Sunday, 27 March 2016

चालीसा



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बाली यात्रा चालीसा : -

*मिला दिया अनुभूति ने, सबको फिर इक बार,*
*चले घूमने जोश भर, बाली द्वीप के द्वार...*


दास साहब ने मत बनाया, संदीप ने मूर्त कराया
एक आव्हान प्रसाद कीन्हा, शताधिक ने समर्थन दीन्हा. 

आनन फानन की तैयारी, दास जी की मेहनत सारी.
एम. एम. टी. से बात करी, उसके हाथ पर मुद्रा धरी.

एक वीक की बनी योजना, दो ग्रुप में सब को जोड़ना. 
प्लान सितंबर में बनाया, एक सौ साठ ध्यान धराया. 

दैनिक भ्रमण की जोत जगाई, सबके मन को वह भाई.
सात व नौ सितंबर भाए, मलेशियन यान ध्यान आए.

मुंबई से कुआला आए, फिर डेनपसार को धाए. नुग्रह राय विमान तल आए, वीसा, सीमा, जाॅंच कराए.           
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एअरपोर्ट पर स्वागत पाए, चंदन पुष्प गले पहराए.
तीन बसों से होटल आए, दो नंबर बस में हम आए.

यश, पंकज कमान संभालें, सारा बाली हाल बता लें.
नाश्ता कर बस में सब आए, उथली नाव में दस बिठाए. 

बड़े ताल में कछुए देखे, कुछ जलचर, पक्षी देखे.
हैरत से देखते सारे, फोटो नाना पोज़ संभारे.  

पर्वत पर था उलुवाटु मंदिर, अद्भुत प्रवेश, भूषा सुंदर.
जाना नहीं मंदिर भीतर, छीनें चश्मा, फोन बंदर.

वहां घूम कर क्रूज़ में आते, सागर दर्शन मौज मनाते. 
कलाकार कुछ गाने गाते, लोक कला संग भोज खिलाते.
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बैरोंग नृत्य का लिए मजे, स्वर्ण, रजत, भूषण बदन सजे.
उबुद महल, मंदिर में आए, ज्वाला मुखी के दर्शन पाए.

घाटी, पर्वत दर्शन पाए, गरम जल में तैर नहाए, 
बस में बैठ कदम बढ़ाए, भारत का भोजन हम पाए.

फिर हम नुसा पेनिडा जाते, फेरी में मजे लगाते.
कार पहाड़ पर चढ़वाते, फोटो स्थल पर आनंद उठाते. 

क्रिस्टल बीच पर रेता मिलता, रॉक बीच में पाहन दिखता.
याद जुहू बीच की आए, बैंड स्टेंड सभी को लुभाए.

खंडित कगार हमें भरमाते, वापस फेरी पर आ  आते.
पैदल चल कर सभी छकाते, होटल जा पुन: खाना खाते. 
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तीर्थ गंगा की मछली सुंदर, दिखे कछुए और मगर प्रखर.
फव्वारे, मूर्ति सुहाते, झलक संस्कृति की दे जाते. 

लांपु यांग प्रकाश के देवा, बिन मूरत भी पाते.
मंदिर में नहीं प्रवेश पाते, ड्रेस कोड में फिर भी सजते.

कृष्णा पैलेस मॉल दिखाया, उचित भाव का माल दिलाया.
सबने जी भर की खरीदारी, दिखाई अपनी दिलदारी.

अंत में लुआवा काफी ली, बेराटन, बडगुर झील मिली.
मंदिर उलंदानु, तानालोट, बाटिक पैलेस क‌रता चोट.

सबने अपने नोट खपाए, मान देख कर मन घबराए.
एक साथ मुंबई आए, अच्छा समय सभी बिताए.


*अवसर पा अनुभूति से, मिले कई परिवार,*
*ऐसे ही सद्भाव से, बढ़ता जाए प्यार....*

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नेपाल यात्रा 

कोरोना के कष्ट से, चिंतित हम बेहाल,
निर्णय था अनुभूति का, हो आएं नेपाल.

चुने लोग कुछ श्रम करें, हो जाए कल्यान,
बात सभी से कर चुके, निकला एक निदान.

नेपाल नाम से हर्षित हुए, अलग सा उल्लास मन को छुए,
लोग शताधिक कामना करें, सबने अपने नाम लिखाए,
खर्चा करने को थे राजी, सबसे पहले मारें बाजी,
अर्ध शतक के दो ग्रुप बनाए, खुद को हम  दूजे में पाए.

मिला नीम जाना पहचाना, पिछला अनुभव सबने माना,
चुना मास सितंबर का भला, मौसम भी रहता उजला, 
दीक्षित जी साथ में आए,  टोपी भोजन साथ में लाए,
टी-टू पर सब यात्री आए, उड़ा जहाज दिल्ली लाए.

कर औपचारिकता सभी वहाँ, देखा त्रिभुवन का सुंदर जहाँ,  
हलकी बारिश करे स्वागत, दर्शन करें सब अभ्यागत,
दो बसों का व्यवस्था करी, दूर पार्किंग में दिखीं परी,
शाम तलक घंघेरी आए, कमरों का आबंटन पाए.

छोला, मटर बिना ना पूरा, सलाद रहित भोजन अधूरा, 
पापड़ भोजन स्वाद बढ़ाए, हरी मिर्च ना मन को भाए,
भोजन में नहीं नमक, मिर्ची, पौष्टिक सब्जी सबको जची,
अलग से रखा सामिष खाना, मिष्ठान्न का चलन पुराना.

खाना खा कर थकान उतारी, अगली सुबह की फिर तैयारी,
एवरेस्ट देखने कुछ जाते, कृपा खराब मौसम  बताते,
मंदिर पशुपतिनाथ जाते, पूजन कर शीश नवाते,
नाना विधि श्रद्धा दिखलाएँ, मंत्र जाप की विधि अपनाएं.
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बौद्ध स्तूप, दरबार भाए, ट्रैफिक जाम में नगर घुमाए,  
सुबह सुबह पोखरा जाएं, राज मार्ग भी अवरुद्ध पाएं, 
त्रिशूली, माडी, सेती देखीं, छटा अनुपम उनकी विशेखी,
आतिथ्य टीका रिसॉर्ट मे पाए, गरम चपाती मन को भाए.

आठ सितंबर सभी मनाएं, भूपेन दा के गीत गाएं,
विंध्यवासिनी मंदिर देखा, रहा लिफ़्ट आनंद विशेषा,
सेती नदी का माखन पानी, झरनों की शोभा का सानी,
गुप्तेश्वर की गुफ़ा निराली, सीढ़ी चढ़ कर साँस फुला ली.

गुरखा रेजिमेंट की यादें, फिर आने के करते वादे,
वाराही माँ का स्थान निराला, बीच नाव का गड़बड़ झाला,
सेफ़्टी जैकेट रही जरूरी, खुद की सुरक्षा है मजबूरी,   
पैदल चल कर थकते सारे, अंदर से सब गाली मारे.

चले पोखरा, आए चितवन, देखा जन जीवन, पशु, उपवन,
थारू नृत्य आनंद दिलाते, आलू गोभी से उकताते,
देखे जीप में मगर, हाथी, कोयल, मोर, हिरन वन साथी, 
राह में मनकामना घुमाते, रोप वे का आनंद उठाते. 

अगले दिन काठमांडू आते, ट्रैफिक जाम में फँस जाते,
वापस घंघेरी में आए, मौज मस्ती आनंद उठाएँ,
सुबह शॉपिंग मॉल में करते, नेपाली रुपए खरचते,
फ़ीड बैक अच्छा दे आए, लौट के बुद्धू घर को आए.

कोशिश हो अनुभूति की, घूमें बारंबार,
नए मीत मिलते रहें, परिचय हो आधार.

दास, अरून, प्रसाद करें, आयोजन हर साल,
दिल से करते प्रार्थना, रहें सभी खुशहाल.
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*बृज चौरासी यात्रा*
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कृपा हुई बलराम की, मन में उठा विचार,
कुछ तीरथ भी कर सकें, होता बेड़ा पार.

पत्नी की थी प्रेरणा, घूम सकें बृज धाम,
अधिक कहीं कुछ भक्ति बढ़े, याद करें घनश्याम.

यात्रा में साथ रहे अपना, फिर साकार हो सके सपना,
ख्याल अचानक हमको आया, जिज्जी सा ना कोई पाया,
हमने उनको खूब पटाया, बहुत जतन से उन्हें मनाया,
टिकट राजधानी में कटाया, इक्कीस मार्च हमने पाया,
ट्रैवल वाले से बात करी, सुखबीर ने हामी भरी,
नोवा इन में हमें पहुँचाया, अच्छा डीलक्स रूम दिलाया,
ताजा होकर आएँ, बोला, करने चले दर्शन बम भोला, 
जमुना पूजा संकल्प किया, आचमन कर अभिषेक लिया.

दाऊ जी ब्रजराज कहाए, ब्रज छोड़ कर कहूँ न ध्याये,
दान दक्षिणा ट्रस्ट में दी, मन से धारण परसादी,
हाथ जोड़ कर शीश नवाया, पंडे ने महत्व बताया,
देश काल से विचलन कीन्हा, निश्चित मार्ग को नहीं चीन्हा,
पहले मथुरा गोकुल घूमे, चरण राधिका जी के चूमे,
ब्रह्मांड घाट, महावन चले, लोह वन, मधुबन गाँव रावले,
मान सरोवर, बेल वन देखे, पानी, भाँडीर के लेखे,
भद्र वन की शोभा न्यारी, निधिवन में देखी क्यारी.

जन्मभूमि में भीड़ मतवाली, तपती धूप, जली पराली,
बाँके बिहारी छवि निराली, तीन तरफ से दर्शन पाली,  
गाइड, पंडित कथा सुनाते, अपने ढंग से बांचते जाते,
नौका ले कर हमें घुमाएं, कंस किला के दर्शन पाएं,
पतली गली में कार न जाए, ई-रिक्शा से सैर कराएं,
घूम घूम कर जब थक जाएं, बृजवासी में खाना खाएं,
निधि वन की तो छटा निराली, दिल में अलग जगह बना ली,
देखा वन जहाँ रास रचाया, बिखरा हुआ शृंगार दिखाया.

बिरला मंदिर भला बनाया, श्रद्धा से मन झुक पाया,
पागल बाबा की भक्ति विशेखी, सुंदर मंदिर की छवि देखी,
उम्र हमारी आड़े आए, नौ मंजिल तक चढ़ ना पाए. 
झाँकी टिकिट वाली सुंदर, हर्षातिरेक से भावुक अंतर,
गोवर्धन की हुई परिक्रमा, ई-रिक्शा से प्वाइंट घूमा,
राधा रानी मंदिर अनुपम, धूप, भीड़ में निकले दम,
चार धाम के दर्शन पाए, केदार चढ़ाई में घबराए,
यमुना तट, वट, कदंब लुभाएं, चीर हरण कान्हा कर पाए. 

इस्कॉन, प्रेम मंदिर लुभाते, फव्वारे इतिहास बताते, 
नीब करोली में सिर झुकता, गौरी गोपाल में मन रमता,
प्रिया कांत मंदिर की झाँकी, गंगा आरती दूर से ताकी,
होली गेट आई सवारी, शहर बाजार में ट्रैफिक भारी,
स्मृतियों का इतिहास बताया, सुन सुन कर मन हरषाया,
ब्रज भाषा का मजा उठाया, लुत्फ़ खुद बोलने में आया,
लस्सी ने दी काफी राहत, आए ताज़गी, बनती सेहत,
सब्जी कचौड़ी भला नाश्ता, दही, जलेबी देती रास्ता.

यात्रा अपनी हो गई, जिज्जी का आभार,
छोटे ट्रिप में बस गया, यादों का भंडार.

खर्चा बाँटा साथ में, कोई नहीं उधार,
अपने जन का हो गया, इतने में उद्धार.
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*मुन्ना मामा*
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मुन्ना मामा को सभी, कह देते योगेश, 
सबके दिल में बस गए, रहें भले परदेश. 

घर में छोटा वह रहा, पाए सबका प्यार, रखा लाड़ में बाल को, दे कर उसे दुलार.   

मार्च माह चौदह आई, सन इकसठ खुशियां ले आई, 
उस दिन घर में आया लल्ला, मच गया मुहल्ले में हल्ला,
छोटा बच्चा सबसे प्यारा, सबकी पुतलियों का दुलारा,
देखा नहीं कभी चिल्लाया, हरदम माँ का आँचल पाया, 
पापा उस पर प्यार लुटाते, भाई छोटे को गले लगाते,
बहनें उस पर वारी जातीं, थपकी दे कर उसे सुलातीं, 
देखा नहीं उसे जब छोटा, शादी बाद हुआ था भेंटा,
सुनी सुनाई बात बताऊँ, मुन्ना मामा के गुण गाऊँ. 

रहे तेज सदा पढ़ाई में, लोग बता रहे कारनामे, 
स्कूल में वह अव्वल आते, अच्छा रिज़ल्ट सदा दिखाते, 
मेहनत ने रंग दिखाया, रुड़की में प्रवेश वह पाया, 
घर वालों को गर्व कराया, सब पर अपना रौब जमाया, 
झंडा अपना खूब फहराया, विजय पताका को लहराया, 
भाई ने जीना सिखलाया, शान से रहना बतलाया,
जीजा जी भी प्यार लुटाते, आदर उससे हर पल पाते, 
ओएनजीसी की नौकरी, मन में नाना कामना भरी, 

खूब हवा मुंबई की लगी, अभिलाषाओं
की चाह जगी, 
पूरे अरमान करे सारे, पाल कर नए शौक विचारे, 
काम धाम में नाम कमाया, छोटे बड़े को गले लगाया,
तर्क शक्ति में चित्त लगाया, सही बात सबको समझाया,
तारीफ़ें करते सहयोगी, रहे निस्वार्थ कर्म के योगी, 
संयत वाणी के वह स्वामी, गलत बात की भरे न हामी,
शादी कर भी रहे दुलारे, बहनों के हैं मुन्ना प्यारे, 
जीजा उन पर जान लुटाते, बड़े लाड़ से उन्हें दुलराते, 

जो भी उनके द्वारे आते, श्रद्धा, आदर से भर जाते, 
बड़े मान से उन्हें घुमाते, दूर दूर की सैर कराते, 
देहरा या मुंबई दूजा, रहा काम ही उनकी पूजा, 
शादी लवली से हो पाई, आ कर घर को स्वर्ग बनाई, 
खुशियाँ जीवन की सब पाईं, अम्मा पापा के मन भाई, 
पड़ोस में घर भी ले लीना, काम काज में रही प्रवीना, 
रेशू, किट्टू घर में आए, भावी जीवन के स्वप्न सजाए, 
अच्छी शिक्षा उन्हें दिलाई, अपनी सोची बहुत भलाई, 

साठ साल को पूरा करते, सब बच्चों पर जान छिड़कते, 
बड़ा लाड़ सभी से लड़ाते, सब के हृदय में समाते, 
सेवा निवृत्ति ले कर आएं, घर बैठ आराम फरमाएं,
चोट कहीं कमर में पाई, कार चलाने से भय खाई, 
वाणी ने मधुरता दिखाई, सबके मन को मोहें भाई, 
शौक शेष जो रहे अधूरे, अब फुरसत से होंगे पूरे, 
सुखदाई हो भावी जीवन, भजन, ध्यान में रहे समर्पन, 
हम सब आशीषें दे जाएं, मन में नहीं क्रोध रख पाएं.


करते हैं हम प्रार्थना, कर दो सबको माफ़,
भावी जीवन सुखद हो, दिल को कर लो साफ़. 

गलती गर हम से हुई, दे दो माफ़ी दान, 
सब का सब विधि हो सके, जीवन में कल्यान. 

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सविता चालीसा

सबसे छोटी लली हैं, सबकी प्यारी जान, 
नाम दिया सविता उन्हें, गुण देखिए महान. 

मात-पिता, भाई-बहन, करते उससे प्यार, 
उसके आने से लगा, भरा हुआ परिवार. 

कन्या एक बरेली आई, पूरे घर में खुशियां छाईं.
पांच जनवरी बड़ा सुहाना, सबने उसको शुभ ही माना. 
घर में बेटी रही पांचवी, बनती वह संतान सातवीं.
उसकी गतिविधि रही निराली, सब लोगों से घुल-मिल पाली. 
बहनों की रही नयन-तारा, माँ ने उस को खूब दुलारा. 
पढ़ने में दिखी चतुराई, सब कुछ सीख फटाफट पाई. 
काम समय से सब कर पाती, घर में उसकी प्रगति बताती. 
खेल-कूद में रहती आगे, नवीन विचार मन में जागे.
शाला में जब नाम लिखाया, कक्षा दो में उसे बिठाया.
बहनों संग करती पढ़ाई, नहीं शिकायत किसी से आई. 
नृत्य संगीत में रुचि दिखाई, घर की शाला में नाम लिखाई.
घर के काम रास ना आए, सारी दीदी नाज उठाए. 
पढ़ने में वह आगे रहती, खेल कूद की बातें करती. 
हाई-स्कूल में फ़र्स्ट आई, घर में सब पर रौब जमाई.
सबसे अलग पहचान बनाई, परिवार में इज्ज़त बनाई. 
प्रथम श्रेणी इंटर में लाई, एक भली सी रीति निभाई.
विज्ञान में स्नातक कर पाई, गणित विषय में नाम कमाई.
भली जाॅब सरकारी पाती, स्कूटी से वह शाला जाती. 
बच्चे मसले हल कर पाते, कृतज्ञता से शीष नवाते. 
अलग एक पहचान बनाई, सबके दिल में जगह बनाई. 
बड़े अरमान पिता सजाए, वर ढूँढ कर जतन से लाए.
शादी देख नहीं वह पाए, ऊपर से आशीष सजाए. 
विनीत संग ले लिए फेरे, चारकोप का घर संभारे. 
जमी गृहस्थी, मौज मनाई, सबसे प्रीत भली निभाई. 
श्रेया आ कर भरे किलकारी, खेलें होली भर पिचकारी.
अपने शौक करे सब पूरे, नहीं रहे कुछ ख्वाब अधूरे. 
बाकी कसर उत्कर्ष निकाली, रूठी मम्मी खूब मना ली. 
सहारा की प्रथा अपनाई, सबके साथ प्रीत निभाई. 
बड़े चाव से पर्व मनाए, मन से पूरे भवन सजाए. 
पढ़ने में हैं बच्चे आगे, किस्मत उनकी रवि सम जागे. 
खेल-कूद के ढंग निराले, सबको हिल-मिल गले लगा ले.
इम्तिहान में अव्वल आते, दुआ बड़ों से ढेरों पाते. 
रही सहारा संकट में जब, सोचे कुछ अनुभव के करतब. 
ब्राइट हॉरिज़न बनी आसा, नेक करम करते परकासा. 
बड़ी लगन से स्कूल सँवारा, होती शिशु की पालनहारा.
गतिविधि होतीं बहु-आयामी, रखे चाकर, बन गई स्वामी. 
मकान मुंबई में बनाया, भाड़े पर फिर उसे चढ़ाया.
रिश्ते सबके साथ निभाए, कहीं विचार न मन को भाए. 
लखनऊ सहारा ने भेजा, तबादले पर पति को सहेजा. 
नए ढंग से सजती आसा, उम्र का अनुभव हुआ पचासा. 

हम देते शुभकामना, हर पल हो कल्यान, 
सविता चमके सूर्य सम, भला करें भगवान. 

जीवन में सब सुख मिलें, अर्ध-शतक गुणगान,  
हरफन मौला बन सकें, सविता भली महान. 
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*अनुभूतियन्स का श्रीलंका भ्रमण*

चाह बनी *अनुभूति* में, जाएं पुनः विदेश, 
अच्छा सा गंतव्य हो, लेवें मजा विशेष. 
सोच समझ लंका चुनी, अगला बने पड़ाव.
*कॉक्स-किंग* माध्यम बना, जुड़े हमारे भाव.

सहमति जब जाने की पाए, सौ जन अपना नाम लिखाए.
मुस्लिम ने विस्फोट कराया, अंदर तक लंका थर्राया.
सोचा फिर *बाली* हो आएं, खूब आनंद वहां उठाएं.
रहा किराए में कुछ अंतर, वापस लौट पड़े लंका पर.

सोलह को *टी-टू* पर आए, आपस में मिल सब हरषाए.
पूरी कर के सभी प्रणाली, देरी बिना उड़ान निकाली. 
सुबह सुबह *कोलंबो* आए, तीन बसों में होटल लाए. 
नमन *आयबोवन* से पाया, गाइड ने इतिहास बताया. 

*तुर्या होटल* रहा सुहावन, *बैंटोटा* जँचता मनभावन. 
सागर लहर निरख हरषाए, फोटो नाना विधि खिंचवाए. 
मनचाहा भोजन कर पाए, बढ़िया नींद रात को आए. 
तरण ताल में खूब नहाए, कच्चे आम तोड़ कर खाए. 

सागर नौकायन कर आए, खरीद कर दालचीनी लाए. 
मछली मसाज कर पाए, कछुए छोटे बड़े दिखाए. 
जल क्रीडा के देख नमूने, रखे बुढ़ापे में मन सूने. 
सुबह *कैंडी* की तैयारी, सुप्रभात से नाश्ते की यारी. 

राह का भूगोल बताया, व्यवसाय, उद्योग समझाया. 
संस्कृति से परिचय करवाया, बौद्ध धर्म से हमें जुड़ाया. 
चाव से आए *पिनावाला*, देखेंगे हाथी मतवाला. 
लोगों ने हड़ताल बताई, मन से दुखी हुए सब भाई. 

*राॅयल कैंडी* बना प्रणेता, *थिलंका* चोटी का विजेता. 
दो होटल में हमें रुकाया, कुदरत का आनंद उठाया. 
बौद्ध स्तूप के दर्शन पाए, हीरों के गहने ललचाए. 
लोक-कला ने हमें लुभाया, संस्कृति का परिचय पाया. 

नाना पादप हमें दिखाए, गुण, आकार देख भरमाए. 
बैटरी कार सैर कराए, सबने फोटो खूब खिंचाए. 
*रम्बोडा* के झरने देखे, खेत सुरभित चाय के देखे. 
बादल घिरे पहाड़ निहारे, नदी, घाट ने दिल ले डारे.

हनुमान पहाड़ी पर जापे, *नुवारा इलैया* में कांपे. 
सीता जी के मंदिर आए, भक्ति भाव से सब जुड़ पाए. 
पुष्प वाटिका रही निराली, अपना मन मोहे मतवाली.
*ऐशफोर्ड* में रात गुज़ारी, सुबह बढ़ाई अपनी सवारी.

आई बस में कहीं खराबी, अब क्या होगा, थी बेताबी. 
जनता बस लाई *पिनावला*, अपना सब सामान निकाला. 
सुनित ने समाधान सुझाया, दूजी बस को वहां बुलाया. 
गज की मंथर चाल अनोखी, करें मध्यान्ह स्नान विषेखी. 

*ग्लोबल टॉवर* होटल नामा, *कोलंबो* को करे प्रनामा.  
लोटस टाॅवर, मंदिर देखा, ट्रैफिक का अनुबंध अनोखा.
फैशन हाउस करी खरीदी, याद प्रियजनों की दिलवा दी. 
कई तरह के अनुभव पाए, लौट के बुद्धू घर को आए. 

परिचय अधिक, मजा किया, लगा बड़ा परिवार, 
ऐसा ही सौहाद्र हो, जुड़ा रहे संसार. 
नाम बढ़े अनुभूति का, बढ़ता जाए प्यार,
*ज्योतिर्मय* की कृपा रहे, घूमें बारम्बार.

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रजनी के साठ साल
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जन्म बदायूँ में हुआ, दो बहनों के बाद, 
उनसठ की जुलाई में, छबीस से आबाद. 

पैदा होते ही पड़े, पिता गहन बीमार, 
बच्ची के सौभाग्य से, मिला जन्म दोबार.

दुबली सी कन्या बेचारी, परवरिश में गई  वह हारी,
उस पर जल्दी ध्यान न जाए, रो कर वह अक्सर चिल्लाए, 
मात-पिता के सीमित साधन, कैसे करें परिवार-पालन, 
सब उसे रिंगटोरिया कहते, बाल कला पर सारे हँसते, 
गुड्डो नाम से सभी पुकारें, हर जगह उसे मिली फटकारें,
लगती सबको वह अति प्यारी, बहनें उसकी हुईं रखवारी, 
स्कूल में उसे जब बैठाया, रजनी उसका नाम लिखाया,
बहनों के साथ पढ़ने जाती, छुट्टी पर सीधे घर आती,
मनोयोग से शाला जाती, नहीं किसी से लड़ कर आती, 
बड़े कायदे वह अपनाती, कभी वहम की हद हो जाती.

औसत दर्जे में पढ़ जाती, नहीं रैंक कोई ला पाती, 
फिर भी है संतुष्ट बताती, सादा पास से खुश हो जाती, 
दसवीं में द्वितीय श्रेणी लाई, वादन में इच्छा दिखलाई, 
राजनीति की करी पढ़ाई, उसमें आगे बढ़ ना पाई, 
विशेष महारत कभी न पाई, बारहवीं दो बार दे आई, 
हिंदी में रुचि अधिक दिखाई, उसमें एम. ए. कर पाई, 
अपने बल पर शिक्षा पाए, नहीं जरूरी कालेज जाए, 
कई स्कूलों से अॉफर पाया, बस एक ही को अपनाया, 
बच्चे छोटे खूब पढ़ाए, उन से मन का आदर पाए, 
मजा पढ़ाने में अति आया, तन मन से पाठ पढ़ाया.

बी. एड. बाद में कर पाई, काॅलेज में हुई पढ़ाई, 
बहनों संग घर को संभाला, उसमें न कोई दोष निकाला, 
हर हालत में खुद को ढाला, नहीं पता पड़े किस से पाला, 
भाभी से तालमेल बिठाया, बच्चों पर प्यार लुटाया, 
उचित समय वर नाना आए, मजबूरी में सब ठुकराए, 
करा त्याग बहनों की बारी, उन सबका ख्याल कर डारी, 
छोटी बहन की हुई शादी, गम सहने की होती आदी, 
बला सविता समय पर आई, शक्ति लौह छड़ डलवा पाई,
नाना जगह के लोग भाए, इच्छुक कई वर बतलाए, 
भाई बहन के नंबर आए, बड़े चाव से मजे उठाए. 

बाद पिता, माँ आगे आई, शादी की सब रस्म निभाई, 
बेटी बेटा साथ में पाए, बड़े प्यार से सब अपनाए, 
पति संग तालमेल बिठाई, खुशहाल परिवार बसाई, 
बेटी की शादी रचवाई, बड़े चाव से बिदा कराई, 
गलत फहमी भी आड़े आई, मन मुटाव हुआ कुछ भाई, 
कटु शब्द ने कमाल दिखाया, बंधन प्यार का ठुकराया, 
कहे वचन कसम सम लगते, बातें करने में हम डरते, 
कुछ गम खुशी काल दिखलाई, फिर भी अकड़ में नहीं ढिलाई, 
तरसें हाल पता करने को, हँसी खुशी कुछ जमे न मन को, 
कारण इसका समझ न आया, लिखा भाग का मन भरमाया.

रजनी के पूरे हुए, साठ साल हैं आज, 
जुड़ना उनसे चाहता, सारा सभ्य समाज.
 
हंसी खुशी से जिंदगी, बीते अच्छा काल, 
जन्म दिवस शुभकामना, करते नहीं सवाल. 
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विभोर चालीसा 
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दो बाईस को आया, लखीमपुर का लाल, 
दादा-दादी हो गए, पाकर उसे निहाल. 

पापा मम्मी को मिलीं, खुशियाँ अतुल, अपार, 
मानों उनका बस गया, पूरा ही संसार.

नाना-नानी का दुलारा, मौसी दें प्रेम की धारा .
मामा का लाड़ वो पाए, सिर चढ़ा कर उसे घुमाए .
गोरा सुंदर रूप सलोना, काजल से लगा ढिठौना . 
स्वस्थ बालक सबको भाए, उसे खिलाने को ललचाए.
माता जब पढ़ाने जाए, नानी घर खुश हो जाए . 
पापा जब आॅडिट को जाते, ढेर खिलौने उसके आते.
आकर बहना काम बढ़ाए, भाई का वो प्यार बटाए .
झगड़ा करने में शरमाती, शोर मचा कर सबको जगाती.
बहना की रक्षा कर लेता, उसके रहते कुछ न होता . 
भाई-बहन की जोड़ी प्यारी, जग सब जाता बलिहारी .                     10
अनुशासन पूरा दिखलाए, सब पर अपना रौब जमाए.
पढ़ने में वह अव्वल आए, टीचर भी उसके गुण गाए.
नाना संग शतरंज जमाए, मात कभी न वह दे पाए . 
मौसी ने कैरम सिखलाया, भले खेल से उन्हें रिझाया .
करी प्रतियोगिता की तैयारी, मिली सफलता उसमें सारी . 
पुणे से इंजीनियरिंग करी, मिल गई फिर वहीं नौकरी.
तकनीकी नौकरी वह पाता, पढ़ा हुआ कुछ काम न आता .
दो -तीन जगह सेवा दे दी, सबने फिर तारीफ़ें कर दीं.
फ़्लैट एक बुक कराया, मनोयोग से उसे सजाया .
फ्रिज, टी. वी. व बेड मंगाया, बहुत ढंग से उसे लगाया .                          20
बाइक और कार ले लीन्ही, मजे में सवारी उसकी कीन्ही . 
सर्विस उसकी सदा कराई, नियम कायदा खूब अपनाई .                        
पर्यटन में रुचि दर्शाई, भारत भर में करी घुमाई . 
मित्र, सखा, संबंधी भाए, सबसे अच्छे रिश्ते निभाए . 
बहना पर वह जान लुटाए, आँच कभी न उस पर आए .
सेवा करने को वह तैयार, हाल बताए बस कोई यार . 
अच्छे भोजन के शौकीन, पसंद नहीं उसको कैंटीन . 
किचन में सामान जुटाया, कुक से उसे बनवाया .
फालतू खर्च में नहीं विश्वास, सादा जीवन उसकी आस . 
दिल का वह है अति साफ, सबको कर देता माफ़ .                           30
फिर आया शादी का खयाल, उठे दिमाग में कई सवाल . 
होगा कैसा जीवन साथी, प्यार की जग पाए बाती .
चमका उसका भाग्य सितारा, सुरभि का मिल गया सहारा . 
देखे शादी के विज्ञापन, मिला नहीं अपनापन . 
सुरभि बेटा मन को भाए, साथ में सतरंगी सपने सजाए . 
इसी लिए हम सब आए, यह शादी यादगार बन जाए.
सारी खुशियाँ दोनों पाएँ, आपस में विश्वास जगाएँ . 
एक दूसरे के हो जाएँ, सुख दुख के साथी हो जाएँ . 
हम सब शुभकामना दे जाएँ, उनको दिल से आशिष दे जाएँ .  
रहे सदा सुखी जोड़ी प्यारी, यह रही मनकामना हमारी .                 40

स्वागत सबका कर रहा, यहाँ सदन में आज, 
एक लाल को आशीष, देता सभी समाज. 

हरषित सबके साथ हैं, माता, पिता, विभोर, 
बहना की मत पूछिए, यह दिल माँगे मोर.
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प्रानिका की पहली वर्षगाँठ 
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बेटी ने अवतार ले, खुशियाँ भर दीं आज, 
प्यारी सी किलकारी से, मुदित सकल समाज. 

लंबे अरसे से रही, उनकी बेटी-चाह, 
बिनय माँगते ईश से, खूब करें परवाह. 

नन्ही बिटिया घर में आई, दादी देख उसे मुसकाईं.
खुद से पहले चाची लाई, उस दिन उनकी हुई सगाई. 
उसने खुद मुहूर्त निकाला, समय-पूर्व कहे जग वाला. 
प्रथम क्रन्दन सुनती नानी, ईश कृपा सब जग जानी. 
नाना-दादा अति हरषाए, मृदुल मुस्कान उर भर लाए. 
कारण शीत पीत दबोचा, पराबैंगनी उपाय सोचा. 
तीन दिवस सिकाई करवाई, तब जाकर छुट्टी मिल पाई. 
क्लाउड नाइन रहा आभारी, अवतरित हुई बिटिया प्यारी. 

दादी मालिश-तेल लगाएँ, नहा धुला कर साफ बनाएँ. 
दादा उसको शीष चढ़ाएँ, उपवन में फिर खूब घुमाएँ.
मुग्धा अंकित अति हरषाए, बड़े चाव से उसे सजाए.
नए परिधान उसे सजाते, विविध वेश में फोटो आते. 
समयोचित गतिविधि दिखलाई, सोना, हँसना वह अपनाई. 
रोने में नहिं कोई सानी, नानी भी याद करे नानी. 
जब भी कभी साँस भर जाए, शकल देख कर सब घबराए. 
पूरी नींद जब वह सो पाती, मूड में हो तो मुसकाती.

दो चोटी में खूब सुहाती, मन से फोटो खूब खिंचाती. 
विविध वेश में सब दुलराते, हँस कर उसे गले लगाते. 
नानी घर मुंबई आई, रिद्धू भाई को खीर चखाई. 
सागर तट पर गोवा आई, चचा जान की शादी कराई. 
चाची संग लाड़ लड़ाई, उनसे प्रीत भली निभाई. 
दादी के संग राँची घूमी, अपने घर का माथा चूमी. 
चाची उसकी ऐसी आई, चाचा बाहर गए दुबाई. 
दादू कार में उसे घुमाए, नातेदारों से मिलवाए. 

घर वापस जब पूना आई, सबमें अपनी पहचान बनाई. 
सेरेलक का भोग लगाए, नाना भोजन वह चख जाए. 
पाउडर दूध वह पी पाए, पापा चटनी उसे चटाए. 
मम्मी जब आॅफिस जाए, दादी संग मौज मनाए. 
उचित समय टीके लगवाए, रोग निरोधक उसे बनाए. 
शयन से उठ, बैठ वह जाती, ले सहारा खड़ी हो जाती. 
धीरे-धीरे कदम बढ़ाया, हाथ छोड़ कर चलना आया.  
उठ कर खुद खड़ी हो जाती, मरज़ी से वह बैठ भी जाती. 

हाथ हिला कर विदा दे जाती, पापा को बॉय कह आती.
मम्मी जब घर वापस आती, उसको देख  दौड़ वह जाती. 
बरतन उठा कर चल पाती, चम्मच कटोरी खूब बजाती. 
सूखे कपड़े भी उतारे, सरिया कर उन्हें सँवारे.
टी. वी. पर गाने सुन जाए, मटक-मटक कर नाच दिखाए. 
बदरी डाँस उसे मन भाए, बिन बोले सब कुछ कह जाए. 
दिन में बारह पाॅटी आती, डाॅक्टर के फिर दर्शन पाती. 
बाद प्रतीक्षा दो दाँत दिखाए, घर पर सब हरषाए. 

मुनिया हमरी हो गई, एक साल की आज, 
जन्मदिन की सत्कामना, देता सकल समाज. 
स्वस्थ रहे, फूले फले, होवे परम विकास, 
उसके उन्नत भविष्य पर, रहती सबकी आस. 
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रूस यात्रा

रिटायरमेंट के बाद, घूमन चले विदेश,
पत्नी के साथ से, बदल गया परिवेश.
अनुभूति की प्रेरणा, रहा अजब उत्साह,
आशंका की छाँव में, पनपी साहस राह.

वरिष्ठ जनों के दो बैच बनाए, डाॅ. दास खुद नेतृत्व निभाए,
छियालीस जन साथ चले, सारे पथिक रहे अलबेले,
मुंबई टी-2 पर सब मिले, औपचारिकता से सारे हिले.
शारजाह होकर मास्को आए, एअर एरेबिया का अनुभव पाए,

ट्राँज़िट से नव जीवन पाए, चाय काफी रुपये में पाए,
मॉस्को आकर इमिग्रेशन पाए, संयुक्ता से भेंट हो जाए,
मैट्रिक्स सिम चल न पाए, पैसे उसमें व्यर्थ गंवाए,
प्रयास नाना भाँति कराए, जल की कीमत जान फिर पाए,

वाॅल़्वो बस में सभी समाए, नीचे सब सामान सजाए,
माइक जब सूचना सुनाए, पुलकित सब चेहरे दिख जाए,
मैक्सिमा होटल में सब ठहराए, मैट्रो रेल में सफर कर पाए,
शहीद स्मारकों के दर्शन पाए, नाना चर्च में शीश नवाए,

महानगर की शोभा निहारी, अनुशासन की रही बलिहारी,
ट्रैफिक गति सबको प्यारी, साफ सफाई की महिमा न्यारी, 
मास्को भवन, पार्क, पोर्ट निराले, अपनी मस्ती में झूमे मतवाले,
अचंभित हुए देखने वाले, किसके फोटो, किसके वीडियो निकालें,

दरबार हाल में खाना खाएँ, थकान सारी दूर भगाएँ,
कमरे पर न पानी पाएँ, अपनी बोतल खुद भर लाएँ,
सामान लिफ्ट से खुद लाएँ, ए.सी., पंखा सोच न पाएँ,
वार्मर से कमरा गरमाएँ, स्नान को न बालटी पाएँ,

रेस्तराँ में नाश्ता पाएँ, सामिष, निरामिष पहचाने न जाएँ, 
भर भर पेट नाश्ता खाएँ, साबुत फल साथ ले आएँ,
घूम घूम कर जब थक जाए, आइसक्रीम से ऊर्जा पाएँ,
बूढ़े लघुशंका को जाएँ, साथ में रूबल देकर आएँ,

परिचय सत्र में सद्भाव बढ़ाएँ, बच्चों की सूचना पाएँ,  
अपनी रुचि खुद ही बताएं, विनम्र श्रद्धा मन में लाएँ, 
अंताक्षरी में गाने गाएँ, सुमधुर गीत गुनगुनाएँ,
चुटकुले सबने खूब सुनाए, हाउज़ी रूबल से खिलवाएँ, 

मैक-डी में टॉयलेट निशुल्क जाएँ, सामिष भोजन भी कर पाएँ, 
शौच मुफ्त, पर पैसे से पानी आए, नगर विचित्र यह भरमाए,
जब तक चाहें, वहाँ बैठ जाएँ, भ्रमण चाह से झट उठ जाएँ, 
बाहर का भोजन भी कर पाएँ, पर, कचरा तनिक न फैलाएँ,

रूसी सर्कस उमंग भर जाए, गणपति दर्शन उसमें कर पाए,
नाना करतब मन को भाएँ, फीफा की थीम अपनाएँ,
हाथी, कुत्ते, शेर और घोड़े, सब का ध्यान अपनी ओर मोड़े,
जोकर की देखी चतुराई, कलाकार बालिकाएँ सब को भाई,

क्रेमलिन स्क्वायर और संग्रहालय की कहानी, 
भवन भव्यता, फव्वारा श्रंखला का नहीं कोई सानी, 
बिजली बस, ट्राम का नज़ारा, ट्रैफिक जाम से दिल भी हारा.
मॉस्को दर्शन की बस भी दिखी, दाईं ओर चलती गाड़ी देखी,

सड़क ज़ेब्रा पर पार कराएँ, सिगनल लाल झट रुकवाए, 
मुस्तैद ट्रैफिक पुलिस पड़ी दिखाई, गलती छोटी, तुरत कार्रवाई, 
मास्को से हुई विदाई, नोग्रोद पहुँच गए सारे भाई,
रूस जन्म की धरती पावन, मिदी नदी की छटा मनभावन,

सडको होटल में रात गुज़ारी, मच्छरों ने कृपा सब पर बिखेरी,
रूसी डिनर भी कुछ को भाया, ब्रेक फास्ट से मन हर्षाया,
मध्य रात्रि तक रहा उजाला, व्हाइट नाइट का छाया बोलबाला,
सुबह तीन बजे पौ फट जाए, सूर्य देवता दर्शन दे जाए, 

ऐतिहसिक किला दिखाया, अमर जवान ज्योति से मन हरषाया,
सम्मान शहीदों को दीन्हा, सैन्य उपकरणों का आदर कीन्हा,
चर्च, तोप और उपवन देखे, उपहार व चाॅकलेट निरेखे,
मोलभाव की प्रवृत्ति रंग लाई, जरा सी छूट से खुश सब भाई,

पीटरबर्ग्ज़ में होटल फ़ोन्ताना, एजी़मथ में खाएँ खाना, 
स्काईबार की छटा अनोखी, छबि रात में रही बिसेखी,
चौक, पार्क औ नदी निराली, नौकायन में छलकी प्याली,
गिरजे, राजमहल और मॉल, एक से बढ़ कर एक विशाल, 

बिछड़ जाए गर कोई साथी, उनकी भाषा आड़े आती,
पुष्किन महल के ठाठ निराले, ठिठक जाएँ देखने वाले,
स्वागत में जब बैंड बजाया, जन गण मन से तन हर्षाया,
दीदार की रही बड़ी कतार, यथा प्रवेश बैच, ईश्वर के द्वार,

कवर जूतों पर डालो, चरण रज से धरोहर बचा लो, 
पच्चीकारी, द्वार, पात्र अनोखे, फर्नीचर निरख खुलती आँखें,
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अपनाई, फोटो लेने की रही मनाई,
अम्बर महल में मोबाइल आॅफ़, न कोई शोर, न कोई लाॅफ़,

पीटरहाॅफ़ पार्क के फ़व्वारे, अपलक उन्हें रहें निहारे,
संगीतमय कुछ उनके अंग, टाॅय ट्रेन लख रह जाओ दंग,
नहर बाल्टिक सागर में समाई, छबि उसकी बरन न जाई, 
संग्रहालय गुम्बद वाले, स्मृति ताजी उनसे करा ले,

वोदका रही कुछ की प्यारी, जम कर खूब करी खरीदारी,
बारिश ने कुछ रंग दिखाया, ठंडी पवन ने बदन ठिठुराया,
डाॅल सेट, स्कार्फ़ खरीद लाए, कुछ शो पीस देख ललचाए, 
जैकेट सबके मन को भाए, टाॅप निरख कुछ भरमाए,

बैले नृत्य की करी तैयारी, हो न पाई अधिक खरीदारी,
संस्कृति जानने की लालसा जागी, एक थीम पर नाचे प्रतिभागी,
ट्रैफिक जाम का पड़ा झगड़ा, जिससे मूड सभी का बिगड़ा,
वहाँ पहुँचने में हो गई देरी, पूरे पैसे दे कर आक्रोश बटोरी,

बुलेट ट्रेन से मॉस्को आए, अनुभव नया एक ले पाए,
बॉलिगो, ट्वेर स्टेशन आए, बस एक मिनट स्टॉप दिखाए,
रेडिओ और टीवी टाॅवर, काँच के पुल पर रंगीन झालर,
बिजलीघर, पोर्ट, ट्राम का उद्गम, फीफा का मैदान विहंगम.

वापसी स्वदेश हुई, संयुक्ता का आभार, 
तकनीकी कारण बना, देरी का आधार.
अगली फ़्लाइट मिली, करके भागमभाग,
धन्यवाद अनुभूति, बढ़े प्रयास, दिमाग.
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एकन्ना जी की सेवानिवृत्ति पर सादर : -

जीवन के सफर सुहाने में, मिला मीत महान,
अमिट छाप छोड़ कर, अपनी करके दिव्य दान. 
तीन बरस पहले तलक, देखा नहीं घर परिवार, 
आज बसे हैं दिल में, चाहें हर दम दीदार.

साठ बरस पहले का हाल बताऊँ,
एक खबर साझा कर जाऊँ,
एकन्ना परिवार में खुशियाँ लाए,
जब एक मुन्ना शोर मचाए.           1.
पप्पू नाम से सब उसे बुलाएँ,
मौसी, बुआ जब लें बलाएँ,
छोटा बच्चा सभी खिलाएँ,
बातें करने को सब ललचाएँ.          2.

मीठी मुस्कान पर जान लुटाएँ,
किलकारी पर बलिहारी जाएँ, 
विचित्र मोहन का मान बढ़ाएँ,
कृष्ण कान्ता की धाक जमाएँ.       3.
फिर आईं तीन बहनें प्यारी,
जिनसे मिल हलचल कर डारी,
बाल सुलभ क्रीड़ा कर जाएँ, 
आस पड़ोस में रौब जमाएँ.          4.

दूध, मलाई मन से खाएँ, 
मीठे के नित शौक फरमाएँ,
शाकाहारी भोजन उन्हें न भाए,
पर अंडा, मुर्गा मजे में खाएँ.         5.
खेल कूद में सबसे आगे,
स्कूल छोड़ फटाफट भागे,
पढ़ाई में कम दिल लग पाता,
काॅलेज जाना न उनको भाता.       6. 

कंचे, क्रिकेट और कबड्डी, 
इनके आगे सभी फिसड्डी, 
पतंग उड़ा कर पेंच लड़ाए,
सद्दी, मंज्झा लूट के लाए.              7.
पापा ने अपने सपने सजाए,
बड़े योग से वे पूरे कर पाए,
पूरी हुई जब इच्छित पढ़ाई,
नौकरी की तब जुगत बिठाई.         8.

सम सामयिक वेश धर पाए,
माहौल मुहल्ले का अपनाए,
बोल चाल में अकड़ पुरानी, 
प्रेम माधुर्य में नहीं कोई सानी.        9.

बैंक की सेवा मन को भाई,
प्रथमा बैंक की शान बढ़ाई,
माता पिता की सेवा कर आए,
फिर घर के दायित्व निभाए.          10.

पापा जी ने भविष्य सुधारा,
बड़फरा में जब किया हुंकारा,
जहाँ जाय, जब किरन निहारी, 
दिल के चमन में खिली फुलवारी.  11.  

रचा कर शादी जीवन सुधारा,
प्रेम मय सुरभित समय गुज़ारा, 
पिता के संरक्षण में पहचान बनाई, 
समाज परिवार में शान बढ़ाई.       12.

शैंकी, रिंकी दो बालाएँ पाईं, 
मिलन लला ने प्रतीक्षा कराई,
सबको अच्छी शिक्षा दिलवाई,
बेटी बेटे में कोई भेद न भाई.        13.

कीमत, इज्ज़त शिक्षा की जानी,
समय की कीमत खूब पहचानी,
बड़े जनों को आदर दे पाएँ,
छोटों को तमीज़ सिखलाएँ.         14.

समय के साथ वह चल पाए,
ज़मीनी हकीक़त भले अपनाए,
ऊँच नीच का मतलब जाना,
धर्म संस्कार को खूब पहचाना.     15.

सादा जीवन वह अपनाएँ,
खान पान से शान बढ़ाएँ,
रीति रिवाज़ भले से निभाएँ,
सबके दिल में घर कर जाएँ .       16.

समय से शैंकी का वर खोज लाए,
नव तकनीक उपयोग में लाए,
विश्रुत उन के मन को भाए,
झट से उसको दामाद बनाए.       17.

नाती पाकर फूले नहीं समाए,
खुशी से तन मन झूमा जाए,
कब जा कर उसे खिलाएँ,
सब अरमान पूरे कर पाएँ.           18.

रिंकी एम. बी. ए. कर जाए,
झट उसकी शादी रच जाए,
मिलन को अच्छी लाइन मिल पाए,
फिर तो जीवन सफल हो जाए.    19.

साठ वसंत का शगल खिलाएँ,
साथियों से शुभेच्छाएँ पा जाएँ, 
चैन से सेवानिवृत्त हो जाएँ, 
बेदाग जीवन की आशीष पाएँ.     20.

घूमें फिरें, सुखी रहे, पुष्पेन्द्र मनाएँ मौज,
जीवन यापन सहज हो, मज़ा रहे हर रोज़.
स्वस्थ और प्रसन्न रहें, करते हैं यह प्रार्थना,
सेवानिवृत्ति के बाद भी, मिलते रहें, है यही शुभकामना.

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राजन की सेवानिवृत्ति

वर्मा परिवार की शान बढ़ाने, आया नन्हा नूर,
तीन बेटियाँ बोनस मिलीं, लाए नूतन सुरूर.
मादकता सी छा गई , दिखा खुशहाल परिवार,
किलकारी गूँजी लाल की, पा पापा का प्यार.

नौ दिसंबर छप्पन को आए, साथ ख़ुशी अपार लाए,
गूँजी जब उनकी किलकारी, हर्षित भई तब महतारी,
बहनों ने लाड़ लड़ाए, बड़े प्यार से नाज़ उठाए,
देख पिता को मुस्की मारी, ख़ुशियाँ उस पर जाएँ वारी,
पलटी मार कर करवट लीन्ही, चिंता दूनी सबकी कर दीन्ही, 
बेटा जब बैठन लागे, उम्मीद घुटुअन की मन में जागे,
आशा हर कदम पर नई जगाते, पूरी होते ही नई सजाते,
तोतली बोली सब को भाए, बड़े स्नेह से गले लगाए,
यादें बचपन याद दिलाए, मन को पुलकित वह कर जाए,
शाला में जब पढ़ने जाए , मेधा पूरी वह दर्शाए,

खेलकूद में आगे आए, मित्रों पर वो धाक जमाए,
पढ़ने लिखने में चतुराई, सब में अच्छा नाम कमाई ,
पीलीभीत में जब वह जाए, बड़े प्रेम से सब मिल जाएँ ,
बड़े भी बन जाएँ बच्चे, देख के दिल के सच्चे, 
छोटे, बड़े सब में मिल जाए, अलग से अपने रंग दिखाए,
नानी माँ के ख़ास दुलारे, नरेश मामा की आँख के तारे,
मामी जी से दोस्ती साधी, बाकी सब को धता बता दी,
झोली भर कर आम वो खाए, शुद्ध गाय का दूध पी आए,
चौकड़ी बच्चों की जम जाए, आएँ न फिर बिना बुलाए,
मस्ती जम कर वहाँ पर आए , छुट्टी के रंग में रंग जाए, 

पापा जब ऑफ़िस से आएँ, पढ़ता देखें और हरषाएँ,  
माँ ने ' राजन ' गुहार लगाई, दौड़ते भागे आए भाई,
सारा घर सँभाल कर आएँ, शौक नव नित फ़रमाएँ, 
संग्रह कला का वह कर पाएँ, घर में अम्मा लाड़ लड़ाएँ ,
संघर्षमय जीवन पाए, परिवार का मान बढ़ाए,
सरोज ने जीवन सँवारा, भूल गया सब कष्ट बेचारा, 
नव उत्साह से वह सुख पाए, बच्चे सुघड़ दोनों बनाए,
पढ़ा लिखा कर नाम कमाया, कुल परिवार में रौब जमाया,
अच्छे परिवार संपर्क में आए, उनसे आजीवन संबंध बनाए,
उचित समय पर शादी कीन्हीं, ख़ुशियों से झोली भर लीन्हीं,  

शिरडी, पुट्टापरती में भक्ति जगाई, कुटिल जगत से दूरी भाई,
साईं बाबा ने कृपा करी, धन संपदा झोली में भरी,
दान भक्ति में श्रद्धा दर्शायी, पूजा पाठ में चित्त लगाई,
तीरथ धाम अधिकतर कीन्हे, पुण्य सारे पत्नी को दे दीन्हे,
व्यर्थ बात में न समय गँवाते, लफ़ड़ों, झंझटों से कतराते,
अपने काम से काम बताते, गैर के मसले में न टाँग अड़ाते,
इफ़्को में लंबी सेवा दे दी, सेवानिवृत्ति की तैयारी कर दी,
संगी, साथी प्यार जताएँ, भावी सहयोग का आश्वासन दे जाएँ,
अटका रहे न कोई काम तुम्हारा, साईं कृपा का रहे सहारा, 
सेवा भाव में वो रम जावें, जीवन अपना सफ़ल बनावें,

हो, प्रगति हर क्षेत्र में , भली करें जगदीश.
हम सब देते रहें, शुभकामना और आशीष.
बने स्वस्थ, सुखी, संपन्न, जीवन का आधार,
खुशहाली से बढ़ता रहे, आपका प्रिय परि
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श्री बिनय कुमार प्रसाद की सेवा निवृत्ति

मोहक छबि , सरल , स्वभाव , मृदुल रही मुस्कान .
बाँह पसारे , स्वागत को , तैयार खड़े श्रीमान .
प्रसाद परिवार में प्रकट हुआ , एक दिव्य प्रसाद ,
आठ अप्रैल सन् छप्पन को , मिटा सभी विषाद .

बाल सुलभ क्रीड़ा कर आए , मोहित सभी को वे कर आए .
कुल के छोटे रहे वो बालक , पर , परिवार के कुशल हैं चालक .
छोटी बहन पर प्यार लुटाया , बड़े भाई को सम्मान जताया .
उनके दिल में स्थान बनाया , कुल गरिमा में चार चाँद लगाया .
दिल से सारे रिश्ते निभाएँ , छल कपट को दूर भगाएँ .
रोष न उनको तनिक सुहाए , मृदु मुस्कान से दिल ले जाएँ .
लिखने पढ़ने में आगे आए , तम अज्ञान का दूर भगाएँ .
जो भी अपने मित्र बनाए , बड़े स्नेह से गले लगाए .
सेंट एलॉयशिस की जान बन जाएँ , शोभा उसकी द्विगुणित कर आएँ .
राँची कॉलेज की शान बढ़ाए , सारे उसके गुण अपनाए .

नवाचरण को सार्थक बनाएँ , मनोयोग से प्रयास कर पाएँ .
विज्ञान के प्रयोग अनूठे कीन्हे , मौलिकता उसमें भर दीन्हे .
गृह काज वो सारे कर पाएँ , सारे घर के काम सुहाएँ .
उपकरण जो कोई हो खराब , चैन न आवे उन्हें जनाब .
मिक्सी हो या सिलाई मशीन , कढ़ाई ज़री की कितनी महीन .
माइक्रो वेव पर हाथ जमावें , एस.एल.आर. पर छवि निखरावें.
पाक कला हो या रहे सिलाई , सब में पारंगत मेरे भाई .
पाक कला के प्रयोग नवीने , रुचि से सब में अनुभव ले लीन्हे .
सामिष भोजन के शौकीन , स्वयँ पाकी चतुर प्रवीन .
परहेज न मीठे से कर पाएँ , भाभी जी प्यार से जब समझाएँ . 

उपवन अपना स्वयँ सजावें , घर के फल भेंट दे आवें .
मीठे मीठे अमरूद लुभाएँ , नीबू मिर्ची से सब को ललचाएँ .
बड़े बड़े गुलाब खिलवाएँ , मधुरिम सुरभि उसमें समाएँ .
घर पर ला कर बोल्ट को पाला , बड़े लाड़ से उसे सँभाला .
अपनी संस्कृति से वो जुड़ जाएँ , गरिमामय इतिहास बताएँ .
धर्म क्षेत्र में ज्ञान बतावें , लोकगीत में रुचि दर्शावें .
मंदिर पूरी श्रद्धा से जावें , प्रसाद सभी में बाँट कर खावें .
तीरथ धाम में विश्वास जगावें , सपत्नीक विहार कर आवें .
पर्यटन में रुचि अद्भुत पाई , बड़े शौक से मौज मनाई .
अपना भाषा , अपना देश , श्रेष्ठ नहीं कहीं से विदेश .

अंकित , रोहित की जोड़ी सुंदर , उन पर रहा वात्सल्य न्योछावर .
अंकित की शादी रचवाई , मुग्धा बेटी उपहार में पाई .
शीघ्र आए रोहित की बारी , सपत्नीक करें तैयारी .
सैंतीस बरस की सेवा कीन्हीं , बस में बॉस सदा कर लीन्हीं .
पूरी निष्ठा , जान लगाई , मनोयोग से कर्तव्य निभाई .
कठिन पोस्टिंग भी ले लीन्ही , नहीं किसी से शिकायत कीन्ही .
नक्सल क्षेत्र में विकास कर पाए , ईमानदार की संज्ञा पाए .
अपना मंतव्य स्पष्ट बताएँ , लाग लपेट उन्हें न भाए .
ऑफ़िस से ले रहे विदाई , शुभ कामनाओं ने झड़ी लगाई .
करें प्रशंसा और बड़ाई , थकें न संबंधी , साथी , भाई .

अश्रुपूर्ण नयनों से कह रहे , मन के अनुपम सार ,
रोके से न रुक रहे , करुणानिधि के उद्गार .
अद्भुत , एक अपूर्व हैं , पाएँ सब का दुलार ,
दूजे न कोई पाइए , प्रसाद बिनय कुमार .

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चुन्नी दीदी

सेवा निवृत्ति के समय पर, हो उपहारों की भरमार,
एक शुभकामना हमारी भी, कर  लीजै स्वीकार,
सजल नयन से कह रहे, हो कर भावुक आज,
पूर्ण होवे मनोकामना, बनीं रहें सरताज,
संघर्षमय जीवन पाए, दूजी  कन्या मात - पित  पाए,
तीजी ने फिर शान बढ़ाई, वंचित भईं जब आया भाई,
भाई – बहन में धाक जमाई, सादर सब से श्रृद्धा पाई,
बचपन में कन्या सुलभ गुण पाए, गुड्डा – गुडिया खूब सजाए,
जम कर खूब करी पढ़ाई, गृह – कार्य में रुचि दिखलाई,
स्कूल  में अच्छी  शिक्षा पाई, अँग्रेज़ी में नाक बनाई,
एम.ए. कर के नौकरी कीन्हीं, माँ  -  बाप को राहत दीन्हीं,
उस की बाद कर ली एल. टी.,  अच्छे – अच्छों की कर दी छुट्टी,
राष्ट्र - स्तर पर पुरस्कार ले आए, मान –  सम्मान नाना विधि पाए,
शिक्षण में गुणवत्ता आई, उस में अपनी धाक जमाई,
गृह - स्थिति अनुकूल न पाई, शादी में जो अड़चन आई,
पति – प्रेम, समर्थन है पाया, दुराशा को दूर भगाया,
ससुराल में  साम्य बनाए, मायके की साख जमाए,
देवर, ननद पर प्यार लुटाया,शादी करा के घर बसवाया,
सास  ससुर सेवा से  रीझे, कबहुँ न दीखे कोई खीजे,
जीवन में दो बच्चे पाए, बड़े लाड़ से वे पढ़ाए,
घर को अर्पण पूरा समय, बच्चे बने साहसी, निर्भय,
मर्यादा से  मान बढ़ाई, कही बात समझ में आई,
पड़े समय पर, कठोर रुख कींन्हा, सुविचार समझ रख दींन्हा,
वचन – पूर्ति की दृढ़ताई, सारे समझे, न केवल भाई,
पति के नखरे वो सह जाएँ, आलू अरहर नित्य पकाएँ,
और न कोई सब्ज़ी खाई, त्याग की मूरत बन गई माई,
घर पर बच्चे स्वयँ पढ़ाए, नित नव सँस्कार दिलवाए,
दोनों बालक सभ्य बनाए, आदर, श्रृद्धा से भर पाए,
परंपरा से त्योहार मनाएँ, अपनी सँस्कृति जीवंत बनाएँ,
सामाजिक उत्सव की तैयारी, करी लगा कर क्षमता सारी,
मेल - मिलाप के अवसर पाए, संबंधों को मधुर बनाए,
फिर भी अहँ ज़रा न भाए, सब को प्रेम से गले लगाएँ,
सुख –  दु:ख में साथ निभाया, रहा न  कोई अपना - पराया,
बड़ा  प्रेम सहयोगी जाने, जीने की कला कोई पहचाने,
छात्रों में आस्था उमड़ाई, सब में नया विश्वास जगाई,
उल्लसित ऊर्जा भर दींन्हीं, दुराशा सब की हर लींन्हीं,
देशाटन में रुचि दिखलाई, पति सहयोग बराबर पाई,
सारे देश की करी घुमाई, आगे विदेश का नँबर भाई,
मेहनत से जो करी कमाई, दान  - धरम पीछे नहिं आई,
करम बना पहली पूजा, उस सम धरम रहा न दूजा,
सेवा -  सुश्रूषा में सबसे आगे, रोग दोष सब के भागे,
शादी बच्चों की परेशानी, प्रयासों से हार न मानी,
कर्म करें भाग्य तकदीरा, समय से मिटैगी आप की पीरा,
स्वकार्य में  रहें प्रवीना, नाम  है  उन का जौहरी बीना.
बेटी, बहन, बीवी बन, पाया सब का प्यार,
उस से ज़्यादा कर लिया, सकल बाल दुलार.
उज्जवल रहे भविष्य आपका, बने रहें सुविचार,
स्वस्थ तन  - मन रहे, सुखी रहे  परिवार,
 
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प्रतिमा बुआ

नई पारी जीवन की, शुरू हो रही है आज,
रात – दिन, चौबीस घड़ी,  साथ रहे सरताज . 
सुखी रहे तन मन सदा, चढ़ा रहे खुमार,
अतिशय मिलता उसे रहे, पति परमेश्वर का प्यार .
प्रथम बालिका जब घर आई, खुशियाँ वहाँ भरपूर छाईं .
उसका ‘ मुन्नी ‘ नाम धराए, भोलापन उस में पाए .
मूरत सौम्यता की वो मानी, ‘ प्रतिमा ’ नाम से जग में जानी. 
गुड्डा – गुड़िया के खेल  रचाए, बाल सुलभ क्रीड़ा कर आए .
भाई - बहन  में प्यार बढ़ाए, छोटे मोटे झगड़े भी कर आए .
चोटी उस को दोनों भातीं, बड़े गर्व से उन्हें लहराती .
इकिया – दुकिया , पजगुट्टे खेले, चार चिया से रचे झमेले .
‘ लंगड़ी टाँग ‘ से दौड़ लगाई, ‘ ऊँच – नीच ‘ के खेल खिलाई .
नानी - दादी उसे  दुलराती, बड़े चाव से भात खिलाती,
गुरु – माता की लाड़ली रानी, सेवा भाव में आनी सानी .
माता – पिता का सम्मान बढ़ाती, पूरे स्कूल में धाक जमाती .
बहनों के सँग शाला जाती , घर आ कर चुगली खाती .
पढ़ने – लिखने में ध्यान जमाती, कक्षा में अच्छा नाम कमाती .
विज्ञान में अच्छी रुचि दिखलाई , संगीत में महारत पाई ,
गणित से थोड़ा घबराती , अँग्रेज़ी से तो जी चुराती .
भाषा पर अधिकार जमाया , भूगोल में गोल डब्बा  पाया .
इतिहास याद कराता नानी,  नागरिक अच्छा बनने की ठानी .
कला क्षेत्र में नाम कमाया, गायन वादन को अपनाया .
गृह विज्ञान का आयास जगाया, सिलाई - कढ़ाई मन को भाया .
खान पान में रुचि दिखलाई, सुसंस्कृत सज्जा छाई .
स्नातक तक शिक्षा लीन्हीं, कॉलेज की पूरी पढ़ाई कान्हीं .
आगे पढ़ाई प्राइवेट करी , स्नातकोत्तर भी पूरा करी .
एक विषय से सँतोष न आया , दूजे में फिर हाथ जमाया.
बी. एड. की भी डिग्री ले ली . गायन में प्रभाकर कर ली .
कई स्कूलों में रुचि दिखलाई , एक में  फिर करा एप्लाई .
अस्थाई नौकरी कर लीन्हीं , बच्चों में सँस्कार भर दींन्हीं.
मार्ग केन्द्रीय विद्यालय का पाया ,  वह तो अच्छा रास  आया .
कई वर्ष इस प्रकार गुज़ारे , कानपुर में फिर भले पधारे .
बड़ी बनी  रही भगिनी , भ्राता की रही जीवनदायिनी .
बीमारी पिता की वह सह पाई , रक्तदान कर जान बचाई .
बीमारों की तीमारी करती, बुनाई से घर वो भरती .
त्याग की मूरति बन कर आई , फिर भी कोई गिला न लाई .
एकाकी जीवन से ऊबी , जीवनसाथी की देखी खूबी .
सम्मान प्रेम मन में भर आया,  पति में उसे बखूबी पाया.
पति संग जुगत बैठाई, जोड़ी भली दोनों ने पाई .
बात – बात पर हँसते जाते , जीवन सँतोषमय बिताते .
अपना वास आगरा अपनाया, सुख सुविधा से उसे सजाया .
बच्चों से ताल – मेल बिठाया , बड़े प्रेम से उन्हें अपनाया.
उन के बच्चों से लाड़ लड़ाया , आते – जाते गुण दर्शाया .
स्वाबलम्बन को आधार बनाया , जीवन यापन सुगम बनाया .
बहना झूमी खुशी से, पुलकित हुआ जहान,
सेवा निवृत्ति हो रही, स्कूल से छूटी जान .
सदा रहे सुखी वह, लुटाते हम सब प्यार ,
दुआ – सलाम बनी रहे , बना रहे व्यवहार .
 
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जयदीप

धरा ढूँढती हैरानी से, जला जला कर दीप.
सालों साल बीत गए, पर, मिला न कोई जयदीप.
 
शोभा सँग ब्याह रचाए, कर कृतार्थ बहनानाथ कहाए,
नाथ नगरी में सत्कर्मों से, जाने कितने पुण्य कमाए,
बीमारों की सेवा हेतु, जाने कितने कैम्प लगाए,
दूर दूर के नामी चिकित्सकों के कई सम्मेलन करवाए.  
 
जटिल, प्राचीन व्यथितों को सदा  पीड़ा मुक्त  कराएँ. 
औषधि नई खोज कर लाए, सबकी याद्दाश्त बढ़ाएँ.
अपने अनुभव से, कष्टों, व्याधियों का निदान बताएँ. 
अपने विषय के पंडित जानें, उनका लोहा हर कोई माने.   
 
नव ज्ञान में रुचि दिखलाई, उस को फिर अमल में लाई.
ईश्वर में विश्वास दिखाया, उस से जीवन सार्थक बनाया.
पूजा पाठ में ध्यान लगाया, प्रभु प्रसाद आशीर्वाद में पाया.
नित्य मंदिर में आरति गाएँ, टीका, तिलक भी खूब लगाएँ.
 
व्रत, धरम में श्रृद्धा जागी, प्रभु भक्ति के हैं अनुरागी.
ईश्वर भक्ति में रम कर, भौतिक विपदा दूर भगाएँ.
काल थपेड़ों से लड़, तप, कुंदन बन निखर कर आए
नई आस्था विश्वास जमाएँ, सब से इस के गुण गाएँ,  
 
भागवत गीता से ज्ञान बढ़ाया, सुख सागर जीवन में अपनाएँ .
मीठी वाणी से विश्वास प्राप्त कर , सब का दिल जीत के लाएँ.
सबसे मीठा बोल बुलाया, सादर सब को गले लगाया.
प्रेम भाव से शीश नवाया, आशीर्वाद सभी से पाया.
 
नाना व्यंजन मन को भाएँ, अच्छे भोजन सुस्वाद बताएँ,
बचपन में सब प्रकार के खाने खाए, अब सबसे परहेज़ अपनाए,
लौकी, तोरी, टिंडा, कभी न खाई, फिर भी शेषों की  खातिर अपनाई.
खाने में चाहे खिचड़ी खाई, पर चटनी  बिन स्वाद न आई.
 
सोंठ, अचार की भली चलाई, इन के बिना मज़ा नहिं भाई.
कचरी, पापड़ में रुचि दर्शाई, साथ में इस के दही सजाई.
गाय का दूध शुद्ध मँगाते, देसी सब्ज़ी से खुश हो जाते,
मँहगी ताज़ी सब्ज़ी लाएँ, बड़े चाव से उसे पकाएँ,
 
सीधी सच्ची बात बिचारी, सड़ी तरकारी है बीमारी.
योग में विश्वास जगाया, पाँच सहस्र कपाल भाती जमाया,
फिर व्यायाम से स्वस्थ रह, मधुमेह को  दूर भगाया.
चक्कर 3 मील का रोज़ लगाया, अच्छे स्वास्थ्य का मंत्र है पाया.
 
लम्बी मोटी तोंद भगाई, पेट  किधर गया है भाई.
साइकिल से वे स्वस्थ बनाएँ, जीविकार्जन भी करते जाएँ.
मीठे का परहेज़ जम जाता, पर फीकी चाय का स्वाद है भाता.
औषधि, वनस्पति का है नाता, तन मन उस से स्वस्थ बनाता.
 
तुलसी, गिलोय, नीम स्वाद जगाता, मधुमेह को दूर भगाता.
नियम कायदे खूब निभाते, गर्मी में बाहर सो जाते,
जब जब गरमी ने ललकारा, लुंगी, बनियान है ड्रेस हमारा.
जाड़े में जब अन्दर आते, फिर भी मच्छरदानी लगवाते, 
 
काकरोच, छिपकली से वैर निभाते, देखत ही पीछे पड़ जाते.
जब तक उस को मार न पाएँ, चैन से कहीं बैठ न पाएँ.
श्री मान को जब गुस्सा आया, सबों का भ्रम दूर  भगाया.
बार  बार बाज़ार घुमाया, गुस्से का तब  पार न पाया .

सुखी, प्रसन्न रहें सदा, देते हम आशीष,
करें कल्यान सभी का, बुद्धि दें जगदीश.
भगवन्‌ भला करें, रखे स्वस्थ सदा,
बढ़े नाम समाज में, मिले सुख संपदा. 

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      कारैक्काल प्रवास


कारैक्काल में  आन  कर ,दीन्हा महान  सम्मान ,
वर्षों  की एक  साध  थी, रहें मात  महान .

साथ  रहें, स्वस्थ  रहें,  और  रहें मुदित  मन, 
सब  अभिलाषा  पूरी  हुई,  हर्षित  हुआ तन, मन .

आकर  यहाँ  मात  पधारीं,  रजनी  संग  लै  अवतारी,
साहस  कर  आईं  यहाँ, मार्ग  निष्कंटक भए  जहाँ,

राजधानी  में  यात्रा कीन्हीं, कम्बल,  चादर, ओढ़  सब लीन्हीं,
स्वेटर पहन कर  रात  गुज़ारी, प्रात:  नागपुर पहुँची  सवारी,

सारे  दिन गरमी  गहराई, चेन्नई में  साँझ  ढल  आई,
सेंण्ट्रल से एग्मोर पधारे, सामान सभी  सुरक्षित उतारे,

बदली  गाड़ी, कुम्भकोणम आए, डेढ़ घंटे में कारैक्काल आए,
मुग्धा जी  के  दर्शन  पाए, स्वस्थ  बालिका देख  हर्षाए,

आते  ही सब अर्चना करी, पूरणमासी की कथा करी ,
पितृ पक्ष में  भक्ति कीन्ही, पूर्वजों को सम्मानित कीन्हीं,

नवरातन में जप - तप भाए, कालोनी में प्रसाद  चढ़वाए,
देवी जी  का  आराधन कीन्हा, श्रृद्धा सहित भजन  कर  लीन्हा.

अष्टमी तिथि को  कन्या जिमवाई,  दुर्गा पूजा  में  रुचि  दिखलाई,
दशहरा की विधिवत पूजा कीन्हीं, बच्चों को शिक्षाएँ  दीन्हीं.

करवा चौथ पर पूजा  पाई,  आशीषों  की झड़ी लगाई.
पौत्र  आने से  दादी  हर्षाई , भाई  दूज  की दई  बधाई.

दीपावली फिर खूब  मनाई,  हुलस हुलस कर  गले  लगाई,
एकादशी  का व्रत  रखवाया,गन्ने  खा  कर  धर्म  निभाया,

सकट  में  बकरे  कटवाए, रोटी  खिला कर  गाय गिधाए,
चींटी,  चिड़िया को  चावल  दीन्हीं, कुत्ते  तक की सुध  बुध लीन्हीं,

कई  दिनों  तक  धूप  न पाई, पानी  की  जम  कर  करी  बुराई,
प्रात:  काल जब सैर कराई, शाम को पत्रिका की करी  पढ़ाई,

आस्था, संस्कार चैनल  लगवाए, भजनों  में  समय  बिताए,
अपने ढंग  से त्योहार मनाए, संस्कृति  को  जीवित रख पाए,

दलिया  की  खिचड़ी  नित खाई, फिर भी टट्टी  ठीक  न आई,
बना खून    खाए  चूरन, मुरब्बा और खमीरा का सेवन,

पानी  में  फिटकरी  लगाई,  लेपा  लोआब  घटा  नहिं  भाई,
कर्ण पीड़ा से  घबराई, श्रीराम  की  लई  दवाई, 

फिर  भी  दूजी  डोज़ न खाई, चित्त  में जब  व्याकुलता आई,
गट्टूमल  से  हाल कहा, दिल में  नुस्खा खूब  धरा,

मुग्धा से गाड़ी चलवाई, कॉलेज की सैर  कर  आई,
थिल्लई  में सामान पड़े  दिखाई, कुछ  दिल को तसल्ली आई,

दूर  देश  में  वतन  सताए, मंदिर में  शिव के दर्शन पाए,
पर फूल, अभिषेक चढ़ा    पाए,  इसी  बात  का दु:ख  सताए,

काली  काली   मूरत  प्यारी, पर  भाषा की  है  बीमारी,
खाएँ प्रसाद  या  ना खाएँ,  दुविधा  में मन  भरमाएँ.

जब  भी  जी  हो  गया भारी, शोभा से  कह दीं  बातें  सारी,
मामी, मौसी, बुआ से  गप्प लड़ाई,  निगम  मैडम  खूब भायीं,

रहें कुशल से शेष दिन, स्वस्थ रहे  यह  गात,
आशीष  हमें देतीं  रहें,  हमारी प्यारी मात.
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              श्री जौहरी चालीसा

काया पलट हो गई , कर के ऐसे काम , 
       इतिहासों में अमर हुआ , जौहरी जी का नाम .  
आते ही कारैक्काल को दिया, कावेरी का नाम ,
        माँ का इससे अच्छा , क्या हो सकता सम्मान   
कालोनी के दिन बहुराए , सपत्नीक यहाँ पर आए ,
        शनि देव के द्वार सजाए , सब को भक्ति में ले आए ,
नागौर की दरगाह पधारे, अल्लाह ने भी करम विचारे ,  
        वैलंकिनी हो कर आए , करुणा दया सभी ले आए ,
स्वर्ण जयंती खूब मनाई , रंग रास की ख़ुशी दिखाई, 
        सभी निदेशक आमंत्रित कीन्हें , सब को समुचित आसन दीन्हें ,
आतिथ्य की परम्परा निभायी , करी नहीं बरदाश्त ढिलायी ,
        एक एक कर सभी बुलाए , सब अपनों को गले लगाए ,
सुरक्षा के द्वार सजवाए , घर बैठे पिक्चर दिखलाए ,
         ऑडिटोरियम की जगह बनाई, सभी घरों में गैस लगाई ,
आर. ओ. प्लाण्ट से घर सजवाए , सभी निवासी स्वस्थ बनाए ,
         डिस्पेंसरी यहाँ खुलवायी , फ़िर उसमें धन्वंतरि लगवायी ,  
सभी चिकित्सक पेनल में कीन्हें , अस्पताल में क्रेडिट कर लीन्हें,
         स्पेशियलिस्ट की पूल बनाई , क्लिनिक में जुगत बैठाई ,
लोगों को चश्मे दिलवाए, रक्त दान के शिविर लगाए,
         खेलों में प्रोत्साहन ले आए, देश – विदेश में नाम कमाए,
नगर में ओ.एन.जी.सी. गरमाई, सेतु से नेरावी जुड़वाई ,
         कार्निवाल में धाक जमाई, फ़िर नौका रेस कराई,
पूजा समिति यहाँ बनवाई, महिलाओं में ऊर्जा आई,
         मंदिर में मूर्ति लगवाई, सब में श्रद्धा खूब जगाई, 
एस्टो, यूनियन साथ मिला के, भाई, बंधु का भाव जगा के,
         सबको यथा सम्मान दिलाया, पद रक्षा का भान जगाया, 
पुलिस प्रशासन से दोस्ती कीन्हीं, हवा आपने पक्ष में कीन्ही,
         दुष्टों की करी सफ़ाई, छलियों को धता बताई,
अब है स्काडा, सैटकॉम की बारी, वीडियो कॉफ़्रेंसिंग की तैयारी,
         स्लज व साबर गैस सुधारी, क्षरण की दूर करी बीमारी,
गहरे पानी में खोज कराई, परिणाम आने हैं भाई,
         धर के धीरज प्रयास है ज़ारी, शीघ्र पायेंगे सम्पदा सारी,
सही जनों की पहचान कराई, झूठों को सज़ा दिलवाई,
         बिजली के बिल में कटौती करवाई, संवादों की महिमा गाई,
कालोनी में फ़ोन लगवाए, सब को मोबाइल दिलवाए,
         अच्छे से कंप्यूटर मंगवाए, फ़िर नेटवर्क प्रिंटर लगवाए,
लॉगिंग यूनिट नई मंगवाईं, तेल गैस की रीति बताई,
         अपनी बिजली स्वयँ बनाएँ,  गी.टी.डब्ल्यू. को पंख लगाए,
ट्यूबलर यार्ड को सजवाया, एक नई तकनीक अपनाई,
         सेफ़्टी ब्रीफ़िंग पड़ी दिखाई, राजभाषा ने नव - गति पाई,
वार्षिक बैठक करवाई, कवि सम्मेलन से मिली बधाई,
         रिग व इन्स्टालेशन ने आई. एस. ओ. पाए, प्रदूषण में पुरस्कार जमाए,
प्रति व्यक्ति छप्पन लाख कमाए,
सारा विनियोजन पूरा कर पाए,

        दो राज्य, छ: ज़िले, कावेरी का आमान,     
        छ: रिगें वेधन करें, यह है लक्ष्य महान ,
गैस तेल के साथ में, मिले रत्न की खान,
         जिनकी केवल जौहरी जी, ही कर सकते पहचान,
अश्रु पूर्ण नैनों से कहें विदा, दिल से करें सलाम,
         रहे अधूरे काम जो, हों पूरे अविराम,
एक वादा ले रहे, आज आप के साथ,
          हम को सम्मति दें सदा, प्यार भरे हों हाथ, 

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