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Monday, 14 March 2016

आभार








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कैसे भूलूं आपका, दिया मुझे जो प्यार,
हृदय पटल पर मैं करूं, अंकित नेक दुलार,
अंकित नेक दुलार, बढ़ते संबंध अपार,
नहीं कटुवचन कहूं, अपनाऊं सब संसार,
धन्यवाद आपका, हैं सभी अपने जैसे,
शुभेच्छा ले रहा, करूं आभार मैं कैसे.
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मिली शुभेच्छा आप से, हम करते आभार,
जी भर कर देते दुआ, हम पर है उपकार, 
हम पर है उपकार, मिलने पर दिल दें खोल,
नहीं सोच बैर की, मीठे हों अपने बोल,
सदा भला सोच कर, हित की ही बात कर ली,
बढ़ा हौसला आज, आपकी कामना मिली.
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पाई हमने कामना, आप सभी का प्यार,
जीवन के हर क्षेत्र में, रहा सफल परिवार,
रहा सफल परिवार, पाए बालक के बाल,
मिली लली, लली को, बेटे को मिलता लाल,
पत्नी माने बात, दें ध्यान बहना, भाई, 
और हम क्या मागें, सोच इच्छित सब पाई.
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शुभचिंतक हों आप से, फिर क्या है परवाह, 
बरसे वचनों से दुआ, नहीं शेष कुछ चाह, 
नहीं शेष कुछ चाह, हमें धन्य बना जाते, 
मिला आपका साथ, भाग्य पर हम इतराते, 
सभी प्रशंसक बने, ढूँढें दिखे ना निंदक, 
कैसे हो आभार, मिले ऐसे शुभचिंतक.
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ज़्यादा आशा से मिला, आपका स्नेह, प्यार,
बधाइयों के लग गए, फुनवा पर अंबार, 
फुनवा पर अंबार, साथ संदेसे आए, 
वाट्सैप वाट लगे, मेमोरी फुल दिखाए, 
करता हूँ आभार, धन्यवाद सहित वादा, 
स्नेह मिला भरपूर, उम्मीद से भी ज़्यादा.
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मिलें हमें शुभ कामना, करते हम आभार, 
दिन हमारा सफल हुआ, बहुत बड़ा उपहार.
बहुत बड़ा उपहार, हमें बनाया चहेता, 
आई नई ऊर्जा, होते उसके प्रणेता.
दोनों आगे बढ़ें, जीवन में मिल कर चलें, 
बने साथ हमारा, यूँ ही बार बार मिलें. 
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आज हमारी हो गई, डुकरी इकसठ साल, 
फिर भी खिलती ही रहे, जैसे रतन प्रवाल. 
दिया नहीं हमने उसे, कुछ विशेष उपहार, 
वह भी केवल चाहती, बसा रहे संसार. 
जन्नत की मिलें खुशियाँ, जो चाहे वह भाय, 
उसकी आस यही रहे, पूर्ण समर्पण पाय. 
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चोखी गल्लाँ कह गए, दोहों में *सरदार*,
बातें होतीं तीर सी, सटीक लच्छेदार. 
दोहे उनके हैं भले, करें सदा *कल्यान*,
अच्छी सीख बता रहे, रखिए उनका मान. 
ताल ठोक कर बोलते, जैसे गर्जे *सिंह*, 
सीधी सच्ची बात से, छोड़े हैं पद-चिन्ह. 
दोहे में लगती भली, उसकी लय *श्रीमान*, 
अलंकार से जब सजे, तो पड़ जाती जान. 
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गुड़ की गजक से मीठे, लगते प्यारे बोल, 
रस गुल्ले की चाशनी, तिल के लड्डू गोल. 
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दधि चिवडे़ का नाश्ता, किया आपके साथ, 
बड़े प्यार से मिल गले, मिला हाथ से हाथ. 
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प्रेम-भाव आदर करें, पूछें दिल का हाल, 
होती गपशप आप से, नैनन झरें प्रवाल. 
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आप बधाई दीजिए, करते हम स्वीकार, 
किस तरह धन्यवाद कहूँ, कैसे हो आभार, 
कैसे हो आभार, हम हो गए कर्जदार, 
साल बढ़ा तज़ुर्बा, अब उमड़ा सबसे प्यार, 
शुभेच्छा से कम हुए, जीवन के संताप, 
रही हमारी कामना, सदा दुआ दें आप.
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याद दिला दी आप ने, दे कर मुबारकबाद,
कैसे मैं शुक्रिया करूँ, कैसे दूँ धन्यवाद, 
कैसे दूँ धन्यवाद, रहूँ आपका आभारी, 
यहाँ तक आने में, आप की साझेदारी,
आगे का जीवन कटे, भली करें फरियाद, 
दीजिए आशीर्वाद, हम करवाएँ याद.
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प्यार पिताश्री का सदा, निःस्वार्थ मिल जाय,
चाहे भूमंडल में रहें, या स्वर्ग से इठलाय,
या स्वर्ग से इठलाय, सारा जीवन कमाते,
सुखी संतान को देख कर, अपने दुःख बिसराते,
शिक्षा उनकी मान कर, बन जाओ जिम्मेदार,
करें कृपा, दें आशीष सदा, लुटाते रहें वे प्यार.
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अमर मात को अलग हुए, बीत गया कुछ काल,
पलक झपकते कैसे बीते, पूरे तीन साल,
पूरे तीन साल, एक ही दिन दो दो मात सिधारी,
स्मृतियाँ शेष रह गईं, अनुभव, शिक्षा की पिटारी,
हृदय से नमन करें, उनकी सीखों पर रहे नजर,  
सदा हमें दें आशीष, कृपा दृष्टि बने अमर.
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शुक्ला जी के सहयोग से, कर पाए गणपति दर्शन, 
सुखद संयोग रहा, प्रेम से करवाए पूजन,
प्रेम से करवाए पूजन, शाँति से गाड़ी घुमाए,
पूरा समय देकर, गणपति अर्चन का सुख पाए,
मावा, संवाद से, ड्राइविंग में लगाई एनर्जी, 
खुश रहो कर, सदा सेवा देते रहें, शुक्ला जी.
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धन्य निधि हो गई, पा रोहित का हाथ,
जन्म सार्थक हो गया, अमर रहे यह साथ,
अमर रहे यह साथ, जीवें स्वस्थ जीवन, 
महके कुल सुरभि, फले परिवार चमन, 
भाविनी युगाध्या से नाम, रखे न कोई अन्य,
स्वागत, व्यवहार से, हम भी हो गए धन्य.
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खातिरदारी में बने, नव अनुपम कीर्तिमान,
स्नेह, संभाषण से, दिया अप्रतिम सम्मान, 
दिया अप्रतिम सम्मान, परिवार को रहे समेटे,
मृदुल संभाषण, सत्कार से, अपनत्व लपेटे,
अपने सत् व्यवहार से, भली निभाई जिम्मेदारी, 
पूरी निष्ठा से पाओ, अलका की खातिरदारी.
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सपरिवार आ गए हम , मुग्धाँकित के द्वार ,
देखें कैसा रखा है अपना , मुग्धा ने घर बार ?
मुग्धा ने घर बार , सजाई कैसी गृहस्थी ?
कैसे बना रहे संतुलन , वह और जीवन साथी ?
खुश हो गया जी , तसल्ली मिली अपार ,
प्रेम भाव बना रहे , पुन: आएँ सपरिवार .
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विनय ऋतु के साथ में , लग गई , यारन की भीड़ ,
खातिरदारी भरपूर हुई , रिवर्तिका के नीड़ , रिवर्तिका के नीड़ , अपनेपन की बरसात ,
सूखी होली खिल गई , स्नेह करे करामात ,
मिला समय , सम्मान , सभी को अतिशय ,
सुखी , स्वस्थ , प्रसन्न रहें , अपने ऋतु विनय .
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छोड़ी न कोई कसर ,  किया स्वागत व सम्मान ,
प्रेम भाव से मिले सभी , तज कर पूरा अभिमान ,
तज कर पूरा अभिमान , संतुष्ट हो गए मेहमान ,
खान - पान , आवास में , निकाले सारे अरमान ,
हृदय से आभारी रहे , लेश मात्र न शिकायत थोड़ी ,
इस अनुपम शादी में आपने ,  यादगार अमिट बना कर छोड़ी .
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आगमन से आप के , सुहानी बन गई शाम ,
अच्छा लगा , मज़ा किया , अब होगा आराम ,
अब होगा आराम , स्मृति में होगी आपकी याद ,
स्वस्थ रहें , मिलते रहें , सब से है फ़रियाद ,
यूँ ही आप मुस्कुराते रहें , मुदित रहे तन मन ,
ईश्वर करें , बार बार , होता रहे , हम सब का  आगमन .
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