Thursday, 31 March 2016

राजभाषा समीक्षा बैठक


                         



- :राजभाषा कार्यशाला: -
 

राजभाषा अभियान, चलायें डॉ. बालयान.
इस का एक पायदान, कार्यशाला का आव्हान,

दूर करें व्यवधान, नामित हों अपादान,
रहे सदा यह भान, बने सफ़ल अनुष्ठान.

वत्स साहब ने प्रेरणा दीन्हीं, पीटर मैडम ने आहुति दीन्हीं.
दून भाव से सुन्दर आये, प्यारी नेमत तौक़ीर लाये.
मिश्रा जी ने जोत जलाई, इला मैडम ने अलख़ जगाई.

भर भर पेट ज्ञान पचाया, अलका जी ने खाना खिलवाया.
कार्यशाला में विशेषज्ञ बुलवाये, आते ही तम हर पाये.

पांडे जी व सेठी जी ने भाषण दीन्हें, मंत्र-मुग्ध सब कर दीन्हें.
मृगेश जी ने इतिहास रचाया, कुमुद श्री ने अनुवाद कराया.

शर्मा जी ने टिप्पणी बताई, केवल जी ने पुस्तक खुलवाई.

इसमें सत्रह श्रद्धालु बुलाये, पूरे उत्साह से सब आये.
विभिन्न कार्यालयों के अनुभव बतलाये, एक नई ऊर्जा पाये.

पाँच दिवस में मैत्री कीन्हीं, कार्यालय की सुध बिसरीन्हीं.

नित नव सेतु बंधाए, ज्ञान असीम परम सुख पाये.
ई. एंड टी. ने छाप छोड़ी, तकनीकी आगमन की गाड़ी मोड़ी.

रमन नाथ लैप टॉप ले आये, अनूप ने अपने करतब दिखलाये.
यज्ञ में भगवान पधारे, विकास के मार्ग खुल गये सारे.

होम की लौ अनिल लगायी, देवांगन ने पंडाल सजायी.
ईश्वर और सर्वेश्वर भी आये, देवेन्दर ने सब गुण गाये.

वीर बहादुर ने जौहर दिखलाये, सबने अपने अनुभव बतलाये.
दो-दो दिनेश प्रतिहारी, सँगीता और प्रमिला की बलिहारी.

इस के बाद दायित्व है ज़ारी, धारा 3(3) का अनुपालन भारी.
केवल जी से आशिष पाई, जन्म - मरण से मुक्ति पाई.

बार - बार फ़ॉंट बदलने की बीमारी, ठीक कर दी जड़ ही सारी.

पुराने सॉफ़्ट वेयर, फ़ॉंट हटवाये, नई उपयोगी चीज़ें ले आये.
bhashaindia’ की साइट बतलाई, डाउनलोड की विधि समझाई.  

INDIC IME का महत्व बताया, वर्ज़न 5.1 लोड कराया.

’यूनीकोड’ से शक्ति पाओ, अभिव्यक्ति की क्षमता लाओ.

’मंगल’ सब कम्प्यूटर पर लाओ, राजभाषा का प्रयोग बढ़ाओ.
आई. टी. में खोला गेट-वे, हिन्दी का रचा हाइ-वे.

सारे दिन मिश्रा जी छाये, प्रश्नावली का गणित बिठाये.
सँसद का दायित्व निभायें, कैसे उन्हें संतुष्ट कर पायें.

कार्यालय के गुर बतलाये, राजभाषा के नियम समझाये.
एक अस्त्र साथ में लाये, सभी प्रतिभागी समर्थ बनाये.

बिन की-बोर्ड के टाइप कर लीजै, सारी ख़ामियाँ दूर कर लीजै.
सत चित से ध्यान लगाओ, मन के तमस को दूर भगाओ.

दस सत्रों में ज्ञान पाया, अपना फ़िर विश्वास बढ़ाया.
गौरव से माथा चमकाया, एक नया जोश हम में आया.

नई ऊर्जा से सँकल्प जगायें, अपने क्षेत्रों में निपुणता लायें.
अब कर्तव्य हमारा होगा, राजभाषा का अनुपालन होगा.

साथ में अन्य भाषायें भी आयें, उनकी भी जानकारी पायें.
सभी जगह विविधता लायें, हिन्दी को दिल से अपनायें.

सार्थक हो कार्यशाला, बढ़े आपसी व्यवहार.
आओ हिन्दी में करें, ई-मेल से पत्राचार. 
 


   12 वीं समीक्षा बैठक, जोधपुर 
 

आप के स्वागत की उत्कंठा, बालयान साहब के दर्शन की अभिलाषा,

ले आई हम को आज, जोधपुर, करने समीक्षा बैठक की परिभाषा.

स्वागत करके, आप सभी का, कारैक्काल के करतब बतलाएँ,

हर्षित, चकित, विस्मित मन से,गौरव गाथाएँ गाएँ.

तीन माह में बैठक कर पाए,
अनुमोदन से सब हर्षाए

हर माह कार्यक्रम कर पाए, 
नई ऊर्जा सब में भर पाए,

उन पर फिर अमल कर पाए, 
अपने- अपने रंग जमाए,

नराकास स्थापित कर पाए,
कावेरी का मान बढ़ाए,

छब्बीस संस्थाएँ साथ में लाए,
नव चेतना सब में जगाएँ,

कंप्यूटर पर कार्य कराएँ,
यूनीकोड के फ़ॉण्ट लगाए,

हिन्दी में टाइप करवाएँ, 
वरिष्ठ जनों से आशिष पाएँ, 

इन्स्टालेशनरिगपर जाएँ,
अच्छी हिन्दी उन्हें बताएँ,

बोलना, पढ़ना- लिखना बताएँ,
भाषा ज्ञान में समर्थ बनाएँ, 

स्थानीय लोगों का मान बढ़ाएँ,
राजभाषा समिति से उन्हें  जुड़ाएँ,

संयुक्त अन्ताक्षरी करवाएँ,
अपनापन और प्रेम बढ़ाएँ,

परिवार जनों के कार्यक्रम रचाएँ,
सोल्लास सब लाभ उठाएँ,

बाहर से निर्णायक बुलवाएँ, 
शंका, पक्षपात को दूर भगाएँ,

राजभाषा पखवाड़ा मनवाएँ,
सब को उसमें शामिल करवाएँ,

विभिन्न कार्यक्रम, प्रतियोगिता करवाएँ,
अतिशय प्रतिभाजन पाएँ,

विधिवत्‌ उद्‌घाटन करवाएँ,
श्रुत लेखन’, पत्र’, निबंध लिखवाएँ,

ई-मेल’, प्रस्तुतीकरण से सृजन बढ़ाएँ, 
चुट्कुले’, दमशेरा से सब को हँसाएँ,

अपने भाषण ओजस्वी बनाएँ,
कविता पारायण से संस्कृति बचाएँ,

समाचार वाचन से नव जागृति लाएँ, 
नाटक का प्रयोग कर जाएँ,

अच्छे पुरस्कार सक्षम पाएँ,
शेष सभी प्रतिभाजन पाएँ,

ऑनलाइन कार्यशाला कर पाए,
बिन शिक्षक ज्ञान बढ़ाए, 

पढ़ना – लिखना स्वयँ कर पाएँ,
बोलने का भी अभ्यास कर पाए,

नेता जी को याद कर पाए, 
तुरत – फुरत आयोजन कर पाए,

ज्ञानवर्धन से श्रद्धांजलि दे आए,
पिकनिक में आनंद उठाए,

वार्तालाप फ़ील्ड में कर आए, 
नए – नए आयोजन करवाए,

शीर्ष प्रबंधन में विश्वास जगाए, 
नई संचेतना उनमें लाए, 

प्रगति आख्या’, प्रश्नावली’,
एक्सेल शीट में जमाए,

रहें सही आँकड़े,
 कुछ घटा – जोड़ न पाएँ,  

रहे सूचना उपलब्ध समय से,
निरीक्षण समिति खुश हो जाए,

नए वर्ष की योजना बनाएँ,
नित नव प्रयोग कर पाएँ,

ई-मेल से पत्राचार कराएँ, 
संगी – साथी लाभ उठाएँ,

राजभाषा में तकनीकी प्रस्तुति दे आएँ, 
विस्मय से सबको हर्षाएँ,

मदुरै में शीर्ष बैठक करवाएँ,
निदेशक से प्रोत्साहन पाएँ,

इंट्रानेट पर स्वागत लगवाएँ, 
फिर उसमें पॉप – अप डलवाएँ,

आज का शब्द नव नित रचवाएँ,
 क्रियाशीलता सब में लाएँ,

आव्हान’, अनुरोध’, आकलन का मंत्र बताएँ, 
दिन के साथ बदलते जाएँ,

एस.एम.एस. से सूचना पहुँचाएँ,
ई-पार में स्थान दिलवाएँ, 

प्रतिक्रिया, टिप्पणी लिखवाएँ, 
हिन्दी में ई-मेल कराएँ,

जन्म-दिन के संदेश बनाएँ,
शुभकामना अपनी पहुँचाएँ,

बच्चों का उत्साह बढ़ाएँ, 
जो हिन्दी में ज़्यादा नंबर पाएँ,

नराकास की दोनों बैठक करवाएँ,
सजग नागरिक उन्हें बनाएँ,

कहानी कथन प्रतियोगिता लाए,
  वाचन से समृद्ध बनाए,

कंप्यूटर पर प्रयोग करवाएँ, 
कुछ लोग कुशल कर आए,

सेमिनार में भाग ले आए, 
कक्षाओं का आयोजन कर पाए,

पॉण्डिचेरि सम्मेलन में हो आए,
इक्यासी हज़ार दान कर आए,

सभी विभागों को दायित्व थमाए,
पूरे जोश से इसे मनाएँ,

प्रोत्साहन योजना में पच्चीस नाम भिजवाए, 
उनमें चार लक्ष्य पूरा कर पाए,

कुछ सुझाव व बाधाएँ लाए, 
विधि व गुणवता पर प्रश्न उठाए,

जन-शक्ति, पुस्तक, प्रशिक्षण की कमी बताएँ, 
अन्य प्राथमिकताएँ आड़े आएँ,

फिर भी उज्ज्वल भविष्य बताएँ,
हिन्दी सीखने की लालसा मन में आए,

सभी मंचों पर नाम कमाएँ,
यदि, संभव कुछ सुझाव हो जाएँ,

कुछ अनसुलझे प्रश्न उठाएँ,
समाधान व निर्देशन पाएँ,

सी.आर.सी. में चित्रण हो पाएँ, 
ई-पार में अँक लगाएँ,

की-अधिकारी एक बनाएँ, 
वर्चुअल बोर्ड में आसन पाएँ,

सैप में भी यूनीकोड लगाएँ, 
पेंट, कोरल ड्रॉ व फ़ोटो शॉप सजाएँ,

राजभाषा में रुचि जगाएँ, 
समुचित उसे सम्मान  दिलाएँ,

इस आशा विश्वास से काम बढ़ाएँ,
स्वप्निल, स्वर्णिम भविष्य बनाएँ,

अगले वर्ष फिर नाम कमाएँ, 
सबसे अच्छी प्रस्तुति कर पाएँ,

दें आशीष हमें सभी, पूरे हों संकल्प,
राजभाषा के विकास में, हे न कोई विकल्प,

अट्ठारह प्रतिनिधियों ने किए, मिलकर एकजुट प्रयास,
तभी सफ़लता के फल मिले, चख सके निराला स्वाद. 

- दिनेश कुमार,
राजभाषा अधिकारी, कारैक्काल.

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