत्तलकार,
एक वही गुणवान हैं, बाकी सब बेकार.
स्वार्थ छिपा हो खबर में, नीयत बेईमान,
सत्य हवा में उड़ गया, झूठे बने महान.
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खेती पर निर्भर रहा, अपना सब आहार,
जैसा भोजन खा लिया, वैसे बने विचार.   
अधिक लाभ की लालसा, किया गलत व्यवहार,
मिला रसायन बेचते, दूषित कर आहार.
दूषित भोजन से लगे, तन में नाना रोग,
नई नई बीमारियाँ, करतीं विविध प्रयोग.
सादा भोजन तन लगे, बनता स्वस्थ शरीर,
निर्मल मन में उपजते,  मिटती सारी पीर.
भोजन नहीं मिलावटी, शुद्ध रहे आहार,
सात्विक खाना खाइए, पनपें उच्च विचार.
बनी जरूरत आज की, खान-पान हो शुद्ध,
पनपेगी संस्कृति तभी, नहीं विकास विरुद्ध.
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जीवन बदले समय से, काल चाल दिन रात,
उसके साथ सभी चलें, यह अनुभव की बात.
ढले समय के साथ जो, अपना लिए विचार.
सफल जगत में हो गए, यही कहे व्यवहार.
शिक्षा हमको दी गई, करिए ऐसे काम,
कष्ट नहीं संसार को, मन से भजिए राम.
जग में कुछ जन कर रहे, अलग नीति से काम,
आत्मा देख व्यथित हुई, बाधित है आराम.
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उत्सव होली मिलन का, हुआ संपन्न आज,
चित्रगुप्त पूजा करी, मिल कर सभी समाज.
पूजा तुलसी प्रेरणा, करते श्री प्रमोद,
साथ मिलन के हो गया, भोजन और विनोद.
नए कई सदस्य मिले, परिचय हुआ अपार,
नए कई रिश्ते बने, मधुर हुआ व्यवहार.
पिछली कटुता भूल कर, करें नए हम काम,
अकल लगे कायस्थ की, जग में ऊँचा नाम.
रहे सृजन क्षमता धनी, होवें ठोस विचार,
अमल योजना पर करें, समृद्ध हो परिवार.
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कुदरत ने बख्शे हमें, सागर, नदी, पहार,
रखें सुरक्षित हम उन्हें, यह दायित्व हमार.
नेताओं ने कर दिया, गिरि का सत्यानाश, 
झूठे वादे कर चले, देखो महा विनाश.
आवागमन सुगम बने, हों अधिक रोजगार, 
संसाधन से आय हो, ना कोई बेकार. 
आएं अतिथि, विकास हो, तकनीकी संचार,
सड़क बने, होटल खुलें, करें भवन विस्तार.
देखें हालत भूमि की, कितना लेगी लोड,
बाँध बनाते समय ही, सोचें कैसी रोड. 
रेल, सड़क परिवहन का, करें सम्यक विकास,
ऊँचे भवन नहीं बनें, बिन प्रदूषण निवास.
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कर्म तपस्या बन गया, छोड़ा भोजन, नीर,
कठिन किया तप बदन से, सह कर भौतिक पीर.
वाँछित लक्ष्य उन्हें मिले, बने एक इतिहास,
करें नमन तप को सभी, ऐसा रख विश्वास.
घर, बाहर वन में करें, छोड़ जगत व्यवहार,
तन, मन की हो साधना, रखें दूर परिवार.
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सूरज आया मकर में, हुई कुनकुनी धूप,
मस्ती झलके बदन से, लगे सुहाना रूप.
बिहू, संक्रांति, लोहड़ी, भारत के त्योहार,
खिचड़ी, गुड़, तिल, गजक के, मिल जाते उपहार.
तन, मन में उत्साह है, छाती खूब उमंग,
देखो कैसे दिख रहे, नाना रंग पतंग.
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खतरा ले आगे बढ़ें, होंगे सफल प्रयास,
जोखिम लिए बिना मिले, नहीं कहीं आभास.
खतरा ले निवेश करें, हो सकते धनवान,
अपना पैसा सैंतते, मिले नहीं प्रतिदान.
खेतों में मेहनत कर, अधिक उगाता अन्न,
आई जब भी आपदा, मन हो जाता खिन्न.
बात मैथिली की बने, सही कहे संदेश,
उनकी राय मानिए, जैसे हो आदेश.
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एक और वर्ष बीतेगा, यादें अपनी छोड़ेगा.
हम सभी के दिलों में, राग पुराने गाएगा,
कुछ खट्टी, कुछ मीठी, टीसों को उभारेगा,
कुछ आँसू, कुछ मुस्कानें, लिए समेट जाएगा.
एक और वर्ष बीतेगा, यादें अपनी छोड़ेगा.

क्या खोया, क्या पाया, यह अहसास दिलाएगा,
रहीं क्या उपलब्धियाँ, मीठे वचनों में गाएगा,
क्या हमने की गलतियां, यह अनुमान लगाएगा,
एक और वर्ष बीतेगा, यादें अपनी छोड़ेगा.

करें विदाई बाइस की, तेइस अब मुसकाएगा,
हो सके भला सभी का, यह विश्वास दिलाएगा,
नहीं किसी का करें बुरा, ऐसा भाव जगाएगा
एक और वर्ष बीतेगा, यादें अपनी छोड़ेगा.

स्वस्थ रहें, कल्याण करें, प्रतिभा का सम्मान करें,
सृजनशीलता का परचम, अब हर दम फहराएगा,
सब विधि से हो विकास, सबके मन में आएगा.
एक और वर्ष बीतेगा, यादें अपनी सजाएगा.
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साधारण गतिविधि नहीं, करते आप जनाब,
लोग कहें, इनका हुआ, आज दिमाग खराब.
चिंतन सदा स्वस्थ करें, भाव रहे कल्याण,
बुरा नहीं सोचें कभी, रखें समक्ष प्रमाण.
इतना धन हो पास में, बना रहे सम्मान,
नहीं किसी से मांगना, कर पाएं हम दान. 
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रहना चाहो स्वस्थ यदि, रोज़ करो व्यायाम,
बीमारों को राय है, खूब करो आराम.
बढ़ी आयु पर घेर लें, तन को नाना रोग,
बी. पी., सुगर ठीक रहें, करिए नियमित योग.  
एक तरीका दवा का, मान डॉक्टर सलाह,
निकले प्राणायाम से, स्वस्थ बदन की राह. 
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स्वस्थ बीज, पानी, मिले, और समय पर खाद, 
नहीं पड़ोसी से रहे, किंचित भी विवाद.
मिले फसल अच्छी उसे, करे उपाय किसान,
कीट रहित उपजे फसल, कृपा करें भगवान.
दवा छिड़क कर फसल को, रखें कीट से दूर,
गलती से हम खा गए, काल लपेटे क्रूर.
भोजन पर छिड़की दवा, बीमारी का मूल,
अंग प्रभावित हो गए, रहता उनमें शूल.
खाना ऐसा खाइए, जो मन को लगे सुहाय,
दूषित भोजन ना करें, करे अपच हो जाय.
तीन बार भोजन करें, मिलता षटरस स्वाद, 
भूख लगे तो खाइए, बिना भूख अपवाद.
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मोटापे से लगते, नाना विधि के रोग,
बढ़ें अचानक बदन में, फिर औषधि का भोग.
लगता छोटी उमर में, मोटापे का दंश,
बेबी फैट जिसे कहें, असामान्य हो वंश.
पिज़्ज़ा, बर्गर खाय कर, मोटा हुआ शरीर,
आँखों पर चश्मा चढ़े, तन की बढ़ती पीर.
मोटा सा चश्मा लगा, सूरत है मासूम,
इंटरनेट चस्का बढ़ा, सीमित घर का रूम. 
बचपन में होता नहीं,  बीमारी का भान,
गबदू सा शरीर लगे, बाल को स्वस्थ मान.
कसरत करें, स्वस्थ रहें, साथ योग या ध्यान,
फुर्तीला तन मन बने, बढ़े आपकी शान.
-------
कहा सुना प्रमाण बिना, पढ़े लिखे की बात,
मौखिक गाली किसी को, क्षमा माँग तर जात.
कोई कुछ लिख कर पढ़े, बात अमर हो जाय,
सार्वजनिक जब तक नहीं, मीडिया छिपा जाय.
बात वसीयत की करें, लिखी हुई सब मान्य,
शेष हवा में बात हो, झगड़े का प्राधान्य.
सोच समझ कर बोलिए, हानि करै ना कोय,
लिखा हुआ जो भी पढ़े, सबको मालुम होय.
लोग मानते सच कहा, सभी हवाला देय,
व्हाट्सएप, फेस बुक में, सत्य जान सब लेय.
उनकी प्रतिभा बढ़ गई, नियमित लिखते लोग,
इधर उधर के ज्ञान से, बढ़ें मानसिक रोग.
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स्वस्थ हमारा तन रहे, कर पाए जब काम,
अच्छी साइकिल अपनी, कहें भला व्यायाम.
टांगें भी मजबूत हों, शरीर बनता पुष्ट,
गतिविधि रहे जीवन में, हो दिमाग भी चुस्त.
देश, सड़क के कायदे, सब को हों मालूम,  
गलती से भी हों नहीं, अपघातों की धूम.
बचत करो पेट्रोल की, हो साइकिल प्रयोग,
अर्थ व्यवस्था में करो, अपना भी कुछ योग.
नहीं प्रदूषण फैलता, चले साइकिल रोज,
पैसों की भी बचत हो, मनती अपनी मौज.
राष्ट्र सवारी बन सके, ऐसी अपनी चाह,
खूब साइकिल चढ़ चलें, मस्ती अपनी राह.
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टॉपिक तो समझा नहीं, कैसे रखें विचार,
बात अनर्गल कुछ करें, दोस्त दिखाते प्यार.
आय. आय. टी. नाम है, उसके पास विशेष,
एक भतीजा योग्य था, जा कर बसा विदेश.
वापस भारत आ सके, नहीं कहीं उम्मीद,
मात पिता दीदार को, बैठ बिछाए दीद.
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पढ़ लिख सकें विदेश में, कर मेहनत प्रयास, 
पैसा लिया उधार में, भले दिनों की आस.
वेतन में डॉलर मिलें, बढ़े स्वयं का मान,  
छिड़ा युद्ध इस बीच में, धरे रहे अरमान. 
मुद्रा महँगी हो गई, क्रय ताकत कमजोर,
रोक सको तो रोक लो, चले नहीं कुछ जोर.
हालत मध्यम वर्ग की, पतली होती जाय,
रुपये की उपयोगिता, घटवा देती आय.
आवश्यकता कम करो, नहीं खर्च बेकार,
बेईमानी को भुला, करो काम उपकार.
काम सृजन के राष्ट्र में, राजनीति से दूर,
मँहगाई का सामना, नहीं देश मजबूर.
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रहिए स्वस्थ जीवन में, कुछ कर लें व्यायाम,
नहीं अधिक, बस कीजिए, थोड़ा सा आराम.
बुरी अधिक हर चीज़ है, सीमा में हो काम,
सीमित कसरत ठीक है, बीच बीच विश्राम.
चलता फिरता तन रहे, मुख पर हो मुसकान,
खुश हो कर सबसे मिलें, रहे नहीं अरमान.
मिले चार दिन जिंदगी, भज लो हरि का नाम,
नहीं दिखावे में रखा, दुनिया है बदनाम.
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ईश बनाते जगत यह, सुंदर सा वरदान,
जीवन भी हमको दिया, मौज करे इंसान.
मजे करें आनंद लें, देखें झरने, नीर,
पर्वत की जलवायु भी, हरती तन मन पीर.
घमोहक दृश्य सुहावने, दिखें उदित रविराज,
अस्ताचल भी सूर्य का, करे मुदित समाज.
पर्वत स्थल की शृंखला, बदले जीवन धार,
बने आधार आय का, घूम सकें हर बार.
सीधे, सच्चे लोग हैं, मिलने को तैयार,
बीमारी में बन गए, हमारे मददगार.
यादें अंकित हो गईं, सारी जगह विशेष, 
रही वहाँ कुछ खासियत, करते याद दिनेश.
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करना चाहूँ नमन मैं, लूँ कैसे वह नाम,
दिल बोले भूपेन दा, तुम को लाख प्रणाम,
तुम को लाख प्रणाम, नई दिशा दे संगीत,
विदेश में भी मिली, उन को जन मन की प्रीत,
गायन का शौक हो, सजें स्वर उन से सपना,
याद आठ सितंबर, रहे सदा नमन करना.
---------
याद पिटारा जिंदगी, रखो इसे संभाल,
खोल इसे देखो कभी, होगे मालामाल.
खट्टी मीठी याद से, मन होता बेहाल, 
गहरी बसी दिमाग में, पाएं नहीं निकाल.
नहीं जरूरी याद हों, सभी बात खुशहाल,
नयन भरे हों अश्रु से, पूछो देते टाल. 
बचपन, शादी, नौकरी, या रिटायरी हाल,
बात पुरानी ना कहो, कैसा बीता काल.
अगली पीढ़ी को समझ, करो उम्र का ख्याल.
क्या देखा अपने समय, उसका नहीं मलाल.
बीती ताहि बिसार दो, करो भजन भगवान, 
कैसा हो बाकी समय, अगले जनम का ध्यान.
--------
दो दिन का जीना है, दो दिन का मौताना,
जीते जी खुद हँसना है, मरने वाले पर रोना.
नेक करम कर ले रे बन्दे, याद बाद में आना,
नहीं किसी से दुश्मनी, सबसे हो याराना.
दो दिन का जीना  ....

हँस कर सबसे बात करो, कोई नहीं बेगाना,
ऐसी बातें हम करें, चाहें सब दिल लगाना,
नहीं किसी का दिल दुखे, रोते को चुपा पाना.
दो दिन का जीना ....

यादें ही बस रह जाएँगी, न उनका शोक मनाना,
बन सको प्रेरणा किसी की, ऐसी राह सुझाना,
आ जाओ काम मुश्किल में, ऐसा जीवन अपनाना.
दो दिन का जीना ....

चढ़े न माला फूलों की, आँखों से आँसू टपकाना,
करम हमारे ऐसे रहें, बने याद का बहाना,
मिलें गालियाँ ना बाद में, अंत समय में पछताना.
दो दिन का जीना ....
-----
मानव जीवन में बना, साधन ज्ञान विज्ञान,
इधर उधर सब घूम कर, बनते चतुर सुजान.
गुणी लोग ढूँढें वहाँ, कृपा लक्ष्मी मात,
पैसे कैसे कमा लें, कैसे बनेगी बात.
देशाटन व्यवसाय है, आए का सम्मान, 
सबको सब सुविधा मिलें, अतिथिगण मेहमान.
शासन उत्साहित करे, मूलभूत आधार, 
रोचक आवागमन हो, बढ़े आय आकार.
खोजें कुछ इतिहास को, थोड़ा सा भूगोल,
हो नव विकास स्थापना, सोचें अपना रोल.
नाम मिले हर क्षेत्र में, हो प्रसिद्धि हर ओर,
उसके दिल में हो खुशी, यह दिल माँगे मोर.
------
अपने ग्रुप में शुरु हुई, क्विज़ गतिविधि हर रोज़,
होता मनोरंजन भी, सारे करते मौज.
कुछ तो नियमित लोग हैं, जो करें इंतज़ार,
बाकी पढ़ कर टाल दें, नहीं हों बेकरार.
कुछ मेहनत अकल लगा, कर दी क्विज़ तैयार,
विषय चुनें कुछ खास तो, उत्तर की भरमार.
कोशिश अपनी यह रहे, मिले भला प्रतिसाद.
क्विज़ मास्टर को भी मिले, प्रमाण पत्र प्रसाद.
क्विज़ आती दो साल से, चल सके लगातार,
पूरे दो साल हो गए, आगे हम तैयार.
अकल लड़ाने के लिए, चुने गए कुछ मीत,
किसी विषय पर बन सके, होती उनकी रीत.
--------
टॉपिक तो समझे नहीं, क्या समझाएं बात,
मन से कुछ भी हाँक दो, मिल अज्ञानी की जात.
अंग्रेजी के शब्द से, मन घबराता जाय,
किस बारे में बात हो, नहीं व्यर्थ फरमाय.
नहीं जरूरी हम करें, हर बात पर प्रयास,
कभी कभी कुछ छोड़ दें, करते लोग कयास.
--------
उमर बढ़ी, अनुभव बढ़ा, पाया अनुपम ज्ञान,
साठ साल से अधिक हों, वरिष्ठ का सम्मान.
सेवा से निवृत्त हुए, चलें ना हाथ पैर,
इज्ज़त से की नौकरी, नहीं किसी से बैर. 
लाभ अधिक कुछ मिल सकें, रखें उमर का ख्याल,
रखें आप भी उमर का, हुए श्वेत सब बाल.
नाती पोते साथ में, किस्मत करे कमाल,
चढ़ें शीश या पीठ पर, खीचें मूछें गाल. 
---------
बेटी छोड़े मायका, चली गई ससुराल,
मिले प्यार उनका उसे, सबका रखे ख्याल.
बेटी मानो बहू को, दे कर पूरा प्यार,
समझो उसके भाव को, करिए खूब दुलार.
मिली बहू बड़भाग से, जीवन भर का साथ,
अपना बेटा सौंप कर, दिया हाथ में हाथ.
ताने मैके के लगें, सास, ससुर की बात, 
बहू शाँति से सुन सके, घोर विपत टल जात.
दीखे उसका आचरण, हों ऐसे संस्कार,
पिता आशीश दे कहे, सुखी रहे परिवार.
संयम रखिए क्रोध पर, बात गलत हो जाय,
हो पछतावा बाद में, बिगड़ी भी सध जाय.
--------
इज्जत से जीवन जियो, नहीं रहो लाचार,
मान दूसरों का करो, चाहो उनसे प्यार.
ऐसे अपने करम हों, जनता करती याद,
नेक रोल ऐसा रहे, अपने जीवन बाद.
भूल नहीं हम कुछ करें, मन में हो अवसाद,
अगर कभी गलती हुई, करें ईश को याद. 
--------
सफल व्यक्ति की हो नहीं, किसी क्षेत्र में हार,
मूल मंत्र उसको पता, कभी न खाए मार.
लगन लगी हो काम की, हरदम करे विचार,
बुरा किसी का हो नहीं, सबको करता प्यार.
सीमा नहीं विजय की, होवें सतत प्रयास,
नहीं किसी का मुख तकें, अपना है विश्वास.
-------
मानव जीवन में करे, यश, बल का संचार,
बहुत जरूरी धन रहा, गुण गाए संसार.
सबकी होती लालसा, धन अर्जन भरपूर,
फिर भी गर्व न कीजिए, हो कर मद में चूर.
पढ़ लिख कर हो नौकरी, मिले धन शानदार,
इज्जत मिले समाज में, पूछें रिश्तेदार.
जग में रौशन नाम हो, बढ़े मान सम्मान,
त्याग करें हम हर तरह, ऐसी हो संतान.
पति पत्नी की नौकरी, अधिक आय का स्रोत,
आया बच्चे पालती, कैसे चरित्र ग्रोथ.
समय नहीं उपलब्ध है, मात पिता के पास,
सीखें खुराफात सदा, बच्चे रहें उदास.
नाना, दादा खेलते, नाती पोते साथ,
अच्छी बातें सीखते, संस्कार रख माथ.
बिगड़ गए बच्चे अगर, जीवन है बेकार,
शिक्षा उनको आप दें, सपने हों साकार.
--------
नर नारी दो पक्ष हैं, दिए विधाता दान,
सृष्टि इन्हीं से चल रही, आपस का सम्मान.
कैसे वंश वृद्धि करें, इतना आया ज्ञान,
शादी की संज्ञा मिली, हो जाती संतान.
कुछ को शादी लग रही, जीवन का जंजाल,
आजादी से जी सकें, मस्ती मालामाल.
धन अर्जन की लालसा, नहीं कोई दायित्व,
परमेश्वर है रोकड़ा, उससे ही अस्तित्व.
मज़े ज़िंदगी के करें, दें लिव-इन का नाम,
संविधान भी मानता, नहीं शब्द बदनाम.
प्रचलित नहीं अधिक हुआ, संस्कृति है प्राचीन,
फिर भी समाज में बढ़ा, शादी रूप नवीन.
--------
लव यू पत्नी से कहें, करके सोच विचार,
हो सकता विपरीत भी, होगा बेड़ा पार.
सच्ची जीवन संगिनी, पत्नी जिसका नाम,
करो बिना नागा उसे, उठ कर रोज प्रणाम.
सात जन्म का साथ है, जब से हुआ विवाह,
कितना सुंदर मन रहा, हरदम बोलो वाह. 
जीवन भर सेवा करे, देती तन मन वार,
नहीं कभी भी भूलिए, उसका यह उपकार.
बच्चे भी भगवान के, होते सुंदर रूप,
गर्व करें उपलब्धि पर, कैसे बने अनूप.
समय पड़े तो डाँटिए, अक्सर करिए प्यार,
सारा जीवन याद हो, उनको यह उपहार.
--------
मिलते नहीं मीत सदा, किस्मत दे जब साथ,
ऐसा मौका कभी भी, जो पकड़ सके हाथ.
मीत बनाओ शक बिना, करो पूर्ण विश्वास,
जैसा है मेरा रहे, जीवन की हर साँस.
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जीवन में है योग का, एक अलग ही स्थान,
करिए बढ़ती उमर में, चित्त लगा कर ध्यान.
चलती प्राणायाम से, संयम पूर्वक श्वास,
बी. पी. भी सीमित रहे, अधिक आयु की आस.
रक्तचाप विकार रहा, रखो भला आहार, 
काबू रखें सीमा में, निर्मल रखें विचार.
योग मुद्रा में बैठ कर, धरें ईश का ध्यान,
शुद्ध भाव, विचार रहें, बने चरित्र महान.
संभव है मधुमेह का, बगैर दवा इलाज,
प्राणायाम नित्य कर के, स्वास्थ्य बनाएं आज.
जब भी आप ध्यान करें, मचे न कोई शोर,
हो मन की एकाग्रता, नाचे मन का मोर.
--------
जीवन भर लेते रहे, अपने निर्णय आप,
कभी खुशी मिलती हमें, वरना पश्चाताप.
विगत समय उपलब्ध थे, नाना भाँति विकल्प,
चुन सके हम एक ही, नहीं देर की अल्प. 
लाभ नहीं कोई हुआ, सोचा यह थी भूल,  
ऊपर वाले ने लिखा, वर्तमान ही मूल. 
--------
जन्म मात ने दे हमें, दिखा दिया संसार,
बड़े हुए, सीखा यहाँ, कैसा जग व्यवहार.
कुदरत से हमको मिले, एक समान शरीर,
लोगों ने अपने लिए, दी भेदभाव पीर.
बांटे काम समाज में, बना वर्ण आधार,
पीढ़ी दर पीढ़ी करें, समाज पर उपकार.
अपनाई कुछ नीतियां, शोषण बना प्रधान,
जात पात के फेर में, समानता व्यवधान.
नेताओं ने मतलब से, बाँट दिए सब लोग,
भेद किया, नफरत बढ़ा, लगा दिया यह रोग.
आरक्षण के लोभ ने, किया कला से दूर,
अपना काम भुला हमें, बना दिया मजबूर.
-------
आज बताना है हमें, खुश रहने की रीत,
सभी गले लग कर मिलो, खूब निभाओ प्रीत.
रोग बुढ़ापे म़े लगे, करो तुरत उपचार,
घेर सकें ना आपको, कहें नहीं बीमार.
रोगों की संभावना, बढ़े आयु के साथ,
लक्षण बी.पी., सुगर के, टेस्ट हाथ के हाथ.
साँस रहे तो जिंदगी, करता काम दिमाग,
हाथ पैर चलते रहें, क्यों समाज से भाग.
यारों से खुल कर करो, अपने दिल की बात,
जीवन साथी पास हो, किधर गए दिन रात.
लगे उदासी जब कभी, सोमरस दो गिलास,
चना चबेना साथ में, कई यार हों पास.
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नहीं किसी का दिल दुखे, निकले दिल से आह,
उसकी वाणी सत्य हो, आँसू करें प्रवाह.
बुरे करम इस जनम के, आहत करें जरूर,
आज नहीं तो कल मिले, करिए नहीं गुरूर.
बदला लेना जब कभी, लगे दाँव पर जान,
निश्चय पक्का कीजिए, छोड़ो नहीं प्रमाण.
-------
जीवन में होता रहा, सुख दुख का आभास,
क्षणिक भावना फेर ने, बदल दिया इतिहास.
औरों का करिए भला, मन में सुख अनुभूति, 
बुरा किसी का ना करो, नष्ट करे जो प्रीत.
घटना जो सुख अधिक दे, मीठी रहती याद,
रहे सदा जो सालती, जीवन हो बरबाद.
------
कठिन समय जाता निकल, धरिए धीरज आप,
नहीं क्रुद्ध होवें कभी, कर जाते हम पाप.
रहता नहीं समय सदा, बदले किसी का हाल,
लगती नहीं देर कभी, लिखा आपके भाल.
अनुभव और ज्ञान करे, कठिनाई से दूर,
भ्रम में पड़ कर भटकता, अहंकार में चूर.
-------
होती आदत लोग की, टाल रखो कुछ काम,
होगा कल फिर, जो करो, खतम आज सब काम.
देखें जब साथी सभी, बहुत व्यस्त इंसान,
फुरसत में जीता नहीं, करे काम का मान.
रोना रोओ काम का, रहो नहीं गंभीर,
लो सबकी सद्भावना, दे दो उनको पीर.
काल करै सो आज कर, कहते दास कबीर,
सीधे सज्जन मानते, यही बात गंभीर.
अपना काम तुरत करें, कहे भली यह नीत,
टला आज तो टल गया, देखी जाती रीत. 
नहीं काम को टालिए, बनिए जिम्मेदार,
क्षमता दिखती आपकी, बन जाएं सरदार.
--------
अपनी पहली नौकरी, जाते ऑफिस रोज,
चिढ़ कर चढ़ते साइकिल, खूब मनाते मौज.
ओ.यन.जी.सी. की कृपा, पाया वाहन लोन, 
सुपर केसरी ले लिया, रहे पड़ोसी मौन.
चढ़ स्कूटर पर चले, दिया मूँछ पर ताव,
रौब साथियों पर पड़ा, अपना बढ़ा प्रभाव.
पी.यू.सी. तब था नहीं, बस रहे लाइसेंस,
बीमा कागज साथ में, चढ़ जाओ फुल सेंस.
खूब घुमाया सब जगह, मंदिर, तीरथ राम,
तीन सवारी ले चले, बरफ मसूरी धाम.
खर्च चार रुपये करो, लो लीटर पेट्रोल,
तीस किलोमीटर चले, देखो मीटर बोल.
--------
जीवन यापन सुखद था, मजे लिए भरपूर, 
मौलिक जीवन जी लिए, रहे दिखावे से दूर.
नहीं आज का युग रहा, हो जाती तौहीन,
फँसें बनावट फेर में, बने रहे शालीन.
जीवन अपना था भला, सादा, बिना विवाद,
मतलब अपने काम से, नहीं समय बरबाद.
सच्ची बात कहें, करें, नहीं बोलते झूठ,
एक दूसरे की सुनें, अकसर जाते रूठ.
आ कर झूठे दंभ में, टूट गए परिवार, 
जनता में भ्रम फैलता, तज समाज संस्कार.
शुद्व हवा पानी मिली, पड़े नहीं बीमार,
आज प्रदूषण काल में, जीवन है बेकार.
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चुन कर कोई भी विषय, बनती फिल्म जरूर,
शिक्षा, रक्षा, भाव की, कोशिश हो भरपूर.
दिल को सबके छू सकें, ऐसे हों संवाद,
आँसू आए आँख में, रखती जनता याद.
गानों की तो बात क्या, ऐसे उनके बोल,
सब लोगों को याद हैं, गाते गाते डोल.
लिखने वाले ने लिखे, अवसर वाले गीत,
अभिनेता भी गा रहे, गायक का संगीत.
चली कहानी इस तरह, देखी उस पर फिल्म,
जो अंतर को भेद दे, ऐसा देती इल्म.
जीवन की बोरियत को, करती फिल्में दूर,
अलग असलियत से रहीं, काली लगतीं हूर.
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आना जाना हो कहीं, रखो साइकिल, कार,
चला सको तो ठीक है, वरना सब बेकार.
अपना वाहन चल सके, रहें जेब में दाम,
विधिवत लाइसेंस बने, सबसे अच्छा काम.
पी.यू.सी. करवा लिया, सारे पेपर पास,
घूम कहीं भी आइए, मन में हो उल्लास.
सुविधा ओला, उबर की, ले लो ऑटो कार,
सीमित केवल नगर में, बाकी में उपकार.
बूढ़ा केवल तन हुआ, मन तो अभी जवान,
अपना काम करे चलो, जब तक तन में प्रान. 
अंग शिथिल जब हो गए, हारा थका शरीर,
हाथ पैर चलते नहीं, बढ़ती जाती पीर.
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प्रकृति हमें देती सदा, जल, थल के आयाम,
कुदरत ने मांगा नहीं, कभी किसी का दाम.
समझ नहीं पाए कभी, इनका कोई मोल,
कोई धन ना कर सके, इनकी कीमत तोल.
कंजूसी से व्यय करें, कुदरत के उपहार,
खूब सोच कर, कर सकें, जीवन में व्यवहार.
मुफ़्त मिली हर चीज़ का, कर लें हम सम्मान,
देखें दाँत बछिया के, यह होगा अपमान.
कदर नहीं हम समझते, मिले मुफ़्त का दान,
अर्जन हो मेहनत से, कीमत उसकी जान.
वोटों की खातिर रखें, किसी वर्ग का ध्यान.
मान लिया अधिकार ज्यों, क्या है वह अहसान.
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बुद्धू बक्सा भी कहें, टी.वी. जिसका नाम,
सभी घरों में लगा है, करता नाना काम.
इस के रूप बदल रहे, विकसित अब तकनीक,
माध्यम है प्रदर्शन का, हिलता दिखे प्रतीक. 
खबर, सिनेमा, मैच से, हो जीवन आसान,
एक साथ मिल देखते, घर परिवार समान.
कैसे मना पिता करें, उनका खुद का शौक,
बच्चे जब पढ़ लिख चुके, कौन लगाए रोक.
खूब ज्ञान भी बढ़ रहा, भाषा या संगीत,
नियत समय देखें अगर, सुधरे उनकी रीत.
देखें सीमा से अधिक, होते नयन खराब,
नींद संतुलन विकृत हो, चस्का लगे शराब.
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रीत रही आतिथ्य की, आए जब मेहमान,
जरा पूछिए चाय को, उसको अपना मान.
आप कई विकल्प रखें, चुनने का अधिकार,
सभी चुनेंगे चाय को, दिखे चाय से प्यार.
दूध, हरी, काली चुनें, अदरक, नीबू स्वाद,
चीनी डेढ़ चम्मच हो, हरती सभी विषाद.
चीनी से परहेज हो, जो झेलें मधुमेह,
वो क्या जाने चाय भी, करे खोखली देह.
तलब चाय की छात्र को, देती नींद भगाय,
गर्भवती नारी नहीं, करती सेवन चाय.
चर्चा होती चाय पर, खुल कर रखें विचार,
एक चाय आदर भरी, करती भूल सुधार.
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मूँछ दिखें श्रीमान की, पड़ता रौब महान,
इसे आप जरूर रखें, यह मानुस की शान.
बिना मूँछ का आदमी, बेच दिया सामान,
घूमे जैसे शूपर्णखा, कितना भी विद्वान.
जाएँ आप सेना में, करते लोग सलाम,
मूँछ रखे तत्पर दिखें, वरना हो विश्राम.
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जीवन की घटना सभी, चलें कृपा श्रीराम.
उस बिन कुछ संभव नहीं, जीवन होत विराम.
साँसें चलती रात दिन, होता हर पल नेक,
मान सको तो शुक्रिया, प्रभु का कर अभिषेक.
कभी कभी ऐसा घटे, होता नहीं यकीन,
मान उसे प्रभु की कृपा, ऐसा कहें ज़हीन.
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माता पहली शिक्षिका, देती पूरा ज्ञान,
सदा चाहती बाल का, हर संभव कल्यान.
साथ पिता के जाइए, जिज्ञासा हो शान्त, 
मस्ती मजा अलग मिले, लोग कहें संभ्रांत.
पहले गुरुकुल चलन मैं, अब दिखते कांवेंट.
ऐसा पद मुझको मिले, बन शासन सर्वेंट. 
बीच पढ़ाई में मिले, शिक्षक नाना मूल,
याद अभी भी कुछ रहे, बाकी जाते भूल.
नेगी जी की क्लास में, करें चाय, जलपान,
दो घंटे पूरे पढ़ें, जा मिठाई दुकान.
आज तलक देखी नहीं, ऐसी कोई क्लास, 
विषय वस्तु में रुचि रही, सारे बच्चे पास.
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बीत गया बचपन खुद का, आता याद अतीत,
साथ समय के भूलते, यह दुनिया की रीत.
कई सुनहरी याद से, विचलित होता चित्त,
नए पुराने यार भी, अब कमा रहे वित्त.
शैतानी हमने करी, बहुत पड़ी फटकार,
लेकिन उसमें हित छुपा, बड़ों का रहा प्यार.
वही करें, जो हम किए, अपने बच्चे संग, 
दुहराते इतिहास को, रहें सलामत अंग.
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शुभ दिन है ग्रुप के लिए, पूरे आठ साल,
सबकी प्रतिभा से बना, चार ग्रुपों का हाल.
अंजू, मंजू, मैथिली, करतीं काम महान,
आयोजन में आज के, सब मुश्किल आसान.
योगदान पा आप का, मन में होता हर्ष,
सभी मित्र से विनय है, ग्रुप का हो उत्कर्ष.
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कोरोना ने छेड़ कर, किया हमें बेहाल,
एकाकीपन में कटे, किसी तरह दो साल.
अपने दुखड़े झेलते, लोग हो गए बोर,
नए केस कितने मिले, गूँज रहा था शोर.
करें कामना हम मिलें, एक जगह इक बार,
दिल के हाल कहें सुनें, मिल बैठें सब यार.
करें अनुरोध प्यार से, सहमति दे दो यार,
अहंकार में अड़ गए, बोलो न बार बार.
सालगिरह हो शान से, कोशिश सब कर जाय,
रहे अलग कोई नहीं, शामिल सारे होंय.
इस उत्सव में दीजिए, बेहतर योगदान,
याद रखें सारे मज़े, सबका हो कल्यान.
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खुश हो कर सबसे मिलें, मुख पर हो मुस्कान,
मिलना चाहें आपसे, बिना किसी व्यवधान.
लोगों के संग खुश हों, मन में भरे उमंग,
ऐसा जीवन है भला, झूमें सारे अंग. 
खुश हो कोई आप से, छाऐ मन आह्लाद,
सभी भलाई कर सकें, तन मन में उन्माद.
नहीं किसी का दिल दुखे, कोई हो नाराज,
खुशहाली हो सब जगह, यही अपेक्षा आज.
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माफ गलतियों को करें, है बड़प्पन प्रमान,
बांधें बंधन में नहीं, करें क्षमा का दान.
गलती कोई भी करे, यदि ले उसको मान,  
असर नहीं गंभीर हो, सज्जन की पहचान.
बोझ गुनाहों का रखें, अपने दिल पर आप, 
आप सुलगते क्लेश में, मन में रख कर पाप.
--------
सदा सत्य बोलें, कहें, नहीं बाद में लाज,
मान और विश्वास दें, कहता सकल समाज.
झूठ बने आधार जब, दिखे गर्व अनुभूति,
जहाँ कहीं पकड़ा गया, मिट्टी होत पलीत.
निर्णय लेना रीत है, जीवन का संग्राम,
गलत सही को छोड़िए, करने वाला राम.
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शब्द तोल कर बोलिए, रख कर सबका मान,
घाव बड़े गंभीर हों, रहे सदा ही भान.
मिलती ताकत ज्ञान से, बढ़ जाता विश्वास,
बोला गया, सब ने सुना, जगती मन में आस.
आदर करें चरित्र का, उसे मिले सम्मान,
इसे बनाना कठिन है, कहते चरित्र वान.
मिले ज्ञान चरित्र संग, आ जाती बहार,
जीवन में आनंद हो, मिल जाएं दो यार.
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एक रहे तो बल मिले, बट गए, घट जाय,
रस्सी बटी जब तक है, बल ना उसके जाय.
भेद डाल कर बाटिए, लगे न टूटन बार,
यही हाल इंसान का, जात पात अधिकार.
जड़ें पेड़ की हैं जमीं, संभव नहीं हिलाय,
जहाँ कुलाड़ी चल गई, रोक न कोई पाय.
शीतलता खड़े वृक्ष की, दे सुख का आभास,
सूखे गिरते पेड़ से, रखो न कुछ भी आस.
------
रखें ध्यान हम काम पर, जो भी लेवें हाथ,
सभी बिंदु पर नज़र हो, पा औरों का साथ.
मूल्यांकन खुद का करें, निश्चित करें मुकाम,
आगे पीछे गति रखें, बढ़े समय से काम. 
प्रगति देख मिलती खुशी, मन में हो संतोष,
झींक नहीं उठती कभी, लगे नहीं कुछ रोष.
-------
शायद, हिंदू जाग रहा.
रोज़ रोज़ की, अजान से जंग,
लड़ लड़ कर, किच किच से तंग,
दिखते खिले नए नए रंग,
शायद, हिंदू जाग रहा.

अब कायर नहीं होगा,
साहस का संचार होगा,
हमको आगे आना होगा,
शायद हिंदू जाग रहा.

शाँतिप्रिय कहना बंद करो,
अल्पसंख्यक बोलना बंद करो,
बातों में आना बंद करो,
शायद हिंदू जाग रहा.

नहीं हम कोई दंगाई हैं,
अनेक बार विष पी चुके हैं,
प्रताड़ना हर बार झेल रहे हैं,
पर, शायद हिंदू जाग रहा है.
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अपना मार्ग प्रशस्त कर, हमें प्रेरणा देत,
खुद भी आगे बढ़ सकें, अपना रास्ता लेत.
आकाशदीप ज्यों दृढ़ थे, चाहे हो तूफान,
वरद हस्त हम पर रहा, कितने रहे महान.
अपने अनुभव हमें दे, करके मार्ग प्रशस्त,
उनसे हम भी सीख कर, लगे सदा ही व्यस्त.
------
कला तो रहेगी कला, चाहे रची नवीन,
गौरव रहे विकास पर, जितना हो प्राचीन.
-------
साथ समय के हम रहें, हो गौरव का भान,
लज्जित भी ना हों कभी, झेलें कुछ अपमान.
प्रगति तकनीक साथ हो, बढ़ता जाए ज्ञान,
अनुभव छोटे बाल का, करे हमें हैरान.
अक्सर सुलझे समस्या, उनका लगे दिमाग,
उचित मान उनको मिले, सुलझे जीवन राग.
साथ नियंत्रण के रखें, बच्चों पर निगाह,
नहीं हनन हो चरित्र का, पकड़ें सीधी राह.
--------
चलने हित सड़कें बनी, रखें सभी का ध्यान,
मनमर्जी चलती नहीं, नियम का प्रावधान.
गाड़ी से गर जाइए, रखिए पेपर साथ,
फौरन ही रुक लीजिए, जब पुलिस दे हाथ.
पालन नियमों का करें, चलिए बांए हाथ,
जल्दी में कोई दिखे, सुन लो उसकी बात. 
चलें सुरक्षित सड़क पर, ले कर सबका हाल, 
बिन दुर्घटना जाइए, सुरक्षा बड़ा सवाल. 
--------
ज्ञान स्रोत तो बहुत हैं, रहे नहीं कुछ याद,
बात लिखे की है अलग, पढ़िए बिना प्रमाद.
कहे सुने को भूल जा, लिखा पक्का सुबूत.
लिखा पढ़ी का मामला, सभी जगह मजबूत.
पैसा जमा नहीं करें, अपने भरें भंडार,
विद्या जितनी ले सकें, हो जाता उद्धार.
संशय जीवन में लगे, देखें सही किताब,
सभी समस्या हल करे, बढ़ जाता रुआब. 
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तैर तैर कर तर गए, भव सागर से पार,
नहीं कृपा गुरु की रही, डूबन को तैयार.
सबसे भला लगे हमें, तैराकी व्यायाम,
साँस बराबर जब चले, थक कर हो आराम.
हाथ पैर को फेंक कर, पानी हटता दूर,
बाहर आप निकल सकें, कला आपकी नूर. 
खेल खेल में तैरते, अपने साथी साथ,
कभी घटे ऐसा कहीं, साथी थामें हाथ.
-------
नहीं भलाई से भला, होता कोई काम,
मदद सभी की कीजिए, जो करता परनाम.
दीन उसी को जानिए, होता कातर भाव,
संकट मुद्रा अलग से, डाले खास प्रभाव.
अनजाने में हो भला, मिले दुआ दिल साथ,
उसकी करनी साथ में, करम आपके हाथ.
--------
खाना माँ के हाथ का, लगता अमृत समान,
अभी तलक भी याद हैं, बने नए पकवान.
अपने घर उत्सव मने, बात सभी में खास,
फरमाइश माँ से करें, मन में था उल्लास.
खट्टे, मीठे, चटपटे, अलग सभी का स्वाद,
व्यंजन नाना रूप में, अब तक हमको याद.
कल की चिंता पिता ने, करी सहज कल्यान,
हो सुनहरा भविष्य भी, उनका लक्ष्य महान.
प्यार हमेशा मिल गया, रखा हमारा ध्यान, 
रहे नाक समाज में, उचित मिले सम्मान.
पड़ी जरूरत कड़क भी, बनता उनका भाव,
प्रेम, मान, भय दंड का, अद्भुत रहा प्रभाव.
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तुम क्या ले कर आ गए, यहाँ दिया जो खोय,
जो कुछ मिला यहीं लिया, फिर काहे को रोय.
खाली हाथ आए थे, जाओ खाली हाथ,
याद लोग तुम को रखें, करम भले हों नाथ.
पाओ मज़ा यात्रा का, कम रहता सामान,
हाल यही जीवन कहे, मत रखिए अरमान.
--------
बढ़ी आयु के साथ में, होता तन का ह्लास,
फिर भी वह चंगा रहे, म्यूजिक से परिहास.
कितने गम में चल रही, अपनी जीवन नाव,
दे कर चैन, सुधर सके, ऐसा है प्रभाव.
एक शौक अपनाइए, गायन, वादन, नृत्य,
सारे गम को दूर कर, तन मन करता स्वस्थ.
गाना गा कर जी लिए, सूफी संत फ़कीर,
गाना सुन कर मिट गई, तन मन की सब पीर.
राग सजाए गान को, हो सुर लय के साथ,
अलंकार है ताल जब, वादक के हों हाथ.
जीवन में संगीत का, रहा खास अस्थान,
उसके बिन नीरस सभी, मिलते कई प्रमान.
--------
पाठ पढ़ाया योग का, दिया विश्व को ज्ञान,
रही सभ्यता हिंद की, है प्रेरणा जहान.
पूरे निश्चय से करें, हो कोई भी काम, 
योग, पढ़ाई कुछ करें, ध्यान बिना निष्काम.
करा मन लगा कर जहाँ, हो प्रयास साकार,
बिना नियम के जो करे, सब कुछ है बेकार.
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शक्ति सोचने की मिली, आया जब विज्ञान,
मनन और चिंतन करें, हो विचार का दान.
हुए उजागर भेद जब, होता गहन विचार,
अपना अंतर खोजिए, मिले सृष्टि का सार.
साथ मिले जब प्रकृति को, मंथन का अध्यात्म,
गुत्थी सुलझे प्रकृति की, तन से मिलता आत्म.
------
मंदिर तो उड़े आकाश में, धरती पर मस्जिदें रह गईं.
उधर भावना में हम बहे, इधर हकीकतें खिल गईं.
हम सोचें ख्वाब जन्नत के, उधर हूर बहत्तर मिल गईं.
आज़ादी के देखें सपने, उनको आजादी मिल गई.
कैसा अब यह गणतंत्र बना, इधर घटीं तो उधर बढ़ गईं. 
कैसे दें बधाई अपनों को, कैसी मुश्किलें पड़ गईं.
---------
पंडित ने लगवा दिए, फेरे अग्नि समक्ष,
चक्कर काटें साथ में. हवन कुंड है अक्ष.
वादा निभे जीवन भर, लिए हाथ में हाथ,
रूठ मनाएँ हर समय, सात जनम का साथ.
पति पत्नी को मिला, अलग जीवन स्थान,
इक दूजे के साथ ही, बढ़े जीवन विमान.
--------
हम को अच्छी लग रहीं, उसकी सारी बात,
करें जिकर बस तीन का, नहिं अपनी औकात.
बुरा भला जो भी कहे, हमको है स्वीकार,
अलग रूठ कर रह सकें, जीना है बेकार.
त्याग हमारे लिए हो, मान सको आभार,
पल पल की रखते खबर, हम पर है उपकार.
-------
मिलने को इक ग्रुप बना, जुड़े रहें कुछ लोग,
अपनी विपदा दूर हो, गायब होंगे रोग.
गतिविधियाँ ग्रुप की बढ़ीं, लोग हुए सब व्यस्त,
रुचि की सामग्री मिली, पढ़ कर होते मस्त.
कुछ को प्रोत्साहन मिला, कुछ होते नाराज,
राजनीति से दूर हों, लाएँ पास समाज.
अधिक लोग जब जुड़ गए, किए अलग कुछ लोग,
रेख विभाजन की बनी, कितने बूढ़े लोग.
फिर भी एका रह सके, ऐसा किया प्रबंध,
कई एडमिन चुन लिए, बने अटूट संबध.
तीन साल पूरे हुए, मिल कर करें विचार,
करते हैं हम कामना, बढ़ जाए परिवार.
--------
तीन दिसंबर जान लें, महापुरुष का नाम,
जीरादेई बन गया, राजन जी का धाम.
शिक्षा में आगे रहे, खूब कमाया नाम,
अध्यापक कानून के, बारीकी से काम.
आजादी के नाम से, आ जाती नव जान,
सच में जब हम को मिली, पाया जीवन दान.
नमन सभी उन को करें, दिल में रखते याद,
बनें प्रेरणा आप ही, करें यही फरियाद.
-------
पंडित अपने विषय के, करते व्यक्त विचार,
जो भी उनको जान ले, मानेगा आभार.
-------
रहे आवरण झूठ का, ढकती सच्ची बात, 
सूरज लगता चाँद सा, दिन में लगती रात. 
नहीं मिलें हालात जब, मन इच्छा अनुसार,  
अवसर हो वरदान का, नहीं करें आभार. 
ईश कृपा दिखती नहीं, लगे शाप आसार, 
शंका हो हर काम में, कैसे हो व्यापार. 
-------
उत्सुकता से कर रहे, आज क्विज़ इंतज़ार, 
प्रति दिन प्रतीक्षा क्विज़ की, उत्तर को तैयार.
नई नई परिकल्पना, रचा नवल इतिहास, 
अलग थीम पर रोज की, उत्तर का आभास. 
नवराते इस बार के, बना दिए कुछ खास, 
रूप, शक्ति के प्रश्न में, भोग सहित उपवास. 
------
अवसर हम को मिल गया, क्विज़ का करें सुचार,
कोशिश थी इस बात की, हो ऊर्जा संचार. 
कई विरासत में मिलीं, बाकी क्विज़ आभार, 
नए लोग तैयार थे, उमड़ा सबका प्यार. 
दिखा उत्साह गजब का, उत्तर को तैयार, 
सभी लगे उत्सुक यहाँ, क्या हल कल हो यार. 
गणित, चित्र, संगीत में, सबका लगा दिमाग, 
बिज़ी लोग भी कुछ मिले, करते भागमभाग. 
क्विज़ मास्टर हर दिन अलग, खेलें अपना खेल, 
उमड़ी भीड़ जवाब को, बढ़ी नाम की रेल.
एक माह पूरा हुआ, कुछ कर लिए सुधार, 
बाकी क्विज़ सब सौंप दीं, जो अगला तैयार. 
-------
जून माह के अंत से, सौंप दिया यह भार, 
जिसे निभाया अंजु ने, हम करते आभार. 
सबको अपना मान कर, दिया मान भरपूर, 
नए लोग भी जुड़ गए, पहले थे मगरूर. 
अब बारी मेरी है, घटित नहीं कुछ खास, 
कोशिश ऐसी मैं करूँ, बना रहे विश्वास, 
मिली आपकी मदद तो, ऐसा करूँ प्रयास, 
कीर्तिमान भी बन सकें, क्विज़ हों अपने पास. 
उत्तर सारे लोग दें, रख अपनी पहचान, 
सब कुछ संभव कर सकें, बिना किसी अनुमान. 
पूरा मेरा काम हो, नहीं कहीं तकरार, 
आप हमें देते रहें, अपना सारा प्यार. 
-------
नवरातों के व्रत में, खाए नहीं अनाज, 
रोटी सब्जी छोड़ कर, फल का सेवन आज. 
रोटी खाने के लिए, करती जनता काम,  
रोटी खा कर समय से, करें तनिक आराम.
ख़ातिर पापी पेट की, लोग करें कुछ पाप, 
बीबी बच्चे पालना, रहा बड़ा अभिशाप. 
-------
टी.वी. देखो मजे में, पसर बेड पर लेट, 
खाना पीना समय से, बढ़ता जाए वेट. 
दिखे बहू घर में जहाँ, फौरन बोलो काम, 
बहुत नौकरी हम करे, अब होगा आराम.
काम करो हर समय कुछ, अपना लगे दिमाग, 
खाली हो पूजा करो, घी का जला चिराग.
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प्रतिनिधि भारत के कहें, खेलें खेल क्रिकेट, 
आउट दूजी टीम जब, गिरते सभी विकेट. 
कंगारू के देश में, दिखा गजब का खेल, 
बच्चे बाजी मारते, जीत खेल की रेल. 
नगर नगर में चलन है, बहुत लोकप्रिय खेल, 
किरकिट उसका नाम है, खूब बढ़ाता मेल.
--------
राधा मिली सौरभ से, ठीक एक ही साल,
फिर भी कैसा हो गया, उनके दिल का हाल, 
उनके दिल का हाल, देखे बिन कठिन रहना,
ऐसा प्यार छाया, दिल का परस्पर मिलना, 
हम करते कामना, हो नहीं कोई बाधा, 
मुस्काएँ वह सदा, सुखी हों सौरभ राधा.
-------
रात अँधेरे में दिखे, चौकस पहरे दार,
बोरे भी सीमेंट के, खलते मन के द्वार.
-------
बेटी ने गाजर कसी, बेटा हलवा खाय, 
माता हर्षित देखती, मन में अति  हुलसाय. 
-------
छोटा ग्रुप दूजा बना, सन सत्रह के बाद, 
रहीं समस्या एक सी, हों समान परिवाद.
दोनों ग्रुप पूरा करें, बनने के दो साल, 
यार शताधिक मिल गए, करते खूब धमाल.
वाई-फ़ाई जब मिले, करो पोस्ट बौछार, 
नहीं अभी तक भी मिला, सच्चा कोई यार.
नए लोग ग्रुप से जुड़े, साहस है भरपूर, 
काल करोना ने किया, इक दूजे से दूर. 
बनी रहे सद्भावना, बढ़ता जाए प्यार, 
हाल चाल मिलता रहे, पूछे कुशल हमार. 
सभी यार कब मिल सकें, हमको है इंतज़ार, 
हाल करा करोना ने, मिलने को बेकार. 
------
शतक शतक के चक्र ने, रचा शतक का फेर, 
शतक नहीं सुलझा सके, हुई बुद्धि अब ढेर. 
लगा शतक समूहों का, पूछे कई सवाल, 
इनका हल खोजने में, हुए अनेक बवाल. 
पहुँच गई क्विज़ शृंखला, आए कई सवाल, 
पेश किए सब ग्रुपों में, चन्द्र पाल, यश पाल.
-------
नानी आएँ खुश रहें, बाल लगाते आस, 
जेट-लैग को दूर कर, कब आऐंगी पास. 
दूर सदा कोविड रहे, ऐसा था विश्वास, 
दुबक सहम कर बैठते, अपनी माँ के पास.
रहती नानी साथ में, मन में उठती प्यास, 
कैसे उनसे मिल सकें, पूरा हो बनवास.
--------
गूगल से टीपी नकल, बन बैठे कविराज, 
अपनी रचना कह रहे, करते भ्रमित समाज.
इधर उधर से टीप कर, कहे पहेली बोल, 
बता चुनौती और को, बोलें गूगल खोल. 
गूगल की महिमा बड़ी, हर कोई ले ज्ञान, 
भला सभी का कर सके, सब लेते संज्ञान. 
-------
साफ सफाई है प्रथम, कोरोना उपचार, 
स्वस्थ हमारा तन रहे, करता दूर विकार. 
जब भी बाहर जाइए, पालन हो बिन चूक, 
बाहर से हो घर वापसी, आए शव को फूँक.
मुख को ढाँपो मास्क से, जाओ जब भी फील्ड, 
घर से बाहर निकलिए, नैनों को ढक शील्ड.
पीड़ित अपने घर रहे, पूरा हो एकांत, 
चौदह दिन बनवास के, मन हो जाए शांत. 
घर में बंदी बन रहें, मिले सुरक्षित स्थान, 
खाना पीना अलग हो, अलग से करें स्नान.
आए अतिथि विदेश से, करिए स्वागत भाप, 
कोरोना की तेरवीं, मानों करते आप.
-------
कोरोना के काल में, देवालय हैं बंद, 
पर मदिरालय हैं खुले, कैसा है भव फंद.
नवरातों में तज दिया, सामिष भोजन भोग, 
अलकोहल से हाथ धो, दूर भगाते रोग. 
वापस घर को आ गए, कर दर्शन भगवान, 
नाटक ऐसा कर रहे, फूँका शव शमशान. 
-------
मुख को ढक लो मास्क से, साबुन का उपयोग, 
छुओ पड़ोसी को नहीं, दूर करोना रोग. 
छूत पात को भाव दे, तन को रखिए दूर, 
नहीं मिलाएं नज़र तक, पूरा लक्ष्य जरूर. 
दुखता कंठ खराश से, जब भी हो आभास,
गरम नीर सेवन करें, मन में रख विश्वास.
-------
चमकीली नगरी कहे, देख मुंबई शान, 
तड़क भड़क में खो गए, कितने चतुर सुजान. 
बॉलीवुड सपने दिखा, करे लोग बरबाद,
संघर्षों में रत दिखे, होने को आबाद. 
दारू की तो बात क्या, भांग चरस लो सोच, 
नशे सभी होते यहाँ, तन को खाते नोच. 
-------
सागर तट पर घूमते, युवक युवतियाँ साथ, 
अपने रस में मस्त हैं, डाल हाथ में हाथ. 
कभी डेट पर जा रहे, छोड़ें सारी लाज, 
उनकी ऐसी हरकतें, नहीं सराहें आज. 
जोड़े दिखते सब जगह, करें प्यार निर्बंध, 
लाज शरम को तज करें, तोड़े सब अनुबंध. 
------
बांद्रा की तारीफ़ सुन, हम भी जाते यार,
बैंड स्टैंड के नाम से, बजते मन के तार.
देखीं मोहक छोकरी, करने लगा विचार, 
कैसे हैं माँ-बाप जो, इतने बने उदार. 
छोरा छोरी मिल गए, खा कर कसम हजार, 
नशा जवानी का चढ़ा, भूले सब संसार.
--------
इस जग में उपलब्ध है, भाँति भाँति का ज्ञान, 
गूगल से सब पूछिए, बिना करे अभिमान, 
रख सकते हैं आप भी, अपने अलग विचार, 
खोजेंगे फिर आप को, मानेंगे आभार. 
चित्र, वीडियो भी मिलें, शंका होती दूर, 
जैसा जिसको चाहिए, मिले ज्ञान भरपूर. 
------
गूगल हमको बाँटता, सभी तरह का ज्ञान,
खोज करें मुद्दे सभी, मिले नई पहचान. 
ज्ञान बढ़ाने के लिए, देखें गूगल आप, 
मिटा सकें शंका सभी, हर लेता संताप. 
मिले हमें यू-ट्यूब से, नए नए पकवान, 
पका सके पढ़ कर उन्हें, जब से पाया ज्ञान. 
------
सभी सुलझते मामले, हो कोई भी बात, 
एक जगह पर खोजिए, गूगल की सौगात. 
मिले ढूँढने पर हमें, सबके अलग विचार, 
भले बुरे का भेद भी, उतरा दिल के पार. 
गागर में सागर भरो, मौलिकता के नाम, 
अपना ही कौशल दिखे, बड़ा कठिन है काम.
-------
गीता के उपदेश का, भाग एक सौ आठ, 
हमें सुवासित सब लगे, जैसे चंदन काठ. 
गीता भगवत ज्ञान की, माला रखी पिरोय,
चुने भाव उसमें मथे, चिंतन रखा बिलोय. 
लोहा मानें बात का, उर में धर कर प्रीत,
गुरु से सीखा ज्ञान जो, ढले अमल में रीत. 
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कुरते में ब्रा छिप गई, कच्छी है सलवार,
ऐसी पत्नी जो मिले, कैसे होता प्यार. 
कलाकार के योग से, बनते लोग महान, 
सभी बड़े हैं एक से, किसका हो गुणगान. 
उनकी प्रतिभा से हुए, सारे जन हैरान, 
परिचय कौशल का मिला, लेता लोहा जान.
दिखती सबकी रुचि अलग, अलग रहे हैं चाव, 
महज़ जौहरी जानता, क्या है इनका भाव. 
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खबर आज ताजा रही, टकराती सरकार, 
सत्ता मद में झूमती, नहीं सुनें तकरार. 
संसद में नेता करें, जिरह, बहस पुरजोर, 
बेमतलब की बात का, गुंजन चारों ओर. 
जिन जिन से मतलब सधे, उनकी रख दरकार, 
धता बता कर शेष को, करो दूर से प्यार.
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देख अंधेरा आ गए, लेने चुंबन यार, 
उनके मधुर संगीत से, रात हुई बेजार. 
छुप कर बैठें दिवस में, रात मनाते मौज, 
घात लगा हमला करें, रखें साथ में फौज.
छोड़ निशानी वह उड़े, रहती उनकी याद, 
जलन बढ़े उन से मिले, रात हुई बरबाद. 
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साठ साल की उमर में, खाते लड्डू साठ, 
जीम गए डकार बिना, देखो उनके ठाठ.
इस मंहगाई काल में, दमक रही है शान, 
गजब जवानी में करें, कितनों का बलिदान. 
उन्हें बुलाने में डरें, सभी पड़ोसी यार, 
गलती से कोई कहे, भूलें शिष्टाचार. 
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फिसले, चिपके चल दिए, लगता गीला हाॅल, 
ताजा पोंछा फर्श पर, जैसा जीवन काल. 
बचपन, यौवन, जरा में, ढलती आयु समान, 
तेजी से बचपन गया, चिपका यौवन जान. 
जरा देख मानव करे, पूजा, भक्ति विचार, 
आ पहुँचा अब काल है, हो जाओ तैयार.
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आज अचानक आ गया, मानसून विकराल, 
जागरूक हम थे नहीं, बुरा हो गया हाल. 
पता नहीं हम को लगा, कब होगी बरसात, 
गड्ढों में पानी भरा, बिन देखे दिन रात. 
छाता बिन बाहर चले, लड़ने रोटी जंग, 
भला बुरा घन को कहें, चिपकें कपड़े अंग.
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पूनम को बारिश पड़ी, आया सागर ज्वार, 
उफनाए नाले सभी, डूब गए बाजार. 
पूर्ण और नव चंद्र को, आता है तूफान,  
सागर तट जाओ नहीं, मौसम बेईमान.
जल प्रवाह में आ लगे, तट पर जलचर, जीव,  
मरे हुए सारे मिले, फिर भी लगें सजीव.
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इतना हल्ला मच रहा, टूट बहा पुल एक, 
खबर खबरची दे रहे, रस्ते कटे अनेक. 
वर्णन अपने से करें, मचता खूब बवाल, 
जैसे नाले में बहा, खुद का अपना लाल. 
सारे चैनल कह रहे, अपनी अपनी बात, 
जोर जोर से बोलते, क्यों बिगड़े हालात. 
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घर बैठे हो नौकरी, बड़े मजे का काम, 
सेवा कुछ ऐसी रही, मिले नहीं आराम. 
लैपटॉप पर हो रहे, आॅफिस के सब काम, 
भोजन का टाइम नहीं, होता बिन विश्राम. 
पुलिस, चिकित्सक, मीडिया, काम करें दिन रात, 
कोरोना को जीत कर, देते उसको मात. 
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सीमा-रक्षा जो करें, अपने घर से दूर, 
उसकी रक्षा खुद करे, पत्नी का सिंदूर.
दुश्मन से लड़ते हुए, जो दें अपनी जान, 
याद सदा उनका रहे, अनुपम यह बलिदान. 
नमन शहीदों को करें, दें समुचित सम्मान, 
बाद निधन के रख सकें, पूरे घर का ध्यान. 
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दिनचर्या को मिल गया, एक नया आधार, 
एक साथ मिल बैठते, जुड़ा हुआ परिवार. 
आते-जाते है नहीं, अतिथि रूप भगवान, 
घर में बैठ विचारिए, आना क्या सामान. 
बिना लक्ष्य जीवन जिएं, बीते काल कराल. 
रोज क्रियाएं एक सी, मन होता  बेहाल.
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वापस लौटी जिंदगी, निकल पड़ा इंसान, 
नहीं भजन होता कहीं, भूखी हो संतान. 
डर से घर में ही रहे, पूरे ढाई माह, 
रहे सुरक्षित भवन में, मानी पुलिस सलाह. 
कोरोना से कम मरे, भय ने मारे अथाह, 
अंदर से मजबूत हो, बढ़ती जीवन चाह. 
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छूट मिली, जनता हँसी, कर्फ़्यू है अन-लाॅक, 
धज्जी दूरी की उड़ीं, पुलिस खड़ी बेबाक. 
खुला लाक डाउन यहाँ, छोड़ा अपना नीड़, 
भागे कारोबार को, बढ़ा रहे हैं भीड़. 
देवालय, मस्जिद खुले, जाग गए भगवान, 
फिर से बजती घंटियाँ, होती कहीं अजान. 
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लगे नहीं खाया-पिया, थुल-थुल होत शरीर, 
बैठे-बैठे देखिए, टी.वी. पर तसवीर. 
सूनी सड़कें कह रहीं, बंद पड़ा व्यापार, 
आते-जाते जनों का, मुश्किल है दीदार. 
कथा पुरानी कह रहीं, होता कर्म प्रधान, 
हरि इच्छा को मान लो, जीवन हो आसान. 
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लेट बैठ कर, कर रहे, अपना टाइम पास, 
खाना-पीना चल रहा, कौन समय की आस. 
यार सभी खुद के कहें, अब तू नहीं जवान, 
बढ़ी उम्र के साथ में, लगा बुढ़ापा मान. 
मुखपोथी पर भाव से, करते वार्तालाप,
लिखें टिप्पणी मौज में, कटता मन का पाप. 
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घर में आफ़त मच गई, बिगड़ी जहाँ मशीन, 
लगा अडंगा काम में, आए कई ज़हीन.
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बंद लाक डाउन करे, सांसारिक सब काम, 
बाहर तो घूमें नहीं, घर पर हो आराम.
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नर्स, सफाई, पुलिस के, लोग रहें बेचैन, 
रहें तैयार हर समय, कैसे कटती रैन. 
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टी.वी. पर चालू हुए, नए सीरियल खास, 
मिली जानकारी हमें, गौरवमय इतिहास. 
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यादें फिर ताजा हुईं, मन के खुलते द्वार,
दर्शन सारे पात्र दें, देखो उमड़ा प्यार.
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दुहर कथानक सब गए, दुहरे उनके बोल, 
भाव भरी श्रद्धा रही, अंतर्मन को खोल.
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खतम महाभारत हुई, भीष्म चले परलोक,
कायम शासन शांतिमय, लगी युद्ध पर रोक. 
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ऐसी करनी खुद करें, रख औरों का ख्याल, 
सही काम यदि समय पर, होता नहीं मलाल.
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सभी करें अफसोस अब, युवक, वृद्ध विद्वान, 
काश करम करते भले, होता सबका मान.
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सबसे बढ़िया है दवा, स्वस्थ हास परिहास,
कई रोग में फायदा, यदि मन में विश्वास.
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हास्य जरूरी हो चला, करना हो उपचार,
योग गुरू भी मानते, होते दूर विकार.
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वैरी मन को जीत ले, मंद-मंद मुस्कान,
लगा ठहाका हँस सके, होती दूर थकान.
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जोर जोर से नाचते, सुन अपनी तारीफ़,
तनिक दिखा विरोध जहाँ, रहते नहीं शरीफ़. 
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जो कोई अच्छा कहे, उनसे मीठा बोल, गाली दे जो भी कहे, खोले उसकी पोल.
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सबके अच्छे बन रहे, जब तक भाती बात,
आहत हो संवेदना, दिखे तुरत औकात. 
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करो हवाले पुलिस के, जो ढूँढे उपचार, 
लगे ठिकाने अकल जब, पड़े पुलिस की मार.
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मौलाना माने नहीं, कोरोना का खौफ, 
मरकज से फैला दिया, घूम रहे बेख़ौफ. 
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दे कर खतरा देश को, हुआ लापता साद, 
बहुत ज्ञान था बांटता, फैला दिया विषाद.
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अब पूरी कर लीजिए, सभी अधूरी चाह, 
समय लाॅक डाउन कहे, सभी करेंगे वाह. 
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लिखना-पढ़ना भी करें, खुद की रुचि अनुकूल, 
गीत, गजल, संगीत के, खिले रहेंगे फूल. 
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व्हाट्सैप, फेसबुक पर, करिए मधुरिम हास, 
आहत हो कोई नहीं, घटे बिना विश्वास. 
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मजहब की खातिर करें, शातिर नए गुनाह,  
हर पल मनमानी करें, नहीं कहीं परवाह. 
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चोरी से हैं भागते, हो मस्जिद या जेल, 
खतरा बनते देश पर, करें पुलिस से खेल.
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दान, भेंट सब बंद कर, दीजै धता बताय, 
नहीं और दरगाह में, दर्शन करने जाय.
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दिल्ली में दंगे किए, सोची समझी नीत, 
धरना देने बैठ कर, बात करें विपरीत. 
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कभी भरोसा मत करो, नेताओं की जात, 
रख कर मन में कुटिलता, करते मीठी बात. 
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इकतरफा कर फैसले, भड़काते वह आग, 
दिखती आफ़त सामने, गए फटाफट भाग. 
-------
पूरी तैयारी करी, आगजनी, विस्फोट, 
बिरयानी भी खिला दी, दे कर ढेरों नोट. 
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अपना मतलब साध कर, ठेंगा दिया दिखाय, 
माने उनकी बात जो, वह पाछे पछताय. 
-----
बहकावे में आ गए, भोले लोग गरीब, 
लुटा दिया, जो पास था, बोले यही नसीब. 
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जाट मरा जब जानिए, तेरहवीं हो जाय, 
जाने किस कानून से, फाँसी को टलवाय.
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वादी तो दर-दर फिरे, ले अपनी फरियाद, 
देर लगे जब न्याय में, आरोपी आजाद. 
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अपराधी के पक्ष में, होते खड़े वकील, 
उसे बचाने के लिए, देते कई दलील. 
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बीवी देती जब दुआ, हो जाता वरदान, 
भले आप के नाम से, है उस की पहचान. 
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बीवी से मत उलझिए, लेगी वह हड़काय, 
तरह-तरह के तर्क से, अपनी मति फिर जाय. 
-------
बीवी से पंगा लिया, हो जाओ तैयार, 
फौरन मसला हल करे, रखती नहीं उधार.
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मजा बुढ़ापे में करो, हर दम पत्नी साथ, 
तन मन से सेवा करे, रखती हाथों हाथ. 
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बढ़ी उमर के साथ में, करो न कोई काम, 
बैठे बैठे खाट पर, जपो राम का नाम.
------
बच्चे भी सेवा करें, रखते हर दम ख्याल, 
यह सब तब तक ही मिले, रहे जेब में माल. 
------
जान बचाने में लगे, पाक, चीन, जापान, 
तुरत पलायन हो रहा, हुए देश वीरान.
------
इसके लक्षण जब दिखें, तुरत करो उपचार, 
हलका सा जुकाम लगे, हो महसूस बुखार.
-------
छूने से भी लग सके, गया वायरस फैल, 
कोरोना के नाम से, काँप रहे बिगड़ैल. 
-------
बचना हो जब सजा से, रख लो लोग हज़ार,
किस-किस पर कर चौकसी, नज़र रखे सरकार.
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सारी जनता जानती, किया दोष स्वीकार,
फिर भी तरकीबें लगें, टले मौत हर बार.
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फाँसी से फिर बच गए, गुनहगार वो चार,
टाला जिनकी मौत को, खूब किया व्यभिचार.
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सर को ऊँचा कर सके, कहते पर्व पतंग, 
भाग-दौड़ के खेल में, कसरत करते अंग.
-------
गरदन नीची हो गई, मोबाइल के साथ, 
इसको ऊँचा कीजिए, ले कर माझा हाथ.
------
हर पल मोबाइल चले, बीवी देती डाट, 
उड़त गुड़ी काटे लला, मैया लखे ललाट.
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जोश जवानी का चढ़ा, बढ़ी मिलन की चाह,
रही अधूरी साधना, ठंडी भरते आह.
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ऊर्जा पादप को मिले, लगे आम पर बौर,
मीठे होते संतरे, आता फगुवा दौर.
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मन से करते कामना, बढ़ें प्रेम की राह,
मिल जाए मन मीत जब, दिल से बोलें वाह.
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यार पुराने मिल गए, भूले सब अवसाद, 
भूली बिसरी याद से, महफिल है आबाद.
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अपनी मस्ती में रंगे, नहीं समय का भान, 
कितनी ही बातें हुईं, कर अपनों का ध्यान. 
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गायन-वादन साथ में, फिर मजाक के दौर, 
भली सोच के साथ में, लेते निर्णय ठौर. 
------
अपनी करनी याद कर, हुआ गर्व आभास, 
सुखद रहे परिणाम जब, मिलती राहत साँस. 
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देने से मिलती खुशी, महक उठा संसार, 
नए लक्ष्य रखते रहें, आएँ नए विचार.
-----
मजा मिलन का बढ़ गया, जीवन साथी साथ, 
दोनों मिल कर नाचते, डाल हाथ में हाथ.
-----
फाँसी तक से बच गए, मिल कर किया गुनाह,
नामी वकील खोजते, कानूनों की राह.
-----
गुनहगार पाएं सजा़, ऐसा बने विधान,
बचा सके कोई नहीं, डाले जो व्यवधान.
-----
फौरन कर दो फैसला, पुख़्ता मिलें सुबूत, 
कडी़ सजा़ से सब डरें, भय से भागें भूत.
-------
भीषण सरदी जब पड़े, कट-कट बोलें दाँत, 
हू-हू कर काँपे बदन, कुछ भी नहीं सुहात. 
-------
लक्षण सरदी के दिखें, नजला और जुकाम,
गरम चाय के साथ लें, काजू और बदाम. 
------
यार मिले तो दें मजा, चखना और सलाद, 
लेवें उनके साथ में, तीन पेग का स्वाद. 
-------
गाजर का हलवा लगे, रस गुल्ले के संग,  
मजा केक का दे रहा, पुलकित होते अंग. 
------
साथ बैठ कर लीजिए, गजक, रेवड़ी स्वाद, 
सारे परिवारी मिलें, रोज डिनर के बाद. 
------
खाने में लगती भली, गन्ने की रस खीर, 
थोड़ी-थोड़ी खाइए, हरती मन की पीर.
------
उत्तर से आई हवा, लेकर भीषण शीत, 
दुबक रजाई सो रहो, यही जगत की रीत. 
-----
सरदी में अलग हुए, पेड़ों के सब पात, 
नव वसंत में पाएंगे, कोमल किसलय गात. 
------
ज़्यादा सरदी में हुआ, पर्वत पर हिमपात, 
देख नजारे लें मजे, कुदरत की सौगात. 
------
बच्चों को डाटो नहीं, समझो मन के भाव, 
अभी सीखने की उमर, पड़ता खूब प्रभाव. 
-------
बच्चा सच्चा मन रखे, सबको करता प्यार, 
बातें उसकी तोतली, करे नकल हर बार.
------
कोशिश करते ही रहो, जब तक ना हो पास, 
मिले सफलता तय सदा, रखिए मन में आस. 
-------
आपस का झगड़ा बढा़, कारण रहा विवाद, 
झूठे दावे पेश कर, किए सबूत बरबाद. 
-------
बाबर की मस्जिद बनी, ठीक राम के शीष, 
लफ़ड़ा ढाँचे का करा, नेता की आशीष. 
------
मिल कर रहते प्यार से, होते भले विचार, 
हर जन का सम्मान हो, बढ़े प्रेम व्यवहार.
-------
सारी सुविधा चाहिए, जिसके वे हकदार, 
काम नहीं कुछ भी करें, मिलें सभी अधिकार. 
------
बिना काम रोटी मिले, हो जाती है मौज, 
रोजगार हो श्रम बिना, पत्थर फेंकें रोज. 
------
मिली नौकरी मुफ़्त में, कुरसी की दरकार,
आरक्षण का लाभ ले, सेवा करते यार.
-------
आकर बाहर से बसे, लगें दीन, लाचार, 
बढ़ता जाए दबदबा, कर देता बेजार. 
------
नेता रोटी सेंकते, वोट बना औजार, 
सारे हक दिलवा दिए, मतलब साधो यार. 
------
पूरा परिचय मिल गया, खोज लिया इतिहास, 
लक्षण कहते ढीढता, सदा करें उपहास. 
-------
ऊपर वाले से मिली, लंबी एक जुबान, 
सोच समझ कर बोलिए, रह जाता परमान. 
-------
अपने बन जाते सभी, रहे कभी जो गैर, 
अलग रहे विचार सदा, रखते मन में वैर. 
-------
कड़वी बोली से बने, अपने भी अनजान, 
आदर से दिल जीतिए, सबको दें सम्मान. 
---------
राज सभा में हो गया, नया एक बिल पास, 
कौन करेगा अब यहाँ, पक्के से आवास. 
-------
बाहर से आकर बसे, भारत में अनजान, 
रही हमारी सभ्यता, वे लगते भगवान. 
------
गद्दारी कर देश से, अपना करें प्रचार, 
धर्म, सभ्यता का क्षरण, वोटों का अधिकार. 
------
लूट रहे सरकार में, मिल बैठे जो आज,
सभी मंहगे हो गए, लहसुन, आलू, प्याज.
------
हालत देख किसान की, निकले आँसू चार,
सिसक-सिसक कर रो रहा, कैसे हो व्यापार.
-------
मेथी, पालक का नहीं, होता अब दीदार, 
बेमौसम बारिश करे, इनका बंटाधार.
-------
बाबा साहब ने किया, देव लोक का ध्यान, 
जीवन के संघर्ष से, बढ़ा देश का मान. 
------
जनता का सोचा भला, सबको मिला सुकून.
लागू उनके सामने, भारत का कानून.
------
पढ़ लिख कर काबिल बने, रहे भले इंसान, 
दलित मसीहा सब कहें, भारत रत्न महान. 
------
काटा पेट किसान का, पचा लिया कुल माल, 
खा-खा कर मोटे हुए, उनको कहें दलाल. 
--------
सारा घर भूखा रहे, काटे पेट गरीब, 
कैसे वह यापन करे, खोटा रहा नसीब. 
--------
रात-रात भर जाग कर, फसल उगाए वीर, 
चोर चुरा कर ले गए, आहत है तकदीर.
-------
साड़ी साड़ी है नहीं, महज पाँच गज चीर, 
ढकती है यह सकल तन, हरती उर की पीर. 
--------
साड़ी हरती देख कर, प्रभु भी हुए अधीर, 
तुरत बचाई लाज आ, पति थे जिसके वीर.
-------
साड़ी धारण कर बनी, नारी परम महान, 
भारत सहित विदेश में, रही अलग पहचान. 
------
लडे़-भिडे़, झगड़ा करे, डाले फूट प्रभाव, 
कैसे सरकार बन सके, जुटा लिए सब दाँव. 
------
जिनका साथ चुनाव में, बना जीत आधार, 
छोड़ दिया संकोच बिन, करके कुरसी प्यार. 
-------
सत्ता माखन मथ रहे, मिला गैर को साथ,  
समीकरण रचते नए, घड़ी संग धनु, हाथ. 
-------
रात तलक कुछ और था, सुबह हुआ कुछ और, 
नेता भी हैरान थे, पागल पन का दौर. 
------
खुश-खुश सोए रात को, कल पहनेंगे ताज, 
सुबह उठे ऐसा लगा, गायब है आवाज. 
-------
नेता ने ऐसी चली, विस्मयकारी चाल, 
उड़े होश, निद्रा गई, लगे नोचने बाल. 
-------
भूखे बच्चे सो गए, माँ का रहा नसीब,
बच्चे पहले खा सकें, कितनी अधिक गरीब. 
------
भरी दुपहरी धूप में, काम करें श्रमवीर, 
दिन भर की मेहनत से, बढ़ जाती कुछ पीर. 
-------
रोटी सुबह शाम मिले, दो जून की जुगाड़,  
उसको शनि भी क्या ग्रसे, कुछ ना सके बिगाड़.
-------
कुत्ता कूदा नदी में, मलिन हो गई गंग, 
खुद तो निकला तैर कर, भीगे बस कुछ अंग.
------
कुत्ते को हड्डी मिली, चबा चबा कर खाय, 
हड्डी छिनती जब दिखे, भौंक-भौंक चिल्लाय. 
------
वफा श्वान की बन गई, अनुपम एक नजीर,
फिर भी हड्डी देख कर, टपके लार अधीर. 
-----
दीवाली पर मिल गए, भूले बिसरे यार, 
बढ़िया अपनी कंपनी, सबको करती प्यार. 
-----
अनुपम आयोजन रहा, मिला सभी सहयोग, 
आभारी प्रशासन के, बना सुखद संयोग. 
-----
सुविधा बूढ़ों को मिली, उन्हें दिया सम्मान, 
वाहन आने को मिला, रख कर सबका ध्यान.  
-----
नहीं भटकती आत्मा, जाती अपने लोक, 
हुआ मिलन परमात्मा में, क्यों करते हो शोक. 
-----
नाशवान उस देह से, केवल छूटी साँस, 
लेंगे फिर अवतार कल, होना नहीं उदास. 
------
जाति, धर्म का भेद तज, हुई चेतना लुप्त, 
कमा रही थी नाम कल, आज हो गई सुप्त. 
------
बूढ़े पाएं रियायतें, दे देती सरकार, 
रेल किराए में कमी, उसके वह हकदार.
------
जमा आपकी बचत पर, मिले अधिक कुछ ब्याज, 
श्वेत-केश को मान दें, साथी और समाज. 
------
लगें बुढ़ापे में अधिक, तन-मन के कुछ रोग,
रखिए स्वस्थ शरीर को, कर रोजाना योग.
-------
गोरी गौरी से मिली, ढूँढे साजन देव, 
साथ-साथ पूजा करें, हों दीदार सदैव. 
-----
श्रद्धा से पूजा करो, फल निश्चित मिल जाय, 
तनिक खोट मन में रखा, सभी वृथा हो जाय. 
-------
मन के सच्चे भाव से, पूजा बिना गुरूर,
पूरी हो मन-कामना, इच्छित वर मंजूर.
-------
तू-तू मैं-मैं छोड़ कर, हों साकार प्रयास, 
बिना बात की बहस में, होता है उपहास.
-------
काम-काज की विधि अलग, होते अलग विचार,
सबके हित में है यही, आ जाए जरल-धार. 
-------
अपना लहज़ा काम का, अपना होता ढंग, 
अंत भला तो सब भला, भला सफलता रंग. 
---------
पैसे की गरमी रहे, जब हो अपने पास, 
जो चाहो खरीद सको, पूरी अपनी आस. 
-------
पैसा पा कर ना करें, सपने में अभिमान, 
पड़े धरातल पर दिखें, टूटे सब अरमान. 
-------
पैसे की ताकत बड़ी, हो जाते मगरूर, 
अनपढ़ का भी मान हो, नहीं कोई शऊर.
-------
हमें बुलाया दोस्त ने, आ कर पी लो चाय, 
मिला समोसा साथ में, सुस्ती दूर भगाय. 
-------
साथ बैठ गप्पें लगीं, पूछे दिल के हाल, 
गम भूले, दारू बिना, बीता अच्छा काल. 
-----
यारों की यारी बड़ी, आती सबके काम, 
रिश्ते केवल नाम के, मौका ढूँढें राम. 
-------
गणपति, नवराते गए, गया दशहरा बीत, 
शरद आगमन की खुशी, त्योहारों की रीत. 
-------
शरद पूर्णिमा आ रही, पिया मिलन की आस, 
रोजगार की सोच कर, ऊपर-नीचे साँस. 
-------
बाद दिवाली के शुरू, नया काम परदेश,
पिछला अनुभव साथ में, मिला अलग परिवेश. 
--------
पापा की घर वापसी, बाल रहे मुसकाय, 
पत्नी का मुखड़ा दिखे, रोम-रोम हरषाय. 
-------
मन की कोमल भावना, कैसे सकें छुपाय,
पत्नी मन में सोचती, हम किस विधि मिल पाँय. 
-------
समाचार पति का मिला, मन में उठी हिलोर. 
कैसे दर्शन कर सकूँ, हो कर भाव विभोर.
-------
चिंता मुक्त, स्वस्थ रहो, नहिं बी.पी. का रोग, 
पूरी निद्रा, अधिक जल, कम भोजन का योग. 
-------
बोलो मिल कर प्रेम से, मधुर वचन उपहार, 
मन में सबके पैठ लो, नहीं जीत या हार. 
-------
गुस्से में ना कह सकें, अपने मन की बात, 
केवल दिखता क्षोभ है, हो जाता उत्पात.
-------
लीला कान्हा बाल की, हरतीं मन की पीर,
ग्वाल संग क्रीड़ा करी, चमकी ब्रज तकदीर. 
--------
राधा मूरत प्रेम की, श्याम ज्ञान की खान, 
अमर रहा इतिहास में, उनका नाम महान.
-------
कोशिश रही सदा यही, समर कहीं टल जाय, 
होनी तो हो कर रहे, कर लो लाख उपाय. 
--------
तनिक बड़े जब हो गए, साठ साल के पार, 
सेवा से छुट्टी मिली, हो पेंशन आधार. 
-------
अधिक आयु के जन करें, अपने अनुभव गान, 
याद ज़माने की करें, रख कर मृदु मुस्कान. 
-------
नाती पोते व्यस्त हैं, सुनें न उनकी बात, 
जीवन शैली अलग है, नहीं रहे जज्बात. 
-------
धंधे को काला करें, धन भी होता श्याम, 
गलत काम कर, कर बिना, मिले नहीं आराम. 
--------
हेरा-फेरी के लिए, बेचें अपनी लाज, 
दे कर पैसा गैर को, करवाते हैं काज. 
--------
नियम कायदा ताक पर, रखते सभी दलाल, 
अफसर भी देखें नहीं, मिल जाता जब माल. 
------
शीष झुका कर बैठिए, चलती ऊपर रेल, 
सर टकराया अगर तो, हुआ खतम फिर खेल. 
-------
सावधान हों हर समय, आए कब आपात, 
चलता नहीं पता कभी, हो कब जीवन रात. 
------
ध्यान रखें हम काल का, अपना कर कुछ रीत, 
नहीं किसी से दुश्मनी, सबसे करिए प्रीत. 
-------
जीते जी पूछा नहीं, मात-पिता का हाल, 
मौका लगते ही उन्हें, घर से दिया निकाल.
-------
निधन बाद बेटे करें, पंडित का सम्मान,
भोजन खिला तृप्त करें, करते अनुपम दान.
-------
जो चाहो सेवा करो, जीवित जब माँ-बाप,
नहीं उपेक्षा कभी भी, उससे बड़ा न पाप.
------
याद पूर्वजों को करें, दें उनको सम्मान,
उनके वंशज हम बने, है अपना अभिमान.
--------
जो कुछ भी हम आज हैं, कहता है विज्ञान,
योगदान उनका रहा, करिए उनका मान.
---------
बड़े गर्व से कह सकें, हम उनकी संतान,
शिक्षा हम को यह मिली, मेरा देश महान.
--------
मांगे से मिलता नहीं, कभी किसी को मान, 
देना हो तो दीजिए, अंतस से सम्मान.
-------
कोई देता जब उन्हें, समुचित आदर मान, 
नत हो जाते सामने, पा कर वह सम्मान.
------
रोष बिना, सुन लें बुरा, करें न तनिक विषाद, 
अड़ कर अपनी बात में, करिए नहीं विवाद.
-------
उमस भरी दोपहर का, पंखा करता अंत. 
हौले भी चलता रहे, मन हो जाता शांत.
--------
पानी को ठंडा करो, हिम संभव हो जाय, 
गरमी तनिक जहाँ मिली, उस को भी पिघलाय.
-------
जब तक गति होती रहे, हालत हो जीवंत, 
चलना-फिरना बंद हो, तब जीवन का अंत.  
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हलचल देख यहाँ-वहाँ, हो जीवन आभास, 
मन की नीरवता कहे, अंतस रहा उदास. 
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धड़कन दिल की जब थमे, खतम हो गई आस.
क्षितिज-रेख सूचित करे, जीवन हुआ खलास. 
-------
रिश्ते ठंडे दीखते, जब तक रहते मौन, 
थोड़ी सी गरमी कहे, तुमसे बढ़ कर कौन. 
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बादल आ कर जा रहे, सूखे हैं अब कूप, 
पशु की प्यास मिटे नहीं, खिली हुई है धूप. 
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संचय वर्षा नीर का, है उपयोगी रीत, 
समझदार ही कर सकें, बन कुदरत के मीत.
-------
खेतों में पैदा करें, मेहनत से किसान, 
वर्षा जल संचय करे, वह मानव भगवान. 
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करतब मंदी का चले, देखो आँखे फार, 
मंदी आ कर चाटती, देती जेबें झार. 
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मंदी के इस दौर में, उत्पादक मजबूर. 
ग्राहक नहीं खरीदता, बिन वेतन मजदूर. 
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बड़ी-बड़ी थीं कंपनी, अब उत्पादन बंद,
शेयर बजार गिर गया, धंधा होता मंद. 
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माँ-बेटी के बीच में, रिश्ता रहा अजीब, 
एक दूसरे से मिलें, कितनी लगें करीब. 
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आदर सदा बहू करे, रखिए उसको पास, 
उसे बताएं, प्यार से, सुखी रहे वह सास.
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सास-बहू के बीच में, मत दो अपनी राय, 
दोनों आपस में कहें, बीच न कोई आय. 
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मुश्किल पहले बोल की, सबको पड़े सुनाय, 
बाकी सब कुछ लहर में, फटफट आवत जाय.
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पहला वक्ता जो रहा, वह लीडर हो जाय, 
पहल करे कुछ नए की, उसकी मानी जाय. 
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जन-मन की भाषा कहे, जो दिल को छू जाय, 
उसका भाषण सब सुनें, तन-मन से अपनाय. 
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झगड़े में करिए पता, क्या है उसका मूल, 
बिना बात की तूल से, होती अक्सर भूल.
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सोची समझी बात से, होता नहीं विवाद, 
देकर ध्यान मनन करें, किंचित नहीं विषाद. 
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मुँह में आया बक गया, करे बगैर विचार,
जिससे बोला, लड़ पड़ा, बढ़ जाती है रार. 
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माता की ममता रही, निष्कलंक, निःस्वार्थ, 
जीते जी रहता सदा, उसका सर पर हाथ. 
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माता पहली गुरु बनी, कुदरत का उपकार, 
पैदा होते ही मिला, अनुपम उसका प्यार. 
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माता रहती जब नहीं, आती उसकी याद,
मिले दुआ उससे सदा, हो जीवन आबाद.
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दिया बुढ़ापे ने हमें, खिताब चौकीदार, 
रखवाली संतान की, करे रहो सरकार. 
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ख़्वाब जवानी में लगे, खेले पोती हूर, 
खूब खिलाएंगे उसे, दोनों समय ज़रूर. 
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खाँसी भी आए अगर, पियो दवा भरपूर, 
दौड़े तो फूले साँस, दमा रोग मशहूर. 
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मतलब के अनेक मिले, दिल को लेते जीत, 
मुश्किल से हमको मिलें, असली सच्चे मीत.
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बात मीत की मानिए, करो नहीं संदेह, 
सपने में हित सोचता, रखे सदा ही नेह. 
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सही बात कहता सदा, देता नेक सलाह,
अहित कभी भी हो नहीं, रहती उसकी चाह. 
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मुश्किल अपने देश में, भले-बुरे का भेद, 
खाते हैं जिस थाल में, उस में करते छेद.
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नेता रोटी सेंकते, अपने हित को मान, 
भेद-भाव के रंग में, ले लेते हैं जान.
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संसद ने बिल पास कर, किया भला कश्मीर, 
अमन, चैन हो राज्य में, बदलेगी तकदीर. 
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शिव की पूजा सब करें, लिपटे रहते नाग,
सावन में दर्शन मिलें, चमकें उनके भाग. 
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दूध पिलाए नाग को, शिवजी हरते पीर,
खाते सावन माह में, मठ्ठा, दही, पनीर.  
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नाग सामने दिख गया, उसको देते मार, 
जो पड़ता शिव के गले, लुटता उस पर प्यार.
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मुल्ला नोचे मदरसा, घर में अब्बू जान, 
दोनों से डर कर रहो, कहती किधर कुरान.
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कभी चैन से ना रहो, ना रहने दो जान.
होते वह तत्पर सदा, बेटी का बलिदान.
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साथ सात पग हम चले, बंधन बना मजाक, 
टूट रहा निकाह उधर, कह कर तीन तलाक. 
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बच्चों की सीमा लगे, अधिक नहीं, बस तीन, 
बैर भाव सब खतम हो, बजे चैन की बीन. 
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राज्य सभा ने पास कर, विधान तीन तलाक,
भला देश का कर सके, निर्णय यह बेबाक.
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सजा बलाती को मिले, बिना किसी दुर्भाव,
राजा का आचरण यह, बतलाता बरताव.
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कसा शिकंजा दोष पर, लगी गुनाह लगाम, 
गुनहगार को अब सजा, कुछ अपराध विराम. 
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अपने शासन में किए, जी भर कर अपराध, 
पोल खुली पकड़े गए, रहे जमानत साध. 
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नए नए नेता बने, आए जीत चुनाव, 
कैसे शोषण कर सकें, सोचें नए सुझाव. 
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कोई जो साहस करे, उनको देवे टोक, 
देख रहे अन्याय को, हाथ पकड़ ले रोक. 
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बहस करें मुख देख कर, जाति, धर्म हो मूल, 
कोई भी अपराध हो, निर्णय ऊल-जलूल.
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बिना बात किस्से गढ़ें, दे कर उनको तूल, 
गलत केस में फाँस लें, मूल बात को भूल. 
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कथन मीडिया का रहा, उलटी सीधी बात, 
गलत तरह से पेश हैं, आहत कर जज्बात.
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भारत माँ के नाम पर, खुल्लम खुल्ला भेद, 
जिस थाली में खा रहे, उसमें करते छेद. 
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जज करते हैं नौकरी, देते बस आदेश, 
इक तरफा हों फैसले, घूसखोर परिवेश.
-------

मंदिर की घंटी बजे, करते वह परहेज, 
रुके कार बीमार की, कोई नहीं गुरेज.
-------

सड़क रोक नमाज पढ़ें, जायज उनका काम, 
सेना पर पथराव से, खुश उनके हुक्काम. 
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अगर सुई उनको चुभे, लगता हुए हलाल, 
कतल हमारा वो करें, होता नहीं मलाल. 
-------

गुरु गरिमा का ध्यान रख, कर लो गुरु का मान, 
माता से ऊँचा रहा, गुरु चरणों का स्थान.
--------

पूरी निष्ठा, भक्ति से, गुरु की लें आसीस, 
गुरु-सेवा करके बनें, सबसे बड़े रईस. 
--------

सच्चे ज्ञानी गुरु मिलें, गुरु पद में रख माथ, 
भाग्यवान ही पा सकें, सच्चे गुरु का साथ. 
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वोट किसी को दीजिए, सब हमाम में नंग, 
विजयी बन सरकार में, दिखते उनके रंग.
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नेता नया चुना गया, बिकने को तैयार, 
छोटे बड़े सभी कहें, भाव लगाओ यार. 
-------

बहुमत हो हासिल हमें, रहती यह दरकार, 
कसर दिखे कोई कहीं, गिरवा दें सरकार. 
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बैठे कुरसी खाँसते, लेटे खटिया तोड़, 
रोग बुढ़ापे के लगे, दूखन लागे जोड़. 
-------

यौवन की यादें सजीं, दिल होता बेहाल, 
काश किसी से कह सकें, अपना यौवन हाल.
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इतना पैसा बच सके, कटे बुढ़ापा चैन, 
खर्चा भी उतना करें, झुकें न अपने नैन. 
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बरबादी कारण बने, अपनों का सहकार, 
धीरे से मतलब बता, धता बताते यार. 
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भला बता कर आपको, मन में लावे लार. 
दूर रहें उन मीत से, समझो कभी न यार.
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अपने मतलब के लिए, करते झूठा प्यार, 
हित-साधन के वास्ते, बन जाते मक्कार. 
-------

ऐसे मीत बनाइए, जो हों सदा बहार,
हँसना-रोना साथ में, हर पल दिखे निखार. 
-------

भले नहीं सुख में दिखें, दिल से करते प्यार,
साथ सदा हों शोक में, पालें ऐसे यार. 
------

सुख-दुख हर पल साथ हो, अच्छा रहा नसीब, 
भले दिखे ना सामने, दिल के रहे करीब. 
------

देते हम सलाह नहीं, करो नशा तुम रोज़, 
थोड़ी देर मजा मिले, फिर बन जाती डोज़. 
-------

वाहन चालन होश में, बगैर पिए शराब,  
कार नियंत्रण में चले, बने सफर का ख्वाब. 
------

दारू पी रहता नहीं, जुबान पर कंट्रोल,
गाली बकने से शुरू, उलटे सीधे बोल.
--------

सिंहासन भी बच गया, रखा नियंत्रण पास, 
पृष्ठभूमि में खुद रहें, झोंके धूल प्रयास. 
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यौवन का संचार करें, वोरा मोती लाल, 
फोड़ हार का ठीकरा, टाल दिया बवाल.
-------

नाना विधि घपले किए, खा कर पैसा माल, 
एक जगह कर्जा लिया, माफ दूसरा माल.
-------

दोष छुपाएं तब तलक, बचा रहे ईमान,
सबसे आशा मत करो, पा लोगे सम्मान. 
-------

अपने अवगुण ना कहें, चाहे खासम खास,
हँसी बनाते हैं सभी, नहीं मदद की आस. 
-------

सीधे सच्चे आदमी, दिल को देते खोल, 
ले कर दुनिया फायदा, खोलें उनकी पोल. 
--------

दशा सुधारें देश की, बिगड़े जो हालात,
ऐसे नेता को नमन, बिन देखे दिन रात.
-------

पूरे अमले की लगी, बुद्धि तेज तर्रार,
वित्त सचिव ने बैठ तब, किया बजट तैयार.
-------

आम बजट को पेश कर, मंत्री लूटे वाह, 
सत्ता उसे सराहती, विपक्ष भरता आह.
-------

बढ़ी उमर के साथ में, झुकते गाल कपाल.
स्मृति भी कमजोर हुई, खेले काल कराल.
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कारण बढ़ती आयु का, गई जवानी बीत,
मजा बुढ़ापे का मिले, बाँटो सब को प्रीत. 
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दन्त हीन अब हो गए, करिए कुछ परहेज, 
सादा भोजन स्वाद से, खाएं बिना गुरेज. 
-------

भारत माँ का चल बसा, लायक एक सपूत, 
गर्व करें उस पर सभी, होता अनुपम, मूर्त. 
------

सेवा की मूरत रहा, ऊँचा करता भाल, 
एक पार्रिकर खो गया, भारत माँ का लाल. 
-------

करते उनको याद हम, नमन करोड़ों बार, 
बड़े सरल मानव रहे, मिलें नहीं दो बार. 
-------

सब सरकारें सोचती, कैसे बचता नीर, 
क्या उपाय हम कर सकें, हरें जगत की पीर.
--------

बरसाती पानी बचे, करिए कुछ तरकीब, 
जल संकट को टालिए, प्रकृति के रह करीब. 
-------

सबसे पावन जल मिले, जब होती बरसात, 
संचय उसका कर सकें, कुदरत की सौगात. 
-------

सूर्य चक्र से हो रहा, नव यौवन संचार, 
उसकी गति दे प्रेरणा, अद्भुत यह उपहार. 
------

बढ़ती ऊर्जा आज से, जल्दी होत प्रभात, 
बढ़ता जाए दिवस अब, घटती जाए रात. 
------

भौगोलिक घटना बनी, दे हम को संदेश, 
खुशियों का अवसर रहा, मनता जश्न विशेष. 
-------

बड़े फायदे निकट के, ऊँचे दल का नाम, 
आगे-पीछे जन लगें, धाए मतलब धाम. 
-------

नेता ने भाषण दिया, ताली देते लोग, 
समझ न आया किसी को, जमा भीड़ का
योग. 
------

झूठे वादे कर दिए, उनकी जमती धाक, 
संसद में मुकरे जहाँ, इज्जत होती खाक.
-------

छुरा घोंपता पीठ में, मेरा अपना मीत, 
अपना हित साधन लगा, कहे प्रीत की रीत. 
-------

मीठा बोले सामने, उससे रहो सतर्क, 
कड़वा लेकिन सच कहे, करिए उसमें फर्क. 
------

चिकनी चुपड़ी बात सुन, नहीं हटाना ध्यान, 
सच्ची निष्ठा, लगन से, तुरत मिलें भगवान.
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प्राणों से प्यारा लगे, छोटा सा शैतान,
माता न्योछावर करे, उस पर अपनी जान. 
------

छोटा बच्चा मानता, माता को भगवान, 
वही बड़ा हो कर करे, जननी का अपमान. 
-----

खूब पलट कर बोलता, जब हो गया जवान, 
उलटा पासा पड़ गया, मचल गया ईमान.
------

बच्चे की भाषा गहन, संकेतों की बात, 
मूक रहे, पर बोल ले, हिलता पूरा गात. 
------

सहमति उसकी खुशी से, रोने से नाराज, 
मूड बने तो गा सके, करे खूब आवाज. 
------

मरजी अपनी हर समय, चला रहा नादान, 
बहुत कठिन है समझना, उसका मनोविज्ञान. 
--------

शासन की सख्ती दिखे, नेता करें विलाप, 
नरमी से जब पेश हों, करते रोज प्रलाप. 
-------

माँग जमानत घूमते, करते अचरज खेल, 
घुड़की दे कर पूछते, कब भेजोगे जेल.
-------

पाँच साल में कुछ नहीं, कर पाई सरकार, 
बहुमत पा जो भी करो, सब जायज है यार. 
------

व्हाटसैप के ग्रुप बनें, जुड़ते जाएं लोग. 
खट्टी-मीठी याद से, लग जाता रस भोग. 
--------

मुखपोथी पर मिल गए, बड़े पुराने यार, 
हालचाल सबके मिलें, मिलता ज्ञान अपार. 
-------

सुबह-सुबह हमको मिलें, प्यार भरे संदेश,
अकसर ही वह भेजते, खबरें देश-विदेश. 
------

अपने भवन सजाइए, सोलर पेनल छाँव, 
कड़ी धूप पूरी करे, बिजली सारे गाँव. 
-------

शासन से अनुवृति मिले, हो तकनीक विकास, 
मन में होना चाहिए, नई खोज की आस. 
-------

सोलर पेनल से बढ़े, बैट्री का आवेश, 
बार बार के चार्ज से, रहती क्षमता शेष. 
-------

सौर पटल की डिजाइन, सिलीकॉन का फूल, 
चार्ज मिले हर दिशा में, होती रकम वसूल. 
--------

होता सूरज सामने, जब भी निकले धूप, 
सुबह, दोपहर, शाम को, बढ़ता बिजली रूप. 
------

सोलर पेनल चार्ज हो, बनती ऊर्जा घाम. 
एक बार का खर्च, फिर, बचते पूरे दाम. 
-------

सूरज चमका शीष पर, बढ़ा दिवस का ताप, 
जून इक्कीस से घटें, कम होंगे संताप.
--------

सूरज की गरमी ढली, आएगी बरसात. 
बढ़ना दिन का खतम अब, बढ़ती जाए रात.
----------

बादल घिरने से जगा, मानसून का प्यार, 
बीज, खाद को जोड़ कर, खेत करो तैयार.
------

च्यवनप्राश के बहुत गुण, जाने सारे लोग, 
जो हर दिन सेवन करे, लगे न कोई रोग. 
-------

खट्टा-बकटा आँवला, पोषक तत्व तमाम,
अन्य रसायन साथ में, मीठा मधुर किवाम. 
--------

सेवन दूध संग करें, मिटें पेट के रोग, 
चम्मच एक काफी है, रोज लगा लो भोग.
------

भारी भोजन स्वाद दे, मिले अधिक प्रोटीन,  
तला-भुना हो अधिक जब, खा पाते शौकीन. 
------

चिकनाई की अधिकता, लेती स्वाद जुबान, 
सभी मसाले अधिक हों, तो हर लेते प्रान. 
------

लौकी, तोरी से मिलें, खनिज, लवण भरपूर, 
भोजन हलका ही भला, मिलता स्वाद जरूर.
-------

सजी-सजी सजनी दिखे, उस पर आता प्यार,
अनुपम रुप उसे मिला, मुग्ध करे शृंगार. 
--------

गोरी की मोहक नजर, दिल को देती बोध,
काली वेणी देख कर, कर बैठे हम शोध. 
---------

घायल बांकी नजर करे, भेदे मृदु मुस्कान, 
बिंदी दमके भाल पर, बढ़ जाती है शान.
-------

दिखें अदालत को नहीं, बड़े पुराने केस,
बरसों तक चलते रहे, बदल बदल कर भेस. 
--------

निर्णय कोई कोर्ट दे, होती तुरत अपील, 
आला दरजे के लगे, नामी बहुत वकील. 
--------

वादी-प्रतिवादी लड़े, बिना बात की बात,  
सारा धन खर्चा किया, वही ढाक के पात.
-----

संत और शैतान की, नहीं सरल पहचान,
बाहर से देखें उन्हें, लगते एक समान. 
------

वाणी से पहचानिए, भले-बुरे कुछ मीत, 
मीठी ही हितकर लगे, नहीं सदा यह रीत. 
------

अकसर ही करते भला, उनके कड़वे बोल, 
देते हैं सलाह खरी, साफ, बिना कुछ झोल. 
------

मिलने की जब ठान लो, मिल लो दिल को खोल,
वरना हैं बेकार सब, मधुमय मीठे बोल,
-------

अंदर तक सब से करो, प्रेम पूर्ण व्यवहार,
आहत हो गर बात सुन, जाओ भूल प्रहार.
-------

मीठी बोली जीत ले, दूर दिलों के बैन,
घायल तीखी बात से, सदा चुराते नैन.
------

सातों फेरे हो गए, फल चुनाव वरदान, 
शादी तो पूरी हुई, हुआ न कन्यादान.
--------

सजे-धजे नेता कहें, वधु मेरा अधिकार,
सारी जनता कह रही, तय मोदी सरकार.
--------

बाहर से गाली बकें, अंदर से तारीफ, 
सभी विजेता एक से, बोलें बोल शरीफ. 
-------

जन्म लिया सिद्धार्थ ने, होकर गौतम बुद्ध
पूजा, तप कर ज्ञान से, अपना मन कर शुद्ध. 
------

आज आप को था मिला, बोध गया में ज्ञान, 
इसी दिवस को बुद्ध जी, ले बैठे निर्वान,
------

सत्य, अहिंसा प्रेम से, जीता मन विश्वास, 
सभी जीव में जान है, रखें प्यार की आस. 
------

सूरज से बिजली बने, जगत करे उपयोग, 
लगातार ऊर्जा मिले, जीवन भर का भोग. 
------

सोलर पेनल पर पड़े, कड़ी जेठ की धूप, 
फोटो वोल्टिक सेल से, बनती बिजली रूप. 
------

बिजली के संग्रहण से, करो बैटरी चार्ज, 
सबसे पावन लक्ष्य है, राष्ट्र हित का काज.
-----

अपने देवों का करें, मिल कर खुद अपमान, 
उन पर कह कर चुटकुले, दिखलाते मुस्कान. 
--------

बगल दबा गीता चलें, झोला टाँग कुरान, 
बलिहारी श्री ग्रंथ की, धरें शीष सम्मान. 
------

पंडित देखें स्वार्थ को, रोज बघारें ज्ञान, 
लंगर में भोजन खिला, करते सिख बलिदान. 
-----

सभी लूट कर ले गए, रत्नों भरी दुकान, 
सोने की चिड़िया कभी, होता हिंदुस्तान.
-------

गौरवमय इतिहास में, बनी भली पहचान, 
है कम, जितना भी करें, भारत का सम्मान. 
------

ऋषि-मुनि का भारत रहा, बना धीर गंभीर, 
नेता के आतंक से, बदली है तस्वीर.
------

गरमी में अकुला गए, कोमल कोमल पात, 
बाट जोहते तरु रहे, कब होगी बरसात. 
------

सरिता तट अब तरु खड़े, जल से होते कूल,
खड़े पेड़ हैं सोचते, भले करम का मूल. 
------

सूरज के उपहार से, मिले कई वरदान, 
गरमी का अब देश में, कब होगा अवसान. 
------

ज़हर बुझे आरोप से, मर्यादा है तार, 
भूल गए शालीनता, शिक्षा हुई बेकार.
-------

टी.वी. पर है गर्जना, बड़ा पुलिंदा झूठ, 
रत्ती भर भी सच नहीं, डालें हरदम फूट. 
------

सत्ता पाने के लिए, खेले नाना खेल, 
विपक्षी नेता मिल गए, बोते हैं विष बेल.
------

माँ का दिल न दुखे कभी, इसका रख लो ध्यान, 
त्याग करे आराम का, कहीं नहीं आसान. 
------

कष्ट मिटाने के लिए, रच दी माँ भगवान, 
उसके दुख कैसे हरें, हम सबका अभियान. 
-------

जो माँ की सेवा करे, पा जाता वरदान, 
वरना कर्मों की सजा, भुगत रहा इंसान.
--------

शास्त्र हमारे कह रहे, सबको दो सम्मान, 
देवों से ऊँचा रहा, मेरी माँ का स्थान. 
-------

माँ की ममता से बड़ा, कोई नहीं विज्ञान, 
बिना कहे वह जान ले, बालक के अरमान. 
------

सपने में भी ना करें, माता का अपमान,
अपनी हो या गैर की, करो सदा सम्मान. 
------

जामुन, लौकी के चढ़े, तेज दनादन भाव, 
रामदेव ने जब कहा, इनका अधिक प्रभाव. 
-------

अम्ल, पित्त को कम करे, लौकी की तासीर, 
लाभ करे मधुमेह में, जामुन की तदबीर. 
-------

योग लाभ पूरा मिले, चित्त रहे जब शान्त, 
कसरत तन मन की करें, हो कोई भी प्रान्त. 
-------

लेखन के समय मन में, रखिए नहीं तनाव, 
विचार तंद्रा भंग हो, गलत व्यक्त हों भाव. 
------

हर्षित मन रख कुछ लिखें, आएं जो भी भाव, 
सरल शब्द उपयोग से, होता गजब प्रभाव. 
-----

मोबाइल में लिख रखें, आए कोई ख़्याल, 
उसे सुधारें बाद में, होगा नहीं मलाल. 
------

न्यायालय ने कह दिया, एक अजब फरमान, 
दाना दें कबूतर को, रोग लगे इंसान. 
------

कुत्ते को बिस्किट मिले, नहीं हमें मंज़ूर,
केस दर्ज अपराध का, भागे फिरो हज़ूर. 
------

वोटर को पैसा मिले, कोई नहीं गुनाह, 
सारे दल हैं एक से, जय की सबको चाह. 
-----

गाली गलौज तभी तक, जब तक चलें चुनाव, 
उसके बाद वापस हो, आपस का सद्भाव. 
-----

फल चुनाव के देख कर, तय होती रणनीति,
किसकी किससे दोस्ती, है चुनाव की रीति. 
-----

पैसा ले वह बिक सकें, बेचें धरम इमान, 
देख हैसियत मोल हो, किसमें कितनी जान. 
-----

गणपति की आराधना, करता सकल समाज, 
पूरी हो हर कामना, मांगो जो भी आज. 
------

गणपति पर्व अनेक हैं, अक्षय तीज है खास, 
सुख, समृद्धि छाई रहे, होगे नहीं उदास.
------

जो चाहे खरीद सको, करो नहीं कुछ विचार, 
रहे कृपा हरि नाम की, बढ़े सदा व्यापार.
------

ऊपर से अल्लाह ने, भेजा है पैगाम, 
खून-खराबा रहित हों, नेक आपके काम. 
------

आपस में सहयोग कर, मिला हाथ में हाथ,
मानव का विकास करें, रहें सभी के साथ.
------

निराहार रोज़े रखें, तन-मन से हों पवित्र, 
भले करम ही कीजिए, जिनसे झलके चरित्र. 
-------

भोजन रहे प्लास्टिक में, पानी बोतल बंद,
ऐसा भोजन है वृथा, शीघ्र कटे भव फंद. 
-------

ओवन में खाना पका, नहीं लगाएं भोग, 
नियमित सेवन जो करे, पाले नाना रोग.
------

बाँधें ऐसे ढंग से, पैक करें सामान,
फिर से प्रयोग हो सके, जनहित में संज्ञान. 
------

फनी नाम से आ गया, एक अजब चक्रवात, 
इसका असर गजब हुआ, बदले कुछ हालात. 
------

बादल छाए गगन में, पड़ने लगी फुहार, 
सूर्य देव ने कम करी, धूप-ताप की मार.
------

तेज हवा ने पकड़ ली, कुछ विनाश की राह, 
जान-माल की क्षति हुई, दिल से निकली आह. 
-----

पति-पत्नी उत्सव चुनें, जन्मदिन का दें नाम, 
शादी एक साथ हुई, रहा बहुत आराम. 
------

खर्च किफायत से करें, निभा जगत व्यवहार, 
घर में उनके चल रही, पत्नी की सरकार. 
-----

पति-पत्नी की नौकरी, रहती समता चाह, 
जीवन-गाड़ी में सधे, आपस की परवाह. 
------

नील तर्जनी कह रही, कर आए मतदान,
करें गर्व से हम सभी, संविधान सम्मान. 
------

वोट दिए जन कह रहे, वोट बना अधिकार, 
निश्चित होगा वोट से, किसकी हो सरकार. 
-------

कौन भरी दुपहरी में, जा कर लगे कतार, 
कैसे इस आलसी को, जीने का अधिकार. 
-------

बेटी को रुख़सत किया, सबको है धन्यवाद,
अपने घर को चलें, भला मुरादाबाद. 
-------

बेटी तो सुख में रहे, हर्षित हो परिवार, 
चिंता न रहे दूर तक, खुशी भरा संसार. 
------

रिंकी, यश के साथ में, रहे सदा खुशहाल,
नव-जीवन सोपान में, सब हों मालामाल.
------

खुशी मिले दुख के बाद, नवजीवन संचार, 
नई ऊर्जा भर रहा, ईस्टर का त्योहार. 
------

विदेश में भी मानते, पुनर्जन्म साकार, 
इक तन छोड़े आत्मा, करे प्रवेश विचार. 
------

ईस्टर के अंडे बटे, बढ़ा प्रेम व्यवहार, 
हरषित सारा जग हुआ, प्रभु लीन्हा अवतार. 
-------

नेता चला बरात में, ले कर कुत्ते सात, 
लड़की वालों से कहे, तेरी क्या औकात. 
-----

उसको उत्तर यह मिला, क्षमा याचना साथ, 
अतिथि हमारे आप हैं, करूँ नमन नत-माथ.
-----

स्वागत कैसे कर सकूँ, क्या दे दूँ सौगात, 
एक-एक कर छोड़िए, पहनाऊँ मैं भात. 
-----

सारे काज तुरत करें, नहीं असंभव काम,
भक्त अनोखे राम के, रहा पवनसुत नाम.
------

उत्सव उनके जन्म का, नव उल्लास जगाय,
जीवन देता प्रेरणा, जोश अधिक आ जाय. 
------

रहा राम के नाम में, अडिग, अटल विश्वास, 
सुमिरन से हनुमान के, जग जाती नव आस.
-----

वोट मांगने जा रहे, भरी दुपहरी लाल, 
मिले लोग सब तरह के, पूछें कई सवाल. 
------

अपनी करनी हाँकते, बचा बचा कर खाल, 
ऐसा कुछ भाषण करें, मचे कहीं न धमाल. 
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जोर-जोर से बोल कर, रखते अपनी बात, 
मानों सबको बांटते, अपनी ही खैरात. 
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जन-हित में सबको दिया, शांतिपूर्ण संदेश,
सत्य, अहिंसा, प्रेम से, बदल दिया परिवेश. 
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माया मोह में न फँसे, बड़े तपस्वी धीर,
महावीर के नाम से, जाने जगत अधीर. 
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सुख सुविधा को त्याग कर, पाई तप की राह, 
तीर्थंकर उनको कहें, रखी नहीं कुछ चाह. 
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मान अदालत भी चुकी, उनकी लिखित दलील,
करें बेतुकी पैरवी, नामी बहुत वकील. 
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कसम उठा कर कह रहे, नहीं कभी थे राम, 
मन की कोरी कल्पना, रख लो कुछ भी नाम. 
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राम जन्म सच में हुआ, कहते तुलसी दास, 
आज राम पर नहीं है, जन-मन का विश्वास. 
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पढ़ लिख कर आगे चले, बने बहुत विद्वान.
भीम नाम जग जानता, उनकी यह पहचान. 
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दलित मसीहा बन गए, उनका कर कल्यान, 
हरिजन का विकास करें, रख कर पूरा ध्यान.
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जनहित में पैंतिस नहीं, दर्जा मिले विशेष,
थ्री सेविनटी ना लगे, हो कश्मीर अशेष.
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जलियाँ वाला बाग में, मारे गए निर्दोष,
आहत जन की भावना, सब में फैला रोष. 
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दिल से ऊधम सिंह ने, इस पर किया विचार, 
बरस इक्कीस प्रतीक्षा, लेने को प्रतिकार. 
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करें नमन सेनानी को, हो उनका आभार, 
सरे आम गोली चला, सौंप दिया सरकार.
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विलय बड़ौदा में हुए, देना, विजया बैंक, 
पाई राह विकास की, बढ़ा सोच का टैंक.  
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ग्राहक भी सब मिल गए, बढ़ी डिपाॅजिट आय, 
कार्मिक भी कुछ बढ़ गए, मसला हल हो जाय. 
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नई नीति पालन करें, चमकी विकास जोत, 
मिले कर्ज़ विरासत में, होते साझा स्रोत.
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लड़के वालों ने नहीं, माँगा तनिक दहेज, 
हँसी-खुशी से सब मिला, जो करते परहेज. 
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रही बड़ाई इसी में, मांगें नहीं हज़ूर,
ऊपर वाला जो लिखा, मिल कर रहे जरूर.
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खाला की बारात में, आए सब मेहमान,
खालू सुन घबरा रहे, खाला के फरमान. 
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एक बार जो चुन गए, पाँच साल आराम, 
उसके बाद सभी करें, दूजे को बदनाम. 
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नेता का भाषण बना, गाली का भंडार, 
झूठ बोलना हो गया, जन्मसिद्ध अधिकार. 
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कुछ भी वादा कर चले, नेताओं के मीत, 
कैसे वह पूरा करें, मिले भूल से जीत. 
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आत्म विश्वास से भरे, कहते सच्ची बात, 
धाक जमी अल्पायु में, दी अनुपम सौगात. 
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ज्ञान, धर्म को साथ ले, घूमे देश विदेश, 
उत्सुक महिला भक्त बनीं, कहते बात विशेष. 
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भारत का डंका बजा, दिया सनातन ज्ञान, 
नमन विवेकानंद को, खूब बढ़ाया मान. 
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अफवाहों से हैं भरे, आज सभी अखबार,
आरोपों से सज रहा, नेता का बाजार.
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झूठ बोल पाएं विजय, ऐसी है उम्मीद, 
कोशिश यह भी कर रहे, लेवें वोट खरीद. 
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मुखपोथी से हो रहा, उनका लोक प्रचार, 
व्हाट्सैप के योग से, बता रहे अधिकार.
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अपना मकसद कह गए, चुनाव घोषणा पत्र, 
एक धर्म उनका रहा, भागो शेष अन्यत्र.
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अपने गुण गिनवा रहे, बता गैर के दोष, 
उनसे बहस करो नहीं, कर बैठें वह रोष. 
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इस चुनाव में लड़ रहे, नाना दल के लोग,
दूध-धुला खुद को कहें, बाकी सारे रोग. 
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नोट बना कर लिख रखें, मचल रहे उद्गार, 
कागज, कलम बिना करें, अंतर्मन से प्यार, 
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मोबाइल पर कीजिए, छूने का अभ्यास, 
जोड़-घटा, शोधन करो, जैसा हो आभास. 
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शब्द-चयन की महत्ता, जाने सब संसार, 
लिखा-पढ़ी पर चल रहा, दुनिया का व्यवहार.
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जगी लालसा वोट की, आते मीत चुनाव, 
नेता नर्तन कर रहे, डालें गजब प्रभाव. 
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वोटर को ललचा रहे, करते झूठी बात, 
अपने गुण गिनवा रहे, दे औरों को मात. 
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वोटर चतुर सुजान हैं, लुभा सके ना लोभ, 
सोच समझ मतदान कर, नहीं बाद में क्षोभ. 
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सारे नेता भर रहे, राजनीति में रंग, 
इनकी हरकत देख कर, रह जाओगे दंग. 
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गलत-सलत भाषण करें, बोलें ऊल जलूल, 
उलटे-सीधे बोल में, नहीं सत्य कुछ मूल. 
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मिर्च-मसाले से सजा, बना झूठ आधार, 
अपने भाषण दे रहे, करने चले प्रचार. 
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लेखा पूरा अब हुआ, खतम वित्तीय साल, 
चिन्ता आगे की करो, ढेर कमाओ माल. 
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मार्च इकतीस को करें, सभी अधूरे काम, 
अफसर, ठेकेदार की, हो दिन-रात हराम. 
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सारे साल काम करें, अर्जन धन, ईमान, 
जोश, मेहनत से लगें, टैक्स निकाले जान. 
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बच्चे को लगता भला, अपनी माँ का दुग्ध, 
तन में तो गरमी रहे, मन हो जाता शुद्ध. 
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महिमा माँ के दूध की, गाएं सौ सौ बार, 
लज्जा रखते दूध की, लेते बाजी मार. 
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देश के जयचंद चंद, जाते पलटी मार, 
लजा दूध को युद्ध तज, वापस आते हार.  
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गुजर गया, वह हो गया, उसकी मत कर फिकर, 
होली बाद, नया रूप, नई शुरूवात कर.
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होली का मादक नशा, जब हो जाए शांत, 
ठंडे मन से सोचिए, अब क्यों होते क्लांत. 
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मिलना हो मिल लीजिए, दिल को रख कर खोल, 
बिना बैर की जीभ से, मीठे बोलो बोल. 
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कुरसी वाला सोचता, उसकी हुई जमीन, 
बहुमत से कुरसी मिली, अंतर भले महीन.
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जीते को माला मिले, होती जय जयकार,  
रिस कर मौका ढूँढते, जाते जो जन हार.
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चौराहे पर चित्र हों, जो जन पाते जीत,
चमचे रिश्ते काढ़ते, बन कर उनके मीत. 
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होली में भी ना बने, गुझिया के पकवान, 
व्यस्त नौकरी में रहे, भली करें भगवान. 
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पति-पत्नी की नौकरी, हर दिन भागमभाग, 
साथी हैं, बस नाम के, कैसे खेलें फाग. 
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इंद्र देव कृपा करें, रहे स्वस्थ परिवार, 
पूरा तब आनंद हो, खूब मने त्योहार. 
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दर्शक दीर्घा बैठ कर, ले लो अनुपम ज्ञान, 
ध्वनि प्रकाश के खेल से, बनते चतुर सुजान.
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महाराणा प्रताप हैं, भारत माँ के पूत,
उनकी अद्भुत शूरता, देश प्रेम का भूत. 
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जीवन उनका प्रेरणा, भर जाता उत्साह, 
जो भी सुने पढ़े कहे, बोले मुख से वाह. 
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महिमा पुष्कर तीर्थ की, देती ज्ञान अपार, 
ब्रह्मा की पूजा नहीं, रचा दिया संसार. 
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पत्नी बिन पूजा करी, मिला विकट अभिशाप, 
पत्नी की अवमानना, सबसे भीषण पाप.
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जिनके पूर्वज हो गए, असमय काल कवाल,
आ कर उपासना करें, पूछें उनके हाल. 
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देने से मिलती खुशी, नाचे मन का मोर, 
झूमें अति आनंद में, दे कर देख हिलोर. 
-----

हम देते शुभकामना, अपने भेजें केक, 
हँसती प्यारी बालिका, खुशियाँ मिलें अनेक. 
-----

बेटी जा ससुराल में, गई मायका भूल,
बहू करे पूरी कमी, प्यार, लाड़ का मूल. 
-----

पल पल पर याचक मिले, पहुँचे जब अजमेर, 
दान एक लेता नहीं, लगें विशेष कुबेर. 
-----

भीख मांगने में लगे, नर-नारी अरु बाल, 
दूर तलक पीछा करें, मौला रखे ख़याल. 
------

जगह-जगह बिकते दिखे, बीच सड़क अखरोट, 
बलिहारी अफ़गान की, कमा लिए कुछ नोट. 
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नगर गुलाबी देख कर, उमड़ पड़ा उत्साह,  
किले, झील, बाजार से, हो जीवन की चाह. 
------

बड़े बड़े मंदिर यहाँ, उनमें हैं भगवान, 
बीच शहर मंदिर दिखा, जय काले हनुमान. 
-------

जय गढ़, नाहर गढ़ किले, और किला आमेर,
राह पहाड़ी पर सरल, नहीं तनिक भी देर. 
-------

नारी पूरक है सदा, खड़ी पुरुष के साथ, 
जीवन का आनंद लें, डाल हाथ में हाथ. 
-------

बसें देवता, हो जहाँ, नारी पाए मान, 
घर के आदर से शुरू, सब को मिले प्रमान. 
---------

आदर नारी को मिले, बेटी, भगिनी, मात,
पत्नी को जो मान दे, तीन लोक तर जात.
----------

गर्व करें, हम आप पर, सैनिक वीर जवान, 
हर पल चौकन्ने रहें, रख खतरे में जान. 
---------
सीमा पर तैनात हैं, अपने पहरेदार, 
ऊपर के आदेश से, करते अरि पर वार. 
----------

इंतज़ार वह कर रहे, कब आए आदेश.
कफन बाँध कर चल पड़े, बदल लिया परिवेश. 
--------

नेता की तारीफ हो, मिले आप का हाथ, 
बिगड़े काम सुधर रहे, तुरत आप के साथ. 
--------

गुण गाते हम आप के, थकती नहीं जुबान, 
दिल से आभारी रहें, जब तक तन में जान. 
--------

शासन से याचन किया, डटी रही सरकार, 
जब से आए आप हैं, नहीं तनिक दरकार.
-------

शिव की छाया जब हटे, तो वह शव हो जाय,
जो वश में शव को करे, वो ही शिव कहलाय.
-------

केशव शव के साथ हो, शव वश में हो जाय, 
उसकी होती कृपा जब, शव भी तरता जाय. 
-------

शिवि को शिव से मिल गईं, कृपा और वरदान, 
राजा ने तब कर दिया, खुद अंगों का दान. 
--------

आतंकी को कुचल दो, सेना को आदेश, 
मार गिराए चार सौ, लौटे नहीं स्वदेश. 
-------

रखते हैं कुछ बेहया, चोरी का इलज़ाम,
स्वार्थ रहित सेवा करे, भारत करे सलाम. 
--------

जान - माल के नाश की, दोषी है सरकार, 
ऐसे दोष लगा रहे, अपने ही गद्दार. 
--------

जन हित की चिंता करे, चौकस चौकीदार,
दंश, दोष का झेल कर, आहत है सरकार. 
--------
पाते वह आरोप ही, कर लें कुछ भी काम, 
अच्छी नीयत से करें, हो जाते बदनाम. 
--------

नहीं रहा आसान अब, मिले विपक्ष की थाह, 
पूरी कोशिश हो रही, पल पल रहे निगाह.
-------

सेना पर पत्थर पड़ें, पाकी खुश हो जाय, 
बँधा हुआ कानून से, कोर्ट न कुछ कर पाय. 
-------

अपराधी करते रहे, कुछ गुनाह हर रोज, 
माफी की कर वकालत, खूब मनाएँ मौज. 
-------

कोई भी अपराध हो, है तैयार वकील, 
झूठ बोलता, जिरह में, करता पेश दलील.
-------
पुलवामा में बम फटा, देखे शव चालीस,  
पूरा देश रुदन करे, नहीं समय तफ़्तीश. 
----------

पुलवामा में हो गए, सैनिक वीर शहीद, 
अपनों ने ही की दगा, मना गए बकरीद. 
--------

रोज रोज की गड़बड़ी, जनता है हैरान, 
मोदी गुस्से में करें, बदले का ऐलान.
--------

कहते बिल्कुल ठीक हैं, अपनी राय महान,
दया धरम का मूल भी, नहीं वैध श्रीमान. 
---------

बढ़ जाए जब धरा पर, ज्यादा अत्याचार, 
शेषनाग फन हिला कर, करें घोर फुफकार.
--------

लागू हों सबके लिए, अपने ही कानून, 
सज़ा एक सी मिल सके, समान सबका खून.
---------

झिड़की होती सामने, निंदा पीछे पीठ, 
भय का होता है असर, डाँट से होते ढीठ. 
---------

भूल सुधारें प्यार से, उर में रख विश्वास, 
सफल सदा हम हो सकें, जगती है यह आस. 
----------

अंतस में लज्जा लगे, मन अफसोस मनाय, 
जो प्रायश्चित कर सके, वह सज्जन बन जाय. 
----------

आए आप, भला लगा, मिटा सकल संताप, 
बार-बार मिलते रहें, एक साथ हम आप. 
---------

मिल बैठे, गप लगाई, दिल हो गया निहाल,
कहें-सुनें हम आप से, सब अरमान निकाल. 
---------

साथ मिले परिवार दो, झुका शीष, रख माथ, 
बिदा किया, भोजन करा, जोडे़ दोनों हाथ. 
----------

भारत में ले जन्म तुम, करो ईश आभार, 
धन्य रहे वे मनुज जन, माने हम अवतार. 
---------

दाना पानी खा यहाँ, करो समूल विकास, 
ऐसे करम करे चलो, बन जाए इतिहास. 
---------

मातृ भूमि को पूजिए, करें नहीं अपमान, 
गौरवमय अतीत कहे, मेरा देश महान. 
----------

देते हमको प्रेरणा, माननीय सरदार. 
दे कर परिभाषा नई, दोहे लिखे हजार. 
--------

मस्ती लेने के लिए, भरते रस श्रंगार, 
सजा दिया उनमें कहीं, अनुप्रास अलंकार. 
---------

इस मुकाम पर रच गया, एक नया इतिहास. 
कड़ी मेहनत से मिला, बात नहीं परिहास. 
---------

पैसे के बल पर बनें, बिगड़े सारे काम,
बनते काम बिगाड़ता, पैसा सब का राम. 
----------

बिगड़े काम बनाइए, रखो जेब में दाम.
पैसे से हैं रीझते, सारे खासो-आम.
----------

खूब तमाशा कीजिए, जब जी चाहे खेल, 
पैसे की ताकत बड़ी, करो किसी से मेल. 
------------

इटली की मम्मी बनी, बिना ताज की क्वीन, 
चलती उसकी ही रही, मौन बजाए बीन. 
---------

घोटाले कितने रचे, कोई नहीं हिसाब, 
लगी नहीं किंचित हवा, सब पर रखा नकाब. 
--------

अपनों ही में बाँट कर, वतन मान जागीर, 
भूखी जनता बिलखती, कह उसकी तकदीर. 
---------

रोटी-बोटी मुफ़्त की, नेता तोड़ें रोज, 
भाव नहीं कुछ भी पता, जुमले लाते खोज. 
--------

खाना किसी गरीब का, खाते ले चटकार, 
हाथ फेर,भरपेट खा, लेते कड़क डकार. 
---------

वादों में आगे रहें, बोलें सबसे झूठ, 
मिलें नहीं चुनाव बाद, पकड़ाते हैं ठूँठ. 
-------

अपने हित-साधन करें, गाँधी को बदनाम,
संस्कार को भूल कर, रखते नाना नाम. 
-------

वाड्रा को गाँधी कहें, होते पैदा खान,
बेशरमी की हद हुई, बापू का अपमान. 
-------

वोटों की खातिर छुए, सभी जनों के पैर,
घर-घर जा कर पूछते, मतदाता की खैर. 
----------

पाती भटकी कल्पना, जहाँ नए आयाम, 
अंबर में उड़ने लगी, ले कर कुछ विश्राम.
---------

गलत नहीं कुछ सोचना, सपने हों साकार, 
सपनों के आधार पर, बन जाता आकार. 
--------

मन में बैठी बात से, हो जाती कुछ खोज, 
निश्चय से अभ्यास कर, लगे रहो हर रोज. 
-----------

छोड़ें कैसे गंदगी, करें खुले में शौच, 
ढेर लगाते हर जगह, रख कर गंदी सोच. 
----------

अपनी लत छोड़े बिना, होता नहीं सुधार, 
शौचालय उपयोग का, मोदी करें प्रचार. 
----------

बचा रखें बातावरण, करें प्लास्टिक बंद,  
गीला कचरा अलग रख, दूर करें दुर्गंध. 
---------

माँ शारदे हमको दें, सद्बुद्धि का वरदान, 
भला बुरा पहचान लें, मिल जाए यह ज्ञान. 
---------

माघ शुक्ला पक्ष पंचमी, ऋतु वसंत आगाज, 
पूरा जोश दिखा रहा, ऊर्जा भरा समाज. 
--------

गरमी का आरंभ हो, सरदी का अवसान, 
फसल नई तैयार है, चिंता करे किसान. 
----------

मन में शाँति बनी रहे, याद करो हनुमान,
तब नसीब से मिल सके, हो पाता कल्यान.
---------

हिंसा से संभव नहीं, पा जाओ सम्मान,
आपस में पनपे घृणा, कर देती अपमान. 
--------

ऐका अच्छी बात है, रखो विचार महान, 
भेड़ चाल में बिछड़ कर, मत खोना पहचान. 
----------

आबादी को बढ़ा रहे, नारी बना मशीन,
बढ़ा वोट आधार का, हों कुर्सी आसीन. 
---------

बढ़ती पब्लिक देख कर, चिंतित होय समाज, 
शिशु जनें दस माह दर, लगे नहीं कुछ लाज. 
--------

लोचा लगता हो जहाँ, जारी हो फरमान, 
खलल अमन में डालता, मुल्ला मेहरबान.
--------

चश्मा चढ़ कर नाक पर, काटे सबके कान, 
चश्मा आगे आँख के, चाहो नहीं प्रमान. 
--------

रख धीरज कर लीजिए, मन के माफिक जाँच, 
सारे सबूत बोलते, नहीं साँच को आँच.
---------

आँख बंद कर सोचता, एक कबूतर आज, 
नहीं दीखता है मुझे, आगे बैठा बाज. 
--------

आँसू सूखे आँख के, मरा नैन का नीर, 
कष्ट पड़ोसी सहे जब, उठे नहीं उर-पीर. 
---------

एक वतन में रह रहे, मिली नहीं जब जात, 
नफरत दिल में भर गई, मर जाते जज्बात. 
----------

एक साथ मिल कर रहें, कैसे हों हालात, 
आपस में फिर जुड़ सकें, बन ले बिगड़ी बात. 
---------

उजडे़ घर जब शत्रु का, सीखें नया विधान,
बदला कहाँ निकाल ले, इसका रखना ध्यान.  
----------

आती बिपदा देख कर, नए हुनर लें सीख, 
मिले लाभ उनका तभी, वरना माँगें भीख. 
--------

कायम जीवन है नहीं, नहीं अटल संसार,  
डरना क्यों बिछोह से, कैसा घर से प्यार.
--------

मिले तीन भारत-रत्न, पाए हैं सम्मान,
हज़ारिका, नाना, प्रणव, विभूति रहीं महान.
---------

उनके प्रतिभा-क्षेत्र पर, गर्व करे संसार,
अनुभव से पा कर लाभ, देश करे आभार.
----------

अक्सर पा सम्मान से, बन जाती पहचान, 
यहाँ मिला पहचान से, भारत को सम्मान.
--------

दीदी एक, बुआ एक, छाईं चारों ओर, 
पप्पू मूरख रह गया, खाली खीस निपोर. 
--------

घूम जमानत पर रहे, डाले न्याय नकेल, 
मुट्ठी में रख मीडिया, गठबंधन से मेल. 
---------

खाँसी छोड़े केजरी, बबुआ टोंटी चोर, 
ममता को भी मिल गई, राजनीति की डोर. 
--------

गद्दी रबड़ी को थमा, लालू जाते जेल,  
लेते बना तुरुप बहन, रहे देश से खेल. 
-------

पतित पावनी पूतना, बन कर सुंदर नार, 
कृष्ण मारने को चली, उलट गया संसार.
--------

नेता मजमा जुटाए, रख मोदी को लक्ष्य, 
गाली संग दोष लगा, पेश झूठे तथ्य. 
-----------

बैनर नेता के लगे, आए जीत चुनाव,
चमचे नीचे लटकते, खूब दिखाते भाव. 
---------

कितनी सीटें पा लिए, कितनी खाई मात, 
कैसे कुरसी मिल सके, लगा रहे हैं घात.
--------

बहुमत लिया, जीत गए, मिलते नहीं मिज़ाज, 
कैसे जीते, क्या किया, रहने दो यह राज. 
--------

दक्षिण में रखते नहीं, हिन्दू मुस्लिम बैर, 
मिलजुल कर रहते सभी, माँगें सबकी खैर. 
--------

मंदिर में मुस्लिम चले, हिन्दू चले मजार, 
इक दूजे के मान से, बढ़ता जाए प्यार. 
--------

नेता मिल कर सींचते, मजहब की विष बेल, 
कुरसी की खातिर रचें, तरह तरह के खेल.
--------

कचरा खाते पेट भर, पशु निरीह लाचार, 
भोजन उनका है यही, करिए तनिक विचार. 
--------

पतली झिल्ली देख कर, सोच रहा सामान, 
मेरा बोझ झेल सके, क्या इसका प्रमान. 
--------

पता आपको है चला, वर्जित पालीथीन,
घातक है, तन में रहे, जने रोग संगीन. 
----------

भोजन हो प्लास्टिक में, पानी बोतल बंद,
है ऐसा भोजन वृथा, शीघ्र कटे भव फंद. 
---------

पका माइक्रो वेव में, नहीं लगाएं भोग, 
नियमित सेवन जो करे, लगते नाना रोग.
---------

चीजें ऐसी बरतिए, पैक करें जब माल, 
पुनः प्रयोग हो सकें, जनहित करें ख्याल.
--------

चौदह जन परिवार से, देने जाते वोट, 
उन पर सबकी नज़र हो, मुखिया मांगे नोट. 
---------

उनकी ऐका गजब की, मिल कर पढ़ें नमाज, 
फतवा जारी एक हो, माने सभी समाज. 
---------

बोल दिया जो मौलवी, मानें सभी जरूर, 
पत्थर की लकीर बना, नहीं बहस मंजूर.
---------

संसद में मतदान का, रचा एक माहौल, 
हाँ-ना साथ-साथ करें, कहते हल्ला बोल. 
--------

बटन दाब मत व्यक्त हो, मचता बहुत बवाल, 
संसद में भी बैठ जब, करते खूब धमाल. 
--------

लोक सभा छोटी रही, ऊपर राज बिराज, 
जब दोनों में पास हो, माने सकल समाज. 
--------

बोरी का बुरका सिला, कर दो उनको भेंट, 
अधिक लगे सरदी जभी, तन पर लिया लपेट.
------

सरदी वालों को रहे, परमानेंट जुकाम, 
अदरक काली मिर्च से, मिल जाता आराम. 
-------

कमी विटामिन की लगे, खाओ दो बादाम.
पग पसार कर लेटिए, सेवन करिए घाम. 
-------

बेटी होती चुलबुली, माँ में बसती जान,
भूली सब ससुराल जा, पति में रहते प्रान. 
-------

बेटी की किलकारियाँ, गूँजे पूरा गेह,
वारी उन पर पिता हों, बरसाते हैं नेह.
-------

खुशियाँ बेटी जनम की, रखिए सदा सहेज, 
संस्कार दें भले से, देना नहीं दहेज.
----------

मौका कन्या दान का, सबको नहीं नसीब, 
जिनके घर बेटी नहीं, होते बहुत गरीब. 
---------

बेटी से रौनक रहे, घर होता आबाद, 
उसकी हरकत चपल से, बढ़ जाता संवाद. 
---------

बेटी बोझ लगे नहीं, दोनों कुल की शान, 
रहती जब ससुराल में, बढ़ता सबका मान.
---------

मिलता दस जनवरी को, हिंदी का सम्मान, 
सकल जगत है मानता, अनुपम इसका ज्ञान. 
--------

निष्ठा से हिंदी दिवस, मना रहा संसार, 
हिंदी को बढ़ावा दें, क्या करें उपचार. 
---------

भारत में ही कर रहे, हिंदी से परहेज़, 
दक्षिण को बदनाम कर, लेते वोट सहेज. 
---------

पलते बच्चे आज कल, खा सेरेलक भोग, 
दूध पिलाए माँ नहीं, लगें भयानक रोग. 
---------

सर्विस करते माँ-बाप, बच्चे पाले धाय, 
ममता प्यार न मिल सके, ज्ञान कहाँ से पाय. 
--------

आॅफिस में दिल से करें, बाॅस बताता काम,
पाँच दिवस की नौकरी, दो दिन फिर आराम. 
--------

आवागमन सरल हुआ, साधन मिले महान, 
आ कर ओला उबर ने, मानो डाली जान. 
--------

सफर रेल, बस, कार से, जाती जनता ऊब, 
सस्ते वाहन चलन में, अब आए हैं खूब. 
--------

भीड़ भरे हैं रास्ते, कट जाता चालान, 
सफर टैक्सी से करें, मुश्किल हो आसान. 
--------

हिन्दू मुस्लिम नाम से, दें समाज को बाँट, 
नेता जीत मना रहे, बन कर के सम्राट. 
--------

हिन्दू मुस्लिम बैर में, कौन करे फरियाद, 
भेद-भाव नेता करें, वोटर हो बरबाद.
--------

मज़हब रखता फासला, करे दिलों को दूर, 
वैरी आपस में बना, नेता हैं मजबूर.
-------

बाँट रहा है मीडिया, अपुष्ट आधा ज्ञान, 
कर उस पर विश्वास जब, लेते सच्चा मान. 
-------

फैल रहा मीडिया से, असत्य भ्रामक ज्ञान, 
लोगों को भड़का रहे, झूठे गलत बयान.
 -------

संदेसे, फेसबुक पर, कहते मन के भाव, 
भले बुरे संबंध भी, भ्रामक करें प्रभाव.
--------

देते बयान कसम खा, मुजरिम और गवाह, 
कुछ आरोप झूठे हों, वकील बोलें वाह. 
-------

लंबी चौड़ी बहस कर, फाँसे कुछ निर्दोष, 
बिना किए गुनाह कहें, आँख दिखा कर रोष. 
------

अपना हित ही सोचते, गिरवी रख ईमान, 
झूठी देते गवाही, रखते हाथ कुरान.
------

शुभेच्छा जन्मदिन पर, हमको मिलीं अपार, 
आया हमको समझ में, मिलता कितना प्यार. 
-------

मिली बधाई आप से, मन में उमड़ा हर्ष, 
जीवन-अनुभव में जुड़ा, एक अनूठा वर्ष.
-------

बिछुड़े जन ने भी दिए, प्रेम पगे संदेश,
होते भाव-विभोर हम, बदल गया परिवेश. 
-------

जाड़े में लगती भली, सुबह कुनकुनी धूप, 
खाने से पहले पियो, गरम टमाटर सूप. 
-------

मूँगफली की बात क्या, सभी मिलें प्रोटीन,
घुस लिहाफ़ में खाइए, छिलके रखिए बीन. 
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गजक, रेवड़ी खाइए, मिले गजब का स्वाद,
यारों को भी बाँटिए, सब को करना याद. 
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काल निरूपण से हुआ, समय चक्र आधार,
एक जनवरी बन गई, कैलेंडर व्यापार.
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केक, पटाखे, रोशनी, नए साल की रीत,  
पश्चिम की यह सभ्यता, नहीं सिखाती प्रीत. 
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नए साल में व्यस्त है, सारा मुदित जहान, 
सबके सपने सज सकें, बिना किसी व्यवधान. 
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गैरों की कुछ गलतियाँ, हम सब जाएँ भूल, 
किनसे हमको दुख मिला, किससे पाए शूल. 
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नए साल में कर सकें, कुछ अच्छे संकल्प, 
सदा भला सब का करें, इसका नहीं विकल्प.
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पीड़ा हरें समाज की, काम करें कुछ नेक, 
सेवा में स्वारथ नहीं, होते लाभ अनेक.
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सूर्य चक्र से हो रहा, नव यौवन संचार, 
उसकी गति दे प्रेरणा, अद्भुत यह उपहार. 
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बढ़ती ऊर्जा आज से, जल्दी होत प्रभात, 
बढ़ता जाए दिवस अब, घटती जाए रात. 
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भौगोलिक घटना बनी, क्रिसमस का संदेश, 
खुशियों का अवसर रहा, मनता जश्न विशेष. 
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टोपी सफेद पहन कर, हो सरदी अहसास, 
बरफ पिघलती देख कर, जगती जीवन आस.
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लाल रंग से हो गई, गरमी की शुरुवात,
कहता सेंटा आप से, खुद से कर लो बात
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नेता की कुरसी गई, डोल गया विश्वास,  
बगलें वह झाँकन लगे, दिखे न कोई आस.
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झूठे वादे खोलते, नेताओं की शान, 
बाद चुनावी जीत के, डोल गया ईमान.
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सत्ता की चिंता लगी, जीत गए कुछ सीट, 
गठबंधन में कौन हो, चढ़ लें किसकी पीठ. 
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भूख लगे तब खाइए, ले कर कुछ विश्राम, 
भोजन हलका ही पचे, अपच करे बादाम. 
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भोजन बहुत स्वाद लगे, साग रहे जब संग, 
दे कर पूरे विटामिन, पुष्ट बनाते अंग. 
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अंतराल जब हो उचित, डिनर नींद के बीच, 
सारा भोजन पच सके, हितकर जीवन सींच. 
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खाना पकने से अधिक, परोसना है खास, 
आग्रह से खिलाइए, ला कर लब पर हास. 
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खाना कैसा भी बना, प्यार परोसा जाय, 
बिगड़े तेवर देख कर, भूख खतम हो जाय.
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रोष रहित भोजन करें, पानी हरे तनाव, 
ऐसा भोजन पाच्य है, रहे नहीं दुर्भाव.  
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भारत भूमि पर प्रकट, शिव के बारह रूप, 
ज्योतिर्लिंग कहलाते, सब देवों के भूप. 
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स्वामी अद्भुत शक्ति के, देते सबको दान,
प्रसन्न सच्ची भक्ति से, करते हैं कल्यान. 
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श्रद्धा से दर्शन करो, फिर लो शीष नवाय, 
सबको वह आशीष दें, अपना हाथ उठाय.
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चलता हाथी देख कर, लगे भौंकने श्वान, 
जिस दिन पग गज के पड़े, नहीं बचेंगे प्रान. 
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समझें चींटी कम नहीं, लख उसका आकार,
गज भी जाते दहल जब, करती तीखी मार. 
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बात बात में गज नहीं, दिखलाता है रोष,
हिंसा नहीं शिकार में, शाक फूल संतोष.
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नेता की कुरसी गई, डोल गया विश्वास,  
बगलें वह झाँकन लगे, दिखती कैसी आस.
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झूठे वादे खोलते, नेताओं की शान, 
बाद चुनावी जीत के, डोल गया ईमान.
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सत्ता की चिंता लगी, जीत गए कुछ सीट, 
गठबंधन में कौन हो, चढ़ लें किसकी पीठ. 
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झूठे वादे कर किया, धुंआधार प्रचार, 
पा चुनाव में जीत अब, करो वचन साकार. 
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नेता जी भरमा दिए, कर वादा अंबार,
जनता की आशा जगी, लगने लगी कतार. 
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विजयी घोषित हो गए, चालबाज़ मक्कार, 
उलटी पलटी मार दी, बीते नहिं दिन चार. 
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मर, मिट कर जाते बहक, उनकी लख मुस्कान, 
कातिल, मोहक हँसी से, निकली अपनी जान.
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निकली वह नजदीक से, डाली नजर कटार, 
हम तो घायल हो गए, बीचो-बीच बजार.
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दिल-भीतर दहलीज पर, हुआ प्यार का वार, 
बांकी उस की मुस्कान, करती मीठी मार. 
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करजा चुका सको नहीं, क्यों ले लेते लोन, 
होते रहो जलील जब, बैंक करे है फोन. 
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पूरा वेतन खर्च कर, भरते मासिक किस्त,
शेष नहीं कुछ हाथ में, कैसे रहें दुरुस्त. 
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अच्छी जीवन लालसा, करती सभी निचोड़, 
नहीं भला तुलना करो, रखो किसी से होड़. 
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माँगें वोट गरीब से, बोलें दिल है साफ, 
जमीन हड़प किसान की, कहते करजा माफ.
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चुनाव में वादे किए, कह कर झूठ सफेद, 
बाद जीत के जब मिले, करें नहीं कुछ खेद. 
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नेता जी की बात पर, नहीं दीजिए ध्यान, 
उनकी कथनी गप्प है, कहना दिल का मान.  
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आशिष देते देवता, जब प्रसन्न हो जाँय,
नेता देते प्रलोभन, चुनाव सर पर आँय. 
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मर्यादा को भूल कर, मढ़ते झूठे दोष, 
गाली दे आगे बढ़ें, करते नकली रोष.
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वोटर का आदर करें, आते देख चुनाव,
मोल भाव से बढ़ रहे, साँसद श्री के भाव.
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गाली देने में नहीं, आती उनको लाज, 
भाषण से दूषित करें, अपना सभी समाज. 
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गाली से होता नहीं, अगले का अपमान, 
उसकी वाणी बोलती, कितनी उसकी शान. 
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सुन चुनाव की घोषणा, नेता रहे रिसाय, 
माल मलाई काल अब, हाथों फिसला जाय. 
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छोटा दिल आहत नहीं, जो हो घन की मार, 
कड़वी जुबान तेज है, बिना अस्थि की धार. 
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मीठे बोल भले कहें, करें भरम भरमार, 
झूठे, लोलुप से लगें, ईर्ष्यालु, मक्कार. 
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इनसे बच कर ही रहें, करते नकली प्यार, 
कहाँ, किसे कब मिला है, मन का पारावार. 
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माता अपने लाल की, लेती नजर उतार, 
लेय बलैंया हर समय, चाहे अधिक सुधार. 
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देख तरक्की लाल की, मन प्रसन्न हो जाय, 
उसकी सारी हरकतें, यादों में छा जाँय.
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बालक की शैतानी लख, माँ होती हैरान, 
चोट कहीं ना जाय लग, रखती हर पल ध्यान. 
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दासी कोई मंथरा, गई मंत्र को फूँक, 
भरे कान सरकार के, धीमे करती कूक. 
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भेदी लंका ढा रहे, करते घर पर वार, 
चाहें कोई बाहरी, उस पर करे प्रहार. 
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अंदर का झगड़ा दिखे, बाहर जग उजियार, 
अपना ही मकान जले, होता बंटाधार.
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होती नहीं कभी भली, घर-भीतर की रार, 
तन, मन, धन का नाश हो, अपनों में बेकार.
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जग-हंसाई साथ में, मुश्किल हो दीदार, 
चार दिन की जिंदगी, कर लो सबसे प्यार.
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बड़ी कठिनता से मिला, यह जीवन इक बार, 
अच्छे से जी लो इसे, मुश्किल रहें हजार. 
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जुगनू पथ पर ना चलें, उड़ते गगन जनाब, 
कैसे उनको हो पता, कितनी सड़क खराब. 
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दरिद्रता देखी नहीं, झेले नहीं अभाव, 
देख अधिकता कर रहे, अजब गजब बरताव.
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अनुभव कभी किया नहीं, कैसी होती भूख, 
मजे अमीरी के लिए, बढ़ता रहा रसूख.  
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लड़का लड़की मिल रचें, शादी का माहौल, 
रिश्तेदार आशिष दे, बजवाते हैं ढोल.
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घोड़ी चढ़ दूल्हा चला, ले अपनी बारात, 
दुलहन मिली दहेज में, हुई दुआ बरसात. 
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शिरकत शादी में करें, सारे नातेदार,
मौज मना कर गप करें, लेन-देन व्यवहार.
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शादी में रूठे बिना, फूफा नहीं कहाय, 
चाहे वह हर पल यही, सब लें उसे मनाय.
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खासे महत्व का रहा, मामा जी का रोल,  
उनके बिना भात नहीं, बजे बाद में ढोल.
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पूरी शादी में नहीं, मौसा का किरदार, 
दिखे जमाता सब जगह, मौसी पर अधिकार. 
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बूढ़ों को मुश्किल लगे, याद रखें हर बात,
किस्मत उनकी भूलना, मिली उमर सौगात.
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अनुभव थकान का हुआ, गई जवानी बीत,
जवाब दिमाग दे गया, ताकत जाती रीत.
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बार-बार वह पूछते, जो रट लिया सवाल,
बच्चों पर वह झींकते, देते वही मिसाल.
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चाहें अटकाना कोई, आगे बढ़ता काम,
गठित एन. जी. ओ. करें, शासन को बदनाम.
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जब दायर जन-याचिका, मिले नहीं आराम,
सुलटाते उसको रहो, कर के नींद हराम. 
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कोई काम अहित करे, हो प्रभावित समूह,
टाँग अड़ाते फालतू, कर के काम दुरूह.
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शादी में मान्य बने, रिश्ते हों आबाद,
रौनक जीजा से रहे, फूफा जी, दामाद.
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पति-पत्नी में रहे, आपस का विश्वास, 
शादी दोहराती है, इक दूजे की सांस. 
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नए पुराने संबंध, कर जाते लाचार, 
मिल कर सभी गले लगें, भूले बिसरे यार. 
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इंजन सीटी दे रहा, दिखता फाटक बंद, 
जनता आगे बढ़ रही, मरें कहीं जन चंद. 
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नियम, कायदे सब बने, करें सुरक्षा बात, 
उनका पालन हम करें, टल जाते अपघात. 
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पटरी पार न कीजिए, देखें आती रेल, 
आए कभी चपेट में, खतम साँस का खेल. 
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बेटी ने संभाल कर, तजी पुरानी चाल,
सदाचार से वह बनी, नूतन एक मिसाल.
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अच्छी बेटी सब लहें, पाए सबका प्यार,
लुभा रही व्यवहार से, वारी सौ-सौ बार.
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ममता की मूरत रही, हर पल करती त्याग,
लाल चैन से सो सके, रही रात भर जाग.
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बाइक पर सवार हुए, चालक के दो यार,
तोड़ कानून तेज चल, दौड़ें बिन अधिकार.
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बिन लाइसेंस चढ़ रहे, बाइक कई सवार, 
कम आयु के चला रहे, स्कूली बच्चे चार, 
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हनन कानून का करें, बन कर ठेकेदार,
राही जो इंगित करें, लड़ने को तैयार. 
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मन ही मन करते रहे, दिल से वह सम्मान,
अनजाने कारक बने, खुलती नहीं जुबान.
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चर्चा नहीं पड़ोस में, दिल से लेते मान,
प्रेम-ज्वाल कब जल रही, जान सको तो जान. 
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करें नहीं छल-दिखावा, करिए निर्मल नेह,
पत्नी स्वागत कर रही, पति आवै जब गेह.
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बहुत भला है लग रहा, मित्रों का उपहार,
सभी जनों की कामना, हरर्षित करतीं यार.
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खुशी झलकती फ़ेस पर, देख लिखे संदेश,
कभी मुस्कुरा कर किए, कुछ संकेत विशेष.
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लिखे-पढ़े कहते नहीं, मन के सच्चे भाव,
बात करो तो दूर हों, दिल के सब दुर्भाव.
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एक साल की ज़िंदगी, जीवन का प्रमान, 
छाप अँगूठा लीजिए, पेंशन का भुगतान. 
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जा दिखाइए बैंक में, अपनी कुछ पहचान, 
मिलती फोटो आधार, पा उंगली निशान.
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पेंशन का ढाढस बड़ा, जीवन भर की आय, 
सेवा निवृत्ति के बाद, श्रम बिना आ जाय. 
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गहरी निद्रा पाइए, तज कर माया मोह,
विराम दो संगीत को, फोन फेंक दो खोह.
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झगड़े का कारण बना, यह मोबाइल फोन,
नहीं बात तक कर सकें, पति-पत्नी हैं मौन.
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व्हाटसैप ने कर दिया, जीवन सत्यानास,
इधर-उधर की फेंकता, तत्व नहीं कुछ खास.
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करें नियम पालन सदा, जब भी हो प्रस्थान, 
बिना हेल्मेट ना चलें, रख खतरे में जान. 
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वाहन से जल्दी चलें, कैसे घर को जाँय, 
पैदल भी कुछ कम नहीं, फलाँग पटरी पाँय. 
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अनदेखी कर ना चलें, आने वाली ट्रेन, 
भली नहीं जल्दी अधिक, थोड़ा रख लो चैन. 
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रात-दिवस चौकस रहें, सेना के सरदार, 
सीमा पर रक्षा करे, सैनिक पहरेदार. 
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हर पल वह सतर्क रहें, ड्यूटी पर तैनात, 
रिश्ता कोई ना निभे, ना ही कोई तात. 
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जन्मभूमि सब से सगी, करूँ जान बलिदान, 
इसकी सेवा कर सकूँ, यह मेरा सम्मान.
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आठ नवंबर को हुआ, गोवर्धन इस बार, 
सारा धन गोबर हुआ, सन सोलह में यार. 
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अच्छे खासे चल रहे, बंद हो गए नोट, 
चूरन-चटनी के बने, निकले सारे खोट. 
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चलती मुद्रा के लिए, लंबी लगी कतार, 
भूखे नेता की नहीं, मिट पाती दरकार. 
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अच्छी लगती लाइटिंग, दीप पर्व उल्लास,
ज्योति पुंज है रोशनी, सबकी जीवन आस. 
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खूब पटाखे फोड़िए, चकरी, बम्ब अनार, 
जब तक चले न फुलझड़ी, लगे नहीं त्योहार. 
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देखे जुए, शराब ने, होते घर बरबाद, 
हाथ जोड़िए दूर से, कहो नहीं दुरबाद. 
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जग-मग, जग-मग ज्वेलरी, रहे जौहरी बेच,
अच्छे खासे दाम भी, ले जनता से खेंच.
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दीवाली कैसे मने, सोच रहा मजदूर,
कम से कम इतना मिले, भोजन करूँ जरूर. 
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दीवाली की रोशनी, आतिश की आवाज़, 
खील, बताशा पूजना, त्योहारी आगाज. 
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पैसे बढ़ते बैंक में, कर न सके उपभोग, 
ऐसे धन का लाभ नही, बढ़ जाता है रोग. 
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अच्छा रखें स्वास्थ्य, करके हर दिन योग, 
थोड़ी सी कसरत करें, चाहो रहें निरोग. 
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भोजन उतना कीजिए, जो पूरा पच जाय, 
तरल, विटामिन साथ में, जरूर सलाद खाय. 
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जीवन को झकझोरती, घटना कोई एक,
छू जाए दिल को अगर, होता जीवन नेक.
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दिल को है छूती नहीं, हर घटना हर रोज,
हैरत में दे डाल तो, हो जाती है खोज.
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होता नहीं सत्य सदा, सुना-पढा़ संदेश,
केवल देखा आँख से, करता दूर क्लेश.
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कोशिश सारी हो रही, कैसे कसें लगाम,
रोग पुराना हो चला, खोज रहे हैं बाम. 
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विपक्ष दाँव खेल रहा, अड़ा घुसा कर टाँग, 
खींच कोर्ट को बीच में, लगा रहा है बाँग.
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पटरी पर दौड़ा रहे, करने को समाधान, 
लाख जतन वह कर रहे, हालत बिगड़ी जान.
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बाहर से झुर्री दिखें, अंदर टूटे दाँत,
पेट पिचक कर पीठ से, मिलवा देता आँत.
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लाठी का ले सहारा, ठक-ठक चलती जाय, 
गरमी-सरदी झेल ले, सूझे न कुछ उपाय.
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रोटी-दाल पचे नहीं, खिचड़ी, दलिया खाय,
पूजा में ना जी लगे, जब तनहा हो जाय. 
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मोदी ने दिलवा दिया, पटेल को सम्मान, 
नेहरू ने की उपेक्षा, सहा घोर अपमान. 
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नेताजी को भी मिला, वापस उनका स्थान, 
सदा कृतज्ञ देश रहे, दे कर उनको मान. 
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उनके आभारी रहें, जो दे देते जान,
सर ऊँचा हो गर्व से, अपने वीर जवान. 
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बाहर से झुर्री दिखें, अंदर टूटे दाँत,
पेट पिचक कर पीठ से, दिखला देती आँत.
---------

लाठी का ले सहारा, ठक-ठक चलती जाय, 
गरमी-सरदी सह सके, बताओ कुछ उपाय.
---------

रोटी-दाल पचे नहीं, खिचड़ी, दलिया खाय,
पूजा में ना जी लगे, तनहा जब हो जाय. 
---------

फतवा जारी हो गया, खुश लगे मुसलमान,
पढ़े न हों चाहे कभी, आयत चार कुरान.
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सबसे लड़ते ही रहे, नहीं मेल स्वीकार,
मुस्लिम ही अपने हुए, काफिर बाकी यार.
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अगनित बच्चे जन दिए, आबादी भरपूर,
सज्जन कहती मीडिया, आदत से मजबूर.
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फोकस अपने कर्म पर, सच्चे दिल से प्यार,
जग में आना सफल है, निभते सब किरदार.
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निष्ठा से करे जाते, जो निर्धारित काम,
सफलता पक्की पाओ, गर करो न आराम.
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आने का इस जगत में, लक्ष्य बनाओ एक,
लग जा पूरी लगन से, खोए बिना विवेक.
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अधिक जरूरत आपकी, खोजें नए विकल्प,
सीमित संसाधनों में, पूरे हों संकल्प.
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दोष नहीं कुछ सोच में, देखें बड़े ख़्वाब,
प्रयास तो पूरे करो, होगे सफल जनाब.
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लक्ष्य रखो ऊँचा सदा, हो सुखद एहसास,
खुशी जीत की पा सको, पूरा करो प्रयास.
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बुढ़ापे से रोष नहीं, जानो सदा जवान, 
घर में व्यर्थ लड़ो नहीं, रखो आयु का मान.
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बुढ़ापा है रोग नहीं, अधिक आयु प्रमान,
शिथिल अंग की बेबसी, कुदरत का वरदान.
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देख बुढ़ापा सोच लो, आ पहुँचा फरमान,
कर लो अच्छे करम अब, अंत समय को जान.
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हम सब  देती रहें, देवी माँ वरदान, 
भक्ति सहित पूजन करें, रख लब पर मुस्कान. 
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हम सच्चे दिल, भाव से, करते उनको याद, 
पूरी हो मन कामना, रहे यही फरियाद. 
----------

देवी के अवतार को, पूजूँ आज जरूर, 
मन सोचे कैसे जले, बाती, धूप, कपूर. 
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तन में कमजोरी लगे, संयम छोड़े श्वास, 
होते अक्सर बेहोश, कोई नहीं जब पास. 
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रक्त-चाप अचानक बढ़े, होता तन बेचैन, 
हृदयाघात उसे कहें, कढ़ जाते नैन. 
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कोलेस्टरॉल के कण, धमनी में रुक जाय, 
बाधित रक्त-प्रवाह हो, हार्ट अटैक कहाय.
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मी-टू के आगोश ने, निगल लिए इन्सान ।
मतलब निकाल बाद में, सिरा दिए भगवान ।। 
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मतलब संग अवसर, खोज रहा कानून ।
जन-हित कारण हो रहा, फैसलों का जुनून ।। 
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नैतिकता को छोड़ दें, भूल धरम, ईमान । 
तुच्छ स्वारथ के लिए, बदल गया इन्सान ।।
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नया शिगूफा अब खिला, मी-टू का अभियान,
कांग्रेस के नाम जुड़ा, एक और शैतान. 
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होती मी-टू नाम से, मर्यादा तार-तार, 
संस्कार छलनी हुए, रिश्तों में व्यभिचार. 
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समानता के नाम पर, महिला अत्याचार,
याद भयावह भूत की, मी-टू का आधार. 
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निस्वार्थ संघर्ष करे, नहीं मान की चाह, 
लडे़ गंगा-काज हेतु, करी न कुछ परवाह.
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नेता ने भाषण दिए, नारे थे दमदार,
किया काम नहीं कुछ पर, खर्च धमाकेदार. 
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सत्कारण पर्यावरण, रख कर लक्ष्य महान, 
एक संत करा प्रयास, दे दी अपनी जान. 
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मन लगा कर काम करो, जब लो मन में ठान,
दिल में लगती लगन जब, हो जाता आसान.
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सफल हों जब जुनून संग, मन पाता आराम,
चाहे कुछ भी काम हो,  मिले भला परिणाम.
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नए काम की पहल में, जब आ जाय जुनून,
गौरव से अभिभूत हों, मन को मिले सुकून.
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खेतों में भूखा रहे, अनाज जनक किसान ।
तज अपने आराम को, याद करे भगवान ।। 
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शोषण करें किसान का, नेता, साधु, समाज ।
उसे मानते दलित सभी, लगे न नेकहु लाज ।।
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सम्मान दो अनाज को, करो न तुम बेकार ।
भूख मिटा, सबको खिला, सुखी रखो परिवार ।।
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तुलसी चढ़ती विष्णु को, गणेश पाते दूब,
देव पूजो कोई भी, रमो भक्ति में खूब.
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पूजन के उद्देश्य हैं, हित-साधन, व्यापार,
धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, जीवन के गुण चार.
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कमाई पुण्य की फले, हरती मन का ताप,
बरबाद हो कभी नहीं, अर्जन जब निष्पाप.
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बहुत नियम-कानून हैं, जिनका रखना मान, 
लिखना इनमें बाँध कर, काम नहीं आसान.
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मात्रा की जुगत बैठी, लय होती बेहाल, 
जगण दोष कब घुस गया, कैसे हुआ कमाल. 
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जस-तस तुक बंदी करी, जोड़ शब्द का मेल, 
छपने से पहले लगी, टीकाओं की रेल. 
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अंग्रेजी देती नहीं, शिक्षा, तमीज़, ज्ञान,
फर्राटे से बोल कर, दर्शाते अभिमान.
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माँ - बाप करें नौकरी, बच्चे पाले धाय,
घर आते ही काम से, कब तक फुरसत पाँय.
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बच्चा पैदा होत ही, जाग गए अरमान,
अनुभव ले कर खूब वह, बने नेक इंसान.
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शान्त रह चिंतन करो, गुस्सा करे बवाल,
क्रोधाग्नि में घी पड़े, लपट उठे विकराल.
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शान्त का मतलब नहीं, हरदम रहो उदास,
मन की शक्ति बढा़इए, दिखती जीवन आस.
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कभी विचारों की चले, मन में ऊहा-पोह,
ठंडे मन से सोचिए, तज स्वार्थ का मोह.
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दोहा लिखने बैठते, आदत से मजबूर,
विषय, दिशा कोई नहीं, पर, लिखेंगे जरूर.
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तुकबंदी मिला कर भी, बनी न कोई बात,
हर पल आते ही गए, मन में कुछ जज्बात.
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कभी श्लेष, कभी यमक, सूझते अलंकार,
कैसे उनसे कर सकूँ, दोहों का श्रंगार.
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सुखद रही आलोचना, खूब लगाया ध्यान,
पा कर सुझाव आप से, करें खूब प्रतिदान.
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दोहा लिखने की कला, मन में भर कर जोश,
हम भी उसको लिख रहे, खाली करके कोश.
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कोई विचार जब उठे, रहो सदा तैयार,
मोबाइल को साथ रख, नोट्स लिख लो यार.
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अधिक आयु के हाल में, मानव जाता भूल,
इसके भी होते लाभ, गुण यह बनता मूल.
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समय गुजारो चैन से, बैठो खुद के पास,
भजन-पूजन, मनन करो, चलती जब तक साँस.
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घर-बार में दखल नहीं, न दें अनचाही राय,
मतलब अपने काम से, अनुभव नहीं सुनाय.
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बीच सड़क पर है लगी, वाहनों की कतार, 
कैसे पैदल चल सकें, हैरानी हर बार.
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बिल्डिंग में अनुमति नहीं, अतिथि कार घुस पाय, 
परिचित अक्सर सोचते, कैसे किस घर जाय. 
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हर दिन बढ़ता जा रहा, पेट्रोल का दाम,
कब थमेगा रूझान यह, कब होगा आराम. 
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बनते नहीं शौचालय, करें खुले में शौच,
घंटों बैठें वहाँ पर, नहीं बदलती सोच.
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टाॅयलेट में बैठ कर, उपजे नए विचार,
बाहर निकल अमल करो, दे उनको व्यवहार.
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सड़क किनारे शौच कर, छूट गई पहचान,
कैसी जिद है आपकी, कैसे निभे विधान.
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ऐसे नेता अब कहाँ, कर दें जो पद-त्याग,
लूट-पाट के जगत में, बना रहे हैं भाग.
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दलाली खा बढ़ा रहे, पुरखों की जागीर,
सदाचार काफी नहीं, जो बदलें तकदीर.
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निस्वार्थ सेवा करें, बिन खाए कुछ माल,
ढूँढे से मिलते नहीं, भारत माँ के लाल. 
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गणपति को दे विदाई, पुरखे पूजें जांँय, 
माताजी की नवरात्रि, दया दिखा कर आँय. 
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रावण मारा राम ने, हुई भले की जीत, 
क्यों ली अग्नि परीक्षा, कैसी थी वह रीत. 
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पति को दे शुभकामना, करती व्रत उपवास, 
करवा चौथ कठिन पर्व, बिना जल नहीं हास. 
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वोटर को मिलता नहीं, परिचय का आधार,
इसके जुड़ते ही खुले, घोटाला-व्यापार.
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आधार से अमर हुई, सभी जगह पहचान,
अलग अनूठे दिख रहे, उंगली के निशान.
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असली से अंतर लगे, चिपकाया जो चित्र,
आँखों की भाषा अलग, बदला दिखा चरित्र.
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हटा पाएँ मोदी को, नहीं काम आसान,
साहस नहीं जुटा सके, लगा रहे जी-जान.
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थाली का बैंगन बने, मिलें जहाँ पर वोट,
जाति-धर्म सब भूल कर, खरचे जाते नोट.
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अपना नहीं धर्म-जात, रहा नहीं ईमान,
कहते बात वजूद की, वोटर है भगवान.
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मुरगे की बांग करे, अलार्म जैसा काम, 
छोड़ बिस्तर, तुरत उठो, बिना और आराम. 
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हर रोज उषा काल में, मुरगा देता बांग, 
सुबह न हो उसके बिना, यह विचार दे टांग. 
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सही है, प्रेरणा मिले, जगता मानव भोर, 
सिंचित नव-ऊर्जा से, कर निश्चय का दौर. 
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अगले साल चुनाव हैं, किसकी हो सरकार,
नेता सारे कर रहे, वोटर की जयकार.
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अपनी जुगत बिठा रहे, लगते रोज कयास,
झूठ बोल कैसे मिले, जनता का विश्वास.
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खूब बुराई सब करें, झूठे-सच्चे कोप,
बहकाने को ढूँढते, निराधार आरोप.
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हिलत, डुलत, निरखत सभी, नजर लगावत जाय,
वे झूमें रस आपने, प्रिय को हाल सुनाय.
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तन-बदन की न सुध रहे, आस-पास से दूर,
खोए अपनी रमक में, बन जाते हैं सूर. 
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भाषण, प्रवचन के बीच, चलते हैं उपदेश,
भला-बुरा समझा रहे, करते दूर क्लेश.
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हो कहानी कोई भी, सबके अलग विचार,
अपना ढंग बखानते, सारे रचनाकार.
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बिना बात नाटक रचें, मूल न पावे कोय, 
अपना पक्ष बता रहे, मात्र सही हम होय. 
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बडे़-बड़े वादे करें, गाएँ अपने गीत, 
अपनी कथनी भूलते, यह चुनाव की रीत. 
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वोट माँगने के लिए, हिन्दी की लें आड़,
कहते जीत चुनाव में, हिन्दी जाए भाड़.
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वोट माँगने के लिए, हिन्दी की लें आड़,
कितनी भी इसमें मिले, लानत और लताड़.
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वोट माँगने के लिए, हिन्दी की लें आड़,
हिंदी भूले जीत कर, पग-पग मिले पछाड़. 
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आहत नारी भावना, कर देती अपमान,
भले-बुरे सारे पिसें, भूले सारा ज्ञान. 
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नारी के अपमान से, बड़ी नहीं कुछ भूल, 
सह जाय वह भले उसे, कभी न पाती भूल. 
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अच्छा कभी लगे नहीं, नारी का उपहास,
पुरुष-दर्प की चोट से, बढे़ं समर प्रयास.
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माँ-बीवी, बहन-बेटी, आप, बाप, औलाद,
नाजुक रिश्ते तोड़ते, जर, जमीं, जायदाद.
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बीवी मिली, माँ भूली, बसा लिया संसार, 
बीवी छोडे़ जगत में, और नहीं आधार. 
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दरजा बीवी का बड़ा, हरदम देती ज्ञान, 
शिक्षक उसको मानिए, चाहे हो अपमान.
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धुला दूध का सब कहें, उनका झूठ कमाल,
आरोप को झेल गए, खा कर माल दलाल.
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मुद्दे से भटका रहे, नेता और वकील,
गुमराह करें तथ्य से, करते खूब अपील.
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झूठ बात को सच बता, कर देते गुमराह,
ना मानो इनकी बात, करता हूँ आगाह.
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सखी साथ उपवन रहे, प्रिय की आती याद, 
खोई अपने में रहूँ, कैसे हो फरियाद.
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सखी सोचती विरह में, हिय में उठती हूक, 
प्रिय मिलेंगे जब मुझे, रह जाऊँगी मूक.
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जाने किन हालात में, होंगे प्रिय भरतार, 
अनमने से क्यों छिड़े, विरही मन के तार. 
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बंद-वंद बेकार के, झूठी इनकी चाल, 
कैसे मोदी हटाएँ, फैलाते वह जाल. 
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आरक्षण पाए कौन, करते रहो विवाद, 
तोड़-फोड़ बिन है नहीं, संभव कुछ संवाद.
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बस जला कर दंगा करें, मचवाएँ हड़कंप,
पुलिस मूक निरीह बनी, देख रही भूकंप.
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हिलत, डुलत, निरखत सभी, नजर लगावत जाँय, 
वे झूमें रस आपने, प्रिय से दिल लगाँय. 
------------

तन-बदन की न सुध रहे, आस-पास से दूर, 
खोए अपने रमक में, बन जाते हैं सूर. 
------------

प्रवचन, संभाषण के बीच, चलते हैं उपदेश, 
भला-बुरा समझा रहे, करते दूर क्लेश.
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श्रद्धा नत नमन करें, बना रहे उत्साह,
सुविचार हृदय में भर, करें प्रेम प्रवाह.
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महत्व गुरू का जान लो, गुरू ज्ञान की खान,
सच्चा गुरू दुर्लभ मिले, गुरू दिलाता मान.
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ऊँच-नीच, गुण-दोष से, करवाता पहचान,
ऐसे गुरू की वंदना, करें सदा सम्मान.
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लुका छिपी है गगन में, चाँद धरा के बीच,
सूरज दादा अचल हैं, मस्त नजारे खींच.
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चंद्र ग्रहण पूनम को, करे काँति का ह्लास,
सूर्य छिपा अमावस में, पूरण या खग्रास.
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अलग तल, अक्ष में झुकी, अलग ग्रह की चाल,
हर अमावस, पूनम को, होता नहीं कमाल. 
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नेता सारे बेशरम, सत्ता हो या विपक्ष,
मीडिया, जज खरीद कर, दीखते हैं स्वच्छ. 
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सबको समान अधिकार, देता है संविधान,
दिलवाएँ अनुचित लाभ, नेता हों भगवान.
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बिना काम पैसा मिले, आ जाता अभिमान, 
समझ बपौती बोलते, कर देते अपमान.
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झूठी-सच्ची छापते, बिके हुए अखबार,
अपना ही हित साधते, करके कारोबार.
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चिन्ता देश, समाज की, करें नहीं मगरूर, 
बदनामी का भय नहीं, पा पैसा भरपूर.
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अखबार में खास रही, पेज थ्री की बात,
रोचक खबरें कुछ मिलें, हर कोई पढ़ जात.
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गाड़ी रोक बीच सड़क, पान थूकते यार, 
लाल सिगनल देख चलें, समाज के आधार.
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हेलमेट बिन चल दिए, तीन सवारी लाद, 
मोबाइल पर बात कर, मानें खुद उस्ताद. 
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हवलदार पा राह में, बगल झाँकते यार, 
नेता से रिश्ता जोड़, बकते गाली चार. 
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आज सुबह से हो रही, देवा की जयकार,
कुछ को क्षुब्ध कर रहा, सूरज का व्यवहार. 
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खुद की लिपि, भाषा कहे, ईद मुबारक बाद,
दिल लगा, मिला कर करो, दिल ही से संवाद.
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मूक, निरीह बकरे का, हृदय भरे हुंकार, 
वह समझे मन आपका, उसकी सुनो पुकार.
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पर्व मनाओ खुशी से, दिल से कर इज़हार.
नफरत दिल से मिटा कर, मिलो गले सब यार.
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बकरा मूक कराहता, करता करुण गुहार,
मत हरो प्राण मेरे, चीख कहे संसार.
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बकरीद का त्योहार, बढ़ा रहा सद्भाव,
बकरों का फिर भी क्यों, बढ़ रहा मोल भाव.
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सभी प्राणी में बसे, ईश्वर साक्षात,
कतल कर मूक का क्यों, जिगर नहीं घबरात.
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दिन-दिन बढ़ते जा रहे, पेट्रोल के दाम,
मंहगाई के समय में, जीना हुआ हराम.
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अपने तेल-स्रोत से, बने नहीं जब बात, 
डाॅलर में भुगतान कर, तेल करें आयात. 
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वैज्ञानिक नित खोजते, क्रूड तेल व गैस, 
जगह न कोई बच सकी, खोजा पूरा देस. 
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भली लगे बरसात में, चौमासे की धूप,
बादल से पानी झरे, उफनाते हैं कूप.
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मजा लीजिए सफर का, हो नहीं जल-जमाव,
अपघात से मुक्ति मिले, बचे कार टकराव.
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हौले से वाहन चले, रख पथिक का ध्यान,
गड्ढों से शाॅकर बचें, मत झेलो अपमान.
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जीवन यापन में लगा, देश, काल का जाल,
पापी पेट की खातिर, कितना करें ख़्याल.
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भरे पेट पर चीख कर, कुछ भी बोले जाय,
पीड़ा खाली पेट की, किसको पड़े सुनाय.
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माल दलाल डकारते, रोदन करे किसान,
एम.एस.पी. का नाम ले, शोषण करें महान.
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भगवान मुझे जब कहें, मैं ही हूँ भगवान,
लोग कहें, बात तेरी, मानव सी शैतान. 
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मंदिर में ढूंढे प्रभु, हरि से माँगन जाँय,
जो दीखे हरि सामने, खुद को जानत नाँय.
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साक्षात हरि न दीखते, पर, मानें भगवान,
सच्चाई को नकारते, यह कैसे इन्सान.
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बेटी छाया आपकी, चमकाती है नाम, 
मिलती रहे खुशी सदा, बनते बिगड़े काम. 
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शादी करी, विदा किया, ससुराल बना धाम, 
सुखी देख ससुराल में, दिल पाए आराम. 
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सम्मान उसे दीजिए, खास कुछ त्योहार, 
रोज हाल मत लीजिए, बढ़ती है तकरार.
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धीमे गाड़ी रोकिए, जब सिगनल हो लाल,
हरा देख, आगे बढे़ं, रहे न तनिक मलाल.
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बिना सिगनल कार चले, कट जाता चालान, 
किस मोड़ पर टकराएँ, ट्रैफिक पहलवान.
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सफर सुरक्षित कर सकें, शीष-कवच सिर लाय, 
दुर्घटना भी हो अगर, सिर पर आँच न आय. 
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भू-गर्भी सर्वे करें, मन में ले कर आस, 
तेल गैस की खोज से, बढ़ जाता विश्वास. 
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जहाँ लगे संभावना, मिल सकता है तेल, 
इस तथ्य की पुष्टि करें, अन्य तौर से मेल.
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भू-कंपन से पता लगे, आगारी आकार, 
कहाँ वेधन शुरू करें, हों प्रयास साकार. 
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लगा रिग, करें खुदाई, हो जल या जमीन, 
बीच-बीच में टेस्ट करें, संरचना का बीन. 
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कभी खुदाई में रहा, असामान्य प्रकार, 
खुशी चौगुनी हो रही, बहे तेल की धार. 
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जूते खा, कुरसी मिले, खा लूँगा मैं रोज़, 
सबसे अच्छा विटामिन, सबसे अच्छी डोज़. 
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सत्ता सुख है परम सुख, मिल जाए इक बार, 
दगा, झूठ, छल, कपट से, फिर छीनूँगा यार.
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उत्कंठा मुझको रही, कुरसी जी की चाह,
उस पर बैठा देख कर, सारे भरते आह. 
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बदले मौसम में उगे, हरित धरा पर बीज, 
प्यार की कोपल खिले, हरियाली की तीज.
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शिव की करें उपासना, गौरी की लें आशीष, 
सरल, सहज मन-भाव से, होते मुदित महीष. 
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कनक, बिल्व प्रसाद से, होते शिव प्रसन्न, 
वर देते सबको सदा, तन, मन, धन, संपन्न. 
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शोक जताते जन सकल, हो नेता का अंत, 
आँसू भी बहा लेते, कुछ कह देते संत. 
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जब चाहे दंगा कर लें, फैलाएँ उन्माद, 
भाषण, हिंसा, रैली में, नहीं तनिक प्रमाद. 
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समाचार प्रसार में, सत्य का योग दान, 
मुख-कही, कान-सुनी से, अफवाह बने महान.
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एक-एक करके बढे़, आलू-प्याज़-भाव,
नेता की चाँदी बनी, मरते जन बेभाव.
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हिंसा फैला कर चलें, नेता खोटी चाल,
वोट-नीति को साधते, करके सभी बवाल.
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आरक्षण के नाम पर, देते बाँट समाज,
नफरत पैदा जात में, बिगाड़ रहे मिजाज़.
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वीर मराठे माँगते, आरक्षण अधिकार, 
नगर बंद बुला कायर, करें लचर सरकार.
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बंद का आव्हान कर, वापस जाते मान, 
उठे खुरक कुछ काल में, आते सीना तान. 
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हर झगड़े की पहल को, सुलझाती सरकार, 
नेताओं से हवा पा, झुक जाती हर बार. 
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देती अंडा जब तलक, मुरगी पाए मान,
पता नहीं उसके बाद, कब तक बचती जान.
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मुरगी अंडा दे रही, सब के मन को भाय,
लाभप्रद सौदा रहे, व्यापार बढ़ जाय.
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वह मुरगी क्यों काटें, स्वर्ण अंडा लाय,
मूरख लालच, भूल से, एक साथ ले जाय.
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बेटी किसी की पा के, बना बहू अपनाय,
संबंध मधुर बन रहे, जब दिल से मिल जाय.
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शादी में परिवार की, लालच मूल दहेज,
बेटी रहती अमानत, रखिए जतन सहेज.
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पति-पत्नी जब बन गए, एक नदी, दो तीर,
स्नेह धार मधुर बहे, समझें उन की पीर.
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गंगा जी में धो रहे, नेता अपने हाथ,
हाथ-पैर को साफ कर, दाग लगावें माथ.
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खूब नगर को साफ रख, कचरा लिया समेट,
नाले में कचरा बहा, चढ़ा नदी की भेंट.
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गरल विसर्जन हो रहा, मेरे दोनों तीर,
कर प्रदूषण डालते, मेरे उर में पीर.
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जान ले जो बिना कहे, कहलाता वो मीत, 
उसके दिल से दिल मिला, निभती अच्छी प्रीत. 
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सुख में रहे खिले-खिले, दुख में आँसू धार, 
रखे न कोई तकल्लुफ़, बिरले मिलते यार.  
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यार की समझ जरूरत, आता आगे दीन, 
हल करता मसला समझ, जुट जाता प्रवीन. 
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पावन पावस से हुआ, धरती का श्रंगार,
पावक बुझती पेट की, कर किसान जयकार.
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झूमा बदन किसान का, वर्षा सिंचित खेत,
मेहनत से चमकेगी, खुशी, शान्ति, श्वेत. 
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वर्षा में हैरान हैं, धोबी और कहार, 
हो रहे प्रसन्न मगर, अन्न खिलावन हार. 
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अजगर लटका पंखे पर, डब्बा फ़र्स्ट क्लास, 
सभी यात्री खो रहे, अपने होश हवास. 
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विषधर से सारे डरे, भाग रहे बेचैन, 
घातक नजर निहारता, तीखे उसके नैन. 
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दीदार नागराज का, पाये पूजा मान, 
सावन माह में आए, साक्षात भगवान.
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बिना टिकट पकड़ी गई, कीमत तीन हजार, 
बकरी को नीलाम कर, हैंं कई खरीदार.
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मालिक बकरी छोड़ कर, होता कहीं फरार, 
उसे ढूँढने में लगे, विधि के पालनहार.
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लावारिस काबिज करें, कहता है कानून. 
होती पेश मिसाल है, जब चढ़ जाय जनून. 
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आप भारत देश रहें, बेटा दूर विदेश, 
तय कालांतर पर मिलें, उसके कुशल संदेश.
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पृथ्वी गति से होता, अलग समय का भान, 
जी.एम.टी. अपना लिया, मानक समय समान.
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अपने समय बता रहे, जग के सारे देश,  
जी.एम.टी. के सापेक्ष, समय बदलते देश.
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जगह जहाँ रहने लगें, लग जाता दिल यार, 
चाहे बहता सामने, नाला बदबूदार. 
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रह कर ही अनुभव करें, निवास के गुण-दोष, 
कमी-बेशी पता चले, है सुख या कुछ रोष. 
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बेचन जाँय मकान को, चुन-चुन लाभ गिनाँय,
खरीदन के समय वहीं, दोष छाँट कर लाँय. 
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जल्दी से विकेट गिरे, हुआ बहुत नुकसान, 
देश की प्रतिभा घटी, बढ़ता जिनसे मान.
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डाक्टर राव बन गए, भारत के सम्मान,
अभूतपूर्व शोध से, बढ़ा अंतरिक्ष विज्ञान. 
----------

है चर्चा में हमारे, वैज्ञानिक की शान, 
गर्व करेंगे हम सदा, देश-सपूत महान.
----------

नजर पारखी अनिल से, छिपे न कोई दोष,
निष्ठा निभा बता रहे, बिन दिखलाए रोष.
--------

छोटी सी गलती कहीं, होती नहीं मंजूर, 
अच्छे दोहे का सदा, करते मान जरूर. 
---------

दोहा लिखने की कला, सिखा रहे श्रीमान,
दे सबक, गलती सुधार, निखार करें महान .
---------

आय से अधिक खर्च कर, स्टेटस बने शान,
ई.एम.आई. भर कर, निकल गई सब जान.
--------

रख-रखाव सामान का, कीमत के अनुसार, 
ए.एम.सी. ले लीजिए, चिंता बिन संसार.
--------

साइन से पहले पढ़ें, संकेत-नियम जरूर,
बाद में पछताओगे, ऐसा क्यों हुज़ूर.
---------

पलक झपकते घट गया, जी.एस.टी. का रेट,
सारा क्लेश मिट सके, गोद में जाय लेट. 
--------

सभी सुखी हों देश में, मिटे भ्रष्टाचार,
कमा सकें ईमान से, खा पाए परिवार.
--------

बच्चे भूखे मर रहे, करते काम तलाश, 
जी-जान मेहनत करी, लूट गए बदमाश.
---------

रोनी सूरत देख कर, मिलता जो भी यार,  
बारह बजे हों जैसे, क्यों हुआ दीदार.
-----------

सबसे मिलो प्यार से, मन में भर मुस्कान,
मिलने वाला याद कर, दे जाए वरदान.
---------

हँसता बच्चा देख कर, मन होता बेचैन,
तुरत बुलावें गोद में, हर्षित रहते नैन. 
----------

करो एन्जाॅय आज को, कल की चिन्ता छोड़, 
नेता हिसाब माँगते, कभी बढ़ा कर जोड़.
--------

साठ साल चिल्ला रहे, कह के मन की बात, 
जुमले बाजी कर रहे, वादों की सौगात.
--------

सारे विपक्षी मिल कर, बदलते वर्तमान,
चुनाव जीत ही लेंगे, चला रहे अभियान.
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कसम खा कर खेल रहे, आड़ी-तिरछी चाल, 
हित-अनहित सोचे बिना, दिखाते वह कमाल. 
----------

सांसद निधि को हड़प कर, करते नहीं विकास,
सब कुछ पाते मुफ़्त में, नकली ओढ़ लिबास. 
--------

गाल बजाने में न कुछ, आती उनको लाज,
झूठ बोल, उपहास कर, चुटकी लेत समाज.
---------

बंद-वंद बेकार के, झूठी इनकी चाल, 
हटाना मोदी को सदा, फैलाते वह जाल.
---------

आरक्षण पाए कौन, करते रहो विवाद, 
तोड़-फोड़ बिन है नहीं, संभव कुछ संवाद. 
---------

बस जला कर दंगा करें, मचवाएँ हड़कंप,
पुलिस बेचारी मूक बन, देख रही भूकंप.
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राजनीति में बिन मिले, रखते अलग विचार,
झूठे सच्चे तथ्य से, घेर रहे सरकार.
----------

मतलब साथ निकालते, आते जभी चुनाव,
जनता को मूरख समझ, फेंकें अपने दाँव.
------------

बना हितैषी आपने, मुस्लिम, दलित, किसान, 
बड़े-बड़े वादे करें, पंडित पढ़ें कुरान.
-------------

बाहर से विरोध करें, भीतर पले प्यार,
भरे सदन में कर गए, नफरत का इज़हार.
---------

पुरखे उनके डालते, बटवारे की रीत,
निभाते हैं परंपरा, बतलाते यह नीत.
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माँ भी नहीं पढ़ा सकी, कैसे बढ़े ज़नून, 
शक्तिमान की गोद में, पाया अजब सुकून.
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अच्छा नाटक दिख सके, मजा करे सरकार,
तके रहे, मौका मिले, हो जाय वह फरार.
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अविश्वास-प्रस्ताव रख, दिखा गए औकात,
सब का मनोरंजन कर, दें अनुपम सौगात.
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संसद-गरिमा ताक रख, करते नहीं मजाक,
जिसके खिलाफ लड़ रहे, उसके दर्शन ताक.
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आज देश को हो रही, मोदी की दरकार,
सक्षम नेता हैं वही, बाकी सब बेकार. 
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गठबंधन की सोचते, अपना भुला विवेक,
मोदी से भिड़ने जुड़े, सारे दल हैं एक. 
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विरोधी विचार न टिकें, चुनाव के पश्चात,
कब तलक सरकार चले, जनता है घबरात.
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कोठे पर लाई गई, एक नार मजबूर,
हवस मिटाने आ रहे, नेता, सभ्य जरूर.
---------

वेश्या रही पालती, जीवन के अरमान,
किस तरह वापस लौटे, समाज में सम्मान. 
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कैसे रखें तवायफें, बच्चे अपने पास,
उदर क्षुधापूर्ति हेतु, यही बची थी आस.
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पत्नी की न सुनें बात, हो जांय परेशान,
मानें पत्नी की राय, मिल जाए सम्मान.
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जीवन साथी से बढ़े, गृहस्थी की चाल,
मिलता है अवरोध जब, हो जाती जंजाल.
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शादी कर लाए उसे, करो सदा सम्मान,
चलो उसकी सलाह पर, जीवन हो वरदान.
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दूर घास के दीखते, हरे भरे दालान,
हरियाली की लालसा, तृष्णा बनी महान.
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एकाग्र चित न रह सके, देखें दिवा स्वप्न,
शेख चिल्ली की नाईं, रहते सदा विपन्न.
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इधर विधायक जोड़ के, बना लेत सरकार,
पीछे माल पिलाय के, तोड़त बरखुरदार.
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मुंबई आ कर के चढ़ो, लटक लोकल ट्रेन,
दादर से पहले ही, होते सब बेचैन.
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मिटे थकान न रात में, होत न पूरी नींद,
झपकी, खर्राटे भरें, बच्चे, पापा, बींद.
--------

स्लो या फास्ट ट्रेन, झटके गिनें स्टाॅप,
गिनती पूरी होत ही, खुद जग जाते आप.
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गीत, गज़ल, नगमे सरल, गा लो मन से राग, 
सात स्वरों की सीमा, भली लगाए आग.
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अपनी मस्ती में रहें, सभी बनें मन मीत, 
सदाचार, मृदु भाष से, गा जीवन संगीत. 
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भला, बुरा सब कुछ यहीं, जीवन के दिन चार, 
खुशियाँ बांटो प्यार से, सत्य कहे संसार.
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प्रेमी के बहलाव में, मत आना सरकार,
चिकनी चुपड़ी बात कर, दिखलाता है प्यार.
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पति पत्नी के बीच में, हर पल की तकरार,
बिना लड़े, भोजन पचे, सही नहीं आसार.
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प्रेमी बोल लुभावने, नाचे मन का मोर,
सुन कर ही हरषात है, होवे भाव विभोर.
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ना हाँ कहूँ, न ना कहूँ, जो चाहे वह होय,
मैं तो बस वह ही करूँ, उस मन आवै जोय.
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पत्नी मन की बात को, सकै न कोई जान,
उसके मन को टोहते, मूरख और अज्ञान.
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पत्नी को न बताइए, झूठ, दंभ, अभिमान,
नजर पारखी सामने, भूलो सारा ज्ञान.
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खिलौने खेलें बच्चे, कलम बड़न की यार,
माला फिरी बुज़ुर्ग की, यम करे इंतजार.
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लिखना नहीं हंसी-खेल, करिए खूब विचार,
शब्दों की नौका चली, कलम बनी पतवार.
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कारगुज़ारी कलम की, लोहा ले मनवाय,
कद्रदान श्रोता मिलें, कलम सफल हो जाय.
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बिन लगाए नमक मिर्च, सच कहो समाचार,
अर्ध सत्य का ना करो, तुम भ्रामक प्रचार.
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छोटी सी इक भूल से, बनता तिल का ताड़,
बिगड़ी बात न बने फिर, जब भी मिले लताड़.
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टी.वी. पर बहसें चलीं, रहा न कुछ आधार ,
बिना मुद्दे की खबरें, छाप रहे अखबार.
---------

साधू बाबा आज के, कहते हित की बात,
है अपना या पराया, बिना कहे कह जात.
--------

भाषण, प्रवचन कला में, साधु बाबा प्रवीन, 
श्रोताओं को भाँप कर, बजती उनकी बीन.
--------

जनता को फुसला रहे, नेता, संत, फकीर.
अपनी कथा अलापते, बेचत रहे जमीर.
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गणित आधुनिक में रहा, e का अति प्रभाव,
अनवरत है यह श्रंखला, निश्चित इसका भाव.
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धनात्मक होता सदा, निश्चित इसका मान,
जटिल गणना सरल करे, बेस लाॅग का जान.
---------

इस की x घात से, परिणाम रहे फलित,
इंटीग्रेट, डिफरेंशेट, दोनों की सम गणित.
--------

पापा का अड्डा जमा, दादा की चौपाल,
मम्मी पनघट डोलती, लेती सबके हाल.
---------

बेटा खेले फुटबॉल, बेटी जाय स्कूल, 
बीवी करती नौकरी, सारे गम को भूल.
---------

एकाकी जीवन क्या, मिला रहे परिवार, 
तीन तलाक क्यों कहें, पहले करो विचार. 
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समाज सुधारक बन कर, बदल दिया परिवेश, 
सीख सुना कर आपने, जगा दिया सब देश. 
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अपनी बात कहें संत, बिन कुछ लाग लपेट, 
चाहे भिक्षा हो मिली, या हो खाली पेट. 
------------

चोखी बात सुनाय के, रखें न कुछ दुर्भाव,
समझ में जिसकी न पड़े, करते हैं गरियाव.
----------

चालक के सिरों पर जब, अलग विभव हो जाय, 
उस में फिर धारा बहे, गरमी बढ़ती जाय.
---------

चालक डूबें घोल में, बहे बिजली धारा,
आॅयन एक आवेश के, कहें साथ हमारा. 
--------

चालक में धारा चले, चुंबक के गुण आय,
धारा दर्शी साथ में, दिशा, मान बतलाय.
----------

बिजली, सिगनल मिल जाय, तो टी.वी. की शान,
शो प्यारा देख-देख, खुश रहें मेहमान.
---------

नई-नई चैनल चले, कर विज्ञापन खूब,
टी.आर.पी. भी न मिले, पैसा जाए डूब.
--------

रियल्टी शो उद्घोषक, करते खूब धमाल,
नाटक में घोषित करें, पूछें बहुत सवाल.
---------

जीवन यापन में चले, देश, काल का हाल, 
पापी पेट की खातिर, कैसे आय ख़्याल.
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गठ बन्धन का टूटना, कारण काफी साफ ।
उसकी गति न भाए इसे, करा न उसको माफ।। 
---------

सम गति से गाड़ी चले, साथ चलें दो बैल,
गलत दिशा में आन के, घूम जाय बिगड़ैल.
---------

साझे की हाँडी चढ़ी, भोजन स्वाद न भाय,
तेज आँच पर फूटती, सभी मसालो जाय.
---------

भाव भंगिमा नृत्य में, रखे प्रमुख स्थान,
दो नयना भक्ति डूबे, बोले एक अभिमान.
-------

दो कर जोड़ें तो लगे, प्रार्थना का भाव,
एक तमाचा बता रहा, लगे दाँव पर दाँँव.
--------

कान्हा पग वक्र रखे, होता प्रेम प्रमान, 
शिव के दोनों वक्र पग, करें तांडव भान.
--------

बाहर की लें सूचना, बन कर पहरेदार,
सब जरूरत पूरी करें, पापा का उपकार.
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भला बुरा सब सोचते, सबका रखें ध्यान,
पहला हित परिवार का, सब करते सम्मान.
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अनुशासन में बांध कर, खींचें सबकी डोर,
एका रखें परिवार में, आदर लेत बटोर.
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छल फरेब से दूर रह, कर लो जग के काम,
सरल मन की सेवा से, पा जाओ श्री राम.
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आपस के बरताव में, सदा रखो ईमान,
बरकत आ ही जाएगी, साथ मिलें भगवान.
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काले मन से कमा धन, खुद को लगे हराम,
होती नीयत नेक जब, नहिं पूजा को काम.
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बिजली, सिगनल चले सही, तो टीवी की शान ।
शो प्यारा देख-देख, खुश हो रहे मेहमान ।।
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कर्नाटक में बन गई, जोड़-तोड़ सरकार, 
आगे राजस्थान है, करो चुनाव प्रचार.
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मतदाता बहका रहे, नेता दिमाग दार,
करें अपेक्षा जीत की, सारे इज्ज़तदार.
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अगले चुनाव में बढ़ी, प्रलोभन की होड़,
मतदाता को फाँसने, नेता आते दौड़.
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ग्यारह तेरह मात्रा, चार चरण सोपान,
सम चरणों में तुक मिले, उसको दोहा मान.
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अक्रमण दोष बिन लिखें, करें नहीं लय भंग,
थोड़े में कविता करें, मोहक दोहे संग.
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खेल-खेल में लिख दिए, हमने दोहे तीन,
परखें दोहा-दौड़ में, निर्णायक प्रवीन.
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मक्खन बाजी की कला, करती सबका काम, 
होने की संभावना, दिलवा दे आराम.
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चाटुकारिता है प्रमुख, राजन के दरबार,
जब प्रसन्न राजा रहे, मिलें उपहार अपार.
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चापलूसी न कर सके, सज्जन ईमानदार,
मेहनत से काम करें, मिले संतोष अपार.
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घर आंगन में पल रहे, जाने कितने लाल,
कैसे पाएँ प्यार सब, टेढ़ा जरा सवाल.
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कुछ अमीरी भोग रहे, कुछ रह गये फकीर,
जान सबकी एक जैसी, भाल लिखी तकदीर.
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माँ बाप का प्यार मिले, उसका बड़ा नसीब,
लोरी सुन कर सो सके, कहते उसे गरीब. 
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धर्म समर्थन ले उड़ा, मुफ़्ती हुईं हलाल, 
सेना रखती साथ में, होता नहीं मलाल. 
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हित में अपने धरम के, सेना नाश मंज़ूर,
जनादेश के नाम पर, सेना थी मजबूर.
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सत्ता छोड़ी आपने, बहुमत में सरकार,
चार साल शासन किया, संभली ना पतवार.
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प्लास्टिक बैन से करें, सब जन हाहाकार,
कापस - झोला लाइये, करना हो व्यापार.
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आयु प्लास्टिक की कही, अगणित, अगम अपार,
सड़े, गले, घुले, न कभी, रि-सायकिल उपचार.
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भोजन, पानी, श्वास में, धरो विशेष ध्यान,
प्लास्टिक प्रयोग न कर, रखो विधान का मान.
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ऊँच नीच न प्यार में, दोनों रहें समान,
निभाने की ललक रहे, करो सदा सम्मान.
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सच्चे प्यार का रहा, केवल एक प्रमान,
दिल की भाषा समझ कर, बिना कहे लो जान.
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अंतस भाव ना जान ले, कैसा है यह प्यार,
सोच समझ कर कीजिये, अच्छी तरह विचार.
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धारा तीन सौ सत्तर, देती अविकल पीर, 
अनुचित सारे लाभ दे, बाँट रही कशमीर,
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करते पत्थर बाज हैं, सेना पर पथराव,
आदेश न पा, लाचार, बांधे हुए हैं पांव.
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सख़्ती होने पर करें, तुरत मदद गुहार,
पत्थर जेब में रखते, आदत से लाचार,
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चढ़ती हाँडी काठ की, केवल एक ही बार, 
परख दोबारा न करो, जल जाता घर बार.
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रिश्ते नाते तोड़ दे, अहम् भाव जब आय,
वहम बिसारे यार को, दूरी रखो बनाय.
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हँसी खुशी में सब रहें, मिले न मुश्किल काल,
अपने - पराए जान लें, कौन यार, किस हाल.
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जीवन सर्कस में दिखे, तरह तरह के शेर,
कुछ ने हमको मात दी, कुछ करे हम ढेर.
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अनुभव ने दी हमें, सीखें कुछ अनमोल,
अपना कर जिनको सभी, बोलें हित के बोल.
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सर्कस का जोकर बने, खेलें जीवन खेल,
अनुभव से आगे बढ़े, सबकी अपनी रेल.
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तन मन उसका स्वस्थ है, जो करता नित योग,
आसन, प्राणायाम से, दूर हो जाय रोग.
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अनुलोम विलोम की गति, रखे नियंत्रण 
श्वास,
कपाल भाती से करो, पुष्ट शरीर विकास.
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सूर्य नमस्कार की रही, महिमा अमित अपार,
योग अभ्यास से करें, जीवन का उद्धार.
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निकट न जिनके जा सकें, ऐसे प्रभु के दूत,
नफ़रत से जल बोलते, सारे उन्हें अछूत.
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बहुत चाकरी कर रहे, बीते मुश्किल काल,
खातिर पापी पेट के, झेलें सभी बवाल.
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व्यापक संघर्ष से मिला, आरक्षण का विधान,
पीड़ित करे समाज को, इनकी बढ़ती शान.
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आलोचना सफल वही, जो कर पाए सुधार ।
वरना विवाद बाद में, करना है बेकार ।।
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काफी महज राम नाम, दे भव सागर तार ।
नेक करम से सुख मिले, जो चाहो उद्धार ।।
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जीवन की हर सांस पर, ना हो आप उदास । 
संकट कितने भी आएँ, बंध जाती आस ।।
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रक्षा करती सदा पुलिस, करिये जरा विचार, 
दुष्टों को देती सजा, सज्जन को उपहार.
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मुठभेड़ में खतम करे, पड़ेध पुलिस की मार, 
हाथ पैर सब तोड़ कर, लगाए उसको पार.
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दोस्ती भली न पुलिस की, करो न उससे वैर, 
अधिक वैर में तय रहे, हवालात की सैर. 
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बाबा, दादी सराहें, पोते की मुस्कान,
उसकी खुशी परवारें, अपनी अपनी जान.
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गोद में किलकारी भर, लेता उनको मोह,
एक पल नहीं सह सकते, उस प्रिय का बिछोह.
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प्यारा मोहक लगता, छोटा हपला लाल,
उसकी शैतानी करे, नित नए अजब कमाल.
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बाल सखा न प्रेमिका, सदा सतत विश्वास, 
पत्नी से कुछ छिपा ले, बाल सखा में साँस.
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पत्नी और प्रेमिका, जीवन के आयाम,
पत्नी सात जनम रहे, प्रेमिका विश्राम, 
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सखा बनी, राधा चली, केवल कुछ पल साथ, 
पत्नी बन कर रुक्मिणी, ले सात जन्म हाथ.
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राजनीति के खेल में, बेशरमी हथियार,
झूठ बोल, वोटर लुभा, लंबी गप्पें मार.
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राजनीति संसार में, सबसे गंदा खेल, 
झूठ, द्वेष, छल से बचा, अच्छा नेता फेल.
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जनतंत्र में हमें मिला, मतदाता अधिकार,
विवेक सोच से डालिए, न हो जाए बेकार.
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काफी महज राम नाम, दे भव सागर तार,
नेक करम से सुख मिले, जो चाहो उद्धार.
-------------

जीवन की हर सांस पर, ना हो आप उदास, 
संकट कितने भी आएँ, बंधी रहती आस.
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सबके करमों का रखें, श्री चित्रगुप्त हिसाब, 
आर.टी.आई. में दर्ज, जीवन खुली किताब.
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गतिविधि जीवन में करो, लख पुण्य और पाप, 
मन को जो देवे खुशी, होय न पश्चाताप.
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चले करेन्सी न वहाँ, रुपया, डॉलर, येन, 
नेक करम करके सदा, बोलो मीठे बैन.
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पत्ती तोड़े, पुनः उगे, जब आवै मधुमास,
सुख भी मिलता जब ही, होय दुखन को नास.
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हार विचलित न कर सके, लगन रहे निज आस, 
सफल अंत में होएँगे, विश्वास रखें पास.
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नहीं बुराई नाश में, उठता थोड़ा शूल, 
हर्ष हो प्रतीक्षा से, फल होता अनुकूल.
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कुल वधू नाम से बड़ा, होता नहीं खिताब,
होती नसीबदार वह, जो पा जाए जनाब.
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बेटी जिस घर जाएगी, ले अपने संस्कार,
अनुभव से आनंद मिले, सुखी रहे परिवार.
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ऐसी शिक्षा दीजिऐ, रख ले सब का मान,
सुखी सदा सबको रखे, महके उसका ज्ञान.
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रोहिंग्या पढ़े नमाज, लेय साथ हथियार,
रोजा़ राजे बाद में, पहले हिन्दू मार. 
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कर पलायन पड़ोस से, मांगे सब अधिकार,
वोटर का रुतबा रखे, राजनीति उपचार.
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आतंकी सब फैल गए, बन सरकारी मेहमान, 
दे कर दो लात इन्हें, दौड़ाओ भगवान.
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मुदित मन तारीफ़ करे, खुशी हमें मंजूर, 
मन से चापलूस नहीं, तन से हैं मजबूर.
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लटू पटू सब लाद के, निकलें मॉल द्वार,
घर का झोला लें नहीं, पैसा झेले मार.
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कपड़े का झोला टांग, करें प्लास्टिक प्रहार,
फैशनेबल आधुनिका, बोले जाहिल गंवार.
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बड़े माल में खोजिए, फटी हुई इक जीन,
ऊपर पहनो टॉप वह, झलकाए आस्तीन.
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बाबुल ने दी विदाई, कहे हृदय पुकार,
कष्ट न पाए कोई, मेरी दुआ दुलार.
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हाँडी चढ़ती काठ की, केवल एक ही बार, 
अपने पराए जान गए, कौन यार, गद्दार.
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निकट न जिनके जा सकें, ऐसे प्रभु के दूत, 
नफरत में जल कर कहें, सारे उन्हें अछूत.
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बावन गज के निवासी, दिखें सबसे आगे.
हनुमान की पूँछ देख, दुम दबा कर भागे.
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गज़ब हड़क से बोलते, सभी सरासर झूठ,
वोट खींचना ही धर्म, नेता डालें फूट.
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डोली चढ़ा विदा किया, भेजा जब ससुराल,
मालिक फिर भगवान है, पति है दीन दयाल.
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सारी हरकतें ताके, पल पल रखे हिसाब, 
इस उमर में तो छोड़िए, दूसरी  के ख्वाब,
पत्नी के सवालों का, सूझे न कुछ जवाब.
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रचना कर श्रंगार की, मन को मिले सुरुर,
कोमल भाव पनप रहें, लिखते रहें हुज़ूर.
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छोटे से उपहार से, नई बनी पहचान, 
आगे उसे बढ़ान को, करिए कुछ बलिदान.
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गठबंधन सजे बाहर, भीतर में कुछ और, 
नहीं भूलता इतिहास, मौका ढूँढे बैर.
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घर की मुरगी दाल सम, बाहर चिकन स्वाद, 
अंजाने में पता नहीं, कोढ़ रहा या दाद.
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बेला, गुलाब लगाइए, करने को श्रृंगार, 
खुशबू मुफ़्त में पाइए, कुदरत का उपहार.
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दूध में मिला नीर जब, रहा दूध का दूध,
ऐसी संगत साधु की, कर दे सब को साधु.
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माया मोह में फँस कर, भूल गए भगवान,
किरपा उसकी हो जाए, वो पा जाता मान.
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मना करे माने नहीं, आड़े आता मान,
चपल चलन चित्त का, भुला देय भगवान.
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सदाबहार ममता से, माँ देती आशीष,
सादर नमन हम करते, झुका झुका कर शीश.
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कभी लगे तू काँग्रेस, कभी लगे तू आप,
सोच समझ कर वोट दो, वरना जीते बाप.
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कोशिश भूल से न करें, लगा खुशी का मोल,
भावुक आहत होत हैं, दुआ होत अनमोल.
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छेद कर के, भ्रम पालें, सब कुछ लीन्हा खाय,
गन्दा खाना, जब दिखे, थाली भी शरमाय.
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अखंड भारत फिर होएगा, बंद वोट की लूट. 
आतंकी दमन सेना करे, पा कर पूरी छूट.
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बकें अनाप शनाप हैं, कहते ऊट पटांग, 
केवल वो ही सही हैं, बाकी सब हैं राँग.
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कथनी, करनी का फरक, नेता की पहचान,
अंदर से नफरत करें, बाहर देते मान.
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नेता नाम से उपजें, मन में नफरत भाव,
भोली जनता भ्रम में, चढ़ती सबके दाँव.
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नारी घर की आन है, नारी ही है शान, 
भूल कर भी तुम न करो, नारी का अपमान.
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गलती अपनी मान ले, वह है बड़ा जनाब,
सबूत शीशा ही बने, दिन में देख ख्वाब.
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बगुला भगत दीख रहे, पा कर श्रद्धा वोट, 
बाद चुनाव पता चले, निकले दिल के खोट.
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खतरे में है लोकतंत्र, डगमगा गए स्तंभ, 
सुरक्षित कैसे कर सकें, विनाश का आरंभ.
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गठबंधन की रेल चले, केवल अगले साल,
तीन तलाक अपनाओ, हो जब भी बदहाल.
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हुनर सीख कर लूट लें, चुनी हुई सरकार,
नेता उनको सब कहें, विपणन का आधार.
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सीधी सच्ची बात का, टेढ़ा मतलब निकाल,
अर्थ नहीं, अनर्थ करें वो, मचा देते बवाल.
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गरमी से भन्नाय के, नानी के घर भाग.
मटका पानी को भरो, मीठो सत्तू लाग.
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दुआ माँग कर भक्त करें, अपने बस का काम,
जैसी जज इच्छा करें, निर्णय दें भगवान.
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महारत हासिल कीजिए, भला कमाएँ नाम,
व्यर्थ में टाँग अड़ा कर, हो जाते बदनाम.
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बेचैन विपक्ष हो रहा, लख सरकारी जाल, 
सभी लपेटे जाएँगे, कर लो खूब धमाल.
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अपने पर यकीन करें, खुद पर हो विश्वास,
मेहनत से हासिल सब, करते रहो प्रयास.
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दया तभी तक भली है, बची रहे जो जान,
बिच्छू बाज न आएगा, भूल न कर कल्यान.
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नियम बुढ़ापे के बने, पास हुआ कानून,
पालन इनका क्यूँ करें, धन का चढ़ा जुनून.
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पिता दे रहे बच्चों को, दौलत का अभिमान,
शिक्षा, ज्ञान सब भूल कर, चूर करें अरमान.
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इंतजार में चुनाव के, जीतन को बेताब,
कपट, झूठ के नाम पर, हो रहे बेनकाब.
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मासूमियत झलक रही, जनता की पहचान,
पूरा हिसाब करेगी, तय चुनाव में जान.
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ज़रूरी है ज़ुनून भी, अनुभव के संग ज्ञान,
रहे कसर प्रयास में, गुम होती पहचान.
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सत्ता पक्ष से कोई प्रश्न, करना है बेकार,
गुनाह खुद के ढापना, पनपाता व्यभिचार,
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नेता सारे बेशरम, सत्ता रहे या विपक्ष,
मीडिया, जज खरीद कर, दीख रहे हैं स्वच्छ. 
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समान अधिकार हमको, देता है संविधान,
लेकर अनुचित लाभ, नेता हो गए भगवान.
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मिलती देने से खुशी, नाचे मन का मोर, 
झूमते अति आनंद में, दे कर देख करोर. 
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पापा का अड्डा जमा, दादा की चौपाल,
मम्मी पनघट डोलती, लेती सबके हाल.
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हम देते शुभकामना, अंकित भेजें केक, 
दिल में प्यारी प्रानिका, खुशियाँ मिलें अनेक. 
--------

बेटी जा ससुराल में, गई मायका भूल,
बहू करे पूरी कमी, प्यार, लाड़ का मूल.
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कभी कभी ही मिल सकें, छोड़ अपना रोजगार,
अॉन लाइन शुभेच्छा, देते सब परिवार.
---------

भेजा है भगवान ने, देकर लक्ष्य महान,
बगैर किसी भेदभाव, कर दो सब कल्यान.
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आरक्षण के चालते, संभव नहीं समान,
न्याय प्रक्रिया में भी, घुस गए बेईमान.
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दीदी, बुआ तो चल दीं, अपनी अपनी ससुराल,
बाकी सारे सोचते, कैसे हों मालामाल.
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प्रेम भाव से कीजिए, अपनों का दीदार,
बिना स्वार्थ बाँटिए, दिलो जान सत्कार.
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नेता सभी बिछा रहे, अपनी अपनी बिसात,
दिवा सपनों से बताएँ, सब अपनी औकात,
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पैसे ले कर वोट देंं, चुन आते हैवान,
पछतावा तो होएगा, बेच दिया ईमान.
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नहीं चाहे कोई जन, उसको बोले फूल,
अप्रैल में विनय करें, मौसम होवे कूल.
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सरल हृदय शीतल रखो, सपने में न मजाक,
कड़वी बात भले कहो, मन रख कर बेबाक.
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दलाली बीच खाय के, बदनाम होंय विद्वान,
सजा भुगतते छात्र जन, पुनः दें इम्तिहान.
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नाम बड़े व दर्शन कम, ऐसे उनके काम,
बाहर तो प्रवचन करें, भीतर रहीम राम.
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गहन प्यार में रत, मन पाखी विचरे,
हुलसित वाणी, पा अनुकूल भाव से मुखरे.
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दीवानगी में एक शिद्दत है, मंज़िल को पाने की,
वरना अच्छों की फ़ितरत है, रास्ते से भटक जाने की.
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जो जी हजूरी कर सके, बचा कर आत्म सम्मान,
कोई कह सकता नहीं उसे, बेच रहा ईमान.
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नए नोट छप गए, पुराने हुए बेकार,
युवा चार्ज ले रहे, बूढ़े कर दरकिनार.
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शेर शेर था, है और रहेगा, सर्कस में करे धमाल,
स्तब्ध जनता देख रही, अवाक उसकी चाल.
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हम काम से, काम हमारी पहचान,
जिस दिन छूटा काम, निकल जाएगी जान.
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ग्राहक गण तो चाहिए, खाएँ पकौड़े दिन रात,
अपने अपने सब तलैं, बिना कमाई खप जात.
----------

राजनीति में पड़ कर, खेलें गंदा खेल,
अच्छे भले बिगड गए, मुश्किल से पाएँ झेल .
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एक झूठ छिपान को, बोलते सौ सौ झूठ,
साँच को आँच नहीं, भले अपने जाएँ रूठ.
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धीमी आँच पर पका हुआ, स्वादिष्ट बने पकवान,
तेज तपन से जल जाएगा, या फिर आए उफ़ान.
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प्यार करो विश्वास से, रख कर सच्चा ध्यान,
छल दगा फरेब का, नहीं, प्यार में कोई स्थान.
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नीति बतावन गए विभीषण, खाई भ्रात की लात,
लंका में सब बावन गज के, करै कौन पते की बात.
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जो दल बाढ़ै, देश में, प्रदेश में बाढ़ै नाम,
मुक्त हस्त से बाँटिए, यह राजनीति के काम.
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चारा कैसे हजम करें, जोह रहे हैं बाट,
मौका पाते ही, शौचालय को लेंगे चाट.
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सापेक्षता के सिद्धांत से, जीवन जाता बीत,
चार दिन की चांदनी, फिर बन जाता अतीत.
--------

पूजा अपने कर्म की, रखो सदा ही ध्यान,
खुशी स्वयं को मिले, बोनस में सम्मान.
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पति पत्नी के बीच में, दूजा न कोई आड़े आय,
वे दोनों मिल जाएँगे, अगला उल्लू बन जाय.
--------

अगर सजा तुरत मिले, जब गलती हो जाय,
बदनामी के भय कारणे, कोई गुनाह न कर पाय. 
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बहुमत से चल रही, देश की सरकार,
विपक्ष को नहीं रही, अल्प की दरकार.
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ऋणं कृत्वा, घृतं पिबेत, मंत्र बना महान,
मेहुल, माल्या, मोदी, पा गए सम्मान.
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नारी जब बने महान, चमके उस की अनुपम आभा,
प्रतिरोध जगत न जो करे, दर्शाए विलक्षण प्रतिभा.
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आज कमाई हो गई, कल की फिर दरकार,
पाँच साल बाद फिर होएगी, वोटों की बौछार.
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देखन जो चाहो करीब से, कर जाओ आत्म सात,
बिना रस लिए, भीगो कैसे, और मजा ले पाओ बरसात.
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होली आते ही, बढ़ जाती आपस में प्रीत,
एक बार बन जाए, तो बनी रहे यह रीत.
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बाहर गया जो श्वेत था, भीतर देश वाला श्याम.
बिगड़ी अर्थव्यवस्था का, रखवाला है राम.
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अहंकार में चूर हो, न रखो खुद की ऊँची नाक,
होलिका की भाँति सब, इक दिन हो जाएँगे खाक.
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सत्कर्म कर जाइए, ऊपर वाले के धाम,
फिक्र न कीजिए, तब क्या होगा अंजाम.
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कोई न सूझे जब तुम्हें, ढंग वाला रोजगार,
विदेश पलायन करो तुरत, लेकर खूब उधार.
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आंधी लाए प्रतिकूलता, तूफान लाए अवरोध, 
दृढ़ निश्चयी का न, कोई कर सके विरोध.
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पूरी निष्ठा से काम में, लगे न कोई खोट,
आरक्षण के कपट से, नेता मांगते वोट.
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विष कलश पी गए, करने को कल्यान,
असुर संहार कर, देव दिए वरदान.
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आज़ादी के नाम पर, मन चाहा करि जाँय,
खुद की खुशी खातिर, गैरन को खूब सतायँ.
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जो बस में तेरे नहीं, दे ऊपर वाले पर छोड़,
भला करेगा हर भाँति वह, क्यों लगाए दौड़.
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सहनशीलता का क्षरण हो, जब दुर्वचन पड़ें सुनाय,
वे सज्जन सुखी रहें, जो न ध्यान दे पाँय.
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आहत मन होत है, शब्द करें जब वार,
व्यथा भी बढ़ जात है, प्यारे फेंकें अंगार.
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जनता दर्शक मूक है, सहती सबकी मार,
पाँच साल के बाद, लेती वह प्रतिकार.
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डिग्री देख कर, ग्राहक प्रभावित हो जाय,
छोटा नहीं काम कुछ, मन से जो कर जाय.
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समझाने के लिए, दें पर्याप्त प्रमान,
'लेवल प्लेइंग' कीजिए, हो संचार समान.
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छोटी उम्र में मिल जाते, संस्कारों के कोष,
बड़े हो कर निकालें, मात्र गैरों के दोष.
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अनेकता में एकता, मानवता की पहचान,
सरल हृदय तो जानते, सबको अपना मान.
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भारत की गौरव गाथा पर, मत कर इतना अभिमान, 
कमियाँ तो सब में हैं, नहीं मिला कोई वरदान.
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बरेली काॅलेज की तो, बात ही निराली है. 
ध्यान धरो, जब भी, याद होती मतवाली है.
नित नव रतन तराशे, अंत होली, शुरू दिवाली है.
धूम धड़ाके से चालू हो कर, प्रेम भाव बढ़ाने वाली है.
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अंगार नहीं, आशीष है, सद्भावों की बरसात है, 
शीत का इलाज है, दीनबन्धु का प्रसाद है.
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धरा गगन प्रकृति में, इक दूजे से विपरीत,
मानव माध्यम बन, झाँके अपना अतीत,
झाँके अपना अतीत, योग का करे प्रयास,
दूर अनंत में मिल सकें, संभव क्षितिज है पास,
सकारात्मक ऊर्जा का, करमों से नाता गहरा,
ठान लें गर मन में, तो क्या गगन, क्या धरा ?
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सफल चित्रण कर गए, भाई मुकेश कुमार, 
प्रकृति रहस्य खोल रहे, मन के भावुक उद्गार, 
मन के भावुक उद्गार, कवि हृदय भर आया, 
शब्द जाल में प्रथम, सावन लक्ष्य बनाया,
मनोभाव की अभिव्यक्ति, सदा रहे प्रबल,
यश गाथा आपकी, करे मनोरथ सफल.
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ख़्वाहिशों के ज़ख़ीरे में,
दब गईं कुछ हमारी भी,
उम्र से पहले दफ़ना दिए,
ज़िंदा रहने का मजा न मिला.
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नीर नयन का मर गया, बिक गया ज़मीर,
बाज कुटिलता से न आए, शोषण करें शरीर.
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बीच बीच के बीच में, अड़ी नई पहचान, 
भाषा विभेद के भ्रम में, खोजें अर्थ समान,
खोजें अर्थ समान, हो जाए शब्दों में अंतर,
विसंगतियों का आकार, बढ़ाए चिंतन के स्वर,
झगड़ते दो मानुसों के, आएँ न बीचोबीच,
भूल से भी कभी, पड़ें न इन के बीच.

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ऐसा कविता लिखने का शौक क्यों चर्राया,
सब को घर फूँक तमाशा दिखलाया.
चोरी चोरी और सीनाजोरी  को गलत बताया ,
अपने प्रणय प्रसंगों में दोस्तों को क्यों घुसाया.
सुघर घर की है यही परिभाषा, 
बिन आँसू निकले आवै साँसा.
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कण कण में कविता बसी,
कविता में बस गए प्रान,
कविता से रच गई ज़िंदगी,
कविता बनाए पहचान .
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साँईं इतना दीजिए, जा में कुटुम समाय,
साँईं इतना दे दिया, कचरा लेउ जलाय.

कोरे नोट पे, न इतना गुमान कर,
कोरा नोट दो पल में, जल जाएगा.

सब जन चाहते, पसरें न काहू के आगे हाथ,
पर, करनी ऐसी भई, सौ रुपयन को मोहताज.

कोरे नोटों की गरमी औ तरावट, 
मुकम्मल नहीं, आदमी के लिए, 

कल तक जो जिए, दारू भरोसे,
आज वो बिन पानी जिए.
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जलता नहीं हूँ मैं, कि किसी को बधाइयाँ मिलीं ,
मुझे तो बस फ़िक्र है, नाम बधाई देने वालों के, कहीं गुम न हो जाएँ .

आज शान्त हूँ, पर, इस का मतलब, 
यह नहीं, कि मैं देख नहीं रहा,
कि ग्रुप में कौन कौन आत्म संयमी हैं, और कौन बधाइयाँ देने का दिख़ावा कर रहा.

यूँ तो, मैं भी बार बार मुँह बना सकता हूँ,
पर, क्रोध में ख़ुद को जलाना अच्छा नहीं लगता.

ग़र, ख़ुश हैं, दोस्त मेरे, मुझ को चिढ़ाने में,
तो उनकी ख़ातिर, कुढ़ते रहना सुुरा लगता है.

काफ़ी होता है, इशारा अकलमंद को, 
पढ़े लिखे को ढोर बताना, कहाँ की समझदारी है. 

पाठ याद कर लेते हैं , तोते भी बार बार रटाने से,
पर, बूढ़े तोतों को क़ुरान पढ़ाना भला नहीं लगता.
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नौकरी करत, लड़त रहत, आदत न पुरानी जाय,
साठ से ऊपर अब भए, ग्रुप को रहे डराय.
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नारायण के वेश में, मिल जाते दरवेश ,
झाँको खुद के अंतस: में, क्यों ढूंढो परदेश .
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बीवी आखिर बीवी है, परदेसी हो या देसी,
चलती नहीं, उसके आगे, पाकी हो या रूसी.
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बढ़िया दोहे गर्मी के , सुन गर्वित हैं आज ,
सारी गर्मी भग गई , शाँत चित्र का राज़ .
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हैरानगी की बात है, 
दोनों ऑनलाइन हैं, 
पर बात नहीं कर रहे . 
सिर्फ़ इन्तज़ार कर रहे हैं , 
कि पहल कौन करे .
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माँ बाप के संस्कारों का असर कुछ और है ,
मज़हबी तालीम की करामात कुछ और है .
सरकारी नौकरी में आरक्षण का मज़ा कुछ और है,
गर्ल फ़्रेंड के साथ पत्नी के स्वागत का नज़ारा कुछ और है .
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सत्ता मद में चूर हैं , नेता अँगूठा टेक ,
जो चाहे करवा रहे , भले नोट दें फेंक .

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पर्यावरण के दाम पर , हो रहा विकास ,
अच्छी शिक्षा के नाम से , संस्कृति का विनाश .
मृत प्राय खेल हैं , टी.वी. , मोबाइल के साथ , 
सभ्यता के नाम पर , गायब बुज़ुर्गों का आशीर्वाद .
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जमत जमत जम रहे , बैठे शीतल छाँव , 
जुगत बने ऐसी सजन , देखें इक दूजे के पाँव .
निरख निरख निहारते , इक दूजे की ओर ,
सँभाल rसँभाल रखियो परम , नज़र न मारे और . 

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फ़ेसबुक पर लाइक 

लाइक को क्लिक करके , मेरी पोस्ट अमर कर दो ,
जब फ़्रेंड बनाया है , तो एक लाइक तो कर दो ,
ना समय की सीमा है , ना पोस्ट का मंथन ,
जब लाइक करे कोई , तो देखे केवल नामाँकन .
दोस्तों से कह दो , इक लाइक तो कर दो .

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देवा ने सेवा करी , लगा लगा कर जी जान ,
अन्यत्र जब जा रहे , तब हमको हो रहा भान ,
तब हमको हो रहा भान , उसकी निष्ठा न्यारी ,
हँसी ख़ुशी करता सारे काम , उसकी सब से यारी ,
स्वस्थ , सुखी , समृद्ध रहे , चखे जीवन की मेवा ,
दुआएँ सब की बटोर कर , देखो चल दिया देवा .
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पंख लगा कर , समय का पंछी उड़ता जाए ,
हर पल , हर दिन , एक नया अनुभव देता जाए .
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वाह ! प्रतिमा बुआ , आशीष अनेकों दे जाओ तुम .
मन्नू के सक्षम हाथों से , परचम लहराओ तुम .


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भविष्य भूत हो जाएगा , कालचक्र का फेर ,
कल हम भी भूत हो जाएँगे , आज प्रभु को टेर .
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फ़्री फ़्री के जाल में , हो गया बंटाधार .
श्रम की रोटी की कदर , ना जाने सरकार .
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सामाजिक व्यवस्था

पड़ी है सफ़ेदी पीछे , ज्यों परछाईं ,
नाई की कलाकारी न काम आई .
चरित्र आपके फिर उजाला ढूँढेंगे ,
करों से काल के कैसे बच पाएंगे .
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मॉल महिमा

मॉल को माल भलो , ज़ुबान को भाय रह्यो है .
साथ में साथ पिया को , जग से मोहे भाय रह्यो है .
कहे चाहे कोई कुछ भी , पिया मोहे चाह रह्यो है .
लेखन कौ तौ करौ मना मती , जो जी को भाय रह्यो है .

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माना कि ,  धुंध  गहरी  है,
पर कमल खिलाना कहाँ मना  है. 

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ज़माने को मंज़ूर न था, मेरा मुसकुराना,
उनकी तो बस चाहत थी, मात्र खिसियाना .

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- : नसीब : -

गुज़ार दी उम्र सारी, ख़िदमते ओ.एन.जी.सी. में,
बाइज़्ज़त रिटायर हो लिए , तो शुक्रिया, वरना नसीब था .

कर कर के चाकरी , काट दी ज़िन्दगी इस उम्मीद में , 
रास आ गई किसी को , तो शुक्रिया, वरना नसीब था .

काट रहे हैं रातों की स्याही , इस मुग़ालते में  ,
आ गई सुहानी सुबह , तो शुक्रिया, वरना नसीब था .

चलते हैं , अब अहले वतन , सुकून की तलाश में ,
मिल गया , तो शुक्रिया , वरना नसीब था .

दोस्त , पड़ोसी , नाते दार , कर रहे हैं इंतज़ार, मुल्क में ,
ग़र मिल गए ,  तो शुक्रिया , वरना नसीब था .
 
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