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अपना शतक मना रहा, यह भौतिकी विभाग,
महा सम्मान में लगे, अद्भुत कई दिमाग,
अद्भुत कई दिमाग, गौरवमय है इतिहास,
सब का भविष्य बने, होवे क्रमिक विकास,
करते हैं कामना, सभी देख रहे सपना,
दिनों दिन प्रगति करे, भौतिकी विभाग अपना.
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मिले बधाई आप को, रहा आज दिन खास,
पत्नी जी के साथ में, दे आशीशें सास.
पोस्ट बधाई की पढ़ी, खूब भरा उत्साह,
आभारी दिल से हुए, यार कहेंगे वाह.
बात बधाई की नहीं, फिर भी दे दो यार,
नहीं पता माने बुरा, कर बैठे तकरार.
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सुधा रमेश से, करती अतिशय प्यार,
साठ साल परिणय निभा, बसा लिया संसार,
बसा लिया संसार, कभी ना खोएं आपा,
डूबें प्रेम रस में, लगे नहीं तन बुढ़ापा,
जीतें पति मन सदा, खोले प्रेम की चाभी,
शादी की कामना, खुश रहें भाई, भाभी.
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शुभचिंतक हों आप से, फिर क्या है परवाह,
बरसे वचनों से दुआ, नहीं शेष कुछ चाह,
नहीं शेष कुछ चाह, हमें धन्य बना जाते,
मिला आपका साथ, भाग्य पर हम इतराते,
सभी प्रशंसक बने, ढूँढें दिखे ना निंदक,
कैसे हो आभार, मिले ऐसे शुभचिंतक.
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सबसे आदर पा रहे, साठ्ये बाल गणेश,
पूजा हम करते सदा, मनसः नमन दिनेश.
संस्कृति के रक्षक करें, गर्वित भारत मात,
सुलझ गया जब मामला, होता पुलकित गात.
वाणी से झरती प्रभा, विद्वता देती साथ,
रहे हमारे शीष पर, सदा आपका हाथ.
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दीप दिखाएँ आप को, ऐसी नहीं मिसाल,
अपनी गाथा खुद कहे, सूरज की मजाल.
सभी ग्रुपों में छा गए, सुलझे सभी सवाल,
नहीं शेष कोई रहा, किंचित कहीं बवाल.
समाचार भी पहुँच गए, पोस्टें देते डाल,
ग्रुप बाधा को हर सकें, हल स्वीकार्य निकाल.
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अपने जीवन में सहे, बहुत उतार चढ़ाव,
सी.पी. साहब नाम से, उमड़े आदर भाव.
ऊपर से दिखते कड़क, रखते सबका ध्यान,
अंदर धारा स्नेह की, चाह करें कल्यान.
हँस मिल कर बातें करें, भीतर नहीं दुराव.
आ पहुँचे इस मोड़ पर, नहीं कोई प्रभाव.
पूरा उनका हो शतक, रहे न कहीं मलाल.
सदा चाहते हम यही, बनते एक मिसाल.
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खूब तरक्की कर सकें, घर होवे खुशहाल,
बेटा सुमित नहीं करें, कहीं कोई सवाल.
मौज मनाएं, खुश रहें, रख कर सबका ध्यान.
ईश भजन में मन लगे, मिले प्रसाद महान.
त्याग आपने जो किया, जाने सकल जहान,
दिया मान दायित्व को, घर मंदिर भगवान.
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चाचाश्री के चरणश्री, ढूँढूं बारम्बार,
श्रीचरणों में आपके, लगातार हो प्यार.
आशिश हमको आपसे, मिले सदा भरपूर,
एक बार तो आइए, नहीं मुंबई दूर.
मैं ने माना आपको, उन्नति का आधार,
हम देते शुभकामना, स्वस्थ रहे परिवार.
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सहपाठी के रूप में, मिल गए द्रोण पाल,
आभा उनकी संगिनी, जैसे ज्योति प्रवाल.
आभा की आभा विरल, मोहक मृदु मुस्कान,
द्रोण रीझते सामने, पूरे सब अरमान.
देते हम शुभकामना, रहे सुखी परिवार,
फूलें फलें बाल सहित, खूब लुटाएं प्यार.
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दमानिया जी से मिला, हमको असीम प्यार,
उनके कायल हो गए, देख कार्य विस्तार,
देख कार्य विस्तार, ग्रुप का किया निर्देशन,
दिखा दिया सन्मार्ग, डाल दिया नया जीवन,
हम करते कामना, आगे समय हो बढ़िया,
सदैव हँसमुख रहें, हमारे प्रिय दमानिया.
----- 18 फरवरी -----
ईषा का सिद्धार्थ से, मिलन हुआ है आज,
उनकी शादी से हुआ, हर्षित सभी समाज,
हर्षित सभी समाज, दूर से मीत पधारे,
देते हैं आशीष, आपस में होते प्यारे,
चले गृहस्थी सतत, बढती रहे जिजीविषा,
खुश रहे वह दोनों, सिद्धार्थ संग ईषा.
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प्यारी छोरी अंकित की,
प्यारी गोरी मुग्धा की,
सुंदर नारी नानी की,
चंचल लोरी नानू की.
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अजय रिटायर हो रहे, करने को विश्राम,
बहुत काम कर चले, अब करेंगे आराम,
अब करेंगे आराम, जीवन का आनंद उठाया,
देश विदेश की यात्रा में, पत्नी को साथ घुमाया,
पढ़ा लिखा कर बच्चों को, दिलवा दी विजय,
स्वस्थ, संपन्न रहें, हर क्षेत्र में, प्रीति व अजय.
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मंजु दीदी के जीवन में, आया नया सोपान,
समर्पित शिक्षण से बनी, एक अलग पहचान,
एक अलग पहचान, भाई भाभी का अभिमान,
गृह कार्य में निपुण, संगीत का अमर वरदान,
फैले प्रतिभा, ख्याति, बनें उत्साही व उन्मादी,
रहें स्वस्थ, प्रसन्न सदा, हमारी मंजु दीदी.
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भालचंद्र के गृह ग्रहण करें, भोलेनाथ का प्रसाद,
पति पत्नी सम्मान दें, तज कर सभी विषाद,
तज कर सभी विषाद, प्रेम से करवावें भोजन,
सोमवार उद्यापन में, आमंत्रित सभी स्वजन,
दे शुभकामना, आशीष, पूरी हो हर पसंद,
ईश सदा, सुख, समृद्धि की, वर्षा रखें भालचंद्र.
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पठन पाठन से कर रहे, शिक्षा का प्रचार,
तन मन से समर्पित, करें बच्चों का उद्धार.
हो विकास बुद्धि का, बहुमुखी आयाम,
निरखे जगत उत्पाद को, अपलक अविराम.
शुद्ध भावना शिक्षण की, रहे न कोई दुर्भाव,
हों आशाएँ पूर्ण सब, भावी रहे प्रभाव.
गौरांगी, कृष्णा पर, बना रहे अनुराग,
कण कण सुवासित रहे, ज्यों वासुदेव पराग.
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अपार संभावना बता रहे, परिवर्तन जीवन संग्राम,
नई चुनौतियाँ खोल रहे, जीवन के आयाम,
जीवन के आयाम, संघर्षों का करो सामना,
अनुभव से परिपक्व, हो साकार, मन का हर सपना,
हर दिन मिले शुभकामना, बढ़े सद्भाव व प्यार,
देवें सहृदय आशीष, खुशियाँ पाएँ अपार.
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बहू नवेली पाय के, परिवार करे विचार,
संशय में कुछ सोचते, क्या होंगे संस्कार,
क्या होंगे संस्कार, कैसे करेगी नौकरी,
कैसे पाएगी समय, निभाएगी जिम्मेदारी दोहरी,
दो असीम प्यार, विश्वास, न सुखाओ अपना लहू,
बनाए रखेगी तालमेल, सबकी प्यारी बहू.
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माँ शारदे की कृपा हो अपरम्पार,
फेस बुक से हो नए सँपर्कों का विस्तार,
नव अनुप्रयोगों की हो भरमार ,
बढ़ता रहे हम सब का प्यार.
फेस बुक से हो नए सँपर्कों का विस्तार,
नव अनुप्रयोगों की हो भरमार ,
बढ़ता रहे हम सब का प्यार.
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अंतस में रहें सदा , उर में है विश्वास ,
कठिन समय में दें मदद , ऐसी अपनी आस ,
अनुशासन में बाँध कर , किया सदा विकास ,
जन्म दिवस की शुभकामना , लें श्री चन्द्र प्रकाश .
कठिन समय में दें मदद , ऐसी अपनी आस ,
अनुशासन में बाँध कर , किया सदा विकास ,
जन्म दिवस की शुभकामना , लें श्री चन्द्र प्रकाश .
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शुभेच्छाएँ
जन्मदिन की शुभ कामना , देते परिचित , मित्र ,
व्हाट्सैप पर मिल रहे , संदेश अनेक विचित्र ,
संदेश अनेक विचित्र , लगी अपनों की कतार ,
भाँति भाँति कलरव करें , अपने यार हज़ार ,
प्रीत हमारी बनी रहे , सालों साल , जन्मों जनम ,
खुशियाँ यूँ ही बाँटते रहें , मुबारक हो जन्मदिन .
व्हाट्सैप पर मिल रहे , संदेश अनेक विचित्र ,
संदेश अनेक विचित्र , लगी अपनों की कतार ,
भाँति भाँति कलरव करें , अपने यार हज़ार ,
प्रीत हमारी बनी रहे , सालों साल , जन्मों जनम ,
खुशियाँ यूँ ही बाँटते रहें , मुबारक हो जन्मदिन .
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वर्षगाँठ
वर्षगाँठ एक अवसर है, अपने आप को समझने का,
आत्म चिंतन, अवलोकन का,
अपनी क्षमताओं के विकास का,
विकृतियों को दूर करने का,
वर्षगाँठ एक उत्सव है, अपनी उपलब्धियों को गिनाने का,
पूर्वजों के उपकार का,
गुरुजनों के आशीर्वाद का,
सहयोगियों की शुभकामनाओं का,
वर्षगाँठ एक परिभाषा है, इस अभास की, कि आपके,
अनुभव में एक और वर्ष बढ़ गया है,
दृष्टिकोण और पैना हो गया है,
विचार के आयाम और विस्तृत हुए हैं,
वर्षगाँठ एक बोध है, कि आप और अधिक परिपक्व हुए हैं,
दयालु और उदार हैं,
या, समाज से निराश हैं,
या, शेष आयु का एक और वर्ष कम हो गया है,
इसलिए, वर्षगाँठ पर, कुच्छ ऐसा काम करें, जिससे,
स्वयँ को संतोष हो, ग्लानि का नाश हो,
जीवन के प्रति उत्साह हो .
आत्म चिंतन, अवलोकन का,
अपनी क्षमताओं के विकास का,
विकृतियों को दूर करने का,
वर्षगाँठ एक उत्सव है, अपनी उपलब्धियों को गिनाने का,
पूर्वजों के उपकार का,
गुरुजनों के आशीर्वाद का,
सहयोगियों की शुभकामनाओं का,
वर्षगाँठ एक परिभाषा है, इस अभास की, कि आपके,
अनुभव में एक और वर्ष बढ़ गया है,
दृष्टिकोण और पैना हो गया है,
विचार के आयाम और विस्तृत हुए हैं,
वर्षगाँठ एक बोध है, कि आप और अधिक परिपक्व हुए हैं,
दयालु और उदार हैं,
या, समाज से निराश हैं,
या, शेष आयु का एक और वर्ष कम हो गया है,
इसलिए, वर्षगाँठ पर, कुच्छ ऐसा काम करें, जिससे,
स्वयँ को संतोष हो, ग्लानि का नाश हो,
जीवन के प्रति उत्साह हो .
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आभार
रात चैन से सो लिए, सुबह करो प्रणाम,
अच्छे से दिन कटे, करके माँ – बाप को सलाम,
करके माँ – बाप को सलाम, ऊपर वाले का आभार,
हों सुखी सँतुष्ट सब, हरा - भरा सँसार,
अपने प्रभु से कीजिए, मन ही मन में बात,
मोक्ष मिले सँसार से, बीते जीवन रात.
अच्छे से दिन कटे, करके माँ – बाप को सलाम,
करके माँ – बाप को सलाम, ऊपर वाले का आभार,
हों सुखी सँतुष्ट सब, हरा - भरा सँसार,
अपने प्रभु से कीजिए, मन ही मन में बात,
मोक्ष मिले सँसार से, बीते जीवन रात.
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