Monday, 14 March 2016

राजनैतिक

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गांधी के निर्णय करें, भारत बंटाधार, 
कोर कसर नेहरू से, रच कर बहुत विचार.
अपना मत खुद को दिया, बनते पंत प्रधान, 
पंद्रह मत पटेल लिए, झुके गांधी महान.
कपट रखा मन में छुपा, बांटा हिंदुस्तान,
हिंदू मारे पाक में, बच गए मुसलमान.
पक्षपात की नीति से, भेदभाव व्यवहार,
जीत दिलाई मुस्लिम को, हिंदू जाते हार.
करे काम कांग्रेस वो, हो मुस्लिम कल्यान,
लुप्त किया इतिहास से, सारे मिटे प्रमान.
नीति बांटने की रही, मस्जिद दे फरमान,
फतवे हिंसा के मिले, नहिं आदर संविधान.
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भस्मासुर पैदा किया, वक्फ़ बोर्ड दे नाम,
इसे पाल कांग्रेस ने, सब का काम तमाम.
चाहे जहां हाथ रखे, सब जमीन अधिकार, 
पूरा देश निगल रहे, यह झूठे मक्कार.
वक्फ़ बोर्ड नोटिस लगा, कब्जा करें मकान,
मंदिर को अपना रहे, जालिम बेईमान.
ऐसे नियम बना दिए, होगा नहीं विरोध,
कोई यदि अपील करे, वही सुनें अनुरोध.  
भूमि हड़पने का हुआ, नया ढोंग ईजाद,
मकसद पूरा कर सकें, कहते लैंड जिहाद.
नेतागण मुस्का रहे, मन ही मन सुख मान,
सोच रहे, लड़ते रहो, बचे हमारी जान.
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पूरी क्षमता से लगे, काम करें सब लोग,
मिलता बातावरण से, सही गलत सहयोग.
सरकारी के साथ में, लग गए प्राइवेट,
क्षमता के अनुसार ही, लगता उनका रेट.
राजनीति का भी रहा, भरपूर योगदान, 
ऐसी नीति बना सके, चमके काम महान.
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दो अक्तूबर को हुए, पैदा अद्भुत लोग,
शास्त्री को सम्मान मिला, गांधी देता रोग.
बापू कह कर पुकारते, भारत भर के लोग, 
अपना घर स्वाहा किया, सेक्सी जीवन भोग.
ऊपर से हिंदू करें, दिल रखे मुसलमान,
चाल सभी धोखा भरी, मुल्लों का कल्यान.
अंदर से मुस्लिम रहे, उनके हित की सोच,
सारे कार्य विरोध में, मारी हिंदू चोंच.
भारत के विभाजन में, रही भूमिका खास,
इधर मुस्लिम रोक लिए, मिली वहां से लाश.
उसकी ही करतूत से, भारत का यह हाल,
मार दिया जब गोडसे, दिल में नहीं मलाल.
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पप्पू बन राहुल कहे, मैं सबका सरदार,
जीत गया दोनों जगह, अब मेरी सरकार.
हार अयोध्या में हुई, ले आए जो राम,
जीत बाबरी की हुई, अब तुम करो सलाम.
माल पचा, ठेंगा दिखा, बन मतलब के यार,  
उनके आगे झुक गए, जो निकले गद्दार.
बी.जे.पी. को खा गयी, उसकी झूठी शान,
अति विश्वास डुबा गया, बच जाए बस जान.
अपनों से ही डूबती, साझे वाली नाव,
खींचा तानी हो रही, खेलें कैसा दांव.
उनकी एका चल गई, अपन करें आराम,
चिंता नहीं भविष्य की, बचा न कोई काम.
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गलत बात को कह रहे, सब जन एक समान,
संविधान कहता हमें, सम आन, बान, शान.
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, है मौलिक अधिकार,
इज्जत सबको चाहिए, यही समय दरकार.
जाति, धर्म के भेद से, पनपे नफरत बीज,
रंग, नस्ल आरोप में, जाता हृदय पसीज.
अपने अपनों का चयन, डाले मन में भेद,
करें उपेक्षा शेष की, बढ़ जाता है खेद.
मतलब पड़े, याद करें, आज की राजनीति,
घटता विश्वास सब का, ऐसा लगे प्रतीत.
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इस्राइल पर कर रहे, हमला लोग हमास,
कारण उसका कह रहे, काफिर है बदमाश.
लिप्त समर में हो गए, कहने को दो देश,
असर पड़ोसी पर पड़ा, खस्ता हाल विशेष.
भारत भी प्रभावित है, राजनीति का फेर,
अपने ढंग से कह रहे, गलत, सही रणभेर.
अर्थ व्यवस्था हिल गई, मंहगाई की मार,
पीड़ित जनता त्रस्त है, कई लोग बीमार.
दुखी नागरिक हैं सभी, रोना रोते रोज,
निभती दोस्ती, दुश्मनी, छिपे गद्दार खोज.
इस्राइल तो है भला, हमलावर हैं दुष्ट,
देश भक्त नागरिक हैं, हालत करें दुरुस्त.
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मुफ़्त रेवड़ी बाॅंटते, दुष्ट और मक्कार,
झूठ सभी से बोल कर, खुद का करें प्रचार.
लालच नाना रूप दे, करते हैं व्यभिचार,
सत्य कथन कुछ भी नहीं, वोटों का आभार.
उनके वादों में फॅंसे, करें उन्हीं पर वार,
जनता दे उनको सजा, करके सोच विचार.
जनता मूर्ख बने नहीं, ऐसा बने विधान,
तुरत चयन पर रोक हो, मुफ़्त मिल विज्ञान.
जनता के सेवक बने, हो उसका कल्यान,
शोषण उसका हो नहीं, सबका रख लें ध्यान.
उनसे वापस छिन सकें, पेंशन के अधिकार,
आश्वासन झूठे नहीं, दे पाऍं मक्कार.
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मिर्ची ऐसा नाम है, सुन मिर्ची लग जाय,
जिसको मिर्ची लग गई, ऑंसू देय बहाय.
मिर्ची मिर्ची से अधिक, तीखापन बढ़ जाय,
यह खा कर होती जलन, वह पा कर जग जाय.
खाने में मिर्ची रहे, आ जाता आनंद,
जोरदार तड़का लगे, कट जाते भव फंद.
मिर्ची तीखी लग गई, झरे नैन से स्राव,
सी-सी कर सब बोलते, जल्द मिठाई लाव.
मिर्ची में गुण बहुत हैं, पोषक सी भरपूर,
लाल मिले या हो हरी, खाएं रोज जरूर.
खाएं मिर्ची रोज ही, तन सुंदर हो जाय,
आभा मुख मंडल बढ़े, बिन मिर्ची कुम्हलाय. 
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सत्य लगे यू-ट्यूब पर, भ्रामक करें प्रचार,
ऐसे दुश्मन पल रहे, घातक करें प्रहार.
झूठी छवि प्रस्तुत करें, अपने हित में लोग,
मन को आहत कर सकें, तथ्य दिखाते सोग.
पेश वीडियो कर रहे, बिना किसी आधार,
उनका झूठा लक्ष है, जिसका करें प्रचार.
तरह तरह के आँकड़े, पेश करे परिवार,
कैसे आगे बढ़ सके, उनके हित, व्यापार. 
जलते अपने देश से, करें गलत प्रतिरोध, 
प्रगति यहाँ ना सह सकें, सब विधि हो गतिरोध.
उपजा अन्न भारत में, फिर भी भूखे लोग,
ऐसा चित्र दिखा रहे, त्रस्त, ग्रसित कुछ रोग.
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दिया दिलासा मुफ़्त का, खर्च किए कुछ नोट, 
नेता राज सदन बनूँ, कैसे पाऊँ वोट.
तिकड़म से सी. यम. बनूँ, बोल मुफ़्त के बोल,
जनता को उल्लू बना, नहीं खुलेगी पोल.
वोट हमें जिनके मिले, करना है आभार,
नियम बनाए इस तरह, प्रियजन को उपहार.
दारू बोतल पर बिके, डाल दिए खुद वोट,
हिंदू सारे लालची, नीयत उनकी खोट.
मानें वह अपनी प्रथा, रखतीं बिंदी वैर.
उसको हिंदू छोड़ते, बुरका करता खैर.
नहीं शरम हिंदू करे, मान मुस्लिम रिवाज,
शीष शरम से झुक गया, नाटककार समाज.
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ईश्वर ने भेजा हमें, मिली योनि इंसान,
करम हमारे यूँ हुए, बन बैठे हैवान.
होते कोई जन्म से, ना पंडित या वैश्य,
पढ़ लिख कर सीखे यहीं, जग के सभी रहस्य.
ऊँच नीच का भेद कर, लिया करम को बाँट,
पंडित की पूजा करी, हरिजन खाते डाँट.
बनिया सुत बनिया बना, करता था व्यापार,
पंडित बालक ढूँढता, आजकल रोजगार.
भेद खतम अब जात का, वोट की राजनीति,
करम किसी के कुछ रहें, मतलब की है प्रीत.
कुरसी बनती लक्ष्य है, मतों का हो जुगाड़,
अपना मतलब साध लो, बाकी जाएं भाड़.
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अहंकार में चूर थे, सत्ता बनी गुमान, 
अंग्रेजों के जुल्म से, लोग हुए हैरान.
दमन चक्र ऐसा चला, छीन लिए अधिकार, 
आए आगे लोग कुछ, करने को प्रतिकार.
किया धमाका कक्ष में, करते थे उद्घोष,
हुई गिरफ्तारी तुरत, जन-मन में था रोष. 
मिली सजा फाँसी हुई, थे दीवाने तीन, 
राज, भगत, सुखदेव से, गूँजा नाद नवीन. 
पावन तेइस मार्च को, पहले नब्बे साल, 
झूल गए हँसते हुए, भारत माँ के लाल.
आजादी का सुख मिला, हुआ अमर बलिदान, 
योगदान की याद से, मिलती सीख महान. 
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कोरोना उपचार में, उपयोगी वैक्सीन,  
सुई नहीं, कागज़ बिना, लाख बजाओ बीन. 
ले लो वापस तीन बिल, राज सभा में पास, 
चालें विपक्ष चल रहे, दे कर झूठी आस. 
गहरी साजिश रच सके, आंदोलन के नाम, 
नारे ही काफी नहीं, करें सड़क को जाम. 
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छद्म वेश धर आ गए, दे कर रैली नाम,  
कैसे हो तख्ता पलट, शासन हो बदनाम.
लाल किले पर जो घटा, बहुत शरम का काम,
दंगा, तांडव कर दिया, वाहे गुरु का नाम. 
शीत जनवरी माह की, तिथि छब्बीस महान, 
फिर भी दीवाने अड़े, देने को बलिदान, 
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गुमा दिया सरदार ने, अर्जित था जो मान, 
बिखर गई वह कल्पना, जिस पर था अभिमान. 
रक्षा करते देश की, देकर अपनी जान, 
आज उतारू हो गए, लेने सबकी जान.
बहकावे में आ रहे, बलिदानी सरदार, 
माल दलाली खा गए, व्यर्थ करें तकरार.
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ग्लैमर की दुनिया गजब, रही निराली बात, 
शौक निराले पाल कर, अभिनय की सौगात. 
राज़ उजागर कर गया, सुशांत का बलिदान, 
डरते उसकी मौत से, ड्रग गिरोह शैतान. 
सी.बी.आई. जाँच से, खुलती सबकी पोल, 
चर्चा संसद में करें, बजा बजा कर ढोल. 
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रही अधूरी लालसा, कैसे कुरसी पाय, 
जोड़ तोड़ की नीति से, सत्ता लें हथियाय. 
शिव सैनिक बेचैन हैं, चलें कौन सी राह, 
नेता जी का साथ दें, या दें उन्हें सलाह. 
लाज लगाई नीति को, भूले कुल की रीत, 
निर्वाचन तक साथ थे, हुए अलग पा जीत. 
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चंद्र टरै, सूरज टरै, टरै जगत ब्योहार, 
पक्की अध्यक्ष सोनिया, ढाल बनी परिवार. 
कुरसी ना छोड़े मुझे, मैं बैठी तैयार, 
कई बार मैं तज चुकी, करते भक्त पुकार. 
ममता लख कर लाल की, आ जाती हर बार,
मैं बेचारी क्या करूँ, जनता का इसरार.
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भीमराव के मान में, झुक जाता है शीष,
याद करें संघर्ष को, जीवन में जगदीश.

बहुत पढ़ाई कर रचा, भारत का कानून, 
पालन करिए गर्व से, उसका चढ़े ज़नून. 

शोषित दलितों को बढ़ा, दिया उचित सम्मान, 
भारत के प्रतिनिधि बने, मिला विश्व में स्थान. 

अब उनके वंशज रचें, गंदे घटिया खेल, 
राजनीति की आड़ ले, बोते हैं विष बेल.

सदियों से शोषित रहे, बन समाज के दास, 
कैसे उनका हो भला, किस विधि करें विकास. 

मेधा से निर्णय लिए, होता भले विरोध, 
अटल बात अपनी कही, चाचा से प्रतिरोध. 
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बाहर निकले रूठ कर, पा बी.जे.पी. साथ, 
तोड़ कमल से दोस्ती, लिया कमल को हाथ. 
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उनको आते ही मिली, राज्य सभा की सीट, 
कमल नाथ अब सिर धुनें, पकड़े माथा पीट. 
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गिनती थोड़ी कम हुई, गिर जाती सरकार, 
सिद्ध हुआ बहुमत नहीं, मिले सदन में हार. 
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देश चलाने के लिए, जिनका करें प्रयोग, 
अपने मतलब से नहीं, उनका हो उपयोग. 
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जात-पात के नाम पर, बांटा पूरा देश, 
अपने हित को साध कर, नेता दें संदेश. 
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छोटे-छोटे स्वार्थ तज, करिए तनिक विचार, 
कैसे भावी समय में, होगा बेड़ा पार. 
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गाँधी को गोली लगी, सजा मिली उपहार, 

निर्णय इकतरफा दिए, मुस्लिम को अधिकार. 

रुकते दो दिन और गर, बटता हिंदुस्तान, 

धन्यवाद गोडसे का, भारत बना महान. 

मुस्लिम की कर खुशामद, तोड़ा सारा देश, 

हर संभव कोशिश करी, धर कर झूठा वेश. 

हिंदू से नफरत करी, मुस्लिम सदा प्रसन्न, 

सपने में सोचा नहीं, कभी नहीं हों खिन्न.

सत्य, अहिंसा, प्रेम का, नाटक दिया रचाय, 

भ्रमित दिखावे से किया, झाँसे में उलझाय. 

बापू का सम्मान दे, किया असीम प्यार, 

चाँटा मारा राम को, दिया रहीम दुलार. 

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नेताजी के नाम से, झुक जाता है शीष, 

दिल से उनकी याद हो, भली करेंगे ईश. 

बेचैनी छाई सदा, देखा देश गुलाम,

आजीवन संघर्ष बस, और नहीं कुछ काम. 

हर पल थे वह सोचते, कैसे हों आज़ाद, 

सब संभव उपाय करें, रही यही फरियाद. 

भारत माता के लिए, करे प्रान बलिदान, 

हित-साधन की कामना, अपना देश महान.

साथ गरम दल के हुए, क्राँतिकारी विचार, 

गाँधी से मतभेद था, कैसे बेड़ा पार.  

विधा नेहरू से अलग, मिलते नहीं विचार,

शैली भी कुछ अलग थी, हिंसा भी स्वीकार.

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धृष्ट कुटिलता कर रहे, मूरख नेता आज, 

वोट जुटाने के लिए, कुछ भी करते काज. 

नाना नौटंकी करें, जनता जाती खीझ, 

कुछ रूठे, कुछ मन गए, कुछ करते तजवीज. 

अपना ही प्रचार करें, बात जमे तो ठीक, 

औरों पर आरोप की, हरकत नहीं सटीक.

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जुगत बनी सरकार की, गठबंधन बेमेल, 
किसे मिलेगा मुख्य पद, किसका निकला तेल. 
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फूटी आँख जमें नहीं, उनसे करें सलाह,
लुभा रही कुरसी उन्हें, रचा बेमेल ब्याह. 
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जनता को धोखा दिया, झोंक आँख में धूल, 
सत्ता की लालसा में, भूले सभी उसूल. 
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जनता ने जिसको चुना, नहीं बनी सरकार, 
मारी भाजी बीच में, करने को जयकार. 
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नहीं मिले पहले कभी, जिनके कई विचार, 
कुरसी की खातिर करें, अब सबकी मनुहार. 
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जिसने कभी नहीं लड़ा, कोई कहीं चुनाव, 
उसके ही दल में रहे, मुखिया गण बेभाव. 
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हारों को सत्ता मिले, कर बैठे गठजोड़,
कुरसी की खातिर रचे, गठबंधन बेजोड़.
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मौका उनको भी मिला, जिनका नंबर तीन,
सीटों की गिनती करी, बजा रहे वह बीन.
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धोखा खाए लग रहे, जिसने डाला वोट,
दल बदलू ने दी दगा, करते दिल पर चोट.
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सत्ता लोलुपता रही, इस झगड़े का मूल, 
किसका किस से मेल हो, भूले सभी उसूल. 
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मंत्री अपने चाहिए, चुने हुए कुछ खास, 
सिर्फ़ निराशा ही मिली, बढ़ती गई खटास. 
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सभी दलों की कामना, बन जाए सरकार, 
फिर चुनाव कैसे नहीं, सबकी यह दरकार. 
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सत्ता का लालच रहा, लड़ने चले चुनाव, 
गठबंधन ऐसा किया, डूबी खुद की नाव. 
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सत्ता की खातिर लगे, चरण चूमने आज,
बंद बोलती बाघ की, मौन हुई आवाज. 
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आज खुशामद कर रहे, कटवा अपनी नाक,
बड़े बोल थे बोलते, इज्ज़त होती खाक.
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आपस ही में भिड़ गए, पोलिस और वकील,  
उसकी रक्षा वह करें, जिनको लेते लील.
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जटिल समस्या हो चली, दिल्ली के हालात, 
दोनों लड़ते तर्क से, नहीं समझते बात. 
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विधि का पालन जो करें, उनका देना साथ, 
जो तोड़ें कानून को, वे अपराधी के हाथ.
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बीजेपी-सेना रही, जब तक हो मतदान, 
मत गणना के बाद में, तू-तू, मैं-मैं जान. 
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लड़ते चुनाव साथ में, होते नखरे बाद, 
जोड़-तोड़ की कोशिशें, हो जातीं बरबाद. 
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सत्ता के कारण चला, मतभेद घमासान, 
जिनसे मिल चुनाव लड़े, खूब करें अपमान. 
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हर हफ़्ते हल्ला करें, मिल कर मोदी, शाह, 
सभी नागरिक खुश रहें, दिल से बोलें वाह. 
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संविधान में कर बदल, मिला लिया कश्मीर,
निखरेगी अब विश्व में, भारत की तसवीर. 
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भारत में जम्मू बना, दिल्ली के सम राज्य, 
फहरे झंडा एक ही, भारत अब अविभाज्य. 
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गिनती में गीता मिली, डाली गई कुरान, 
कैसा है यह करिश्मा, बदल गए भगवान.
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गिने गिनाए मत पड़े, मतपेटी थी सील, 
फिर भी इज्ज़त लुट गई, नेता करें अपील. 
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हार दिखे, चिल्ला रहे, ई.वी.एम. खराब, 
मुश्किल कैसे हल करें, दूर जीत के ख्वाब.
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मौज करें, मोदी हटे, एक सभी की चाह, 
रोड़े आड़े आ गए, मिले न कोई राह. 
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रिश्वत खूब पचा गए, लेते नहीं डकार, 
बांट कमीशन खा लिए, भरते अब हुंकार. 
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आए मोदी दौड़ कर, पकड़ी सबकी चाल, 
हाथ डाल कर हलक में, उलटाएगा माल.
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नील तर्जनी कह रही, कर आए मतदान,
करें गर्व से हम सभी, संविधान सम्मान. 
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वोट दिए जन कह रहे, वोट बना अधिकार, 
निश्चित होगा वोट से, किसकी हो सरकार. 
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कौन भरी दुपहरी में, जा कर लगे कतार, 
कैसे इस आलसी को, जीने का अधिकार. 
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अपने हित-साधन करें, गाँधी को बदनाम,
संस्कार को भूल कर, रखते नाना नाम. 
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वाड्रा को गाँधी कहा, जन्मे पहले खान,
बेशरमी की हद हुई, बापू का अपमान. 
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वोटों की खातिर छुएँ, सभी जनों के पैर,
घर-घर जा कर पूछते, मतदाता की खैर. 
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रोटी-बोटी मुफ़्त की, नेता तोड़ें रोज, 
भाव नहीं कुछ भी पता, जुमले लाते खोज. 
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खाना किसी गरीब का, खाते ले चटकार, 
हाथ फेर,भरपेट खा, लेते कड़क डकार. 
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वादों में आगे रहें, बोलें सबसे झूठ, 
मिलें नहीं चुनाव बाद, पकड़ाते हैं ठूँठ. 
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कर कलंकित लाला कुल, खूब कमाया माल, 
चित्रगुप्त जी लजा रहे, देख कर इनके हाल.
देख कर इनके हाल, सभी चित्रांश हैरान,
काली करतूत से, चर्चा भी है परेशान, 
वर्मा, आलोक लड़ते, जगत देखे जी भर, 
सी.बी.आई. आरोप, सुलटा रहे जम कर. 
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गर्व से कहो, हम दलित हैं. 

आरक्षण अधिकार हमारा है, 
ले कर रहेंगे, हमारा नारा है,
बंद, हड़ताल, भी कराना है, 
रोकना हमें, प्रगति की धारा है. 

हम दलित हैं, 
सदियों से त्रस्त हैं, 
भूख, गरीबी से त्रस्त हैं 
संघर्ष में व्यस्त हैं, 
आरक्षण में मस्त हैं, 

हम दलित हैं, 
समाज में वर्जित हैं, 
कर्म पुरखों के अर्जित हैं, 
राजनीति से सिंचित हैं, 
हया नहीं अब किंचित है, 

हम दलित हैं, 
बाबा साहब की दया पर जीवित हैं, 
नेताओं के वोट बैंक हमारे आश्रित हैं, 
सदियों से हम पीड़ित हैं, 
बस किसी तरह जीवित हैं, 

हम दलित हैं,
सबकी सेवा में जिंदगी गुज़ारी है, 
हमारी नौकरी अब सरकारी है, 
हमें नहीं गरज़ तुम्हारी है, 
अब हम सब पर भारी हैं, 

गर्व से कहो, हम दलित हैं. 
हाँ, अपनी हम दलित हैं. 
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अपने प्रिय के लाभ, हित, खोज रही सरकार, 
नई नीतियाँ बना रही, बढ़ा देय तकरार,
बढ़ा देय तकरार, लाभ की मुर्गी काटो,
जबरन थोपी जाँय, बढ़ो रहे जिनको घाटो,
मेहनत से समृद्धि, विकास के, न देखो सपने,
माल मलाई चट कर जाएँगे, नेताओं के सारे अपने.
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बाकी भाजी मंहगी होती, मौसम के अनुसार,
आलू, प्याज़, टमाटर महंगे, करे शरद पवार,
करे शरद पवार, किसान पर पकड़ भारी,
कुर्सी हेतु करे कुछ भी, सत्ता क्षुधा की बीमारी,
काली कमाई क्रिकेट से, पद लोलुपता गज़ब की,
अपना हित प्रथम दिखे, भाड़ में जाए जनता बाकी.
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सारे जग में पिट रहे, रोहिंग्या मुसलमान, 
अपने कर्मों से लग रहे, नरकासुर समान,
नरकासुर समान, कृतघ्नता की पराकाष्ठा,
नहीं कोई दीन, ईमान, न बची कोई निष्ठा,
ठोक पीट कर ठीक करो, होश में आ जाएँ बेचारे,
सकल विश्व में जुतियाए जा रहे, रोहिंग्या सारे.

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केवल भारत देश ही, रह गया धर्म निरपेक्ष,
बाकी सब संसार में, हर घटना सापेक्ष,
हर घटना सापेक्ष, संसद, जज या मीडिया, 
नेताओं की बात निराली, पुलिस की तो तारीफ क्या?
भाषा, जाति, व्यवसाय, सभी बनाते अपने दल,
सिद्धान्तों की बात अब, कागज़ पर है केवल.
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आज़ादी में विघ्न करें, पाय सहाय्य भरपूर,
हरेक काम में रौब जमाय, उंगली करें ज़रूर,
उंगली करें ज़रूर, बिन पंगा, हज़म न होती रोटी,
जन कल्याण के नाम पर, जुगत बिठाई मोटी,
एन. जी. ओ. के नाम पर, करें देश की बर्बादी,
डाल अड़़ंगे, रोकें काम, कैसी है यह आज़ादी?
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कुटिल चाल विपक्ष की, करे खूब धमाल,
झूठी जनहित याचिका, जब जी चाहे डाल,
जब जी चाहे डाल, बेतुके फैसले दिलवाए,
वकील, जज मिल कर, कुतर्क समझाएँ,
अच्छे भले माहौल को, बिगाड़ बनाएँ जटिल,
कसर न कोई छोड़ रहे, कर हर प्रयास कुटिल.
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अपनी गलती छोड़ कर, देवें गैर की दलील,
सबको करो समान, झूठी बात करें वकील,
झूठी बात करें वकील, बहस करें बेमतलब की,
हास्यास्पद तर्क दे रहे, दे दुहाई राजनीति  की,
गलती की सज़ा मान लो, भुगतो अपनी करनी, 
सुधार, प्रायश्चित से चरित्र को, मानो गलती अपनी.
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रहम रहीम को चाहिए, मीडिया करता माँग,
रो रो कर गलती मानता, आडम्बर को टाँग,
आडम्बर को टाँग, जज को बुलवाया जेल,
जीना दूभर कर दिया, भावनाओं से कर खेल,
समाज सेवा का प्रतिदान, जगा लोगों का वहम,
झूठे पाखंडी की न वकालत, न हो कोई रहम.
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इक परदेसी हमें ज़ख्म दे गया,
जाते जाते धीमा विष दे गया.
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आज विभीषण बन गए, जनता के सरताज,
ग़द्दारी अपनों से करन में, आई न इनको लाज,
आई न इनको लाज, नाना विधि प्रपंच रचाते,
झूठे वादे, प्रलोभन से, भोली जनता को भरमाते,
करना है, तो करो, सच्ची, पूरी निष्ठा से राज,
वरना, जाना हो कल अगर, तो छिप जाओ आज.
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गधे सवारी कर रहे, बैठ शेर की पीठ,
आरक्षण का लाभ ले,बनते नित प्रति ढीठ.
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लालू लज्जा बेच रहा, लाल रहा लजाय,
बेशर्मी की चादर ओढ़ कर, गुनाह रहा छिपाय,
गुनाह रहा छिपाय, बहाने नित नए बनाता, 
गुंडा गर्दी दर्शा कर, सारी जनता को भरमाता,
अपने बाप की धौंस दिखा, बनाए सबको उल्लू,
तौबा कर लो, नीच, नराधम, नरपिशाच लालू.
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अम्मी अब्बू न डकार सके, बेटे दिए लगाय,
सात पुश्त का इंतज़ाम, पर, तृष्णा न मिट पाय,
पर, तृष्णा न मिट पाय, उचित अनुचित सब भाय,
केहि बिधि चाल चलूँ, सबको दें भरमाय, 
गाली दे विपक्ष को, बोले सरकार निकम्मी,
कुछ तो दे दो संस्कार, खल नेताओं के अब्बू अम्मी.
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लो जी.एस.टी. आ गया, बंद हुआ मनमाना मोल,
एक दर पर मिलेंगी, सारी चीजें अनमोल,
सारी चीजें अनमोल, पर छूट गया पेट्रोल,
कड़े फैसले लेने में, विपक्ष भी भूला बोल,
भलाई राष्ट्र की देख रहे, चाहे प्रगति है स्लो,
जन हित को ध्यान रख, सामयिक फैसले लो.
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नई नीति में बदल रही, रोज़ दर डीज़ल औ पेट्रोल,
सोने जैसी नीति बनी, भाव रहे अनमोल,
भाव रहे अनमोल, हर सुबह छः बजे की आसा, 
कितना बढ़ा, कितना घटा, रोज़ की जिज्ञासा, 
तेल कंपनियाँ खोज रहीं, नित नव तर्क कई,
जनता बेचारी झेल रही, परेशानी नित नई.
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राजनीति की रोटी सेकें, नेता, संत, अमीर,
आम आदमी चंगुल में रह गया, बन  कर एक फकीर,
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व्यवसाय, पद्धति में चले, करने मूल सुधार,
नकल विदेश की करें, अनपढ़, जाहिल गँवार.
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किसान और नेता की भूख बढ़ी, दोनों चाहें भेंट,
एक नीयत का सच्चा, दूजा राखे खोट.
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ऐश नेता कर रहे, मर रहा मजदूर,
उद्योगपति के लोन माफ़, करदाता मजबूर .
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हलाल का कुछ तो करो रे उपाय ,
करो बहाल सपा काँग्रेस को, योगी को हटाय.
बिल में छुपा ओवैसी, तूती रहा बजाय,
केहि विधि जी पाऊँगा, बिन गोमाँस को खाय .
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जनता भ्रमित हो रही, लूट मची चहुँ ओर,
गुंडे, नेता, मीडिया, मौसेरे भाई चोर.
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मम्मी गुम हो गई, छोड़ हाथ का साथ,
सपा इरादा कर रही, गहे बुआ का हाथ,
गहे बुआ का हाथ, लग गई सब की वाट, 
मोदी की ऐसी हवा बही, ले सब सीटें चाट,
धर्म, सत्य के मार्ग ने, हटा दी सरकार निकम्मी,
मर गई नानी और, याद आ गई मम्मी.
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कटु सत्य अपच कर रहा, सुस्वाद प्रिय झूठ,
विष वमन कर गए, ठोक पीट कर मूठ,
ठोक पीट कर मूठ, झूठे आंकड़े भरमाते,
मूर्ख बना जनता को, स्वर्णिम स्वप्न दिखाते,
मीठा मीठा बोल, करते गुमराह वाक् पटु,
खुल जाएगी सबकी पोल, उजागर होगा सत्य कटु .
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कुछ लोग दिल जलाते हैं,
कुछ बिना लौ की आग लगाते हैं,
कुछ कटु वचनों से जल जाते हैं,
और कछु हरकतों से सुलझाने हैं .
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आधुनिक इस काल में, जनता करे प्रलाप, 
पागल नेता शाँति हरें, दे असीम संताप, 
दे असीम संताप, कुछ भटकाएँ बच्चे, 
करें हरकतें असभ्य, सैनिकों से उलझाएँ टुच्चे,
राह रोक सेवारत सरकार की, मनाएँ मौज क्षणिक, करें सख़्त व्यवहार, अपनाएँ तकनीक आधुनिक.
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रंग ख़ून का सभी का, दिखता हम को लाल, 
मारो, काटो, लूटो, क्यों करें बेगुनाह हलाल.
क्यों करें बेगुनाह हलाल, नहीं नीति इस्लाम,
ख़ुद व्यथित रह कर रहे, सबका नींद हराम.
जियो और जीने दो, रहें, स्वस्थ सब अंग,
एक आत्मा सब में बसे, लाल ख़ून का रंग.
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आहत करते भावना, चोट करें नित मर्म, 
वोट लेन के खातिरे, ऐसे करते कर्म.
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राजनीति सिखला गई, बेशर्मी की चाल, 
गलत काम अंजाम दे, चोर डाँटता कोतवाल.
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जब सैंया भये जज , तो डर किस गुनाह की सज़ा का . 
खूब जम कर गुनाह करो , और बाअदब बेदाग छूट जाओ .
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ना कोई उसूल है , ना कोई ज़ुबान है ,
मेरी राजनीति ही, बस मेरी पहचान है . 

वो वोटों का खरीदना , वो ईमान का बेचना ,
विश्वास घात की , होती नहीं आलोचना .

मतलबी व्यवहार में , मरता आँख का पानी ,
चाटुकारिता के बाज़ार में , नहीं दलालों का सानी .

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नेता नाम से लूट है, जो चाहे सो लूट,
नए प्रावधान बनाइए, मौका जाए न छूट, 
मौका जाए न छूट, हर जगह लुटते हम, 
'टैक्स शेयर' बन कर, पाल रहे वहम,
गलत काम कर हर कोई, दुहाई संविधान की देता,
चोर रास्तों के संरक्षक, बन बैठै हमारे नेता.
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ताज पहन कर छिपा रहे , अपने सिर की गंज ,
बड़े घुटे , घोटाले करें , घोट घोट कर तंज ,
घोट घोट कर तंज , गंद सियासत की फैली ,
श्वेत वस्त्र में लिपट रही , इनकी नीयत मैली ,
जनता भोली सह रही , अत्याचारों की गाज ,
झूठ , दंभ , छल , पाखंड , से , पा जाँएगे फिर से ताज .
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माफ़िया 

माफ़िया की मिलीभगत , नेताओं का हाथ ,
जनता सज़ा भुगत रही , पर्यावरण के साथ ,
पर्यावरण के साथ , दूषित हो रहा हवा पानी ,
गरमी प्रदूषण बढ़ा रही , जीना बना बेमानी ,
पहली बार है नहीं , जब दुआएँ ऐसा वाकया ,
स्वार्थ सिद्धि में लिप्त हैं , नेता और माफ़िया .

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विरासत

विरासत में आज़ादी मिली , मिले न कदर दान ,
राजनीति में लुट गए , जीवन मूल्य , सम्मान ,
जीवन मूल्य सम्मान , ख़ुशी आज़ादी की झेल न पाए ,
विकृत मानसिकता के चलते , वोट की चाल चलाएँ ,
स्वार्थ , लोभ , ईर्ष्या की , बन गई सियासत ,
देश लूटने की आज़ादी , और नफ़रत की मिली विरासत .

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कमल

कीचड़ में खिल गया ‘ कमल ‘, हो गई पूरी आस.
सत्ता में आ जाने से,  अब के हर्षित भए उदास,
अब के हर्षित भए उदास, मत मन को मारो,
देखो उन के काम, कोई भी दोष निकारो .
ना करने दो कुछ काम, कहो सरकार है लीचड़,
खोदो उन का ‘ आधार ‘ , बोलो, ‘ कमल ’  की जड़ में कीचड़ .
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वोट की राजनीति

विष वमन कर रहे, सर्पों के सरताज,
मणिधारी नाग हैं, वोटों के मोहताज,
वोटों के मोहताज, छूते वोटर के चरन,
किसी की शपथ खाएं, भरे स्वार्थ वचन,
किसी भी हद तक गिरते, लेते विपक्ष की आशिष,
चाहे उल्टा लटका दो, हम न रखेंगे विष
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विष वृक्ष पल रहा, नेताओं के खोट,
दिल से कैसे साफ़ रहें, माँग रहे वोट .
माँग रहे वोट, भ्रष्टाचार का बोलबाला,
मीडिया को हड़का कहें, तेरा मुँह काला,
नोट पाने को कर रहे, हर संभव साजिश,
ईमानदारी है असुरक्षित, फैला समग्र विष.
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तोड़ – फोड़ से मच  रही, त्राहि चारों ओर,
कातर दृष्टि से थामती, जनता नेता का छोर,
जनता नेता का छोर, बैठी कब से आस लगाए,
लो आ गए  चुनाव, जोश से वोट दे आए ,
असली रंग में नेता आए, गाली – गलौज की हुई होड़,
किसी प्रकार से चुन गए, लगी शासक की जोड़ –तोड़ .
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नेता
नेता जो न कराए, वह  थोड़ा है,
बड़ी दूर तक जाता इन की  अकल का घोड़ा है.
रखी न कोई आन संसद, संविधान की,
थकते नहीं, करने बातें अपने बखान की .
दिग्भ्रमित जनता को करते, आश्वासन के बान से,
आपस में लड़ते देवासुर सँग्राम से.
लो, आ गए चुनाव, फिर इन के कमाल से,
कैसे बीते पाँच साल, बन गए एक सवाल से ?
मूक जनता सहती रही, इन की बकवास को,
जो भूल गए शालीनता, आक्षेपों के दु:श्वास को.

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शब्दों के मोह जाल में , आप सब को उलझा दिया ,
अपने लिए कुछ न किया , जो किया सब आपको दिया .
आप से बस वोट लिया , आपका आशीर्वाद लिया .
शुभकामनाएँ पाकर , हमने आपका दिल जीत लिया .
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