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नेपाल यात्रा
कोरोना के कष्ट से, चिंतित हम बेहाल,
निर्णय था अनुभूति का, हो आएं नेपाल.
चुने लोग कुछ श्रम करें, हो जाए कल्यान,
बात सभी से कर चुके, निकला एक निदान.
नेपाल नाम से हर्षित हुए, अलग सा उल्लास मन को छुए,
लोग शताधिक कामना करें, सबने अपने नाम लिखाए,
खर्चा करने को थे राजी, सबसे पहले मारें बाजी,
अर्ध शतक के दो ग्रुप बनाए, खुद को हम दूजे में पाए.
मिला नीम जाना पहचाना, पिछला अनुभव सबने माना,
चुना मास सितंबर का भला, मौसम भी रहता उजला,
दीक्षित जी साथ में आए, टोपी भोजन साथ में लाए,
टी-टू पर सब यात्री आए, उड़ा जहाज दिल्ली लाए.
कर औपचारिकता सभी वहाँ, देखा त्रिभुवन का सुंदर जहाँ,
हलकी बारिश करे स्वागत, दर्शन करें सब अभ्यागत,
दो बसों का व्यवस्था करी, दूर पार्किंग में दिखीं परी,
शाम तलक घंघेरी आए, कमरों का आबंटन पाए.
छोला, मटर बिना ना पूरा, सलाद रहित भोजन अधूरा,
पापड़ भोजन स्वाद बढ़ाए, हरी मिर्च ना मन को भाए,
भोजन में नहीं नमक, मिर्ची, पौष्टिक सब्जी सबको जची,
अलग से रखा सामिष खाना, मिष्ठान्न का चलन पुराना.
खाना खा कर थकान उतारी, अगली सुबह की फिर तैयारी,
एवरेस्ट देखने कुछ जाते, कृपा खराब मौसम बताते,
मंदिर पशुपतिनाथ जाते, पूजन कर शीश नवाते,
नाना विधि श्रद्धा दिखलाएँ, मंत्र जाप की विधि अपनाएं.
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बौद्ध स्तूप, दरबार भाए, ट्रैफिक जाम में नगर घुमाए,
सुबह सुबह पोखरा जाएं, राज मार्ग भी अवरुद्ध पाएं,
त्रिशूली, माडी, सेती देखीं, छटा अनुपम उनकी विशेखी,
आतिथ्य टीका रिसॉर्ट मे पाए, गरम चपाती मन को भाए.
आठ सितंबर सभी मनाएं, भूपेन दा के गीत गाएं,
विंध्यवासिनी मंदिर देखा, रहा लिफ़्ट आनंद विशेषा,
सेती नदी का माखन पानी, झरनों की शोभा का सानी,
गुप्तेश्वर की गुफ़ा निराली, सीढ़ी चढ़ कर साँस फुला ली.
गुरखा रेजिमेंट की यादें, फिर आने के करते वादे,
वाराही माँ का स्थान निराला, बीच नाव का गड़बड़ झाला,
सेफ़्टी जैकेट रही जरूरी, खुद की सुरक्षा है मजबूरी,
पैदल चल कर थकते सारे, अंदर से सब गाली मारे.
चले पोखरा, आए चितवन, देखा जन जीवन, पशु, उपवन,
थारू नृत्य आनंद दिलाते, आलू गोभी से उकताते,
देखे जीप में मगर, हाथी, कोयल, मोर, हिरन वन साथी,
राह में मनकामना घुमाते, रोप वे का आनंद उठाते.
अगले दिन काठमांडू आते, ट्रैफिक जाम में फँस जाते,
वापस घंघेरी में आए, मौज मस्ती आनंद उठाएँ,
सुबह शॉपिंग मॉल में करते, नेपाली रुपए खरचते,
फ़ीड बैक अच्छा दे आए, लौट के बुद्धू घर को आए.
कोशिश हो अनुभूति की, घूमें बारंबार,
नए मीत मिलते रहें, परिचय हो आधार.
दास, अरून, प्रसाद करें, आयोजन हर साल,
दिल से करते प्रार्थना, रहें सभी खुशहाल.
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*बृज चौरासी यात्रा*
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कृपा हुई बलराम की, मन में उठा विचार,
कुछ तीरथ भी कर सकें, होता बेड़ा पार.
पत्नी की थी प्रेरणा, घूम सकें बृज धाम,
अधिक कहीं कुछ भक्ति बढ़े, याद करें घनश्याम.
यात्रा में साथ रहे अपना, फिर साकार हो सके सपना,
ख्याल अचानक हमको आया, जिज्जी सा ना कोई पाया,
हमने उनको खूब पटाया, बहुत जतन से उन्हें मनाया,
टिकट राजधानी में कटाया, इक्कीस मार्च हमने पाया,
ट्रैवल वाले से बात करी, सुखबीर ने हामी भरी,
नोवा इन में हमें पहुँचाया, अच्छा डीलक्स रूम दिलाया,
ताजा होकर आएँ, बोला, करने चले दर्शन बम भोला,
जमुना पूजा संकल्प किया, आचमन कर अभिषेक लिया.
दाऊ जी ब्रजराज कहाए, ब्रज छोड़ कर कहूँ न ध्याये,
दान दक्षिणा ट्रस्ट में दी, मन से धारण परसादी,
हाथ जोड़ कर शीश नवाया, पंडे ने महत्व बताया,
देश काल से विचलन कीन्हा, निश्चित मार्ग को नहीं चीन्हा,
पहले मथुरा गोकुल घूमे, चरण राधिका जी के चूमे,
ब्रह्मांड घाट, महावन चले, लोह वन, मधुबन गाँव रावले,
मान सरोवर, बेल वन देखे, पानी, भाँडीर के लेखे,
भद्र वन की शोभा न्यारी, निधिवन में देखी क्यारी.
जन्मभूमि में भीड़ मतवाली, तपती धूप, जली पराली,
बाँके बिहारी छवि निराली, तीन तरफ से दर्शन पाली,
गाइड, पंडित कथा सुनाते, अपने ढंग से बांचते जाते,
नौका ले कर हमें घुमाएं, कंस किला के दर्शन पाएं,
पतली गली में कार न जाए, ई-रिक्शा से सैर कराएं,
घूम घूम कर जब थक जाएं, बृजवासी में खाना खाएं,
निधि वन की तो छटा निराली, दिल में अलग जगह बना ली,
देखा वन जहाँ रास रचाया, बिखरा हुआ शृंगार दिखाया.
बिरला मंदिर भला बनाया, श्रद्धा से मन झुक पाया,
पागल बाबा की भक्ति विशेखी, सुंदर मंदिर की छवि देखी,
उम्र हमारी आड़े आए, नौ मंजिल तक चढ़ ना पाए.
झाँकी टिकिट वाली सुंदर, हर्षातिरेक से भावुक अंतर,
गोवर्धन की हुई परिक्रमा, ई-रिक्शा से प्वाइंट घूमा,
राधा रानी मंदिर अनुपम, धूप, भीड़ में निकले दम,
चार धाम के दर्शन पाए, केदार चढ़ाई में घबराए,
यमुना तट, वट, कदंब लुभाएं, चीर हरण कान्हा कर पाए.
इस्कॉन, प्रेम मंदिर लुभाते, फव्वारे इतिहास बताते,
नीब करोली में सिर झुकता, गौरी गोपाल में मन रमता,
प्रिया कांत मंदिर की झाँकी, गंगा आरती दूर से ताकी,
होली गेट आई सवारी, शहर बाजार में ट्रैफिक भारी,
स्मृतियों का इतिहास बताया, सुन सुन कर मन हरषाया,
ब्रज भाषा का मजा उठाया, लुत्फ़ खुद बोलने में आया,
लस्सी ने दी काफी राहत, आए ताज़गी, बनती सेहत,
सब्जी कचौड़ी भला नाश्ता, दही, जलेबी देती रास्ता.
यात्रा अपनी हो गई, जिज्जी का आभार,
छोटे ट्रिप में बस गया, यादों का भंडार.
खर्चा बाँटा साथ में, कोई नहीं उधार,
अपने जन का हो गया, इतने में उद्धार.
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*मुन्ना मामा*
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मुन्ना मामा को सभी, कह देते योगेश,
सबके दिल में बस गए, रहें भले परदेश.
घर में छोटा वह रहा, पाए सबका प्यार, रखा लाड़ में बाल को, दे कर उसे दुलार.
मार्च माह चौदह आई, सन इकसठ खुशियां ले आई,
उस दिन घर में आया लल्ला, मच गया मुहल्ले में हल्ला,
छोटा बच्चा सबसे प्यारा, सबकी पुतलियों का दुलारा,
देखा नहीं कभी चिल्लाया, हरदम माँ का आँचल पाया,
पापा उस पर प्यार लुटाते, भाई छोटे को गले लगाते,
बहनें उस पर वारी जातीं, थपकी दे कर उसे सुलातीं,
देखा नहीं उसे जब छोटा, शादी बाद हुआ था भेंटा,
सुनी सुनाई बात बताऊँ, मुन्ना मामा के गुण गाऊँ.
रहे तेज सदा पढ़ाई में, लोग बता रहे कारनामे,
स्कूल में वह अव्वल आते, अच्छा रिज़ल्ट सदा दिखाते,
मेहनत ने रंग दिखाया, रुड़की में प्रवेश वह पाया,
घर वालों को गर्व कराया, सब पर अपना रौब जमाया,
झंडा अपना खूब फहराया, विजय पताका को लहराया,
भाई ने जीना सिखलाया, शान से रहना बतलाया,
जीजा जी भी प्यार लुटाते, आदर उससे हर पल पाते,
ओएनजीसी की नौकरी, मन में नाना कामना भरी,
खूब हवा मुंबई की लगी, अभिलाषाओं
की चाह जगी,
पूरे अरमान करे सारे, पाल कर नए शौक विचारे,
काम धाम में नाम कमाया, छोटे बड़े को गले लगाया,
तर्क शक्ति में चित्त लगाया, सही बात सबको समझाया,
तारीफ़ें करते सहयोगी, रहे निस्वार्थ कर्म के योगी,
संयत वाणी के वह स्वामी, गलत बात की भरे न हामी,
शादी कर भी रहे दुलारे, बहनों के हैं मुन्ना प्यारे,
जीजा उन पर जान लुटाते, बड़े लाड़ से उन्हें दुलराते,
जो भी उनके द्वारे आते, श्रद्धा, आदर से भर जाते,
बड़े मान से उन्हें घुमाते, दूर दूर की सैर कराते,
देहरा या मुंबई दूजा, रहा काम ही उनकी पूजा,
शादी लवली से हो पाई, आ कर घर को स्वर्ग बनाई,
खुशियाँ जीवन की सब पाईं, अम्मा पापा के मन भाई,
पड़ोस में घर भी ले लीना, काम काज में रही प्रवीना,
रेशू, किट्टू घर में आए, भावी जीवन के स्वप्न सजाए,
अच्छी शिक्षा उन्हें दिलाई, अपनी सोची बहुत भलाई,
साठ साल को पूरा करते, सब बच्चों पर जान छिड़कते,
बड़ा लाड़ सभी से लड़ाते, सब के हृदय में समाते,
सेवा निवृत्ति ले कर आएं, घर बैठ आराम फरमाएं,
चोट कहीं कमर में पाई, कार चलाने से भय खाई,
वाणी ने मधुरता दिखाई, सबके मन को मोहें भाई,
शौक शेष जो रहे अधूरे, अब फुरसत से होंगे पूरे,
सुखदाई हो भावी जीवन, भजन, ध्यान में रहे समर्पन,
हम सब आशीषें दे जाएं, मन में नहीं क्रोध रख पाएं.
करते हैं हम प्रार्थना, कर दो सबको माफ़,
भावी जीवन सुखद हो, दिल को कर लो साफ़.
गलती गर हम से हुई, दे दो माफ़ी दान,
सब का सब विधि हो सके, जीवन में कल्यान.
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सविता चालीसा
सबसे छोटी लली हैं, सबकी प्यारी जान,
नाम दिया सविता उन्हें, गुण देखिए महान.
मात-पिता, भाई-बहन, करते उससे प्यार,
उसके आने से लगा, भरा हुआ परिवार.
कन्या एक बरेली आई, पूरे घर में खुशियां छाईं.
पांच जनवरी बड़ा सुहाना, सबने उसको शुभ ही माना.
घर में बेटी रही पांचवी, बनती वह संतान सातवीं.
उसकी गतिविधि रही निराली, सब लोगों से घुल-मिल पाली.
बहनों की रही नयन-तारा, माँ ने उस को खूब दुलारा.
पढ़ने में दिखी चतुराई, सब कुछ सीख फटाफट पाई.
काम समय से सब कर पाती, घर में उसकी प्रगति बताती.
खेल-कूद में रहती आगे, नवीन विचार मन में जागे.
शाला में जब नाम लिखाया, कक्षा दो में उसे बिठाया.
बहनों संग करती पढ़ाई, नहीं शिकायत किसी से आई.
नृत्य संगीत में रुचि दिखाई, घर की शाला में नाम लिखाई.
घर के काम रास ना आए, सारी दीदी नाज उठाए.
पढ़ने में वह आगे रहती, खेल कूद की बातें करती.
हाई-स्कूल में फ़र्स्ट आई, घर में सब पर रौब जमाई.
सबसे अलग पहचान बनाई, परिवार में इज्ज़त बनाई.
प्रथम श्रेणी इंटर में लाई, एक भली सी रीति निभाई.
विज्ञान में स्नातक कर पाई, गणित विषय में नाम कमाई.
भली जाॅब सरकारी पाती, स्कूटी से वह शाला जाती.
बच्चे मसले हल कर पाते, कृतज्ञता से शीष नवाते.
अलग एक पहचान बनाई, सबके दिल में जगह बनाई.
बड़े अरमान पिता सजाए, वर ढूँढ कर जतन से लाए.
शादी देख नहीं वह पाए, ऊपर से आशीष सजाए.
विनीत संग ले लिए फेरे, चारकोप का घर संभारे.
जमी गृहस्थी, मौज मनाई, सबसे प्रीत भली निभाई.
श्रेया आ कर भरे किलकारी, खेलें होली भर पिचकारी.
अपने शौक करे सब पूरे, नहीं रहे कुछ ख्वाब अधूरे.
बाकी कसर उत्कर्ष निकाली, रूठी मम्मी खूब मना ली.
सहारा की प्रथा अपनाई, सबके साथ प्रीत निभाई.
बड़े चाव से पर्व मनाए, मन से पूरे भवन सजाए.
पढ़ने में हैं बच्चे आगे, किस्मत उनकी रवि सम जागे.
खेल-कूद के ढंग निराले, सबको हिल-मिल गले लगा ले.
इम्तिहान में अव्वल आते, दुआ बड़ों से ढेरों पाते.
रही सहारा संकट में जब, सोचे कुछ अनुभव के करतब.
ब्राइट हॉरिज़न बनी आसा, नेक करम करते परकासा.
बड़ी लगन से स्कूल सँवारा, होती शिशु की पालनहारा.
गतिविधि होतीं बहु-आयामी, रखे चाकर, बन गई स्वामी.
मकान मुंबई में बनाया, भाड़े पर फिर उसे चढ़ाया.
रिश्ते सबके साथ निभाए, कहीं विचार न मन को भाए.
लखनऊ सहारा ने भेजा, तबादले पर पति को सहेजा.
नए ढंग से सजती आसा, उम्र का अनुभव हुआ पचासा.
हम देते शुभकामना, हर पल हो कल्यान,
सविता चमके सूर्य सम, भला करें भगवान.
जीवन में सब सुख मिलें, अर्ध-शतक गुणगान,
हरफन मौला बन सकें, सविता भली महान.
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*अनुभूतियन्स का श्रीलंका भ्रमण*
चाह बनी *अनुभूति* में, जाएं पुनः विदेश,
अच्छा सा गंतव्य हो, लेवें मजा विशेष.
सोच समझ लंका चुनी, अगला बने पड़ाव.
*कॉक्स-किंग* माध्यम बना, जुड़े हमारे भाव.
सहमति जब जाने की पाए, सौ जन अपना नाम लिखाए.
मुस्लिम ने विस्फोट कराया, अंदर तक लंका थर्राया.
सोचा फिर *बाली* हो आएं, खूब आनंद वहां उठाएं.
रहा किराए में कुछ अंतर, वापस लौट पड़े लंका पर.
सोलह को *टी-टू* पर आए, आपस में मिल सब हरषाए.
पूरी कर के सभी प्रणाली, देरी बिना उड़ान निकाली.
सुबह सुबह *कोलंबो* आए, तीन बसों में होटल लाए.
नमन *आयबोवन* से पाया, गाइड ने इतिहास बताया.
*तुर्या होटल* रहा सुहावन, *बैंटोटा* जँचता मनभावन.
सागर लहर निरख हरषाए, फोटो नाना विधि खिंचवाए.
मनचाहा भोजन कर पाए, बढ़िया नींद रात को आए.
तरण ताल में खूब नहाए, कच्चे आम तोड़ कर खाए.
सागर नौकायन कर आए, खरीद कर दालचीनी लाए.
मछली मसाज कर पाए, कछुए छोटे बड़े दिखाए.
जल क्रीडा के देख नमूने, रखे बुढ़ापे में मन सूने.
सुबह *कैंडी* की तैयारी, सुप्रभात से नाश्ते की यारी.
राह का भूगोल बताया, व्यवसाय, उद्योग समझाया.
संस्कृति से परिचय करवाया, बौद्ध धर्म से हमें जुड़ाया.
चाव से आए *पिनावाला*, देखेंगे हाथी मतवाला.
लोगों ने हड़ताल बताई, मन से दुखी हुए सब भाई.
*राॅयल कैंडी* बना प्रणेता, *थिलंका* चोटी का विजेता.
दो होटल में हमें रुकाया, कुदरत का आनंद उठाया.
बौद्ध स्तूप के दर्शन पाए, हीरों के गहने ललचाए.
लोक-कला ने हमें लुभाया, संस्कृति का परिचय पाया.
नाना पादप हमें दिखाए, गुण, आकार देख भरमाए.
बैटरी कार सैर कराए, सबने फोटो खूब खिंचाए.
*रम्बोडा* के झरने देखे, खेत सुरभित चाय के देखे.
बादल घिरे पहाड़ निहारे, नदी, घाट ने दिल ले डारे.
हनुमान पहाड़ी पर जापे, *नुवारा इलैया* में कांपे.
सीता जी के मंदिर आए, भक्ति भाव से सब जुड़ पाए.
पुष्प वाटिका रही निराली, अपना मन मोहे मतवाली.
*ऐशफोर्ड* में रात गुज़ारी, सुबह बढ़ाई अपनी सवारी.
आई बस में कहीं खराबी, अब क्या होगा, थी बेताबी.
जनता बस लाई *पिनावला*, अपना सब सामान निकाला.
सुनित ने समाधान सुझाया, दूजी बस को वहां बुलाया.
गज की मंथर चाल अनोखी, करें मध्यान्ह स्नान विषेखी.
*ग्लोबल टॉवर* होटल नामा, *कोलंबो* को करे प्रनामा.
लोटस टाॅवर, मंदिर देखा, ट्रैफिक का अनुबंध अनोखा.
फैशन हाउस करी खरीदी, याद प्रियजनों की दिलवा दी.
कई तरह के अनुभव पाए, लौट के बुद्धू घर को आए.
परिचय अधिक, मजा किया, लगा बड़ा परिवार,
ऐसा ही सौहाद्र हो, जुड़ा रहे संसार.
नाम बढ़े अनुभूति का, बढ़ता जाए प्यार,
*ज्योतिर्मय* की कृपा रहे, घूमें बारम्बार.
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रजनी के साठ साल
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जन्म बदायूँ में हुआ, दो बहनों के बाद,
उनसठ की जुलाई में, छबीस से आबाद.
पैदा होते ही पड़े, पिता गहन बीमार,
बच्ची के सौभाग्य से, मिला जन्म दोबार.
दुबली सी कन्या बेचारी, परवरिश में गई वह हारी,
उस पर जल्दी ध्यान न जाए, रो कर वह अक्सर चिल्लाए,
मात-पिता के सीमित साधन, कैसे करें परिवार-पालन,
सब उसे रिंगटोरिया कहते, बाल कला पर सारे हँसते,
गुड्डो नाम से सभी पुकारें, हर जगह उसे मिली फटकारें,
लगती सबको वह अति प्यारी, बहनें उसकी हुईं रखवारी,
स्कूल में उसे जब बैठाया, रजनी उसका नाम लिखाया,
बहनों के साथ पढ़ने जाती, छुट्टी पर सीधे घर आती,
मनोयोग से शाला जाती, नहीं किसी से लड़ कर आती,
बड़े कायदे वह अपनाती, कभी वहम की हद हो जाती.
औसत दर्जे में पढ़ जाती, नहीं रैंक कोई ला पाती,
फिर भी है संतुष्ट बताती, सादा पास से खुश हो जाती,
दसवीं में द्वितीय श्रेणी लाई, वादन में इच्छा दिखलाई,
राजनीति की करी पढ़ाई, उसमें आगे बढ़ ना पाई,
विशेष महारत कभी न पाई, बारहवीं दो बार दे आई,
हिंदी में रुचि अधिक दिखाई, उसमें एम. ए. कर पाई,
अपने बल पर शिक्षा पाए, नहीं जरूरी कालेज जाए,
कई स्कूलों से अॉफर पाया, बस एक ही को अपनाया,
बच्चे छोटे खूब पढ़ाए, उन से मन का आदर पाए,
मजा पढ़ाने में अति आया, तन मन से पाठ पढ़ाया.
बी. एड. बाद में कर पाई, काॅलेज में हुई पढ़ाई,
बहनों संग घर को संभाला, उसमें न कोई दोष निकाला,
हर हालत में खुद को ढाला, नहीं पता पड़े किस से पाला,
भाभी से तालमेल बिठाया, बच्चों पर प्यार लुटाया,
उचित समय वर नाना आए, मजबूरी में सब ठुकराए,
करा त्याग बहनों की बारी, उन सबका ख्याल कर डारी,
छोटी बहन की हुई शादी, गम सहने की होती आदी,
बला सविता समय पर आई, शक्ति लौह छड़ डलवा पाई,
नाना जगह के लोग भाए, इच्छुक कई वर बतलाए,
भाई बहन के नंबर आए, बड़े चाव से मजे उठाए.
बाद पिता, माँ आगे आई, शादी की सब रस्म निभाई,
बेटी बेटा साथ में पाए, बड़े प्यार से सब अपनाए,
पति संग तालमेल बिठाई, खुशहाल परिवार बसाई,
बेटी की शादी रचवाई, बड़े चाव से बिदा कराई,
गलत फहमी भी आड़े आई, मन मुटाव हुआ कुछ भाई,
कटु शब्द ने कमाल दिखाया, बंधन प्यार का ठुकराया,
कहे वचन कसम सम लगते, बातें करने में हम डरते,
कुछ गम खुशी काल दिखलाई, फिर भी अकड़ में नहीं ढिलाई,
तरसें हाल पता करने को, हँसी खुशी कुछ जमे न मन को,
कारण इसका समझ न आया, लिखा भाग का मन भरमाया.
रजनी के पूरे हुए, साठ साल हैं आज,
जुड़ना उनसे चाहता, सारा सभ्य समाज.
हंसी खुशी से जिंदगी, बीते अच्छा काल,
जन्म दिवस शुभकामना, करते नहीं सवाल.
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विभोर चालीसा
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दो बाईस को आया, लखीमपुर का लाल,
दादा-दादी हो गए, पाकर उसे निहाल.
पापा मम्मी को मिलीं, खुशियाँ अतुल, अपार,
मानों उनका बस गया, पूरा ही संसार.
नाना-नानी का दुलारा, मौसी दें प्रेम की धारा .
मामा का लाड़ वो पाए, सिर चढ़ा कर उसे घुमाए .
गोरा सुंदर रूप सलोना, काजल से लगा ढिठौना .
स्वस्थ बालक सबको भाए, उसे खिलाने को ललचाए.
माता जब पढ़ाने जाए, नानी घर खुश हो जाए .
पापा जब आॅडिट को जाते, ढेर खिलौने उसके आते.
आकर बहना काम बढ़ाए, भाई का वो प्यार बटाए .
झगड़ा करने में शरमाती, शोर मचा कर सबको जगाती.
बहना की रक्षा कर लेता, उसके रहते कुछ न होता .
भाई-बहन की जोड़ी प्यारी, जग सब जाता बलिहारी . 10
अनुशासन पूरा दिखलाए, सब पर अपना रौब जमाए.
पढ़ने में वह अव्वल आए, टीचर भी उसके गुण गाए.
नाना संग शतरंज जमाए, मात कभी न वह दे पाए .
मौसी ने कैरम सिखलाया, भले खेल से उन्हें रिझाया .
करी प्रतियोगिता की तैयारी, मिली सफलता उसमें सारी .
पुणे से इंजीनियरिंग करी, मिल गई फिर वहीं नौकरी.
तकनीकी नौकरी वह पाता, पढ़ा हुआ कुछ काम न आता .
दो -तीन जगह सेवा दे दी, सबने फिर तारीफ़ें कर दीं.
फ़्लैट एक बुक कराया, मनोयोग से उसे सजाया .
फ्रिज, टी. वी. व बेड मंगाया, बहुत ढंग से उसे लगाया . 20
बाइक और कार ले लीन्ही, मजे में सवारी उसकी कीन्ही .
सर्विस उसकी सदा कराई, नियम कायदा खूब अपनाई .
पर्यटन में रुचि दर्शाई, भारत भर में करी घुमाई .
मित्र, सखा, संबंधी भाए, सबसे अच्छे रिश्ते निभाए .
बहना पर वह जान लुटाए, आँच कभी न उस पर आए .
सेवा करने को वह तैयार, हाल बताए बस कोई यार .
अच्छे भोजन के शौकीन, पसंद नहीं उसको कैंटीन .
किचन में सामान जुटाया, कुक से उसे बनवाया .
फालतू खर्च में नहीं विश्वास, सादा जीवन उसकी आस .
दिल का वह है अति साफ, सबको कर देता माफ़ . 30
फिर आया शादी का खयाल, उठे दिमाग में कई सवाल .
होगा कैसा जीवन साथी, प्यार की जग पाए बाती .
चमका उसका भाग्य सितारा, सुरभि का मिल गया सहारा .
देखे शादी के विज्ञापन, मिला नहीं अपनापन .
सुरभि बेटा मन को भाए, साथ में सतरंगी सपने सजाए .
इसी लिए हम सब आए, यह शादी यादगार बन जाए.
सारी खुशियाँ दोनों पाएँ, आपस में विश्वास जगाएँ .
एक दूसरे के हो जाएँ, सुख दुख के साथी हो जाएँ .
हम सब शुभकामना दे जाएँ, उनको दिल से आशिष दे जाएँ .
रहे सदा सुखी जोड़ी प्यारी, यह रही मनकामना हमारी . 40
स्वागत सबका कर रहा, यहाँ सदन में आज,
एक लाल को आशीष, देता सभी समाज.
हरषित सबके साथ हैं, माता, पिता, विभोर,
बहना की मत पूछिए, यह दिल माँगे मोर.
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प्रानिका की पहली वर्षगाँठ
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बेटी ने अवतार ले, खुशियाँ भर दीं आज,
प्यारी सी किलकारी से, मुदित सकल समाज.
लंबे अरसे से रही, उनकी बेटी-चाह,
बिनय माँगते ईश से, खूब करें परवाह.
नन्ही बिटिया घर में आई, दादी देख उसे मुसकाईं.
खुद से पहले चाची लाई, उस दिन उनकी हुई सगाई.
उसने खुद मुहूर्त निकाला, समय-पूर्व कहे जग वाला.
प्रथम क्रन्दन सुनती नानी, ईश कृपा सब जग जानी.
नाना-दादा अति हरषाए, मृदुल मुस्कान उर भर लाए.
कारण शीत पीत दबोचा, पराबैंगनी उपाय सोचा.
तीन दिवस सिकाई करवाई, तब जाकर छुट्टी मिल पाई.
क्लाउड नाइन रहा आभारी, अवतरित हुई बिटिया प्यारी.
दादी मालिश-तेल लगाएँ, नहा धुला कर साफ बनाएँ.
दादा उसको शीष चढ़ाएँ, उपवन में फिर खूब घुमाएँ.
मुग्धा अंकित अति हरषाए, बड़े चाव से उसे सजाए.
नए परिधान उसे सजाते, विविध वेश में फोटो आते.
समयोचित गतिविधि दिखलाई, सोना, हँसना वह अपनाई.
रोने में नहिं कोई सानी, नानी भी याद करे नानी.
जब भी कभी साँस भर जाए, शकल देख कर सब घबराए.
पूरी नींद जब वह सो पाती, मूड में हो तो मुसकाती.
दो चोटी में खूब सुहाती, मन से फोटो खूब खिंचाती.
विविध वेश में सब दुलराते, हँस कर उसे गले लगाते.
नानी घर मुंबई आई, रिद्धू भाई को खीर चखाई.
सागर तट पर गोवा आई, चचा जान की शादी कराई.
चाची संग लाड़ लड़ाई, उनसे प्रीत भली निभाई.
दादी के संग राँची घूमी, अपने घर का माथा चूमी.
चाची उसकी ऐसी आई, चाचा बाहर गए दुबाई.
दादू कार में उसे घुमाए, नातेदारों से मिलवाए.
घर वापस जब पूना आई, सबमें अपनी पहचान बनाई.
सेरेलक का भोग लगाए, नाना भोजन वह चख जाए.
पाउडर दूध वह पी पाए, पापा चटनी उसे चटाए.
मम्मी जब आॅफिस जाए, दादी संग मौज मनाए.
उचित समय टीके लगवाए, रोग निरोधक उसे बनाए.
शयन से उठ, बैठ वह जाती, ले सहारा खड़ी हो जाती.
धीरे-धीरे कदम बढ़ाया, हाथ छोड़ कर चलना आया.
उठ कर खुद खड़ी हो जाती, मरज़ी से वह बैठ भी जाती.
हाथ हिला कर विदा दे जाती, पापा को बॉय कह आती.
मम्मी जब घर वापस आती, उसको देख दौड़ वह जाती.
बरतन उठा कर चल पाती, चम्मच कटोरी खूब बजाती.
सूखे कपड़े भी उतारे, सरिया कर उन्हें सँवारे.
टी. वी. पर गाने सुन जाए, मटक-मटक कर नाच दिखाए.
बदरी डाँस उसे मन भाए, बिन बोले सब कुछ कह जाए.
दिन में बारह पाॅटी आती, डाॅक्टर के फिर दर्शन पाती.
बाद प्रतीक्षा दो दाँत दिखाए, घर पर सब हरषाए.
मुनिया हमरी हो गई, एक साल की आज,
जन्मदिन की सत्कामना, देता सकल समाज.
स्वस्थ रहे, फूले फले, होवे परम विकास,
उसके उन्नत भविष्य पर, रहती सबकी आस.
रूस यात्रा
रिटायरमेंट के बाद, घूमन चले विदेश,
पत्नी के साथ से, बदल गया परिवेश.
अनुभूति की प्रेरणा, रहा अजब उत्साह,
आशंका की छाँव में, पनपी साहस राह.
वरिष्ठ जनों के दो बैच बनाए, डाॅ. दास खुद नेतृत्व निभाए,
छियालीस जन साथ चले, सारे पथिक रहे अलबेले,
मुंबई टी-2 पर सब मिले, औपचारिकता से सारे हिले.
शारजाह होकर मास्को आए, एअर एरेबिया का अनुभव पाए,
ट्राँज़िट से नव जीवन पाए, चाय काफी रुपये में पाए,
मॉस्को आकर इमिग्रेशन पाए, संयुक्ता से भेंट हो जाए,
मैट्रिक्स सिम चल न पाए, पैसे उसमें व्यर्थ गंवाए,
प्रयास नाना भाँति कराए, जल की कीमत जान फिर पाए,
वाॅल़्वो बस में सभी समाए, नीचे सब सामान सजाए,
माइक जब सूचना सुनाए, पुलकित सब चेहरे दिख जाए,
मैक्सिमा होटल में सब ठहराए, मैट्रो रेल में सफर कर पाए,
शहीद स्मारकों के दर्शन पाए, नाना चर्च में शीश नवाए,
महानगर की शोभा निहारी, अनुशासन की रही बलिहारी,
ट्रैफिक गति सबको प्यारी, साफ सफाई की महिमा न्यारी,
मास्को भवन, पार्क, पोर्ट निराले, अपनी मस्ती में झूमे मतवाले,
अचंभित हुए देखने वाले, किसके फोटो, किसके वीडियो निकालें,
दरबार हाल में खाना खाएँ, थकान सारी दूर भगाएँ,
कमरे पर न पानी पाएँ, अपनी बोतल खुद भर लाएँ,
सामान लिफ्ट से खुद लाएँ, ए.सी., पंखा सोच न पाएँ,
वार्मर से कमरा गरमाएँ, स्नान को न बालटी पाएँ,
रेस्तराँ में नाश्ता पाएँ, सामिष, निरामिष पहचाने न जाएँ,
भर भर पेट नाश्ता खाएँ, साबुत फल साथ ले आएँ,
घूम घूम कर जब थक जाए, आइसक्रीम से ऊर्जा पाएँ,
बूढ़े लघुशंका को जाएँ, साथ में रूबल देकर आएँ,
परिचय सत्र में सद्भाव बढ़ाएँ, बच्चों की सूचना पाएँ,
अपनी रुचि खुद ही बताएं, विनम्र श्रद्धा मन में लाएँ,
अंताक्षरी में गाने गाएँ, सुमधुर गीत गुनगुनाएँ,
चुटकुले सबने खूब सुनाए, हाउज़ी रूबल से खिलवाएँ,
मैक-डी में टॉयलेट निशुल्क जाएँ, सामिष भोजन भी कर पाएँ,
शौच मुफ्त, पर पैसे से पानी आए, नगर विचित्र यह भरमाए,
जब तक चाहें, वहाँ बैठ जाएँ, भ्रमण चाह से झट उठ जाएँ,
बाहर का भोजन भी कर पाएँ, पर, कचरा तनिक न फैलाएँ,
रूसी सर्कस उमंग भर जाए, गणपति दर्शन उसमें कर पाए,
नाना करतब मन को भाएँ, फीफा की थीम अपनाएँ,
हाथी, कुत्ते, शेर और घोड़े, सब का ध्यान अपनी ओर मोड़े,
जोकर की देखी चतुराई, कलाकार बालिकाएँ सब को भाई,
क्रेमलिन स्क्वायर और संग्रहालय की कहानी,
भवन भव्यता, फव्वारा श्रंखला का नहीं कोई सानी,
बिजली बस, ट्राम का नज़ारा, ट्रैफिक जाम से दिल भी हारा.
मॉस्को दर्शन की बस भी दिखी, दाईं ओर चलती गाड़ी देखी,
सड़क ज़ेब्रा पर पार कराएँ, सिगनल लाल झट रुकवाए,
मुस्तैद ट्रैफिक पुलिस पड़ी दिखाई, गलती छोटी, तुरत कार्रवाई,
मास्को से हुई विदाई, नोग्रोद पहुँच गए सारे भाई,
रूस जन्म की धरती पावन, मिदी नदी की छटा मनभावन,
सडको होटल में रात गुज़ारी, मच्छरों ने कृपा सब पर बिखेरी,
रूसी डिनर भी कुछ को भाया, ब्रेक फास्ट से मन हर्षाया,
मध्य रात्रि तक रहा उजाला, व्हाइट नाइट का छाया बोलबाला,
सुबह तीन बजे पौ फट जाए, सूर्य देवता दर्शन दे जाए,
ऐतिहसिक किला दिखाया, अमर जवान ज्योति से मन हरषाया,
सम्मान शहीदों को दीन्हा, सैन्य उपकरणों का आदर कीन्हा,
चर्च, तोप और उपवन देखे, उपहार व चाॅकलेट निरेखे,
मोलभाव की प्रवृत्ति रंग लाई, जरा सी छूट से खुश सब भाई,
पीटरबर्ग्ज़ में होटल फ़ोन्ताना, एजी़मथ में खाएँ खाना,
स्काईबार की छटा अनोखी, छबि रात में रही बिसेखी,
चौक, पार्क औ नदी निराली, नौकायन में छलकी प्याली,
गिरजे, राजमहल और मॉल, एक से बढ़ कर एक विशाल,
बिछड़ जाए गर कोई साथी, उनकी भाषा आड़े आती,
पुष्किन महल के ठाठ निराले, ठिठक जाएँ देखने वाले,
स्वागत में जब बैंड बजाया, जन गण मन से तन हर्षाया,
दीदार की रही बड़ी कतार, यथा प्रवेश बैच, ईश्वर के द्वार,
कवर जूतों पर डालो, चरण रज से धरोहर बचा लो,
पच्चीकारी, द्वार, पात्र अनोखे, फर्नीचर निरख खुलती आँखें,
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई, फोटो लेने की रही मनाई,
अम्बर महल में मोबाइल आॅफ़, न कोई शोर, न कोई लाॅफ़,
पीटरहाॅफ़ पार्क के फ़व्वारे, अपलक उन्हें रहें निहारे,
संगीतमय कुछ उनके अंग, टाॅय ट्रेन लख रह जाओ दंग,
नहर बाल्टिक सागर में समाई, छबि उसकी बरन न जाई,
संग्रहालय गुम्बद वाले, स्मृति ताजी उनसे करा ले,
वोदका रही कुछ की प्यारी, जम कर खूब करी खरीदारी,
बारिश ने कुछ रंग दिखाया, ठंडी पवन ने बदन ठिठुराया,
डाॅल सेट, स्कार्फ़ खरीद लाए, कुछ शो पीस देख ललचाए,
जैकेट सबके मन को भाए, टाॅप निरख कुछ भरमाए,
बैले नृत्य की करी तैयारी, हो न पाई अधिक खरीदारी,
संस्कृति जानने की लालसा जागी, एक थीम पर नाचे प्रतिभागी,
ट्रैफिक जाम का पड़ा झगड़ा, जिससे मूड सभी का बिगड़ा,
वहाँ पहुँचने में हो गई देरी, पूरे पैसे दे कर आक्रोश बटोरी,
बुलेट ट्रेन से मॉस्को आए, अनुभव नया एक ले पाए,
बॉलिगो, ट्वेर स्टेशन आए, बस एक मिनट स्टॉप दिखाए,
रेडिओ और टीवी टाॅवर, काँच के पुल पर रंगीन झालर,
बिजलीघर, पोर्ट, ट्राम का उद्गम, फीफा का मैदान विहंगम.
वापसी स्वदेश हुई, संयुक्ता का आभार,
तकनीकी कारण बना, देरी का आधार.
अगली फ़्लाइट मिली, करके भागमभाग,
धन्यवाद अनुभूति, बढ़े प्रयास, दिमाग.
आज बसे हैं दिल में, चाहें हर दम दीदार.
जब एक मुन्ना शोर मचाए. 1.
बातें करने को सब ललचाएँ. 2.
कृष्ण कान्ता की धाक जमाएँ. 3.
आस पड़ोस में रौब जमाएँ. 4.
पर अंडा, मुर्गा मजे में खाएँ. 5.
सद्दी, मंज्झा लूट के लाए. 7.
नौकरी की तब जुगत बिठाई. 8.
प्रेम माधुर्य में नहीं कोई सानी. 9.
फिर घर के दायित्व निभाए. 10.
समाज परिवार में शान बढ़ाई. 12.
बेटी बेटे में कोई भेद न भाई. 13.
छोटों को तमीज़ सिखलाएँ. 14.
धर्म संस्कार को खूब पहचाना. 15.
सबके दिल में घर कर जाएँ . 16.
झट से उसको दामाद बनाए. 17.
सब अरमान पूरे कर पाएँ. 18.
रिंकी एम. बी. ए. कर जाए,
फिर तो जीवन सफल हो जाए. 19.
बेदाग जीवन की आशीष पाएँ. 20.
जीवन यापन सहज हो, मज़ा रहे हर रोज़.
सेवानिवृत्ति के बाद भी, मिलते रहें, है यही शुभकामना.