वंदना
साठ बरस की बालिका, बन गई सासू माँ,
दादी-नानी उपहार, बांधा अजीब समां.
घर की बड़ी बहू बनी, चार नंबरी बेटी,
पी.एच.डी. तक वो पढ़ी, बेले चार रोटी.
बाल दिवस पर वो पधारी,
बड़ी दुलारी, सबकी प्यारी.
नाम रखा उस का वंदना,
बहन हैं मीना, बीना, रंजना. 2.
माता रानी बड़ी सुशीला,
पापा जी तो हर फन मौला,
भैया उसके, कहते राजन,
भोली सूरत, मन से भावन. 4.
इलाहाबाद में पली-बढ़ी,
मीठी बोली जीभ पर चढ़ी,
पढने लिखने में तो आगे,
कॉकरोच से डर कर भागे. 6.
पीलीभीत में रहतीं नानी,
लाड़ लडा़ने में नहिं सानी,
नरेश मामा को सब चाहें,
खुशी से फैलीं उनकी बाहें. 8.
अपने गुणों से नाम कमाई,
रिश्तेदारी में धाक जमाई,
छोटे भाई को दिल से चाहा,
उसकी खुशी में सब कुछ स्वाहा. 10.
स्कूल कॉलेज का मान बढ़ाया,
एम. ए. तक में नाम कमाया,
खेल खेल में थीसिस लिख ली,
गुरु कृपा से पी.एच.डी. ले ली. 12.
फिर नौकरी की जुगत बिठाई,
मन की जाॅब जमी नहीं भाई,
भाभी पा कर अति हर्षाई,
अपनी शादी की योजना बनाई. 14.
सत्ताईस बरस में शादी रचाई,
दिनेश संग बड़ौदा चलि आईं,
परिचय परिवार संग बढा़ई,
प्रेम से सब संस्कार अपनाई. 16.
भक्ति, भगवान की अलख जगाई,
व्रत, त्योहार श्रद्धा से अपनाई,
धर्म, ध्यान में रुचि दिखलाई,
पड़ोसिनों से दोस्ती निभाई. 18.
साथ में स्कूटर पर सैर कर आई,
सुबह की चाय में रुचि दिखलाई,
प्रतीक्षा वापसी की करती,
मनोयोग से खूब संवरती. 19.
विश्रुत भैया जब घर में आए,
जीवन खुशियों से भर जाए,
सारा उसका रखती ध्यान,
साथ साथ में दे जाए ज्ञान. 20.
नहला धुला कर उसे सजाती,
टी.वी. दिखा कर खाना खिलाती,
सारा उसका खरीदा सामान,
छिड़की उस पर अपनी जान. 22.
बाद में आई मुग्धा प्यारी,
हरकतें उसकी उलटी सारी,
जन्मदिन सबके खूब मनाए,
सब तैयारी घर में कर पाए. 24.
जोरहाट की शोभा निराली,
प्रकृति संग आनंद मना ली,
उल्फ़ा का भय रहा विकराल,
निकले किसी तरह तीन साल. 26.
गोरेगाँव, मुंबई में आवास पाएँ.
स्कूलों में बच्चे पढ़ने जाएँ,
रोज़ की भाजी खुद वह लाए,
मंदिर-दर्शन साथ में कर आए. 28.
रिश्तेदार सब मिलने आए,
अच्छा स्वागत वह कर पाए,
जुहु बीच पर उन्हें घुमाए,
परिवार संग प्रीत निभाए. 30.
भाई की सत्संगत पाए,
परिवार संग तालमेल बिठाए,
बच्चे साथ की जुगत लगाएँ,
कई जगह घूम कर आएँ. 32.
बड़ा आवास बांद्रा में पाएँ,
ढंग से फर्नीचर खूब सजाएँ,
सोशल सर्किल में धाक जमाएँ,
पर्व, त्योहार खूब मनाएँ. 34.
नई खरीदी मारुति कार,
बेची पुरानी भाव भंगार,
घुमा दिए सब रिश्ते दार,
हो आए फिर सबके द्वार. 36.
होली, दीवाली बरेली जाती,
उपहार सभी को ले जाती,
स्लीपर क्लास में यात्रा करती,
गैर जरुरी नहीं खर्च कराती. 38.
पहले शादी रचवाई लक्ष्मी प्यारी,
शोभा के बाद फिर सविता की बारी,
विनय पूछते, आएगा कब मेरा नंबर,
भाभी बोली, बहू ढूंढने जाऊँ अंबर. 40.
प्रतिमा को निर्णय लेना सिखलाया,
शादी - महातम फिर उन्हें बताया,
माताजी को खूब मनाया,
रवीन्द्र जैसा दूल्हा दिलवाया. 42.
ट्राँस्फर पर कारैक्काल चलि आईं,
सिया सी बनवास-प्रथा निभाई,
राजभाषा में रुचि दिखलाई,
सभी आयोजनों में भाग ले पाई. 44.
कुंजुम कुंजुम तमिल सीख वो पाईं,
मुग्धा की इंजीनियरिंग करवाई,
मदुरै, रामेश्वर दर्शन कर पाई,
नवग्रह मंदिरों में करी घुमाई. 46.
हाॅस्टल में बेटा छोड़ कर आईं,
बेटी अपने संग ले आईं,
पाँडि, चेन्नई की खूब घुमाई,
पसंद की माँजा कार दिलाई. 48.
बेटे की खातिर मुंबई आईं,
चाहा बेटा करे पढ़ाई,
अम्मा की जब ममता पुकारी,
इलाहाबाद से बुलवाई प्यारी. 50.
कामोठे नगर उनको भाया,
एक फ़्लैट बजट में समाया,
नया माहौल वह अपनाई,
पडोसियों से मेल बढ़ाई. 52.
नवरात्रि, गणपति पूजा भाई,
माँ, सासू माँ दोनों यहाँ पर आई,
इलाहाबाद से माँ की हुई बिदाई,
बेटे को कार अलग दिलवाई. 54.
सासू माँ की सेवा कर पाई,
बरेली में उनको दी बिदाई,
दोनों बच्चों की फिर करी सगाई,
एक बेटी भेज, दूजी घर ले लाई. 56.
अंकित बेटा को दामाद बनाया,
शैंकी बिटिया को अपनाया,
ऋधर्व ने आकर परिवार बढ़ाया,
प्रानिका ने पूरा v8 बसाया. 58.
थाॅयराॅयड का भय भरमाया,
योग को जीवन अंग बनाया,
गंगटोक, दार्जिलिंग खूब घुमाया,
रूस घूम कर ज्ञान बढ़ाया. 60.
जन्मदिन शुभकामनाएँ, देते सारे यार,
साठ साल आनंद ले, बसा लिया संसार.
प्यारी स्वस्थ सुखी रहे, ले इच्छित बधाई,
रहना मीत हर दिल की, हो न कभी पराई.
जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं व आशीर्वाद.
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