Thursday, 25 November 2021
कैकेयी चरित - 55
Saturday, 31 July 2021
दोहा रामायण
Monday, 5 April 2021
महत्वपूर्ण ऐतिहसिक दिवस (निश्चित)
जनवरी 25 - मतदाता दिवस
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आज किया सरकार ने, मतदाता का ध्यान,
वोट बैंक भी चाहते, उनका कर सम्मान.
मतदाता को चाहिए, करे वोट अधिकार,
बिना स्वार्थ मतदान से, सुखमय हो संसार.
हक का मौका जब मिले, चुन कर नेता लाय,
अच्छा नेता वह नहीं, जो सब को भरमाय.
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जनवरी -10 - विश्व हिंदी दिवस
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दिवा स्वपन था अटल का, गूँजी थी आवाज,
विश्व दिवस हिंदी मने, खोले मन के राज.
मान विदेशों में मिला, देखो जमती धाक,
हिंदी के उपयोग से, ऊँची होती नाक.
जन मन की भाषा बने, करिए व्यक्त विचार,
सही ढंग से कह सको, अंतस के उद्गार.
जमे समझ में, ठीक से, करते रहो प्रयास,
भाषा चाहे जो रहे, मूल भाव आभास.
अच्छे से करिए प्रकट, मन की पूरी बात,
श्रोता के मन को छुए, कटती तामस रात.
हिंदी में भी कह सकें, अपने मन के भाव,
गर्व सभी बोली करें, कोई नहीं दुराव.
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जग में हिंदी को मिला, उसका सम्यक स्थान,
अपने भारत देश में, कुछ करते अपमान.
हिंदी में भाषण दिया, बढ़ा अटल का मान,
मना विश्व हिंदी दिवस, भारत का सम्मान.
हिंदी में सोचें, लिखें, और करें सब बात,
सरल ढंग से व्यक्त हों, टल जाएं अपघात.
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विश्व हृदय दिवस - 21 सितम्बर
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दिल को काबू में रखें, इसका कर उपचार,
वरना इसके खेल से, होगा अत्याचार.
समय समय पर कीजिए, रक्त चाप की जाँच,
नहीं कभी ऐसा घटे, आए उस पर आँच.
सेवन कम चीनी, नमक, घी, मक्खन उपयोग
सावधान आघात से, जीवन भर का रोग.
अच्छी सेहत के लिए, कसरत, श्रम, व्यायाम,
बढ़ी आयु में कीजिए, आवश्यक आराम.
लें अंग्रेजी ही दवा, ऐसा नहीं हुजूर,
देसी का भी फायदा, देगी लाभ जरूर.
होम्योपैथी है भली, नहीं असर कुछ और,
क्वाथ, लेप भी कर सकें, करिए थोड़ा गौर.
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सितम्बर 15 - अभियंता दिवस
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सृजन सृष्टि समान करें, ब्रह्मा का वरदान,
अभियंता उनको कहें, बढ़ता मानस मान.
मोक्षगुंडम लगा दिए, प्रतिभा, अनुभव ज्ञान,
भारत रत्न उन्हें मिला, किया देश कल्यान.
जन्म दिवस समर्पित है, अभियंता के नाम,
बारंबार नमन करें, यही बड़ा ईनाम.
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सितंबर 14 - राजभाषा दिवस
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कहने को सरकार ने, भाषा हिंदी नाम,
दे आश्वासन कह दिया, होगा सारा काम.
केवल कागज पर दिखा, यह सरकारी काम,
पता चला व्यवहार में, हिंदी को विश्राम.
बोल रहे सबसे अधिक, हिंदी अपने देश,
राजनीति ला कह रहे, यह मेरा संदेश.
हो हिन्दी अब लोकप्रिय, बने हमारी शान,
हिंदी में सब काम हो, बढ़े देश का मान.
हिंदी में हस्ताक्षर हों, नहीं कठिन यह काम,
निर्णय न्यायालय लिखें, हिंदी में हो काम.
बढ़े मनोबल आप का, करें हर्ष से काम,
उत्साहित हों देख कर, हिंदी में परिणाम.-
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दिल से हिंदी चाहिए, चिंतन को विश्राम,
जो सोचें, वही करें, नहीं दिखावा काम.
कठिन शब्द से बच सकें, कर के सरल प्रभाव,
बिन आडंबर के कहें, अपने मन केंंँऔ भाव.
जन मानस की बात हो, बिन बोले कह जाय,
भाषा बाधा ना बने, शब्दों को उलझाय.
एक दिवस हल्ला करें, बाकी दिन आराम,
शासक वृंद मौज करें, लें हिंदी का नाम.
शोर मचा कर नाम दें, हिंदी को सम्मान,
केवल बढ़े प्रचार ही, मिले मुफ़्त में दान.
उस दिन हिंदी का दिखे, गुंजन चारों ओर,
नाटक, सम्मेलन किए, भूले अगली भोर.
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भाषा अपने देश की, आती है नित याद,
स्वतः स्फूर्त विचार कहें, निज भाषा संवाद.
हिंदी भाषा शुद्ध हो, कहें सभी विद्वान,
मन में आया, बोल दें, फिसली नहीं जुबान.
एक दिवस ही साल में, हिंदी का गुणगान,
बाकी सारे समय हो, अंग्रेज़ी पय पान.
अंग्रेज़ी दीमक लगी, मन होता कमजोर,
लगते भाव उधार के, भीतर है कुछ और.
सीख दूसरों को भली, कहते जिम्मेदार,
बढ़-चढ़ कर भाषण करो, काफी लच्छेदार.
बोलो वह, जो दिल कहे, मत पीटो तुम ढोल,
दे कर भाषण एक दिन, हो जाओगे गोल.
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अपनी भाषा छोड़ कर, गैरों को सम्मान,
अपना जन मानस रहा, अंग्रेजी वरदान.
नाम राजभाषा हुआ, अंग्रेजी में काम,
भारत की भाषा सकल, ढूँढें उसका नाम.
गौरव अपनी सोच का, कर देता अभिभूत,
चिंतन मातृ भाषा में, सार्थक करें सपूत.
एक दिवस नाटक रचें, कर सरकारी काम,
बाकी सारे साल भर, हिंदी को विश्राम.
दक्षिण तो बदनाम है, दिखता नहीं विरोध,
अपने लगते हैं सभी, जब हो जाए बोध.
करता हूँ अनुरोध यह, हो सब भाषा मान,
माध्यम बनी विचार की, अभिव्यक्ति प्रतिमान.
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हिंदी भाषी कर रहे, अंग्रेजी में बात,
झूठी शान दिखा, करें, हिंदी पर आघात.
हिंदी का प्रचार करो, लो लाखों अनुदान,
भाषा का प्रचार नहीं, बस, सरकारी शान.
मूल लक्ष्य को भूल कर, कुछ भी करें बखान,
लिख कर झूठे आंकड़े, पा लेते सम्मान.
अब तो बाहर भी मिला, हिंदी को सम्मान,
पर, भारत में घट रहे, हिंदी के कदरदान.
जब से गूगल आ गया, बहुत हुआ आराम,
हिंदी में संभव हुआ, सब तकनीकी काम.
राजभाषा में कर सको, अपना पूरा काम,
ऊपर से सहयोग पा, कस कर रखो लगाम.
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धीमी गति से हो रहा, राजभाषा प्रयोग,
हिंदी में लेखन नहीं, यह कैसा दुर्योग.
अंग्रेजी में काम कर, फाइल आगे जाय,
हिंदी में लिख टिप्पणी, हीन भावना आय.
लाखों का खर्चा करें, होता नहीं प्रसार,
राजभाषा को मान दें, सच्चा हो श्रंगार.
हिंदी पखवाड़ा मना, पिछले बासठ साल,
ऐसी आँधी चले अब, सबको लगे मिसाल.
नाटक और न कीजिए, पखवाड़ा मन जाय,
मूल भाव मन में रहे, हिंदी को अपनाय.
हिंदी अधिकारी बनूँ, पाऊँ सकल पगार,
महज़ सितम्बर माह में, करूँ हिंदी प्रचार.
हर जन फाइल में लिखे, हिंदी का रख मान,
सार्थक राजभाषा हो, मिल जाए पहचान.
नराकास रखती व्यस्त, ले कर सबके हाल,
हिंदी-सेल बता रही, नया मसाला डाल.
हिन्दी के प्रसार में, उदार भाषा नीत,
भाषा अपने क्षेेत्र में, होती प्रथम प्रतीत.
भाषा के उपयोग में, अँग्रेज़ी का स्थान,
गरिमा, शुचिता में नहीं, हिंदी का सम्मान.
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मोहपाश में बँध गए, प्यारी लागे, पराई बानी,
अपनी भाषा बोलन में, लागत लाज लजानी.
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दिवस एक ही में खुश है, हिंदी पाकर के सम्मान,
शेष दिनों में होता है, अंग्रेजी का गुण गान,
अंग्रेजी का गुण गान, रटा रटा कर करते प्रतिभा कुंठित,
ज्ञान हिंदी का होने पर भी, कभी न होते गर्वित,
राजभाषा के प्रयोग से, बढ़ाओ अपना साहस,
हर रोज़ गर्व से मना सकें, हम हिंदी दिवस.
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सितम्बर 5 - शिक्षक दिवस
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शिक्षक आदर्श रहते, शिक्षा देना काम,
सद्गुण और संस्कार से, हमें मिलाते राम.
आभारी गुरु के रहें, दिला दिया सम्मान,
पा प्रतिष्ठा समाज में, मिल गया खास स्थान.
पहले के गुरुकुल चलें, साथ रहें आचार्य,
निगरानी हर समय की, वचन सब शिरोधार्य.
गुरु अपने शिष्य चुनते, ले विविध इम्तिहान,
उस कौशल में नाम हो, बढ़ता गुरु का मान.
अच्छी शिक्षा उस समय, आज बनी इतिहास,
धन कमाना प्रमुख बना, छात्र करें उपहास.
जिनका लक्ष्य निश्चित है, उन्हें सदा यह बोध,
शिक्षण, वाचन साथ में, करते रहते शोध.
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जीवन भर हम सीखते, कैसे बनें हम आर्य,
इसको संभव कर सकें, मात, पिता आचार्य.
शेष जगत के लोग भी, देते हमको ज्ञान,
बल, चातुर्य, विवेक का, रखें सदा ही ध्यान.
अनुभव जो देता हमें, मानें गुरू समान,
आज देश में मिल रहा, यारों को भी मान.
विद्या से मिलती हमें, समझ, बूझ संदेश.
उसे बढ़ाने के लिए, गुरुजन दें उपदेश.
गुरू सिखाते हैं सदा, न्याय, शक्ति और धर्म,
आगे जीवन-पथ चलें, करके अच्छे कर्म.
करें याद, हम ले सकें, गुरुजन से आशीश,
देव कृपा सब पर रहे, भली करें जगदीश.
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गौरवमय अतीत रहा, कहता है इतिहास,
तैंतिस प्रतिशत मात्र में, हो जाते हम पास.
जो कुछ भी हम आज हैं, शिक्षक का था हाथ,
उन से शिक्षा ले बढ़े, पा कर उनका साथ.
शिक्षा नहीं किताब की, देते नैतिक ज्ञान,
बात भली जिस से मिले, उसको गुरु लो मान.
मुरगा बन हम ने रखा, अपने गुरु का मान,
लाज नहीं हमको लगी, जब होता है भान.
उत्सुकता में हम करें, नित नव भिन्न प्रयोग,
सीख उसी से मिली हमें, भागे मन के रोग.
खेल-खेल में सिखा कर, किया हमें मजबूत,
वह सब तो अब भूलते, कोई नहीं सुबूत.
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याद करें इतिहास को, लेते अनुपम सीख,
अहंकार के दमन से, मिलती श्रम की भीख.
नमन करो गुरुदेव को, मन में भक्ति लाय,
सच्चे मन से याद हो, हरि दर्शन हो जाय.
गुरूकुल में बच्चे पढ़ें, मिले अद्वितीय ज्ञान,
गर्व करें संस्कार पर, भारत का अभिमान.
शिक्षक से शिक्षा नहीं, तुम पाओ संस्कार,
गूढ़ बात बतला सके, करे शिष्य को प्यार.
सब कुछ संभव ज्ञान से, अर्जन मान सम्मान,
मिलता अधिक समाज में, जो होता विद्वान.
राधा कृष्णन जन्म पर, करते आदर मान,
शिक्षक दिवस पुकार कर, करते हम सम्मान.
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क्या-क्या सीखा आप से, नहीं हमें है ज्ञान,
अब हमारा नंबर है, कर लें कुछ सम्मान.
मात-पिता के बाद है, गुरु का गुरु स्थान,
पहले चरणों में नमन, करें बाद में ध्यान.
सीख गुरू की मान लें, आते उच्च विचार,
जीवन में अपना सकें, कर उनका आभार.
शिक्षक दिवस मना रहे, देखो हम हर साल,
हल रखते हर बात का, कुछ भी करें सवाल.
पाँच सितम्बर आ गया, कर लो उनको याद,
भारत के इतिहास में, शिक्षक की फरियाद.
राधाकृष्णन याद हैं, मंद मुदित मुस्कान,
शिक्षा उनकी प्रेरणा, स्वयंं गुणों की खान.
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माता पहली शिक्षिका, दूजा पिता का स्थान,
गुरु की कृपा बिन न मिटे, मति का भ्रम, अज्ञान,
मति का भ्रम अज्ञान, छटें संशय के बादल,
बदले नज़रिया, खुले ज्ञान चक्षु, हों खुशी से पागल,
बढ़ी जानकारी, सद्भाव, संबंध सभी से जुड़ जाता,
घर परिवार की प्रथम शिक्षिका, सबसे आगे माता.
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शिक्षक समाधान कर रहे , अपने अनुभव के साथ ,
प्रशस्त मार्ग कर रहे , अपने ज्ञान के साथ ,
अपने ज्ञान के साथ , छात्रों पर प्यार लुटाते ,
नव तकनीक के साथ में , अपना क्षेत्र बढ़ाते ,
खुद सीखते , हमें सिखाते, संस्कृति के ये रक्षक ,
गर्व, सम्मान बढ़ाते हमारा, सुखी हमारे प्रिय शिक्षक .
अगस्त 21 - वरिष्ठ नागरिक दिवस
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++++++
उमर बढ़ी, हम भी बढ़े, बूढ़ा हुआ शरीर,
बढ़ी समय के साथ ही, अपने तन की पीर.
अनुभव पाया आयु से, पाया जीवन सार,
प्रेम, भाव भी पा सके, भावों के उद्गार.
भारत में भी मिल रहा, बूढ़ों को सम्मान,
करें भले ना नौकरी, अलग बनी पहचान.
पहले जन सुविधा मिले, लगती अलग कतार,
टीका भी पहले लगा, आदर का व्यवहार.
चालू वय वंदन रहे, सोच रही सरकार,
युवा वर्ग भी सोचता, वे पाए उपहार.
बूढ़ों की सेवा करें, रख लें छोटे ध्यान,
आदर उनको हर जगह, मिल जाए सम्मान.
+++++
उम्र अधिक हो साठ से, पाओ खास स्थान,
देती है सरकार भी, उन्हें विशेष सम्मान.
बढ़ी आयु में तन रखें, अपने मन अनुकूल,
बचें सभी अपघात से, दुस्साहस को भूल.
अनुभव का उपयोग कर, रखें विचार महान,
सीख दूसरे ले सकें, इस पर करें गुमान.
+++++
बड़े जनों का ध्यान भी, रखती है सरकार,
लाभ अधिक मिलते कहीं, बिना किसी तकरार.
वायुयान की यात्रा, हों रियायती दाम,
आरक्षण भी रेल का, देता है आराम.
अपनी पूँजी पर मिले, थोड़ा ज़्यादा ब्याज,
जल्दी से निपटाइए, रहे अधूरे काज.
तनिक बड़े जब हो गए, साठ साल के पार,
सेवा से छुट्टी मिली, हो पेंशन आधार.
अधिक आयु के जन करें, अपने अनुभव गान,
याद ज़माने की करें, रख कर मृदु मुस्कान.
नाती पोते व्यस्त हैं, सुनें न उनकी बात,
जीवन शैली अलग है, कौन कहे जज्बात.
वरिष्ठ पाते रियायतें, जो देती सरकार,
रेल किराया कम लगे, उसके वह हकदार.
जमा आपकी बचत पर, मिले अधिक कुछ ब्याज,
श्वेत-केश को मान दे, साथी और समाज.
लगें बुढ़ापे में अधिक, तन-मन के कुछ रोग,
रखिए स्वस्थ शरीर को, कर रोजाना योग.
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अगस्त 15 - स्वतंत्रता दिवस
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घटना दुर्घटना बनी, अभी छिहत्तर साल,
देश विभाजन हो गया, नेता करें कमाल.
आज़ादी के नाम पर, माता पाती घाव,
एक तिरंगा खोल कर, खेले कितने दांव.
कहने को आज़ाद हैं, नहीं मूल अधिकार,
कोर्ट, पुलिस के फेर में, हो जीवन बेकार.
नहीं देश का ध्वज रहे, नहीं कहीं कानून,
विद्रोही तत्पर खड़े, चढ़ने लगा जुनून.
जज भी नेता पालते, दोषी हैं आज़ाद,
तारीखें लगती रहीं, चमचे करें फसाद.
कहने को तो नियम हैं, पर पालन लाचार,
धन वालों की चल रही, है निर्धन बेजार.
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अंग्रेजों ने दी हमें, कहने को आज़ाद,
आदत तो बदली नहीं, जो करती बरबाद.
जाति, धर्म के फेर ने, खूब कराया भेद,
कुचल भाव संस्कार को, भूले चारों वेद.
कहने को आजाद हैं, विचार रहे गुलाम.
रिश्वत, अशिक्षा करती, भारत को बदनाम.
वोटों की खातिर मिला, दलबदलू का नाम,
आश्वासन दें मुफ़्त का, राजनीति बदनाम.
चोरी, हत्या लूट के, खेल दाँव पर दाँव,
कौन सज़ा दे बाद में, पूरे हुए चुनाव.
सच्ची आजादी कहें, सबका हो सम्मान,
रहें सुरक्षित भेद बिन, पा अधिकार समान.
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माता के बंधन खुले, भारत था आज़ाद,
पंद्रह अगस्त को मिली, बड़ी प्रतीक्षा बाद.
बापू, चाचा ने लड़ा, एक विकट संग्राम,
भूल गए हम बीच में, लाल, पाल के नाम.
अमर हुए इतिहास में, बोस और आज़ाद,
भीम, गोखले, तिलक भी, सदा रहेंगे याद.
सपने देख शहीद हुए, भारत माँ के लाल,
उनको बिसराएं नहीं, जल कर बने मशाल.
अपने नेता चुन सकें, जनता का विश्वास,
संसाधन अपने रहें, समुचित करें विकास.
भारत माँ को नमन करें, बन कर वीर सपूत.
सोचो स्वर्णिम काल की, करो याद मत भूत.
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आजादी से खुश सभी, बने नए संबंध,
संविधान अपना रहे, खत्म हुए प्रतिबंध.
झूठ-मूठ में रूठते, करते गलत प्रचार,
वोटों की गणना प्रबल, कुरसी का आधार.
ग्रहण जाति का लग गया, रोज करें अपमान,
स्वयं देश को लूट कर, डालें नित व्यवधान.
सीमा पर रक्षा करें, सैनिक वीर जवान,
खेतों में पैदा करें, अन्न देव भगवान.
आती सुख-सुविधा नई, हो तकनीक विकास,
सब को सब कुछ मिल सके, होगा यही प्रयास.
सबको खुशहाली मिले, सबका हो अधिकार,
राग द्वेष को दूर कर, बढ़ता जाए प्यार.
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हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
अनुभव की हैं, साँसें, न कोई मुश्किल झेली है.
विकसित हुए विज्ञान के आयाम, हर क्षेत्र में नाम कमाया है,
गौरवमय अतीत की समृद्धि को नव सोपान दिखाया है.
प्रयास किया जाति, धर्म, भाषा मुक्त समाज बनाने का,
स्वर्णिम इतिहास रचा कर, यश, मान कमाने का,
शिक्षाकलम से, एक सच्चाई लिखी है,
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
करे प्रयास दूर गरीबी हो, श्रम कण चमकें,
सुरक्षित सीमाएँ हों, केसर की घाटी महके.
श्रमिक रोजगार संभालें, मिले हाथ को काम,
तन मन स्वस्थ रहे सदा, सर्दी हो या घाम,
समय से वर्षा भरपूर हो, नहीं बाढ़ की चिंता,
अद्भुत न्याय प्रक्रिया से, रहें सम्मान से जिंदा.
हर व्यक्ति की जीवन शैली, आदर्श नागरिक सरीखी है
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
पर, कब घुन लग गया, माँ की सेहत प्यारी में,
सत्तर वर्षों की परवरिश, सिमट गई मक्कारी में,
ग़द्दार सब कुछ चाट गए, खाकर माल मलाई,
जनता लुटती विवश सी, हुई नहीं कोई सुनवाई.
भाषा, जाति धर्म के बंधन में, स्रोत हो गए रीते,
संसाधनों का शोषण कर, अपनी खातिर जीते,
अंतरात्मा तक सो गई, तब जाकर वह चीखी है,
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
आओ, आज करें आह्वान, सुंदर स्वच्छ भारत का,
जाति, धर्म, प्राँत, भाषा से मुक्त बनाने का,
सच्चाई, ईमानदारी, सहयोग की रोटी खाने का,
हो गर्व हमें अपनी संस्कृति, धरोहर, सम्मान का,
सुधरें संबंधी पड़ोसी से, अन्तर्मन में हो सद्भाव,
रिश्वतखोरी, स्वार्थ मिटे, जिए हर इंसान बाइज़्जत,
कर समाप्त घृणित राजनीति, प्यार मुहब्बत परखी है.
हम संतानें भारत माँ की, हमने आज़ादी देखी है.
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सात दशक पूर्व रचा गया, एक नया इतिहास,
फिरंगियों की दासता गई, जागा नव विश्वास,
जागा नव विश्वास, विकास के सुखद आयाम,
कृषि, विज्ञान, तकनीक में, खूब कमाया नाम,
उपलब्धियों की चर्चा भली, करें प्रयास दिन रात,
गरिमामय स्वर्णिम अतीत की, याद करें जन्मों तक सात.
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अगस्त 14 - ओ.एन.जी.सी. दिवस
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पिछले अड़सठ साल में, रचें नव कीर्तिमान,
इसका यह इतिहास है, गौरवमय अभिमान.
चमका ओ.एन.जी.सी., कहता है दास्तान,
तेल, गैस की खोज में, अनोखा योगदान.
खोजा जल, थल हर जगह, छोड़ा कोई स्थान,
कई सपूतों ने दिया, जीवन का बलिदान.
किया सुरक्षित स्वयं को, स्वदेश का प्रतिमान,
अर्थ व्यवस्था ठीक हो, बढ़ता गौरव मान.
क्रूड ऑयल शोधन कर, खुद की बन पहचान,
अपना नव तकनीक को, बना नए कीर्तिमान.
रखा रिटायर बाद भी, सब अपनों का ध्यान,
बीमा, पेंशन है नहीं, पर मेडिकल प्रमान.-
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तेल कंपनी बन गई, पहले सड़सठ साल,
चुने सिपाही लग गए, बिछा कूप का जाल.
ओ.यन.जी.सी. कर रही, हर विधा में कमाल,
तेल गैस की खोज से, हम सब मालामाल.
शेष नहीं जल-थल में, भारत का भू-भाग,
वेधन, उत्पादन करें, चमके सबके भाग्य.
इतर देश के पा सकें, हम ऊर्जा भंडार,
साहस श्रम अपना रहे, बढ़ा सकें व्यापार.
नहीं और दोहन करें, तेल गैस के स्रोत,
खोजें और विकल्प भी, शक्ति से ओतप्रोत.
एक कंपनी रूप में, बढ़ा लें शुद्ध लाभ,
तिमिर भूत का काट कर, चमकें ज्यों अमिताभ.
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सन छप्पन से आज तक, बना एक इतिहास,
कितने वीरों ने किए, मिल कर सभी प्रयास.
महारत्न संज्ञा मिली, बढ़ा हमारा मान,
तेल, गैस की खोज में, भारत बना महान.
जंगल-जंगल सूँघते, भू-विज्ञानी संत,
महक तेल की पा सकें, सहें कष्ट अनंत.
नगर, बाग, तालाब में, करते हैं विस्फोट.
सेस्मिक लहरें भेदतीं, अंदर पाएँ खोट.
धरती पर वेधन करें, मिले जहाँ पर तेल,
सागर भी छोड़ा नहीं, लहरें करती खेल.
तेल, गैस निकले मगर, रहे सुरक्षा खास,
बचे रहें अपघात से, ऐसा है विश्वास.
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Wednesday, 16 January 2019
नमन व विनम्र श्रद्धांजलि
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आज याद उनको करें, बांध रखा परिवार,
अपने इस व्यवहार से, रखी नहीं दीवार,
रखी नहीं दीवार, प्यार से गले लगाती,
स्वागत, सत्कार में, नाना व्यंजन खिलातीं,
शोभा जिसका नाम, रखे याद सदा समाज,
श्रद्धा में शीश झुके, करें नमन मिल कर आज.
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ब्रज की अब शोभा गई, घर में शोभा नाय,
रही उदासी हृदय में, होली का अन्याय,
होली का अन्याय, याद से मन भर आता,
बनता घर पकवान, पर स्वाद ना आ पाता,
गजब रहा व्यवहार, होता अब बहुत अचरज,
होली की कामना, नमन सबके पिता बिरज.
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हम सब की चहेती बहन *शोभा* अचानक गत 11 फरवरी को यह लोक छोड़ कर ईश्वर की शरण में चली गईं. ईश्वर दिवंगत आत्मा को सद्गति दें. उनकी अतीत की स्मृतियों को संजोने का एक प्रयास किया है.
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होली आज अजीब है, दिल हो रहा उदास,
नहीं चेहरे पर खुशी, बस चलती है श्वास.
सब के दिल में सज रहे, नाना विधि अरमान,
खूब बनेंगे सब जगह, होली के पकवान.
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सन सत्तावन में जन्म लिया, नगर किच्छा को पवित्र किया.
रही तिथि वह ग्यारह जुलाई, सुंदर कन्या घर में आई.
मुखड़ा देख मात हर्षाई, मिलते उसको बहना भाई.
करें पिता दूरभाष सेवा, माता करे पिता की सेवा.
बोल तोतले सबको भाते, सभी प्यार से लाड़ लड़ाते.
घर की सब दिनचर्या दीखे, अकल लगा कर कारज सीखे.
आई बदायूं साथ सभी के, पाई बहना रजनी बन के.
घर के काम में मदद करती, लली लाड़ली बन कर रहती.
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बाल सुलभ शिकायतें करती, माता उसे देख कर हॅंंसती.
घर में कोई अतिथि आता, उनका काम उसको भाता.
पीलीभीत में बचपन बीता, सखी सहेली का दिल जीता.
दीदी संग शाला जाती, सब पर अपनी धाक जमाती.
खेल कूद में आगे रहती, इकिया दुकिया जीत कर लेती.
गणित में भी दिमाग लगाती, कठिन पहेली भी सुलझाती.
घर के सारे काज सजाती, माता की लाड़ो बन जाती.
माता को पहचान दिलाती, शोभा की मम्मी बोली जाती.
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रजनी, लक्ष्मी को खिलाती, विनय को खूब गले लगाती.
सविता को प्यार से पढ़ाती, उस पर अधिकार दिखलाती.
बढ़िया रोटी गोल बनाती, बर्तन भी धोकर रख जाती.
बरेली लगी कुछ पहचानी, सबसे उसकी प्रीत पुरानी.
दूर दूर के नाना नानी, रिश्ते उसको याद जुबानी.
मामा का विद्यालय भाया, तबला उसने खूब बजाया.
भावी भाभी से मिल आती, अपनी छाप छोड़ कर आती.
शादी में आई कठिनाई, अकल लगा कर तुरत सुलझाई.
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इलाहाबाद से भाभी लाती, बड़ी शान से सबको बताती.
डॉ. जयदीप से दिल मिलाती, उनके संग विवाह रचाती.
जा ससुराल सबको रिझाती, सबके मन में समा जाती.
बड़ों को सम्मान बताती, छोटों से लाड़ लड़ाती.
बिना खेद गृहस्थी चलाती, सबसे प्यार से पेश आती.
सुस्वादु व्यंजन रोज पकाती, मनोभाव से उसे सजाती.
आग्रह कर सबको खिलाती, घर में रिसर्च लैब बनाती.
पड़ोसी से व्यवहार निभाती, सबकी मदद को आगे आती.
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सुख दुख में सबके घर जाती, उत्सव के अनुसार सजाती.
अच्छे कपड़ों में सज जाती, उसकी बोली सबको भाती.
सबको अच्छी राय बताती, तिथि, पर्व का महत्व समझाती.
भाई, बहन को फोन घुमाती, धर्म, कर्म का चरित बताती.
बरी, मुंगौरी खूब बनाती, अचार संग उन्हें भिजवाती.
गजक, रेवड़ी, उसको प्यारी, सब्जी टिमाटर बनी न्यारी.
काल कराल से भिड़ जाती, कोरोना से लड़ कर आती.
इस बार उसे बचा ना पाए, ग्यारह फरवरी उसे बुलाए.
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ध्यान धरे जयदीप का, पूजा, तन्नू साथ,
याद न आए बहन की, हो हम सबका हाथ.
मिटती नहीं हैं स्मृतियां, बीते अठसठ साल,
दें हमें आशीश सदा, बाकी जो भी साल.
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बिल्लन को कहते पिता, सत्यवती को मात,
दो सुत विनय दिनेश थे, भगिनी पंच कहात,
भगिनी पंच कहात, तुलना शिव परिवार से,
रितु वन्दना हैं वधू, विशू, वरतू हैं सुत से,
समता आज घर की, शैंकी बन गई चिलमन,
मांगें हम आशीश, सुखी रखें सदा बिल्लन.
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आज दिवस पुरखे गए, छोड़ी अपनी याद,
विचित्र,आशा, सत्य थे, करते नहीं प्रमाद,
करते नहीं प्रमाद, थोड़ा और रुक जाते,
पोता, पोती युगल, उन से आशीश पाते,
उन्हें मिल याद करें, दोहराता जो समाज,
नमन श्रद्धांजलि दें, दिल से उन सबको आज.
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दादा शैंकी के गए, गईं विनय की मात,
एक साल अंतर रहा, गहरा था आघात,
गहरा था आघात, उनकी यादें सताती,
प्यार की बातों से, मन में हुलस उठ आती,
हाथ सदा सर रहे, यही होता था वादा,
कृपा हम सब पर हो, शांति से मम्मी दादा.
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नमन पिता को हम करें, दें समुचित सम्मान,
उनके आदर्श हमें दें, अनुपम समाज स्थान,
अनुपम समाज स्थान, याद रखें सीखें सदा,
आज उन्हें दें श्रेय, उनके सद्गुण सर्वदा,
डांट भले के लिए, कर लें मन ही मन मनन.
पाएं अपने लक्ष्य, आओ करें उन्हें नमन.
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आज मात हम से हुईं, सदा के लिए दूर,
वर्ष हुए नौ अब तलक, काल छीनता क्रूर,
काल छीनता क्रूर, पाए हम मधुर दुलार,
नहीं कमी कुछ रखी, आंचल भर कर दिया प्यार,
याद संजो कर रखें, दिल में जाइए विराज,
नमन सदा हम करें, देते श्रद्धांजलि आज.
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छोड़ गईं दीदी हमें, दे कर अपनी याद,
अटल स्थान उनका बने, करते हैं फरियाद.
नहीं कल्पना उन बिना, कैसा हो संगीत,
कौन करे पूरा उन्हें, रहे अधूरे गीत.
फिल्मों में उनका रहा, योगदान स्मरणीय,
भारत रत्न उन्हें मिला, सबकी आदरणीय.
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नमन पिता को नित करें, आज दिवस कुछ खास,
आशिष वह देते रहें, ऐसा है विश्वास.
पहुँच सके खुद हम यहाँ, ले उनसे संस्कार,
बने हमारी प्रेरणा, मान रहे उपकार.
नाना कष्ट जीवन में, सहे अनेकों बार,
बच्चों के कल्याण में, कर दीं खुशियाँ वार.
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ममता मूरत मात की, नहिं उसका कुछ दाम,
कभी सोचना भी नहीं, उनको सदा प्रणाम,
उनको सदा प्रणाम, बाँह दुआ में पसारे,
दिल से करती प्यार, खुश रहें बच्चे सारे,
नहीं करे बरदाश्त, कोई बुराई करता,
नमन सदा मात को, सदा उछालतीं ममता.
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मा सी मासी थी मिली, मा सी दे आशीश,
चाहे हर दम भला ही, गईं पास जगदीश.
जीवन मूरत त्याग का, एक सजग प्रतिमान,
ऊँचाई छू लीं बहुत, नहीं ज़रा अभिमान.
रही हमारी प्रेरणा, सिखा गईं संस्कार,
अच्छी शिक्षा दी सदा, बना दिया आधार.
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बड़े जोश से मन सके, विजय दिवस त्योहार,
याद शहीदों को करें, जान करें निसार.
वीर गति को पा गए, ले रक्षा का भार,
बारंबार नमन उन्हें, जो परलोक सिधार.
रक्षा करते देश की, दे कर अपनी जान,
सदा बढ़ाते ही रहे, भारत माँ का मान,
समर कारगिल याद है, हतप्रभ, विश्व अवाक,
आत्म समर्पण करा कर, जीत लिया था पाक,
जीती दुश्मन भूमि को, वापस दे दी दान,
नया देश बांग्ला बना, पहला पाकिस्तान.
नेता कुछ ऐसे हुए, मन के बड़े उदार,
अलग देश को मान्यता, पाए कंटक हार.
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नमन पिता को कर सकें, सोचें उनकी याद,
जीवन अपना दे दिया, हों बच्चे आबाद,
हों बच्चे आबाद, साहस से कर सामना,
संकट की घड़ी से, सीखा धीरज धारना,
रही विचार धारा, करो वही, दे मन अमन,
मानें शिक्षा सभी, करें पिता श्री को नमन.
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नमन मात को हम करें, धर के उनका ध्यान,
आभारी जीवन बना, कैसे हो सम्मान,
कैसे सम्मान हो, आई हमारी बारी,
माफी हम माँगते, जो गलती थी हमारी,
जीवन में हो शाँति, पूरे सारे हों स्वपन,
याद उन्हें हम करें, हृदय से हो सदा नमन.
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एक साथ दो माँ गईं, करके भली सलाह,
रहा तकाजा उमर का, बुला लिए अल्लाह,
बुला लिए अल्लाह, निभा दी जिम्मेदारी,
बिना अधिक कष्ट के, करी प्रयाण तैयारी,
होश रहा अंत तक, बिन खोए कहीं विवेक,
हमें आशीष मिले, जब भी होते दिल एक.
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भाषण की क्षमता गजब, बात कहें पुरजोर,
कायल उनके तर्क से, करे बिना कुछ शोर.
ममता की मूरत रहीं, नारी का सम्मान,
काम राष्ट्र हित में सदा, उनका चरित महान.
संसद में गरिमा बढ़ी, सुना लगा कर ध्यान,
अर्थ पूर्ण बातें करीं, रख कर सबका मान.
प्रतिभा का डंका बजा, सारे देश-विदेश,
मौन सदा को हो गई, नारी अद्भुत शेष.
भारत की विदुषी रहीं, कहते उन्हें स्वराज,
आँखों से आँसू झरें, रोक न पाएं आज.
सुषमा से गौरव बढ़ा, पा भारत का प्यार,
आहत उनके निधन से, आज सकल संसार.
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भारत माँ का चल बसा, लायक एक सपूत,
गर्व करें उस पर सभी, होता अनुपम, मूर्त.
सेवा की मूरत रहा, ऊँचा करता भाल,
एक पार्रिकर खो गया, भारत माँ का लाल.
करते उनको याद हम, नमन करोड़ों बार,
बड़े सरल मानव रहे, मिलें नहीं दो बार.
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मात द्वय ऊपर गईं, छोड़ हमारा साथ,
सीख हमें उनकी मिले, रख लें अपने माथ,
रख लें अपने माथ, माँ ममता का प्रतिमान,
दे सके नहीं कभी, कहीं कोई भी प्रमान,
हमें दें आशीष सदा, संध्या और प्रभात,
निष्ठा से उनका करें, मनन, नमन हे मात.
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मन मंदिर में बस रहे, बाबा जी के भाव,
उनसे ले कर प्रेरणा, चलती जीवन नाव.
सुबह शाम की संध्या, और हवन के मंत्र,
सही बात पर डाँटते, नहीं कहीं छल-तंत्र.
शिक्षाप्रद ज्ञान दें, लोक कथा भंडार,
बच्चों को संस्कार की, कहानी बारंबार.
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रहती आशा काम में, नव-जीवन संचार,
सुखी रहें वे जन सदा, मिला पिता का प्यार,
मिला पिता का प्यार, सालती उनकी यादें,
अनुभव ने सिखाया, किए जो सबसे वादे,
सीखें जो चुभी कभी, अब अच्छी वही लगती,
करते उन्हें प्रणाम, शकल यादों में रहती.
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गोस्वामी को बुला कर, गो-स्वामी ने पास,
अपनी कृपा सदा करी, जब तक चलती साँस.
मीत हमारा हो गया, सदा-सदा को मौन,
अब सुख-दुख में हाल ले, ऐसा परिचित कौन.
विलग गए तन से भले, मन के रहे करीब,
ईश बुला कर कर गए, हमको बहुत गरीब.
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नाती-पोता देख कर, गए ईश के धाम,
ऐसे कुछ हालात थे, रहे अधूरे काम.
पढ़ा-लिखा कर बाल को, दिला दिया आराम,
बरकरार नौकरी में, रखो काम से काम.
रिश्तों के सम्मान से, भले दिए संस्कार,
सब कुछ सह कर भी नहीं, किया कभी प्रतिकार.
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*बिल्लन* बोलें प्यार से, सारे नातेदार,
आत्मा उनकी कह रही, सुखी रहे परिवार,
सुखी रहे परिवार, कष्ट में बीता जीवन,
उनकी अमर आत्मा, दे दुआ फूले उपवन,
नमन उन्हें सब करें, हमको याद है बचपन,
सुखी रखा हर तरह, अमर रहें पिता *बिल्लन*.
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भले गरीबी में रहे , पर जिए स्वाभिमान से ,
अपने बूते पर लड़े , जीते रहे शान से ,
जीते रहे शान से , न किसी का रखा उधारा ,
सीमित आवश्यकताएँ रखीं , कहीं न हाथ पसारा ,
पाल पोस के बड़ा किया , संस्कारों में न कभी टले ,
नमन करूँ नेक जनक को , सबको रखें भले .
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Friday, 16 November 2018
विभु की शादी
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महकाए घर में खुशी, ला कर मंगल पाँव,
फैले प्रकाश सुरभि का, खिलता सारा गाँव.
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बेटी की भाँवर पड़ी, चली आज परदेश,
तीन देव रक्षा करें, चुन्नी, शोनी, महेश.
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बिदा अतिथि को कर रहे, उनसे ले आशीष,
शादी शोनी की करें, कृपा करें जगदीश.
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सारे अतिथि निकल रहे, कर व्यक्त आभार,
करते हैं हम कामना, सुखी रहे परिवार.
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विभोर चालीसा
दो बाईस को आया, लखीमपुर का लाल,
दादा-दादी हो गए, पाकर उसे निहाल.
पापा मम्मी को मिलीं, खुशियाँ अतुल, अपार,
मानों उनका बस गया, पूरा ही संसार.
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नाना-नानी का दुलारा, मौसी दें प्रेम की धारा .
मामा का लाड़ वो पाए, सिर चढ़ा कर उसे घुमाए .
गोरा सुंदर रूप सलोना, काजल से लगा ढिठौना .
स्वस्थ बालक सबको भाए, उसे खिलाने को ललचाए .
माता जब पढ़ाने जाए, नानी घर खुश हो जाए .
पापा जब आॅडिट को जाते, ढेर खिलौने उसके आते .
आकर बहना काम बढ़ाए, भाई का वो प्यार बटाए .
झगड़ा करने में शरमाती, शोर मचा कर सबको जगाती .
बहना की रक्षा कर लेता, उसके रहते कुछ न होता .
भाई-बहन की जोड़ी प्यारी, जग सब जाता बलिहारी . 10
अनुशासन पूरा दिखलाए, सब पर अपना रौब जमाए .
पढ़ने में वह अव्वल आए, टीचर भी उसके गुण गाए .
नाना संग शतरंज जमाए, मात कभी न वह दे पाए .
मौसी ने कैरम सिखलाया, भले खेल से उन्हें रिझाया .
करी प्रतियोगिता की तैयारी, मिली सफलता उसमें सारी .
पुणे से इंजीनियरिंग करी, मिल गई फिर वहीं नौकरी .
तकनीकी नौकरी वह पाता, पढ़ा हुआ कुछ काम न आता .
दो - तीन जगह सेवा दे दी, सबने फिर तारीफ़ें कर दीं .
फ़्लैट एक बुक कराया, मनोयोग से उसे सजाया .
फ्रिज, टी. वी. व बेड मंगाया, बहुत ढंग से उसे लगाया . 20
बाइक और कार ले लीन्ही, मजे में सवारी उसकी कीन्ही .
सर्विस उसकी सदा कराई, नियम कायदा खूब अपनाई .
पर्यटन में रुचि दर्शाई, भारत भर में करी घुमाई .
मित्र, सखा, संबंधी भाए, सबसे अच्छे रिश्ते निभाए .
बहना पर वह जान लुटाए, आँच कभी न उस पर आए .
सेवा करने को वह तैयार, हाल बताए बस कोई यार .
अच्छे भोजन के शौकीन, पसंद नहीं उसको कैंटीन .
किचन में सामान जुटाया, कुक से उसे बनवाया .
फालतू खर्च में नहीं विश्वास, सादा जीवन उसकी आस .
दिल का वह है अति साफ, सबको कर देता माफ़ . 30
फिर आया शादी का खयाल, उठे दिमाग में कई सवाल .
होगा कैसा जीवन साथी, प्यार की जग पाए बाती .
चमका उसका भाग्य सितारा, सुरभि का मिल गया सहारा .
देखे शादी के विज्ञापन, मिला नहीं अपनापन .
सुरभि बेटा मन को भाए, साथ में सतरंगी सपने सजाए .
इसी लिए हम सब आए, यह शादी यादगार बन जाए .
सारी खुशियाँ दोनों पाएँ, आपस में विश्वास जगाएँ .
एक दूसरे के हो जाएँ, सुख दुख के साथी हो जाएँ .
हम सब शुभकामना दे जाएँ, उनको दिल से आशिष दे जाएँ .
रहे सदा सुखी जोड़ी प्यारी, यह रही मनकामना हमारी . 40
स्वागत सबका कर रहा, यहाँ सदन में आज,
एक लाल को आशीष, देता सभी समाज.
हरषित सबके साथ हैं, माता, पिता, विभोर,
बहना की मत पूछिए, यह दिल माँगे मोर.