Tuesday, 13 February 2018

तकनीकी








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दिनों दिन विज्ञान करे, मानव मन विस्तार,
होता नित नव खोज से, अचरज हमें अपार.
आता पहले रश्मि से, अपना मन तैयार,
करता जब कवि कल्पना, जो करते साकार,
ए.आई. से कीजिए, बिनु श्रम सारे काम, 
पहले दिमाग से किया, गलती का इल्ज़ाम.
सोच विकल्प की करे, मानव तेज दिमाग,
उस से पहले जल उठा, अद्भुत यह चिराग.
मानव मन में भ्रम रहे, ए.आई. सुलझाय,
एक नहीं अनेक कहें, नाना भाॅंति उपाय.
संभव होंगे एक दिन, इससे सारे काम,
दुनिया की चर्चा करे, सबको हो आराम.
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बुद्धि मिली जगदीश से, कर लें अपने काम,
पैदा होने से करें, जब तक जीवन शाम.
देख और की नकल करें, यह मानव का काम,
नकली भी असली लगे, हमें बचाएं राम.
अकल लगा विकास किया, हुए असंभव काम,
हैरत से आंखें फटीं, कुदरत का ईनाम.
क्षेत्र नहीं कोई रहा, जहां नहीं विज्ञान,
असली सा जीवन लगे, हुआ काम आसान.
जन्म मरण को छोड़ कर, वह करते सब काम, 
बिजली से पुतले चलें, थकने का नहीं नाम.
शारीरिक या मानसिक, कविता या हरि नाम,
गूगल को पीछे किया, नव प्रयोग आयाम.
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नयन हमें प्रभु ने दिए, मिले प्रकृति आनंद,
देख भले से जी सकें, बचें सकें दुर्गंध.
इसे लगा, उत्सुक दिखे, शव यात्रा, बारात,
नेता का भाषण चुना, जिसकी हो औकात.
इसे लगा, उत्सुक दिखे, शव यात्रा, बारात,
नेता का भाषण चुना, जिसकी हो औकात.
रखें खबर हर बात की, लगा आधुनिक यंत्र, 
ड्रोन उनमें एक रहा, चला रहा खुद मंत्र.
घूम घूम कर ले रहा, सभी क्षेत्र हालात,
बचे न कोई नजर से, देता सबको मात.
सी. सी. टी. वी. लग गया, लेता सबका हाल, 
घटना सभी समेटता, कैसी किस की चाल.
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भाषा में व्याकरण को, मिल रहा प्रमुख स्थान, 
पूरी भाषा हो नहीं, बिना व्याकरण स्नान.
बात भले से कह सकें, रख अभिव्यक्ति मान,
बात बताने के लिए, सही शब्द श्रीमान.
संज्ञा, काल, लिंग, क्रिया, इनका रखिए ध्यान.
इनका प्रयोग गलत हो, पड़ जाता व्यवधान.
हिंदी भाषा ने दिया, उचित शब्द परकास.
गलत चयन से बन रहा, अनर्थ का आभास.
अंग्रेजी ने कर दिया, भाषा सत्यानाश, 
अभिव्यक्ति अक्सर करे, अर्थ, अनर्थ विनाश.
काम चलाने के लिए, करें इशारे खास, 
उल्टा सीधा बोल कर, अंग्रेजी अहसास.
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अपने तन को मिल सके, यदि सूरज की धूप,
ऊर्जा का संचार हो, निकले बाहर कूप.
मिले विटामिन धूप में, डी है उसका नाम,
नहीं किसी को जब मिले, बदन रोग का धाम.
होगा भला यदि कर लें, थोड़ा सा व्यायाम,
तन हो दुरुस्त आपका, लेवें हरि का नाम.
धूप जरूरत बदन की, बैठ सुबह या शाम, 
जब आवै धूप घर में, नहीं कीटाणु नाम.
पोषण मानव का रहा, बहुत जरूरी भाग,
जो भी खाएं पच सके, जग जाएंगे भाग.
मानव के स्वास्थ्य में, खान पान हो खास,
रक्तचाप रखिए सही, उखाड़े नहीं श्वास.
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कष्ट भरा जीवन जिएं, मिले नहीं उपचार,
परेशान सांसें करें, बुला सकें भरतार.
तन में जब तक सांस है, तब तक करें इलाज,
छोड़ें नहीं आस कभी, कहता रहे समाज.
केवल रोगी जानता, क्या है उसका कष्ट, 
क्लेश भोग कराह रहा, दर्द हर लें इष्ट.
रोगी भी है चाहता, याद करें यमराज,
प्राण छोड़ तन मुक्त हो, होगा धन्य समाज.
पहले मिलते देव से, इच्छा मृत्यु वरदान, 
बना दिया जाए नियम, ऐसा कुछ प्रावधान.
आज्ञा यदि अब मिल सके, यदि हो जीवन अंत,
कष्ट वेदना खत्म हो, कहते डॉक्टर संत.
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नव तकनीक समृद्ध हो, प्रगति करे विज्ञान,
नई खोज के साथ ही, बढ़ता मन अभिमान.
खोजे रोबोटिक्स ने, हर दिन नव आयाम,
नए खिलौने दिख रहे, बिकते मॅंहगे दाम.
वैज्ञानिक प्रयास करें, हो मानव का काम,
यंत्रों का उपयोग हो, कम श्रम अति आराम. 
स्थान हमारा ले रहे, मिटा दिए इंसान,
आबादी भी ना बढ़े, यह कैसा विज्ञान.
कृत्रिम बुद्धिमत्ता बुने, भ्रम का मायाजाल,
चकित सभी को कर रहा, उसका नया कमाल.
अपराधों में भूमिका, बनते मानव क्लोन,
चिह्न उंगली भी मिलें, करे आधार मौन.
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संस्कृत भाषा देव की, प्रचलित आदि काल,
ऋषि, मुनि भी सब बोलते, इसमें ही सब हाल.
अंग्रेजों ने कर दिया, भारत भाषा विनाश,
एक लक्ष्य था सामने, विकृत करो इतिहास.
आज़ादी हम को मिली, बदले नहीं विचार,
दोष शासकों का रहा, उन की हो जयकार.
भारत से गायब किया, दर्शन, गणित, विज्ञान,
जागे लोग विदेश में, संस्कृत है पहचान.
रुचि ले रहे विदेश में, सीखें नव तकनीक,
उन्नति उनके देश की, समृद्धि की प्रतीक.
होड़ सीखने की लगी, संस्कृत से हो प्यार,
ज्ञान बढ़े सनातन का, हो पूरण अधिकार.
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ओ मोबाइल रे, तेरे बिना भी क्या जीना,
बातों में, गप्पों में, साजन की चुटकियों में,
तेरे बिना कुछ कहीं ना, तेरे बिना कुछ कहीं ना, 
ओ साथी रे, तेरे बिना भी क्या जीना,
ना मालुम कौन, कब अनजाने में, काल करे समझाने में,
पूरी तन्मयता से, जी सकूं मैं सपनों में,
अपने सभी को भूल कर, दीवानेपन की हद तक, 
रिंग टोन को, रिंग टोन को मैं जानूं, तू जाने,
बातों के मरम को, और जाने कोई ना,
तेरे बिना भी क्या जीना,
हर टिंग में आस किसी की, प्यास इन्तज़ार की,
मेरी हर सोच में, वाई-फाई और सिग्नल है,
कनेक्टिविटी टूटे ना, बैटरी खत्म हो ना, कभी ना,
तेरे बिना भी क्या जीना, ओ साथी रे.
तुझ बिन बेकल मेरी रातें, तुझ बिन बुझे मेरे दिन, 
मेरा दिन उखड़ी सांसे, बुझे बुझे सारे नजारे,
तेरे बिना मेरी जिंदगी ना, मेरे बिना तेरी वक्त ना,
ओ साथी रे, मितवा रे, तेरे बिना भी क्या जीना.
ओ साथी रे.
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मोबाइल में व्यस्त हैं, सभी तरह के लोग,
हाथ एक पूरा घिरा, लगा मानसिक रोग.
नाना लाभों में रहा, एक खिलौना मूल,
साथ सदा इसको रखें, खुद को जाएं भूल.
कुशल क्षेम सबकी मिले, खबरें देश विदेश,
अपनी इच्छा खुद चुनो, करो माल आदेश.  
जाने का रस्ता चुनो, गूगल पर आवाज,
लेन देन, व्यवहार में, बना भीम का राज.
अति हर चीज करे बुरा, लत ना लीजे डाल,
पूरी जरूरत अपनी, इतना करे कमाल.
व्हाटसैप से मिल सकें, अपने जन के हाल,
देख फेसबुक लीजिए, रहे नहीं मलाल.
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काल चक्र उल्टा चले, सुना नहीं इतिहास,
देशांतर से बदलता, नहीं बात परिहास.
ऐसा संभव हो गया, लक्ष्य पूर्व प्रस्थान,
चलने से पहले पहुंच, गति की दिशा निशान.
प्रतिपादन सापेक्षता, कह गए महावीर,
भारत वैज्ञानिक कहें, समय हरे सब पीर.
निकल साल पचास गए, देखे अपने हाल,
क्या खोया, क्या पा लिया, रहो सदा खुशहाल. 
करें कल्पना, यदि मिले, हमको बीता काल,
स्वप्न नए हम रच सकें, सार्थक पचास साल.
चलें सुपथ पर हम सभी, रहे भला व्यवहार,
नहीं भला हम को कहें, सत्संग के विचार.
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बाट अकल भगवान ने, किया बड़ा उपकार,
सदुपयोग हम कर सकें, व्यक्त करें आभार.
मानव तेज निकल गया, किया बुद्धि उपयोग,
अकल लड़ाई हो सफल, नाना करे प्रयोग.
काम सुगम अपना किए, बना लिए रोबोट,
बिना दाॅंत के तोड़ते, बूढ़े भी अखरोट.
गूगल भी अब पूछता, करें बैंक व्यवसाय,
क्या मानव रोबोट हो, धोखा बचे उपाय.
मानव भी अब सोचता, और करूं क्या काम,
जीवन सब का सुगम हो, मिले अधिक आराम.
बुद्धि भ्रमित अब हो रही, कर दूं सृष्टि विनाश,
केवल अपना राज हो, ऐसा मिले प्रकाश.
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मन तो चलता तीव्र गति, कर कल्पना उड़ान,
तन जाने को चाहिए, माध्यम कुछ बलवान.
आवागमन कर सकते, जल, जल, आकाश,
वापस घर को आइए, हो सुरक्षित प्रवास.
सीमित गति में सब चलें, पालन कर कानून,
आगे निकलें होड़ में, छाए नहीं जनून.
सीट बेल्ट को लें लगा, आदत बने प्रधान,
मिले हरा सिगनल तभी, चार रस्ता पयान.
वायु मार्ग में भी रहे, ए. टी. सी. कंट्रोल,
सख़्ती से पालन करें, रखें न कोई झोल.
नियम बने जलयान के, रखिए उनका ध्यान,
टाॅवर से संकेत हो, पड़े नहीं व्यवधान.
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नानी कहे कहानियां, चंदा मामा राज़,
हैरत से सुनते रहे, वह सच होते आज.
नानी ने बोला नहीं, वह है मेरा लाल,
रोज़ चांद के देखते, हैरत भरे कमाल.
मानव ने विज्ञान में, किए सतत संधान,
इसरो के प्रयास दिखे, खुले भेद अनजान.
भारत है पीछे नहीं, करें निरंतर शोध,
चंद्र यान के नाम से, तीन संकल्प बोध.
मिली सफलता जब हमें, मन में था उल्लास,
वैज्ञानिक प्रसन्न दिखें, उनके सफल प्रयास.
आगे भी आशा जगी, लंबी लगे छलांग,
रहें निरंतर कोशिशें, स्पेस खेल वामांग.
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इंजन चलते भाप से, करते नाना काम,
लगें उद्योग विविध जब, ऊर्जा का संग्राम.
पहले निकला कोयला, फिर शोधन आराम,
रही जरूरत भाप की, इस बिन सब नाकाम.
पहले सागर में चलें, नौका, स्टीमर, जहाज,
उनसे ही व्यापार हो, निर्भर रहा समाज.
प्राइम मूवर अब बने, बिजली, नाभिक, तेल,
यही स्रोत ऊर्जा रहें, चलें बस और रेल.
नगर कारखाने लगें, फैक्ट्री या उद्योग, 
पनप रहे प्रदूषण से, भाॅंति भाॅंति के रोग.
इस कारण अनिवार्य है, समुचित रहे विकास,
अधिक आय की लालसा, कर दे नहीं विनाश.
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नहीं बात केवल करें, भेज सकें संदेश,
मोबाइल उपकरण का, हम सब को उपदेश.
कम खर्चे में कर सकें, आप वीडियो कॉल.
अपने प्रियजन से मिलें, कर दर्शन तत्काल.
मोबाइल से हम करें, लेन देन व्यापार,
स्मार्ट फोन अब बन गया, जीवन का आधार.
सोच समझ कर कीजिए, मोबाइल उपयोग,
सॉफ्टवेयर विकास से, करें नाना प्रयोग.
फोटो आप खींच सके, भेजें नाना चित्र,
खबर देश विदेश मिले, लिखें कविता चरित्र.
रील, फेसबुक, क्रोम से, लिंक्डइन का ज्ञान,
जीवन में सुधार करें, मदद करे विज्ञान.
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भारत के संकल्प से, जाग गया उत्साह,
करी प्रगति विज्ञान में, निकली जीवन राह.
उतरा मंगल भूमि पर, स्वदेशी चंद्रयान,
स्वपन आज साकार है, भारत का अभियान.
अंतरिक्ष के क्षेत्र में, बन रहे कीर्तिमान,
इसरो के अभ्यास का, नहीं कहीं उपमान.
लगा तिरंगा स्पेस में, भारत करे कमाल,
यह दिन देखन को लगे, दिन, रात, माह, साल.
यह दिन है इतिहास में, हम सब को है गर्व,
इतर धरा में मन रहा, एक अनोखा पर्व.
वैज्ञानिक अपने बने, सराहना के पात्र,
आगे भी मिलती रहे, विविध सफलता मात्र.
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डिजिटल युग में आज के, सब संभव सरकार, 
साइन करें कलम बिना, मोबाइल दरकार. 
लेन देन धन राशि का, कर देता पिन कोड, 
अपना डाटा आप तक, रहे सुरक्षित मोड, 
भीत सुरक्षा तोड़ दें, हैकर का है काम, 
इसी बात की नौकरी, इसी बात के दाम. 
बड़े काम की योजना, कंप्यूटर कर जाय, 
देख भाल हर पल करे, आपद भी टल पाय. 
प्रस्तुति हो सबके लिए, मिलें नवीन सुझाव,
विशद विवेचन कर सकें, परियोजना प्रभाव. 
गप-शप अपनी आप से,  व्हाट्सैप कर पाय, 
समाचार संसार के, मोबाइल दे जाय. 
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धुंए की समस्या रही, पनपें नाना रोग,
हैरानी जग की बढ़ी, चिंतित सारे लोग. 
सुविधा आवागमन की, गाड़ी का प्रयोग,
डीजल, पेट्रोल से हुए, दमा, श्वास के रोग.
वाहन बिना धुआं चलें, बिना एक्ज़ास्ट काम, 
बिजली गाड़ी जब बनें, कटे सफर आराम.
बार बार ऊर्जा भरें, रहे सुगमता चार्ज, 
दो सौ बीस वोल्ट मिलें, लंबी दूरी राज.
मँहगी इसकी बैटरी, कैसै मिले सुराग,
वेस्ट ठिकाने लग सके, ऐसा मिले चिराग. 
आउटलेट स्थल मिलें, वाहन होवे चार्ज,
पी.यू.सी. झंझट नहीं, सफल हो सके काज.
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भाईचारा बढ़ सके, मिले वही सामान,
दुनिया भर में मिल सके, एक नई पहचान.
सहज, सुगम सुंदर मिले, सभी जगह उत्पाद,
आसानी से जान लो, हो परिचित संवाद.
श्रम, तकनीक बदल सकें, कम पूँजी बाजार,
बढ़े व्यवसाय आपका, जमे विश्व आधार.
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आज जगत सारा हुआ, ऊर्जा से हैरान, 
संभावना नई मिली, कक्ष के इलेक्ट्रॉन.
हाइड्रोजन तोड़ हुआ, ऊर्जा का संधान, 
नए रूप में मिल गया, विकास का वितान.
इससे हम पा सकें, क्रूड ऑयल विकल्प,
आत्मनिर्भर देश बने, लेते यह संकल्प.
पूरी निष्ठा से करें, सही दिशा निर्मान,
तेल कंपनी भी करें, अपना योगदान,
गैस रूप में कठिन है, इसे टैंक भंडार,
ज्वलनशील यह गैस है, विस्फोटक आसार. 
लगी आग यदि भूल से, हो असीमित प्रसार,
जान माल की क्षति सहित, हो नुकसान अपार.
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ऊर्जा सबको चाहिए, मानव, पेड़, मशीन,
मुरझाते इसके बिना, हो जाते गतिहीन.
अलग रूप में चाहिए, इन सबको आहार,
उष्मा, बिजली, वेग, ध्वनि, हैं इनकी दरकार.
अणु संरचना में रहा, केंन्द्र न्यूक्लियस नाम,
इसके अवयव घूमते, नहीं करें आराम.
कूदा - फाँदी में हुआ, द्रव्यमान का भेद,
ऊर्जा दूजे में ढली, ऑर्बिट में कर छेद.
अणुविक ऊर्जा सुगम हो, एक बार का खर्च,
बना रिएक्टर, मिले अणु, रखो सुरक्षा सर्च.
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सूरज में ऊर्जा भरी, फैली सब आकाश,
भेदभाव को छोड़ कर, दे सभी को प्रकाश.
ऊर्जा सबको चाहिए, जीवन का आधार,
पवन, रोशनी, जल मिलें, कुदरत के उपहार.
शोध कार्य चलता रहे, कर प्रयोग विज्ञान,
नए तरीके खोजते, सार्थक हों वरदान.
नाभिकीय ऊर्जा बनी, अणुओं का व्यवहार,
कूदें कक्षा घूम कर, छोड़ गणित अनुसार.
फोटो वोल्टिक असर से, मिलता विद्युत अंश,
कई काम उससे सधें, परिपथ देता दंश.
संभव नहीं मिले हमें, ऊर्जा स्त्रोत अपार,
सोच समझ कर कीजिए, ऊर्जा का व्यापार.
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इच्छा, वसीयत कहिए, मतलब केवल एक,
बाद आपके क्या मिले, रिश्ते बनते नेक.
रहे पास संपत्ति जो, बाँटे उसे समान,
सभी निकटियों को मिले, गौरवमय सम्मान.
अपनी सोच स्पष्ट रहे, रख कर साफ़ विचार,
कोई भ्रम रहे नहीं, लिख कर रखिए यार.
बीवी, बच्चों को नहीं, कोई रहे मलाल,
बाद आपके देख लें, कितना किसका माल.
लिखित वसीयत पर रहें, दस्तख़त दो गवाह,
शाँति रहे परिवार में, कोई नहीं गुनाह.
बाद वसीयत छोड़ दें, रहे न कुछ भी मोह,
मरें कभी भी चैन से, होता नहीं बिछोह.
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बनी एक थी कंपनी, ओ.यन.जी.सी. नाम,
तेल गैस को खोजना, होता उसका काम.
जल थल में ढूँढते, तेल गैस इंसान,
तेल वीर हम पर करें, एक बड़ा एहसान.
दुर्घटना होती रहीं, किए तुरत उपचार,
दोबारा ऐसा नहीं. इस पर किया विचार.
गैस तेल से हो गया, समृद्ध भारत देश,
चित्रित ऊर्जा पटल पर, बदल गया परिवेश.
स्वावलंबी भारत हुआ, शोधन की तकनीक,
नए तरीके तेल के, गाढ़ा या बारीक.
नहीं कमी प्रयास में, सब देखें प्रत्यक्ष,
पीछे नहीं कहीं रहे, महिला भी अध्यक्ष.  
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सीख हमें दे कर गए, गुरुवर, ज्ञानी, धीर,
सो कर जल्दी जागिए, बन जाए तकदीर.
रहे जरूरी इस लिए, सोएँ जल्दी आप,
पूरी जब निद्रा हुई, मिटते मन संताप.
शयन हेतु होती निशा, करें दिवस में काम,
सुबह शाम प्रभु वंदना, भज प्यारे श्रीराम.
बूढ़े जन पूजन करें, और लगाएँ ध्यान,
सुखद समय उनका कटे, हो समाज में मान.
उठते जल्दी भोर में, रहता चुस्त शरीर,
आलस कर जो सो रहे, बढ़ती तन की पीर.
मजबूरी उनकी रही, करें शिफ्ट में काम,
नियमित दिनचर्या बनी, गलत समय आराम.
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अकल लगा कर बढ़ चला, मोबाइल का मान,
गतिविधि नाना रूप में, करता है इंसान.
कर में मोबाइल लिए, घूमे चारों याम,
बात, चित्र, संदेश से, होते काफी काम.
व्हाट्सएप से जुड़ गए, भूले बिसरे मीत,
हाल चाल अब मिल रहे, रोज सुबह की रीत.
एक दूसरे के मिलें, भले बुरे संदेश,
राजनीति हावी रहे, ऐसा है परिवेश.
पैसे भी हम भेजते, इसका कर उपयोग,
बूढ़े दवा मंगा सकें, ऐसा चला प्रयोग.
एंबुलेंस भी आ सके, पुलिस का आव्हान,
सभी जरूरी काम हों, संकट में हों प्रान.
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हम भूले जो भौतिकी, फिर से आई याद, 
कैसे हम बिसरा दिए, मन में भरा विषाद.
बड़े जतन से पढ़ सके, ऊर्जा विविध प्रकार, 
एक दूसरे में मिले, कण-तरंग संचार.
ऊर्जा आत्मा रूप है, होता नहीं विनाश, 
बदल प्रकृति धारण करे, उष्मा, ध्वनि, प्रकाश. 
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मोबाइल चंगा चले, चारज हो भरपूर, 
बातचीत का हो मजा, देखें चित्र सुदूर. 
नहीं जरूरी कीमती, मिल जाए जो फोन, 
पहचानें आवाज़ से, बोल रहा है कौन.
चालू फोन देख हुई, एक सुखद अनुरभूति, 
उसकी घंटी जब बजी, लगी उमड़ने प्रीति
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फैली गरमी कम करे, ले आता वह शीत, 
चलती गाड़ी में रहे, इंजन का सखा-मीत, 
इंजन का सखा-मीत, उसके बिन आती खीज़, 
अधिक गरमी जब हो, इंजन हो जाता सीज़, 
रेडिएटर कहें उसे, ले सुचालक जाली,
उष्मा विसरित हो सके, धातु पत्ती फैली.
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विसरित होती जब गैस, करो जार में बंद, 
बरबादी से सुरक्षित, फैले कुछ भी गंद, 
फैले कुछ भी गंद, हो भविष्य में दरकार, 
रेग्यूलेटर लगा, नियमित कर लो प्रसार,
प्रदूषण रुके, गैस बचे, प्रवाह हो नियंत्रित,
गैस विस्फोट भी करें, हों फटाफट विसरित. 
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कटर होता नहीं सदा, सीधा और सटीक,
दो टुकड़ों में बाँटता, अलगाव का प्रतीक, 
अलगाव का प्रतीक, असलियत बतलाता,
कचरा, सड़न, गंदा, सफाई सब कर पाता,
चाकू, कैंची, तलवार, करते मार प्रखर, 
इक दूजे के प्रतिरूप, जोड़ते नहीं कटर.
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भगवन ऐसी बुद्धि दें, जस चाकू की धार, 
सारे मसले समझ कर, तुरत करे फिर वार, 
तुरत करे फिर वार, जिस पर गिरे वो कटता, 
भोंक, छील, साफ कर, गंदगी को भी हरता, 
टहनी काट कलम लगे, महक जाता उपवन, 
शल्य चिकित्सा धार से, करें सेवा भगवन.
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विकिरण छोडे़ं हर समय, रेडियो धर्मी तत्व, 
पदार्थ ऊर्जा नियम, संरक्षण करता सत्व, 
संरक्षण करता सत्व,  घटे पदार्थ जाती गिनती सन्त, 
समाप्त होने में, लग जाता समय अनन्त,
निश्चित उसकी क्षरण दर, पदार्थ से कम किरण, 
जब होती हाफ़ गणना, हर समय हो विकिरण.
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नश्वर इस संसार में, क्षय होती हर चीज, 
हलके से विघटन चले, कम हो जाते बीज, 
कम हो जाते बीज, विनाश का समय अनन्त, 
शून्य न हो कदापि, होता कभी नहीं अन्त, 
घातीय क्षय अचर रहे, न रोकता ईश्वर, 
रेडियो एक्टिव तत्व, का क्षय नहीं वह नश्वर.
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ज्यादा से कम दाब पर, तरल छिद्र से आय, 
उसकी दिशा ऊर्ध्व हो, गुरुत्व वापस लाय, 
गुरुत्व वापस लाय, पर्यटन में आसानी, 
रंगीन प्रकाश में, दे रंग भरी रोशनी,
रोज करे मनोरंजन, कौतुक से फायदा, 
फव्वारा उसको कहें, बिजली ले ज्यादा.
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भेजो जब भी तरल को, ऊँचा कुछ हो जाय, 
द्रव-स्थैतिक दवाब सम, सारे द्रव में छाय, 
सारे द्रव में छाय, होता पिस्टन जरुरी, 
कड़क नीर निरोधक, वरना क्रिया अधूरी, 
बिजली, मशीन, पंप में, सरल पिस्टन खोजो, 
पिचकारी में दम लगा, हाथ से रंग भेजो. 
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निकली फुहार तरल की, तन सारा तर जाय, 
तरी भीनी सुगंध की, सराबोर कर पाय, 
सराबोर कर पाय, बौछार में बरसे इत्र, 
महकाए तन बदन, सद्भाव बढ़ाता मित्र, 
कणित्र बोलते उसको, आता तरल असली, 
छिड़क कीटनाशक दवा, गंदगी भी निकली.
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छलनी परिशोधन करे, छाँट अलग सामान,
सार-सार को छाँट ले, जो सब एक समान, 
जो सब एक समान, उसे कहें सरल फिल्टर, 
मानव की दोस्ती, होती सब से बढ़ कर, 
आयाम,आवृत्ति, कला, हो पहचान अपनी, 
बिजली या मानविक, कहें सबको छलनी. 
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अवगुण का विरोध करे, सद्गुण करे विकास, 
ऐसे गुरु को नमन है, सिखलाता मृदु हास,
सिखलाता मृदु हास, बनाता वक्र से सरल, 
अच्छा चरित्र बना, हटा कर दोष की रिपल, 
चेले बन सकें शक्कर, समा जाएँ सब गुण,
चाहे खुद गुड़ ही रहें, दूर हों सब अवगुण.
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कम वोल्ट पूरी बिजली, परिपथ का आधार, 
चार्ज करो लगातार, बदल दो बार-बार,
बदल दो बार-बार, करता जरूरत पूरी, 
सेल का संयोजन, कहते उसको बैटरी,
रासायनिक या सूखी, तय वोल्ट्स निर्गम, 
चल उपकरण या परिपथ, खींचते बिजली कम.
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मानव तन अनुभव करे, सब कुछ पड़े सुनाय, 
भजन, कीर्तन या गज़ल, जो चाहो सुन पाय,
जो चाहो सुन पाय, जोड़ बिजली का सिगनल, 
चुंबकीय क्षेत्र में, चलती छोटी क्वाइल,
मिनी स्पीकर उपयोग, दे परिणाम अभिनव,
हलकी बोली तेज कर, बढ़ा देता मानव, 
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जटिल संदेश हो सरल, पा जाओ यदि कोड, 
बदला जाय समय संग, पा कर सम्यक मोड, 
पा कर सम्यक मोड, निकालती मतलब बात,  
विमाॅडुलन तकनीक, माॅडुलन से पलट जात, 
कार्य में बाधा करे, विविध न्वाइस कुटिल,
ए.एम. या एफ.एम., करे बहाली जटिल.
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कम आवृति, आयाम का, भेजो सिगनल दूर, 
चढा़ कैरियर पर उसे, प्रेषित करो जरूर,
प्रेषित करो जरूर, तरकीब बनाती काम, 
रेडियो, टी.वी. में, बढ़ता उसका आयाम,
माडुलेटर कहते सब, ए.एम. एफ. एम.,
एक उपाय, पर उनमें, तकनीकी भेद कम. 
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सारे गुण जीवित रखे, हर परिपथ की जान,
उनमें ऊर्जा भर दे, दिल की सी पहचान, 
दिल की सी पहचान, डी.सी. आउटपुट नियत, 
बिना शोर, बदलाव, देती बिजली अनवरत, 
पाॅवर सप्लाई कहें, सोर्स भी पुकारें, 
स्थिरता, मान बताते, उसके घटक सारे. 
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डी.सी. बने ए.सी. से, शोधक उसको जान, 
धनात्मक अनुकूल हो, तब आउटपुट मान, 
तब आउटपुट मान, वक्र धारा हो समान, 
विपरीत काल करे, शून्य और बेजुबान,
आधे-पूरे चक्र में, धारा मिले नए.सी., 
रेक्टीफायर बदले, बिजली बने डी.सी. . 
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चाहें जब संदेश को, भेजें परिजन पास, 
अधिक दूरी में गुमता, हो सिगनल का हास, 
हो सिगनल का हास, चढाओ कैरियर साथ, 
रेडियो प्रसार में, मोडम दिखलाता हाथ, 
वापस सिगनल पा सकें,  शोर अनचाहे,
ए. एम., एफ. एम. में, वापसी जब चाहें.
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एक आवृति से करे, कम्पन नाना बार,
आयाम भी सदा रहे, निश्चित है आकार, 
निश्चित है आकार, आवृति आर. सी. संयोग, 
शिक्षक ने सिखाया, अनुभव का उपयोग,
उसी समय सारे पाठ, पढा़ लेते अनेक, 
बिना किसी व्यवधान के, लय, ताल रहे एक. 
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घटना एक द्रवित करे, दिल को दहला जाय, 
जब भी कभी याद करुँ, हर बार ही रुलाय, 
हर बार ही रुलाय, झकझोरती सबका दिल, 
स्मृति ताजी होय, छलकने लगता वह पल, 
जब तक ऊर्जा बाकी, दिल कांपता अपना, 
अमिट छाप छोड़ जाती, हृदय छूती घटना. 
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सदा एक से हाल में, आ जाते सरकार,  
जितनी भी चाभी भरो, वापस आते यार, 
वापस आते यार, आॅसिलेटर का प्रकार, 
परिपथ स्थिति निश्चित, आउटपुट सदाबहार, 
मोनो-स्टेबल कहते, उसको प्रिय यह अदा, 
रहती हालत एक सी, पक्की रहती सदा. 
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बिजली सी तेजी दिखे, जीरो - वन हालात, 
इस पार, कभी उस पार, एक नई शुरुवात, 
एक नई शुरुवात, बना डिजिटल कम्प्युटर, 
परिपथ का आधार, जिनमें लगता काउंटर, 
फ़्लिप - फ़्लाॅप कहें उसे, फटाफट गति बदली,
हर स्पंदन दशा बदले, पा कर तुरत बिजली. 
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निरंतर कंपन करता, हो ऊर्जा प्रवाह, 
साइन वेव बना रहा, आउटपुट की राह,
आउटपुट की राह, करते नाना उपयोग, 
दोलन की आवृत्ति, बनाता आर.-सी. योग, 
एक से अधिक गेन हो, बढ़े आयामांतर, 
द्वि-चरणीय आवर्धक, कंपन हो निरंतर.
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निर्झर स्याही बह रही, कहते उसको पेन,
हस्त-लिखित साहित्य सब, रचा कलम की देन, 
रचा कलम की देन, अमिट कागज़ पर निशान, 
स्वरचित पांडुलिपि ले, सबकी सांसे कुरबान, 
सॉफ्टवेयर युग में, अंगूठा होता अमर,
वाणी, प्रभा झलके, लिखो बेखटके निर्झर. 
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पता नहीं कब आपदा, कौन मोड़ मिल जाय, 
सफर सुहाना ना रहे, खेल खतम हो जाय, 
खेल खतम हो जाय, जीना दूभर परिवार,
बच जाते हम, काश, शीष-कवच लगाते यार,
कहीं भी जाओ, न करो, सुरक्षा-समझौता,
दुर्घटना कैसे हुई, चला नहीं कुछ पता. 
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अपने चक्र में जकड़ कर, लेता सब कुछ खींच, 
शक्ति को ट्राँसफर कर, भरे ऊर्जा सींच, 
भरे ऊर्जा सींच, चलाए आगे गाड़ी,
इंजन को गति मिली, क्लच से गीयर जोड़ी, 
सही रेस में डाल कर, देखो सुखद सपने, जाओ कितनी भी दूर, बिठा कर सब अपने.
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सुघड़ बने अनाड़ी भी, दिशा सही मिल जाय,
बेतरतीब उद्दंड को, लाइन पर ले आय, 
लाइन पर ले आय, विचार होते नियोजित, 
सही ऊर्जा करे, सही गति को नियंत्रित, 
पूरी शिक्षा सिखा गुरु, जाती सब भूल झड़, 
आवश्यक सुधार करे, सब को रचता सुघड़.
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घर भर को सूचित करे, अतिथि पधारे आज, 
स्वागत को तैयार हों, प्रथा रही समाज, 
प्रथा रही समाज, अतिथि का करो सम्मान, 
घंटी सचेत करती, हर्षित हुए मेज़बान,
बार-बार न बजे घंटी, रखिए इस की खबर, 
सुखी, संपन्न परिवार, अतिथि आते जिस घर. 
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चेतावनी को समझो, सुनो तेज आवाज़, 
मिल का समय, एम्बुलेंस, लगे आग अंदाज़,
लगे आग अंदाज़, स्थिति आपात बन जाय, 
भगो सुरक्षित जगह, जब आवाज़ दे सुनाय, 
बिजली, बैटरी चालित, करे जोर की ध्वनि, 
समझ, ध्यान से निपटो, सुन कर चेतावनी.
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कसना हो किसी को जब, कस दो पेंच घुमाय,
खुद पिच से आगे बढ़े, बंधन जकड़ा जाय, 
बंधन जकड़ा जाय, पेंच डाल उलझे अकल,  
जंग पर डाल तेल, पेंच खोलना हो जटिल, 
बीच में पेंच डाल कर, दो तल को जोड़ना, 
घुमा डाल पूरा उसे, दम लगा कर कसना.
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चालक की जब गति बढ़े, बेकाबू हो कार, 
तुरत ब्रेक लगाय कर, लेवें हाल सुधार,
लेवें हाल सुधार, चाल सीमित कर पावें,
कम ऊर्जा, संवेग, अधिक घर्षण हो जावे,
ब्रेक जनित उष्मा से, जलता कोई बालक,
हर समय रखे नियंत्रण, होता कुशल चालक. 
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चक्र घूमता बन रहा, जीवन का आधार, 
इसके चलते हो रहा, गति का कारोबार, 
गति का कारोबार, घूमे अक्ष पर पहिया, 
उसकी रिम परिधि हो, स्पोक्स बनें त्रिज्या, 
बिना कोण बने उसकी, गति रहे सदा वक्र,
वेग, संवेग, आघूर्ण, दे कर चलता चक्र.
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बिजली से चुंबक बने, चुंबक-बिजली नाम, 
जितनी देर बिजली है, उतना चुंबक काम, 
उतना चुंबक काम, घंटी बिजली की बजे, 
इस के उपयोग से, अनेकों मशीनें सजे, 
ध्वनि बिजली की घंटी से, मधुर संगीत निकली,
कितनी चुंबक की शक्ति, कहे धारा बिजली. 
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वेग वृद्धि की दर को, कहे त्वरण विज्ञान, 
बल का माप एकक में, बताता द्रव्य मान,
बताता द्रव्य मान, उसका त्वरण से गुणन, 
प्रतिक्रिया सब की, क्रिया के उलट समान, 
द्रव्यमान की गुणा से, बन जाता संवेग,
रुकी वस्तु चलने लगे, उसमें आता वेग.
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जब एक कोण, दिशा में, फेंकें कोई चीज़, 
धरती पर वापसी हो, कारण गुरुत्व बीज, 
कारण गुरुत्व बीज, ले पथ परवलयाकार, 
ऊर्ध्व, क्षैतिज वेग, बनाएँ कक्षा साकार, 
दो घटकों में वेक्टर, बाँटता वेग गजब, 
ऊर्ध्व से मिले उछाल, अधिक जोर लगे जब. 
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दुश्मनी निभा रहे जब, कई पड़ोसी देश,
छिटपुट घटना हो रहीं, हर घड़ी का क्लेश,
हर घड़ी का क्लेश, नहीं रहो हर दम विकल, 
दाग मिसाइल करो, एक साथ मामला हल,  
धरती, आकाश में हो, सब जगह मार घनी, 
हो जाय मुकम्मल अमन, रह न पाय दुश्मनी.
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जीवन की संभावना, हो पाई साकार, 
अंतरिक्ष में पा सके, कुछ नव आविष्कार,
कुछ नव आविष्कार, कर प्रयोग कई साल, 
जीव, पशु, मानव से, होता विज्ञान निहाल, 
धरती के भेद निकाल, मनें आनंद के छन, 
चंद्र, मंगल के बाद, गुरु में मिले जीवन. 
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बिजली सी फुरती, चमक, बड़ी तेज है चाल, 
नियमों के अनुसार गति, करता जाय धमाल, 
करता जाय धमाल, प्रक्षेपण का विस्तार,
परवलयाकार पथ, दे कक्षा को आकार, 
अंतरिक्ष विज्ञान की, प्रगति दिशा बदली, 
नोदक ठोस ईंधन से, पा परमाणु बिजली. 
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ऊपर फेंकी हर चीज़, लौट धरा पर आय,
कारण गुरुत्व बोलते, उसे खींच कर लाय,
उसे खींच कर लाय, ऐसा कभी हो जाता, 
अधिक वेग की वज़ह, वापस नहीं आ पाता, 
पलायन वेग कहें जब, गुरुत्व हो बेअसर, 
अधिक वेग से न वापस, हो धरा के ऊपर.
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ठोस जब किसी तरल में, डुबकी लेय लगाय, 
समान आयतन अपने, तरल देवे हटाय, 
तरल देवे हटाय, सकल या आधा डूबे,
हटे द्रव का भार, घनत्व उसका बताबे, 
आर्कमिडीज़ सिद्धांत, कहता यह पुरजोश, 
द्रव का उछाल भी हो, डूबे कोई ठोस.
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कैलोरी माप उष्मा, करे ऊर्जा माप, 
भोजन का रखे हिसाब, सारा खाना नाप, 
सारा खाना नाप, रखें स्वास्थ्य-ध्यान,
भला ज्ञान बांटते, आजकल के नौजवान, 
इक ग्राम पानी बढ़े, ताप जब इक डिगरी, 
उस ऊर्जा को कहते, हम एक कैलोरी.
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ऊपर से जब कुछ गिरे, बिना किसी अवरोध,
उसकी गति बढ़ती रहे, पा धरा प्रतिरोध, 
पा धरा प्रतिरोध, त्वरण का निश्चित नाम, 
गुरुत्वाकर्षण का, वेग बढ़ाना है काम,
प्रभाव शून्य होता, अंतरिक्ष के अंदर. 
वापस सभी आ जाता, गर उछालो ऊपर.
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जीवन में शोरगुल का, पड़ा बड़ा प्रभाव, 
खुद की शाँति भंग कर, चिड़चिड़ा व्यवहार, 
चिड़चिड़ा व्यवहार, इच्छाओं की अपेक्षा, 
रह तनाव में सदा, हो न पूरी आकाँक्षा, 
स्वच्छ हवा श्वास में, बने ऊर्जा स्पंदन, 
प्रभु का कर धन्यवाद, भोगो सुखी जीवन.
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एक आवृति की ध्वनि, करते कई स्रोत, 
साथ साथ बज कर करें, मन को ओत-प्रोत, 
मन को ओत-प्रोत, एक सुर में जब बजते, 
बढ़ जाती आवाज़, अनुनाद उसको कहते, 
अलग लय, गति पा बोलें, लगें न तब सुर नेक,
समवेत गायन कहते, गान का स्वर एक. 
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सोडियम अणु विघटित हुआ, दिखी किरन प्रकाश,
पीली सुंदर रोशनी, चमक उठी आकाश, 
चमक उठी आकाश, हो पार विभव दहलीज, 
ऋणावेश की कक्षा, ऊर्जा होती रिलीज़, 
डी-लाइन स्पेक्ट्रम, मानक है प्रीमियम, 
अपनी निश्चित आवृति, दे जाता सोडियम.
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एक विचार में झुकाव, दे बहुमत का भान, 
ध्रुवीकरण कहें उसे, मिले साथ में मान, 
मिले साथ में मान, काटे विरोधी की जड़, 
दमन करे लम्बवत, करके विनाश लड़-झगड़, 
विचार की आँधी चले, बहते घटक अनेक, 
इतनी प्रबल हो धार, बस रहे खास एक. 
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गरम करें, गरमी बढे़, बढ़ता अणु का वेग, 
गरमी अधिक, ताप बढा़, बढे़ उनका संवेग, 
बढे़ उनका संवेग, ठोस से तरल भी संभव, 
अधिक तंत्र ऊर्जा, उष्मा बढा़ए वैभव, 
उष्मप्रवैगिकी रीत, प्रकृति कहे नियम,
शाश्वत सच, बनो नरम, करो न जीवन गरम.
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जीवन के अध्ययन में, गुरू का योगदान, 
गुण-दोष की व्याख्या, उनका काम महान, 
उनका काम महान, कर्म का सुंदर चित्रण, 
श्वेत प्रकाश का, हो स्पेक्ट्रम विसरण, 
भले-बुरे के भेद से, कराए सच-दर्शन, 
गुरू की सत्संगति ने, सुधारे सब जीवन. 
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जल-थल में चलता नहीं, करे हवा में बात, 
अधिक दूर के सफर में, बहुत समय बच जात, 
बहुत समय बच जात, क्रू-पाइलट साथ,
ए.टी.सी. का सौजन्य, कड़ी सुरक्षा हाथ, 
जलपान के साथ मजा, नहीं उड़ान केवल, 
ताप, ऊँचाई, लक्ष्य, दे सूचना जल-थल. 
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पानी पर चले, पर वह, जलचर नहीं कहाय, 
जलयान नाम सब कहें, जहाज जाना जाय, 
जहाज जाना जाय, घूमिए देश-विदेश, 
चालक-दल जीवन कठिन, करें न कोई ऐश, 
कड़े सुरक्षा मापदंड, नियमों का नहीं सानी,
जमीन दिखे न कई दिन, हर तरफ है पानी.
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लंबी दूरी का सफर, करवा सकती रेल, 
सहयात्री आपस में, कर ही लेते मेल,
कर ही लेते मेल, डिब्बे बने श्रंखला, 
सिग्नल पा दौड़ती, चालक उसको ले चला, 
अधिक स्टाफ़ संग बना, विभाग स्वाबलंबी, 
सुरक्षा, समय पर चले, राहें कितनी लंबी.
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जाना चाहो दूर जब, नहीं पास हो कार, 
जन सुविधा दिलवा रही, अपनी यह सरकार, 
अपनी यह सरकार, बस दो ज़रा सा भाड़ा, 
मय चालक सवारी, हो बरसात या जाड़ा, 
टैक्सी से भी सस्ता, कहीं भी मुड़ पाना, 
पकड़ लो छोटा आॅटो, जहाँ चाहो जाना.
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कई जन यात्रा करें, मिल कर सबके साथ, 
उनमें कुछ सहयोग कर, कुछ दिखलाते हाथ, 
कुछ दिखलाते हाथ, जब करना हो सवारी, 
रुके चलती गाड़ी, लोग उतारे प्यारी, 
चालक-कंडक्टर साथ, घूमिए जगह नई,
स्टैंड पर दीखें खड़ी, तैयार बसें कई. 
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घूमें फिरें पिकनिक पर, साथ मिलें जब यार, 
मौज-मस्ती बढ़ जाए, होती अपनी कार,
होती अपनी कार, चाहे जहाँ ले जाएँ, 
प्रदूषण जाँच कर, सुरक्षा पेटी पाएँ,
कार चलाएँ तो कभी, ना नशे में झूमें, 
परिवार साथ में रहे, सब शौक से घूमें.
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माध्यम हो सघन-विरल, बदले रश्मि प्रकार, 
गति, दिशा दोनों बदलें, दिखे जब आर-पार, 
दिखे जब आर-पार, एक दिशा की रोशनी,
कहें क्राँतिक कोण, जब आगे न दिखे घनी,
अधिक आपतन पर लगे, सघन तल दर्पण सम, 
कुल अंतः परावर्तन, मिले विरल माध्यम.
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सौर मंडल केन्द्र में, रहा सूरज महान, 
आ कर चन्द्र बीच में, डालता व्यवधान, 
डालता व्यवधान, चमक सूर्य की आहत,
खगोल घटना करे, भजन-पूजन को उद्यत. 
डराते धर्म नाम पर, दिखे विकल्प न और,
मानो प्रकृति उपहार, सोचो ग्रहण सौर. 
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ऊपर नीचे चल रहा, जगत का व्यवहार, 
भले-बुरे चलते साथ, सागर मध्य ज्वार, 
सागर मध्य ज्वार, निश्चित रहता अंतराल, 
सुख-दुख हों साथ में, चलते अपनी तय चाल, 
टिकता नहीं समय सदा, कहें सारे मुनिवर, 
आज दीखे जो नीचे, कल उसी को ऊपर.
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कला, ज्योति चन्द्र की, घटे-बढ़े दिन रात, 
पूर्ण चन्द्र क्षणिक है, बढ़ कर के घट जात, 
बढ़ कर के घट जात, चलता चक्र लगातार, 
पूनम आभा रही, हर माह में एक बार, 
इस तरह घटता-बढ़ता, मानव जीवन चला, 
कभी हास, कभी विकास, दिखती सबको कला. 
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उदित हुआ नवल चन्द्र, नव जीवन उल्लास, 
आरंभ नए पक्ष का, शुरू हुआ नव मास, 
शुरू हुआ नव मास, कहें उसे अमावस्या, 
नियत गति चन्द्र की, कला की हो व्याख्या, 
तिथियों की कर पहचान, मन हो जाता मुदित,
नए संकल्प के साथ, चाँद भी हुआ उदित.
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याद पुरानी आ गई, अंत समय नजदीक, 
स्मृति पटल पर छा गए, गुण सारे तसदीक़,
गुण सारे तसदीक़, चले वीडियो की रील, 
भले बुरे करम की, सटीक हो जाती फील, 
अंत में चाहो माफी, बाहर कर लो फरियाद,
पुण्य चाहे न दिखें, पाप जरूर रहे याद.
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पाप पुण्य का गणित है, सतर्क चौकीदार,
हर जगह लगाए गए, सी.सी.टी.वी. द्वार, 
सी.सी.टी.वी. द्वार, नज़र रखे गतिविधि सभी, 
सब कुछ अंकित करे, री-प्ले दिखाए तभी,
कैमरा नजर सब जगह, हैरान दिखें आप, 
डिस्प्ले पर देख सकें, तुरत सभी के पाप. 
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गणना जटिल, सरल करे, छोटी एक मशीन,
लैपटॉप कहते उसे, रख गोद या ज़मीन,
रखो गोद व ज़मीन, सूचना सुरक्षित मान,
सॉफ्टवेयर चले, नेट में अटकती जान,
प्रिंटर, ड्राइव लगा, जो काम हो अपना, 
सूचना एकत्र होती, करता तेज गणना.
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मार्कोनी बना गए, रेडियो को महान,
संचार को दिला गया, एक नया वरदान, 
एक नया वरदान, बस एंटीना लगाओ, 
इच्छित सिग्नल लगा, संगीत, खबर सुनाओ, 
ए.एम., एफ़.एम. की, तकनीक अनहोनी, 
बेतार को याद रखें, खोजे मार्कोनी.
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जटिल समस्या का करे, पलों में समाधान,
चाहे हो, भाषा, गणित, या रचना, विज्ञान, 
या रचना विज्ञान, गजब इस की मेमोरी, 
बैबेज की रचना, बड़ी विलक्षण थ्योरी, 
माइक्रो सर्किट लगें, अनालाॅग व डिजिटल, 
कंप्यूटर चार्ज कर, हल हो गणना जटिल. 
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आवेश रहित मूल कण, हर नाभिक की जान, 
परमाणु संरचना में, यह रहते प्रधान, 
यह रहते प्रधान, प्रोटाॅन से भी भारी, 
सारे रहते साथ, चॅडविक के हम आभारी, 
हरते नाना कष्ट, नव ऊर्जा के संदेश, 
मानव जीवन सफल हो, कहें बिना आवेश.
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धनावेश हो हमेशा, कहाता प्रोटाॅन, 
उदासीन न रहे कभी, पा केन्द्र स्थान, 
पा केन्द्र स्थान, भार न्यूट्रॉन समान, 
न्यूक्लियस में भी, रखे अस्तित्व प्रमान, 
रख सकारात्मक सोच, कहें बिना आवेश, 
दम हो अपनी बात में, कहें, भर धनावेश.
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घर आ रही बिजली की, आवृत्ति हो पचास, 
हर्ज़ में मापते इसे, प्रति सेकेंड आस, 
प्रति सेकेंड आस, अलग कुछ गैजेट चलें, 
बदले आवृत्ति तो, आल्टरनेटर बोले, 
हर पल बदले आयाम, चलता नहीं अक्सर, 
कुछ जगह लगाते इसे, लगते नहीं घर घर. 
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धार पूरे परिपथ की, बहती मेरे साथ, 
सारे इन व आउट का, हिसाब मेरे माथ,
हिसाब मेरे माथ, फिर भी वीकेस्ट लिंक,
जरूरी हर सर्किट में, रखता उसको पिंक, 
लगाने से पहले ही, जाँचें मेरा भार, 
आकार मिले तो करे, सजीव परिपथ धार.
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चन्द्र ग्रहण में रहा, अलग राशि प्रभाव,
टी.आर.पी. बढ़ा रहे, मनीषों का जमाव, 
मनीषों का जमाव, खौगोलीय घटना पल, 
सूर्य, धरा, चन्द्र, चलते एक रेख सरल, 
बिना तर्क विवाद करें, भय दिखाए इन्द्र,
धर्म, अंधविश्वास से, डरा रहा चन्द्र.
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इंजन एक मशीन है, करती नाना काम, 
तरह तरह की ऊर्जा, बदले याँत्रिक नाम,
बदले याँत्रिक नाम, प्रकाश, बिजली व भाप, 
क्षमता इसकी देख, हैरान हो रहे आप, 
हर जरूरत पूरी हो, मिले अद्भुत स्पंदन, 
आई.टी. में प्रचलित, गूगल सर्च इंजन.
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वायु, धूप, जल, से मिले, बिजली का वरदान, 
पूरे सारे हो सकें, घर के काम महान,
घर के काम महान, सहे शहर का झटका, 
बिन बिजली के लगे, सारा काम हो अटका, 
घर सजा महसूस करें, लगे बढ़ गई आयु, 
जनरेटर अच्छा स्रोत, जब मिल जाए वायु.
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कुंडली में धारा बहे, बीच में चुंबक आय, 
रहे सिरों पर यदि पिवट, कुंडली घूमत जाय, 
कुंडली घूमत जाय, बढ़े चुंबक की गिनती, 
या धारा बढ़ जाय, घूमने की गति बढ़ती, 
मोटर की थ्योरी है, धुरी एक लगा ली, 
कितने ही काम करती, कमाल की कुंडली.
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हर दरवाजे पर लगे, आगंतुक बतलाय, 
स्विच दबाते ही बजे, सारा घर सुन पाय, 
सारा घर सुन पाय, जब तलक रहती बिजली, 
अलग आवाज़ मिले, जैसी चाही लगा ली,
क्वाइल से चुंबक बन, मेक-ब्रेक चक्कर, 
मीठी मधुरिम आवाज, सभी का ले मन  हर.
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ऊर्जा सबको चाहिए, जीवन का संचार, 
सीमित संसाधन रहे, विकल्प की दरकार, 
विकल्प की दरकार, नए स्रोत हैं मजबूरी,
पवन, सौर, रसायन, करे तेल-कमी पूरी,
मदद सरकार कर रही, खुशहाल हो प्रजा, 
शोध प्रयास दें सकें, हमें लगातार ऊर्जा. 
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अंदर का हाल जान के, चित्र खींच ले आय, 
बिना किसी आघात के, एक्स रे खोज लाय, 
एक्स रे खोज लाय, हड्डी दिखे जो टूटी,
प्रकाश संवेदन, गर पता चले है हटी, 
कारण कष्ट शरीर का, निकाला अति सुंदर, 
काफी रिसर्च हो रही, हाल तन के अंदर.
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पानी साफ करने का, निकला नया विधान, 
सब कहें आर. ओ. उसे, जानें चतुर सुजान,
रिवर्स आस्मोसिस है, कमाल का विज्ञान,
अर्ध पारगम्य झिल्ली, पानी बहता जान, 
घुली अशुद्धि अधिक दाब, छनने का न सानी,
अलग गंदगी को करे, देता साफ पानी.
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ऊपर से नीचे आय, हर चीज़ वजनदार, 
गुरुत्व कारण बन रहा, धरती पालनहार, 
धरती पालनहार, गुरुता का समझो मान, 
सज्जनता व्यवहार में, चरित्र की पहचान.
लच जाय विनम्रता से, पाए सबसे आदर,
शिक्षा, संस्कार, आचार, गुण सभी से ऊपर.
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यार लेते हाल चाल, आपस में संचार, 
आभारी सारे रहें, मोबाइल संसार, 
मोबाइल संसार, सिम कार्ड इसकी जान,  
चार्ज बैटरी से, शेष जीवंत प्रमान, 
नाना ऐप लगाय के, पाओ मस्त बहार,  
नेट, सिगनल से मिलते, बिछड़े सारे यार.
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देती शीतल प्रकाश, कम बिजली का खर्च, 
सस्ता इससे कुछ नहीं, कर लो गूगल सर्च,
कर लो गूगल सर्च, छोटा इसका आकार, बिना स्टार्टर के, देता प्रकाश अपार,
सभी होल्डर में लगे, टूटे से बदल जाती, 
सी.एफ़.एल. कहते उसे, नहीं गरमी देती.
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धारा बहे चालक में, अद्भुत हो प्रभाव, 
गरमी, चुंबक, रसायन, धारा करे बहाव, 
धारा करे बहाव, विभव ऊपर से नीचे, 
धारा से चुंबक बने, अपनी ओर खींचे, 
इस गुण के प्रयोग से, बने जीवन सारा,
सरदी में गरम करती, विचित्र बड़ी धारा.
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आग लगे ना जब तलक, होय न जो स्पार्क, 
भरा सिलेंडर हो रखा, सुरक्षा का रिमार्क, 
सुरक्षा का रिमार्क, बटन दाबे, गैस जले, 
कितनी तेज लपट रहे, रेगुलेटर बदले, 
माचिस-तीली सा लगे, गैस स्पार्क जाग, 
बिना ज्वलन क्रिया के, लगती कहीं न आग.
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खाना पकने के लिए, रहे जरूरी आँच, 
गैस स्टोव लगे सही, बात कहूँ मैं साँच, 
बात कहूँ मैं साँच, निरापद गैजेट प्यारा, 
एल.पी.जी. उपयोग, करे उपकरण हमारा, 
रेग्यूलेटर लगा कर, लौ बदलते जाना, 
सब कुछ खौले, गरम हो, चाय, पानी, खाना. 
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गंदे बरतन साफ करे, कम पानी उपयोग, 
तकनीकी विकास विधा, करती नए प्रयोग, 
करती नए प्रयोग, अधिक क्षमता परिभाषा, 
बिजली भी कम लगे, बचत जगाए आशा, धो, सुखा, साफ निकालें, रोजगार के धंदे, 
इसमें चुन कर सजाओ, पहले बरतन गंदे.
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सभी सफाई चाहते, जिएँ सादा जीवन, 
गंदगी से दूर रहें, करें नहीं प्रदूषन, 
करें नहीं प्रदूषन, लें वैक्यूम क्लीनर, 
धूल, गर्द से दूर, पावें श्वास अति सुंदर,
अलग नाॅज़ल लगा करो, सफाई खूब अभी, 
खिड़की, सोफा साफ हों, जाले हटते सभी.
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पावन पवन को करे, तुम लो शुद्ध श्वास, 
प्रदूषण से मुक्ति मिले, जब यह अपने पास, 
जब यह अपने पास, गायब होते कण धूल, 
वात शोधक बोलें, बिजली चालित है मूल, 
सक्षम, स्वस्थ, संपन्न, गैजेट मनभावन, 
प्यूरीफायर ही करे, खराब हवा पावन.
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सदा नियंत्रण में रखे, आर्द्रता व तापमान,
एअर कंडीशनर उसे, कहें सभी श्रीमान, 
कहें सभी श्रीमान, खाली फैन भी डोले, 
संपीडन क्षमता को, टन में ही लोग बोले, 
केवल ठंडा ही न रखे, हो गरम यदा कदा, 
बिजली लागत बचाइए, रख कमरा बंद सदा.
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कई सेल की बैटरी, शिथिल जभी हो जाय, 
करके तब चार्ज उसे, पुनः काम में लाय,
पुनः काम में लाय, पाए वह नया जीवन, 
चार्जर कहते उसको, ऊर्जा का स्पंदन, 
बैटरी विभव अधिक कर, भर दे लाइफ़ नई,
क्षमता, आकार देते, चार्जर ब्रांड कई.
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होता जब विभवान्तर, दो बिंदु के बीच,
सम की कोशिश करें, ऊँच लच बने नीच, 
ऊँच लच बने नीच, तेज रहे सरपट चाल, 
गर आता कुछ बीच में, रूप धरे विकराल, 
स्पार्क कहें सभी उसे, चार्ज समान होता, 
अधिक विभव, पर, दूरी सम, स्पार्क बड़ा होता.
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छोटे छोटे सेल को, जोड़ बने बैटरी, 
ऊर्जा स्रोत बढ़ कर, हो जरूरत पूरी,
हो जरूरत पूरी, साथ साथ लगाएँ, 
श्रेणी में जोड़ कर, अधिक वोल्टेज पाएँ, 
चार्ज से फिर तैयार, अधिक बिजली लौटे, 
संगठन की शक्ति को, न आँको तुम छोटे.
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धारा की दिशा एक करे, बिन ऋण धन निशान,
आयाम बराबर रहे, अनुपातिक पहचान,
अनुपातिक पहचान, करे टेढ़े को सीधा,
एक दिशा में ढाले, कहे यह डायोड विधा,
प्रत्यावर्ती चक्र का, समय आधा या पूरा, 
पाॅवर सप्लाई नींव, डायोड की धारा.
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सदा स्रोत के सापेक्ष, गति में रहे संसार,
कुछ भी स्थायी नहीं, आपस का आधार,
आपस का आधार, स्थान, भार व चाल,
शून्य सब का संदर्भ है, सीमा, आयु व काल,
हाल पूरा जब मानो, संशय होता विदा,
मूल विमा की माप में, होता अंतर सदा.
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गणित आधुनिक में है, e का अति प्रभाव,
अनवरत यह श्रंखला, निश्चित इसका भाव, 
निश्चित इसका भाव, धनात्मक होती सदा,
गणना जटिल सरल करे, लाॅग का बेस एकदा,
चढ़ाओ x की घात पे, परिणाम रहे फलित,
इंटीग्रेट, डिफरेंशेट, दोनों की सम गणित.
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सहज गति, एकसार चाल, हर मानव की चाह, 
पसंद नहीं दखल कोई, निर्बाध रहे प्रवाह, 
निर्बाध रहे प्रवाह, व्यतिक्रम में हो संयोजन, 
मतांतर का आनंद लें, जिएँ भरपूर जीवन, 
साफ दरार भी दीखे, न मनाओ दुख महज, 
बिन क्रोध, तनाव, गर्व के, प्यार से रहो सहज. 
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हर मानव है ज्योतिपुंज, दोष भलाई साथ, 
नज़र पारखी चाहिए, सोच बढ़ाएँ हाथ,
सोच बढ़ाएँ हाथ, रखे दिल अनेक विचार,
गुरु के स्विच से, हो रहा ज्ञान सार संचार,
सार पा कर आलोकित, हो जीवन का शिखर,
धारा विद्युत बल्ब में, लेती सब तमस हर.
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सौर ऊर्जा है विकल्प, कम परंपरा मान, 
तेल, गैस, रसायन के, सीमित हैं संसाधन,
सीमित हैं संसाधन, नए स्रोत की मजबूरी, 
तकनीकी उपयोग, जीवन दायक जरूरी,
धूप से चार्ज हो सके, ख़र्च नहीं कुछ और,
सस्ता व अच्छा साधन, पाओ ऊर्जा सौर.
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दूर दूर के दृश्य दिखें, है तकनीक कमाल, 
एक एंटीना, बिजली से, मिल जाता सब हाल, 
मिल जाता सब हाल, खबर, फिल्म या खेल,
सभी चाव से देखते, अलग मत करें मेल, 
टी. वी. उसको बोलते, सूचित हों भरपूर, 
नए सेट में नेट लगे, जगत नहीं अब दूर.
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स्याही में लिख सब कथन, छोड़ते अमिट छाप, 
चित्र बनाएँ, हस्ताक्षर करें, रचना कर दें आप, 
रचना कर दें आप, बॉल पेन जता जाए, 
घूम घूम कर बॉल, बिना गतिरोध चलाएँ, 
न्यायालय में मान्यता, कर पूरी गवाही, 
चेक वसीयत में चले, बॉल पेन की स्याही.
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बिजली से चलता रहे, कोल्हू जैसा बैल, 
गंदे कपड़े साफ करे, दूर करे सब मैल,
दूर करे सब मैल, अच्छे से करे सफ़ाई, 
कम मेहनत, लागत में, खूब करे धुलाई, 
धो, रिंज़, स्पिन, सुखा कर, क्षमता में बनी पहली, 
वाशिंग मशीन बचत से, खर्च करे कम बिजली. 
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ट्यूबलाइट का प्रकाश, आँखों का आराम,
मिलती पूरी रोशनी, अधिक करोगे काम, 
अधिक करोगे काम, होवे न कोई तनाव, 
चोक, स्टार्टर से बढ़े, थोड़ा सा ही भाव, 
एल.ई.डी., नव खोज, रोशनी देती व्हाइट, 
कम खपत बिजली में, काम करे ट्यूबलाइट. 
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ठंडा रखने के लिए, याद सदा एक नाम, 
फ़्रिज़ बोलते सब उसे, बर्फ़ जमाना काम, 
बर्फ़ जमाना काम, सब्जी रखे हरी, ताजी, 
बार बार न खोलिए, सड़ जाती पकी भाजी, 
दाबी गैस रिलीज़ हो, एड्याबेटिक्स का फंडा, 
भिन्न भिन्न खानों में, रखता सब कुछ ठंडा. 
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भूने, सेके, गर्म करे, आए न कुछ प्रमाद, 
मिर्च मसाले के बिना, बढाए भोजन स्वाद,
बढ़ाए भोजन स्वाद, उबले आलू या अंडा, 
बिजली की हो बचत, माइक्रो वेव का फंडा, 
अपनाई नव तकनीक, बड़े ध्यान से बने, 
घी, तेल रहित खाद्य हो, मुर्गे, पापड़ भूने. 
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रसोई बने मदद से, हर गृहिणी की शान, 
स्वाद बढ़ा, पौष्टिक बना, खाने की है जान, 
खाने की है जान, उसे कहें सीटी मार, 
कम ऊर्जा में पका, सब गुण रखे बरकरार, 
धो, उबाल, गला कर, खाने में है भलाई, 
प्रेशर कुकर से बनती, प्यारी सी रसोई. 
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नमक डाल कर बन गया, भोजन बढ़िया स्वाद, 
पौष्टिकता भी बढ़ गई, तथ्य रहा निर्विवाद, 
तथ्य रहा निर्विवाद, उसमें हो आयोडीन, 
थॉयराॅयड का इलाज, कहते चतुर प्रवीन, 
कम रक्तचाप में मुफीद, याद रखो यह सबक, 
भली नहीं अति मात्रा, संतुलित खाओ नमक. 
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सतरंगी सपने देखें, इंद्रधनुष के संग, 
स्पेक्ट्रम में बिखर कर, बट जाते सात रंग, 
बट जाते सात रंग, दिखाते अलग औकात, 
सबकी छबि निखरे अलग, बिछती अलग बिसात, 
स्पेक्ट्रोमीटर अलग करे, सबकी चाल बेढंगी, 
श्वेत प्रकाश मिला जाए, सपने सारे सतरंगी. 
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शक्ति संगठन की गजब, जाने जगत जहान, 
समवेत सुर की वाणी, नारा बने महान, 
नारा बने महान, मांगें पूरी करवाए, 
जो मना करे सरकार, साहस जुटा न पाए, 
सस्वर गूँज अनुनाद की, जगाए मन में भक्ति, 
विपरीत कला में बंद, उसी कला में प्रचुर  शक्ति. 
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थोड़ी बिजली से बना, चमका तेज प्रकाश, 
धाक जम गई जगत में, आलोकित आकाश, 
आलोकित आकाश, कम वोल्ट पर सक्रिय पथ, 
एल.ई.डी. बल्ब कहलाते, ऊर्जा के बचत रथ, 
आविष्कार ने इनके, प्रगति धारा मोड़ी, 
सारे कार्य करके भी, लगे बिजली थोड़ी. 
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अंकों का गणित में, होता निश्चित मान,
न कुछ कम, अधिक लेश भी, हो जाता परमान, 
हो जाता परमान, अचल उन्हें सब कहते,
दृढ़ या हठी भी जान, साहस से लगे रहते, 
रत रहें अपनी धुन में, करें प्रयास निशंक, 
महिमा अपूर्व उनकी, कहते उनको अंक.
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मान बदले स्थान पर, हालत भाँप बयान,
स्वारथ में छोड़ें दल, वोट पर दे दें प्रान,
वोट पर दे दें प्रान, कहलाते दल बदलू,
रोके न कोई बात, सीधा हो अपना उल्लू, 
नेता प्रजाति बेशरम, न कोई बात, शान, 
वेरियेबल गुणधर्म, तरल तल और मान.
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गरिमा हर पदार्थ की, रखती अलग निशान,
अणु रचना, क्रम, दशा, बतलाती पहचान,
बतलाती पहचान, हर अणु भार की विनती,
छः व दस पर तेईस घात, एवोगेड्रो की गिनती, 
विकास विज्ञान का यहाँ, इस संख्या की महिमा, 
सिद्धान्त समझने की, अपनी अलग ही गरिमा. 
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अवगुण छोटा सा लगे, कमियों से भरपूर,
आखिर मनुज की फितरत, दोष ढूँढना जरूर,
दोष ढूँढना जरूर, खूबी चाहे हों हज़ार, 
काला तिल, गोरा मुँह, उस पर जान निसार, 
माइक्रोस्कोप से देख, तलाश का लेते प्रण, 
मजा ले ले खोज रहे, दूसरों के अवगुण.
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पूरी निष्ठा, शाँत मन, अर्जन करते ज्ञान,
संयम रख, काम कर, कहलाता विद्वान,
कहलाता विद्वान, धीमी आँच पर तपाए,  
देकर शिक्षा, अनुभव, कुंदन सब बन जाएँ,
समतापीय विस्तारण, करे अज्ञान से दूरी,
शिक्षा आधी ही रहे, अभ्यास बिना न पूरी.
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छोटे से कृत्य का करें, बढ़ा चढ़ा कर गान,
चापलूसी बनाती नहीं, कोई जन महान,
कोई जन महान, ढिंढोरा जम कर पीटें,
एम्पलीफायर सा लगे, डींग में तलवे चाटें,
हृदय नहीं निर्मल, मन के इरादे खोटे, 
सावधान ऐसों से, नाम बड़े व दर्शन छोटे. 
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गतिवान मनुष्य की, होती बड़ी पहचान, 
कभी इधर, कभी उधर, लक्ष्य रखे महान, 
लक्ष्य रखे महान, पूरा करने के सपने देखे, 
खोजे उपाय, करे श्रम, स्वाद जीत का चखे. 
गतिज ऊर्जा से भरपूर, रखो आत्म सम्मान, 
कुछ न कुछ हर समय करो, बने रहो गतिवान.
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ऊँचाई चरित्र की, बतलाए मानव आचार, 
परिचय व्यक्तित्व का, दे संस्कार आधार, 
दे संस्कार आधार, शून्य जन्म पर पावै, 
शिक्षा, परिवार, अभ्यास, सब योग बनावै,
ईमानदारी, मेहनत, सफल करे सच्चाई,
आपका पोटैंशियल, स्तर आपकी ऊँचाई. 
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स्पष्ट दिखाई न पड़े, पढ़ने में हो तकलीफ़, 
नज़र की जाँच कराइए, मिल जाती तारीफ़, 
मिल जाती तारीफ, हल मिलता, जब भी अड़े, 
मैग्नीफ़ायर से, छोटे अक्षर दिखें बड़े,
दृष्टि दोष हो दूर, मिट जाते सारे कष्ट, 
बड़े काम की चीज़ है, सारा दृश्य हो स्पष्ट.
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छाया सब के करम की, रहती उनके साथ,
होनी होकर ही रहे, लिखा विधाता माथ,
लिखा विधाता माथ, फल दिखे करम के बाद,
पृष्ठ छाया आगे, पीछे हो जब गुरू नाद, 
बदले छाया की दिशा, गुरू ज्ञान की माया, 
जोत ज्ञान की चुनो, देख कर्मों की छाया. 
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केन्द्र में परमाणु के, करो बाह्य प्रहार, 
परिणाम में निकल आय, दिव्य ऊर्जा भंडार, 
दिव्य ऊर्जा भंडार, सार्थक उसे बनाओ, 
शाँति हेतु प्रयोग कर, जीवन में खुशी लाओ, 
रासायनिक क्रिया से, प्रसन्न हो जाए इंद्र, 
दूर रख विध्वंस को, सुख समृद्धि का केंद्र.
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हर चीज़ के बनने में, उसके अणु हैं खास, 
अजब बंधन उन कणों में, रखते उनको पास, 
रखते उनको पास, निहित ऊर्जा न्यारी, 
परमाणु स्रोत करते, ढेरों उपयोग भारी, 
मानव बुद्धि रिसर्च से, झलके खुशी बाहर, 
विविध फिशन, फ़्यूज़ से, सुखी हो मानव हर. 
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धीमी गति से चल रहा, अपेक्षाओं का संसार, 
सारे जन कोशिश करें, कभी अकेले, कभी हजार, 
कभी अकेले, कभी हजार, अक्सर वही बात दोहराते, 
पुनः प्रयास के बाद, घूम फिर कर वापस वहीं आ जाते, 
सरल आवर्त्त गति इसे कहते, रहती इर्द गिर्द घूमी, 
लक्ष्य केंद्रित कर, तुम करते रहो कोशिश धीमी. 
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ऊर्जा लागे काम में, चले दिमाग या शरीर, 
चाहे निहारते रहो, केवल अपनी तस्वीर, 
केवल अपनी तस्वीर, समय से करना पोषण, 
एक तरह की ऊर्जा का, होता दूजे में रूपांतरण, 
समय से खाना, पीना, सोना, रखो न कोई कर्जा, 
संयमित होकर करो संरक्षा, खूब बचाओ ऊर्जा. 
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दूर की बात सुन सकें, मन को रख कर मौन, 
तार, बेतार के संपर्क से, पहचान पाएँ है कौन? 
पहचान पाए हैं कौन, दिल की धड़कन बढ़ जाती, 
कही सुनी कड़वी बात, प्यार, संवाद से सुधर जाती, 
सरल हृदय की भाव भक्ति, लक्ष्य मिलाए ज़रूर, 
श्रध्दा, दया, धर्म से पाइए, प्रभु नहीं करेंगे दूर. 
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गुणक, गुणित की गणित से, आ जाती जान, 
दशमलव पद्धति में उन्हें, याद करना आसान, 
याद करना आसान, गुणित इकाई के टोटे, डेसी, सेंटी, मिली, माइक्रो, नैनो, पीको होते छोटे, 
कुछ माप बड़े होते, इकाई से होने पर लगते अधिक, 
डेका, हेक्टा, किलो, मेगा, गिगा, टैरा कहलाते गुणक. 
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जीवन गति में सरल, अक्सर आ जाते व्यवधान, 
हर्ष विजय भाव का हो, जब मिल जाए समाधान, 
जब मिल जाए समाधान, समतल पर ज्यों घर्षण, 
सरपट गति को रोकना, बताता ब्रेक का लक्षण, 
अलग धरातल, प्रभाव से, है कोणीय फिसलन, 
विविधता एकरसता में लाए, यही तो है जीवन. 
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माया मोह के संसार में, भ्रमित रहे सब घूम, 
इधर उधर की आपा धापी में, मगन डोलते झूम, 
मगन डोलते झूम, कबहुँ कगार, कबहुँ अधर में भटकें, 
शून्य गति से तीव्र बन, फिर शून्य पर लटकें, 
एक ईश्वर को केन्द्र बना, भक्ति में खुद समाया, 
वरना भ्रमित जग में न पाएगा, न खुदा, न माया, 
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गुरुत्व शक्ति से पता चले, हल्के भारी का आभास, 
अलग ग्रहों पर लगे, अलग भार का एहसास, 
अलग भार का एहसास, ज्यों अलग गुरू का ज्ञान, 
स्तर शिक्षा का बढ़ाए, आपके गुरू की पहचान, 
प्रेम से बोलो सबसे, अनुभव कर पाओ अपनत्व, 
आपका व्यवहार जतलाए, संस्कार का गुरुत्व. 
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बच्चा पाया मुक्त मन, संस्कार देते बांध, 
शिक्षा के प्रभाव से, लग जाते प्रतिबंध, 
लग जाते प्रतिबंध, गुम हो जाती आज़ादी, 
धर्म, भाषा, जाति बंधन, कर देते बर्बादी, 
ममता, तुलना, कर्तव्य, बनावें यद्यपि मानव सच्चा, 
सबसे अच्छा जीवन पाओ, फिर से बन जाओ बच्चा. 
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ध्वनि का तीखापन, बेल में आँका जाय, 
दसवाँ उसका भाग, डेसिबल कहलाय, 
डेसिबल कहलाय, ध्वनि प्रदूषण को नापे, 
संरक्षित जीवन की, सहज संभावना मापे, 
भोंपू, टी.वी., क्रंदन से, गूँजे अंबर अवनि, 
शाँतिपूर्ण जीओ जीवन, कम करो ध्वनि. 
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पड़े सरल तरल में, जब आ जाए व्यवधान, 
बाहरी तत्व नष्ट करें, मौलिकता के सब प्रमान, 
मौलिकता के सब प्रमान, ध्वनि, श्वास के आयाम, 
प्रदूषण से हो रहा, सब का जीवन हराम, अवांछित तत्वों को छाँट कर, रहो शराफत से अड़े, 
मजबूरी में फिल्टर संग, ढंग का जीवन जीना पड़े. 
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कही सुनी बात जब, ऊपर सिर के जाय, 
सीधे सादे ढंग से, बात न समझ में आय, 
बात न समझ में आय, फारसी जैसी लगे बेगानी, 
महत्व अपने कथन का, बताना हो जाय बेमानी, 
अल्ट्रासॉनिक्स से समानता, करना होगा सही, 
रेंज से बाहर ऐसी बात, जो हित में जाय कही. 
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बिजली से चुंबक बने, ज्यों कंचन से कुंदन, 
धारा प्रवाह से शुद्धि हो, गुरु से बने अकिंचन, 
गुरु से बने अकिंचन, महिमा उसकी न्यारी, 
लेकर सीख सदा उससे, जीवन जाए बलिहारी, 
प्रयोग नाना विधि करे, अक्ल जब चल निकली, 
घंटी भी बज जाय, जब सर्किट में हो बिजली. 
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पानी खूब खौल कर जब, बदल जाए है भाप, 
सारी गर्मी जमा कर, अधिक देता है ताप, 
अधिक देता है ताप, खाल पर पड़ते फफोले, 
जलन भयंकर होत है, जब छाले मुँह खोलें, 
उपयोग न इस ऊर्जा का, कर पाएँ, होगी नादानी, 
सोच समझ कर खर्च करें, सबसे कीमती पानी. 
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पानी मानक, तरल है, बिना गंध, रंग का घोल, 
नैसर्गिक इस वरदान का, नहीं है, कोई मोल, 
नहीं है, कोई मोल, दो हाइड्रोजन का एक अॉक्सीजन से मेल, 
अलग अलग विस्फोट करें, मिल कर, कर देते फेल, 
अपने जीवन में सबसे उपयोगी, और नहीं कोई सानी, 
अमृत सम इस अद्भुत रस को, सारे कहते जल या पानी. 
------------

भारी तरल केवल सचल, कहते चमकीली धात, 
काँच नली में उठी दिखे, नहिं उसको चिपकात, 
नहिं उसको चिपकात, थर्मामीटर में लागे प्यारा, 
खतरनाक भाप उस की, कहते उस को पारा, 
औषधि में लाभप्रद, रजत से भी हितकारी,
आवर्त्त सारिणी में बाद में आए, तरल धातु सब में भारी. 
------------

कही सुनी बात का, असर न पड़ता कोय, 
समझ हितकारी बात की, हिय के बाहर होय, 
हिय के बाहर होय, भक्ति, ज्ञान का नहीं असर, 
दुष्ट जनों की संगत हर पल, हो जाए मुखर, 
इस कान सुने, उस कान निकाले, रखे कुछ नहीं, 
कुचालक की भाँति, कुछ फर्क नहीं, बात जो कही. 
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आसानी से समझ सकें, पते, कायदे की बात, 
तर्क शक्ति से मदद करे, सच्चे मानुस की जात, 
सच्चे मानुस की जात, गैरन को भी समझाय, 
वेदों का पठन, पाठन, सत्गुरू धर्म कहलाय, 
सुचालक सा प्रवाह करें, न कोई हो नादानी, 
प्रतिरोध बिना बहे, ज्ञान सरिता की आसानी. 
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राजनीति के समीकरण, बदलते दिन रात, 
अपना स्वार्थ साधते, जहाँ दिखे तवा परात, 
जहाँ दिखे तवा परात, तरल पदार्थ की नाईं, 
आश्रय क्षितिज को ढूँढते, मेरे मतलबी भाई, 
साँठ गाँठ का दवाब, भुला देती सिद्धान्त, नीति, 
ईमान, सच्चाई का घोटे गला, आज की राजनीति. 
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दुर्व्यसन हावी रहें, जहाँ ढील मिल जाय,
उन पर केंद्रित ध्यान रहे, संयम दूभर हो जाय,
संयम दूभर हो जाय, नियमित अंतराल पर लगे हुड़क,
इन लतों को छुड़ाने हेतु, चाहिए गुरू कड़क,
Centripetal Force की नाईं, उनमें रमा रहे मन,
भलाई की बात यही, जल्दी छोड़ो दुर्व्यसन.
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प्रतिमान प्रभु का हर जन, बना गुणों की खान, 
अंतर क्षमता की पहचान, इतनी नहीं आसान, 
इतनी नहीं आसान, जग लेता पूरा इम्तिहान, 
उचित परिवेश पा कर, मिल जाती पहचान, 
Latent Heat की भाँति, एक ताप का मान, 
आवश्यक उष्मा से बदले, स्थिति के प्रतिमान. 
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ज़ीरो के आगे धन, पीछे ऋण, महिमा शून्य महान,
परिचय, तुलना हर संख्या की, करवाता एक निशान, 
करवाता एक निशान, कभी यह दिशा भी बताता, 
अंतर इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन में, आवेश का यह  दर्शाता, 
Absolute, Distance में, मान बनाता हीरो, 
जन्म, मरण के समय, सारा ज्ञान कर्म है ज़ीरो. 
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प्रशंसा व्यवस्थित काम की, करें सकल नर नार, 
नियमित दिनचर्या बने, जीवन का आधार, 
जीवन का आधार, आज करो फिर करो कल, 
बड़े काम को बाद में, पहले निपटाओ सरल, 
भारी गतिविधियाँ कर दें, गड़बड़, विघटन सहसा, 
आवर्त्त सारिणी के क्रम ज्यों, मिले सर्वत्र प्रशंसा. 
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अनंत ईश्वर में विलय हेतु, खुलवाएँ मोक्ष के द्वार, 
भक्ति, धर्म, संस्कार, विचार, जीवन के आधार, 
जीवन के आधार, सत्कार्य की ही रहे दरकार, 
नाना जन्मों में अलग विधि से, प्रयास करें हर बार, 
Infinity का धर्म अद्भुत, कहते सारे संत, 
घटा, जोड़, गुणा, भाग, कुछ भी करो, रहता शेष अनंत. 
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जीवन के हर क्षेत्र में, फल कर्म के साथ, 
फल ईश्वर की कृपा से, कर्म आपके हाथ, 
कर्म आपके हाथ, बनाए रखे सदा एक अनुपात, 
कर्म Work Done  है, फल Heat जनित बन जात, 
Joule's Law प्रमाणित है, करें सम्यक मंथन, 
सादगी से कर्म करें, जिएँ सफल जीवन.
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शराफत की सूचना, दें शिक्षा, संस्कृति, परिवार, 
पालन पोषण की सफलता, देता समाज व्यवहार, 
देता समाज व्यवहार, सिखाता सभ्यता, मर्यादा, 
कैलोरी मीटर की भाँति मापता, न कम न ज़्यादा 
उष्मा की अति तीव्रता, मचाए भीषण आफत, 
आपकी परिपक्वता बताए, आपकी शराफ़त. 
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एक रंग में सब रंग जाएं, माने नहीं विवेक, 
तर्क शक्ति पराजित करे, भावों का अतिरेक, 
भावों का अतिरेक, पृथक हर एक की विचारधारा, 
फिर भी एकाकार करे, संस्कृति, त्योहार हमारा, 
आवृत्ति अलग हर रंग की, छटा बिखेरें अनेक, 
स्पेक्ट्रम से सज पाएँ, सातों घूमें, श्वेत बनाएँ एक. 
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गरम चीज़ गरम ही रहे, शीत रह जाती शीत, 
अपनी तासीर न छोड़ते, चाहे कोई भी हो मीत, 
चाहे कोई भी हो मीत, भले से मिले भले, बुरे से बुरे, 
थर्मस फ़्लास्क की नाईं रखे सबै, इस विश्वास से उबरें, 
अल्पकाल तक ही चलता है, मन का यह भरम, 
सब की तासीर बताए, क्या है ठंडा, और क्या गरम? 
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वर्तमान आपको दिखलाए, अतीत का इतिहास, 
पाप कर्म से वेदना, शुभ कार्य दे मृदु हास, 
शुभ कार्य दे मृदु हास , कर्म बने चरित्र का दर्पण, 
सरल हृदय से करो सदा, प्रभु का मनः स्मरण, 
अहंकार रहित रह, सब का कर लो सम्मान, 
सुधरेगा भविष्य निश्चित, एन्जॉय करो वर्तमान. 
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भले बुरे का विश्लेषण करें, मन में उठे विचार, 
झलके व्यक्तित्व आपका, भले से हो निखार, 
भले से हो निखार, बुरे से हो जाए खात्मा, 
बुरे में भला खोज सके, पा जाए परमात्मा, 
श्वेत प्रकाश को प्रिज़्म, जैसे स्पेक्ट्रम में बदले, 
सत्संगत से बन जाएँ, बुरे लोग भी भले.
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सत्संगत से मुड़ जात है, मानव का स्वभाव, 
वाल्मीकि तक सुधर गए, ऋषियों के पड़ पाँव, 
ऋषियों के पड़ पाँव, सुधार की दिशा विचारी, 
आत्म चिंतन की मात्रा, कितनी हल्की या भारी, 
श्वेत प्रकाश का Dispersion, मोड़े दिशा की हालत,  
कैसे, कब, कितना मोड़ें, बताए प्रिज़्म की सत्संगत? 
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सब कर्मों का लेखा रखें, श्री चित्रगुप्त महाराज,
सारी धारा उससे बहे, किसी परिपथ का काज, 
किसी परिपथ का काज, फ़्यूज़ करे वो काम, 
सब हरकतें लेखते, प्रभु दूत आपके नाम, 
किसी गैज़ेट के चलन में, बाधा हो जब जब,
फ़्यूज़ जाँचिए कर्म का, काम छोड़ कर सब.
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सत्संग से होत है, मानव मन में सुधार, 
शिक्षक अपने प्रवचन से, भरे भरसक विचार. 
भरे भरसक विचार, ढाले महान चरित्र, 
दीखे परिवर्तन आचार में, व्यक्ति बने विचित्र, 
Induction हो जात है, मिले सही प्रसंग, 
सदा Phase में होंएगे, पाएं जब सत्संग.   
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महिमा सत्गुरू साधु की, श्रद्धा मन में लाय,
दुर्गुण को दूर रख, सद्गुण से पार लगाय, 
सद्गुण से पार लगाय, देता ऐसा ज्ञान, 
भव सागर से तार जब, करे सकल कल्यान, 
कैपेसिटॅर की भाँति, चार्ज करे सबकी गरिमा,
ऐ.सी. पार, डी.सी. ब्लाॅक, ऐसी उसकी महिमा.
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इंसान के नाम से, मन में आते अद्भुत भाव,
शिक्षा, विनय, संस्कार से, पड़ता गजब प्रभाव,
पड़ता गजब प्रभाव, समाज के गुण जो आए,
बुरी लतों को दूर कर, गुरू से अच्छी पाए,
ट्राँसफाॅर्मर की नाईं, गुरू पाता सम्मान, 
अच्छे संस्कारों से जो, बना देता इंसान. 
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निश्चित मार्ग पर चल रही, ग्रहों की घूमी चाल,
इसमें बाधा जब पड़े, आ जाता भूचाल,
आ जाता भूचाल, दिन के बाद आती रात,
बार बार बतानी पड़ती, सीधी सच्ची बात,
सूर्य से दूरी की त्रिज्या, अद्भुत ऊर्जा से सिंचित,
रेखीय वेग उत्पाद है, कोणीय वेग जब है निश्चित.
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एक लीक पर चलते हुए, करो परंपरा निर्वाह, 
पूर्वज हमारे बता गए, सुखी जीवन की राह,
सुखी जीवन की राह, जैसे एक रेखीय चाल,
पहले से ही मिल सके, अगले क्षण का हाल,
निर्लिप्त भाव से भोग लें, पाएँ आनंद अनेक,
कैसा भी जी लो जीवन, सबका मंतव्य एक.
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चंचल चित, चपल नित, पल पल करत विचार, 
हर पल सोचत रहत, जीवन के दिन चार,
जीवन के दिन चार, दिखें भले, बुरे होंय महसूस,
जवां दिल क्रिस्टल vibrate करे, शान्त करे मायूस,
हर भाव की आवृत्ति जैसी, निकले वैसा फल,
हर्ष, शोक के भाव, व्यक्त करे मन चंचल.
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संतुलन राग द्वेष का, है अनिवार्य सुजान,
भले बुरे का भाव ज्यों, हर जन की पहचान, 
हर जन की पहचान, करें निवास एक साथ,
धीमे विचार पकड़ें वेग, नहिं नियंत्रण हाथ,
Critical Velocity की नाईं, करते रहो मंथन,
उग्र भाव व्यग्र हों, उससे पहले बनाओ संतुलन. 
---------

साफ, सरल हृदय रख, पाओ जीवन की शान,
कड़वे वचन बोल कर, मत दर्शाओ अभिमान,
मत दर्शाओ अभिमान, अपनाओ धर्म की धुरी, 
छल फरेब की गर्द की, बनाओ अपने से दूरी, 
बढ़ा अपना जड़त्व आघूर्ण, कर दो सब को माफ,
शांत चित्त, तनाव रहित हो, मन को कर लो साफ. 
-------------

परंपरा सनातन चल रही, धरम करम की लीक,
शिक्षा, संस्कार बता रहे, गौरव गाथा प्रतीक,
गौरव गाथा प्रतीक, ढर्रे पर ढलता जीवन,
धीमी गति से द्रव बहे, ज्यों सरल रेखीय मोशन, 
बाह्य दाब, तनाव से, विचलित रुटीन खरा,
सब कुछ भला लगे, एकरस निभे परंपरा.
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तृष्णा है मृग मरीचिका, इसके सभी शिकार,
लोभ, मोह, छल, कपट, अपनाय करें व्यापार, 
अपनाय करें व्यापार, जगत की रीति निराली,
कितने भी भंडार भरे हों, पर लगते सारे खाली,
धर्म अर्जन करो, नेक कर्म से, कहते श्री कृष्णा,
गीता का संदेश यही, जीवन में सुख तज कर तृष्णा.
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जड़त्व है, आलस्य की, सबसे बड़ी पहचान,
इसे तज कर बनाइए, जीवन को गतिवान,
जीवन को गतिवान, जो उसको कर दे पूर्ण, 
mass का वितरण निर्धारित करे, जड़त्व आघूर्ण, 
जितना गुड़, उतना मीठा, यह जग का तत्व,
आनंद जीवन का लीजिए, करके दूर जड़त्व.
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धरा घूमते आ गई, सूर्य चाँद के बीच,
खगोलीय गति को बता, कर्म हमारे नीच,
कर्म हमारे नीच, प्रायश्चित का पर्याय,
पाखंडी भ्रम करें, दान, धर्म है उपाय, 
चक्कर में इनके लोग, वर्जनाओं में जीते,
वैज्ञानिक तर्क कहें, कक्षा में ग्रह घूमते.
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सब कर्मों का लेखा रखें, श्री चित्रगुप्त महाराज,
सारी धारा उससे बहे, किसी परिपथ का काज, 
किसी परिपथ का काज, फ़्यूज़ करे वो काम, 
सब हरकतें लेखते, प्रभु दूत आपके नाम, 
किसी गैज़ेट के चलन में, बाधा हो जब जब,
फ़्यूज़ जाँचिए कर्म का, काम छोड़ कर सब.            ---------------

डी.सी. परिपथ की तीव्रता, मापे धारा प्रवाह,
गहन ज्ञान की परछाईं, व्यक्तित्व की गवाह,
व्यक्तित्व की गवाह, जब पाओ सत्संगत,
सीरीज़ में लगा कर देखो, विक्षेप की हरकत,
श्रद्धा भाव से लगन लगाओ, भक्ति रखो ऐसी,
आनंद मिले, उत्साह जगे, गुरू बहाए डी.सी.

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प्रेम, क्रोध के भाव हैं, एक दूजे के विपरीत,
स्तर एक का अहं मुक्त, दूजे से मिट्टी पलीत,
दूजे से मिट्टी पलीत, बढ़ाए अंतस का ताप,
वोल्ट मीटर के पाठ सा, प्रेम पर क्रोध की माप,
अधिक आन्तरिक प्रतिरोध है, अनिवार्य जीवन में संयम,
आदर्श उपकरण अपनाए, तो सफलता सब से प्रेम.
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शैंकी के आधार पर, विश्रुत का फंक्शन,
डैरिवेटिव निर्धारित करे, इनका परिवर्तन, 
इनका परिवर्तन, दर बताए dविशु/ dशैंकी,
नन्हा बच्चा रिधर्व, कर दे सीधी अकल इनकी,
दादा, दादी, नाना, नानी, लें बधाई सबकी,
खुश रहें, लें आशीष सदा, विश्रुत  और शैंकी. 
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धारा की तीव्रता बताए, भक्ति, ज्ञान का मान,
जीवन में उन्नति दिखाए, दे शीर्ष स्थान,
दे शीर्ष स्थान, सुधारे अपना जीवन,
ईर्ष्या, द्वेष मिटा कर, प्रेम का करो सिंचन,
सीरीज़ में जोड़ कर, बनाओ सबको प्यारा,
सबसे गले मिल जब, बहाओ प्यार की धारा.
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विलयन में बिजली छिपी, ऑयन विचरन कराय, 
गति से जिनके विलयन में, आवेश प्रवाह हो जाय,
आवेश प्रवाह हो जाय, धन, ऋण आवेश प्रकार,
जीवन सरिता में ज्यों, सद्गुण, दुर्गुण के आकार,
धारा की दिशा बताए, जैसे सजाओ, देखो स्वपन,
दो इलेक्ट्रोड धारा बहाएँ, जब बीच में हो विलयन.
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धारा बने प्रवाह से, भक्ति से होय कल्यान,
प्रोटान बहे या इलेक्ट्रॉन, आवेश का परिमान,
आवेश का परिमान, धारा की तीव्रता बताए,
ज्ञान की थाह, जीवन अनुभव सिखलाए,
कर आलोकित कर्तव्य पथ, सबने भविष्य सुधारा,  
मज़ा जीने का आ जाए, ज्ञान की बहती धारा.
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चलती चीज़ चलती रहे, कहते न्यूटन श्रीमान,
रुकी हुई भी रुकी रहे, मिले न बल प्रमान, 
मिले न बल प्रमान, बाहरी बल झटका दे जाए,
ज्ञान, भक्ति के ब्रेक थ्रू से, जीवन बदल जाए,
गुरू शिक्षा के भाव में, भवसागर से सद्गति मिलती,
संस्कार की परम्परा, पीढ़ी दर पीढ़ी जाए चलती.
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ऊपर फेंकी हर चीज़, नीचे वापस आ जाय,
न्यूटन ने बताया सरल, गर सीधी फेंकी जाय,
गर सीधी फेंकी जाय, टेढ़ी हो तो जाए आगे,
प्रक्षेपण का सिद्धांत यही, मिसाइल कोई
दागे,
क्षितिज से ऊर्ध्व के कोण पर, दूरी होती निर्भर, 
रेंज शून्य हो जाए, जब फेंको सीधे ऊपर.
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संसार में हर कर्म का, निश्चित एक स्थान,
अनुभव, काल के साथ, होता निर्धारित प्रमान,
होता निर्धारित प्रमान, जैसे को तैसा मिले सम्मान, 
अच्छे बुरे का ज्ञान बने, ऊर्ध्व, क्षैतिज का मान,
रो, काॅलम से परिभाषित, होता मैट्रिसेज़ आकार,
ज्ञान, भक्ति, कर्म से, सुधारों पर लोक संसार. 
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गिरता सेब देख कर, न्यूटन हुए हैरान, 
नीचे ही क्यों गिरा, इसके पाप महान,
इसके पाप महान, फल तक का यह हाल,
मानव जीवन का क्या कहें, इसका कौन हवाल,
साँसारिक माया मोह से, बाँधता है क्यों रिश्ता, 
अधोगति पाएगा, जब मानव नीचे गिरता.
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छोटी विनती डालती, अजब गजब प्रभाव,
करी जाय सच्चाई से, प्रभु करते बचाव,
प्रभु करते बचाव, थोड़े को समझे बड़ा,
Induction Coil की नाईं, अधिक गेन चढ़ा,
Turn Ratio अनुपात रचे, लघु विनती अति मोटी, 
सच्चे दिल की प्रार्थना होती स्वीकार, चाहे कितनी छोटी.
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प्यार की मीठी मार से, जीवित रहते एहसास, 
सिंचन करें संभाल कर, पनपाएँ विश्वास, 
पनपाएँ विश्वास, अनुभव होता हर पल, हर क्षण,
जैसे विद्युत प्रवाह से, बनता चुंबकीय आकर्षण, 
राग, द्वेष तज अपनाइए, सज्जनता का आधार, 
स्वतः ऑरा बन जाएगा, जब बहे धार से प्यार.
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उतार चढ़ाव पा कर, लड़ना जीवन संग्राम, 
अनवरत संघर्ष करना, कर्मठ का काम,
कर्मठ का काम, सुलझाए रोज़ नई पहेली,
कर दे मुश्किल हल, कोई समस्या अलबेली,
समझौता मजबूरी नहीं, जीवन का कोई पड़ाव,
प्रत्यास्थता सौंदर्य गुण है, मापे उतार चढ़ाव. 
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बिजली बहे, गरमी लगे, प्रकृति गुण महान,
उल्टा भी इसका होत है, जाने सारा जहान,
जाने सारा जहान, घर में चलता हीटर,
पैसे भी देने पड़ें, जब भी बढ़ता मीटर,
चोरी की आदत देख, सच्चाई की नीयत बदली,
हानि, लाभ न सूझे, जब मुफ़्त में मिले बिजली. 
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खुशी सीमित आयतन, तनाव मूल दवाब,
काल गति के कारणे, समय अच्छा या खराब,
समय अच्छा या खराब, न हो गर हालात का असर,
ज्ञान, भक्ति, फल की चिंता बिना, लगे रहो बराबर,
रखो संतुलित व्यवहार, बिन विचार काल राशी,
बाॅयल्स लाॅ भी कहे यही, बढ़ा तनाव तो घटे खुशी.
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एक का महत्व संसार में, बतलाते विद्वान, 
एकता की सीख दे रहा, स्थिरता का अनुमान, 
स्थिरता का अनुमान, तुलना का आधार, 
एक ईश्वर की परिभाषा, अल्लाह हो या ओंकार,
भार, गति, ऊष्मा, प्रत्यास्थता, प्रवाह से गुण अनेक,
भौतिक गुणों की मापना, सबका मानक एक.
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रोशनी से बिजली बने, करे अनेकों काम,
धारा अविरल बहे, ऊर्जा स्रोत को प्रणाम, 
ऊर्जा स्रोत को प्रणाम, तकनीक का कर प्रयोग,
जीवन में विज्ञान का, अविस्मरणीय संयोग,
सद्गुरु, संगत साधु की, महकाए ज़िंदगी अपनी,
कर्तव्य पथ आलोकित करे, सौर ऊर्जा की रोशनी.
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ज्ञान स्रोत, प्रचंड ज्योति, हर मानव का स्वभाव, 
निर्झर नदी निर्माण करे, मानसिकता का स्राव, 
मानसिकता का स्राव, जब आ जाए अकल,
अर्धजीवन ढले तब तक, बने रेडियोधर्मी सकल,
प्रभु प्रेरणा दें हमें, ऐसा अनवरत वरदान,
जो कुछ भी अर्जन किया, बाँटते रहें वह ज्ञान. 
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क्रिया रासायनिक हो रहीं, जब जब पड़े प्रकाश,
बिना बाह्य विलयन के, ऊर्जा दे आकाश, 
ऊर्जा दे आकाश, तीव्रता, अंतराल बताए,
उसकी मात्रा का आधार, वनस्पतियों पर छाए,
फोटो सिन्थेसिस ने, पौधों से बिजली को बनाया,
प्रकृति का विलक्षण उपहार, यह रासायनिक क्रिया.
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भक्ति, कर्म का रहा, सीधा, सरल अनुपात,
ज्यों ज्यों भक्ति बढ़े, कर्म स्वयं बढ़ जात,
कर्म स्वयं बढ़ जात, भक्ति से निष्ठा जागे,
*Ohm's Law* मानिंद, धारा, विभव से आगे,
इनके गुणनफल से, आ जाती दैवी शक्ति, 
*ईगो* प्रतिरोध है, करे विभाजित भक्ति.
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शादी से मिल गए, दो परिवारों के संस्कार,
नव दम्पति अपना रहे, इक दूजे के विचार, 
इक दूजे के विचार, संस्कारों का संगम,
फ़्यूज़न हो एकाकार हुआ, दोनों परिवारों का समागम,
बढ़ गया परिचय, आकार, साथ में बढ़े आबादी,
वर वधू तज स्वार्थ, सफल बनाएँ अपनी शादी. 
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खुशियाँ सीमित आयतन, तनाव मूल दवाब,
काल गति के कारणे, समय अच्छा खराब,
समय अच्छा खराब, न हो हालात का असर,
ज्ञान, भक्ति के साथ, चलते चलो बराबर,
रखो एक व्यवहार, बिन सोच काल राशियाँ,
कहता बाॅयल्स लाॅ, बढ़ा तनाव कम खुशियाँ.
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डर डर से डर कर डर रहा, डर गया डर से डर कर भाग,
जो डर से डर कर डर गया, फूटे उसके भाग,
फूटे उसके भाग, डर से डरना, डर का प्रचार,
Scattering ज्यों, न्यूट्राॅन की न्यूक्लियस पर बौछार,
आत्म विश्वास जगाए रखो, न डरो, बनो निडर,
सकल मनोरथ हों पूर्ण, कब तक मानोगे डर.  
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जीवन में हर एक के, आते उतार चढ़ाव, 
कभी खुशी, कभी ग़म, डालें अपना प्रभाव, 
डालें अपना प्रभाव, घटते बढ़ते बारी बारी,
Saw Tooth Wave की नाईं, काल की चली आरी,
अंतर केवल अंतराल का, कष्ट या सुख का यापन, 
मन की सोच समझाए, जिससे महके कोई जीवन.
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प्रार्थना पहुँचे ईश तक, इत माँगे, तित पाय,
सरल हृदय की बीनती, बिन बोले सुन जाय,
बिन बोले सुन जाय, रखो द्वेष, छल को दूर,
विश्वास ऊपर वाले पर, सुने बात ज़रूर,
सुपर कंडक्टर की तरह, अविलंब सुनता याचना,
निष्कपट भाव से यार, करते रहो प्रार्थना.
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एक का महत्व संसार में, बतलाते विद्वान,
एकता की सीख दे रहा, स्थिरता का अनुमान,
स्थिरता का अनुमान, तुलना का आधार,
एक ईश्वर की परिभाषा, अल्लाह हो या ओंकार,
भार, गति, ऊष्मा, प्रत्यास्थता, प्रवाह से गुण अनेक,
भौतिक गुणों की मापना, सबका मानक एक.         ---------------

गुरूकुल प्राचीन संस्कृति के, कान्वेंट से नई पहचान,
एक प्राकृतिक अनुशासन में, दूजे का कृत्रिम मान,
दूजे का कृत्रिम मान, स्रोत, आकार का अंतर,
ज्यों जूना रेडियो बड़ा, व आज का लघु ट्राँजिस्टर,
तकनीक, खर्च, ऊर्जा, अलग है विधि विकल,
कलियुग में न दुर्लभ रहे, कान्वेंट के यह गुरूकुल.    ---------------

छवि अपने हर कर्म की, अंकित होती जाय,
चित्रगुप्त महाराज को, सब कुछ पड़े दिखाय,
सब कुछ पड़े दिखाय, सी.सी.टी.वी. की नाईं,
सब की करनी रेकाॅर्ड कर, प्रस्तुत करते साँईं,
फल अपने कर्म का भुगत रहे, चाँद हो या रवि,
अच्छे करनी से निखारो, अपनी अपनी छवि.          ---------------

सत्संगत गुरू, साधु की, देती जीवन बनाय,
उपदेश, ज्ञान की झाड़ से, ऊर्जा नव आ जाय,
ऊर्जा नव आ जाए, धूल अज्ञान की भगाय,
क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार को, न कोई स्थान दिलाय,
Electrostatic चार्ज ज्यों, बने ज्ञान पर्वत,
अधिकतम घनत्व का स्रोत, दर्शाए सत्संगत.            ----------

भक्ति, कर्म का रहा, सीधा, सरल अनुपात,
ज्यों ज्यों भक्ति बढ़े, कर्म स्वयं बढ़ जात,
कर्म स्वयं बढ़ जात, भक्ति से निष्ठा जागे,
*Ohm's Law* मानिंद, धारा, विभव से आगे,
इनके गुणनफल से, आ जाती दैवी शक्ति,
*ईगो* प्रतिरोध है, करे विभाजित भक्ति.                -----------

क्षमता मानव स्मृति की, घटनाओं के भंडार,
ग्रहण सूचनाएँ कर, कुछ भेजे आर पार,
कुछ भेजे आर पार, अवाँछित को लेवे रोक,
कैपेसिटर मानिंद, ए.सी. जाए, डी.सी. होवे चोक,
ए.सी. की आवृत्ति बनी रहे, कहें वो चुगली करता,
अलग अलग होती, हर मानव की धारण क्षमता.      -------------

धरा गगन प्रकृति में, इक दूजे से विपरीत,
मानव माध्यम बन, झाँके अपना अतीत,
झाँके अपना अतीत, योग का करे प्रयास,
दूर अनंत में मिल सकें, संभव क्षितिज है पास,
सकारात्मक ऊर्जा का, करमों से नाता गहरा,
ठान लें गर मन में, तो क्या गगन, क्या धरा ?
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आत्म मंथन अनिवार्य है, बिगड़े जब रूटीन, 
सत्संग, योग, पर्यटन में, हो जाओ लीन,
हो जाओ लीन, कोई अभिरुचि अपनाओ,
स्वाध्याय, धर्म, दान कर, जीवन आनंद मनाओ,
मन को रख कर फ्रेश, खुद का करो कैलिब्रेशन,
जीवन को नव दिशा मिले, उसे सुधारे आत्म मंथन.
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न्यूक्लियस के प्रोटाॅन ज्यों, मुखिया का परिवार, 
पत्नी है न्यूट्राॅन सम, बच्चे एॅटम का आकार, 
बच्चे एॅटम का आकार, इलेक्ट्रॉन की नाईं,
घूमें अलग चक्रों में, नाभिक की लगती परछाईं,
स्पिन की दिशा, गति और चक्र का रेडियस,
शादी के बंधन में बंध, जुड़ जाते और न्यूक्लियस.
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एक इलेक्ट्रॉन जुड़े जब, दो न्यूक्लियस संग, 
प्रीत बढ़ा कर आपसी, बाॅन्ड बने सत्संग,
बाॅन्ड बने सत्संग, अलग अलग गुण धर्म,
तीन तरह के जीवन बाॅन्ड, ज्ञान, भक्ति व कर्म, 
तीनों से संभव मोक्ष है, राहें भले अनेक,
अस्थिरता दूर कर, स्थायित्व दे, प्रयास केवल एक.
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आसपास का समाज देख, ढले उसी अनुसार, 
परिस्थितियाँ निर्धारित करें, मानव का व्यवहार,
मानव का व्यवहार, कुछ तथ्य समझ के पार,
अल्ट्रासाॅनिक कहलाता, ऐसी आवृत्तियों का संचार,  
प्रगति समाज कर सके, ऐसी सोच हो सबसे खास,
भला सभी का हो सके, जो भी अपने आसपास.
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बिजली से चुंबक बने, चुंबक से बनती बिजली, 
एक तरह की ऊर्जा, दूजी में होती बदली,  
दूजी में होती बदली, कुल ऊर्जा का  संरक्षण, 
कुछ हो जाता ह्लास, जब बढ़ जाए घर्षण,
रोटर से मोटर चले, घूर्णन की गति बदली,
जीवन में आवश्यक है, बड़े काम की बिजली.
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क्षमता मानव स्मृति की, घटनाओं के भंडार, 
ग्रहण सूचनाएँ कर, कुछ भेजे आर पार,
कुछ भेजे आर पार, अवाँछित को लेवे रोक,
कैपेसिटर मानिंद, ए.सी. जाए, डी.सी. होवे चोक,
ए.सी. की आवृत्ति बनी रहे, कहें वो चुगली करता,
अलग अलग होती, हर मानव की धारण क्षमता.
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संसार में भाँति भाँति के लोग, डालें अपना प्रभाव, 
अपनी बात मनवान हेतु, देते अनेक दबाव,
देते अनेक दबाव, सबकी सुनो ध्यान से राय,
वापस अपनी मनोदशा में, जब दाब हट जाय,
मानव की प्रत्यास्थता, बतलाए समस्त विकार, 
स्ट्रेस, स्ट्रेन के साथ में, चलता जाए संसार.
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पाप पुण्य की दिशा, इक दूजे के विपरीत, 
शुद्ध मान जिस राशि का, वही फल की रीति,
वही फल की रीति, वेक्टर चरित्र बताए,
सौ गुणों के बीच, अवगुण चार छुपाए,
इनके अंतर से निखारो, जीवन चरित्र की छाप,
अच्छे कर्म से पुण्य मिले, मिले बुरे से पाप.
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मन मस्तिष्क प्रभावित करे, सामाजिक व्यवहार, 
लोकोक्ति स्थानीय हैं, पर होता खूब प्रचार,
पर होता खूब प्रचार, जैसे एम्प्लीट्यूड माॅड्यूलेशन,
काल चक्र का कैरियर, चलता जाए हर छन,
धार्मिक मान्यता सुनी जाएँ, फ्रीक्वेन्सी माॅड्यूलेशन,
सुदूर विदेश में भी मानी जाएँ, बसी रहें सबके मन.
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उत्तर ध्रुव अंकित करे, धरे अटल विश्वास,
सत्मार्ग पर प्रेरित करे, चक्रवात में आस,
चक्रवात में आस, दिशा निर्देशन कर जावे,
जीवन झंझावात में, सद्गुरु नाईं ज्ञान बतावे, 
उन्नति पथ प्रदर्शित हो, बेझिझक, बिना असर,
कम्पास कहे सही दिशा, सभी सवालों के उत्तर. 
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अपनी बात पर अड़ी रहे, कुटिल मानव की जात,
बार बार दोहराय कर, समझाएँ कोई बात,
समझाएँ कोई बात, एक आवृत्ति का राग बजाएँ,
ट्यूनिंग फाॅर्क की नाईं, हलके आघात से गाएँ, 
न माने जो उनकी बात, मानें उससे दुश्मनी,
डंके की चोट पर, शोर से सुनाएँ कथनी अपनी.
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एक्स-रे की भाँति जान ले, भीतर का सब हाल,
ज्ञानी गुरू सारे काट दे, सब शंकाओं का जाल,
सब शंकाओं का जाल, निविड़तम तम दूर भगाए,
बता कर अनुपम हल, चित, मन शान्त कराए,
उसकी बात समझ में आ, मन में घुस जाए गहरे,
दिव्य छवि अंकित हो, ज्यों फोटो फिल्म पर एक्स-रे.
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मन से मन की बात, बिन कहे समझ ले मन,
नहीं विरोध कहीं पर, रहे परस्पर अमन,
रहे परस्पर अमन, एक स्वर में कर लें बात,
अनुनाद से बढ़े ध्वनि, हो प्रफुल्लित गात, 
हर्षमय जीएँ जीवन, सुरभित हो चित्त चमन,
समरसता विचार की, महकाए तन मन.
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स्वभाव व्यक्ति का दे, लोकप्रियता का प्रमान, 
जनसंपर्क से हो जाए, गमगीन दिल हलकान,
गमगीन दिल हलकान, दोस्ती हो दिल से,
बिन कहे समझे मन की बात, मिलने को तरसे,
आवृत्ति मिल जाए, दूरी वेव लैंथ का प्रभाव,  
गुणन वेग से गाड़ी चले, मिल जाए स्वभाव.
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सीधी बात समझ में आए, टेढ़ी समझाई जाए,
शरीफ़ को सरल, टेढ़ी खुराफ़ाती को भाए,
टेढ़ी खुराफ़ाती को भाए, अंतर प्रस्तुति का प्रकार,
ट्राँसवर्स और लाँगिट्यूडिनल, हो दोनों से ऊर्जा संचार, 
माध्यम, आवृत्ति, मोड, बताएँ संवाद की परिधि,
सरल, छली प्रकृति निर्धारित करे, कैसे हो बातें सीधी.
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आत्म ज्ञान सबसे बड़ा, सीखो इससे कुछ सबक,
नासमझ, मूर्ख हैं वो, जिनमें दीखे न कोई फरक,
जिनमें दीखे न कोई फरक, मिले अकल खाकर ठोकर, 
अनुभव से जो सीख न लें, वह पूरे जोकर,
सकल आंतरिक परिवर्तन से, मिल जाए परमात्म,
गुरू शिक्षा, अनुभव से, सुधारो अपना जीवन आत्म.
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जीवन यात्रा की दिशा, बदले कोई ज्ञान,
सकल आंतरिक परिवर्तन, बना सकता महान, 
बना सकता महान, लगे जब ऐसी ठोकर,
दूर से चमकता लक्ष्य, ब्रेक थ्रू से लगती टक्कर, 
आभार उस लक्ष्य का, बनाए पाप को पावन,
डाकू बने ऋषि वाल्मीकि, सुधरा उनका जीवन.  
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पाप पुण्य का चक्र है, ऊर्जा के दो प्रकार, 
जीवन का निर्धारण करे, आत्मा को दे आकार,
आत्मा को दे आकार, स्थितज, गतिज ऊर्जा का योग,
उनका योग रहे बराबर, काल चक्र संयोग,
पलड़ा पुण्य का भारी कर, ऊँचाई पाएँ आप,
संतोष मिले स्वयं को, जब कम हो जाएँ पाप.
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कर्म कण भौतिक है, विश्वास तरंग नेह,
दिव्यांग शिखर चूम ले, बाधा न बने देह, 
बाधा न बने देह, आत्म विश्वास की पराकाष्ठा, 
असंभव को संभव कर सके, आस्था और निष्ठा,
तरंग कण द्वैतवाद, भारतीय संस्कृति का धर्म, 
बढ़ा कर आत्म विश्वास, करते रहिए कर्म.
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दामिनि जब आकाश में, चमके कड़क कराल,
सघन मेघ वृंद में, लागे रुचिर प्रवाल,
लागे रुचिर प्रवाल, प्रकाश तुरत दिख जाए,
वेगांतर के कारणे, ध्वनि कालांतर में आए,
मिले सुचालक पथ यदि, न होवे कुछ हानि,
उच्च तीक्ष्ण बिन्दु पर, जल्दी आए दामिनि.
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अनंत स्रोत की ऊर्जा, देता सूर्य महान,
प्रक्रिया इस ब्रह्मांड में, पा न सका वह ज्ञान,
पा न सका वह ज्ञान, कैसे, किस ने हर आवृत्ति बनाई ? 
उष्मा, प्रकाश, ध्वनि, विखंडन, गति, विकिरण में आई,
वेद, पुराण चिर काल से, बतलावें यह द्वंद्व, 
मानव को समझने में, लगा समय अनंत.
------------

दूरी लेंस से निश्चित करे, प्रतिबिंब का आकार,
ईश्वर पारदर्शी लेंस है, दूरी बनी संस्कार, 
दूरी बनी संस्कार, उचित आवर्धन पाएँ, 
अनंत दूर से भी, फोकस पर प्रतिबिंब बनाएँ, 
फोकस के अंदर होना, विकास के लिए जरूरी,
अवतल लेंस छोटा करे, चाहे जो हो दूरी. 

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प्रकाश श्वेत किरण का, पारदर्शी माध्यम में पाता मोड़,
आर पार दिखाने वाला, रंगों में देता तोड़,
रंगों में देता तोड़, अलग कोण से चलते चाल,
बाहर से सतरंगी दिखते, पा प्रिज़्म की ढाल,
विश्व पटल पर इंद्रधनुष ज्यों, चमके ख्याति आकाश, 
अखंड भारत की एकता, फैलाए ज्ञान प्रकाश. 
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दर्पन सा खुद को दिखे, अपना करम व्यवहार,  
दैनिक कार्यों में दिखे, सुलझे हुए विचार, 
सुलझे हुए विचार, प्रतिबिंब असली भाए,
नकली छवि न सराहे कोई, लोगों को भरमाए,
शुद्ध, सात्विक विचारों से, महकाएँ अपना जीवन, 
सरल हृदय सा निर्मल, बने अपना जीवन दर्पन.

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प्रार्थना पहुँचे ईश तक, ज्यों प्रकाश का वेग,
दिल से दिल को राहत, तत्क्षण आए आवेग,
तत्क्षण आए आवेग, जब भी मन से ध्यावें,
पूजा, स्तुति, अर्चना, आराधना में ध्यान लगावें,
रहे न कोई आस जब, चित लगा कर कल्पना, 
बेकार न कभी जाती, सच्चे दिल की प्रार्थना.
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प्रतिभा निखरे ज्ञान से, मिल अनुभव का साथ,
श्वेत प्रकाश चमक रहा, बिखर गए रंग सात,
बिखर गए रंग सात, स्पेक्ट्रम में खिल जाते, 
*वैनीआहपीनाला* नाम से, जग को हरषाते,
चमकें इंद्र धनुषी रंग, सात जनम की विभा,
नष्ट तन हो जाता, पर, याद रह जाती प्रतिभा.
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हर ताप पर उत्सर्जित करे, प्रतिभा का निखार,
अनुभव की परिपक्वता, प्रकृति का उपहार, 
प्रकृति का उपहार, लोहा जगत पहचाने,  
नव दृष्टिकोण प्रस्तुत करे, मन की सुने माने,
ओज चमके, वाणी दमके, ख्याति महके प्रखर,
ऐसे नर की बात, कहीं भी, कोई भी, माने जन हर.
--------------

स्थिर जीवन को गति मिले, जब अवरोध टकराय, 
एकरस, निर्बाध रुटीन में, हलचल आ जाय,
हलचल आ जाए, मनोभाव से उपजे अन्तर्द्वन्द,
नव विचार जन्म लें, क्रियान्वयन हो स्वच्छंद,
मानस तंत्र की उष्मीय गति, चमके और प्रखर, 
नवाचरण की एंट्रोपी, बनी रहे स्थिर.
------------

संचालन, संवहन, विकिरण, उष्मा संचार के प्रकार, 
इनके माध्यम से परिभाषित, मानव का व्यवहार, 
मानव का व्यवहार, जैसे संवाद की भाषा,
हाथ मिला, दूर से सलाम या ई-मेल की आशा,
बिन कहे, समझ जाए, दिल से दिल का अपनापन,
मूक, मधुर, मृदु मुद्रा, करे भावों का संचालन.
-------------

ताप एक अंश, एक ग्राम का, उष्मा जो बढ़ा पाए, 
उस वस्तु की वह मात्रा, विशिष्ट उष्मा कहलाए,
विशिष्ट उष्मा कहलाए, पानी से हो सबकी तुलना,
सबसे अधिक पानी है की, इसे कुचालक कहना, 
सूर्त स्रोत अखंड ऊर्जा का, प्रचंड उसका प्रताप,
धातु सुचालक कहलातीं, कमतर चाहें ताप.
---------

सुचालक तापक्रम सम करे, नहीं उष्मा प्रधान, 
कुचालक इस प्रवाह में, डाले है व्यवधान,
डाले है व्यवधान, ताप बहे ऊपर से नीचे, 
सतत ऊर्जा स्रोत सूर्य, निरंतर धरा को सींचे,
सकल विश्व की गतिविधियों का, ऊपर वाला संचालक, 
उसके अनुभव हेतु, हो आत्मा व मन के सुचालक.
-------------

गरम चीज़ सामान्य कक्ष में, ठंडी हो जाए,
ठोस तो ठोस बना ही रहे, द्रव चाहे जम जाए, 
द्रव चाहे जम जाए, जैसे मन का उबला रोष, 
समय शाँत कर दे, वाणी का अनचाहा दोष,
स्थिर चित्त संवाद करो, दिल को रखो नरम,
भावावेश में आकर, न बन जाओ गरम.
------------

थर्मामीटर मापता, जो तन चढ़ा बुखार, 
तन मन की व्यथा दशा, बतलाता हर बार, 
बतलाता हर बार, सिफारिश ठंडी की करता,
प्रकृति चक्र का नियम, गरम ठंडे को सम रखता, 
परम शून्य ताप पर, हो जाए हर वस्तु अमर,
माप सके उसे, नहीं बना, ऐसा कोई थर्मामीटर.
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मूल विमाएँ भौतिकी में, तन, मन और विचार,
इन से सुखी, समृद्ध रहे, अपना जीवन व्यवहार, 
अपना जीवन व्यवहार, M, L, T के समरूप,
चार गौण हैं, संस्कार, धर्म, शिक्षा, ज्ञान अनूप,
संतुलन इनमें बिठाइए, करें न कोई भूल,
द्वेष तज, प्रगति करें, सातों जीवन मूल.
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स्ट्रेस है मनुज कर्म, तो अनुभव है स्ट्रेन, 
इन दोनों के बीच में, हम सब हैं बेचैन,
हम सब हैं बेचैन, अनुभव कर्म से आता,
बिना कर्म के धर्म से, अनुभव नहीं आता,
उतना जीवन संवारिए, मत हो होओ डिप्रेस,
आनंद मना कर मजा लो, न लो ज़्यादा स्ट्रेस.
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जीवन के तीन निर्देशांक, श्रद्धा, आशा, विश्वास, 
X, Y, Z से पाइए, करमफल का एहसास,
करमफल का एहसास, करें व्यक्तित्व परिभाषित,
संयम की सुगंध से, रहे व्यवहार मर्यादित,
X, Y, Z के साथ, jct की चौथी विमा है मन,
समुचित निर्धारण से, बन जाए सार्थक जीवन.
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एक रस संवेग से, जीवन नीरस बन जाय, 
उतार चढ़ाव की चाल, नव अनुभव ले आय,
नव अनुभव ले आय, त्वरण से मिले प्रेरणा,
हताशा से विराम लगे, निष्काम कर्म से साधना, 
गुरुत्व बनी संकल्प शक्ति, चित्त गति को ब्रेक,
क्रिया से प्रतिक्रिया, कर्म फल का निर्णय  एक.
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स्नेह मधुर वह श्यान है, जो धीमा रखे प्रवाह,
सुगंधित मृदु स्वभाव पर, मुख से निकले वाह,
मुख से निकले वाह, धीमे धीमे प्रगाढ़ हो जाए,
गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव, देर से उस पर छाए,
सीधे सरल हृदय में छिपे, ज्यों नीर भरे मेह, 
खुले दिल से बहाइए, अविरल मुक्त स्नेह.  
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तरल तल समतल दिखे, कारण रहे तनाव,
ऊँच नीच का भेद मिटाए, प्रवाह तरल समभाव,
प्रवाह तरल समभाव, सबको करे एकरस,
ऊपर से चिकना लगे, भीतर चले संघर्ष,
बहती गंगा में धो हाथ, बन जाओ सहज सरल,
द्रवित मन मस्तिष्क से, स्वभाव से शुद्ध तरल.
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पति पत्नी के बीच का, बंधन है अनमोल,
भले न मिल सकें, ज्यों चुंबक के पोल,
ज्यों चुंबक के पोल, अलग न कोई कर पाए,
भव बाधा, त्रासदी, चोट सभी सह जाए,
आस पास के क्षेत्र में, छाप छोड़ें अपनी, कृपा करें माँ शारदा, सम्मति पाएँ पति पत्नी.
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घर्षण से ऊर्जा बन कर, देती गति का आधार,
उष्मा में बदल जब, करे जीवन में सँचार, 
करे जीवन में सँचार, नया मार्ग सुझाए,
करे विकास, दिखे संभावना, उत्साह बढ़ाए,
पूजा, श्रद्धा, भक्ति भाव से, कर दो अर्पण,
प्रतिरोध का स्वागत करो, जब अनुभव हो घर्षण,  
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प्रकाश श्वेत जब पड़े, अपने सुंदर अंग, 
रूप निखरता ही दिखे, खिल जाएँ सब रंग,
खिल जाएँ सब रंग, *वैनीआहपीनाला* से पहचान बनाते,
सतरंगी स्वप्नों में कर स्नान, अनुपम आनंद मनाते,
व्यतिकरण, विवर्तन से, स्पेक्ट्रम छा गया आकाश,
प्रिज़्म श्वेत की धार पर, टूटा सतरंगी प्रकाश. 
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सरल, सहज, जीवन में, आवश्यक है व्यवधान,
किसी रंग के प्रकाश में, दिखे न उसी रंग का सामान,
दिखे न उसी रंग का सामान, दूजा रंग ज़रूरी,
कंट्रास्ट में खिले पोशाक, एकरसता है मजबूरी,
प्रतिबिंब उसी रंग का दिखता, यह सिद्धांत अटल,
परावर्तन, अपवर्तन होते हल, प्रकृति के नियम सरल.
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दीवाली पर आपको, दें शुभकामनाएँ अनंत,
बरसों बरस स्वस्थ रहें, सुखी समृद्ध, जीवंत,
सुखी, समृद्ध, जीवंत, सुरक्षा दिल में जागे, 
मजबूती, गुणवत्ता में, GYPROC सबसे आगे, 
निखर आए, बिल्डिंग की, सूरत, शोभा निराली,
अच्छे से मन जाए, आपकी खूबसूरत दीवाली.

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केवल कर्म नहीं काफी, लक्ष्य का करो विचार, 
भूमिका बाँध कर, कार्य को दो विस्तार,
कार्य को दो विस्तार, शीघ्र अच्छा फल पाओ,
क्रिया की प्रतिक्रिया, यह सिद्धांत अपनाओ,
अनिश्चितता के आकाश में, हीज़नबर्ग का संबल,
विश्वास पूर्वक कार्य ही, दे निश्चित फल केवल.
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बिजली रूप में समाय कर, करे शोर घनघोर,
तड़ित बन चमक रही, दिल को दे झकझोर,
दिल को दे झकझोर, मेघ में रहस्यमय वास,
कृपा जो भवन पर करे, तड़िच्चालक बचाए नास,
सुरक्षा जन धन की, जीवन की शर्त है पहली,
घर में घुस कर करो दुआ, जब कड़के बिजली.  
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मोबाइल नंबर आपका, बनी आपकी पहचान, 
फोनबुक में हो सुरक्षित, तुरत लीजिए जान,
तुरत लीजिए जान, फटाफट गप्प लगाएँ, 
हाले दिल जब चाहे, अपनों को सुनाएँ,
बस पूरा चाहिए, चार्ज, सिगनल और बिल,
रहे सलामत आपका, अपना प्यारा मोबाइल.
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लो जी.एस.टी. आ गया, बंद हुआ मनमाना मोल,
एक दर पर मिलेंगी, सारी चीजें अनमोल,
सारी चीजें अनमोल, पर छूट गया पेट्रोल, 
कड़े फैसले लेने में, विपक्ष भी भूला बोल,
भलाई राष्ट्र की देख रहे, चाहे प्रगति है स्लो,
जन हित को ध्यान रख, सामयिक फैसले लो.

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समापन वित्त वर्ष का, देता विचित्र संदेश,
करें नव वर्ष में, कुछ संकल्प विशेष,  
कुछ संकल्प विशेष, पुराने सब कर्ज़ चुकाएँ,
खर्चे सीमित रखें, भरें टैक्स, और शेष बचाएँ,
शाँत चित्त, स्वस्थ तन से, करें जीवन यापन,
रहे न कोई Liability, जब वित्त वर्ष का हो समापन.
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हड्डी टूटी जुड़ रही, पा राॅड, बोल्ट का योग,
कुशल डाॅक्टर ने दे दिया, अपना सब सहयोग, 
अपना सब सहयोग, खाओ गजक और केला,
नियमित दवा और फ़िजियोथेरेपी, है इलाज अलबेला,
अधिक कैल्शियम अचूक है, साबुत दिखेगी टूटी हड्डी, 
रखें सावधानी, ताकि फिर से न टूटे हड्डी
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टच स्क्रीन 

टच स्क्रीन पर लिखो, बिन कागज़, कलम, दवात. 
घड़ी घड़ी बदल रहे, चंचल मन के जज़्बात.
चंचल मन के जज़्बात, तकनीक की महिमा न्यारी, 
No को Not बना कर Note लिखने की पूरी तैयारी,
बदल गई अब सोच, अाज नई तो कल प्राचीन,
कमाल की edit लेखनी, बिन रबर के टच स्क्रीन. 

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दाँत का दर्द

श्रीनगर में दुख रहे, भारत माँ के दाँत,
गद्दारों से व्यथित है, जन जन की आँत, 
जन जन की आँत, इलाज मात्र रूट कैनाल,
कील गाड़ कर, कैप लगाओ, तत्काल,
खत्म करो अतिशीघ्र, विनाश का यह मंजर, 
बहाल हो जाए, अपना प्यारा श्रीनगर.

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दोहा तो दोहा है , भ्रष्ट न उसको मान , 
मन के भाव प्रकट करे, मन से करे कमान .
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पासवर्ड

आज का हर बुद्धिजीवी कुछ सँख्याओं से जुड़ गया है, 
इन की स्मृति,  उस का जीवन बन गया है,
चाहे वह ई - मेल हो, या या बैंक का खाता,
चाहे नाम अलग हों, पर ‘ पासवर्ड ’ कहलाता, 
पैन कार्ड हो या ‘ आधार ’ से जुड़ा हो नाता,
सब में सँख्या कोई आती, जो जीवन में खुशियाँ लाती,
ए.टी.एम. से धन दिलवाती, अचल संपत्ति को बिकवाती,
अच्छे अच्छे परिचय करवाती, आपकी पहचान बताती ,
बिना ‘ पासवर्ड’ या ‘ पिन ’ के कोई काम न सँभव हो पाता,
उस को भूले तो, किए कराए पर पानी फिर जाता,
एक साथ जीवन गुम जाता, याद दिलाने से सब दोहराता,
बड़े बड़े  डाटा बेसों का आधार, सबकी सुरक्षा का पहरेदार,
‘ पास वर्ड ‘ जब मिल जाए, पूरे आप के कारनामे बतलाए.
इतिहासों में गोते खाए, आपका बचपन वापस लाए,
भावी मानव इन अँकों से पहचाना जाएगा,
इन के बिना अपना अस्तित्व गँवाएगा.
इसकी महिमा है न्यारी, याद रखना इसे ज़रूरी.
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पॉवर कट

पॉवर -  कट में सज  रहे स्वेद  बिंदु खारे,
बौराए से घूमते, बैठे हैं कर पर कर धारे,
बैठे हैं कर पर कर धारे, काम न कोई हो पाए,
लैप टॉप , मोबाइल हो न चार्ज , कॉल बेल न बज पाए,
पिघली बर्फ फ़्रिज में, समस्या बन जाए विकट,
सुधर जाए सप्लाई ऐसी, कभी न होए पॉवर – कट .
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व्हाट्सैप
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*व्हाट्सैप आरती*

ॐ जय व्हाट्सैप भगवान,
स्वामी जय व्हाट्सैप भगवान, 
एंड्राॅयड के साथ, सबके हाथ बिराजै,
कर में श्रेष्ठ एप्प, मोबाइल पर साजै,
तुम बिन और न दूजा, जो सबके मन में बसे,
यार दोस्त जिसे रिझावें, और जोक्स पे हँसे,
तुम गुणवान, स्वामी, तुम सर्वज्ञ अन्तर्यामी,
सबके हाल बतावत, सबके दिल में घुस जावत, नेट करत गुलामी, 
एकाकार सबको मिलाते, मोबाइल के प्राणपति,
किस विधि साझा होऊँ, नेट बिन होय न युक्ति,
मीत, बन्धु सुख कर्ता, तुम सूचना दायक मोरे,
तुम बिन केहु की शरण जाऊँ, मन के अति प्यारे,
द्वेष, राग हटाओ, धर्म, जात जान लेवा,
मिल कर मौज मनाओ, ॐ जय व्हाट्सैप देवा
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व्हाट्सैप ग्रुप करता, सभी सदस्यों का सम्मान, 
सादर आभार दें, लेता सबका समुचित संज्ञान, 
लेता सबका समुचित संज्ञान, सफल तीन वर्ष की यात्रा, 
अनेकानेक सदस्य जुड़े, बढ़ती जाए पोस्ट्स की मात्रा,
स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ, हो लोकप्रिय यह ऐप्प,
बढ़ाए संपर्क, सद्भाव, स्थायित्व, ग्रुप में व्हाट्सैप. 
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न कोई सार है, न कोई शान है,
मेरी पोस्ट से हर कोई परेशान है.
जोक्स न रह सके, धर्म, जाति की आन है, 
सीधी बात को न समझना, विधान है.
इधर से उधर लगाने में, कल्यान है,
रिपीट पोस्ट ही, नए सदस्यों की पहचान है.
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व्हाट्सैप के माध्यम से, लिखत दिल की बात,
इधर की पोस्ट उधर करत, फिर भी न अघात,
फिर भी न अघात, कहत अंतर्मन के भाव,
समर्थन, ज्ञान, उपदेश, डालत सतत प्रभाव,
मोबाइल से सुविधा मिलत, अजब गजब के एप,
संवाद की भाषा बने, अपना अद्भुत व्हाट्सैप.
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आभार ग्रुप जनों का, जो बढ़ा रहे उत्साह, 
नित नव पोस्ट से, बना रहे प्रवाह,
बना रहे प्रवाह, दें भाँति भाँति के विचार, 
सार्थक सूचना, कुशलक्षेम से, सत्यापित सँचार,
कड़क नियम बना रहे, सब एडमिन लगातार,
फिर भी अपार सफलता हेतु, आप सब का आभार.
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हीरे मोती रतन ज्यों, करें ग्रुप का श्रंगार,
सुप्रभात संदेश से, सुरभित हो भिनसार,
सुरभित हो भिनसार, एक नई ऊर्जा पाएँ, 
प्रेरित हो, एक से, दूजे भी जोश में आएँ,
हों व्यक्त मनोभाव, दिल के अरमान पूरे,
चमकें ज्ञान प्रकाश से, सारे ग्रुप के हीरे.
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चौपट सब कर दिया, घर का कारोबार,
इसके चंगुल में फँसे, भूले रोग और उपचार, 
भूले रोग और उपचार, ज्ञान अनूठा पाया,
काल्पनिक पूजा पाठ, माला जाप बिसराया,
बाह्य जगत भूल गए, लाँघ न पाए घर चौखट,
व्हाट्सैप के चक्कर में, हो गया सब चौपट.
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खुश रहें, दिल मिलें, बढ़े परस्पर प्रीति,
सद्भाव व्यक्त करें सभी, यह ग्रुप की नीति.
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ग्रुप एक मंदिर है, जिसमें सबका होता सम्मान,
मिलते रहें virtually, कर दूजे का मान.
कर दूजे का मान, सुख दुख की खबरें पाएँ,
मनोरंजन, ज्ञान के साथ, सकल विश्व की जानकारी पाएँ,
होता कुछ अवसाद, यदि कई सदस्य रहते चुप,
भला लगे, गर, चहकता महकता रहे अपना ग्रुप.
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करा बहुत विचार , काश ! हो ऐसा , तो है अच्छा ,
व्यक्तिगत वॉल पर मिल जाएँ , बधाई व शुभेच्छा , 
पर , दोस्तों के ज़ुनून के आगे झुक गया हूँ ,
सबके साथ , मैं भी बधाई देने आ गया हूँ .
एडमिन ना कोई तोप है , और ना ही कोई बला ,
क्या पता कब , दूसरा एडमिन निकाल ले बदला .  
ग्रुप से हमें यारों , ना जाने कब कर दे बाहर , 
जो चाहो अपना भला , तो कर लो प्यारे सब का आदर . 
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खातिरदारी हो गई अधिक , भेजें सुखद संदेश ,
पुणे घूम कर वापसी , प्रसन्न रहे दिनेश,
प्रसन्न रहे दिनेश , किया यात्रा का मकसद पूरा ,
सुधारा फ़ेसबुक , व्हाट्सैप का , ज्ञान अधूरा ,
अब आगे बढ़ने की , बनती आपकी ज़िम्मेदारी ,
खाना पीना छोड़ कर , करें बात चीत से खातिरदारी .
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व्हाट्सैप ने कर दिया , नव यौवन सँचार ,
नीरस जीवन में आ गई , सँदेशों की भरमार ,
सँदेशों की भरमार , एकाकी को दूर भगाएँ ,
पाएँ नित नव ज्ञान , स्वयँ को समृद्ध बनाएँ ,
स्वस्थ मनोरंजन साझा करें , भर जाएँ सब गैप ,
लाभान्वित हम होते रहें , अजर अमर हो  व्हाट्सैप .
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अटकल लगा रहा था , अधिक सदस्य हैं सुप्त ,
कोई कोई आगे आते , शेष सभी हैं गुप्त ,
शेष सभी हैं गुप्त , यदा कदा प्रसाद चढ़ाते ,
पर्व , त्योहार पर दे बधाई , अस्तित्व बताते ,
आज हुआ है भान , व्यर्थ बनाई मुश्किल ,
सबके सहयोग , समर्थन से , हल हुई अटकल .
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ग्रुप बनाने से जुड़ गए , चिर प्राचीन मित्र ,
सुधर गए रिश्ते सभी , निरखा एक चरित्र ,
निरखा एक चरित्र , दस्तक देतीं विस्मृत आहटें ,
स्वस्थ मनोरंजन हो रहा , सुख दु:ख मिल बाँटें ,
ज्ञान , उपदेश , संदेश देने में , कोई न होवे चुप ,
बना रहे सौहार्द्र , समन्वय , अमर रहे यह ग्रुप .
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व्हाट्सैप उपासना के कुछ महा मंत्र :-
ऊँ श्री मित्राय नम :
ऊँ श्री व्हाट्सऐपाय नम :
ऊँ श्री मोबाइलाय नम :
ऊँ श्री सिगनलाय नम :
ऊँ श्री बैटरी चार्जाय नम :
ऊँ श्री नेटाय नम :
ऊँ श्री विद्युताय नम :
ऊँ श्री मेमोराय नम :
ऊँ श्री अॉडियो , वीडियो फ़ाइलाय , चित्राय , जोक्साय , क्विज़ाय , स्वास्थ्य संदेशाय , उपदेशाय , सुवचनाय , सुझावाय च शुभेच्छाय नम :
ऊँ श्री अग्रसाराय च डिलीटाय नम :
और अंत में ,
ऊँ श्री पत्नी महाकोपाय परित्राणाय नम :
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इधर – उधर से जोड़ के, मित्र लिए बनाय ,
गप – शप साझा कर रहे, हाल – चाल ले जाय,
हाल – चाल ले जाय, दिल का हाल सुनाते,
whatsapp से बैठे- बैठे, जब चाहे गप लगाते,
अच्छे आगे कर देते, विचारे, बिना फ़िकर,
यूँ ही बातें करते रहें, कभी – कभी इधर – उधर .
***
स्प्रिंग
स्प्रिंग में गुण बहुत हैं , सदा राखिए संग ,
लगी हो , गर , शरीर में , लचीला रहता अंग ,
लचीला रहता अंग , तन मन में फुर्ती लावे ,
हड्डी टूट जाए , तो डॉक्टर जोड़ में अपनावे ,
दिल के व्यवधान में , जगाए स्टेंट की जुंग ,
व्यवहार रहे कुशल , जब फ़्लेक्सिबिल रहे स्प्रिंग .
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कार
बालक कार खरीदता, पा बिन प्रयास के लोन,
बढ़ता काम निरख के, परिवार है मौन,
परिवार है मौन, पर ,भीतर खुशी समाई,
लोन चुकाने में, उस की लग गई कमाई,
सिद्ध काम बनते रहे, कार बने उस में साधक,
दिन – दूनी, रात चौगुनी, करे तरक्की मेरा बालक.
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सब्ज़ी
सब्ज़ी छील के धोइए, बाद में लीजै  काट ,
बिन काटे धोन से , स्वाद अनूठा आत ,
स्वाद अनूठा आत, विटामिन सारे रह जाते ,
पत्नी लगावे हाथ, स्वर्णिम सुख पाते ,
भिंडी पर ना आजमाय, चलाएँ अपनी मर्ज़ी ,
बंद गोभी से डर गए, तो स्वादिष्ट बनेगी वो सब्ज़ी .
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ड्राइवर
ड्राइवर के गुण लखि, सखि भई  मुदित अपार,
रूप – यौवन, धन – धान्य की, रही न कोई दरकार,
रही न कोई दरकार, मन में प्रार्थना कर जाए,
इस के जैसा वर, भगवन्‌ मुझ को मिल जाए,
पूरी  हुई  मुराद, मिल  गया उसे इच्छित वर,
उस का रस कोई और था, वह निकला बस ड्राई–वर.
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हजामत
काले केश कटाने गया, मैं हज्जाम के पास,
मुस्का कर वह बोला, कितनी काटूँ घास ? 
कितनी काटूँ घास, कि खोपड़ी गोरी दिख जाए,
इतने छोटे करें, कि कढ़ने में आ जाएँ,
अर्ध – शती का खर्च कर, वापस आए मतवाले,
पत्नी ने Undo किया, रंग के फिर से काले .
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उँगलियाँ उठाने से पहले, दामन अपना देख लीजिए. 
एक दिखाने पर, चार अपनी ओर आतीं हैं.
दिल से नहीं दिमाग़ से, काम लीजिए,
अक्स पूरा देखने को, आईना आधा ही काफी है.
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आर्ट ऑफ़  लिविंग

बीबी जीना सीख रही है , जीवन के मायने सीख रही  है .
पहले की जीवन शैली छोड़ी , जीने की शर्तें  तोड़ीं ,
व्यवहार में  नयापन लाएँ , नित  नव  प्रयोग सिखाएँ ,
जो  न पहले कभी किया , नवाचरण का उपयोग किया ,
झिझक रूढ़ियाँ सब भूलीं , वाणी प्रेम की सबसे बोली ,
नए – नए दोस्त बनाए , अपने अनुभव उन्हें सुनाए ,
क्षमा याचना के मूल्य समझाए , गलती अपनी न दोहराए ,
व्यवहार कुशल बनी है नारी , नव जीवन की करी तैयारी ,
योग  प्राणायाम सुझाए , तन मन इस से स्वस्थ बनाए,
हो गई इस से काया पलट सारी , आर्ट ऑफ़ लिविंग सीखे प्यारी ,

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टॉयलेट
टॉयलेट बदबू  दे  रहे , खोया मन का चैन,
सुबह शाम पानी मिले, प्यासे रहते नैन,
प्यासे रहते नैन, जल की कब बूँद दिखे,
टैंकर भर कर आने से, पानी का स्तर निरखें,
वॉच मैन को फोन करें, गर  सप्लाई टाइम हो लेट,
मन ही  मन दुआ  माँगते, साफ़ कब दीखेंगे टॉयलेट.
टैंकर
टैंकर पानी भर रहे, पाइप लाइन रहती प्यासी,
सिडको के तर्क व्यर्थ, सुन – सुन आवै हाँसी,
सुन  - सुन आवै हाँसी, दो बरस चैन से गुज़रे,
ऐसी क्या हो गई किल्लत, शाँति हमारी अखरे,
पड़ोसी पाएँ भरपूर पानी, हम बन गए बैगर ‘,
कब प्रसन्न होगी सिडको, बंद करेगी, ये टैंकर 
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अपतट परिसम्पत्ति के विभागों के कुछ पैरोडी परिचय

फॉरवर्ड बेस :-
जीव जंतु को दाब के, पाप लियो कमाय ,
जहाँ निकाला तेल अब, बे- सिन कहलाय.

ड्रिलिंग सेवा :-
तेल ना  मिला रे हम को, कुछ  तो  करो रे उपाय,

लॉगिंग सेवा :-
कूआँ – कूआँ रटते -  रटते , हो गई रे  बावरिया ,
नगरी – नगरी द्वारे द्वारे , ढूँढू रे साँवरिया ,

तल टीम 
मों से इतना निकला तेल, कि भरम गए सर ताज,
आई न मो को लाज, कि एस. आर. पी.   टूट  गए.

अभियाँत्रिकी सेवा :  -
पाइप लाइन  जोड़ते रहे, सारी रात हम,  आप की कसम ,

उप तल : --
मेरे दिल में आज क्या है,  तू जो कहे,तो मै बता दूँ .

सीमेंटिंग :-
फ़ॉर्मेशन किसी ने ऐसा तोड़ा, सीमेंण्ट लगा  कर मैंने ऐसा जोड़ा .

वित्त  :-
तेल  - वेल , गैस  -  वैस, मैं  क्या जानूँ,
जानूँ तो मै बस इतना जानूँ, कि पैसा माँगू रे ,

सँभार तंत्र (लोजिस्टिक्स)
धीमे -  धीमे ,  हौले हौले चलो , मेरे  वाहना, 
सँग चलूँगी,  मैं  भी  तेरे  साथ  में,

इन्फ़ोकॉम : -
मेरा  बॉस गया  र्रंगून, वहाँ से  किया है टैलीफून,
डाटा जल्दी भेजो .

एच. आर. / ई. आर. :-
पल – पल दिल के पास, तुम रहती हो,
जीवन  मीठी प्यास, यह  कहती हो,

कूप सेवा :-
हम  हैं राही प्यार के , हम से न मुँह मोड़िए,
करें मरम्मत आगार की,  हम से न  कुछ बोलिए.
सुरक्षा :-
आते – जाते हुए  मैं, सब  पे नज़र  रखता हूँ,
नाम  अब्दुल है  मेरा, सब की  खबर  रखता हूँ,
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- : गुणगान : -

आओ करें गुणगान, मेरा ओ.एन.जी.सी.महान,
गैस, तेल के भंडार, करें राष्ट्र का श्रृंगार,
देश – विदेश में विस्तार, ऑफ़ शोर का आधार, 
नव रत्न सम्मान, ओ.एन.जी.सी. की शान,
आओ करें गुणगान, मेरा ओ.एन.जी.सी.महान,

जी-1, डी-1, बसीन का विकास,
मुंबई हाई, हीरा का पुनर्विकास,
निष्कासन बूँद – बूँद तेल का,
करते रहें अथक प्रयास,
आओ करें गुणगान, मेरा ओ.एन.जी.सी.महान,

गुजरात से गेलकी, या कश्मीर से कराईकल,
न छूटे कोई क्षेत्र, चाहे हो बँगाल,  
न छूटे कोई क्षेत्र, बना रहे एसेट,
शोधन की क्षमता से धनवान, 
आओ करें गुणगान, मेरा ओ.एन.जी.सी.महान,

स्वास्थ्य, सुरक्षा, पर्यावरण से सचेत,
गुणवत्ता, प्रशिक्षण, अनुभव का ज्ञान,
विशेषज्ञ जन संपदा, भारी प्रतिस्पर्धा,
अन्वेषण, वेधन, उत्पादन के आयाम,
आओ करें गुणगान, मेरा ओ.एन.जी.सी.महान,
नवीन परियोजना, संरचना का विकास,
डीप वॉटर की लालसा, या उत्पादन का ह्लास,
भूमिगत सर्वेक्षण, कंडन्सेट का प्रवाह,
मार्ग दर्शन की चाह, या स्थिति का ज्ञान,
इन सब में है प्रधान, मैरीन सर्वे का योगदान,
आओ करें गुणगान, मेरा ओ.एन.जी.सी.महान,

-: देवी : -

दें देवी वरदान, करें, कराइकल का गान,
हों सुखद, सहज, सम्पन्न,
हों निर्मल हृदय, भावपूर्ण मन,
हों हरित खेत, खलिहान,
दें देवी वरदान, करें, कराइकल का गान,

करें खनन, बढ़े उत्पादन,
मिले आगार, सुचारु सँचार,
नव तकनीक दे अप्रतिम भंडार,
दें देवी वरदान, करें, कराइकल का गान,

मिले सफलता, खोजें तेल, गैस की खान,
माँ कावेरी का बढ़े सम्मान,
एकजुट प्रयास से बढ़े, राष्ट्र की शान,
दें देवी वरदान, करें, कराइकल का गान,

शक्ति रूपा, वात्सल्य अपार,
रहे कृपा, मिटे वैर – द्वेष का भाव,
बढे प्रेम, हर्षित हो सँसार,
दें देवी वरदान, करें, कराइकल का गान,
- : जी.टी.वी.समुद्र सर्वेक्षक : -
एक षोडशी स्वागत को तैयार,
चौरासी, सोलह, आठ मीटर का आकार,  
तीन हज़ार चार सौ चवालीस टन भार,
सप्त मंज़िली, साठ का विश्राम,
स्थापित उपकरण, अनेक प्रकार,
एक षोडशी स्वागत को तैयार,

सद्य सजिता, दुबई रिटर्न,
वेधन, गोतन में सक्षम,
सह्स्त्राधिक अनुभव, रिग के आधार,
गणेश हैं पालनहार,  
एक षोडशी स्वागत को तैयार,

आई,एस.एम. प्रमाणित, उत्कृष्ट तकनीकी जाँच,
सुरक्षा के मापदंड, पर्यावरण की शुद्धता,
अथक प्रयासों की भरमार,
एक षोडशी स्वागत को तैयार,

मरीन सर्वे की कार्य- स्थली,
ओ.एन.जी.सी. का आधार,
तकनीक, क्षमताओं का विकास,
नव चुनौतियाँ, स्वप्नों का सँसार, 
एक षोडशी स्वागत को तैयार,

पूर्वी तट, मर्यादित आगार,
नूतन क्षेत्र, तेल के भंडार,
न कोई दूजी, जी.टी.वी हमार,
एक षोडशी स्वागत को तैयार,
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मैरीन सर्वे

मैरीन सर्वे चिरंतन है, सदैव चलता जाएगा,

अपेक्षाओं की खान है, पूरा करता जाएगा,

संसाधनों का स्त्रोत है, खाली होता जाएगा.

मैरीन सर्वे फ़िर भी चलता जाएगा,

एक दिन ऐसा आएगा,

सर्वे ग्रुप में ताला होगा,

आधुनिकीकरण का बोलबाला होगा,

सारा काम स्वत: होता जाएगा, 

मैरीन सर्वे फ़िर भी चलता जाएगा,

नवीन परियोजनाएम आएम्गी,

सर्वे होता जाएगा,

सब काम यथावत होगा,

गुणवत्ता में उत्तम होगा,

मैरीन सर्वे फ़िर भी चलता जाएगा,

विदेश यात्रा एक स्वप्न होगी,

प्रशिक्षण की संभावना क्षीण होगी,

विकास के द्वार बंद होंगे,

नव तकनीक स्वागत को उत्सुक होगी, 

सर्वेक्षक पुराना होता जाएगा,

नए उपकरण आएँगे,

अपडेशन होता जाएगा,

काम कॉंट्रैक्टर चलाएगा, 

मैरीन सर्वे फ़िर भी चलता जाएगा,

कर्मठ लोग चलते जाएँगे,

शेष, क्षमता बढ़ाएँगे,

लागत घटाएँगे,

कॉस्ट इफ़ैक्टिव बनाएँगे,

मैरीन सर्वे फ़िर भी चलता जाएगा.
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