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हरितालिका तीज
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पिता हिमालय घर मिला, गौरी रूप विचित्र,
विष्णु वरण उनका करें, रिश्ता बड़ा पवित्र.
रही कामना, शिव मिलें, गौरी को पति रूप,
कठिन तपस्या कर सकीं, वर्षा हो या धूप.
असमंजस दूर हो सके, चलती सखियाँ चाल,
गौरी का अपहरण हो, कर लें तप विकराल.
अन्न त्याग कर व्रत किया, एकनिष्ठ था ध्यान,
सफल हुई जब साधना, शिव देते वरदान.
सभी सुहागनें माँगती, पति की लंबी आयु,
सेवा से मुदित पति हों, खुद भी रहें चिरायु.
पूजा में जब मन लगे, जोड़ो दोनों हाथ,
महादेव सा पति मिले, सदा जगत का नाथ.
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गौरी ने पूजा करी, पूरे बारह साल,
जनम-जनम में शिव मिलें, धरे चंद्रमा भाल.
निर्जल व्रत गौरी करे, पति पाने की चाह,
भोले बाबा पति मिलें, शंकर करें विवाह.
चाहें सभी विवाहिता, पति का लंबा साथ,
रहे स्वस्थ, समृद्ध, सदा,डाल हाथ में हाथ.
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जन्माष्टमी
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ईश्वर द्वापर काल में, जन्म लिए भगवान,
नाश असुर का कर सके, मानव को वरदान.
लीला कुछ ऐसी हुई, पहुँचे गोकुल धाम,
उफ़नी यमुना पार कर, पिता छोड़ते श्याम.
अदला बदली नंद से, विधना खेलें चाल,
लाए कन्या नंद की, दे कर अपना लाल.
दरवाजे थे सब खुले, सोए पहरेदार,
जान सका कोई नहीं, रहा क्या समाचार.
जन्म हुआ था जेल में, मामा था तैयार,
क्रन्दन सुन कर वध करूँ, कैसा भी अवतार.
मामा की थी क्रूरता, करती सीमा पार,
पटका पाहन शिला पर, कन्या का संहार.
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जन्म हुआ था जेल में, पहुँचे गोकुल धाम,
मिला दूध माँ का नहीं, मिले भ्रात बलराम.
जसुदा मैया लाड़ में, देती कान्हा नाम,
माखन मिसरी दें खिला, खूब कराएं काम.
मार दानवी पूतना, नाथे काली नाग,
किया बकासुर का हनन, जगे नंद के भाग.
पूरे थे अरमान सब, लल्ला खेले खेल,
नाच नचावैं गोपियाँ, लीलाओं का मेल.
रास रचाती राधिका, उसमें बसती जान,
ब्रह्म रूप लीला करें, राधा को भी भान.
शांत चित्त लीला करें, कहलाते योगेश,
सभी वन्दना कर रहे, ब्रह्मा, विष्णु महेश.
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ओणम
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दान गाथा बलि राज की, तीन लोक में गाय,
त्रिलोकी ने छल कर दान में, दो पग लीन्हे पाय ,
दो पग लीन्हे पाय, तीजे की जो माँगी जगह,
अपना शीश नाय के, दानवीर जतलाई वजह,
ओणम में पाताल से, केरल आए वीर सुजान,
वचन निर्वहन हेतु आपने, कर दिया सब कुछ दान.
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बकरीद
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ईद मुबारक हम कहें, भीतर रहता रोष,
पीड़ा हमको हो रही, बलि होते निर्दोष.
देना ही है बलि अगर, जो खराब है पास,
गुस्सा, नफ़रत तज सकें, लें सबका विश्वास.
अपनी उन्नति के लिए, करें आत्मा शुद्ध,
स्वच्छ हृदय से मनन कर, करें विकास प्रबुद्ध.
मस्जिद में जा कर पढ़ें, सब के साथ नमाज,
सुनें ख़ुदा फ़रमान को, पालन कर लें आज.
हिंसा को सब तज सकें, बढ़े प्रेम व्यवहार,
मिल जुल कर जीवन जिएं, अच्छे बने विचार.
नहीं बढ़ावा किसी को, जबर, लूट, चीत्कार,
नफ़रत आपस की मिटे, बढा़ सकें व्यापार.
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दुआ सभी की माँगते, पढ़ कर पाक नमाज,
रहमत सब पर रब करे, रहा खास दिन आज.
होता खुश अल्लाह जब, छोड़ें गंदी बात,
करें इबादत रहम की, रख काबू जज़्बात.
कुरबानी के नाम पर, करिए नहीं हलाल,
खुदा पूछता रूह से, कैसे किया कमाल.
होता खुश उनसे खुदा, नेक करें जो काम,
उनसे हो नाराजगी, जीना करें हराम.
कुरबानी हो गाय की, नहीं कभी स्वीकार,
आदत छोड़ें हम बुरी, ऐसा करें करार.
करिए ऐसी बंदगी, होता सेवा भाव,
बिना रहम के करम से, हो जाता टकराव
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ईद मनाने में दिया, बकरे ने बलिदान,
दोष नहीं कुछ भी रहा, फिर भी वह कुरबान.
मूल बात है ईद में, उनका हो उत्थान,
रूहानी विकास करें, वह बनेंगे महान.
गलत इतिहास पढ़ा कर, रंगते अपने रंग,
तोड़-मोड़ कर तथ्य को, बलि में काटो अंग.
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लोग कहते हैं, आज किसी बुराई की बलि देनी चाहिए.
पर, मुझ में तो सारी ही बुराई हैं, मैं क्या करूँ?
मैं किस पर कुर्बान जाऊँ?
पर, मुझ में तो सारी ही बुराई हैं, मैं क्या करूँ?
मैं किस पर कुर्बान जाऊँ?
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कुर्बानी दें बकरीद पर, लें अनुपम उपहार,
अहंकार, द्वेष व स्वार्थ तज, पाएँ सबका प्यार.
पाएँ सबका प्यार, सुधारें अपना चरित्र,
निकाल मन से वासना, हृदय रखें प[वित्र,
भावना कल्याण की रख, बोलें ऐसी बानी,
आत्मशुद्धि से नहीं बड़ी, कोई अमर कुर्बानी.
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बकरीद के पर्व पर, सोचो क्या करें कुर्बान,
याद रखें मित्र, समाज, चढ़े सभी की जुबान,
चढ़े सभी की जुबान, दिल दिमाग की हो बरकत,
बढ़े न अन्याय, घृणा, फैले न कहीं नफरत,
न लगे हाय किसी की, अल्लाह से मिल जाए दीद,
हो मुबारक सब को, पावन पर्व बकरीद.
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रक्षा बंधन
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भाव भरा यह पर्व है, राखी का त्योहार,
बहन स्नेह से बांधती, अपने दिल का प्यार.
मतलब के संसार में, बदल रहे कुछ अर्थ,
हानि लाभ विचार रहे, क्या पाऊंगा अर्थ.
कभी कभी इतिहास को, करते हैं वह याद,
टीसें बीती बात की, सहें बिना अपवाद.
खेले खाए साथ में, मात-पिता संतान,
वैरी से वह लग रहे, दिखते दुश्मन जान.
अक्सर जीवन में मिले, लोग कहीं अनजान,
डाल गए ऐसा असर, ममता का फरमान.
इसी लिए सुझाव है, सब से रखिए प्रीत,
वैर किसी से ना रखें, मानें सबको मीत.
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शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, हो सावन का मास,
बहना आए भ्रात घर, लिए मिलन की आस.
बाँधी राखी प्रेम से, रही नेह की डोर,
प्यार बहन-भाई बढ़े, मिले न कोई छोर.
भाभी स्वागत कर रही, अद्भुत प्रेम प्रतीक,
मेल जोल परिवार में, रही सनातन लीक.
केवल धागा है नहीं, राखी मन की डोर,
रात प्रतीक्षा में कटी, कब होगी कल भोर.
बहना भाई से कहे, रहो भले नाराज,
याद हमें पक्का करो, दिल की है आवाज़.
दूरी भौतिक हो भले, दिल से ना हों दूर,
आवागमन कठिन है, हम होते मजबूर.
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कोरोना में बंद हैं, अपने सब त्योहार,
आना-जाना ही नहीं, मिलने का व्यवहार.
बड़ी आस हसरत रही, मिल पाएँ इस बार,
बहुत दिनों से सोचते, दें बहना को प्यार.
गले लगा कर मिल सकें, भाई से इक बार,
बसे हुए अरमान थे, हो लें दूर विकार.
राखी इक धागा नहीं, ना ही रेशम डोर,
यह बंधन है नेह का, भीगी अंतर कोर.
बड़े भाग बहना मिली, रखती हरदम ध्यान,
कैसा हो मेरा चलन, सबका हो कल्यान.
दोनों कुल में मान हो, ऐसे हों हालात,
हीन नहीं कोई लगे, बनती जाए बात.
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प्यार पुरातन चल रहा, जन्मजात अधिकार,
परिपाटी स्थापित हुई, खूब मिले संस्कार.
भाई घर आए बहन, लेकर
अपना प्यार,
पूनम सावन में करो, भाभी का दीदार.
बहन डूबती प्यार में, खुश होते माँ-बाप,
मैके आकर पूछती, किस हालत में आप.
बेटी की शादी करी, बढ़ा सभी का मान,
निभा सकी ससुराल में, ऐसा पाया ज्ञान.
मूरख लगते जो कहें, राखी केवल डोर,
बांध कलाई वृत बना, जिसका ओर न छोर.
राहत हमको मिल गई, बहना मांगे खैर,
सच्चे मन से याद कर, नहीं रहे कुछ वैर.
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पूनम को मनते रहे, हिंदू के त्योहार,
होली, राखी खास हैं, बढे़ परस्पर प्यार.
राखी धागा प्रेम का, ले आता उत्साह,
याद पुरानी आ गई, उपजा नेह अथाह.
उनमें प्रेम बना रहे, कह लें अपना हाल,
याद सदा आती रहे, बुनें प्रेम का जाल.
बहना को सम्मान दें, भारत में यह रीत,
राग-द्वेष को दूर कर, बढ़ती पल-पल प्रीत.
नहीं जरूरी बहन को, भाई दे उपहार,
गले मिले, बातें करे, दिल में हो दीदार.
मानो भाई से अधिक, भाभी का अहसान,
भाई भी पूरा लगे, जब भाभी पहचान.
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बहन भाई में रहा, सदा अनोखा प्यार,
मधुर क्षणों की स्मृतियाँ, बनीं जीवन आधार,
बनीं जीवन आधार, लड़े झगड़े फिर एक हुए,
चुगली, प्यार, डाँट के, सुख अमिय पीते हुए,
मिल दिल कर सुलझाते रहे, समस्याएँ गहन,
गलत फ़हमियाँ मिट जाएँ, जुड़े रहें भाई बहन.
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आरती बहना प्यारी की.
मोहिनी मूरत, गोरी सूरत, संस्कारी सीरत, मेकअप करनारी की.
आरती ...
पति के पास, बच्चों के साथ, सास की आस, परिवार रचनारी की.
आरती ...
गले में सुर, हाथ में गुर, झट से फुर, एक पाँव पर नाचनहारी की.
आरती ...
माँ की लाडलि, पिता की डाॅलि, दीदी की आलि, भाई खिझावन वारी की.
आरती ...
पड़ोसी सखा, बाॅस की व्यथा, बाई को धता, चतुर खुद्दारी की.
आरती ...
घर की चाभी, गार्ड की भाभी, समाज की नाभी, विलक्षण नारी की.
आरती बहना प्यारी की.
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राखी पाते ही उमड़ पड़ा, भाई बहन का प्यार,
कितनी परतें खुल गईं, यादों के लगे अंबार,
यादों के लगे अंबार, हिया में बिछोह अनल सुलगाती,
अप्रतिम भाव जगा मन में, श्रद्धा अमर उपजाती,
स्नेहपूर्ण, प्रसन्न मन से, भगाओ द्वेष, राग की माखी,
भूल वैर भाव सब, प्यार से बाँधो राखी.
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नाग पंचमी
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शिव ने विष का पान कर, किया जगत कल्यान,
कष्ट सभी के हर लिए, दिया सुधा का दान.
दूध पिलाते नाग को, होते देव प्रसन्न,
अच्छी वर्षा कृषि करे, अधिक अन्न उत्पन्न.
रूप भयानक देख कर, रखो नहीं कुछ द्वेष,
देव मान पूजा करो, होते रूप विशेष.
फन को काढ़े नाग हैं, डरिए नहीं जनाब,
आए हैं उपकार को, रखते बहुत रुआब.
नहीं नाग को मारिए, लगता भारी पाप,
कुचला जिसका फन गया, बन जाता अभिशाप.
राजनीति में खप गए, बहुत भयंकर नाग,
भीतर विष संचित करें, उगलें भीषण आग.
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हरियाली तीज
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गोरी गौरी पूजती, चाहे यह वरदान,
महादेव सा पति मिले, सुंदर चतुर सुजान.
पूजन में इच्छा करे, जोड़े दोनों हाथ,
मन चाहा वर मिले, भगवन भोले नाथ.
पूजा से पहले किया, अपना सब शृंगार,
बिंदी, चूड़ी, मेंहदी, इनसे निखरी नार.
याद मायके की करें, सभी विवाहित नार,
भाई से आशा यही, करो बुला मनुहार.
उसको भी सम्मान दो, लाए जिसको ब्याह,
बेटी वह भी किसी की, उसकी भी कुछ चाह.
स्वागत बेटी का करें, मन में रख अरमान,
बाद विदाई के मिलन, लगे नहीं आसान.
खीर, पुए, घेवर बने, नाना विधि पकवान,
बड़े दिनों में आ रही, बेटी घर की शान.
इंतज़ार में हैं सभी, डाले झूला डाल,
पेंग बढ़ाऊँ मौज में, सखियों संग धमाल.
हर्षित गोरी हुलस रही, पहन नया परिधान,
लाड़ बहू का भी करें, मानें एक समान.
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गोरी गौरी से कहे, दो साजन का साथ,
दुआ मेंहदी की रहे, रचती दोनों हाथ.
दिल का कतरा बन गई, जो भेजी ससुराल,
कभी तीज-त्योहार में, मिलता उसका हाल.
बेटी तो आई नहीं, किससे बाटूँ पीर,
नहीं मजा उसके बिना, क्या घेवर, क्या खीर.
कहे फोन पर मात से, साजन घर आनंद,
बिना कहे आए नहीं, आवत हरषे मंद.
एक झलक बेटी दिखी, खिल जाता संसार,
मिली गले अनुराग से, उमड़ पड़ा तब प्यार.
बेटी आई देख कर, पुलकित हुआ शरीर,
मिल कर गम साझा हुए, दूर हो गई पीर.
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पर्व हरियाली तीज का, देता अद्भुत संदेश,
बेटी पिया संग रह कर, आई अपने देश,
आई अपने देश, अजब उत्साह छाया,
हर्ष मग्न सकल परिजन, अंग अंग मुस्काया,
दोनों कुल का मान रखे, ऐसी बेटी पर गर्व,
हो मुबारक सब बहनों को, हरियाली तीज का पर्व .
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शादी से पहले मेंहदी लगी, मिल जाए सरताज,
गौरी – पूजन भी कर रहीं, हों प्रसन्न गजराज,
हों प्रसन्न गजराज, आशीषों की कर दें वर्षा,
अपनाएँ सारी पूजन विधियाँ, जीवन हो हर्षा,
सुखी बने सँसार, रहे न कोई फरियादी,
शिव जी भी कृपा करें, सब की हो जाए शादी .
गौरी – पूजन भी कर रहीं, हों प्रसन्न गजराज,
हों प्रसन्न गजराज, आशीषों की कर दें वर्षा,
अपनाएँ सारी पूजन विधियाँ, जीवन हो हर्षा,
सुखी बने सँसार, रहे न कोई फरियादी,
शिव जी भी कृपा करें, सब की हो जाए शादी .
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माँ गौरी आशिष दे रहीं, उठा कर दोनों हाथ,
सर्वे भवन्तु सुखिन:, प्रियतम का हो साथ,
प्रियतम का हो साथ, खाएँगे कढ़ी और खीर,
रहे प्रसन्न तन, मन, मिट जाए मन की पीर,
गौरी पूजन से दर्शन मिले, बँध जाए समाँ,
नित नव भाव से पूज रहे, अपनी प्यारी माँ.
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गुरू पूर्णिमा
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गुरु पूर्णिमा पर्व मने, हो गुरु का आभार,
जीवन में गुरु मुख्य हैं, मात, पिता आचार्य.
उसकी शिक्षा से चले, जीवन का व्यापार,
पूरी निष्ठा से करो, सीखों का व्यवहार.
बड़े हुए, पढ़ लिख गए, बूढ़े धर्माचार्य,
चुनिए खूब विचार कर, कर दे बेड़ा पार.
नहीं जरूरी कर सकें, गुरु से साक्षात्कार,
अंतर्मन में मानिए, उस गुरु का उपकार.
गीता में माधव दिए, अर्जुन गुरु उपदेश,
शिरोधार्य कर मानते, जीवन के संदेश.
अपने ग्रुप में दे रहे, विविध विषय का ज्ञान,
भगवत गीता ग्रुप बढ़ा, अंशुल जी का मान.
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जो कुछ भी हम बन सके, उसमें गुरु का हाथ,
गुरु ने की ऐसी कृपा, दिया सदा ही साथ.
गुरुजन सभी गुरू रहे, देते हरदम ज्ञान,
बुरे भले को समझ कर, लें समुचित संज्ञान.
मात पिता भी गुरु रहे, दिखा दिया संसार,
डाट डपट भी कर सके, बता जगत व्यवहार.
सीखा भाई बहन से, कैसे लड़ते यार,
करिए याद जीवन भर, फिर भी रहता प्यार.
समय पड़े बन जाइए, साथी, रिश्तेदार,
पत्नी की महिमा सुनें, गुरु की दावेदार.
गुरू पूर्णिमा पर करें, इन सब का आभार,
सच्चे मन से हम करें, आपको नमस्कार.
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मात पिता के साथ में, गुरु का परम प्रभाव,
इनकी बातें जो सुने, होगा नहीं अभाव.
परंपरा चिर काल से, कहते शास्र महान,
साथ मिला गुरु का जहाँ, दूर हुआ अज्ञान.
गुरु शिक्षक से अलग दे, ज्ञान और व्यवहार,
सारा जीवन याद रख, मिले सफलता सार.
अर्जन धन का जो करें, ऐसे गुरुकुल आज,
समझें शान खर्चे में, आदर करे समाज.
सदा नमन गुरु को करें, दिल से मानें बात,
उनकी शिक्षा ही बने, जीवन की सौगात.
अवसर है गुरु पूर्णिमा, करिए उनको याद,
बनी जिंदगी सफल अब, वरना थी बरबाद.
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गुरु गरिमा का ध्यान रख, कर लो गुरु का मान,
माता से ऊँचा रहा, गुरु चरणों का स्थान.
पूरी निष्ठा, भक्ति से, गुरु की लें आसीस,
गुरु-सेवा करके बनें, सबसे बड़े रईस.
सच्चे ज्ञानी गुरु मिलें, गुरु पद में रख माथ,
भाग्यवान ही पा सकें, सच्चे गुरु का साथ.
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ज्ञान गुरू से पाइए, श्रद्धा संस्कार के साथ,
आगे तब बढ़ पाओगे, सिर पर हो गुरू का हाथ,
सिर पर हो गुरू का हाथ, वैर न उससे साधो,
गुरू कृपा बिन न मिलें, शिव, राम या माधो,
गुरू पूर्णिमा का महापर्व यह, दूर करे अज्ञान,
निष्ठा से नमन करो, पाओ अनुपम ज्ञान.
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बरसातें (वट सावित्री)
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निष्ठा रखती ईश में, सेवा पर विश्वास,
ऐसी पत्नी पा सकें, होती सबकी आस.
पहले से उसको पता, नेत्रहीन माँ बाप,
थे कुछ कर्म अतीत के, बन बैठे अभिशाप.
जान बूझ शादी करी, रही आयु इक साल,
सत्यवान पति रूप में, पा कर हुई निहाल.
मिले तीन वर साथ में, जब हारे यमराज,
ससुर प्रतिष्ठा फिर मिले, वापस खोया राज.
यम से मांगा भ्रात को, खुद पाए संतान,
हार गए यमराज भी, सूझा नहीं निदान.
लड़ बैठी वह काल से, जब यम हरते प्रान,
सावित्री लाई छुड़ा, पति का जीवन दान.
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बुद्ध पूर्णिमा
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नाम गाँव का लुंबिनी, रहा देश नेपाल,
जन्म लिया उनके यहाँ, एक विलक्षण बाल.
शुद्धोधन के सुत हुए, नाम रखा सिद्धार्थ,
गौतम को सब जानते, लिया जन्म परमार्थ.
दृश्य हृदय विदारक था, छूट गया सब मोह,
सोती पत्नी छोड़ कर, करके पुत्र बिछोह.
वन में जा कर तप किया, पाएँ सच्चा ज्ञान,
बोधि वृक्ष की छाँव में, तज बैठे अभिमान.
पीपल नीचे खीर खा, समझा जीवन सार,
बोध गया में मिल गया, अब तक था बेकार.
नया पंथ चालू किया, अपने रखे विचार,
अनुयायी हैं जगत में, बौद्ध धर्म परिवार.
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राज-पाट को तज चले, लेने सच्चा ज्ञान,
बेटा राहुल छोड़ कर, मांगा तप वरदान.
बरसों तक कर साधना, बैठे बरगद छाँव,
यौवन को वन में बिता, छोड़ा अपना गाँव.
परम ज्ञान को प्राप्त कर, वह कहलाए बुद्ध,
बुद्ध पूर्णिमा हम कहें, तन मन करती शुद्ध.
सत्य, अहिंसा, प्रेम के, दिए तीन संदेश,
मानव जीवन हो सफल, यह उनके उपदेश.
जन्म, ज्ञान, निर्वाण के, दिवस रहे थे एक,
विरले होते लोग कुछ, जिनका जगा विवेक.
नियम बता कर बुद्ध ने, कहा धर्म का सार,
अनुयायी मानें सभी, शिक्षा का आभार.
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अक्षय तृतीया
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शुक्ल पक्ष बैसाख में, दिखा नवोदित चन्द,
हर्ष रेख मुख पर रही, कटते जग के बंध.
चमके आखी तीज को, नारी का सौभाग्य,
मन से पूजा अर्चना, होता अटल सुहाग.
याद करें दिन आज का, जब आए परशुराम,
चिरजीवी कहते उन्हें, करते सब प्रणाम.
बद्रीनाथ के पट खुले, हुआ शरद का अंत,
उमड़ पड़े दीदार को, सेवक, साधू संत.
अक्षय तृतीया शुभ दिन, करिए मंगल काज,
चिंता का मतलब नहीं, जाने सकल समाज.
शुभ अवसर पर आज के, नहीं मुहूर्त विचार,
काम शुरू कोई करें, निश्चित जीत हमार.
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ज्येष्ठ शुक्ल की तीज की, महिमा अपरंपार,
गणपति जी की वंदना, करती बेड़ा पार.
इस दिन में आराधना, तजें भूख अरु प्यास,
पूरी सब इच्छा करें, रखते जो उपवास.
सबसे पावन दिवस यह, कर लो कोई काज,
सभी समय शुभ लगे, कहता यही रिवाज.
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विष्णु-लक्ष्मी की करें, हम पूजा दिन रात,
सच्ची निष्ठा से बने, उनकी बिगड़ी बात.
विमल तीज पूजा करें, होवें देव प्रसन्न,
आशा भक्तों को रहे, बनें स्वस्थ, संपन्न.
पावन इस तिथि में नहीं, करो मुहूर्त विचार,
मंगलप्रद हो फल सदा, कोई नहीं विकार.
महिमा आखी तीज में, नाना मिले प्रमान,
कृष्ण सुदामा का मिलन, कहते वेद पुरान.
आज दिवस को ही लिए, परशुराम अवतार,
नारायण हरि धाम के, खुल जाते हैं द्वार.
शंकर खुश हो धरा पर, छोड़ें गंगा धार,
तप भागीरथ कर सका, पुरखों का उद्धार.
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हनुमान प्रकटोत्सव
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नाम धर्म का ले चले, भक्त और भगवान,
शक्ति भक्ति में है बड़ी, कहते हैं हनुमान.
जन्म मरण से मुक्त हैं, चिर जीवी हनुमान,
रहें हमारे साथ में, ऐसा रख कर भान.
सफल नहीं हो साधना, ले लो उनका नाम,
साधक को आशीश दें, मंजिल देना काम.
नहीं असंभव कुछ रहा, लिया नाम हनुमान,
सर्व शक्ति संपन्न हैं, करते दुख अवसान.
नहीं जयंती दें उसे, उस पर्व को नाम,
प्रकटे थे हनुमानजी, हों शंकर या राम.
चैत्र माह की पूर्णिमा, अंजनि की संतान,
जन्म लिया जब भक्त ने, उन्हें कहें हनुमान.
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सभी नमन दिल से करें, महावीर हनुमान,
जन्म दिवस उनका मने, कैसे हो सम्मान.
त्याग, वीरता की रहे, अद्भुत एक मिसाल,
दास्य भाव की भक्ति पर, होगा नहीं सवाल.
राम भक्त खुद दास बन, फिर भी भाई समान,
पाना हो गर राम को, प्रथम चरण हनुमान.
चर्चा होती हर जगह, हो साहस का काम,
शुभारंभ करते सभी, ले कर उनका नाम.
रहे कृपा हनुमान की, बनते बिगड़े काम,
श्रीगणेश हर काम का, लेकर हनुमत नाम.
मने जयंती देव की, पूरी श्रद्धा साथ,
होना सफल निश्चित है, उनका सर पर हाथ.
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चालीसा हनुमान का, पढ़ें स्वयं हनुमान,
कैसा कलियुग आ गया, विधना रचा विधान.
जन्म लिया पवनसुत ने, नाना मिले प्रमान,
नहीं मिला वर्णन कहीं, छोड़े हनुमत प्रान.
राम भक्त के नाम से, अमर, शक्ति के रुप,
रहे लीन प्रभु भक्ति में, साहस के प्रतिरूप.
सेवक बन रघुनाथ के, जपते हैं हनुमान,
भक्ति देख उनकी कहें, खुद उनको भगवान.
हर दम मन में धारते, रख अविरल विश्वास,
नमन करें हनुमान को, पूरी सबकी आस.
साहस देते प्रभु उन्हें, जो पूजें हनुमान,
बिना किसी दुर्भाव के, रखें भक्त का मान.
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सारे काज तुरत करें, नहीं असंभव काम,
भक्त अनोखे राम के, रहा पवनसुत नाम.
उत्सव उनके जन्म का, नव उल्लास जगाय,
जीवन देता प्रेरणा, जोश अधिक आ जाय.
रहा राम के नाम में, अडिग, अटल विश्वास,
सुमिरन से हनुमान के, जग जाती नव आस.
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महावीर जयंती
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जैन धर्म के प्रभु रहे, कहते हम भगवान,
अंतिम तीर्थकर हुए, कल्याणक भी जान.
सत्य, अहिंसा, प्रेम की, दें सीख महावीर,
सभी चैन से जी सकें, नहीं किसी को पीर.
शांत भाव से तप करें, मूरत लगे सजीव,
लेते उनसे प्रेरणा, करें क्षमा हर जीव.
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महावीर ने दिया , ' अहिंसा परमो धर्म: ' संदेश ,
आकंठ आभारी रहा , महान मेरा देश ,
महान मेरा देश , अपनायीं शिक्षाएं सारी ,
समृद्ध , सुखद , संपन्न , भारत विकास की तैयारी ,
धर्म ध्वज फहरा दिया , राष्ट्र संस्कृति की प्राचीर ,
नमन करें मिल कर सभी जन , हे ! भगवान महावीर .
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बैसाखी
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भारत माता के लिए, दे दी अपनी जान,
कर्म रहे हित धर्म के, करें जान कुरबान.
याद रखें मिल कर सभी, वाहे गुरु का मान,
अत्याचार मुगल करे, डिगा नहीं ईमान.
पंथ खालसा को शुरू, करते गुरू महान,
दीक्षा के गुरु मन्त्र से, बनी अलग पहचान.
बैसाखी के पर्व में, झलके दिल का हर्ष,
सभी जगह उत्साह से, जाने भारत वर्ष.
पकी फसल को देख कर, हर्षित हुआ किसान,
सफल हुई मेहनत अब, होती खतम थकान.
खुशी बिहू के साथ में, फसलों के त्यौहार,
गायन वादन कर रहे, जन जन के परिवार.
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नया साल होता शुरू, केरल, बंग, असाम,
आगे रहता देश में, सदा सिखों का नाम.
बैसाखी पर बन गया, पंथ खालसा खास,
मुगलों से रक्षा करे, भाव वीर आभास.
जलियां वाला बाग में, हुआ अमर बलिदान,
अंग्रेज़ों ने मार लीं, निर्दोषों की जान.
पकते देखा फसल को, हर्षित हुआ किसान,
बच्चों को भोजन मिले, रहा यही अरमान.
फसल रबी में पक गए, गेहूँ, चना, जुआर,
पके साथ ही फल सभी, केला, बेर, अनार.
नर-नारी मिल साथ में, करते मस्ती, नृत्य,
पड़ती थाप मृदंग पर, कहे बात सब सत्य.
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बैसाखी सब मना रहे , सुमिर गुरू नाम बलिदान ,
नमन शहादत को करें , उन का त्याग महान ,
उन का त्याग महान , बना दिए पंज पियारे ,
कर साहस का संचार , आज़ादी के खोले द्वारे ,
खुली हवा , आज़ादी की साँस , हम सब ने चाखी ,
हो मुबारक सभी जनों को , पुण्य पर्व बैसाखी .
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ईद-ए-मिलाद व रमजान
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दिखे चाँद जब ईद का, आ जाती मुस्कान,
बड़े प्रेम से मिल गले, सुनो खुदा फरमान.
तीस दिवस रोजे रखे, तन मन होता साफ,
करें इबादत खुदा से, कर दो गुनाह माफ.
रहें प्यार से मिल सभी, बढ़े अमन औ चैन,
निकले हिंसा दिमाग से, नीयत से बेचैन.
पढ़ी ईद नमाज जहाँ, बदल जाते विचार,
छोटों को ईदी मिले, बड़े देत उपहार.
ऐसे काम करें नहीं, हों समाज विपरीत,
प्रेम और सद्भाव की, बनी रहें सब रीत.
राजनीति ने कर दिया, सब माहौल खराब,
सत्ता निहित स्वार्थ सधा, बढ़ गया भेदभाव.
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गले मिलें हम ईद पर, नहीं किसी से वैर,
सबकी चाहें कुशलता, लगे न कोई गैर.
तन मन से पावन रहे, रख कर रोज़े तीस,
बात भले की सोचते, ईदी की बख्शीस.
बिना नीर पूरा हुआ, दिन भर का उपवास,
कोई भूखा ना रहे, ईश्वर पर विश्वास.
पाँच समय नमाज पढ़ी, मांगी सबकी खैर,
राजनीति के खेल में, पनप रहा है वैर.
आपस में हम लड़ रहे, हिंदू, सिख, इस्लाम,
सबके भगवन एक हैं, मूसा हो या राम.
जाति, धर्म में बांट कर, खाते हरदम माल,
शरम नहीं नेता करें, दिल में नहीं मलाल.
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बातें सब अच्छी लगें, आया जब रमज़ान,
दिल से सब का हो भला, जाग गया ईमान.
पुण्य धरम के काम हों, रख रोजे उपवास,
पाँच समय की नमाज से, मन हो नहीं उदास.
पाक महीना साल का, कहें जिसे रमज़ान,
अंदर से दिल मिल गए, पावन लगे जहान.
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ईद मनाएँ प्रेम से, बढ़ा रहे अनुराग,
वैमनस्य पनपे नहीं, जलते रहें चिराग.
दिन भर का रोज़ा रखें, श्वास वायु आहार,
सहरी खाएँ सुबह को, शाम करें इफ़्तार.
कोरोना कारण बना, दिखे अनोखा प्यार,
मिले बधाई दूर से, होता पहली बार.
पैगम्बर साहब कहें, मानव सभी समान,
सब धर्मों को मान हो, नहीं अलग इन्सान.
दया करें धनहीन पर, मानेगा अहसान,
खुले हाथ से दान दें, पूरे हों अरमान.
मन्नत पूरी हो सके, चाहें रोज़ेदार,
खुशियों से दामन भरे, सबकी है दरकार.
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मिल कर आपस में रहो, कहे माह रमज़ान,
हिंदू मुस्लिम एकता, सबका रहता मान.
रोज़ा रख शोधन करें, मन के दूषित भाव,
अन्तर्मन से प्रार्थना, शुद्ध करे मन-भाव.
तीस दिवस की साधना, करें बिना दुर्भाव,
सबका आदर कर सकें, तप का यही प्रभाव.
पावन सारे साल में, रहा माह रमजान,
रोज़ा रखते ही हुई, मुस्लिम की पहचान.
पूरी श्रद्धा से रखें, सारा दिन उपवास,
पानी तक भी ना पिएं, लेते केवल श्वास.
रिश्तेदार साथ रहें, होता जब इफ़्तार,
साथ बैठ, नमाज पढ़ें, रब से हो दीदार.
सच्चे मुस्लिम ईद पर, रखते नीयत साफ,
खता नेक इंसान की, रब भी करता माफ.
ऐसा संभव है कभी, करे न कोई गुनाह,
अपना हित ही साधते, सभी भले की चाह.
कहने को विचार सही, रहती नीयत खोट,
अंदर से इच्छा यही, जनसंख्या विस्फोट.
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तैयारी में ईद के, रखें तीस उपवास,
तन मन से पावन रहें, जाते रब के पास,
जाते रब के पास, वैर भाव जाते भूल,
प्यार से गले मिले, दया सब धरम का मूल,
तज कर माया मोह सब, रखो रब से यारी,
सार्थक फिर होयेगी, ईद की तैयारी.
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लगन मिलन की ईद की , सब के भीतर होय ,
अन्न, वस्त्र व प्यार से , वंचित रहे न कोय,
वंचित रहे न कोय , अल्लाह की ऐसी रहमत ,
वैर भाव को दूर रख, समृद्धि , शाँति से सब हों सहमत ,
दिल से दिल मिल जाँय , प्यार बसे जन - मन ,
हर साल मनाएँ ईद हम , कम न हो कभी ये लगन .
अन्न, वस्त्र व प्यार से , वंचित रहे न कोय,
वंचित रहे न कोय , अल्लाह की ऐसी रहमत ,
वैर भाव को दूर रख, समृद्धि , शाँति से सब हों सहमत ,
दिल से दिल मिल जाँय , प्यार बसे जन - मन ,
हर साल मनाएँ ईद हम , कम न हो कभी ये लगन .
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गुड फ्राइ डे व ईस्टर
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खुशी मिले दुख के बाद, नवजीवन संचार,
नई ऊर्जा भर रहा, ईस्टर का त्योहार.
विदेश में भी मानते, पुनर्जन्म साकार,
इक तन छोड़े आत्मा, करे प्रवेश विचार.
ईस्टर के अंडे बटे, बढ़ा प्रेम व्यवहार,
हरषित सारा जग हुआ, प्रभु लीन्हा अवतार.
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सत्य वचन ईसा कहे, मानें जन अनमोल,
संकट में अस्तित्व था, बोले कड़वे बोल.
ज़ुल्म ढहाए नेक पर, करने लगे विरोध,
धर्म पुरुष थे डालते, जीवन में अवरोध.
अधिक लगे उपदेश तो, करने लगे फरियाद,
भ्रष्ट धर्म यह कर रहा, संस्कृति को बरबाद.
ईसा को फाँसी सजा, करें मांग पुरजोर,
इसे चढ़ाओ क्रास पर, कोई करे न शोर.
फाँसी पर ईसा चढ़े, भक्त हुए बेचैन,
करी चर्च में प्रार्थना, जीवित देखें नैन.
पुनर्जन्म की मान्यता, अपने थे संस्कार,
भारत को आदर मिले, करते लोग विचार.
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रामनवमी
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नवराते पूरे हुए, अब प्रभु का हो ध्यान,
हो पूरी सब कामना, देवी का वरदान.
दशरथ के अंदर रहा, एक सालता दंश,
दिन-दिन बढ़ती आयु है, सूना है रघुवंश.
धरम करम की बात में, लेते गुरु की राय,
कैसे आगे राज हो, कोई भला उपाय.
यज्ञ कराया राज में, मुनि ने दिया प्रसाद,
खीर खिलाओ नार को, यदि चाहो औलाद.
सही समय पर आ गए, कुदरत के परिणाम,
त्रेता युग में जन्म ले, अवतारे श्री राम.
शुक्ल पक्ष नवमी रही, रोशन कौशल नाम,
ठीक दोपहर जन्म लें, सबके प्रिय श्रीराम.
उसी समय पैदा हुए, तीनों माँ के लाल,
मिले तीन सुत साथ में, दशरथ हुए निहाल.
तीनों रानी ने दिए, राजा को सुत चार,
बाल सुलभ क्रीड़ा करें, सुखी हुआ संसार.
सकल जगत हर्षित हुआ, देवों की मुस्कान,
लोग सभी आशीश दें, करिए प्रभु कल्यान.
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पाख उजाला चैत का, नवमी तिथि अविराम,
बजे नगाड़े अवध में, जन्म लिए श्री राम.
जन्मे उनके साथ ही, भाई राजकुमार,
दशरथ प्रसन्न बहुत थे, पूरा कर परिवार.
लालन-पालन राजसी, रहे नीति संस्कार,
माता की ममता मिली, मोह लिया व्यवहार.
पढ़-लिख कर किशोर हुए, शादी को तैयार,
गुरु ने ढूँढी दुल्हनें, काफी किया विचार.
मिथिला जाकर जनक से, वशिष्ठ दिया सुझाव,
शिव पिनाक को तोड़ कर, जगे प्रेम के भाव.
चारों बहनें साथ में, आईं करने राज,
पत्नी पा भाई सुखी, हर्षा सकल समाज.
राज तिलक प्रभु का करें, राजन सबके साथ,
लिखा भाग्य कुछ और था, नहीं बनेंगे नाथ,
राज महल में मंथरा, कैकेई की दास,
विष रस घोला कान में, मिला राम बनवास.
रानी डूबी स्वार्थ में, मांगे दो वरदान,
राजा पूरे यदि करें, छूटें उनके प्राण.
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गुड़ी पाड़वा व वासंती नवरात्रि
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अंतिम दिन पूजा करो, मन में रख विश्वास,
पूरी सिद्धिदात्री से, सब भक्तों के त्रास.
सफल साधना हो गई, उपजा हिय में हर्ष,
शुद्ध भाव धारण किए, जीवन का उत्कर्ष.
पूजा माँ के रूप की, करे भगत कल्यान,
पूरी श्रद्धा से कहो, दे दो माँ वरदान.
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ममता की मूरत रहीं, दें इच्छित वरदान,
रूप महागौरी बना, पावन दिवस महान.
रही सवारी वृषभ की, कर में धार त्रिशूल,
सच्चे मन की प्रार्थना, शंका है निर्मूल.
असत छोड़ प्रेरित करे, जीवन सत की ओर,
पाप वृत्ति का नाश हो, सौंपो मन की डोर.
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रक्षा भक्तों की करे, दुष्टों का संहार,
कालरात्रि के नाम से, जाने सब संसार.
शास्त्र पुराणों में पढ़ा, रूप बड़ा विकराल,
प्यास बुझाई रक्त से, क्रोध निकाले ज्वाल.
नाश आसुरी शक्ति का, करें पलायन दोष,
साधक का मन लीन हो, देती सुख के कोष.
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छठा रूप कात्यायनी, सब पर हो उपकार,
पूजन श्रद्धा से करो, हो जाओ तैयार.
रूप चतुर्भुज में दिखे, लिए कमल, तलवार,
सिंह वाहिनी मन बसी, करती सच्चा प्यार.
मन हो आज्ञा चक्र में, तप की ऐसी रीति,
माँ के दर्शन से जुड़े, अनुपम मन अनुभूति.
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माँ गौरी के पुत्र हैं, कार्तिकेय भगवान,
हैं सेनापति देव के, माता रहीं महान.
उनकी जननी शक्ति से, होती हैं भरपूर,
साहस की प्रतिमूर्ति हैं, छाया अद्भुत नूर.
चिंतन, साधन मात का, करता दूर विकार,
स्कंद मात का नाम लो, हो निश्चय उद्धार.
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आदि शक्ति के रूप ने, दिया जगत आधार,
कूष्मांडा के हास ने, किया सृष्टि विस्तार.
चौथे देवी नाम के, दिखते आठों हाथ,
दिव्य रुप देवी सजी, अस्त्र, शस्त्र के साथ.
देवी पूजन से मिटे, रोग, व्याधि अरु कष्ट,
उनको फल मिलता नहीं, रहे आचरण भ्रष्ट.
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चँद्रघंटा के नाम ले, धरिए माँ का ध्यान,
तीजे दिन पूजन करें, इच्छा हो बलवान.
शांत चित्त से साधना, करते भक्त सुजान,
देवी के वरदान से, मिलता कष्ट निदान.
पहुँचे मणिपुर चक्र में, भक्त करें आह्वान,
साधक गण विकास करे, हो खुद का कल्यान.
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दूजे दिन आराधना, माँ का धरिए ध्यान,
हों प्रसन्न जब मात दें, मनचाहा वरदान.
ब्रह्मचारिणी माँ रहीं, अपने तप में लीन,
रूप सुहाना मात का, उनको भजते दीन.
लिया कमंडल वाम कर, चलती अपने पैर,
दूजे कर माला रहे, चाहें सबकी खैर.
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पहला देवी रूप है, शैलपुत्री का नाम,
कन्या रही हिमालय की, करती तप अविराम.
एक शक्ति माँ रूप में, आईं देवी रूप,
पर्वत राज का घर बसा, मुदित हुए सुर भूप.
रहा प्रयोजन आप का, जन मानस कल्यान,
नाना विधि से प्रकट हो, तोड़ें असुर गुमान.
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नौ दिन का पूजन करे, देवी सभी विशिष्ट,
सिद्धिदात्री माँ करें, सभी रूप संतुष्ट,
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सच्चे दिल से पूजिए, छबि को हृदय बसाय.
गदा, शंख कर में दिखे, मात सदा मुस्काय.
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नंदा पर्वत पर बसें, अष्ट सिद्धि हैं हाथ,
शिव की भी आराधना, होती इनके साथ.
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करें सवारी बैल पर, धारण वस्त्र सफेद,
धाक जमी है सब जगह, कहते चारों वेद.
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दिखती मुद्रा शान्त है, धरे श्वेत परिधान,
करें सवारी बैल की, लगे प्रेम से ध्यान.
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इनकी पूजा जो करे, धुल जाते सब पाप,
खुश हो माँ आशीष दें, मिट जाते संताप.
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महागौरी उन्हें कहें, जाने जगत जहान.
दया दृष्टि उनकी रहे, देवी मात महान.
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द्वार सिद्धि के खुल सकें, इच्छित फल मिल जाय,
जो जन विपदा में घिरे, देवी करें उपाय.
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काल रात्रि की साधना, बड़ी विछकट विकराल,
रूप भयानक दीखता, उनके बिखरे बाल.
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देवी पूजन जो करें, सब बिधि हो कल्यान,
शुभ फल देती माँ सदा, रूप, समृद्धि प्रदान.
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दिवस छठा कात्यायनी, देवी का अवतार,
अभय करें वरदान दें, खूब लुटाएं प्यार.
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पहुँचा आज्ञा चक्र में, साधक का मन आज,
नौ दिन की कर साधना, अपना करे समाज.
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पाप नाशिनी माँ करे, नाश सभी के पाप,
धरम-करम से जी सको, भूलो सब संताप.
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मुरुगन जी माता कहें, दिखते चारों हाथ,
उनकी करें उपासना, हरती आपत रात.
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कमल पुष्प को हाथ ले, रखें स्कंद को गोद,
ज्ञानी बनता मूढ़ भी, उठता मन में मोद.
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सृजन चेतना का करें, मुख पर अनुपम तेज,
दुष्ट जनों के नाश में, करती नहीं गुरेज.
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चक्र, कमंडल हाथ ले, बनी जगत आधार,
कूष्मांडा के नाम से, जाने सब संसार.
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अष्ट भुजा के रूप में, सजती सिंह सवार,
धनुष, बाण है हाथ में, सब का हो उद्धार.
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आदि शक्ति के रूप में, लिया एक अवतार,
कूष्मांडा के रूप में, लें देवी अवतार.
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देवी तीजे दिवस की, दें हमको आशीश,
नाम चंद्रघण्टा कहे, घंटा सजता शीश.
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इनकी पूजा से मिले, अनुपम दिव्य सुगंध,
ऊर्जा के संचार से, आ जाता आनंद.
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कनक रंग की तपस्वी, हाथ लिए तलवार,
सद्गति को निश्चित करे, भक्तों का उद्धार.
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पूजन दूजे दिवस का, ब्रह्मचारिणी नाम,
माता के इस रूप का, धरें ध्यान श्रीराम.
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घोर तपस्या माँ करें, हर पाएँ पति रूप,
उदाहरण तप का मिला, प्रेम स्वरूप अनूप.
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पूजा करते हो गई, देवी माँ कृशकाय,
ऋषि मुनि भी हैं खोजते, तप से बड़ा उपाय.
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देवी का पूजन प्रथम, शैलपुत्री है नाम,
भक्ति, प्रेम से कीजिए, बनते बिगड़े काम.
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पर्वत पर तप, साधना, देवी करती जाप,
धरती पर अवतरित हो, हरती सबके पाप.
-------
शिव की करती कामना, पाने को पति रूप,
शैलपुत्री पूजा करें, निष्ठा रही अनूप.
-------
होली में खाया-पिया, गड़बड़ होता पेट,
यह बेकाबू, तो सुनो, डाॅक्टर लेते भेंट.
माता का पूजन करो, मन में रख कर प्रीत,
नीम, लौंग, कपूर से, चले पुरातन रीत.
सात दिवस उपवास से, करें प्रार्थना ईश
स्वस्थ परिवार हर तरह, माँ देगी आशीश.
मुखिया गृहिणी सब करें, जन मानस की बात,
चला टोटका प्रेम का, मना रही नवरात.
हर संकट को दूर कर, माँ करती कल्यान,
सच्चे दिल से जो करे, पूजन का अभियान.
हल्दी कुंकुम से करें, माता का अभिषेक,
रोग, बीमारी से बचे, खोएं नहीं विवेक.
-----
नए साल की कामना, देती शुभ संदेश,
गुढ़ी पाड़वा नाम है, महाराष्ट्र परिवेश.
-----
नव संवतसर की खुशी, माने सकल समाज,
अपने अपने ढंग से, करते हैं आगाज.
-----
चैती चंद, उगाड़ि हैं, इसके नाना नाम,
मकसद सबका एक है, माँ शारदे प्रणाम.
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पर्व, समय सब एक है, बस अलग हैं ढंग,
नाना विधि से पेंट करें, उत्साह के सुंदर रंग,
उत्साह के सुंदर रंग, न हो किसी का मान कम,
हो चाहे झूले लाल, गुढ़ी, चैती चांद या विलंब नम,
भारत की वैविध्य संस्कृति पर, कर सकें गर्व,
मिल जुल कर प्रेम से, सबके साथ मने हर पर्व.
-----------
अभिनंदन, नव संवत में, आप का, स्वस्थ रहे परिवार,
मुदित तन, मन रहे, ख़ुशियाँ मिलें अपार ,
ख़ुशियाँ मिलें अपार, जीवन में उल्लास छाए ,
पूरीं हों अभिलाषा, सपने जो रखे संजोए ,
हो संरक्षित पर्यावरण, पूजें नीम, तुलसी व चंदन ,
बना रहे सद्भाव संसार में, करते हैं अभिनंदन .
मुदित तन, मन रहे, ख़ुशियाँ मिलें अपार ,
ख़ुशियाँ मिलें अपार, जीवन में उल्लास छाए ,
पूरीं हों अभिलाषा, सपने जो रखे संजोए ,
हो संरक्षित पर्यावरण, पूजें नीम, तुलसी व चंदन ,
बना रहे सद्भाव संसार में, करते हैं अभिनंदन .
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होली
+++++
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चलो साफ दिल को करें, लख होली त्योहार,
शुद्ध हृदय से मिल गले, डालें रंग फुहार.
जली होलिका, हो गया, गर्मी का आगाज़,
बदन स्वस्थ अपना रखें, हर दिल की आवाज.
वैर भाव को भूल कर, सब मिल करें प्रयास,
दूर सभी हों समस्या, प्रगति का एहसास.
सभी जाति के जन मिलें, रहे न कोई द्वेष,
हिंदू, मुस्लिम, जैन, सिख, सब भारत के वेश.
लोग विरोधी देश के, मिले उचित सत्कार,
ऐसों को शिक्षा मिले, तोड़ नियम हर बार.
नारा सर्वजन हित का, कर पाएं साकार,
होली हो इस बार की, बन सके यादगार.
----------
दिल मिलने की प्रेरणा, दे होली त्योहार,
आपस में सद्भाव हो, मिल जाता परिवार,
मिल जाता परिवार, भूल मनमुटाव जाएं,
प्रथा गले मिल सकें, उसे मजबूत बनाएं,
पूरे कर सब शौक, मस्ती में गाएं हिल मिल.
नफरत जाए पिघल, सबके मिलते रहें दिल.
आपस में सद्भाव हो, मिल जाता परिवार,
मिल जाता परिवार, भूल मनमुटाव जाएं,
प्रथा गले मिल सकें, उसे मजबूत बनाएं,
पूरे कर सब शौक, मस्ती में गाएं हिल मिल.
नफरत जाए पिघल, सबके मिलते रहें दिल.
---------
होली मिलने का त्योहार, होली मनाओ.
रंग जमाओ, रंग लगाओ,
गाने गाओ, गा कर सुनाओ,
नाच करो, नाच दिखाओ,
होली मिलने का त्योहार, होली मनाओ.
कविता लिखो, कवि बन जाओ,
भजन सुनाओ, सत्संग जमाओ,
होली जलाओ, द्वेष मिटाओ,
होली मिलने का त्योहार, होली मनाओ.
सभ्य बनो, सभ्यता अपनाओ,
मित्रों से मिल कर, यादें सजाओ,
बीती बातें भूलो, सुंदर भविष्य सजाओ,
होली मिलने का त्योहार, होली मनाओ.
--------
एक बार फिर आ गया, होली का त्योहार,
खुशियां छाईं हर जगह, बरसे रंग फुहार.
दें बधाई, मिलें गले, भूलें सारे द्वेष,
रहे कृपा भगवान की, हटें, मिटें सब क्लेश.
सभी घरों में बन रहे, स्वाद भरे पकवान,
जिनको खा कर हम बनें, स्वस्थ और बलवान.
सरदी काफी पड़ चुकी, उसका अब अवसान,
ग्रीष्म ऋतु अब आ गई, ठंडाई का पान.
जान बूझ कर ना करें, कहीं गलत व्यवहार,
आदर समुचित कर सकें, पाएं सब का प्यार.
गैरों को अपना सकें, अपनों सा परिवेश,
सारे मिल कर रह सकें, होली का संदेश.
---------
भांग नसें ढीली करे, देती नव आयाम,
ऐसी चढ़ी दिमाग में, होने वाली शाम.
खाई भांग होली में, नहीं लगे कछु पाप,
उल्टी सीधी हरकतें, होतीं अपने आप.
गरल शान्त शिव का हुआ, कर के लेपन भांग,
औषधि सेवन जो करे, रहे न कोई माँग.
नशा भांग का जो करे, हो जाता वैराग,
कहते लोग पिनक इसे, डाले असर दिमाग.
-------
होली पर सबसे मिलो, वैर भाव को भूल,
गले लगाओ मीत को, नहीं द्वेष को तूल.
सबके दिल उत्साह से, उछल रहे भरपूर,
होली तो आ ही गई, देर नहीं कुछ दूर.
द्वेष भाव को भूल कर, सभी लुटाएँ प्यार,
माफ गलतियों को करें, आ जा मेरे यार.
बचपन में मस्ती करी, सुने प्यार के बोल,
आज किसी से कह सको, ले आए भूडोल.
संबोधन कुछ भी कहें, मस्ती भरे विचार,
देते कहीं, उपाधि तो, होली का शृंगार.
लकड़ी, कंडे चुन लिए, बड़ा लगाया ढेर,
जली बुराई होलिका, उच्च शिखा पर टेर.
-------
होली पर सब कर सकें, नया खास इस बार,
पिछली बातें भूल कर, बढ़ा सकें हम प्यार.
फागुन की पूनम रही, करें द्वेष का दाह,
होली के त्योहार में, रहे मिलन की चाह.
गले लगा कर प्यार से, करें नहीं कुछ भूल,
सब कुछ संभव प्यार में, प्रेम समर्पण मूल.
कोरोना ने कर दिया, जीने को मजबूर,
हाथ साफ हर समय हों, तन हों दो गज दूर.
होली हो घनश्याम सी, राधा जी के माथ, परमात्मा में विलय हो, जब आत्मा के साथ.
आगंतुक को दीजिए, लौंग, सुपारी पान,
स्वागत विधि नवीन लगे, डाल प्यार में जान.
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होली आई मानते, सरदी का अवसान,
पूनम फागुन की रही, गरमी का आव्हान.
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बांध गले में घूमते, नीम, लौंग तावीज,
मस्त महक कपूर कहे, मिटे रोग के बीज.
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सूर्य देव का बढ़ गया, भरी दुपहरी ताप,
जीव धरा पर कह रहे, क्या कर बैठे पाप.
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मस्ती अजीब छा गई, फगवा चली बयार,
अंग फरकते यार के, हो जाए दीदार.
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होली खेलो प्यार से, करो अदावत दूर,
वैर भूल कर हो नमन, भावों से भरपूर.
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प्रेम पगी गुझिया कहे, छोड़ो नहीं मिठास,
तन पर हों छाले पड़े, फिर भी मधुरिम हास.
------
चौक सजी होली दिखी, जली बीच बाजार,
नाचें गाएं लोग सब, करें प्यार इज़हार.
------
दारू पी कर लोटते, नाली में कुछ लोग,
अपनी चिंता है नहीं, पाल रहे हैं रोग.
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देखें होली में नहीं, प्यार जताता कौन,
एक मंद मुस्कान से, होते वैरी मौन.
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पकी फ़सल को देख कर, हर्षित हुआ किसान,
मिल जाएगा शीघ्र ही, खेती का प्रतिदान.
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खेती में मेहनत का, भला मिला परिणाम,
बैल जोत कर थक गए, हो जाए आराम.
------
उठती खेतों से महक, अरहर, मूंग मसूर,
अच्छे भोजन का मजा, देगी दाल जरूर.
------
होली के पर्व में, गले मिलें, तज राग औ द्वेष,
अपने अपनों से मिलें, रखें स्नेह विशेष,
रखें स्नेह विशेष, बनाएँ नई परम्परा,
गलतफहमियाँ, भ्रम, संदेह जाएँ चरमरा,
सहज सरल जीवन बने, रहे न कोई पहेली,
प्रेम से सबसे मिल कर, खेलो खूब होली.
-----
' होनी ' बनेगी ' हो ली ' , काल चक्र का फेर ,
आया है सो जाएगा , संत रहे हैं टेर ,
संत रहे हैं टेर , होनी रही सदा बलवान ,
नेक करम करते रहो , अनहोनी से सावधान ,
सतर्कता आवश्यक तत्व है , मूल मरम है जानी ,
अवश्यम्भावी बन गई , जिसको कहते होनी .
आया है सो जाएगा , संत रहे हैं टेर ,
संत रहे हैं टेर , होनी रही सदा बलवान ,
नेक करम करते रहो , अनहोनी से सावधान ,
सतर्कता आवश्यक तत्व है , मूल मरम है जानी ,
अवश्यम्भावी बन गई , जिसको कहते होनी .
--------
होली तो अब आ गई , ठीक बजट के बाद ,
अमीर - गरीब का वर्गीकरण, एक सत्य निर्विवाद ,
एक सत्य निर्विवाद , रखो अपना हिसाब ,
आय - व्यय का खाता , मत करो खराब ,
पसारो अपने पाँव , जितनी हो झोली ,
सब प्रेम भाव से , मिल कर खेलो होली .
अमीर - गरीब का वर्गीकरण, एक सत्य निर्विवाद ,
एक सत्य निर्विवाद , रखो अपना हिसाब ,
आय - व्यय का खाता , मत करो खराब ,
पसारो अपने पाँव , जितनी हो झोली ,
सब प्रेम भाव से , मिल कर खेलो होली .
-----
रंग - बिरंगी होली , फिर आई इक बार ,
बूढ़े - बच्चे हुए जवान , छाई नई बहार ,
छाई नई बहार , अजब उल्लास है छाया ,
जीवन आनंद उठाने को , उद्यत सबकी काया ,
सद्भाव , सौहार्द्र से भरी , हमारी नीयत चंगी ,
शुभकामनाएं दे कर मनाएँ , होली रंग - बिरंगी .
बूढ़े - बच्चे हुए जवान , छाई नई बहार ,
छाई नई बहार , अजब उल्लास है छाया ,
जीवन आनंद उठाने को , उद्यत सबकी काया ,
सद्भाव , सौहार्द्र से भरी , हमारी नीयत चंगी ,
शुभकामनाएं दे कर मनाएँ , होली रंग - बिरंगी .
---–---
गुझिया, गुलाल और गुब्बारे के साथ ‘ ग़ुड मॉर्निंग ‘ हो, तो कैसा हो ?
ज़रूरत, ज़िंदगी और ज़बरदस्ती के साथ जेहाद हो, तो कैसा हो ?
डमरू, डंडा और डकार के साथ डाँडिया हो, तो कैसा हो ?
बेटा, बेटी और बीवी के साथ बाई हो, तो कैसा हो ?
तकदीर, तदबीर और तरीके के साथ तरक्की हो, तो कैसा हो ?
पिता, पुत्र और परिवार के साथ प्यार हो , तो कैसा हो ?
पुरातन प्रथा और परंपरा के साथ पर्व हो, तो कैसा हो ?
इस से तो होली का मज़ा ही आ जाए.
ज़रूरत, ज़िंदगी और ज़बरदस्ती के साथ जेहाद हो, तो कैसा हो ?
डमरू, डंडा और डकार के साथ डाँडिया हो, तो कैसा हो ?
बेटा, बेटी और बीवी के साथ बाई हो, तो कैसा हो ?
तकदीर, तदबीर और तरीके के साथ तरक्की हो, तो कैसा हो ?
पिता, पुत्र और परिवार के साथ प्यार हो , तो कैसा हो ?
पुरातन प्रथा और परंपरा के साथ पर्व हो, तो कैसा हो ?
इस से तो होली का मज़ा ही आ जाए.
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शिवरात्रि
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शाश्वत सत्य मृत्यु बनी, देते शिव का नाम,
जन्म लिए प्राणी सभी, जाते उसके धाम.
सुंदरता को भोगते, विषय भोग में लुप्त,
नेक करम भी कुछ करो, कब जगोगे सुप्त.
बुरे भले इस जगत में, सब प्रवृत्ति के लोग,
साफ़ नज़र से देखिए, करे दूर सब रोग.
सुंदर, शिव, सत्य निकले, शिव ही असली भूप,
महाकाल सब से कहे, मेरा सच्चा रूप.
निर्विकार रह भोगिए, बने नहीं आसक्त,
याद मौत को कीजिए, बन जाएं शिव भक्त.
शंका शंकर पर नहीं, रखें पूर्ण विश्वास,
बिना कहे ही मिल सके, कह शंकर की आस.
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शिव की शादी हो गई, माँ गौरी के साथ,
कठिन तपस्या से मिला, उनको शिव का हाथ.
जटा बांध कर शीश में, रोका गंग प्रवाह,
करे प्रार्थना सगरसुत, पूरी कर दो चाह.
तांडव शिव का देख कर, दुनिया है भयभीत,
सीख सुधी जन ले सकें, मूल सभी का प्रीत.
पूरी करते कामना, भगवन भोले नाथ,
सरल हृदय से ध्यान धर, सौंपे उनको हाथ.
सदा जगत कल्यान की, रखते सोच महेश,
दुष्टों के संहार के, उपाय करें विशेष.
बाधा हरते जगत की, पिएं हलाहल आप,
देवों का कल्याण कर, करें नाश संताप.
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संयम से पूजन करें, जोड़ें दोनों हाथ,
पूजा से संतुष्ट हों, भगवन भोलेनाथ.
सारे दिन सुमिरन करें, फल का कर आहार,
जगते आधी रात तक, करने को दीदार.
भक्ति भाव से झूम कर, खूब किया उपवास,
श्रद्धा पूरित हृदय में, हरि दर्शन की आस.
दयानंद ने हर लिया, अंधकार, अज्ञान,
कुप्रथा समाज से हटा, दिए नए उपमान.
आडम्बर से दूर रह, सुखमय जीवन चाह,
खंडन मिथ्या तथ्य का, सही दिखाई राह.
तर्क बुद्धि ऋषि की जगी, करने लगे विचार,
शिव पर मूषक कूदते, जिन पर जग का भार.
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हलक तलक ज़हर दिखे , कहावें भोले नाथ ,
लीला जगत की रचें , वक्रतुंड के तात ,
वक्रतुंड के तात , तांडव नृत्य मचावें ,
भंग घोट , रमाय धूनी , गंग को शीश घुमावें ,
मज़ा लें , मर जान पे , कैलास से लेवें झलक ,
भोले बाबा दिख रहे , लपेटे बैठे नाग हलक .
लीला जगत की रचें , वक्रतुंड के तात ,
वक्रतुंड के तात , तांडव नृत्य मचावें ,
भंग घोट , रमाय धूनी , गंग को शीश घुमावें ,
मज़ा लें , मर जान पे , कैलास से लेवें झलक ,
भोले बाबा दिख रहे , लपेटे बैठे नाग हलक .
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वसंत पंचमी
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भीषण सरदी पड़ रही, दिखे न इसका अंत,
कहने को आया भले, इस बार का वसंत.
होता हमें वसंत से, गरमी का आभास,
हौले हौले फैलता, मदनोत्सव का रास.
नई कोपलें आ गई, पेड़ खड़े मुसकाय,
आ कर कूजें भ्रमर भी, सुन कर जी हरषाय.
उत्तेजक गतिविधि करें, नव ऊर्जा संचार,
काम करें पूरे मन से, आते नए विचार.
नमन शारदा मात को, देवें बुद्धि नवीन,
शोध कार्य भी कर सकें, पा तकनीक प्रवीन.
रोज़ रोज़ अभ्यास से, आ जाता विश्वास,
रहे इरादा दृढ़ अगर, अपना होय विकास.
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नमन शारदा मात को, कर दोनों कर जोड़,
सुधर सके मेरी अकल, पा ले जीवन मोड़.
करता हूँ मैं वंदना, दिल से बारंबार,
शुद्ध हृदय से कीजिए, अब प्रणाम स्वीकार.
ऋतु परिवर्तन हो रहा, आया अब मधुमास,
काल चक्र है घूमता, ले कर मधुरिम हास.
माँ सरस्वती दीजिए, मुझको ऐसा ज्ञान,
सपने में भी हो नहीं, मुझको कुछ अभिमान.
आदि काल से मन रहा, कहते भारत संत,
ऊर्जा नई जीवन में, भरता पर्व वसंत.
मदनोत्सव के नाम को, जानें बूढ़े लोग,
युवा आज के बोलते, लगा प्रेम का रोग.
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आगमन बसंत ऋतु पर, करे धरा श्रंगार,
नव किसलय पनप रहे, होता ऊर्जा संचार,
होता ऊर्जा संचार, प्रकृति बिखेरे अनुपम छटा,
शरद समापन हो रहा, पाला, कोहरा, मेघ घटा,
पंचमी तिथि के प्रतीक हैं, प्रेम, उत्साह और मदन.
स्वागत मुदित मन से करो, जब हो बसंत का आगमन.
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शरद ऋतु समापन पर , करते शारदा माँ का अर्चन.
विद्याभ्यास कर लिए , अब परीक्षा का प्रयोजन ,
अब परीक्षा का प्रयोजन , मेहनत करें कड़ी कुशल ,
पढ़ें , लिखें जीविकोपार्जन करें , सबका हो मंगल ,
बसंत पंचमी पर रहे , माँ का आशीष वरद ,
तन , मन स्वस्थ बने , हो मुबारक यह शरद .
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सकट चतुर्थी
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पर्व सकट का हुआ, माघ मास में खास,
पूरी श्रद्धा से मना, रख संतति की आस.
गणपति की पूजा करो, मन में रख विश्वास,
तिल गुड़ का बकरा कटा, लेकर बेटा घास.
बड़े पुराने काल से, मनता है त्योहार,
सफल समापन जानिए, हो तारा दीदार.
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गुरु गोविंद सिंह जी जयंती
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पूस माह की सप्तमी, शुक्ल पक्ष अरविंद,
सत्रह तेइस सन रहा, प्रकटे थे गोविंद.
रही त्याग की भावना, करें शीश बलिदान,
नाम पंज प्यारे दिया, रखें केश, किरपान.
दसवें गुरु की शृंखला, सिखों का अभिमान,
पूजा ग्रंथ साहब की, केवल वही प्रमान.
हित साधन हो, देश का, विधि का मान विधान,
नहीं यवन स्वीकार थे, बेटों का बलिदान.
नहीं गुलामी की कभी, वैर औरंगजेब,
पंथ खालसा शुरू किया, कोई नहीं फरेब.
मना व्यक्ति पूजा करी, साहब ही हो धर्म,
सिर्फ़ ग्रंथ साहब कहे, सभी सिखों का कर्म.
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लोहड़ी
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दुल्ला भट्टी को नमन, सब पर कर उपकार,
बची देश की सभ्यता, मान चलो आभार.
लोड़ी की गाथा सुनी, उपजा मन विश्वास,
दानवीर के नाम से, मन में जगती आस.
रक्षा संस्कृति की करी, निर्धन पर उपकार,
मुंदरिये को बहन कह, शादी का उपहार.
पर्व मनाते धूम से, उतरायण का काल,
दिशा बदलती है धरा, सूरज करे धमाल.
खिचड़ी, बिहू, पोंगल भी, मना सकें सँक्रान्ति,
एक पर्व बहु रूप में, देता ऊर्जा, शान्ति.
गजक, रेवड़ी बाँट कर, करें खुशी इजहार,
अपनों से मिल खाइए, प्रेम भरा उपहार.
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फूलों पर बैठे भ्रमर, पीने लगे पराग,
छाई मस्ती गजब की, तन मन लगती आग.
प्रवेश सूर्य ने किया, मकर राशि की ओर,
गरमी अब बढ़ने लगी, होती जल्दी भोर.
उत्तर विषुवत के करें, सूर्य देव प्रस्थान,
गरमी का संकेत है, सरदी का अवसान.
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अनुपम गति संबंध है, सूर्य धरा के बीच,
भरें ऊर्जा रश्मि-रवि, सस्नेह हमको सींच.
सौर पर्व से जुड़ रहा, बिहू और संक्रांत,
पोंगल, खिचड़ी, लोहड़ी, मानें अनेक प्रांत.
नई फसल तैयार हो, दिखता सुखी किसान,
झलके मुख-मंडल खुशी, चाहे नहीं प्रमान.
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लोहड़ी की लौ लगी, लगी भक्ति भाव की आँच,
तिल गुड़ बाँट, खाय के, बचन प्रेम के बाँच,
बचन प्रेम के बाँच, उड़ाओ चरित्र पतंग,
हर्षाए सगरे जगत को, तज दुष्टन को संग,
सम व्यवहार करो सब से, न बाँटो अपनों को रेवड़ी,
आशीष ऊपर वाले की, लो हम से शुभेच्छाओं की लोहड़ी.
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नव वर्ष
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काल चक्र चलता रहा, बदल गया इक साल,
कृपा ग्रेगरी की रही, रखते हृदय विशाल.
पश्चिम के पीछे पड़े, मानी उनकी चाल,
याद नहीं अपना हमें, चले कौन सा साल.
गीत खुशी के गा रहे, झूम रहा संसार,
हो मुबारक साल नया, घर घर में उच्चार.
गजक रेवड़ी भूल गए, याद बचा अब केक,
नए साल के जश्न में, रहा खुशी अतिरेक.
नए साल की कामना, करते बुड्ढे बाल,
छोड़ पटाखे, केक खा, मने खुशी हर साल.
रही सभ्यता वेस्ट की, अपनाते हम लोग.
बिसरा इतिहास अपना, पाल लिया यह रोग.
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दशक बदलने जा रहा, उसी काल की चाल,
हौले से बीत गया, जीवन का यह साल.
नाना घटनाएं घटीं, कुछ बन गईं विशेष,
रहीं याद, कुछ दी भुला, बाकी स्मृति शेष.
बनें नई संभावना, नई तलाशें राह,
नया साल हर तरह सुखद, रहे हमारी चाह.
सुख, समृद्धि, विकास दिखे, अपने चारों ओर,
आशा जीवन में बंधे, यह दिल माँगे मोर.
दुखद बात को भूल कर, सुखद सजाओ याद,
आगे भी अच्छा घटे, करें यही फरियाद.
नए साल में जम सके, शासन पर विश्वास,
उनके वादे निभ सकें, हम करते यह आस.
गए साल में जो हुआ, उसका कर आभार,
नए वर्ष के मिलन को, हो जाओ तैयार.
रहीं हमारी गलतियाँ, कर दो उनको माफ,
सच्चा हृदय विनय करे, रख कर दिल को साफ.
करें अमल हर बात पर, जिन पर लें संज्ञान,
विचलित हों हरगिज नहीं, रखें सदा ही ध्यान.
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काल निरूपण से हुआ, समय चक्र आधार,
एक जनवरी बन गई, कैलेंडर व्यापार.
केक, पटाखे, रोशनी, नए साल की रीत,
पश्चिम की यह सभ्यता, नहीं सिखाती प्रीत.
नए साल में व्यस्त है, सारा मुदित जहान,
सबके सपने सज सकें, बिना किसी व्यवधान.
गैरों की कुछ गलतियाँ, हम सब जाएँ भूल,
किन से हमको दुख मिला, किस से पाए शूल.
नए साल में कर सकें, कुछ अच्छे संकल्प,
सदा भला सब का करें, इसका नहीं विकल्प.
पीड़ा हरें समाज की, काम करें कुछ नेक,
सेवा में स्वारथ नहीं, होते लाभ अनेक.
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दिन बदला, तिथि बदली, बदल गया साल,
प्रकृति अपने से चल रही, वही सुहानी चाल,
वही सुहानी चाल, सुंदर चाँद सितारे,
रोम रोम पुलकित हो, जीवन रवि सँवारे,
साधुवाद उस ईश्वर का, दिया स्वस्थ तन मन,
रहें उल्लसित, हर्षित सारे, मीत अपने हर दिन.
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कल , कल की कल में , बीत गया इक साल ,
हँसते खेलते पता नहीं , कब गुज़रा गत साल .
कब गुज़रा गत साल , कालचक्र निर्बाध चला ,
सुख दुख की वेला में , कुछ पता ही न चला .
कभी आह्लादित , तो कभी मुदित चित हो गया विकल ,
नव वर्ष में परमेश्वर करें भला , होवे सुखद कल .
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हँसते खेलते पता नहीं , कब गुज़रा गत साल .
कब गुज़रा गत साल , कालचक्र निर्बाध चला ,
सुख दुख की वेला में , कुछ पता ही न चला .
कभी आह्लादित , तो कभी मुदित चित हो गया विकल ,
नव वर्ष में परमेश्वर करें भला , होवे सुखद कल .
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गए साल में घटीं, घटनाएँ प्रिय अप्रिय अनेक,
सब प्रभु की इच्छा रही, सँतुलित रहा विवेक,
सँतुलित रहा विवेक, कुछ नए प्रयोग जगाए,
कुछ हुए नाराज़, तो कुछ् को अति मन भाए,
शुभकामना नववर्ष की, सब को दे जाएँ,
बने रहे वो दोस्त, जो मन से भा गए.
--------
सब प्रभु की इच्छा रही, सँतुलित रहा विवेक,
सँतुलित रहा विवेक, कुछ नए प्रयोग जगाए,
कुछ हुए नाराज़, तो कुछ् को अति मन भाए,
शुभकामना नववर्ष की, सब को दे जाएँ,
बने रहे वो दोस्त, जो मन से भा गए.
--------
आगामी नव वर्ष में, रचें नया इतिहास,
एक सनातन आस्था, एक पुरातन विश्वास,
एक पुरातन विश्वास, ज़ुनून ऐसा चढ़ जाए,
दिल में समाए ऊर्जा, लक्ष्य पूरे कर पाएँ,
दें सब को शुभकामना, चरित्र रहे सत्कामी,
सब का मंगल हर विधि, करे यह वर्ष आगामी.
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पल पल की रखें, सजा सजा कर याद,
सुखद नए साल में, रहे न कोई विषाद.
रहे न कोई विषाद, जीवें स्वस्थ जीवन,
सारे क्षण हों अभूतपूर्व, यादगार बने हर दिन,
प्रसन्न चित्त मन रहे, कभी न हों विकल,
सारी खुशियाँ हों नसीब, हम याद रहें हर पल.
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कुछ नए रिश्तों की शुरुआत. कुछ पुराने अपनों से बिछोह .
आओ, नए साल में करें सभी से प्रेम, न रखें कोई द्रोह.
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क्रिसमस
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मनती क्रिसमस की खुशी, रहा जगत व्यवहार,
धूम धड़ाका जोश का, कैंडल का त्योहार.
नए साल का आगमन, आशा के अंबार,
स्वागत मन से कीजिए, ले दे कर उपहार.
याद नहीं आया कभी, दसवें गुरु का सोग,
भूल गए बलिदान हम, भारतवासी लोग,
ख़ातिर अपने धर्म दें, साहबज़ादे चार,
नहीं धर्म कुबूल किया, मन में नहीं विकार.
करें नमन गुरुदेव को, उनका था उपकार,
बचे रहे संस्कार सब, कैसे हो आभार.
गौरवमय इतिहास को, जानें सारे लोग,
गायब पुस्तक से किए, नहीं महज़ संयोग.
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गीता से मिलता हमें, जीवन का संदेश,
बुरा भला पहचान लें, केशव के आदेश.
गीता की व्याख्या करें, पंडित ज्ञानी लोग,
फिर भी समझ सके नहीं, मजे उठाते भोग.
मेरी क्रिसमस साथ भी, करते गीता याद,
रहा प्रभाव धर्म का, मिलते सभी विषाद.
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बड़े जोश से मन सके, विजय दिवस त्योहार,
याद शहीदों को करें, जान करें निसार.
वीर गति को पा गए, ले रक्षा का भार,
बारंबार नमन उन्हें, जो परलोक सिधार.
रक्षा करते देश की, दे कर अपनी जान,
सदा बढ़ाते ही रहे, भारत माँ का मान,
समर कारगिल याद है, हतप्रभ, विश्व अवाक,
आत्म समर्पण करा कर, जीत लिया था पाक,
जीती दुश्मन भूमि को, वापस दे दी दान,
नया देश बांग्ला बना, पहला पाकिस्तान.
नेता कुछ ऐसे हुए, मन के बड़े उदार,
अलग देश को मान्यता, पाए कंटक हार.
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सूर्य चक्र से हो रहा, नव यौवन संचार,
उसकी गति दे प्रेरणा, अद्भुत यह उपहार.
बढ़ती ऊर्जा आज से, जल्दी होत प्रभात,
बढ़ता जाए दिवस अब, घटती जाए रात.
भौगोलिक घटना बनी, क्रिसमस का संदेश,
खुशियों का अवसर रहा, मनता जश्न विशेष.
टोपी सफेद पहन कर, हो सरदी अहसास,
बरफ पिघलती देख कर, जगती जीवन आस.
लाल रंग से हो गई, गरमी की शुरुवात,
कहता सेंटा आप से, खुद से कर लो बात.
भोजन, वस्त्र उन्हें दो, हों जो दीन गरीब,
मुफ़्त दान ना बाँटिए, सब कुछ जिसे नसीब.
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उत्साह से पूरा मना रहे , शाँति , प्रेम पर्व आज ,
खाना , खेलना और मस्ती , नए वर्ष का आगाज,
नए वर्ष का आगाज , नामकरण हुआ क्रिसमस ,
अजब उल्लास छाया, मौसम हो गया टस से मस,
नए साल की शुभकामनाएँ , बना रहे प्रेम अथाह,
नित हम याद करें आपको, अक्षय हो यह उत्साह.
खाना , खेलना और मस्ती , नए वर्ष का आगाज,
नए वर्ष का आगाज , नामकरण हुआ क्रिसमस ,
अजब उल्लास छाया, मौसम हो गया टस से मस,
नए साल की शुभकामनाएँ , बना रहे प्रेम अथाह,
नित हम याद करें आपको, अक्षय हो यह उत्साह.
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गुरू परब
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देव दिवाली में रही, एक निराली शाम,
मोदी, योगी साथ में, जपें राम का नाम.
चले बनारस घाट पर, दीप जलाने आज,
भारत के इतिहास पर, गर्व करेंगे आज.
बनीं नई परियोजना, महानगर उपहार,
सभी घाट में घूम कर, किया देव दीदार.
सारनाथ भ्रमण में, गौतम का आव्हान,
लेज़र नाटक से जुड़ी, भारत की पहचान.
साफ़ नगर काशी दिखा, जनता का आभार,
देवालय रैदास का, समता का व्यवहार.
टी.वी. पर देखी झलक, पुलकित हुआ शरीर,
गौरव करते आज भी, भारत की तसवीर.
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जनम हुआ गुरुदेव का, करते उनको याद,
उनकी सीख मान सकें, करें यही फरियाद.
ज्योति परब को पूज कर, मन में श्रद्धा भाव,
परमात्मा को याद कर, होगा नहीं अभाव.
खुशी दिखे गुरु परब पर, देवे दिव्य प्रकाश,
अंतस में महसूस हो, जगती जीवन आस.
गुरू परब पर याद कर, नानक जी को मान,
दें अप्रतिम संदेश में, सच्चा जीवन ज्ञान.
सीधे सच्चे साधु का, होता सरल स्वभाव,
दिल को छूती बात जब, करती गजब प्रभाव.
नानक घूमे जगत में, जन्मे भारत देश,
शीश झुका कर नमन करें, दिए प्रेम संदेश.
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देव उठावनी एकादशी
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देव दिवाली मनाएं, ऐसा है विश्वास,
आस्था हिंदू धर्म में, सबकी जीवन आस.
जगते एकादशी को, सोते थे जो मूर्त,
हो जाती शादी शुरू, निकाल लिया मुहूर्त.
कहते एकादशी को, देव गए हैं जाग,
जिनकी शादी तय हुई, मानों मिला सुहाग.
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छठ पूजा
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छठ पूजन हित हम गए, राँची को इस बार,
सूर्य देव की कृपा से, उमड़ा अतिशय प्यार.
समधन जी ने व्रत रखा, बेटा भी उपवास,
नर नारी ने मिल रखी, सूर्य देव की आस.
लौकी के आहार से, पूजा की शुरुआत,
अगले दिन खरना करें, नियम धरम की बात.
पावन बनता ठेकुआ, पूरी शुचिता साथ,
स्नान, ध्यान के साथ में, लगा सभी का हाथ.
दिया अर्ध्य सूर्यास्त पर, उनका कर आभार,
करें नमन नव सूर्य को, मिलती शक्ति अपार.
सारे घर की एकता, मिल बैठा परिवार,
पर्व हास परिहास का, खुशियां दे हर बार.
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निर्जल व्रत दुष्कर रखा, बिना किसी आहार,
हों पूरी सब मन्नतें, सुखी रहे परिवार.
शुरू खास कल से हुए, पूजा के व्यवहार,
व्यग्र दिखा सूर्यास्त में, पूरा ही परिवार.
अर्ध्य डूबते सूर्य को, हो जावे स्वीकार,
हो कर शुद्ध तन मन से, करते हम आभार.
सजा चले हम फूल फल, सूप थाल सिर धार,
पश्चिम में मुख को किया, अर्ध्य दिए व्रतकार.
अगले दिन की सुबह का, करें सब इंतजार,
तैयारी पूरी करी, होगा कब अभिसार.
सूर्य देव दर्शन दिए, व्रती बने प्रभु रूप,
ईश्वर उनमें सन्निहित, दें आशीश अनूप.
सागर, नदिया तीर पर, हर्षित है परिवार,
दे कर आहुति यज्ञ में, पारण हो साकार.
सफल सभी की साधना, इच्छा रहे हमार,
रवि भगिनी छठ जी करें, स्वप्न सभी साकार.
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छठ पूजा व्रत सा कठिन, नहीं और उपवास,
सूर्य देव पूरी करें, सबके मन की आस.
पूरे विधान से करें, छठ मैया को याद,
जिसकी पूरी साधना, हो पूरी फरियाद.
नाना व्यंजन पक गए, वही पुराना स्वाद,
सारे बच्चे आ गए, भूली करते याद.
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माँ बेटे की प्रीति का, प्रतीक छठ पर्व हमार,
शुचिता औ माधुर्य से, बसा नया संसार.
*आओ अनुपम पर्व मनाएँ,*
अपनी संस्कृति से जुड़ जाएँ,
परिवार की एकता बढ़ाएँ,
छठ मैया का आशीष पाएँ,
सूर्य देव का आभार जताएँ.
*आओ अनुपम पर्व मनाएँ,*
साफ सफाई से प्रसाद बनाएँ,
फिर निष्ठा से भोग लगाएँ,
नित नव अनुभव पाएँ,
पूजा में फिर ध्यान जाएँ,
*आओ अनुपम पर्व मनाएँ*
चार दिनों का जीवन जी जाएँ,
नहाई, खाई का अर्थ समझाएँ,
अरवा चावल का प्रसाद पा जाएँ,
रोटी खीर का भोग लगाएँ,
*आओ अनुपम पर्व मनाएँ*
गेहूँ घर पर साफ कराएँ,
चिड़िया, पक्षी से उसे बचाएँ,
विष्टा उस पर न होने पाए,
ठेकुआ का पारण बनवाएँ,
*आओ अनुपम पर्व मनाएँ*
आम शाख पर प्रसाद पकाएँ,
होम हवन की वैज्ञानिकता बताएँ,
सात्विक अपना जीवन बिताएँ,
तामसिक भोजन से गुरेज कर जाएँ,
*आओ अनुपम पर्व मनाएँ*
सूर्य देव का आवाहन कर पाएँ,
उनको अपना अर्ध्य चढ़ाएँ,
प्रथम रश्मि पर शीश नवाएँ,
छठ मैया के भजन सुनाएँ,
*आओ अनुपम पर्व मनाएँ*
अपने घर में अर्ध्य चढ़ाएँ,
सपरिवार पावन पर्व मनाएँ,
सब संबंधी एक साथ मिल पाएँ,
अगले साल फिर छठ उठाएँ,
*आओ अनुपम पर्व मनाएँ*
सब पर्वो में श्रेष्ठ है, मनोरम यह त्योहार,
प्रेम भाव से पूजते, कुल, कुटुंब, परिवार.
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छठ पूजा स्वीकार हो, सूर्य करें उपकार,
विधिवत् पूजा सम्पन्न हो, रहे न लेश विकार,
रहे न लेश विकार, सब का हो कल्यान,
सुखी समृद्ध सब रहें, हरें तम अज्ञान,
दें अर्ध्य सूर्य देव को, जब हों वे प्रकट,
ईश भास्कर प्रसन्न हों, सार्थक हो पूजा छठ.
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भाई दूज / श्री चित्रगुप्त महाराज पूजा
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चित्रगुप्त के नाम का, खूब लगाओ ध्यान,
सबके जीवन में रहा, अनुपम सा वरदान.
पाप-पुण्य लेखा रखा, जैसे जिसके काम,
उनका कैसा फल मिले, हो पीड़ा आराम.
कायस्थों के जनक हैं, चित्रगुप्त भगवान,
पूजा भाई दूज पर, करता सकल जहान.
पूजा कलम दवात से, पनप रहे संस्कार,
डिजिटल युग में मन रहे, उंगली की दरकार.
मोबाइल पर लिख रहे, बिना कलम संदेश,
भाईचारा बढ़ सके, दें सब को उपदेश.
व्हाटसैप फेस बुक पर, इतना पाया प्यार,
बहुत पुराने यार भी, जतलाते अधिकार.
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रहे द्वितीया तिथि अगर, कार्तिक में अभिराम,
शुक्ल पक्ष की चाँदनी, मन को दे आराम.
बहन करे मंगल तिलक, भाई हो बलवान,
नाम मिले हर क्षेत्र में, हो उसका गुणगान.
बहना केवल प्यार दे, भाई दे आशीश,
सब जग का कल्याण हो, भला करें जगदीश.
तन-मन से पावन बनें, रहें स्वस्थ सब लोग,
प्रेम भाव बढ़ता रहे, दूर रहें सब रोग.
कोरोना के काल में, अद्भुत सब त्योहार,
देख वीडियो पर शकल, उमड़ रहा है प्यार.
फोटो देख मजा करें, मन में हो उल्लास,
थाली में टीका करें, जगती जीवन आस.
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पूजें भाई दूज पर, कागज, कलम दवात,
चित्र गुप्त वंशज कहें, प्रेम न हृदय समात.
भले बुरे सब काम का, पूरा रखें हिसाब,
पक्के अपने काम में, नहीं दिमाग खराब.
रहता गर्व हमें सदा, मषि-भाजन संतान,
आपस में ही लड़ रहे, मेरी अकल महान.
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बहन चाहती भाई से , बस थोड़ा सा प्यार ,
नहीं माँगती बदलेे में , हीरों के अंबार ,
हीरों के अंबार, कभी कभी भाई की याद सताए ,
गिने चुने पर्वों पर ही , उसके नैना नम हो जाएँ ,
बना रहे चिर काल तक , अपनों में प्यार सघन ,
मंगल कामना करती रही , सदा एक छोटी बहन .
नहीं माँगती बदलेे में , हीरों के अंबार ,
हीरों के अंबार, कभी कभी भाई की याद सताए ,
गिने चुने पर्वों पर ही , उसके नैना नम हो जाएँ ,
बना रहे चिर काल तक , अपनों में प्यार सघन ,
मंगल कामना करती रही , सदा एक छोटी बहन .
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चित्रगुप्त के नाम का, खूब लगाओ ध्यान,
सबके जीवन में रहा, अनुपम सा वरदान.
पाप-पुण्य लेखा रखा, जैसे जिसके काम,
उनका कैसा फल मिले, हो पीड़ा आराम.
कायस्थों के जनक हैं, चित्रगुप्त भगवान,
पूजा भाई दूज पर, करता सकल जहान.
पूजा कलम दवात से, पनप रहे संस्कार,
डिजिटल युग में मन रहे, उंगली की दरकार.
मोबाइल पर लिख रहे, बिना कलम संदेश,
भाईचारा बढ़ सके, मत देना उपदेश.
व्हाटसैप फेस बुक पर, इतना पाया प्यार,
बहुत पुराने यार भी, जतलाते अधिकार.
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करें व्यक्त आभार, कलियुग के अवतार,
श्री चित्रगुप्तजी महाराज, कुलपुरुष कायस्थ परिवार,
करें विश्व कल्यान, सृष्टि का व्यापक सृजन,
अमन, शांति, विकास के , हों स्वप्न साकार,
एक निवेदन हम करें, मिले रहें सब भाई,
रोशन कर दें नाम , लोहा माने सँसार,
करें व्यक्त आभार, कलियुग के अवतार.
श्री चित्रगुप्तजी महाराज, कुलपुरुष कायस्थ परिवार,
करें विश्व कल्यान, सृष्टि का व्यापक सृजन,
अमन, शांति, विकास के , हों स्वप्न साकार,
एक निवेदन हम करें, मिले रहें सब भाई,
रोशन कर दें नाम , लोहा माने सँसार,
करें व्यक्त आभार, कलियुग के अवतार.
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विद्या, बुद्धि, बल, प्रताप, तेजस की हो भरमार ,
रहे न कोई दीन दुखी, रोगों का हो निस्तार,
ऐसी शुभकामनायें करें, हो पुष्पाँजलि स्वीकार,
रहे कृपा आप की, मिले सभी को रोज़गार,
करें व्यक्त आभार, कलियुग के अवतार.
रहे न कोई दीन दुखी, रोगों का हो निस्तार,
ऐसी शुभकामनायें करें, हो पुष्पाँजलि स्वीकार,
रहे कृपा आप की, मिले सभी को रोज़गार,
करें व्यक्त आभार, कलियुग के अवतार.
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दीपावली
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दीप पर्व को सब कहें, प्रकाश का त्योहार,
सार्थक हो, प्रसन्न रहें, खुशियां मिलें अपार,
खुशियां मिलें अपार, ले आते परमल, खील,
लक्ष्मी दें आशीष, कृपा उनकी रहें हिल मिल,
पांच दिवस का पर्व, में रहती बुद्धि प्रदीप,
खुश हो कर मनाएं, त्योहार, जलाएं दीप.
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रहे द्वितीया तिथि अगर, कार्तिक में अभिराम,
शुक्ल पक्ष की चाँदनी, मन को दे आराम.
बहन करे मंगल तिलक, भाई हो बलवान,
नाम मिले हर क्षेत्र में, हो उसका गुणगान.
बहना केवल प्यार दे, भाई दे आशीश,
सब जग का कल्याण हो, भला करें जगदीश.
तन-मन से पावन बनें, रहें स्वस्थ सब लोग,
प्रेम भाव बढ़ता रहे, दूर रहें सब रोग.
कोरोना के काल में, अद्भुत सब त्योहार,
देख वीडियो पर शकल, उमड़ रहा है प्यार.
फोटो देख मजा करें, मन में हो उल्लास,
थाली में टीका करें, जगती जीवन आस.
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एक दिवाली यह हुई, ना कुछ धूम धड़ाक,
मुँह बाँधे घर बैठ कर, बाहर सुनें फटाक.
एक फुलझड़ी छोड़ कर, खुशी मनाई आज,
दीप जला, खुश हो रहा, अपना सकल समाज.
लाॅकर में बैठे रहे, अपने श्री भगवान,
मीठा भी घर का बना, घर के ही पकवान.
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पर्व दिवाली आ गया, छाया मन उल्लास,
एक नई ऊर्जा मिली, जगा नया विश्वास.
मुदित सभी जनता दिखे, नई फसल तैयार,
भाव मिले उत्पाद का, सुखी दिखे परिवार.
तेरस से होती शुरू, रहे दूज तक मान,
हर दिन का पूजन अलग, पाँच दिनों की शान.
कथा रही हर पर्व की, कुछ वैज्ञानिक तथ्य,
ध्यान लगा चिंतन करें, जाहिर होता सत्य.
नरकासुर मारा गया, बँधती राहत आस,
लक्ष्मी पूजन से हुआ, निर्धनता का नास.
भाई का टीका किया, दिल से करके प्यार,
सेहत की चाहत रहे, यही बड़ा उपहार.
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साफ सफाई खूब हो, चमके घर, चौबार,
हर कोना जगमग करे, बसे खुशी हर द्वार.
धन-देवी पत्नी बने, पति हो साहूकार,
वह घर होता स्वर्ग सम, मिलते जहाँ विचार.
हर दिवस अलग सा मने, अलग रहे व्यवहार,
सदा झलकता आपसी, प्रेम, सुबुद्धि, विचार.
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शुरू दीप एकादशी, अंत छठी के बाद,
ग्यारह दिन उत्सव चले, कोई नहीं विवाद.
धनतेरस में बिक रहीं, नथ, झूमर, पाजेब,
खील, खिलौने से भरी, सब बच्चों की जेब.
नरकासुर का वध हुआ, श्रीकृष्ण के हाथ,
जीत मना लंकेश की, लौट रहे रघुनाथ.
दीप जलें दिवाली पर, हो प्रकाश सब ओर,
मन में तमस रहे नहीं, हो नव मंगल भोर.
अन्नकूट पूजन करें, भर श्रद्धा, उल्लास,
अभाव अनाज का नहीं, बना रहे विश्वास.
बहन-गेह भाई चला, बहना जोहे बाट,
सुधा छुपा अंगुष्ठ में, करती तिलक ललाट.
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धनतेरस +++++++
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साफ सफाई खूब करो, जम कर करो धुलाई,
दीवाली के पर्व पर, कचरा कहीं न दे दिखाई,
कचरा कहीं न दे दिखाई, पर्यावरण का करें ख्याल,
प्रेम भाव से सब मिलें, मानस नरकासुर हो हलाल,
भक्ति भाव से पूजा कर, खाना खूब मिठाई,
चिर काल तक बनी रहे, आज की साफ सफाई.
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झाड़ू में लक्ष्मी बसे, रखिए इसे संभाल,
उचित आसन बिठाइए, इधर उधर न डाल,
इधर उधर न डाल, व्यर्थ न संग्रह कीजै,
हो ज़्यादा जब माल, दान में दे दीजै,
धनतेरस पर कचरा रखें, घर के बाहर काढ़ू,
साफ सफाई कर दिल से, आदर से रखो झाड़ू.
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धनतेरस से शुरू हुआ , सुखद दीप पर्व आज ,
पुलकित जन जन का मन , ख़ुशियाँ छेड़ें साज ,
ख़ुशियाँ छेड़ें साज , देते एक दूजे को बधाई ,
श्रद्धा प्यार भरी , एक बार फिर दीवाली आई ,
रहे ख़ुशी से न वंचित कोई , डूबे आनंद में सबरस ,
बने यादगार , अनुपम पर्व यह धनतेरस .
पुलकित जन जन का मन , ख़ुशियाँ छेड़ें साज ,
ख़ुशियाँ छेड़ें साज , देते एक दूजे को बधाई ,
श्रद्धा प्यार भरी , एक बार फिर दीवाली आई ,
रहे ख़ुशी से न वंचित कोई , डूबे आनंद में सबरस ,
बने यादगार , अनुपम पर्व यह धनतेरस .
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करवा चौथ
++++++++
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सभी नारियों को नमन, भावों को प्रणाम,
पूर्ण समर्पण से करें, भोजन का विश्राम.
लंबी आयु पति को मिले, जीवें जीवन स्वस्थ,
प्रेम सदा करते रहें, हम भी होवें मस्त.
आज दिवस हम कर सकें, सज्जा मन अनुरूप,
मुदित हमें अपना लगे, पति का मोहक रूप.
करें कामना हम यही, बढ़े प्रेम आधार,
वैर द्वेष का अंत हो, सुखी रहे संसार.
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चाँद चौथ का सब तजें, सारे करें विचार,
दोष व्यर्थ का आप पर, मढ़ देता संसार.
सभी सुहागन व्रत करें, देती माँ आशीश,
पूजन हो परिवार में, भली करेंगे ईश.
सरदी अब हो गई शुरू, वर्षा ऋतु का अंत,
रोजगार को चलेंगे, अपने प्यारे कंत.
पति की मंगल कामना, करतीं भारत नार,
पूजन करवा चौथ कर, जीवन करें सुधार.
अर्ध्य चाँद को दे रहीं, सभी विवाहित नार,
सदा सुहागन हो सकें, पाएँ पति का प्यार.
निष्ठा पति में रख सकें, कर सोलह शृंगार,
आजीवन वह चाहतीं, रहे साथ पति प्यार.
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गौरी से मांगे सभी, पति की लंबी आयु,
सदा सुहागन बनें वह, स्वस्थ और दीर्घायु.
निर्जल व्रत रख कर करें, सारे दिन उपवास,
देखें मुखड़ा चांद सा, साजन का आभास.
माटी का करवा लिया, रख कर आंगन चौक,
साड़ी, गहने पहन कर, करतीं पूजन, शौक.
अच्छे से शृंगार कर, सजा अनोखा रूप,
मोहे साजन को सदा, उसकी अदा अनूप.
पति के पूरे ध्यान से, मनती करवा चौथ,
सभी नारियाँ पूजतीं, क्वाँर कृष्ण की चौथ.
दीप पूज कर पति चले, करने कारोबार,
कौन लग्न रहेगा, जब, आएंगे भरतार.
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निर्जल व्रत रह कर करे, पति पर वह उपकार,
उसका तुम पर कर्ज है, रख लीजिए उधार.
चूड़ी, कंगन, साड़ियां, तन का करेंं श्रंगार,
असली गहना तो मिले, पाकर साजन-प्यार.
धन-दौलत देती नहीं, मन की सच्ची शांति,
निश्छल प्रेम साजन का, करे दूर सब भ्रांति.
-------
सास खिलाए सरगई, बहू रखे उपवास,
करवा चौथ व्रत चाहे, पति की लंबी श्वास.
पूरी श्रद्धा से करें, अर्जन पति-विश्वास,
हावी होने दें नहीं, कभी प्यार-उपहास.
बनी रहे पति की सदा, करके उसको प्यार,
करवा चौथ प्रमाण है, सजी सजीली नार.
---------
मंगल कामना का अवसर, देता फिर एक बार,
पति की लंबी आयु, पत्नी चाहे बारंबार,
पत्नी चाहे बारंबार, त्याग की मूरत प्यारी,
पति की हर खुशियों पर, वह जाए बलिहारी,
करवाचौथ के त्योहार पर, बसे प्यार हर पल,
हो मुबारक सुराग सभी को, सब का होवे मंगल.
------------
सभी सुहागनें माँगती , चन्द्र देव से वरदान ,
दीप जला कर चाहतीं, पति परमेश्वर का कल्यान,
पति परमेश्वर का कल्यान , चाहें सदा ही भला ,
आस , उपवास रखें , सारे दिन , रहें निर्जला ,
हों , मन्नतें पूरी सभी की , आज और अभी ,
फल मिल जाए श्रेष्ठ , कामनाएँ पूरीं हों सभी .
दीप जला कर चाहतीं, पति परमेश्वर का कल्यान,
पति परमेश्वर का कल्यान , चाहें सदा ही भला ,
आस , उपवास रखें , सारे दिन , रहें निर्जला ,
हों , मन्नतें पूरी सभी की , आज और अभी ,
फल मिल जाए श्रेष्ठ , कामनाएँ पूरीं हों सभी .
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शरद पूर्णिमा
+++++++++
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पूनम अश्विन मास की, देती मन को शांति,
मधुर चाँदनी रात में, दूर करे सब भ्राँति.
इसी चाँदनी में हुआ, महारास इक बार,
नर-नारी आनंद में, भूल गए संसार.
नई फसल आने लगी, उमड़ रहा विश्वास,
कमी दूर होगी सभी, जागी सबकी आस.
देवों से आशीश पा, हुआ शक्ति संचार,
आज चांद की किरण ने, जीवन दिया सँवार.
अनुपम दिव्य प्रकाश में, घर-घर पकती खीर,
आनंदित परिवार में, घटती सबकी पीर.
बढ़ती ज्योति नयनों की, डाल सुई में डोर,
समझ आपसी बढ़ गई, कल होगी नव भोर.
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दशहरा
+++++
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बाद कनागत के करें, योग, साधना मंत्र,
निर्गुण का पूजन बने, आत्म शुद्धि का तंत्र.
नौ दिन के उपवास से, हृदय शुद्ध हो जाय,
दोष दशहरा पर हरें, अद्भुत साहस आय.
श्रद्धा से उपासना, मन में भरती भक्ति,
देवी की आराधना, लाती हम में शक्ति.
दसों दिशाओं में करे, ऊर्जा का संचार,
अपने अंतर झाँक कर, दोषों का संहार.
अपने दोष दिखें नहीं, छोड़ सके ना काम,
पुतला रावन फूँक कर, बोलें जय श्री राम.
देवी सम्मुख आरती, कर नाना शृंगार,
माता को प्रसन्न करें, छाए गरबा बहार.
--------
सोन पात को बदल कर, करें कामना आप,
छाई सुख समृद्धि रहे, हों समाप्त सब पाप.
होनी होती है प्रबल, करती अपना काम,
होनी हो कर ही रहे, भली करेंगे राम.
रावण मारा राम ने, सीता पाती मुक्ति,
भाव जगा विश्वास का, सबकी बढ़ती भक्ति.
------
दिखती लीला हर जगह, क्रीड़ा रावण राम,
जीवन दर्शन दिख सके, हुआ बड़ा संग्राम.
राम नाम की वंदना, होती चारों ओर,
जीत सदा हो सत्य की, दिखे सुनहली भोर.
कथा राम की हो रही, गूँज रहा आकाश,
सभी दिशा में फैलता, उसका दिव्य प्रकाश.
-------
दशरथ भेजे लाल द्वय, विश्वमित्र थे मीत,
लक्ष्य पढाई का रखा, बता हवन की रीत.
उपवन में सीता मिली, मिले प्यार में नैन,
शील बालकों का रहा, मौन हो गए बैन.
शिव धन्वा को तोड़ कर, पाए सीता मात,
सभी भाइयों को मिली, मिथिला की सौगात.
--------
काल चक्र ऐसा रहा, गई कैकयी रूठ,
कोप कक्ष में जा पड़ी, राजा होते ठूठ.
वन में भेजा राम को, रघुकुल का रख मान,
राज दिला कर भरत को, राजा तजते प्रा
किया भ्रमित मारीच ने, दूर भेज कर राम,
रावण ने सीता हरी, रख कर साधू नाम.
--------
गिरि कंदर में खोज कर, जटायु भेजे धाम,
साथ मिला हनुमान का, बाली तारे राम.
कूद मार लंका चले, सुधि लाने को तात,
भेद विभीषण से लिए, दिए राम सौगात.
सेतु बांध, सेना चढ़ी, दूत गए दरबार,
रावण ने समझा नहीं, खुद कर बंटाधार.
-------
विजय समर में राम की, मिला विभीषण राज,
धर्म पाप पर छा गया, करे विकास समाज.
अग्नि परीक्षा में खरी, उतरी सीता मात.
बंधु सहित वापस चले, पुलकित होता गात.
राम गए बनवास को, पूरे चौदह साल,
अयोध्या के राज को, भरत लिए संभाल.
--------
सभी दृष्टि से विश्लेषण कर, लें निर्णय खूब विचार,
हानि, लाभ की व्याख्या, और समाज व्यवहार,
और समाज व्यवहार, सुधारे छवि आप की,
सदाचार कमाए नाम, बिगाड़े नीयत पाप की,
दसों दिशाओं का विचार, करते कर्मठ अभी,
दशहरा पर्व से लेवें प्रेरणा, करें जगत कल्याण सभी.
-------
शारदीय नवरात्रि
++++++++
++++++
मैय्या को देवी कहें, नमन हो बारंबार,
घर में करते स्थापना, माता का उच्चार.
नवरातों में व्रत रखें, भजनों का आनंद,
शुद्ध रहें विचार जहाँ, मन होवे निर्द्वन्द.
जगराता संभव हुआ, मिलें यार दो चार,
मस्ती से पूजन करें, गुण गाएं हर बार.
++++-+
नवराते अब आ गए, दिखी भक्ति की राह,
पूजन दुर्गा मात का, जगी मोक्ष की चाह.
देवी मात में मन रमा, जगे भक्ति के भाव,
कीर्तन के पंडाल में, भक्त दिखाते चाव.
गूँज रहा आकाश में, जै माता उच्चार,
माता की गाथा सुने, कहे सकल संसार.
शाकाहारी भोग से, सुधार लिया चरित्र,
अंडा, मछली भूल कर, लगते लोग पवित्र.
ध्वजा, नारियल साथ में, करें हवन हर रोज,
माता की आराधना, मन में भरती ओज.
देवी की हो साधना, मन में आती शक्ति,
श्रद्धा से पूजन करो, बढ़ जाए जब भक्ति.
नौ दिन तक पूजा करें, दुर्गा के नव रूप,
श्रद्धा भक्ति हो हर जगह, जनता हो या भूप.
कहें कहानी शक्ति की, महिमा अपरंपार,
देवी माँ का जागरण, देता शक्ति अपार.
सुन लो मेरी वंदना, दे दो माँ वरदान,
करूँ कार्य इस जगत में, हो जग का कल्यान.
-------
बढ़ जाती दिल में सदा, आशा और उमंग,
लहरें उठतीं भक्ति की, झूम उठे सब अंग.
माँ दुर्गा के रूप में, करते सब जन जाप,
कृपा भवानी की रहे, छाया रहे प्रताप.
माता का मंदिर रहे, मन में होवे भाव,
पूजन से संतुष्टि हो, दिखता अलग प्रभाव.
जप, तप, व्रत, साधन सभी, उपासना के ढंग,
तन, मन से भर दीजिए, नाना पूजा रंग.
सारा जगत मना रहा, शारदीय नवरात्र,
माँ संहारे असुर को, नहीं दया का पात्र.
हर नारी देवी दिखे, लगे मात का रूप,
वंदन मन से कर सकें, नहीं चाहिए धूप.
-------
नवरात्रि के स्वागत में ,
नवरंग लुटाती आई माँ ,
भक्तों में शक्ति लाई माँ ,
नया उत्साह जगाए माँ ,
नवरात्रि के स्वागत में ,
अपना दर्श दिखाओ माँ ,
ऊर्जा नई भर आओ माँ ,
एक विश्वास जगाओ माँ ,
नवरात्रि के स्वागत में ,
निज चरणों में बिठाओ माँ ,
पाप कर्म मिटाओ माँ ,
ईर्ष्या द्वेष हटाओ माँ ,
नवरात्रि के स्वागत में ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ माँ ,
रोग शोक संताप मिटाओ माँ ,
अपने पास बुलाओ माँ ,
नव रात्रि के स्वागत में ,
सुखी भव: का वर दे जाओ माँ ,
शान्त भव: की दुआ दे जाओ माँ ,
समृद्धि की आशीष नवाज़ो माँ ,
नव रात्रि के स्वागत में.
नवरंग लुटाती आई माँ ,
भक्तों में शक्ति लाई माँ ,
नया उत्साह जगाए माँ ,
नवरात्रि के स्वागत में ,
अपना दर्श दिखाओ माँ ,
ऊर्जा नई भर आओ माँ ,
एक विश्वास जगाओ माँ ,
नवरात्रि के स्वागत में ,
निज चरणों में बिठाओ माँ ,
पाप कर्म मिटाओ माँ ,
ईर्ष्या द्वेष हटाओ माँ ,
नवरात्रि के स्वागत में ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ माँ ,
रोग शोक संताप मिटाओ माँ ,
अपने पास बुलाओ माँ ,
नव रात्रि के स्वागत में ,
सुखी भव: का वर दे जाओ माँ ,
शान्त भव: की दुआ दे जाओ माँ ,
समृद्धि की आशीष नवाज़ो माँ ,
नव रात्रि के स्वागत में.
----------
पितृ पक्ष
--------
------
नेक करम ऐसे करो, रख ले दुनिया याद,
नहीं तुम्हें गाली मिलें, दम तजने के बाद.
पूर्वज अपने याद हों, रहे गोत्र का भान,
श्रद्धा से नमन करें, गए पास भगवान.
यदि जा सकते आप तो, करते उन्हें प्रणाम,
नमन करो मन से उन्हें, चलो गया के धाम.
भारत में अनुपम रहे, गुणियों के संस्कार,
मान उन्हें आगे बढ़ें, अपने रखें विचार.
रही अग्रजों की कृपा, जो कुछ हैं हम आज,
मानें आभार उन का, आदर करे समाज.
जीते जी कर लीजिए, पूरे सब अरमान,
पता नहीं कब कौन दे, आप को पिंडदान.
-------
याद पूर्वजों को करें, दें उनको सम्मान,
उनके वंशज हम बने, है अपना अभिमान.
जो कुछ भी हम आज हैं, कहता है विज्ञान,
योगदान उनका रहा, करिए उनका मान.
बड़े गर्व से कह सकें, हम उनकी संतान,
शिक्षा हम को यह मिली, मेरा देश महान.
जीते जी पूछा नहीं, मात-पिता का हाल,
मौका लगते ही उन्हें, घर से दिया निकाल.
निधन बाद बेटे करें, पंडित का सम्मान,
भोजन खिला तृप्त करें, करते अनुपम दान.
जो चाहो सेवा करो, जीवित हों माँ-बाप,
नहीं उपेक्षा कभी हो, बड़ा न दूजा पाप.
---------
कृपा करें, आशीष दें, रहें प्रसन्न पितर,
पधारें अपने लोक, विदाई देवें बेफिकर.
------------
पितर चले बैकुंठ को, देकर हमें आशीष,
श्रद्धा समेत श्राद्ध में, हम भी नवाते शीश,
हम भी नवाते शीश, जो जीते जी सेवा कर पाए,
प्रसन्न मन से, भोजन, वस्त्र, आवास, उन्हें दे पाएँ,
आन लोक में, न रहे, भटकता मन इधर उधर,
इससे बड़ी न सेवा कोई, संतुष्ट रहेंगे सदा पितर.
---------------
गणेश चतुर्थी
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-------
गणपति आने पर हुआ, हर जगह शंखनाद,
सब लोगों में छा गया, अद्भुत सा आह्लाद.
सब को देता प्रेरणा, गणपति का त्योहार,
मेल जोल सद्भाव का, बढ़ रहा व्यवहार.
सब मिल कर आगे बढ़ें, रहे दूर दुर्भाव,
ऊॅंचा भारत नाम हो, ऐसा बने स्वभाव.
याद पूर्वजों को करें, रखें याद बलिदान,
भारत प्रगति करे सदा, ऐसा हो आव्हान.
आज दिवस से हो रहा, नव संसद का सत्र,
चर्चा इसकी हो रही, यत्र, तत्र, सर्वत्र.
करते हम शुभकामना, गणपति की आशीश,
मिले हमारे कर्म का, भला करें गौरीश.
--------
गणपति जी करिए कृपा, सबका हो कल्यान,
बरसे आशिश हर जगह, इक दूजे का मान.
श्रद्धा के मोदक मिलें, पार्वती का दुलार,
नमन आपको हम करें, दिल में भर कर प्यार
संकट हर संसार के, करिए नैया पार,
गलत काम सोचें नहीं, रख लें उच्च विचार.
-------
शिव गौरी के गेह में, जन्म लिए भगवान,
बड़े जतन से पा सके, अनुपम यह संतान.
शुक्ल पक्ष चौथी तिथी, माह भाद्रपद खास,
गणपति की है जयंती, जन मन का विश्वास.
सामाजिक उत्सव मने, छा जाए उल्लास,
गणपति पूजन से बढ़े, अंतर में विश्वास.
डाली प्रथा समाज में, दिया तिलक ने नाम,
बढ़े एकता आप से, गौरवमय अभिराम.
दस दिन का उत्सव मने, पूजन हो दिन रात,
सुबह शाम की आरती, करें पड़ोसी बात.
गली मुहल्ले में दिखा, देवा का शृँगार,
सभी जगह पर सुन सकें, उनकी जय-जय कार.
-------
पूजा सारे देव की, गणपति दें आशीश,
सच्चे मन से स्थापना, रखो चरण में शीश.
बिना मोल गणपति बिकें, होते वह अनमोल,
मन से उन्हें पुकारिए, क्यों देते हो मोल.
जगह जगह गणपति बिकें, सरे आम बाजार,
इन्हें खरीदें मोल दे, खरचें पैसे चार.
एक चतुर्थी यह हुई, रहा करोना काल,
याद सदा उसकी रहे, कैसा है यह साल.
आप विराजें देवता, कूचे, गली, निवास,
इस हालत में भी रहे, मन में हो उल्लास.
घर पर रह पूजा करें, मांगें दुआ हजार,
भीड़-भाड़ से दूर रह, जाएं नहीं बजार.
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गणपति का उत्सव मना, मिल कर सबके साथ,
दस दिन तक खातिर करा, चले विश्व के नाथ.
सबने मिल पूजा करी, हिय में बसते ईश,
भावुक मन से दें बिदा, कृपा करें जगदीश.
बिदा आपको कर रहे, नवा प्रेम से शीष,
आएँ फिर अगले बरस, देने को आशीष.
अर्थ विसर्जन का रहा, प्रिय का कर लो त्याग,
सुमन रुष्ट होते नहीं, भँवरे पिएँ पराग.
क्षण भंगुर संसार में, सब कुछ होगा नष्ट,
फिर क्यों माया मोह में, भोग रहे हो कष्ट.
गणपति भी भगवान हैं, मानो उनमें प्राण,
हिल जाने के बाद में, बन जाती पाषाण.
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गणपति आए देख कर, सुखी हुए नर-नार,
सुबह-शाम की आरती, करें नाना प्रकार.
तिलक ने आव्हान किया, बढ़े एकता आज,
जाति, वर्ण के भेद से, होवे मुक्त समाज.
गणपति बिकते दिख रहे, लगा हुआ बाजार,
भरने पेट गरीब का, बन जाते अवतार.
भक्ति पूर्ण माहौल में, हो आरती हर रोज,
श्रद्धा सहित नमन करें, गणपति देवें ओज.
भारत में एका रहे, सबके मिलें विचार,
वैर-भाव को भूल कर, बढ़ता जाए प्यार.
पूजा से संतुष्ट हों, गणपति दें आशीष,
श्रद्धा में झुकता रहे, सदा हमारा शीष.
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बरखा बरपा रही कहर, गणपति करते चिंतन,
बहुत बार यह सोचते, क्यों कर हो विसर्जन,
क्यों कर हो विसर्जन, दस दिवस हुआ पूजन अर्चन,
कर पूरी सब कसर, मृदु मोदक भर पेट चक्खा,
जग बिच जल पल रहा, कब रुकेगी यह बरखा.
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गणपति आज घर आए, गाओ मंगलगान.
वन्दन पूजन कर रहे, मेरे गणपति महान.
श्रृद्धा से सकल जन, पाएँ भरपूर प्रसाद.
कृपा रहे कुल पर सदा, मिलता है आशीर्वाद.
हों सुखी परिवार जन, बनी रहे सद्भावना.
प्रेम से दे रहे, सब को हम शुभकामना.
वन्दन पूजन कर रहे, मेरे गणपति महान.
श्रृद्धा से सकल जन, पाएँ भरपूर प्रसाद.
कृपा रहे कुल पर सदा, मिलता है आशीर्वाद.
हों सुखी परिवार जन, बनी रहे सद्भावना.
प्रेम से दे रहे, सब को हम शुभकामना.
--------
इस
प्राँगण में हम ने ,
मनाया एक नया त्योहार.
कृपा
हुई गणपति की, समय
पर आया विचार.
गणेश चतुर्थी
पर आव्हान कीन्हा, सुंदर
मूर्ति स्थापित कीन्हा .
सजीव
एक पंडाल बनाया,
कुर्सियों से फिर उसे सजाया.
नाना प्रकार
की रोशनी लगाई, भक्तों ने हर दम आरती
गाई.
अपनी
पूरी श्रृद्धा दिखलाई, समय
पर सबको घड़ी दिखाई.
पाँच दिवस का उत्सव सजवाया, आर.
डब्ल्यू ए. का निर्देशन पाया.
ढेरों प्रसाद चढ़वाया,
प्रीत पँजाब से खाना खिलवाया,
रोज़
एक प्रश्न सुझाया, खुद उसका हल बतलाया.
लकी
ड्रॉ तो हर दिन कीन्हा, अच्छे गणपति पुरस्कार में दीन्हा.
प्रसाद
में हर बार केले चढ़वाए, भक्त जन
केले खा कर उकताए.
सभी बिल्डिगों ने दायित्व निभाया, बढ़
- चढ़ कर प्रसाद सजाया.
ज़ोर
ज़ोर से घंटा बजवाया, म्यूज़िक सिस्टम खूब चलाया.
माइक का पूरा उपयोग सिखाया, सब
ने अपना ज़ोर दिखाया,
भक्ति
भाव से करी विदाई, सब
ने पूरी श्रृद्धा दिखलाई.
कई
प्रकार की प्रतियोगिताएँ कींन्हीं, लोगों की
जानकारी संवर्धित कीन्ही,
इस
अवसर पर पूरा उत्साह दिखाया, निष्ठा
पूर्वक पर्व मनाया.
हे गणपति,
जल्दी आना अगली
बार,
फिर
से करें उपासना, अभिलाषा बारंबार,
-----------
गणपति हो जाओ तैयार,
गणपति हो जाओ तैयार,
गणपति हो जाओ तैयार,
हरने सकल विश्व की बाधाओं को,
प्राणि जगत के कष्टों को,
त्रिविधि – ताप मिटाने को,
गणपति हो जाओ तैयार,
उमड़ी श्रद्धा ,
जागा विश्वास,
दृढ़ आस्था, अटूट अवलम्ब,
पुरातन प्रथा,
एक आधार,
गणपति हो जाओ तैयार,
दें हमको आशीष सदा,
खोजें तेल आगार,
करें लक्ष्य पूरा,
बीस बिलियन के भंडार,
गणपति हो जाओ तैयार,
है अभिलाषा,
उत्कंठा, जिज्ञासा,
खोजें काला सोना,
गहरे पानी में,
हो जाएँ ऊर्जा - संकट से पार,
गणपति हो जाओ तैयार,
गणपति हो जाओ तैयार.
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