Monday, 14 March 2016

सामाजिक पर्व

जनवरी 26 - गणतंत्र दिवस
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गौरवमय इतिहास को, कर पाएं हम याद,


लें जब उससे प्रेरणा, बढ़े नहीं अवसाद.


अपने बच्चे सीख लें, चाल, चलन व्यवहार,


शामिल शिक्षा में रहें, धर्म, नीति, संस्कार.


बिना संस्कार के हुआ, सभी ज्ञान बेकार,


गुरु का भी दायित्व है, दें समझ और प्यार.


पहले गुरुकुल थे भले, शिष्य पढ़ें इक साथ,


खाना, सोना, सीखना, डाल हाथ में हाथ.


पनप रहे स्कूल में, हिंसा, नफरत बीज,


केवल हम ही श्रेष्ठ हैं, बाकी सब नाचीज़.


बहुत जरूरी है बढ़े, आपस का व्यवहार,


मेल जोल से सब रहें, सीखें शिष्टाचार.


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आज दिवस लागू हुआ, स्वयं का संविधान,

नियम बने खुद के लिए, थे कई प्रावधान.

संविधान अपना कहे, सबके नियम समान,

आदर सभी धर्मों का, मिले सभी को मान.

सबके साथ मिल सकें, रहे देश में शाँति,

ऐसी आशा कर रहे, हो विकास बहु भाँति.

शिक्षा पा कर नाम करें, हो अच्छा उपयोग,

सभी नौकरी पा सकें,  रह कर स्वस्थ, निरोग.

मिला हमें मतदान का, एक स्वतंत्र अधिकार.

नेता ने उसका दिया, एक गलत प्रतिकार.

जाति, धर्म का भेद कर, नकली पहन लिबास, 

धरना औ हड़ताल से, किया अवरुद्ध विकास.

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रही हमारी सभ्यता, गौरवमय पहचान, 

सत्य, अहिंसा, शान्ति से, भारत बना महान. 

दमन विदेशी ने किया, संस्कृति सत्यानाश, 

चूर गर्व में हम रहे, चूमे भ्रम आकाश. 

प्रथम माह छब्बीस को, पाँच दशक सम्मान,

नियम कायदे बन गए, लग गया संविधान.

आशा थी, होगा सभी, काम नियम अनुसार, 

पूरी निष्ठा से करें, अपनी जान निसार. 

दूर दासता को करे, हटे गुलामी दंश, 

कितने लोगों को मिला, उनका किस्मत अंश. 

आज़ादी कैसे मिली, किया बहुत संघर्ष, 

खूब बहा था रक्त भी, उमड़ा अतिशय हर्ष. 

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आज़ादी के नाम से, होता हर्ष अपार, 

ऐसी इसकी भावना, रोज उमड़ता प्यार. 

इसको पाने के लिए, किया अतुल संघर्ष,

मिलने पर हमको हुआ, भीतर से अति हर्ष. 

किया तैयार जतन से, अपना एक विधान,

नाना धाराएं बनीं, जिनका रखना मान. 

देश चलाने के लिए, जिनका करें प्रयोग, 

अपने मतलब से नहीं, उनका हो उपयोग. 

जात-पात के नाम पर, बांटा पूरा देश, 

अपने हित को साध कर, नेता दें संदेश. 

छोटे-छोटे स्वार्थ तज, करिए तनिक विचार, 

कैसे भावी समय में, होगा बेड़ा पार. 

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भारत रत्न तीन बने, पा कर के सम्मान,
नाना, प्रणव, भूपेन, को कह रहे महान.
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प्रतिभा अलग, क्षेत्र अलग, देश करे आभार,
उनके अनुभव लाभ से, गर्वित है संसार.
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अक्सर पा सम्मान को, बन जाती पहचान,
यहाँ मिला पहचान से, भारत का सम्मान.
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भ्रष्ट नेताओं ने कर दिया, लोकतंत्र का नाश,
खत्म विश्वास हो गया, झूठी पड़ गई आश,
झूठी पड़ गई आश, आश्वासनों का माया जाल,
घोटालों की भरमार, न्याय चौराहे पर हलाल, 
जनता भ्रमित हो रही, गणतंत्र बचाने का कष्ट,
गलत प्रतिनिधि चुन गए, काफी नेता भ्रष्ट.
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नेताजी के नाम से, भर जाता सब में जोश,
गरम दल के सारथी, सुभाषचंद्र बोस,
सुभाषचंद्र बोस, क्रांति से आज़ादी के प्रणेता,
आज़ादी हमें दिलाई, बन अनुकरणीय नेता,
होश उड़ाए अंग्रेज़ों के, विदा सल्तनत अंग्रेज़ी,
जन्मदिन दिन पर नमन करें, अमर रहें  नेताजी.
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दिसंबर 25 - क्रिसमस 

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जीवन में छाया रहा, हर दिन नव उल्लास,

कहना काफी है नहीं, क्रिसमस का आभास.

मेरी क्रिसमस में मिला, बोध एक अपराध, 

ऊँचा होगा गर्व से, करें सही को याद. 

पढ़ा दिया इतिहास में, पश्चिम गौरव गान,

भुला चुके संसार में, खुद अपनी पहचान. 

याद रखें गोविंद जी, चारों सुत का बलिदान,

मुगलों के आतंक ने, ले ली उनकी जान.

याद करें इतिहास की, भूली बिसरी बात, 

आज उजागर हो गई, आँसू की बरसात. 

मानें ईसा को प्रभू, मानव के अवतार,

सूली पर खुद चढ़ गए, पुनर्जन्म आधार.

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मेरी क्रिसमस कह करें, खुशियों का इजहार, 

सेंटा बन कर बांटते, बच्चों को उपहार. 

सज़ा मिली उपदेश की, हुए यीशु महान, 

पाईं नाना यातना, बने ईश भगवान. 

फाँसी पर लटका दिया, एक बना कर क्राॅस, 

जीत सत्य की हो सदा, बना रहे विश्वास. 

क्रिसमस पेड़ सजाइए, मन में भर उल्लास, 

दिन-दिन दिन बढ़ जाएगा, सारे जग की आस. 

चोगा लाल पहन खड़ी, संता की औलाद, 

भेंट, उपहार बांटती, क्रिसमस की फरियाद.

शीत काल की हिम जमी, होती लंबी रात, 

ठिठुरे किसान खेत में, किससे करता बात.

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दिसम्बर 3- डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद जयंती

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देश के प्रथम राष्ट्रपति, भारत रत्न, कायस्थ कुल 

राजेन्द्र के नाम से, जाने सकल जहान, 

उनको भारत रत्न का, मिला बड़ा सम्मान.

सन चौरासी का रहा, तीन दिसंबर पूत, 

जीरादेई में हुए, आज़ादी के दूत. 

सबके दिल में घर बना, किया देश से प्यार, 

की आज़ादी के लिए, अपनी जान निसार. 

सभी विषय में योग्यता, रहा बराबर ज्ञान,  

चौदह भाषा बोल सकें, लिख पढ़ सकें महान. 

पढ़ी वकालत आपने, करें देश की बात, 

वापस आए देश में, कटे गुलामी रात. 

नाम रखा कायस्थ का, ऊँचा था स्थान, 

चित्रगुप्त भगवान का, करते सब सम्मान.

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अक्तूबर 31 - सरदार पटेल का जन्मदिन - ऐकता दिवस

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आज़ादी के बाद से, नेता बने प्रधान, 

एक लक्ष्य था सामने, भारत नव-निर्मान.

सारे नेता एकजुट, चाहें भारत नेक, 

शासन की हों नीतियाँ, मिल कर कहते एक. 

वल्लभ भाई की अदा, जुड़ता भारत साथ, 

नाम हुआ सरदार का, जिनका काफी हाथ. 

याद उन्हें हम कर रहे, बना एक मीनार, 

केवड़िया विकसित हुआ, पिकनिक का आधार.

उनकी बातें मानते, करके उनका मान, 

कड़कदार आवाज़ से, खींचा सबका ध्यान. 

रियासतें छोटी कई, मिल कर हुई विलीन, 

उनके हित में ही रहा, बने विकास मशीन.

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अक्तूबर इकतीस को, जनमे थे सरदार, 

लौह पुरुष के नाम से, जाने है संसार. 

एका भारत में करी, आजादी का प्यार, 

मिल जुल कर सब रहें, है अपना अधिकार. 

कड़क सियासत से किया, पूरा भारत एक, 

पलक झपकते मिल गए, छोटे राज्य अनेक.

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अक्तूबर 2 - गाँधी जयंती व शास्त्री जयंती 
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दो अक्तूबर को हुए, पैदा दो जन खास, 

लाल बहादुर एक थे, दूजे मोहन दास. 

सरल हृदय, ईमान की, दोनों रहे मिसाल, 

दृढ़ निश्चय उनका बना, दोनों करें कमाल. 

दोनों की हत्या हुई, कारण रहे अनेक, 

काम देश हित में किया, बना रहा विवेक. 

किया नहीं अपने लिए, कुछ भी ऐसा काम, 

लगे नहीं आरोप कुछ, काम बिना आराम.

लाल बहादुर को मिला, ऊँचा भारत मान, 

गांधी मोहन दास को, बापू का सम्मान.

रहे समर्थक पाक के, बापू थे अभिमान, 

दूजे ने विश्वास से, रख ली भारत आन.

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सत्य, अहिंसा, प्रेम से, जग में ऊँचा नाम,
लानत की सौगात दी, विदेश करें सलाम.

पढ़े वकालत चाव से, भूल गए परिवे7श,
साथ नेहरू का मिला, छोड़ा अपना देश.

जिन्ना के आगे झुके, मानी उसकी बात,
देश विभाजन कर दिया, दे पटेल को मात.

इक तरफा बातें करीं, मुस्लिम से प्रिय बोल,
हिंदू से नफरत करी, सब खुल जाती पोल.

हो जनहित के नाम पर, भेद-भाव व्यवहार,
गले लगा मुस्लिम चुने, शेष पीठ पर वार.

भारत बोला चाव से, होंगे हम आज़ाद.
खून खराबा बहुत हुआ, आजादी के बाद.
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लाल बहादुर नाम से, जगता श्रद्धा भाव,
नमन करें युगपुरुष को, डाले गजब प्रभाव.

लोहा माने सब जगत, सबको देते प्यार,
छल फरेब से दूर रह, करते गहन विचार.

छोटा सा शरीर दिखे, तेजोमय संसार,
कायस्थों के ताज थे, निर्णय शक्ति अपार.

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सितम्बर का चौथा रविवार - बेटी दिवस

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बेटी से संसार है, बेटी घर की शान, 

रखती वह ससुराल में, दोनों कुल का मान.

पढ़ लिख कर बेटी बनी, शिक्षा से संपन्न, 

नहीं मिले संस्कार तो, जीवन रहे विपन्न. 

लगे कमी हर चीज़ की, यदि बेटी को संताप,

बेटी रहे प्रसन्न यदि, कट जाएं सब पाप.

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अगस्त 6/9 - परमाणु परीक्षण 
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वैर विदेशों में बढ़ा, हुआ बुद्धि का नाश, 
पूरा बदला ले लिया, झोंक काल के पाश. 
अमरीका जापान पर, करता बम बरसात, 
विश्व युद्ध चालू हुआ, हालत थी आपात.
तिथि नौ अगस्त की रही, मचा शोर विकराल, 
लपट उठी विस्फोट से, लोग लपेटे काल. 
नाभिकीय विस्फोट से, आहत था जापान, 
देश सभी भयभीत थे, मानो निकली जान.
नाश नहीं ऊर्जा करे, हो सार्थक उपयोग, 
सभी देश मिल कर कहें, फ़ौरन रोको रोग. 
नाभिकीय ऊर्जा करे, सकल जगत कल्यान, 
सार्थक प्रयोग कर सकें, शांतिपूर्ण अभियान.
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अमेरिका सी शक्ति में, था विनाश का खोट,
हिरोशिमा में कर दिया, नाभिकीय विस्फोट. 
खोज नई संभव हुई, अणु का आविष्कार, 
मिलती ऊर्जा अपरिमित, विनाश का भंडार. 
मिला जोड़ कर अधिक अणु, कर न्यूट्रॉन प्रहार, 
संरचना गड़बड़ हुई, नया तत्व तैयार. 
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अगस्त का पहला रविवार - मित्रता दिवस

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मतलब के अनेक रहे, लेते दिल को जीत,
मुश्किल से हमको मिलें, असली सच्चे मीत.

बात मीत की मानिए, करो नहीं संदेह,
सपने में हित सोचता, रखे सदा ही नेह.

सही बात कहता सदा, देता नेक सलाह,
अहित कभी भी हो नहीं, रहती उसकी चाह.
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अंतस में हूक है, पर बुद्धि रही चकराय,
विश्लेषण के तर्क में, प्रेम भाव मरि जाय,
प्रेम भाव मरि जाय, संशय के बादल छाँटो,
अल्प जीवन काल में, सबसे मिल खुशियाँ बाँटो,
न छल, दिखावा कर, दिल से मनाओ मित्रता दिवस,
रखो न म्लान मन, शुद्ध रखो अपना अंतस.

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मित्रता दिवस पर मिल रहे, शुभकामना संदेश,
दिल से दुआएँ दे रहे, चाहे रहें विदेश,
चाहे रहें विदेश, स्मृतियाँ मधुर सजाते,
सामने गाली भले निकालें, पर मन से हरषाते,
हम भी करते प्रयास, बनाएँ निश्छल भद्रता,
बनी रहे हमारी, अमर, अनुपम अटूट मित्रता.
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जुलाई 11 - विश्व जनसंख्या दिवस

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आबादी हद से बढ़ी, बिगड़ गया आचार, 

आपस में दुश्मन हुए, करने को विस्तार. 

आबादी बढ़ती दिखी, क्या इसका उपचार, 

संसाधन कम हो रहे, त्रस्त हुआ संसार. 

मानवता भी चाहिए, जब हो सृष्टि विकास, 

शिक्षा, स्वास्थ्य, विचार से, होती जीवन आस. 

कोरोना ने कह दिया, सोचें आप ज़रूर,

साफ सफाई कर रखें, बीमारी को दूर. 

जनसंख्या का संतुलन, रही आज दरकार,

उसके बिना विकास की, हुई बात बेकार.

बढ़े आय अनुपात से, हो विकास आधार, 

भोजन, वस्त्र, मकान हों, हर जन का अधिकार. 

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जुलाई 1 - चिकित्सक दिवस

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सेवा में हरदम लगे, खतरे में रख जान, 

आभारी हम हों सदा, उनका कर सम्मान.

नमन वैद्य को कीजिए, देता सही सलाह, 

पीड़ा का वर्णन सुने, कैसे हरे कराह. 

पीड़ा-हर्ता का करें, नहीं कभी अपमान, 

उससे हाल कहें सभी, शुभेच्छु खुद का जान. 

मूल मंत्र सेवा रहे, पद्धति कुछ अपनाय, 

गोली, सीरप या सुई, लाभ खूब हो जाय. 

एक चिकित्सक रोज ही, देखे कई मरीज, 

रही अलग सबकी व्यथा, लगते सभी अजीज.  

कोरोना से बढ़ गया, उनका कुछ कर्तव्य, 

अपने अपने ढंग से, साध रहे मंतव्य. 

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जून का तीसरा रविवार - पितृ दिवस

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समय-समय पर पिता ने, दे कर हमको ज्ञान, 
अपनी अनुपम सीख में, दिला दिए वरदान. 
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जीवन में सबको मिले, दया, कृपा, आशीष, 
सर पर हाथ पिता रखे, नहीं चाह फिर ईश. 
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अपने जीवन काल में, रखें पिता का मान, 
उनकी सेवा जो करे, उसकी बढ़ती शान. 
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याद पिता की आने से, घूम गया दिमाग, 
कितने अरमान सजे, अच्छा बने कुल चिराग,
अच्छा बने कुल चिराग, करे अरमान कुरबान,
संतति के सुख कारने, किए अनंत बलिदान, 
तृप्त रहे वह आत्मा, करते यह फरियाद,
सजल नयन से नमन करें, जब भी आवें याद.
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पिता शब्द के मूल में, निहित निःस्वार्थ प्यार,
हित अपना त्याग कर, सुत कल्याण ही विचार, 
सुत कल्याण ही विचार, अपनी रुचि की नहीं बिसात,
अपने सुख तज दिए, भूल गए औकात,
दिल से भले की आशीष, सदा ही देता,
नमन नित करते रहो, सुखी रखे पिता.
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पितृ -  दिवस की लालसा, भरती प्यार, विश्वास,
सर्वस्व न्योछावर बाल पर, जब तक रहती साँस,
जब तक रहती साँस, बाल गुण उजागर करते,
भीतर चाहें रहें कुपित, बाहर अवगुण ढकते,
वात्सल्य पिता का, है जग जाहिर सबरस, 
रख कर उन का मान, मनाएँ पितृ – दिवस.

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जून 5 - पृथ्वी दिवस

वृक्षारोपण कर , करो , धरती माँ का श्रंगार ,
हरित धरा पर श्वास ले , मानवता का अधिकार .

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मई - 24 - भ्रातृ दिवस

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भाई-भाई मिल गए, बने श्याम बलराम, 

भाई-भाई अलग जब, रावण मारा राम. 

भाई तो प्यारा अमर, सुख-दुख लेता बाँट, 

कहीं बढ़ी तकरार गर, जग में लगती वाट. 

नाद भ्रात का जब सुना, दिल भरता हुंकार,  

फिकर नहीं भाई करो, करता हूँ उपचार.  

भाई की एका रही, कटते सारे रोग,

प्रेम परस्पर देख कर, जलें जगत के लोग.

भाई को दादा कहें, महाराष्ट्र की रीत, 

दादा भाई है बड़ा, होता यही प्रतीत. 

भ्रात दिवस पर कामना, करते सदा दिनेश, 

मिल कर आपस में रहें, देते यह संदेश. 

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मई 18 - विश्व संग्रहालय दिवस 

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मान पुराने का करें, दिन-दिन बढ़ता मोल, 

कीमत कम आँके नहीं, चीज़ बड़ी अनमोल. 

कोशिश से संग्रह करो, धरो धरोहर मान,

रही अमानत भूत की, देखे सभी जहान.

पुरातत्व विवरण कहे, गौरवमय इतिहास, 

गर्व सदा उन पर करो, नहीं कभी उपहास. 

रखो सामने तथ्य को, नई जगेगी आस,

हालत दुखदायी हुई, किया नहीं विश्वास.

लगा नुमाइश गैलरी, ढूँढिए कदर दान,

ग्राहक से तारीफ़ सुन, मिल जाता वरदान. 

संग्रहालय निधि देश की, करें सुरक्षित आज, 

काम हमारी बुद्धि का, करता गर्व समाज.

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मई 17 - विश्व दूरसंचार दिवस 

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साधन बातों का रहा, अपना टेलीफोन, 

काॅल लगाने पर कहे, बोल रहा है कौन. 

उनकी दिल से याद हो, मन के जुड़ते तार,

बिना कहे ही कह सकें, कितना तुम से प्यार. 

प्रगति आज इतनी करे, तकनीकी संसार, 

बातें घर बैठे करें, दूर देश के पार. 

अपने बच्चों से मिलें, जो बस गए विदेश, 

फोटो देखें लें मजा, मन का मिटता क्लेश. 

उन्नति संभव हो सकी, कमाल विज्ञान जान, 

अंतरिक्ष के हाल भी, जान सकें विद्वान. 

वेव रेडियो की करें, सफल दूर संचार, 

दृश्य, श्रव्य संकेत से, बने चित्र साकार. 

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मई 15 - विश्व परिवार दिवस 

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दिवस विश्व परिवार पर, देते हम संदेश, 

वैर भाव को भूल कर, रहे सुखी यह देश.

सुन लें पहले राय को, बाद करें कुछ काम, 

मान बढ़े परिवार का, ऊँचा होता नाम. 

मुखिया मानें बडो़ को, पा अनुभव का ज्ञान, 

उन का ही कहना सुनें, मिलता ठीक निदान.

छोटे टुकड़ों में बँटे, एकाकी परिवार, 

अपनी रोटी खा रहे, नहीं पड़ोस विचार. 

देखे हम ने साथ में, जुड़े हुए परिवार, 

मिलते हैं अब आजकल, अपने ही आधार. 

मान बड़ों का हो जहाँ, पाते छोटे प्यार, 

मिल बैठें छोटे बड़े, बन जाता परिवार.

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विश्व नर्स दिवस - 12 मई

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आज दिवस पर हम करें, नर्सों का सम्मान, 

रार नहीं उनसे कभी, अस्पताल में जान.

सिस्टर बन सेवा करें, लगती देवी रूप, 

मूर्ति त्याग की दिख रही, निश्छल रूप अनूप. 

आज उन्हें वह दीजिए, जिसकी वह हकदार, 

बड़ी नम्रता से मानिए, उनका यह आभार. 

जब वह सेवारत रहें, घर को जातीं भूल,

रोगी का उपचार हो, क्यों कर मिटता शूल. 

श्वेत वसन धारण किए, लगती हैं अवतार, 

सुई, दवा कर में लिए, दुख की तारणहार.

देख-भाल में निपुण वह, हरदम हैं तैयार, 

सेवा निष्ठा भाव से, करतीं वह उपकार

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मई का दूसरा रविवार - मातृ - दिवस

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मात पूज्य होती सदा, रहे हमें यह ख्याल, 

देती वह आशीश ही, बेटा करे बवाल. 

ममता माता की रही, सदा सर्वदा पाक, 

उसमें कोई शक नहीं, कहे बात बेबाक. 

कभी बुरा चाहे नहीं, कहे भले की बात, 

बच्चों की खातिर सहे, कितने ही आघात. 

मातृ-दिवस पर कीजिए, माता का सम्मान, 

अपनी हो या गैर की, करें नहीं अपमान. 

अपने भारत देश में, पूजें माँ को रोज, 

सेवा से मोहित करें, छू कर चरण सरोज.

रीति विदेशों की रही, करें नकल हम लाल, 

हाल मात के पूछते, एक बार हर साल.

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शास्त्र हमारे कह रहे, सबको दो सम्मान, 
देवों से ऊँचा रहा, मेरी माँ का स्थान.

माँ की ममता से बड़ा, कोई नहीं विज्ञान, 
बिना कहे वह जान ले, बालक के अरमान.

सपने में भी ना करें, माता का अपमान,
अपनी हो या गैर की, करो सदा सम्मान.

माँ का दिल न दुखे कभी, इसका रख लो ध्यान, 
त्याग किया आराम का, कभी नहीं आसान.

कष्ट मिटाने के लिए, रच दी माँ भगवान, 
उसके दुख कैसे हरें, हम सबका अभियान.

सेवा माँ की जो करे, मिल जाता वरदान, 
वरना कर्मों की सजा, भुगतेगा इंसान. 
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माँ मन्नत माँग रही, बने महान मेरी संतान, 
करे नाम रौशन, करे जगत कल्यान, 
करे जगत कल्यान, रहे न कोई विषाद, 
चूम शिखर सफलता के, चखे जीत का स्वाद,
धूम मचा दे, रंग जमा दे, बाँधे अनुपम समाँ,
रहे सलामत, देती दुआ, सबकी प्यारी माँ.
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बच्चा बिगड़ा बाप से, माँ  ने लिया सँभाल ,
ममता सारी मात की, दूजी नहीं मिसाल , 
दूजी नहीं मिसाल, पीड़ा से व्याकुल हो जाए,
खिला के अपने बाल को ,खुद भूखी सो जाए,
नि:स्वार्थ प्रेम में रत रहे , त्याग है उस का सच्चा ,
कुछ भी चाहे हो जाए, रहता प्यारा माँ का बच्चा.

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मई 1 - महाराष्ट्र दिवस 

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एक मई को मानते, दुनिया के मजदूर, 

मिला दिवस अवकाश का, घर पर रहो जरूर. 

सारे मजूर मिल गए, छुट्टी की हो चाह,

नियत समय हो काम का, मालिक की परवाह. 

निर्धारित शर्तें रहें, काम नियम अनुसार, 

मान मिले मजदूर को, हो पूरा अधिकार. 

पुनर्गठित इस दिन हुआ, अनुपम एक प्रदेश, 

महाराष्ट्र के नाम से, जाने सारा देश. 

अमर हुआ इतिहास में, वीर मराठा नाम,

गौरव गाथा कह रहे, गुरू शिवा के राम. 

तिलक, गोखले ने किया, जनता पर उपकार, नारा सुना स्वराज है, मूलभूत अधिकार. 

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महाराष्ट्र में मन रहा, स्थापना दिवस है आज,
समर्पण के लिए बनाए गए , ऊँचे-ऊँचे काज,
ऊँचे-ऊँचे काज, परियोजनाओं की सूची ज़ारी,
होंगी कब तक पूरी, जानें केवल नेता और अधिकारी,
ठेकेदार भी मिल कर खाते, जानता पूरा राष्ट्र,
नहीं अछूता रहा कभी, मेरा प्यारा महाराष्ट्र.

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अप्रैल 14 - अंबेडकर जयंती 

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भीम नाम से जाग रहे, कुछ विचित्र विचार,
संघर्षों से संवर्धित हुए, सामाजिक अतुल संस्कार,
सामाजिक अतुल संस्कार, अज्ञान की कटी निशा,
समता, प्रेम, कानून में, नवाचरण को मिली दिशा,
तर्क, विधि, न्याय संग, दिया प्यार असीम,
सुनहरे भाग्य भविष्य के, प्रेम से बोलो जय भीम.
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सपूत राष्ट्र के रहे , रच भारत का संविधान ,
अस्पृश्यता मिटाने का रहा , सदा एक ही ध्यान ,
सदा एक ही ध्यान , पढ़ाई अद्भुत कर जावें ,
जातिवाद हटा कर , ' मूक नायक ' बौद्ध धर्म अपनावें ,
सतत प्रयत्न करते रहे , शेष न हो कोई अछूत ,
सादर नमन , विनय करें हम , भारत रत्न भीम सपूत.

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पर्यावरण दिवस

विकास विनाश से हुआ, जागी नूतन आस,
‘ अच्छे दिन ‘ आएँगे , हुआ  पूर्ण विश्वास,
हुआ पूर्ण विश्वास, पर्यावरण सुधारो,
भ्रष्टाचार मिटा कर, माँ, गंगा को तारो ,
अपराध हों समाप्त, लेंगे राहत की साँस,
प्रदूषण में हो कमी, रुके विनाश का विकास .

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मानसून

मानसून दस्तक दे रहा, आज मुंबई के द्वार,
बड़ी प्रतीक्षा से खुला, मन है मुदित अपार,
मन है मुदित अपार, हरियाली की खुशियाँ लाए,
करे किसान सम्पन्न, नव उल्लास जगाए,
ऊर्जा से ओत - प्रोत रहे, तरु, पल्लव, प्रसून,
सब  को स्वास्थ्य, शाँति दे, इस वर्ष मानसून.

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मार्च - 8 - अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस 

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भारत में नारी रही, सदा शक्ति अवतार, 

जीवन में ऊर्जा भरी, रहा बहुत उपकार. 

सृजन सृष्टि का कर दिया, मिला नया आधार, 

प्राण दान दे कर किया, जीवन का संचार. 

नारी में गर दिख सके, माँ, बेटी के रूप, 

प्रेम भाव भी बढ़ सके, श्रद्धा के अनुरूप.

आठ मार्च को सोचते, नारी के अधिकार, 

सभी नमन उसको करें, दिल से हो आभार.  

नारी की पूजा रही, गौरवमय इतिहास, 

दुनिया भर में चाहते, महिलाओं का विकास.

संविधान ने दे दिया, समानता अधिकार,  

भारत में फिर भी दिखें, महिला अत्याचार.

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जगत मनाता गर्व से, नारी को दे मान,

रहे बराबर हर जगह, बनती सबकी शान. 

निर्मल नारी मन सदा, प्रेम करे भरपूर, 

वह भी चाहे सरलता, द्वेष भाव से दूर. 

अब तक वह पूजी गई, माँ, बेटी के रूप, 

गौरवमय इतिहास था, जैसे खिलती धूप.

आठ को मानते, नारी दिवस अनूप,  

भाषण, कविता लिख, पढ़ें, नारी मन अनुरूप.

नारी आगे आ रही, कर हर क्षेत्र विकास, 

खोज नई संभावना, मन में रख विश्वास. 

नारी आधी सृष्टि है, हो समान अनुपात, 

क्यों हो हत्या भ्रूण की, सहती क्यों आघात. 

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नारी प्यारी, सदा सब की,
हम सब उसके आभारी हैं,
बचपन संग पिता के बीते,
गूँजत वा की किलकारी है,
खेलत है जब भाई के साथ,
महकाती घर की फुलवारी है,
झगड़ा जब भी भाई मचावे,
रोदन उसका सिसकारी है,
ज़िद पे उतर कर वह आए,
भूचाल मचावन हारी है,
पाठ पढ़े शाला में जब,
प्रतिभा उसकी होनहारी है,
यौवन में रखे कदम जब,
उसका श्रंगार मनोहारी है,
प्रणय निवेदन करे जब,
तन मन से बलिहारी है,
पति संग वास करै जब ही,
तीन लोक से न्यारी है,
बाल को गोद खिलाए सदा,
सबसे अद्भुत महतारी है,
शिक्षा दे जग व्यवहार की,
सबसे बड़ी सदाचारी है,
नौकरी करै नर संग जब,
धाक जमावनहारी है,
देख पड़ोसन को जल जाए,
शाश्वत तुलनाहारी है,
पति को कष्ट में देखत ही,
ममता मरहम से पीड़ाहारी है,
पर नार के साथ लखै पति को,
बन जाय शेर की सवारी है,
ध्यान रखे हर गति पर पति की,
सदा सजग प्रतिहारी है,
दादी नानी बनै जब ही,
पुलकित मन बलिहारी है,
जरावस्था की शैय्या पर,
कहलाती वह बेचारी है,
न समझो उसे कम किसी से,
अपने ढंग में, सब पर भारी है.

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर,
समर्पित सभी को कृति हमारी है.
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मातृ शक्ति ने दिए , जीवन के आधार .
कृपा उसकी रही , हम पर बारंबार .
ऋण तो असीम रहे , कैसे चुके उधार .
क्या क्या याद करें , नारी के उपकार .
मातृ शक्ति ने दिए , जीवन के आधार .
माँ , बहन , बीबी , बेटी बन लुटाए प्यार .
हम कृतध्न बन , फिर भी करते अत्याचार .
सब मिल कर नमन करें , एक यही उपचार .
मातृ शक्ति ने दिए , जीवन के आधार .
महिला दिवस पर करें , आज सभी विचार .
याद करें महिलाओं के , अनेकनेक उपकार दिल से नमन करें , महिलाएँ हैं अवतार .
मातृ शक्ति ने दिए , जीवन के आधार .

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वेलेंटाइन दिवस - 14 फरवरी 

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नकल पश्चिमी देश की, करते भारत लोग, 

वेलेंटाइन का लगा, सकल देश में रोग.

सकल देश में रोग, रोज़, प्रस्ताव, चाकलेट,

टेडी, वचन, जकड़न, चुंबन, महिला की ऐंठ,

प्रेम दिवस नाम पर, भूल गए अपनी असल, 

अधिक भाव व्यक्त कर, अपनाएं क्यों हम नकल.

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रिश्ते नए बना रहे, आजकल नौजवान,

अब तक जो माने गए, भूल गया इन्सान.

नकल दिखावे की करें, भूल चुके इतिहास,

फँस कर द्विविधा फेर में, बन जाते उपहास.

बढ़ा रहे हर साल हम, प्रेम दिवस का मान,

याद हमें आता नहीं, पुलवामा बलिदान.

याद हमें आता नहीं, लिए गए क्यों प्राण,

राजगुरू, शेखर, भगत, हँस कर दे दी जान. 

कहा देश द्रोही उन्हें, जो होते कुरबान, 

नहीं किसी ने याचना, ना ही जीवन दान. 

प्रणय निवेदन पूर्व ही, एक जलाएं दीप, 

अमर याद उनकी रहे, दिल के रहें समीप.

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प्रणय पर्व के रूप में, मना रहे त्योहार, 

प्रकट भाव मन के करें, ले दे कर उपहार. 

युवा वर्ग की सोच बनी, कहो किसी को मीत,

भारत में मनती नहीं, नई नई यह रीत.

अपने मतलब के लिए, दे देते उपहार, 

लड़का लड़की जब मिलें, करें प्रेम इजहार.

सात दिनों का पर्व यह, वैलेंटाइन नाम, 

भारत में चलता सदा, प्रेम पर्व अविराम. 

आकर्षण भौतिक हुआ, नहीं प्रेम का भाव, 

आलिंगन, चुंबन चुने, अलग दिवस प्रस्ताव.

शारीरिक संबंध की, लगे जुगत कुछ बात, 

देते फूल गुलाब का, बता प्यार सौगात.

चाकलेट की माँग है, आई पश्चिम रीत, 

देना लेना जगत में, बढ़ा सका क्या प्रीत. 

बने बहाना किसी का, कितना कोमल केक, 

प्यार जताने को मिले, खोजो रीत अनेक.

टैडी तो संकेत है, परिणिति होगी प्यार, 

अकलमंद को चाहिए, धरे समझ की धार.

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प्रणय दिवस पर बहकते, बुड्ढे और जवान, 

अपनी रौ में दे रहे, वचनों के प्रतिदान. 

परंपरा इस की नहीं, भारत के अनुकूल,

करना औरों की नकल, होगी भारी भूल. 

अपनी पत्नी से करें, रोज प्रेम इजहार, 

जीवन भर वह खुश रहे, जान लुटा कर प्यार. 

प्रणय पर्व पर बिक रहे, नए नए उपहार, 

प्रिय की आतुर लालसा, ढूँढ रही बाजार. 

कोई कुछ भी भेंट दे, ले लो मेरे यार, 

बना पर्व कुछ खास है, कर लेना स्वीकार. 

देने वाले को हुआ, दाता का अभिमान,

धन दौलत की भेंट कर, मिल जाता सम्मान.

मस्ती मन में छा गई, वसंत ऋतु के साथ,

बदन भरा उल्लास से, प्रिय का पाकर हाथ. 

देने में उपहार के, नहीं उमर का ख्याल,

मिलता जो कुछ आप को, रखो उसे संभाल. 

प्रणय निवेदन कर रहे, शादीशुदा जवान, 

ऐसी मस्ती छा गई, भूले खुद पहचान. 

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