Monday, 14 March 2016

सामाजिक


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मीत सभी को चाहिए, हो जीवन उजियार,
बिना मीत के हो गई, जिंदगी निराधार.
सच्चा मीत एक भला, नकली नहीं हजार,
समय पड़े पर साथ दे, उसे है नमस्कार. 
पैसे वाले ढेर हों, पर सारे बेकार,
बात जुबानी ही दिखे, शुभकामना कतार.
पीड़ा, तनाव हर सके, सही मीत का साथ, 
पैसा धरे तलाशते, कर राहत की बात.
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मिली खुशी सेलेस्टिया, अपना ही त्योहार,
इसके लिए हम करें, साल भर इंतजार, 
साल भर इंतजार, लोग कुछ आगे आए, 
चंदा जमा करके, थोड़ी मौज हो जाए, 
खेल, कूद, नाचना, स्टार्टर लहर चली,
खाओ भोजन भला, सारी जानकारी मिली.
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संभव नहीं सियार को, बना सको तुम गाय,
अपनों से जब भी मिले, हुआं हुआं चिल्लाय.
कितनी भी कोशिश करो, अनपढ़ पढ़ ना पाय,
मूरख पंडित बन सके, जब सत्गुरु मिल जाय.
इच्छा मन में चाहिए, मैं क्या करूं उपाय,
गुरु की संगत जब मिले, नज़रिया बदल जाय.
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आज सभी अनुभूति के, साथी करते मौज,
पिकनिक करने आ गए, जो करते हर रोज, 
जो करते हर रोज, गायन, नृत्य का बना समां, 
खेल कूद की मौज, निकाले सब ने अरमां, 
कोशिश डॉ. दास की, आभार सारा समाज, 
बन गया यादगार, सभी के लिए दिन आज.
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मिलते मीत जहां कहीं, पूछें दिल का हाल, 
दिल से दिल सच में मिलें, करती चाय कमाल.
संबंधी से जब मिलो, कहो प्रेम से हाय,
मिटती मन की मलिनता, तुरत चाय हो जाय.
चिंता से विचलित रहे, मन बने बेलगाम,
तुरत चाय प्रस्तुत करो, बनते बिगड़ते काम.
अपना काम कराइए, करो पेशकश चाय, 
इसको रिश्वत ना कहें, तुरत काम हो जाय.
कहा नहीं यदि चाय को, आए घर महमान, 
कमी दिखे सत्कार में, नहीं चाय आव्हान.
बात निराली चाय की, करिए पेश जरूर,
दिल से मिल कर पीजिए, कोई नहीं गुरूर.
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पढ़ना अच्छी बात है, कोई रहे किताब,
मुश्किल उस को समझना, बने दिमाग दवाब.
अमल पढ़े पर कर सकें, सबसे अच्छी बात,
सीख मिली हमको जहां, प्रकृति की करामात.
धर्म, शास्त्र, विज्ञान हो, मिले जहां पर न्याय, 
ग्रंथ हमारे कह रहे, सबके हैं अध्याय.
एक बार में लिख गए, लेखक या कवि राय,
शास्त्र है, अखबार नहीं, अलग रोज दिखलाय. 
ग्रंथ सभी महान रहे, वेद, शास्त्र, पुरान,
मनु स्मृति भी याद रखो, कम भी नहीं कुरान.
बात भली हर जगह से, ग्रहण करें श्रीमान,
बुरी चीज़ को त्याग दें, जो चाहो कल्यान.
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हो प्रणाम या नमस्ते, मतलब शीश झुकाय,
बिना विनम्रता कुछ नहीं, केवल जगत हसाय.
लगता हमें प्रणाम में, आदर वा सम्मान,
करते नमस्कार जहां, मर जाता अभिमान.
करते हैं नमन मन से, प्रणाम बाहर बात,
अनुभव होता चित्त से, बाहर से मुसकात.
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जीते सपने देख कर, मन में रख ली चाह,
कोशिश कर पूरे करूं, नहीं कोई कहे वाह.
अक्सर बाधा आ गई, हो समाज प्रतिरोध,
दिया समर्थन न्यून ने, करते अधिक विरोध.
सामाजिक बेड़ी बनीं, कर परिवार विचार,
साहस नहीं तोड़ सकूं, करता नहीं उधार.
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मैं रिटायर होने वाला,
हां, आज रिटायर हो गया,
मैं दादू, पोते वाला,
मैं नानू, नाती वाला, 
सब मिल कर करते मतवाला,
मैं रिटायर होने वाला.
आज हक से कह सकता,
वरिष्ठ नागरिक के लाभ ले सकता,
आप सब का धन्यवाद,
बड़े लाड़ से सबने पाला,
आज मैं करने वाला.
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शिशु आने के साथ ही, मिले दुआ भंडार,
सबकी खुशियां बढ़ गईं, करें ईश आभार.
तुलना उसकी सब करें, कहें गुणों का मान, 
उसकी प्रतिभा को मिला, अपनों सा सम्मान.
सभी बड़े जन चाहते, सुन ले उनकी बात,
नहीं नकल वह कर सके, मन को हो आघात.
दादा, नाना चाहते, बने वह उन समान,
सब जन कहें समाज में, खूब बढ़ाया मान.
दादी, नानी सोचतीं, दूं अपने संस्कार,
सीख सके वह आप से, सब करें नमस्कार.
मात पिता इच्छा करें, रोशन उनका नाम, 
बच्चे से पूछा नहीं, क्या चाहे वह काम.
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प्रेम, क्रोध या हास हो, मानव का स्वभाव,
उचित समय पर व्यक्त हो, वरना उल्टा दांव.
कोई जन हो क्रोध में, उसको करिए शान्त,
उलटे क्रोध आप करें, मन में होगी क्लान्ति.
क्रोध सामना आप करें, उस पर भड़के रोष,
शान्ति से मुस्कान मिले, मानस को संतोष.
ठंडे मन से आप दें, उस रोष का जवाब,
तर्क सहित उत्तर मिले, बढ़ जाता रुआब.
आप की प्रतिक्रिया करे, जले कटे का काम,
खुद बदलें व्यवहार से, बढ़े आपका नाम.
निर्भर है अब आप पर, कैसा हो व्यवहार,
बढ़ता मान समाज में, या पाएं धिक्कार.
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जन्म हमें मानव मिला, कुदरत का उपहार, 
किए हमने कर्म भले, अच्छा था व्यवहार.
फैशन के संसार में, बदले दिखते लोग,
दूजे की बात अपना, परिवर्तन का रोग.
कुत्ता पालन शौक है, नहीं चाह संतान,
समलैंगिक विवाह बने, नव समाज की शान.
अंतर में थी कामना, लिंग बदल सहवास,
दखल दे रहे प्रकृति में, खो कर होश हवास.
देखा देखी बढ़ रही, बिन जाने परिणाम, 
हार्मोन पनपें नहीं, बंद स्वास्थ्य आयाम.
संविधान दे मान्यता, नर बन सकता नार,
अपने समाज में नहीं, इसका अभी प्रचार
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स्वप्न जवानी में रहा, शिक्षित बने संतान,
मिले भली सी नौकरी, बढ़े हमारा मान.
हो सुहागा सोने में, बच्चे पढ़ें विदेश, 
वहीं नौकरी भी करें, हो कमाई विशेष.
चढ़ा बुढ़ापा आयु का, शिथिल दिमाग, शरीर,
बच्चे बसे विदेश में, फोटो पूछे पीर.
जरा अकेले मन रही, किसको देना दोष,
दिया उत्साह आप ने, लुटा दिया सब कोश.
पड़ी जरूरत आप को, है ना कोई पास, 
जीवन साथी ही बने, शेष आयु की आस.
दोषी हैं इस हाल के, आप और संतान, 
गर्व और अभिमान में, रखते झूठा मान.
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उदर पूर्ति हम कर सकें, प्रकृति दिए आहार,
क्षुधा हमारी मिट सके, व्यंजन बहुत प्रकार.
शाकाहारी श्रेष्ठ है, बने हमारा स्वास्थ्य, 
पचे, सुगम, रुचिकर लगे, कुदरत का अध्याय.
शासन‌ भी हर वस्तु पर, कर रहा कराधान, 
आय उसे भी चाहिए, बिकता जो सामान.
इन पर कोई कर नहीं, सुलभ, सुगम सामान्य, 
लगा अधिक कर धन मिले, जनहित में अमान्य.
कम कर हो उस चीज पर, सब जन करें प्रयोग,
उसकी दरें बढ़ाइए, घातक हो उपयोग.
हो कर अधिक विलासिता, दारू या हथियार,
खाना हानिकारक हो, पिज़्ज़ा, मैगी यार.
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आज श्वान की हो रही, चर्चा चारों ओर,
दया करो, सम्मान दो, सदा भगाते चोर.
भौंक, शोर से सब डरें, सेवक, पहरेदार,
काटे तो रेबीस रहे, दर्जन सुई उपचार.
रोटी, मीट, दूध करे, उदर ज्वाला शांत,
पहरा दें, रक्षा करें, हो दूर सब भ्रांत.
कहते लोग अतीत में, कुत्ते चार प्रकार,
स्वयं जाति के साथ ही, पालक का व्यवहार.
लड़ते हैं जब सड़क पर, कुत्ते विविध प्रकार,
उन्हें बचाने जो गया, वास्तव में बेकार.
उनकी रक्षा में जुटा, सहानुभूति प्रवाह,
पेटा भी रक्षक बना, सुप्रीम कोर्ट गवाह.
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गलत बात कोई करे, उपजे मन में शोक,
अत्याचार लोगों का, लग पाए कुछ रोक.
जनता का विवाद मिटे, यही अदालत काम, 
बने दलाल वकील जब, लेते उसके दाम.
सांठ - गांठ जज से करें, मन में रखें हिसाब, 
सीधे को कहते गलत, लख कानून किताब.
जज भी निर्धारित रहे, किसका कौन वकील,
कैसा भी अपराध हो, ठोकें पक्की कील.
कोलेजियम से चयन हो, अंधे बांटे खीर,
करते अपनों का भला, सुनते अपनी पीर.
राजनीति के मुकदमे, निर्णय करें वकील,
सुनवाई फौरन करें, बाकी सब में ढील.
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जीवन में भोजन बना, हम सबका आधार,
स्वाद अधिक पाचक बने, रहे साथ अचार.
गाजर, आम, कटहल का, अच्छा लगे अचार,
नमक, मसाले, तेल भी, करते बेड़ा पार.
नहीं जरूरी हो सदा, तेल वाला अचार, 
गुड़ सा मीठा स्वाद हो, बढ़ जाता व्यवहार.
पहले घर में डालते, अब मिलते बाजार,
अधिक लाभ जब मिल सके, नकली का संसार.
चाहत नहीं अचार की, जब हो मांसाहार,
नहीं शौक फरमाइए, यही जगत दरकार.
अस्पताल में कह रहे, पलते नाना रोग,
बी.पी. की बीमारियां, सहते सारे लोग.
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सब समस्या सुलझ गईं, बीत समय के साथ,
यह शरीर बस चल रहा, सब ईश्वर के हाथ.
बढ़ी उम्र में लग रहे, तन होता कमजोर,
हाथ, आंख, दिल की बढ़ीं, तकलीफें पुरजोर.
हाथ, पांव, घुटने हिले, कड़ कड़ करते बोल,
दिखने में असहज लगें, हिलते टाल मटोल.
अधिक बुढ़ापे में पड़ा, घुटनों पर कुछ भार,
तेल, सिकाई, टहलना, हो जाता बेकार.
खा कैल्सियम दूर करें, अस्थि रोग उपचार,
बदले घुटने कर गए, पूरा तन बेकार.
कम आहार, शाक भले, फल का हो आहार,
थोड़ी सी कसरत करो, भजन करो हर बार.
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ईश्वर ने भेजा हमें, लिख कर निश्चित श्वास,
पूजन,भजन कर जी लें, उस पर रख विश्वास.
शाकाहारी खा सकें, उत्तम रखें विचार,
नहीं किसी का दिल दुखे, नहीं करें व्यभिचार.
लंबे जीवन के लिए, उचित आहार, योग, 
थोड़ी कसरत साथ में, तन मन रहे निरोग.
साथी अच्छे मिल गए, जिनसे मिलें विचार, 
बैठ साथ में गप करें, हल्का दिल का भार.
पैसा हो यदि पास में, करें दक्षिणा दान,
तीरथ जा कर घूम लो, सब घर का कल्यान. 
जीवन में बाकी रही, जो कोई भी चाह,
जीते जी पूरा करो, मेरी यही सलाह.
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अपने झगड़े आप ही, आपस में सुलझाय,
घर की बात घर में रहे, बाहर न जाने पाय.
जग जाहिर झगड़ा करो, अगर अदालत जाय,
हासिल हो कुछ भी नहीं, जग में होत हसाय. 
रहे तनाव दिमाग में, रक्त चाप बढ़ जाय,
चक्कर कोरट के लगें, व्यर्थ समय गंवाय.
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ऑफिस में छोटे बड़े, सब मिल करते काम,
उनके ही सहयोग से, होता ऑफिस नाम.
लक्ष्य निश्चित किया गया, रखा उद्देश्य एक,
वेतन है इस काम का, सारे मिलकर देख.
कभी अचानक आ गए, कोई कामचोर,
बिगड़ गया माहौल तो, शिकायतें पुरजोर.
अपनी क्षमता से करें, अपने अपने काम,
काम नहीं दूजा करे, हो दूर से सलाम.
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व्यथित हृदय हो जीव का, मन को करे उदास, 
नहीं कहीं आशा किरण, कर बैठे बकवास.
कारण कोई व्यक्ति हो, नफरत मन में मान, 
एक बार जो पनप ली, मुश्किल में है जान.
पीड़ा हो अपमान की, दिल से निकले आह,
मन से गाली बोलता, झगड़े की हो चाह.
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नहीं ड्रग्स कोई दवा, करे न कहीं इलाज, 
मजबूरी आदत बनी, लत कह रहा समाज.
भले क्षणिक आराम हो, मिले कष्ट से मुक्ति,
अपनी पीड़ा भूल कर, जगत से हो विरक्ति.
सुनने में आते अधिक, लाभ से दुष्प्रभाव,
औषधि की लगती लतें, कहें ड्रग्स बर्ताव.
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दूध मात का पी लिया, रखना उसकी लाज, 
आप का तन स्वस्थ रहे, हर्षित सकल समाज.
पैदा होते ही मिला, हमें मात का दूध,
दिन - दिन हम बढ़ते रहे, होता तन मजबूत.
कोई ललकारे हमें, याद छठी का दूध, 
पूरे साहस से भिड़ो, दिल को कर मजबूत .
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नमन मात को कर रही, सारी मानव जात,
ऋणी सदा उसके रहे, डाल डाल वा पात.
कर्जा उसका ना चुके, कर लो लाख उपाय,
आजीवन याद उसकी, मन देती तरपाय.
जीते जी सेवा नहीं, दूजा मे रविवार, 
साल भर में एक दिवस, कर पाओ सत्कार. 
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मीठा फल विश्वास का, सपने हों साकार,
अनुभव भी बढ़ता रहा, मीत करें सत्कार.
खेले हम सबने कई , नाना विधि के खेल,
इस बीच में लग गई, ढेर पोस्ट की रेल.
ग्रुप के साथ हमें मिलीं, साथी शुभ कामना, 
देख कर उत्साह गजब, बढ जाती चाहना.
कथनी करनी भेद में, अंतर दिखता साफ,
कुछ कहें और समझ लें, गलती करना माफ.
कितना भी मना कर लो, आते नहीं बाज, 
मानेंगे नहीं निर्देश हम, खोलेंगे सब राज.
आप सभी सहयोग दें, करते हम आभार,
मनते ऐसे पर्व हैं, हर बार लगातार.
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आज संगिनी हो गई, एक वर्ष की बाल,
देखी उन्नति हो गए, सभी सदस्य निहाल.
साथ सखी जब मिल गई, बना संगिनी नाम,  
सिंग साब में आ गए, मौज करें इस शाम.
गायन, वादन, नृत्य में, पारंगत सब नार,
अपना रुचि प्रदर्शन हो, भूल गई घर बार. 
आपस में साझा करें, अपने सभी विचार,
कमी नहीं उन में दिखे, करतब की भरमार.
आप बुलाते जब हमें, बढ़ जाता सम्मान,
गर्व करें हम स्वयं पर, छा जाता अभिमान.
अतिथि वर्ग की ओर से, करते हम आभार,
याद हमें करती रहें, बार बार लगातार.
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सारे काम गलत करें, कहते नाम कुरान,
शेष नहीं अपराध है, ना करें मुसलमान.      
माल मुफ्त बटता जहां, लेना नहीं हराम, 
मतलब के चौकस रहें, अल्ला हो बदनाम.
मौका उनको जब मिले, छुप कर करते वार,
कई शरीफ मान रहे, गलत काम है यार.
देते दुहाई इस्लाम की, हम कहें शांति दूत,
आगे रहें अशांति में, चढ़ा लूट का भूत.
करें हलाला मात का, नहीं सुता का ध्यान, 
हूर बहत्तर मिल सकें, बहना बनती जान. 
मुल्ला मुल्ला ही रहे, कितना कर लो प्यार,
कलमा पढ़ा, कसम लगी, काफिर सब संसार.
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शिखर पर हो अराजकता, हिंसा बिना मिसाल,
न्याय व्यवस्था देश में, हो जाती बेहाल.
सालों तक लटका रखें, मिले मुकदमे खास, 
मध्य रात भी जा सकें, आप अदालत पास.
पक्ष रखें अन्याय का, जगत प्रसिद्ध वकील,
गलत बात साबित करें, अपनी कहें दलील.
पैसों का सबको दिखे, अलग अलग व्यवहार, 
पक्षपात प्रेरित हुआ, मुख निर्णय हर बार.
जज के घर पर जल रहे, नोटों के अंबार,
मौन सभी बैठे हुए, ना एफ़. आइ. आर.
पैसों से हो फैसला, दिखती शकल वकील, 
बाहर से पैसे मिलें, होती नहीं दलील.
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पुस्तक मीत मानव की, बनी ज्ञान की खान,
श्रद्धा से पढ़िए इन्हें, दें पूरा सम्मान.
लेखक लिखते सोच कर, मेहनत से किताब,
निस्वार्थ सेवा करें, है इतिहास हिसाब.
पढ़ते जो भी आज हम, रहे सदा ही याद,
तेज दिमाग में भरा, करें यही फरियाद.
बदल ज़माना अब गया, डिजिटल युग का काल, 
करता इंटरनेट अब, सब जगत में धमाल.
ए.आई. ने कर दिया, अद्भुत नया कमाल, 
अपनी मेमोरी भरा, देखा, बोला हाल.
छपवाते लेखक नहीं, अपनी लिखी किताब,  
पोस्ट किसी मीडिया पर, तारीफ़ बेहिसाब.
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बड़े बड़े ज्ञानी कहें, हिंदू अपना धर्म,
सही बात जो जान लें, जीवन उनका मर्म.
सत्य, अहिंसा, प्रेम के, दें अक्सर उपदेश,
तज कर स्वयं एक तरफ़, भर लेते आवेश.
अंतर कथन, कर्म करें, निकले खुद का स्वार्थ, 
नेता हित साधन करें, यही रहा भावार्थ.
जन हित में यदि काम हों, होवे जन कल्यान,
पनपे नहीं रोष कभी, ना हो कुछ अपमान.
कारण बिन करें नहीं, हत्या, बलात्कार,
लूट-पाट, चोरी नहीं, सुनें नहीं चीत्कार.
परम्परा सनातन है, हिंदू की पहचान,
सबका सब आदर करें, सबका हो सम्मान.
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ऊर्जा सबको चाहिए, उस बिन सब बेकार,
ऊर्जा ही संभव करे, जीवन का संचार.
नाना विधि ऊर्जा मिले, गैस, रसायन, सौर,
रूप बदल कर हम करें, परिवर्तन का दौर.
सीमित स्रोत कुदरत में, गैस, कोयला, तेल,
आवश्यक उपयोग हो, नहीं व्यर्थ में खेल.
ऊर्जा स्रोत नए मिलें, हवा, हाड्रोजन, नीर, 
नाट्रोजन, अणु, सूर्य से, हर लो सबकी पीर.
गाड़ी चलनी चाहिए, होवें सबके काम,
ऊर्जा तो बढ़ती नहीं, जीवन नहीं विराम.
मौसम गर्म रहे नहीं, बने रहें सब शांत,
बिगड़ गया संतुलन जब, फैलेगी अशांति.
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गिल्ली-डंडा खेल को, दे क्रिकेट का नाम,
भूल भारत परंपरा, इसको करें प्रणाम.
बैट-बॉल भी कह दिया, अंग्रेजी में नाम,
खेल शान का बन गया, रखे बड़े ईनाम.
होती हैं प्रतियोगिता, मेडल, कप वा शील्ड,
बीच नगर मैदान में, देख बड़ी सी फील्ड.
धनवानों का खेल है, लोग लगाते दांव,
जो चमका इस खेल में, दबते उसके पांव.
केवल भारत ही नहीं, रुचि, प्रयास विदेश,
बनी प्रतिष्ठा देश की, कोशिश रहे विशेष.
शिक्षण की संस्था बनीं, प्रतिभा की पहचान,
नामी छात्र निकल सकें, मिले देश सम्मान.
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कला और साहित्य का, गौरवमय इतिहास,
आगे थे हर क्षेत्र में, उन्नति का विश्वास.
ला पाश्चात्य सभ्यता, इनका किया विनाश,
धन अर्जन की लालसा, उन से ले अवकाश.
बदले अब हालात हैं, जगत रहा पहचान,
बहुत जरूरी हो गया, कौशल का उत्थान.
शिल्प और विज्ञान में, बनता नित नव‌ स्थान,
कायल इनके हो रहे, दुनिया के विद्वान.
कृषि, पशु, अनाज की, करी भले से खोज,
अपनी सेहत का रखें, ध्यान हर समय हर रोज.
वापस हम यदि ला सकें, शिल्प, कला तकनीक,
भारत यश की विश्व में, बनती जाए लीक.
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आदत मानव की रही, दमन करें कमजोर,
डरते हम बलवान से, करें विनय पुरजोर.
परेशान बिन बात के , नहीं कहीं पहचान,
निकले आह कष्ट भरी, सता रहे शैतान.
मकसद उनका एक है, फैलाओ आतंक,
हत्या, लूट, बलात्कार, दे दो सबको दंश.
रक्षा में तत्पर रहें, सीमा पर जवान,
रखें नियंत्रण हाल पर, बचता देश, मकान,
आए इसके फेर में, जनता और जवान,
सेवा में मारे गए, बने देश अभिमान.
करें नमन उन वीर को, इसमें देते जान,
अमर शहीदों का हुआ, अनुपम यह बलिदान.
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पिकनिक मना रहे सभी, मिले अनुभूति आज,
मेल-जोल दोस्ती करें, हों इकट्ठा समाज.
कार, बसों से आ गए, दूर सावला लाॅज,
कहीं नहीं निशान मिला, अटक गई बस आज.
वरिष्ठ दो सौ से अधिक, आते पत्नी साथ,
हो अनुभूति कुटुंब की, खुलते मन के तार.
साझा अपना हाल हो, मिले सब समाचार, 
बच्चे भी सब खुश रहें, भला हो रोजगार.
स्वागत चाय, नाश्ते से, करें मौज भरपूर,
आदर वरिष्ठ का करें, दिल से हैं मजबूर.
कोशिश अपनी यह रहे, मिल लें बारम्बार,
संस्था नाम रोशन हो, हो प्रयास लगातार.
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वेला है नव वर्ष की, मना रहे त्योहार,
आप का सहयोग मिला, कृपा हुई अपार,
कृपा हुई अपार, प्रमोद जोड़ रहे यार,
बड़े जतन से बना, अपने मिलन का विचार,
वाशी में आ मिला, अपना परिवार मेला,
यूं ही मिलते रहें, बज रही मंगल वेला.
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दया सभी पर कीजिए, तज अपना अभिमान,
विनम्रता मुख पर दिखे, बिना किसी अहसान.
जिस पर आप करें दया, रखें सदा वह याद,
आभारी हो हृदय से, बिना किसी फरियाद.
मदद जरूरतमंद की, माने वह दिन रात,
श्रद्धा से मन भर उठा, हृदय न प्रेम समात.
छोटी मोटी मदद भी, करे बड़ा उपकार,
मार्ग भावी भविष्य का, करता प्रशस्त द्वार.
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भूषण मानव के रहे , विनम्रता, आभार,
धन्यवाद हो सब का, जो करता उपकार.
मीठी बोली ना तजें, रखें क्रोध को दूर,
यही व्यवहार आपका, मीत बनाए शूर.
थोड़ा भी जो हित करे, दिल से हो आभार, 
कभी भला ना भूलिए, याद रखें हर बार.
बोलें सबसे प्यार से, मान करें भरपूर,
अपना क्रोध शांत करें, हो तनाव काफ़ूर.
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रोटी जरूरत सब की, जीवन का आधार,
भोजन हित कुछ भी करें, चोरी या व्यापार.
अपनी हालत देख कर, बढ़ा लिया परिवार,
काम अधिक करना पड़ा, नहीं समय व्यवहार.
क्षुधा शांति के हित करें, भोजन का आदेश, 
प्रथा नई अब चल गई, कहें फोन संदेश.
ज़ोमेटो, ज़ेप्टो, स्विगी, सेवा को तैयार,
पैसों की चिंता नहीं, कर लें आप उधार.
अब कुछ भी मंगाइए, लोग मिलें तैयार,
ब्लिंक इट, अमेज़न कहें, आया मेरे यार.
लौटाने का मन करे, घर तक से लें यार, 
पैसे वापस तुरत हों, रखते नहीं उधार.
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पर्व खुशी देते रहे, जीवन में उल्लास,
इन्हें मना अनुभव करें, जीने की नव आस.
होली, दिवाली हैं प्रमुख, साल के त्योहार,
इन्हें मनाने के लिए, मिलते हैं उपहार.
जुआ खेल कर लोग कुछ, निभा रहे संस्कार,
इसको सब शुभ मानते, साथ बैठ परिवार.
ऐसी लत सबको लगी, बढ़ जाएगा प्यार,
रहे जीतते, जब तलक, सुख का पारावार.
लगे हारने आप जब, होता मूड खराब, 
दुर्गुण एक और बढ़ा, पीने लगे शराब.
खुशी पर्व की कम हुई, रिश्ते पड़ी दरार,
दूर बुराई से रहें, हो संबंध सुधार.
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जीवन कटता कष्ट में, लोग दुखी हर बात,
लगती पैसों की कमी, अश्रु बहें दिन रात. 
पैसा आवश्यक रहे, भोजन या आवास,
पैसे बिना कठिन लगे, लेना अंतिम श्वास.
कुछ लोगों के पास हैं, पैसों के भंडार,
पैसे बिन कुछ को लगे, उनका जीवन भार.
झिझके बिना खरच रहे, होटल हो या माॅल,
पूरे शौक सभी करें, सोच नहीं कंगाल.
खपत पेट्रोल बढ़ रही, नहीं सफ़र आसान,
आरक्षण भी कठिन है, हो रेल या विमान.
वोटों की खातिर लड़ें, अपने नेता लोग,
पैसे दे कर मत मिलें, यह समाज का रोग.
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दो परिवारों से बने, शादी का संबंध,
सात जन्म का साथ हो, ऐसा है निबंध.
वर को कन्या मिल गई, शादी बनता पर्व,
विषय हर्ष का हो गया, मात पिता का गर्व.
मौका हो आनंद का, खुशियां चारों ओर,
खर्च करें जी खोल कर, लोक लाज हो घोर.
कर्जा ले कर ना करें, कष्टों का आव्हान,
माल मता सब ले चले, आंसू भरा वितान.
कुप्रथा दहेज की बनी, जीवन भर अवसाद,
दीन पिता की अवस्था, नहीं लखे दामाद.
और पिता की बेटियां, रहे गरीबी मार,
तुलना करें समाज में, शादी बनती भार.
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अच्छे से प्रयोग करें, सोना, चांदी पात्र,
आवश्यक अवयव मिलें, नहीं क्लेश रज मात्र.
यदि हों बरतन मंहगे, मुश्किल हो उपयोग,  
संभव चलन रोज नहीं, लावें कभी प्रयोग.
तांबा, पीतल श्रेष्ठ हैं, सबकी है औकात,
इनमें भी गुण बहुत हैं, कर लो तहकीकात.
घातक पात्र प्रयोग करें, कागज प्लास्टिक ग्लास,
पता नहीं इसमें लगा, कौन रसायन, घास.
शंका संरचना रही, बीमारी के स्रोत,
नाना लक्षण दिख रहे, जिएं दवा की जोत.
सोच समझ कर पीजिए, गर्म दूध या चाय, 
संगत में बैठें नहीं, करें सोम को बाय.
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चौराहे पर मांगते, बूढ़े, बालक, नार,
करें गुजारा भीख से, नकली बन लाचार.
सभी भीख में चाहते, नकद नहीं उधार,
उस से वह फिर कर सकें, नकदी का व्यापार.
उठा लाभ गिरोह रहे, उनका बनें शिकार,
मजबूरी में मांगते, अभय दान आधार.
नहीं पता हमको चले, नकली असली भेद,
नकद सभी को मिल सके, यह सबको संदेह. 
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ज़िद करते बालपन में, माता करे दुलार,
यौवन में पत्नी मिली, करती सब स्वीकार.
बच्चे पाले लाड़ में, पढ़-लिख पा लें नाम,
करते थे हम नौकरी, बाद करें आराम.
दिए हमें माता पिता, अच्छे से संस्कार,
करो सभी के साथ में, यथा योग्य व्यवहार.
पाया अनुभव योग्यता, कैसे किस से बात,
क्या कब हौले बोलना, मौन बड़ी सौगात.
नहीं दखल हर बात में, चलने दें परिवार,
बढ़े तनाव चिड़ चिड़ से, मिले गलत व्यवहार.
समय साथ बूढ़े हुए, चलने को तैयार,
जीवन बीते शांति से, होगी नैया पार.
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पता समय का ना लगे, जीवन गति आभास,
पल दर पल कम हो रही, बाकी बचती श्वास.
धीमी हौली गति रही, चले लगा कर पंख,
काटे से कटती नहीं, बजे जोर का शंख.
चंगी सेहत जब लगे, नहीं काल अनुमान,
बीमारी से घिर गए, रातें लेतीं जान.
काफी कुछ निर्भर करे, कैसा मन का हाल,
अच्छे में अच्छा लगे, खराब जी जंजाल.
समय भला लगता रहा, पास रही संतान,
पैसा अपने पास हो, मित्र मिलें गुणवान.
जीवन भारी यदि लगे, समझो साथ कुसंग,
एकाकी जैसे हुए, कर लो कुछ सत्संग.
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शिक्षा देने आ गया, नाना गुरु समाज,
बढ़ कर आगे एक से, भाषण करते राज.
अपना रौब जमा रहे, जनता है गुमराह,
व्यथित, भ्रमित बन घूमते, चलो मुक्ति की राह.
भीड़ जुटाने में लगे, नए नए महराज,
सभी आयु के लोग दें, नारों का आगाज.
सुविधा देने में लगे, दान और पंडाल,
लंगर भी कुछ खोलते, रखते सबका ख्याल.
महिमा मंडन कर रहे, अपना अपना गान,
भाषण में चर्चा करें, दिखे अलग भगवान.
राजनीति हावी हुई, प्रतिस्पर्धा का दौर, 
मिले बढ़ावा एक को, मचता काफी शोर.
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अनुभव हो जब आप को, कौन किया उपकार,
मन से उसका कीजिए, धन्यवाद आभार.
ऊपर मन भी यदि कहें, हार्दिक धन्यवाद,
अंतर्मन से निकलता,  सदा हर्ष आह्लाद.
बिना कहे यदि मिल सके, मानो ईश प्रसाद,
ऐसा हो उपकार यदि, सदा रहेगा याद.
आएं याद वह जन कभी, उपजें श्रद्धा भाव,
अहित न उनका खुद करो, कितने रहें अभाव.
मानो मन की बात को, कर दो तुम कल्यान,
याद करेगा दूसरा, सदा बढ़ेगा मान.
हो अनुभव उपकार का, रहे नहीं कुछ दर्प,
श्रद्धा भी बढ़ जायगी, कुचल अहं का सर्प.
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मानव तन में लग रहे, नाना विधि के रोग,
बढ़ी आयु से बढ़ गए, कहते सारे लोग.
कारण इसके बहुत हैं, जीवन, भोजन काम,
पैसा अधिक कमा सकें, बिना करे आराम.
कुछ बीमारी दवा से, हो जातीं हैं ठीक,
पर आजीवन छोड़तीं, लक्षण अपने नीक.
योग, ध्यान के साथ हो, थोड़ा प्राणायाम,
रखें संतुलित बदन को, उचित रहे व्यायाम.
मंत्र शक्ति भी कर सके, अचानक चमत्कार,
पूरी निष्ठा से करें, मंत्रों का उच्चार.
नसें खोलने में करें, ध्वनि अद्भुत कमाल,
रक्तचाप के साथ ही, धड़कन, सुगर धमाल.
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लगते बढ़ती आयु पर, हम सब अधिक जवान,
यह सब मन की बात है, उससे बनती शान.
आए यौवन के बिना, कुछ जन पर आयुष्य,
चिंता तन को खा गई, दिखे नहीं भविष्य.
सेवा निवृत्ति पर नहीं, रहा हाथ में काम,
पूरे अपने शौक हों, कर पूरा आराम.
सत्संगत यदि मिल सके, सुधर जाय परलोक,
अपने मीत अनेक हों, चले जोक पर जोक.
जीवन साथी साथ में, दुगुना हो आनंद,
मिलती पेंशन समय पर, करो उधारी बंद.
सांसें गिनती की मिलीं, करो नहीं बरबाद,
कुछ तो नेक कर्म करो, लोग करेंगे याद.
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भारत में है यह प्रथा, मिल कर करें प्रणाम,
निकले मुहूर्त नमन का, बिना किसी आयाम.
काम एक प्रणाम करे, उत्तर में आशीश,
प्रतिज्ञा टली भीष्म की, धरे द्रौपदी शीश. 
मतलब सधे चरण छुएं, प्रणाम बारंबार,
एक नहीं सौ बार भी, रखते कपट विचार.
जब भी मिलें, नमन करें, बाहर भाषा भाव,
छोटे बड़े सभी करें, दिखता आदर भाव.
रहा प्रचलन विदेश में, सुबह, शाम या रात,
मुस्कराहट जवाब में, करें बाद में बात.
बात सहजता से करें, मन रहता प्रसन्न,
पहले प्रणाम कर चुके, खाते किसका अन्न.
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अनुचित मांगे कर रहे, शिशु अबोध अनजान,
नाना विधि के खेल में, मां बाप परेशान.
क्रियाशीलता देख कर, होते वह हैरान,
छोटे मुंह से तोतली, बोल रहे ज़ुबान.
बढ़ते युग के साथ में, छूते नए वितान,
मुठिया, लट्टू, झुनझुना, बीते युग की शान.
अब बच्चों को चाहिए, रिक्शा, मोटर कार,
उन में लगती बैटरी, बिना सैल बेकार.
खेल पढ़ाई हो रही, डिजिटल का है शोर,
कंप्यूटर में बस गई, सांसें अविरल डोर.
बड़े हुए तो लग गया, मोबाइल का शौक,
क्या क्या नहीं देख रहे, लगे न कोई रोक.
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केवल मुस्लिम ही नहीं, नफ़रत के हकदार,
हिंदू उनका साथ दें, वह पक्के गद्दार.
बहकावे में आ रहे, छोड़ धर्म आचार,
समझें शान फैशन में, भूल गए व्यवहार.
होते पूरे लालची, बेच रहे ईमान,
लड़ने को तैयार हैं, गिरवी रख अभिमान.
करें सरीकत गैर की, नकल मानते शान,
करी उपेक्षा स्वयं की, बन जाते अनजान.
बाहर की संस्था करें, धर्म हमारा खोट,
अवसर ढूंढे वे सदा, मौका मिलते चोट.
उस को हम समर्थन दें, करते हैं उपहास,
लज्जित करते सब दिखें, गौरवमय इतिहास.
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घर में सबके होत हैं, दादू, दादी, तात,
जीवन उन का बन गया, मानें उनकी बात.
काम पिता का है नहीं, हर पल देते लात,
कभी प्यार वा लाड़ से, अपनी ही मनवात.
त्याग मात से है बड़ा, जनक राय बलिदान,
पूरी करे जरूरतें, रखते घर का ध्यान.
जिसको मिल‌ सका नहीं, पिता जी का प्यार,
लोग उसे अनाथ कहें, पाल रहा परिवार.
बड़े हुए देखें सभी, बेटा रखता ख्याल,
देख हॅंसी चेहरे पर, होता नहीं मलाल.
सोचें अब संतान यह, नहीं पिता को क्लेश, 
अपने घर में पा सके , सुखी स्वस्थ परिवेश. 
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दी अनुभूति ने हम में, ऊर्जा का संचार,
नई जीवन विविधता, उमड़ा अद्भुत प्यार.
उमड़ा अद्भुत प्यार, बिछड़े लोग गले मिले,
चाय समोसे साथ, खुशी के आंसू निकले,
अस्पताल की प्रस्तुति, गज़लों का किया आदी, 
सब ने मिलकर आज, शाम यादगार कर दी.
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अपने ग्रुप में साझा करें, मौलिक शुद्ध विचार,
एफ़. एफ़. टी. नाम दे, नहीं कहीं प्रतिकार.
विषय नया हर दिन मिले, हों अनुभव साकार,
याद पुरानी आ गई, छेड़े दिल के तार.
जो भी मन को भा गया, लिख दो मेरे यार,
गलत सही सब मान्य है, अवसर पहली बार.
काफी मेहनत करते, संयोजक हर वार,
नए विषय भी खोजते, दें शास्त्रों का सार.
केवल समस्या यह है, अधिक रुचि नहीं यार,
माथा पच्ची क्यों करें, गूगल का विस्तार.
अधिक भला प्रतिसाद हो, लोग करें स्वीकार,
संयोजक का हम करें, तन मन से आभार. 
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क्षुधा हमारी शांत हो, खा कर भोजन रोज,
धन्यवाद उसका करें, पैदा करता भोज.
कठिन परिश्रम वह करे, जा कर अपने खेत,
मौसम यदि अनुकूल नहीं, हाथों फिसली रेत. 
बेचारा मजबूर है, बेच रहा उत्पाद,
नहीं समय से पा सके, नीर, बीज या खाद.
हालत पतली हो गई, सरकारी यह हाल,
टपक दलाली कर रहे, खा कर अपना माल.
सोचें मिल हम, कौन है, इसका जिम्मेदार,
राजनीति भी कम नहीं, कौन करे उद्धार.
यह दायित्व हम सब लें, मिले कृषक सम्मान,
उसे मिले मेहनत का, सही धन और मान.
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प्रीत जता कर प्रीति ने, शुरू करी नव रीत,
दिल से मिलते दिल जहां, गूंज उठे संगीत,
गूंज उठे संगीत, स्वर्णिम भविष्य सजाएं, 
संजोए स्वप्न जो, वह साकार कर पाएं,
सुखी रहे परिवार, भूलें बुरा जो अतीत,
बच्चे आगे बढ़ें, प्रगति पथ बढ़ें पति, प्रीत.
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अपने ग्रुप में हो रही, सबकी जय जयकार,
बड़ी विनम्रता से करें, हम सबका आभार.
नारी गुणी अनेक हैं, आतीं नाना प्रांत,
समझाती भाषा स्वयं, बनतीं ग्रुप की शान.
रचना कविता की करें, या फिर हो संगीत,
पाक कला में मिल सके, उनकी अपनी रीत.
वादन, शैली नृत्य की, या कंठ का कमाल,
काढ़, पिरो कर लें मज़े, साड़ी या रूमाल.
समय - समय बैठक करें, लेवें सबके हाल,
तत्पर हैं सब मदद को, आपद देते टाल.
इसी तरह सब रह सकें, आपस का सहयोग,
विदा बुराई को करें, सब जन रहें निरोग.
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सारे जग में हो रहा, नारी का गुणगान,
सभी लोग यह कह रहे, हो नारी सम्मान.
चर्चा साहस की करें, बनी त्याग की मूर्ति,
मिले संकल्प सफलता, फैली जग में कीर्ति.
नहीं कमी कुछ पुरुष से, कहता है इतिहास,
शिक्षा, कौशल से बढ़े, छुए नए आकाश.
लगता है, ईर्ष्या करे, नर का सदा समाज,
उसको तो भाया नहीं, नारी करती राज.
उसे सताने के लिए, करते अत्याचार,
ताप त्रिविध वह सह सकी, ईश्वर का आभार.
मां, बेटी, भगिनी लगे, नारी कोई रूप, 
मान मिले हर रूप में, खिलती जीवन धूप.  
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पढ़ते हम इतिहास में, वर्ण भेद आकार, 
लोग बताते काम का, सेवा का प्रकार.
कहते पूजा पाठ है, पंडित जी का काम,
बनिए कर व्यवसाय को, लेते देते दाम.
रक्षा क्षत्रिय कर रहे, हो समाज आराम,
सेवा करें शूद्र जब, सब पाते परिणाम.
जाति धर्म ने तय किए, समरस बने समाज,
निर्विरोध सब काम हो, चले प्रगति पथ आज.
पीढ़ी दर पीढ़ी चली, बनी व्यवस्था रीत,
परिवर्तन भी चाहिए, कुंठित होते मीत.
अपनी रुचि का काम हो, मिले भले परिणाम, 
उत्पादकता बढ़ सके, नई खोज अविराम.
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तन मन से जब स्वस्थ हों, कर लें नाना काम, 
काम मुदित मन से किया, दे तन को आराम.
चिढ़ें नहीं हर बात पर, रहे नहीं अवसाद, 
मुख पर खुशी दिखे सदा, ईश्वर का प्रसाद.
रक्तचाप भी बढ़ गया, हुआ नया मधुमेह,
बढ़ती मन की खिन्नता, पीड़ित होती देह.
मन हो जब अवसाद में, होते अनुचित काम,
सही बात पचती नहीं, तन चाहे विश्राम.
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पिकनिक करने आ गए, फिर से हम इक बार,
पक्की जगह मिले हमें, काफी करा विचार,
काफी करा विचार, नक्की बसें कर पाए,
सहमति शताधिक की, प्रीत आपसी बढ़ाएं, 
हर दिन से हो अलग, रहे आनंद की सनक,
यादगार बन सके, हमारी उत्तम पिकनिक.
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एकरसता जीवन की, करती हमको बोर,
जीवन कटता चैन से, बिना किसी भी शोर.
कहते हम अक्सर कहीं, घुमा फिरा कर बात,
श्रोता की छूटे हॅंसी, लगे नहीं आघात.
कभी कहें हम चुटकुले, कर देते हम व्यंग,
स्वस्थ भाव से कुछ कहें, नहीं मित्रता भंग.
अक्सर उदाहरण कहें, मन के सारे भाव, 
कोई दूजा लक्ष्य हो, पूरा कहे प्रभाव.
अपने मन की बात को, कहिए आप जरूर,
चोट किसी को ना लगे, इतना रहे शऊर.
शब्द द्विअर्थी कह रहे, मन की पूरी बात,
बुद्धिमान जन समझ लें, समझत ही मुस्कात.
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जीवन एक प्रयोग है, करता रह तू काम, 
लगन लगा कर कीजिए, नहीं कहीं आराम.
कभी लगा लें आप भी, थोड़ा बहुत दिमाग,  
इस्तेमाल अकल करें, बच कर भागमभाग.
साथ उसी का भाग्य दे, करें निष्ठा से काम,
भाग्य भरोसे ना रहें, मिले नहीं कुछ नाम.
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काल चक्र जब घूमता, बदल रहा संसार,
अनुभव हम प्रतिदिन करें, यही जगत व्यवहार.
मानव की क्षमता दिखे, कहता उसे विकास,
घटना सारी सोचता, करता है विन्यास.
लगे अचंभा आप को, समझ न आए बात,
कहें करिश्मा प्रकृति का, बिन बादल बरसात.
कठिन समझ विज्ञान की, हर पल बदले रीत,
मनोभाव दिल से उठें, कहता मानव प्रीत.
विगत समय सौ साल का, लगे बड़ा आयाम, 
मानव जन्म हमें मिला, सब बड़ों को प्रणाम.
नेक काम हम कर सकें, होवे नहीं गुनाह,
थरम काज सारे करें, नहीं किसी की आह.
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अरब देश लागू करें, शरिया का क़ानून,
रहे सजा का डर बना, नहीं गुनाह जुनून.
अपराधी को दो सजा, ऐसी क्रूर कठोर,
दोबारा साहस नहीं, सोचे कोई और. 
एक व्यक्ति सुधार सको, रखो दया का भाव, 
पूरी जाति सुधारिए, दिखे दंड का प्रभाव.
क्षमा दान से जागते, मन में घृणित उपाय,
अपराधी को प्रेरणा, कर लो खूब दबाय.
नहीं जरूरी जान लो, पीड़ा भी अपराध,
दुखे नहीं दिल किसी का, जीवन हो निर्बाध.
गहन कर्म कहते उसे, चोरी, बलात्कार,
सजा, जेल काफी नहीं, फाॅंसी ही उपचार.
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पत्नी प्रिय करती सदा, पति हित की बात,
तन, मन समर्पित पति को, प्रेम न हृदय समात,
प्रेम न हृदय समात, बात भली ही सुझाती,
नहीं स्वप्न में करे, जिस में अनहित दिखाती,
मानें बात सलाह, नहीं राय कहें अपनी,
प्रसन्न मन रहे वह, सुनो सब कहनी पत्नी.
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संभव है इस जगत में, हो श्रद्धा विश्वास,
कठिन काम भी बन सकें, रखें राम की आस.
अब तक लोगों ने किए, असामान्य कुछ काम,
चमत्कार से लग रहे, दिल में हो यदि राम.
कुछ तो डरते ही रहे, कैसे होगा काम,
पूरा यदि ना हो सका, होंगे हम बदनाम.
आ कर यदि भगवान भी, कहें करो मत सोच,
तब भी वह मानें नहीं, व्यर्थ क्यों मारूं चोंच.
डर डर कर जीते रहे, किया न कोई काम,
बाइज्जत रिटायर हो, करने दो विश्राम.
कितना प्रोत्साहन मिले, मुख में पड़ती खीर, 
कैसे मैं मुख खोल दूं, लगी जीभ जंजीर.
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सब को होते प्रिय जनक, रखें स्नेह संतान,
उन से आगे वह बढ़ें, रखते हैं अरमान.  
माता को उन से मिली, सदा भली आशीश,
आज ईश वह हो गए, पूजें हम जगदीश.
दिल से हम करते नमन, सब की है फरियाद,  
घटना अपने भूत की, अमर रहें वह याद,
माता को पहले कहो, सबसे ऊंचा स्थान,
उसको कैसे नमन हो, मिले उचित सम्मान.
सबकी माता है भली, उसको प्रिय संतान,
वह तो हर दम सोचती, कैसे हो कल्यान.
उसका ऋण उतरे कभी, सोच रहे बेकार,
अनजाने में कर चली, वह कितने उपकार.
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मोदी ने नारा दिया, भारत स्वच्छ महान,
बात मान उनकी बना, जनता का अभियान.
अंतर दिखता साफ है, वाहन और विमान,
कमी गंदगी में हुई, साफ़, सुथरा मकान,
एक अनुरोध हम करें, राजनीति योगदान,
कचरा साफ वहाॅं करें, वोटों का प्रतिदान.
नेताओं का आचरण, हो तन, मन से साफ़,
काम निष्पक्ष सब दिखे, जनता कर दे माफ़.
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बेटी देवी रूप है, जाने है संसार,
बड़े भाग उनके रहें, ले बेटी अवतार.
पढ़ लिख कर कल्याण हो, होता सुखी समाज,
खुद भी बेटी पढ़ी हो, करती सारे काज.
आई कई कुरीतियां, बेटी लगती भार,
दोष हमारी बुद्धि का, छिन्न हुए संस्कार.
बेटी बच कर पढ़ सके, हो जगत कल्यान,
घूम रहे अब नगर में, हर पल ही शैतान.
कैसे अपना स्वार्थ सधे, बनें अति होशियार,
बात दूर की वध रहे, नहिं लाज बलात्कार. 
नारा देश लगा रहा, करो समाज विकास,
बेटी पढ़ें बचे नहीं, केवल दिखे विनाश.
--------
बड़ी कठिनता से बनें, अच्छे मृदु संबंध,
राजनीति से बिगड़ते, उठते अंतर द्वंद्व.
भूले से करिए नहीं, लक्ष्य, व्यंग्य, परिहास, 
आप करें कटाक्ष कभी, जाती निकल भड़ास.
ऐसा साथ निभाइए, बढ़े प्रेम विश्वास,
बिना बात तकरार से, नहीं लाभ बकवास.
आपस में मिल कर रहें, सबसे करिए प्यार, 
प्रेम और सद्भाव से, जुड़ा रहे परिवार.
--------
आयोजन अनुभूति का, सुख का पारावार,
पेड़ लगाने सब चले, मिल कर सारे यार. 
जंगल शासन ने दिए, पौधे दसियों बार,
सारे मिल कर रोपते, मानें उनका उपकार.
बस का भी प्रबंध था, कुछ की अपनी कार,
आते इस उद्देश्य से, हर साल एक बार.
वर्षा में पादप फलें, जल की ना दरकार,
नेक काम हमने किया, कहता है संसार.
पिकनिक भी अब मन गई, बढ़ा आपसी प्यार,
एक साथ सब मानिए, अरुन, दास उपकार.
मौसम बारिश का चुना, भीग गए नर नार,
कुछ को खाॅंसी ने चुना, कुछ को हुआ बुखार.
---------
मजे बुढ़ापे में करो, जब पैसा हो पास,
रहे सुहागा सोने में, बच्चों की हो आस. 
तन मन अपना स्वस्थ हो, देखें नही बीमार, 
एक फोन पर मिल सकें, सभी आपके यार.
नाती पोतों भी रहें, आस-पास, खुशहाल, 
पड़े जरूरत पहुँच कर, घर को मालामाल.
नहीं नौकरी अब करें, समय बना बलवान, 
यारों के माहौल में, खूब चखें पकवान. 
कोई व्यसन, व्याधि लगे, बनें नहीं हालात, 
अपना पैसा जेब में, दूर हो हवालात. 
मस्त हाल हों मौज में, नहीं शीश पर कर्ज, 
जीवित रहते कर सकें, अपने सारे फर्ज. 
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महा हरामी कौम है, मुसलमान गद्दार, 
ऐसा करने के लिए, नेता जिम्मेदार. 
जिस थाली में खा रहे, करें उसी में छेद, 
कायर कौम एक हुई, कहें नहीं कुछ भेद. 
दया दिखा आदर किया, हम ने मालामाल, 
जब अपने मारे गए, तो कर रहे मलाल. 
आबादी ऐसे बढ़ी, जिसका नहीं हिसाब, 
खतरा शासन ले रहा, आएगा बदलाव. 
लूट पाट कर चीखते, मस्जिद से अजान, 
सुविधा ले कर मुफ़्त की, हम पर कर अहसान.
केवल भारत ही नहीं, सभी जगह यह हाल, 
बन आए घुसपैठिए, सभी रहे कंगाल. 
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मस्जिद जा कर सुन सकें, मौला का फ़रमान, 
मार पीट जी भर करो, कहते हैं मुसलमान. 
बेटी, बहन, मात लखें, नहीं करें कुछ भेद, 
भूत चढ़े जब सेक्स का, देखें केवल छेद. 
काफिर को कर दो खतम, जो करता इनकार, 
खतना होवें आदमी, औरतें बलात्कार. 
उनकी आबादी बढ़े, बने राज का योग, 
भारत की सरकार में, मुल्ले सारे लोग. 
शरिया लागू कर सकें, अपनी हो सरकार, 
सड़क रोक नमाज पढ़ें, मन चाहा व्यवहार. 
उनके बच्चे पढ़ रहे, जमा करें हथियार, 
शिक्षा दें जेहाद की, बढ़े घृणा व्यापार. 
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रही हमारी मान्यता, शगुन, अशगुन विचार, 
संस्कृति हमें सिखा रही, कैसा हो व्यवहार. 
मिलते जीवन में हमें, जीव, जन्तु, परिवार, 
जिनकी गतिविधि से मिलें, एक अजीब विचार. 
कभी कभी सब सोचते, क्या हो बुरा हमार,
क्या कुछ ऐसा कर सकें, जिससे हो उपचार.
श्वेत गाय, गिलास भरा, सबके निकलें अर्थ, 
एक छींक क्या आ गई, हो जाता सब व्यर्थ. 
घर में जाले दिख गए, उलझन के आसार, 
नहीं गंदगी साफ हो, बने दोष आधार. 
साफ सफाई से रहो, मन में भले विचार, 
दिल में दया भाव रखें, सबका हो उपकार. 
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जीवन बीता शान से, नौकरी बरकरार, 
सेवा निवृत्ति जब हुई, हम होते बेकार. 
पैसा तो काफी मिला, नहीं बदन में जोर, 
कैसे, कहाँ खर्च करूँ, हो जाऊँ ना बोर. 
जीवनसाथी साथ हो, तब तक तो सब ठीक, 
एकाकी जब रह गए, छूटी सारी लीक. 
बच्चे हों यदि साथ में, बन जाती कुछ बात, 
जो बस गए विदेश में, दिन में होती रात. 
साथी यदि कुछ मिल सकें, रखें समान विचार, 
पूरे सारे शौक हों, नहीं किसी पर भार. 
जो मन आए कर सकें, ऐसा कोई स्थान, 
चौबिस घंटे साथ हों, चाहें नहीं प्रमान. 
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नहीं जरूरी हम करें, वही करें सब लोग, 
रचना सबकी अलग है, अलग लगे कुछ रोग. 
रुचि भी सबकी अलग है, अलग सभी के शौक, 
कोई रमता राम में, कोई मारे जोक. 
कुछ को दारू प्रिय लगे, कुछ सुमिरें श्री राम,
सब से हँस कर कुछ मिलें, रखें काम से काम.
जीवनसाथी का रहा, दिनचर्या में योग, 
कहना उसका मानिए, मिलते नाना भोग. 
कविता, लेखन रुचि बनी, टी.वी. देखें खेल,
तीरथ, भ्रमण समूह में, लंबी दूरी रेल. 
गायन, क्विज़ सब कुछ करें, रखते शुद्ध विचार,
प्रतिभाजन सब में करें, रखें भाव उदार. 
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साफ सफाई हम रखें, बातावरण हो शुद्ध, 
निश्चय हो सब का यही, हों नागरिक प्रबुद्घ.
प्लास्टिक में कुछ बात है, लाने को तो ठीक, 
रखिए थोड़े समय तक, नहीं देर तक नीक. 
प्लास्टिक घुलती देर से, फैले गंद प्रभाव,  
बंद नालियाँ हो गईं, उनका रुका बहाव.
कचरा पड़ा सड़क पर, खाने का सामान, 
प्लास्टिक खा कर साथ में, जीवन हो बलिदान. 
गहरी चोट बदन लगे, भद्दा दिखे शरीर,
प्लास्टिक से हो फायदा, शल्य चिकित्सा पीर. 
प्लास्टिक पेंट नमी घुसी, हुई भीत कमजोर, 
सारा खर्च पुनः करो, मन को दे झकझोर. 
-------
फिल्मों में हम देखते, भाँति भाँति किरदार, 
अभिनेता नायक बने,  खलनायक साकार. 
नायक का दिखता सदा, सही, भला सा रोल, 
तनिक बुराई ना लगे, ओढ़ा उसने खोल.
उससे हट, बाधा करे, लगे खराब चरित्र, 
गलत बात उसकी लगे, नहीं विचार पवित्र. 
कई कथाओं में बना, वह सबसे दमदार, 
उसको खलनायक कहें, रखे साथ तलवार. 
कुछ ही लोगों पर जँचे, भारी सा आकार, 
और किसी पर ना जमे, उनका वह किरदार. 
याद आज तक सब करें, डाकू गब्बर रोल, 
शोले लोकप्रिय हुई, ज्ञात सभी को बोल. 
नारी भी भारी पड़ी, रचती अपना खेल, 
याद उसे भी हम करें, फैलाती विष बेल.
--------
ऊपर वाले ने दिया, मानव रूप शरीर,
नेक करम कर जाइए, बन जाए तकदीर.
बात सदा हित की करें, नहीं कभी नुकसान, 
सपने में भी ना घटे, हमसे किसी का मान.
जब तक संभव हो करें, परहित की ही बात,
खुशी मिले कल्याण में, यही रहे सौगात.
--------
बहुत जरूरी प्रकृति में, सबका सम अनुपात,
नहीं ठीक अति किसी की, कमी कहीं हो जात. 
स्रोतों का करना नहीं, साधन से खिलवाड़,
होगा तांडव नाश का, लग जाएगी वाट.
जल संसाधन प्रथम हैं, उस बिन सब बेकार.
बचा सकें यदि नीर को, होगा अति उपकार.
पानी का हम कर सकें, अच्छा सा उपयोग,
जुगत बिठाएं, कर सकें, दूजे अर्थ प्रयोग.
कैसे जल से कर सकें, कई दूसरे काम,
कमी नहीं हमको रहे, ऐसा हो इंतजाम.
संसाधन ऐसे बनें, लगा सकें कुछ यंत्र,
जल संरक्षण के लिए, बता दीजिए मंत्र.
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नकल पश्चिमी देश की, करते स्वार्थी लोग,
पता नहीं इतिहास तो, उसको सोचें भोग.
प्रेम दिवस का नाम दे, करते नाटक ढोंग,
ऊपर से दलील दें, क्या है इसमें रोंग.
पटा विदेशों में रहे, दे कर लाल गुलाब,
अनजाने को भेंट दे, भूले उमर, रुआब.
नए बहाने ढूँढ कर, तन को तकते ओट,
करें शरारत चुहल से, दिल में रख कर खोट.
वेलेंटाइन संत ने, दिया प्रेम उपहार,
उनका हम को चाहिए, मान सकें आभार.
नहीं जरूरत ज्ञान की, नहीं पता इतिहास,
अपना मतलब साधते, करते हैं उपहास.
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मारा कश, निकला धुआं, गया पड़ोसी साँस,
अपने साथ उसका भी, अनहित का अहसास.
नहीं भलाई है कहीं, कोई पिए सिगार,
अपना पैसा खर्च हो, पड़ें साथ बीमार.
नहीं भला हमको लगे, सुट्टा मारे मीत,
दिल को दुख दे कर पिए, कैसी है यह प्रीत.
बीड़ी, सिगरेट से करो, हरदम ही परहेज,
चाहो अच्छा स्वास्थ्य तो, तौबा करो सहेज.
लाभ नहीं सेवन करें, जान बूझ कर लोग,
दमा, तपेदिक श्वास के, लगते नाना रोग.
धूम्रपान निषिद्ध करो, घातक मेरे यार,
इनके सेवन से लुटा, पूरा ही परिवार.
----------
चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है,

चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है,
बूढ़े बूढ़ों को मिला सके, वह अनुभूति निराली होती है,
इस पिकनिक में आ सके, वह किस्मत वाले होते हैं,
चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है,

हाँ, हाँ, चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है,
अनुभूति ने बुलाया है, जय अनुभूति की,
हो, दूर गाँव में, अनुभूति ने पिकनिक को सजाया है,
चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है,

जय अनुभूति, जय अनुभूति, रटते जाओ,
जय अनुभूति, जय अनुभूति, रटते जाओ,
सारे जग में एक ठिकाना, बूढ़े नौजवानों का,
हो मिलना देख रही है जनता, बड़े पुराने यारों का,
हो मस्त फिजाओं का झोंका, ये संदेशा लाया है,
चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है,

जय अनुभूति, जय अनुभूति, रटते जाओ,
जय अनुभूति, जय अनुभूति, रटते जाओ,
गाते जाओ, मत देखो, दिल के घावों को,
मिलने आओ, हाले दिल कहने आओ,
जिसने जितना वियोग सहा, उतना मजा उठाया है,
चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है,

अनुभूति की मीटिंग में, लोग मजे उड़ाते हैं,
अरमानों से आते हैं, हँस कर सब जाते हैं,
मैं भी चल कर देखूँ, जिसने जो कुछ चाहा है, दास ने दिलाया है,
मिश्रा ने प्रसाद बनाया है, मोहन्ता ने बटवाया है,
चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है,

चलो, बुलावा आया है, अनुभूति ने बुलाया है. 
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जीवन राह सरल नहीं, रहता हर पल क्लेश,
अकल हमारी जब लगे, धरते नाना वेश.
कष्ट भोगते जगत में, कर्मों का परिणाम, 
मन की शान्ति मिले हमें, जप, तप, प्राणायाम.
योग क्रिया से सुख मिले, चंचल मन को चैन,
तन, मन जब प्रसन्न रहे, मीठे बोलें बैन.
ईर्ष्या, लिप्सा छोड़ कर, धरें ध्यान भगवान,
नहीं कामना अधिक की, काबू रखें जुबान.
मन को शान्त बना सकें, ना भटकें दिन रात,
सीमित रहें जरूरतें, तभी बनेगी बात.
बिना अभ्यास कुछ नहीं, लगे जीवन विराम,
नहीं कभी भी भ्रम रहा, मिल जाए आराम.
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अपना घर बसवा सकें, बच्चे शादी बाद,
रहें प्रेम से मिल सभी, हो दुनिया आबाद.
नई जगह पर आ गए, हो जहाँ रोजगार,
नहीं कहीं हो दुश्मनी, सबमें बढ़ता प्यार.
दोनों ही हैं छोड़ते, अपने रिश्तेदार,
पूरा मेल जोल रहे, शादी में परिवार.
पहले भी थे बस रहे, लड़के कुछ ससुराल,
बने जमाई सास के, रहे कुटिल कुछ चाल.
मानव जीवन में मिले, पढ़े लिखे संस्कार.
शुद्ध आचरण दिख सके, जन मन का व्यवहार.
बात बराबर की रही, बेटा बहू समान,
जिनका बेटा हो नहीं, जमाई पुत्र मान.
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जीवन चलता आस पर, मिल जाता अवलंब,
कैसे इस बिन जी सकें, होता नहीं विलंब.
अंतर आशा ख्वाब में, होता नहीं विशेष,
आशा पूरी हो सके, ख्वाब नहीं अब शेष. 
आशा चेतन मन करे, दिखे नींद में ख्वाब,
खुली नींद तो भूलते, कैसा किसका ख्वाब.
घटित सही में हो रहा, काल खेलता खेल,
कड़ी मेहनत से करो, ख्वाब हकीकत मेल.
अपनी क्षमता जान कर, रखें सामने लक्ष्य,
उस पर काम आप करें, मिलें सभी को तथ्य.
असफलता तोड़े नहीं, अंतर्मन उत्साह,
बार बार कोशिश करें, लोग कहेंगे वाह.
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मन को जीतो प्रेम से, नहीं क्रोध का काम,
अपना चैन लुटा लिया, मिला नहीं आराम.
गुस्सा खाता शाँति को, विकल होत हैं अंग,
लाभ नहीं कुछ हो सके, करे चैन को भंग.
आए गुस्सा आपको, करें योग व्यायाम,
मुक्त रहें अपघात से, तन मन को आराम.
घर में यदि हिंसा दिखे, बने शाँति से काम,
समझाने से मन सकें, रूठे जिनके नाम.
सब मिल कर सुलझाइए, कुछ गुत्थी हो जाय,
दूर गलत फहमी करे, करती बुद्धि उपाय.
गलती यदि सेवक करें, शाँति से करें बात,
बार बार गलती करें, बाहर मारें लात.
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चिंतित करें किशोर को, रहे अवसाद घेर,
स्वस्थ लोग बीमार हों, यही समय का फेर.
युवा जवानी खो रहे, मस्ती भागी दूर,
चिंता छाई व्यर्थ की, सपने सारे चूर.
रही समस्या आज की, बच्चे करें तनाव,
दिखता बातावरण में, उसका यही प्रभाव.
इनका असर पड़े यही, व्यसनों के शिकार,
ऐसी आदत पड़ गई, जीवन है बेकार.
कहीं पढ़ाई, नौकरी, या घर का माहौल,
एकाकी जीवन कहे, कैसे बनें सुडौल.
चिंता मुक्त जीवन हो, करिए प्राणायाम,
ध्यान लगा कर योग हो, सेहत को आराम.
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करने वाले कर गए, अपने धन पर ऐश,
मजे मार कर जी रहे, छिपा लिया सब कैश.
पैसा दो नंबर बना, कहते आती लाज,
इज्ज़त भी उनको मिली, आदर करे समाज.
दीवाने धन के हुए, झूठे इज्जतदार,
सही कमाई बता भरें, कर ईमानदार.
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अधिक लाभ की लालसा, गलत कराए काम,
चिंता ग्राहक की नहीं, कर जाए बदनाम.
पता नहीं हमको लगे, ऐसे गड़बड़ भोग,
क्या क्या भोजन में पड़ा, जनमे कैसे रोग.
दिखने में हों एक से, मिला रहे कुछ लोग,
दूषित भोजन से लगें, नाना विधि के रोग.
काली मिर्ची, दूध में, बीज-पपीता, नीर, 
मिलती हल्दी, चाय से, बढ़ती तन की पीर.
बिना मिलावट खाइए, बदन बने बलवान,
रोग मुक्त तन मन रखे, विचार बने महान. 
कड़ी सजा उनको मिले, विचार अगली बार,
शासन में आस्था बढ़े, बने स्वस्थ परिवार.
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वंश वृद्धि का क्रम चले, बढ़ती है संतान,
उसके साथ परंपरा, पनप रही बलवान.
संस्कृति, शिक्षा से करें, स्वयं, समाज विकास,
पितरों को संतोष हो, नई सुबह की आस.
अंग्रेजी में क्या पढ़े, छोड़ दिया लिबास,
हमने थोड़ी भूल की, डिगा दिया विश्वास.
क्या हमने अच्छा किया, पितरों को सौगात,
रखें अपेक्षा बाल से, मानेंगे हर बात.
समय, समझ का फेर है, हो जाता टकराव,
अच्छे से कटता समय, थोपें नहीं प्रभाव.
नहीं आस सेवा करें, बस बच्चों का साथ,
बातचीत सुलझा सके, अंत उन्हीं के हाथ.
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बच्चों की शादी हुई, पाल लिए अरमान,
बड़ी खुशी हमको मिले, उनकी हो संतान.
दादू नानू हम सुनें, होय प्रफुल्लित गात,
अच्छे दें संस्कार हम, सुखद स्वप्न जग जात.
बोली उनकी तोतली, सुन कर मन हर्षाय,
लिए बलैंया साथ में, किस्मत पर इतराय.
घर से थोड़ा सीख कर, जाने लगे स्कूल,
अंग्रेजी की धार में, गए संस्कार भूल.
बच्चे पढ़ लिख कर गए, लें नौकरी विदेश,
पड़े जरूरत आप को, भेज रहे संदेश.
तबियत जब तक है भली, सब कुछ है स्वीकार, 
बाल पास हों या अलग, जैसी हो दरकार. 
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ईश्वर ने नारी रची, चले सृष्टि का काम,
साथ पुरुष के वह चले, वृद्धि का इंतजाम.
बाहर काम पुरुष करे, कठिन श्रम का योग,
नारी घर संभाल ले, चातुर्य का प्रयोग.
नर की तृष्णा यूँ बढ़ी, नारी बनती भार,
अर्जन हित हो साथ में, पड़ी समय की मार.
शोषण नारी का हुआ, बढ़ते अत्याचार,
प्रजनन की मशीन बना, चाहा जब बेकार.
रहा जरूरी इस लिए, पाएँ सम अधिकार,
घर बाहर हर क्षेत्र में, उनकी हो दरकार.
माँगे से भी ना मिले, चलो शरण कानून,
कहीं नहीं शोषित रहें, चूसे कोई खून.
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नर नारी अंतर बसा, दिया प्रकृति उपहार,
आकर्षण दे सृष्टि ने, उन पर था उपकार.
ब्रह्मा जी पालन करें, विष्णु देव उपदेश,
रचते सृष्टि रंग भरी, कामदेव आवेश.
करें नौकरी जन सभी, अपनी रुचि अनुसार,
रही शैक्षणिक योग्यता, कर्मभूमि आधार.
गलत लाभ लें देह का, हो अच्छा यदि रूप,
काम वासना जग गई, साथी हों या भूप.
ईर्ष्या जागी और में, प्रेरित बाकी मीत,
बदला लाभ हानि लगा, गलत पड़ी कुछ रीत.
सीमा में सज्जा करें, करें न सीमा पार,
केवल नर दोषी नहीं, रखता नहीं उधार.
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नर नारी एक रथ के, पहिए बने समान,
ताल मेल के साथ में, जीवन का निर्वान.
हालत कुछ ऐसी बनी, कुचले स्त्री के भाव, 
बेचारी कह ना सकी, किस का रहा प्रभाव. 
महिला दबी, ढकी रही, समुचित नहीं विकास,
शोषित, दीन, उसे रखा, नहीं मिला आकाश.
पिछड़ी दिखी सभी जगह, आदर नहीं समान,
मौका मिला जहाँ कहीं, दिलवाया सम्मान.
आज सफलता मिल रही, नारी को हर ओर
चमक रहीं हैं शीर्ष पर, मारे प्रतिभा ज़ोर.
संविधान ने दे दिए, नारी को अधिकार,
करें अमल ईमान से, कहता समय पुकार.
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वाहन माध्यम गति का, यात्रा हो आसान.

उसे चलाएँ ध्यान से, वरना कटे चालान.

सभी जगह संभव नहीं, करें पुलिस तैनात,

बिना नियम गाड़ी चली, हो सकता अपघात.

गलत गली में यदि चले, खुद को भी आभास,
टक्कर सामने से लगे, कितना करो प्रयास.

बिन कारण भोंपू बजा, हुए सभी बेचैन,
ध्यान भंग सबका हुआ, विचलित सबके नैन.

मुड़ने से पहले दिया, यदि समुचित संकेत,
आप सुरक्षित चल रहे, बाकी रहें सचेत.

अपने कागज़ साथ में, यात्रा के दौरान,

सुखद अनुभूति आप में, हों नहीं परेशान.

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लिखने वाले लिख चले, पढ़ने को हम शेष,
समझ गए तो भला है, वरना होता क्लेष. 
लेखक बन लेता मजा, कुछ भी कर दो पोस्ट,
दो लाइक भी मिल गए, करो मीटिंग होस्ट.
अच्छा लेखक है वही, पढ़ते जिसे अनेक,
कहें नहीं हर किसी को, अपना केवल एक.
कवि केवल प्रस्तुत करे, अपने उठे विचार, 
सुर लय ताल मिली जहाँ, पढ़िए बारंबार.
सोशल मीडिया पर लिखें, फेसबुक, टेलिग्राम,
व्हाट्सएप भी कम नहीं, करो खूब संग्राम.
जिसके पाठक अधिक हैं, वही लोकप्रिय होय,
उसके चमचे लड़ पड़ें, माथाफोड़ी होय.
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जन्म हमें जिसने दिया, वह माता कहलाय,
पिता रीति रिवाज सिखा, दुनिया से मिलवाय.
अलग पिता की बात है, दिए अलग संस्कार,
आदर्शों पर चल सकें, उस पर करो विचार.
डाँट, मार, फटकार का, रहा एक ही ध्येय,
ऊँचा सर कर जी सकें, यही बना उद्देश्य.
सिखा गया पश्चिम हमें, तीजा रवि हो जून,
खूब मान दें तात को, बैठ पास दो जून.
अब सब मिल कर ध्यान दें, रहे नहीं कुछ कष्ट, 
दिल उनका रोए नहीं, बनें हमारे इष्ट.
नहीं रहेंगे वह सदा, करिए उनकी याद,
आज बने उनकी कृपा, वरना थे बरबाद.
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नारी से करिए नहीं, कभी पुरुष से भेद,
सारे मसले हल करे, ग़म घन को छेद.
सदा सर्वदा सम रहे, नारी पुरुष समान,
ढीला पुरुष जहाँ रहा, खींची तुरत कमान.
नहीं उसे कम आंकिए, दें पूरा सम्मान,
इज्जत का व्यवहार हो, बिना वेतनमान.
उसके थोड़े काम की, आंके अधिक शरीफ़, 
हो खुश सहानुभूति से, मिल जाए तारीफ़.
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मजे जिंदगी के लिए, जो हमने इक बार,
काश ! उन्हें दोहरा सकूँ, जा कर बारम्बार.
जहाँ जवानी में गए, अच्छे थे कुछ स्थान,
दृश्य कुदरती लग रहे, हरे भरे वरदान.
गिरि, कंदर, सरिता रहे, मनोरंजक प्रमान,
अपनी कार चला गए, छोड़े कई निशान.
मजा घूमने का रहा, जब साथ हों यार,
बीवी बच्चों भी कहें, चले साथ परिवार.
जाना हो तुमको जहाँ, करो न कोई देर,
कब तक तन यह साथ दे, चले काल का फेर.
हँसी, खुशी जीवन चले, रहें नहीं अरमान,
जीने का आनंद लो, कब आए फरमान.
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होटल में ऑर्डर करें, झूठ दिखाते शान,
पैसे की चिंता नहीं, ना भोजन का मान.
माल मुफ्त का खा सकें, करते नहीं विचार, 
नहीं स्वाद जो भी लगा, कूड़े दान हमार. 
बिना जरूरत परस लें, कई लालची लोग,
जूठन में बरबाद कर, हों समाज के रोग.
खाना पकने में लगे, जुड़े हुए कुछ लोग,
उनका भी आभार हो, ईश्वर पाए भोग.
फसल लगे अपने समय, आशा करे किसान,
बीज उगे, काटे, फसल, पाए दाम महान.
कड़ी मेहनत से उगे, गेहूँ, चावल, दाल,
जो बरबाद उसे करे, उसका नहीं हवाल.
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बात भली रहिए सजग, लेते रहते हाल,
सुखी लोग सब रह सकें, बनी रहे लय ताल.
आस पास के हाल सब, देते हैं संतोष,
जहाँ दखल हर बात में, उपजे मन में रोष.
जासूसी जब अधिक हो, सब रहें परेशान,
करें बगावत चिढ़ कर, कैसे हो कल्यान.
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हिंदू संस्कृति में नहीं, मिलता शब्द तलाक,
बाहर से आकर घुसा, कहूँ बात बेबाक.
शादी वर है ईश का, मिलते जहाँ विचार,
एक लचा, दूजा मना, बना रहे परिवार.
बड़ा नहीं कोई कहीं, समता का अधिकार,
गौरव अपने देश का, करिए मत बेकार.
पढ़े लिखे जवान हुए, मिले नहीं संस्कार,
छोटी बातों के लिए, बिगड़ गया व्यवहार.
शिक्षा पाई एक सी, बराबरी अधिकार,
अहंकार मन में पला, सम रहा रोजगार.
गलती दूजे की दिखे, संयम बिना विचार,
साथी जो सात जन्म के, खतम किया व्यवहार.
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बड़े नगर में मिल रहे , बड़े निराले ठाठ, 
खान-पान, आवागमन, नित्य नौकरी पाठ.
पानी भी पीते नहीं, जहाँ सुता का ब्याह,
सोने को कमरा नहीं, भरते ठंडी आह.
भागमभाग वहाँ दिखे, वाहन चलते तेज,
जल्दी पहुँचें नौकरी, पकड़ें कुरसी मेज.
---------
पर्यावरण दूषित हुआ, फैले नाना रोग,
समझें सब दायित्व को, अपना देवें योग.
पानी, हवा निकास हो, बिना रसायन योग,
पहले ही शोधित करें, जनता बने निरोग.
कटें पेड़, जमीन नहीं, समतल अंधाधुंध,
प्लास्टिक के उपयोग पर, लगे पूर्ण प्रतिबंध.
बड़ी कंपनी भी करें, इसमें कुछ सहयोग,
रोक प्रदूषण पर लगे, उत्पादन संयोग.
कुदरत से हमको मिली, हरियाली उपहार,
उसे बनाए हम रखें, कुदरत का आभार.
नहीं अपेक्षा गैर से, कर लें अपना काम,
छोड़ें आदत दोष की, रखें काम से काम. 
------
लगे भला मन को जहाँ, करिए वहाँ निवास, 
नहीं मजबूर हो बसें, रखें ईश की आस. 
जरूरतें सीमित रखें, बढ़ी आयु के साथ, 
नहीं दखल हर बात में, भली करेंगे नाथ. 
रखें बुढ़ापे में सदा, खान पान का ध्यान, 
भोजन तरल भला करे, पचने में आसान.
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कोविड के तेवर बढ़े, घातक हुआ प्रहार, 
बिना मास्क निकले जहाँ, फौरन हों बीमार. 
किसी तरह से सह गए, कोरोना की मार, 
दौर दूसरा आ रहा, हो जाओ तैयार. 
सुई, सुरक्षा अब तलक, बनते मानव ढाल, 
छुआछूत के फेर में, सारे जन हैरान.
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घर भीतर से साफ हो, बाहर डाल भंगार, 
बीमारी घर में घुसे, करो लाख उपचार.
पालन करिए नियम का, जो चाहो कल्यान, 
जान बूझ अवहेलना, है अपराध महान. 
कचरे के डब्बे अलग, नीले, पीले, लाल,
गीला, सूखा डालिए, कोई नहीं मलाल.
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चलते हम पिकनिक को, ले कर अपनी कार, 
आलोकित चेहरा है, खुश दिखता परिवार.
करी प्रतीक्षा बहुत दिन, कोरोना का ज्वार, 
लगी वैक्सीन, हो गया, विष कण का उपचार. 
घर के अंदर ही बसे, रहे चार दीवार,
सीमित जीवन मास्क तक, काढ़ा है उद्धार.
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बिना मास्क के चल दिए, बन कर चतुर सुजान, 
घर के बाहर मिल गए, कितने ही अनजान. 
करें सुरक्षा आप ही, रख लें अपना ख्याल, 
कोरोना की दृष्टि से, बच लें बूढ़े, बाल. 
दो गज की दूरी रखें, नहीं निगाहें चार, 
हाथ मिलाना छोड़ कर, दूर-दूर का प्यार. 
-------
कुदरत ने हमको दिए, मूल्यवान उपहार, 
जीवन में वह बन गए, प्राणों के आधार. 
खाना, पानी, हवा से, तन मन का उपचार, 
आसन, प्राणायाम से, होते शुद्ध विचार. 
रोशन सूरज धूप से, होता बदन प्रसन्न, 
मिले विटामिन डी हमें, अद्भुत गुण संपन्न.
वायु प्रदूषण मुक्त हो, वाहन हों बिन शोर, 
महानगर जीवन चले, खुशहाली की ओर. 
सिंचाई को जल मिले, खेतों में हो खाद, 
गुणवत्ता हो बीज की, बढ़ जाए उत्पाद. 
नदी भरी हों नीर से, सही समय बरसात, 
चटक धूप भी खिले जब, मौसम की सौगात.
-------
अपने मजहब पर मिटें, मुसलमान, सरदार, 
उनसे कुछ बोलो नहीं, हो सकती तकरार. 
एक बात कह देखिए, लड़ने को तैयार, 
गजब एकता दिख सके, गलती नहीं उधार. 
सुनो कथा बलिदान की, कर नाना संग्राम, 
रची कहानी त्याग की, नअमर किया है नाम. 
--------
कई विरोधी मिल गए, रचने को षडयंत्र,
जनता को बहका रहे, फूँक विभाजन मंत्र, 
भारत के विपरीत हों, उनके सारे काम, 
असर नहीं कुछ भी पड़े, मोटी उनकी चाम. 
आती उनके काम से, गद्दारी की बास, 
सच्चाई में है नहीं, उनका कुछ विश्वास. 
-------
आबादी हद से बढ़ी, बिगड़ गया अनुपात, 
सारी सुविधा मुफ़्त में, उन सबको हैं प्राप्त. 
सीमित जनसंख्या करे, उचित समाज विकास, 
सबको अवसर एक से, सी.ए.ए. की आस. 
खतना ही काफी नहीं, दूर करो औजार, 
उसे खतम समूल करो, नहीं बढ़े परिवार.
--------
नोट पुराने बंद थे, जब सोलह था साल, 
लोग सभी हैरान थे, बिगड़े उनके हाल. 
पैसे खा कर बदलते, मौका खोज दलाल, खातों में करते जमा, पूछे बिना सवाल. 
मोबाइल से लीजिए, बदले में सामान, 
मनचाहा खर्चा करें, रखें नहीं अरमान. 
सुधरा नहीं अब तक भी, जनता का वह हाल, 
कोरोना ने कर दिया, सबको अब कंगाल.  
नहीं जमाना नकद का, डिजिटल होता काम,
झोली फैला लीजिए, वापस जो भी दाम. 
झोले में डलवाइए, छुए बिना सामान, 
घर ला कर नहलाइए, पूरा दें सम्मान. 
--------
प्रश्न उठाएँ पुलिस पर, करके सोच विचार,
पुलिस पकड़ कर ले चली, करने अत्याचार.
रही भावना क्रोध की, लेते बदला आप, 
डाट डपट कर मारते, देते हैं संताप. 
रखा पुलिस बल साथ में, घेर लिया परिवार, 
मानवता को भूल कर, करते अत्याचार. 
------
उलटा सीधा बोल कर, पूछे सारी रात, 
धौंस दिखा कर लिख रहे, अपने हित की बात.
जो भी हम कहते रहे, दबा दिए जज़्बात, 
लोकतंत्र से भय लगे, आफत के हालात. 
कैदी सा व्यवहार कर, मिले न मन को चैन,
पूछ ताछ के काम में, लगती सारी रैन.   
-------
कारनामे उनके सुने, खौला अपना खून, 
आहत तन-मन में भरा, एक अजीब ज़ुनून. 
झूठे से आरोप से, लगा व्यर्थ का दोष,
सही यातना पुलिस की, बढ़ता जनता रोष. 
मिला प्रशासन पुलिस से, दे कर शह गंभीर, 
न्याय पालिका भी मिली, कौन हरेगा पीर.
-------
बहुत दुख देते हैं, वो पाँच दिन.

घर पर प्रतीक्षारत पत्नी को, जब, 
पति आॅफिस से आते हैं, 
सप्ताह भर, जब थके, लुटे से
बॉस से झाड़ खा, मुरझाए से, 
बहुत दुख देते हैं, वो पाँच दिन.

सेवारत सैनिक की पत्नी को, जब, 
पति एक माह के अवकाश पर, 
सीमा चौकी से गाँव की वापसी में,
प्रतीक्षा की अवधि बिताते हुए, 
बहुत दुख देते हैं, वो पाँच दिन.

तैल कार्मिक की पत्नी को, जब, 
खराब मौसम में चाॅपर रद्द हो तो, 
फिर कब वह मैनीफेस्ट होंगें, 
सेवा चालू होने की बेचैनी में, 
बहुत दुख देते हैं, वो पाँच दिन.

कोविड टेस्ट निगेटिव होने पर, जब, 
क्वारेंटाइन हुए परिवार जन को, 
संपर्क में न आने के निर्देश में, 
बात भी न करने की कसमसाहट में, 
बहुत दुख देते हैं, वो पाँच दिन. 

कभी कभी सोच दूषित हो, जब, 
मन चिंता से ग्रसित हो, 
अनहोनी आशंकाएँ सताएं, 
पूजा पाठ में भी जी न लग पाए, 
बहुत दुख देते हैं, वो पाँच दिन. 

इसलिए, सोच को बदल लो, अब, 
चिंता का परित्याग करो, 
चुनौतियों का सामना करो, 
गलत भावों को मन में घर न करने दो, 
वरना, बहुत दुख आगे, मेरे मन. 

बहुत दुख देते हैं, वो पाँच दिन. 
बहुत दुख देते हैं, वो पाँच दिन. 
-------
बहुत बड़े विद्वान हैं, अपने ग्रुप के लोग, 
सारे ही हैं अनुभवी, रहे बुढ़ापा भोग. 
निष्ठा से सेवा करी, मारे नाना तीर, 
मान बढ़ाते सभी का, हरते सबकी पीर. 
रही ख़ासियत ग्रुप की, चर्चा का विस्तार, 
रखें समस्या लोग कुछ, सारे करें विचार. 
नई नई खबरें मिलें, क्विज़ भी बनती शान, 
कविता, गाने, वीडियो, रखते सब का मान. 
राजनीति पर भी करें, चर्चा और बवाल, 
गलत बात कोई कहे, उसकी खिंचती खाल. 
कई लोग ग्रुप से जुड़े, सुन कर इसका नाम, 
मिलती रुचि समान हैं, करो खूब आराम. 
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आगे बढ़ने के लिए, लगता गुरु का ज्ञान, 
उस के निर्देशन बिना, राह नहीं आसान. 
गुरु की यह इच्छा रहे, दे अधिकाधिक ज्ञान,  
पा कर गंगा ज्ञान की, गायब हो अभिमान.
शिक्षा ऐसी मिल सके, जीवन हो वरदान, 
लाभ स्वयं भी ले सकें, सब का कर कल्यान. 
सच्चे गुरु दुर्लभ हुए, जिनसे बढ़ती शान, 
झूठे, लोभी, लालची, बैठे खोल दुकान. 
ट्यूशन का चक्कर चला, खूब कमाया माल, 
लोभ सफलता का दिखा, किए गरीब हलाल. 
गुरुकुल अब दिखते नहीं, इंग्लिश का अरमान,
खुली मदरसा श्रृंखला, शिक्षा का वरदान. 
------
सेवा में हरदम लगे, खतरे में रख जान, 
आभारी हम हों सदा, उनका कर सम्मान.
नमन वैद्य को कीजिए, देता सही सलाह, 
पीड़ा का वर्णन सुने, कैसे हरे कराह. 
पीड़ा-हर्ता का करें, नहीं कभी अपमान, 
उससे हाल कहें सभी, शुभेच्छु खुद का जान. 
मूल मंत्र सेवा रहे, पद्धति कुछ अपनाय, 
गोली, सीरप या सुई, लाभ खूब हो जाय. 
एक चिकित्सक रोज ही, देखे कई मरीज, 
रही अलग सबकी व्यथा, लगते सभी अजीज.  
कोरोना से बढ़ गया, उनका कुछ कर्तव्य, 
अपने अपने ढंग से, साध रहे मंतव्य.
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चालू रथ यात्रा हुई, दिल में श्रद्धा साथ, 
मुँह से उच्चारण करें, भगवान जगन्नाथ. 
भक्त हेतु धारण किया, बाकी उसका रोग, 
मौसी घर की योजना, होने चले निरोग. 
जनक पुरी को प्रभु चले, मौसी जी के धाम, 
क्वाथ पथ्य की लें दवा, करें पूर्ण आराम. 
पुरी क्षेत्र ऐसा बना, छाया अनुपम नूर,
अन्न भरे भंडार से, लो प्रसाद भरपूर. 
अपने मंदिर से चले, तज भक्तों की भीड़, 
प्रेम मार्ग पर चल पड़े, छोड़े अपने नीड़. 
कोरोना के काल में, रथ यात्रा संपन्न, 
श्रद्धा पूरित नयन हैं, मन भी हुआ प्रसन्न.
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जीवन का कारण बना, कुछ मधुरिम संगीत, 
रही पुरातन मान्यता, यही पुरानी रीत. 
मन भरता उल्लास से, उठता दिल से गान, 
पुलक हिलोरें ले रहे, जाग गए अरमान. 
गाता दिल मेरा रहा, वही पुराना राग, 
काबू में कैसे करूँ, होता जब अनुराग. 
मन की वीणा बज उठी, छिड़ा मधुर संगीत, 
प्रियतम बोले सुन उसे, सच्ची लगती प्रीत. 
गायन वादन साथ में, मिले मजा आनंद, 
साज सजे लय ताल में, स्वर में गाते वृंद. 
बिन बोले सब कह सके, मन के भीने भाव, 
नर्तन की मुद्रा कहे, डाले गजब प्रभाव. 
------
चाह रही संतान की, मिले पिता का प्यार, 
भली परवरिश दे उन्हें, अच्छे से संस्कार. 
बेटा बन खाएं सभी, पिता नहीं खा पाय, 
उसके हित में मान ले, भले गलत हो राय. 
एक दिवस काफी नहीं, करें पिता का मान, 
सीखी प्रथा विदेश से, कर्ज़ मुक्ति संज्ञान. 
आदर से सुत बोलते, करें पिता को प्यार, 
हर दिन उन पर ध्यान दें, उन का हो आभार. 
फर्ज़ निभाया पिता ने, किया नहीं उपकार, 
कर्ज़ पिता का दें चुका, जीवन को धिक्कार. 
पिता पुत्र की समझ से, बनता है परिवार, 
उन से जुड़ती श्रंखला, दृढ़ होता आधार.
------
सभी ग्रहों की दिख रही, नियत निराली चाल,
अपनी कक्षा में चलें, है निर्धारित काल.
चलते-चलते राह में, आ जाए अवरोध,
नहीं रोशनी दिख सके, छाया करे विरोध.
चंदा-सूरज ग्रहण में, पूजा-पाठ विधान,
ग्रह-संकट के काल का, केवल यही निदान.
------
सूर्य किरण पहुँचे धरा, चल कर सीधी रेख, 
चंदा आता बीच में, ग्रहण कभी मत देख.
कभी-कभी आती धरा, सूर्य चांद की राह, 
ज्योति चाँद की रुक गई, पूजा-भक्ति सलाह. 
सूर्य किरण पहुँचें नहीं, तम छाए चहुँ ओर, 
मानस मन भयभीत है, खग-मृग करते शोर. 
------
रखिए स्वस्थ शरीर को, रोज़ाना कर योग, 
थोड़ी कसरत भी करें, दूर रहें सब रोग. 
सारी जनता यदि करे, थोड़ा सा व्यायाम, 
दूर व्याधियाँ हो सकें, मिल जाता आराम. 
योग ध्यान से खुश रहें, दुनिया भर के लोग, 
भारत का आदर बढ़ा, मिटते जब से रोग. 
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प्रथा पुरानी चल रही, करो नियम से योग, 
पता नहीं जब स्वयं को, टी.वी. देखें लोग. 
राम देव ने विश्व को, दिया योग संदेश,
नाम पतंजलि का लिया, प्रसिद्धि देश विदेश. 
मने जून इक्कीस को, बाहर भारत योग, 
योग दिवस के नाम से, जाने सारे लोग. 
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रक्तदान कोई करे, ऊँचा होता शीश, 
रोगी दे अनेक दुआ, भला करे जगदीश. 
देना हो बीमार को, उसका जीवन दान, मदद यही सबसे बड़ी, रुधिर दीजिए दान.
लगी कमी कुछ खून की, कैसे बचती जान, 
काम बड़े उपकार का, जिसको अपना मान.
कितने रोगी चाहते, मिल जाए कुछ खून, 
पुण्य बड़ा इससे नहीं, सिर पर चढे़ जुनून. 
शोधन होवे खून का, या कोई अपघात, 
रक्त सभी को चाहिए, हो जाए उत्पात. 
दंगा पीड़ित जब दिखें, मन में करो विचार, 
दया नहीं आई जिसे, वह नर पशु अवतार. 
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छूट मिली, जनता हँसी, कर्फ़्यू है अन-लाॅक, 
धज्जी दूरी की उड़ीं, पुलिस खड़ी बेबाक. 
खुला लाक डाउन यहाँ, छोड़ा अपना नीड़, 
भागे कारोबार को, बढ़ा रहे हैं भीड़. 
देवालय, मस्जिद खुले, जाग गए भगवान, 
फिर से बजती घंटियाँ, होती कहीं अजान. 
वापस लौटी जिंदगी, निकल पड़ा इंसान, 
नहीं भजन होता कहीं, भूखी हो संतान. 
डर से घर में ही रहे, पूरे ढाई माह, 
रहे सुरक्षित भवन में, मानी पुलिस सलाह. 
कोरोना से कम मरे, भय ने मारे अथाह, 
अंदर से मजबूत हो, बढ़ती जीवन चाह. 
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जैव विविधता बन गई, हम सब का संदेश, 
जीव-जंतु के साथ में, हरा-भरा यह देश. 
पर्यावरण बचाइए, दे कर अपनी जान,
औषधियों के लाभ का, बाटें सबको ज्ञान. 
धरा सुहानी जब लगे, हरियाली भरपूर, 
सभी पेड़ पौधे फलें, विधना को मंजूर. 
चिपको आंदोलन चला, रोका पेड़ कटान, 
नमन अग्रजों को करें, धरती पुत्र महान. 
कुदरत ने हमको दिया, पौधों का वरदान, 
नहीं भूल से हम करें, इन सब का अपमान. 
पेड़ काटते स्वार्थ में, झूठा होय विकास, 
असमय आती आपदा, क्यों करते परिहास.
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चक्रवात निसर्ग करे, सारा बंटाधार,
तेज़ हवा के साथ में, बरस पड़ी जलधार.
पेड़ गिरे, पौधे गिरे, हुए खेत वीरान, 
खड़ी फसल का नाश कर, बहुत किया नुकसान. 
आफत सी लगने लगी, होती बिजली फेल, 
मच्छर भी हैं काटते, कैसा कुदरत खेल. 
जान, माल के साथ में, ढहने लगे मकान, 
गली मुहल्ले क्या कहें, बड़े नगर हलकान. 
कोरोना से त्रस्त थे, झेल रहे अपघात, 
कोविड कातिल कह रहा, तेरी क्या औकात. 
कर्फ़्यू सारी रात का, बिगड़ गए हालात,
आज अचानक आ गई, बेमौसम बरसात.
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राशन की लाइन लगी, दिखें लगे नर-नार, 
भौतिक दूरी माप कर, मन में करें विचार, 
मन में करें विचार, कब तक लगेगा नंबर, 
धूप तेज हो रही, गरमी दे रहा अंबर,
कुछ तो राहत मिली, वरना सुन रहे भाषन,
लो संयम से काम, सबको मिलेगा राशन. 
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बहुत हलका महसूस कर रहा हूँ,
सड़क पर यातायात गायब, 
घर पर व्हाट्सैप गायब, 
मोबाइल पर ग्रुप्स गायब, 
बहुत हलका महसूस कर रहा हूँ. 

समय से हो रहा प्राणायाम, 
समय पर मिलता जलपान, 
समय से होता शयन-आराम,
बहुत हलका महसूस कर रहा हूँ. 

एक साथ मिलता परिवार, 
एक साथ चर्चा - व्यवहार, 
एक साथ भोजन -आहार, 
बहुत हलका महसूस कर रहा हूँ. 

नहीं बाहर निकलने का झंझट, 
नहीं धूप से लू का खतरा, 
नहीं कोरोना संपर्क का भय, 
बहुत हलका महसूस कर रहा हूँ. 

आशा बंधी अपनी एकता की, 
आशा हुई नव संकल्प शक्ति की, 
आशा बंधी अब बीमारी मिटने की, 
बहुत हलका महसूस कर रहा हूँ. 

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बीमारी फैली दिखी, क्रोना उसका नाम, 
डर से उसके कांपते, बड़े बड़े गुलफ़ाम. 
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लक्षण उसके दीखते, खाँसी और बुखार, 
मास्क लगाएँ नाक पर, खुद से करिए प्यार. 
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अनुभव जैसे ही करें, क्रोना के आसार, 
तुरत जाँच करवाइए, एकाकी उपचार.
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इटली पहुँचा चीन से, छोटा सा आकार, 
हाथ मिला उसने किया, अपना खूब प्रसार. 
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भारत में भी आ गया, विष कण यह विकराल, 
जनता कर्फ्यू से नहीं, हो जाएं बेहाल. 
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सेवाकर्मी का करें, हम दिल से आभार, 
जोखिम लेकर जान का, करते हैं उपचार.
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आबादी उनकी बढ़े, मिले वोट अधिकार, 
मार-काट कर लूट से, खूब भरो भंडार. 
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मस्त रहे खतना करा, बुझा सेक्स की प्यास, 
जड़ से पूरा साफ हो, नहीं बचेगा बाँस. 
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हमने मुल्ला कह दिया, गए बुरा वह मान, 
अल्ला कहने से सदा, उनकी बढ़ती शान. 
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आज किया सरकार ने, मतदाता का ध्यान, 
वोट बैंक की सुरक्षा, उनका हो सम्मान. 
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मतदाता को चाहिए, करे वोट अधिकार,  
बिना स्वार्थ मतदान से, सुखमय हो संसार. 
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हक का मौका जब मिले, लायक जन चुन लाय, 
सच्चा नेता वह नहीं, जो जन को भरमाय. 
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सबसे मिल कर हो रहा, एक सुखद अहसास, 
वही पुराने यार हैं, वैसा ही विश्वास. 
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मिलने जुलने से बढ़ें, आपस के संबंध,
ऐसी पिकनिक में नहीं, रहता कुछ प्रतिबंध. 
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कुछ करने की भावना, भरती नई उमंग, 
अच्छे हों परिणाम जब, जीवन साथी संग. 
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पौधे रोपे दूर जा, आई जब बरसात, 
विदेश यात्रा रूप में, श्रीलंका सौगात. 
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सालाना उत्सव मना, दिखा अकल का मेल, 
जादू से मोहित हुए, चला गीत का खेल. 
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आने वाले समय में, क्या हों अच्छे काम, 
दास, अरुण, सोचते, करे बिना आराम. 
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मिलने-जुलने से बढ़े, आपस का व्यवहार, 
कभी-कभी मिलते रहो, बना रहेगा प्यार. 
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दमानिया जी ने किया, आयोजन इस बार, 
लगे बुलाने सभी को, कोशिश करी हजार.
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पहले का उत्सव मना, कोई नहीं बवाल, 
दूजे ग्रुप का हो रहा, पूरा एक साल. 
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बाहर से आए अतिथि, करने को एन्जाॅय, 
भोजन बार-बे-क्यू में, पूरा मज़ा उठाय. 
-----

मिलने का मौका मिला, बहुत समय के बाद, 
आभारी तहे दिल से, करें विचार, विवाद. 
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मिलते रहें आपस में, बढ़ जाती पहचान,
कठिन नहीं यह काम है, सबका होता मान. 
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किलकारी नवजात की, लाए खुशी बहार, 
मंगलमय जीवन बना, सुखी हुआ परिवार. 
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निखिल हिमांशी लाल को, कुछ भी कहें पुकार, 
हसरत दादी की बढ़ीं, महक उठा संसार. 
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बच्चे के आगमन से, मिले नए संबंध. 
नाना-नानी की हंसी, फैली मधुर सुगंध. 
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आफिस के अंदर रहाती थीं, 
ते वे आफिस के अंदर रहाती हैं. 

गाड़िन को साझा करातीं थीं, 
ते वे गाड़िन को साझा करतीं हैं. 

ए.सी. गाड़ी में आती-जाती थीं, 
ते वे ए.सी. चेंबर में रहाती हैं. 

नौकरी में पसीना बहाती थीं, 
ते वे बारिश में पसीना टपकाती हैं. 

बच्चन को छोड़ जाती रहीं, 
ते वे बच्चन को छोड़ जा रहीं. 
------

चलो, कुछ गंद मचाएँ, कुछ गंद मचाएँ. 

छत से कुछ भी भेंट चढ़ाएँ, 
अंडी-छिलकों से लाॅन सजाएँ,
बासी रोटी से काक लुभाएँ, 
घर के बाहर कचरा फैलाएँ,
क्योंकि, सफाई वाला है, न ? 

पानी व्यर्थ खूब बहाएँ, 
जोर से घर में चिल्लाएँ, 
बच्चों को न कभी समझाएँ, 
दारू पी कर शोर मचाएँ, 
क्योंकि, पड़ोसी सहन करेंगे न ? 

नियम समाज को धता बताएँ, 
अपना राज हर जगह चलाएँ, 
रोज कमेटी को गाली दे आएँ, 
अपने अभाव खूब गिनाएँ, 
क्योंकि, यहाँ सोसायटी है न ? 

पीक पान की मार न पाएँ, 
कचरा डब्बे में फेंक कर आएँ, 
गीले-सूखे में अंतर बतलाएँ,  
बाल काढ़ कर पोछा लगाएँ, 
क्योंकि हम समाज में हैं, न ?

व्यवस्था को गाली दे आएँ, 
अच्छे चलते काम रुकवाएँ, 
मतलब हित रिश्वत दे आएँ, 
कमजोर पर रौब दिखाएँ, 
क्योंकि हम भारत में हैं, न ? 

चलो, कुछ सभ्य बन जाएँ, सभ्य बन जाएँ.

देश समाज का हित हो जाए, 
सुखी परिवार हमारा हो जाए, 
अच्छा, ऊँचा नाम हो जाए,  
विकास की मिसाल हो जाए,
क्योंकि देश हमारा ही है, न ? 

चलो, कुछ सभ्य बन जाएँ, सभ्य बन जाएँ.

-----

मजे मकानी में किए, खेले नाना खेल, 
सारे बच्चे आ गए, ले कर अपनी रेल.
------

पुणे-मुंबई के मिले, बीस बड़े छह बाल, 
कुछ दिल की बातें कहें, अपने बोलें हाल.
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अपने में सब मगन रहे, ढूँढें अपना साथ, 
ख़्याल दूसरों का रखें, मिला हाथ से हाथ. 
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अपनी मन मरजी करें, पूरे सब अरमान, 
जो दिल चाहा कर लिया, रख कर सबका मान. 
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खाना नाश्ता समय से, नहीं कोई फ़िक्र, 
तारीफों के पुल बंधे, होता सबका ज़िक्र. 
-----

नाच, ट्रैकिंग, हाउज़ी, खेले खेल तमाम, 
तैराकी में रुचि दिखी, सुबह, दोपहर, शाम. 
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सुमित काम सारे करें, गोलू ले तारीफ,
इंतजाम अच्छा किया, नहीं कहीं तकलीफ. 
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लूटा बारिश का मजा, पाया सबका प्यार, 
बच्चों के उत्साह से, होता हर्ष अपार. 
------

आगे भी करते रहें, आयोजन हर बार, 
मुकरे आप अगर कभी, हमला तुमरे द्वार. 
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पौध लगाने हम चले, मिल कर सबके साथ, 
धरती हरित बनी रहे, काम हमारे हाथ.
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धरती की सज्जा करें, हरे पेड़ के संग, 
बातावरण साफ रहे, स्वस्थ रहे हर अंग. 
-----

शोधित वायु हमें मिले, होती कार्बन मुक्त, 
नमन प्रकृति को हम करें, आक्सीजन से युक्त. 
-------

ईंटों के मकान बने, कटते जंगल पेड़, 
नहीं रहे जब खेत ही, दिखे कहाँ से मेड़.
--------

इंजन का निकले धुआं, कुछ तो करो उपाय, 
हरियाली अब घट रही, दम सबका घुट जाय. 
-------
चाहो जो सुख से जिओ, कुदरत कर दे माफ, 
दूर प्रदूषण को करो, रखो जलवायु साफ. 
-------

बारिश हो बरसात में, यह कुदरत की रीत, 
गरमी में गरमी लगे, लगे शीत में शीत. 
-------

भीगी कुटी गरीब की, अंदर आए नीर, 
सुबह शाम रोटी नहीं, कैसी है तकदीर. 
-------

पैसे वाले ढूँढते, झरने और प्रपात, 
मने मौज, आए मजा, जब होती बरसात. 
--------

जिपनिक में हम चले, ले अपना परिवार, 
अवसर मिलने का मिला, बढ़ा हमारा प्यार. 
----------

कभी-कभी मौका मिला, आया नेक विचार, 
नेता साथ न आ सका, ऐसा पहली बार. 
----------

मिलते जुलते रहें हम, बढ़े समझ, व्यवहार, 
होते मुक्त तनाव से, बढ़ता कारोबार. 
---------

नानी जी का हो रहा, अनोखा इम्तिहान,
प्रानिका को खिलाने में, हो रहीं परेशान,
हो रहीं परेशान, सुलाने में अटकी जान, 
कैसे यह बालिका, सुन लेगी कहना मान, 
फिर एक इतिहास बना, सुना रही कहानी, 
आई याद नानी को, प्रिय अपनी नानी. 
----------

नेक काम ले हाथ में, करें स्वप्न साकार,
कैंसर पीड़ित की मदद, कर साधन उपचार, 
कर साधन उपचार, जुटा संभव प्रयास,
रोगी तन स्वस्थ हों, जगाएँ नया विश्वास,
*इत्ती सी हंसी*, देती *इत्ती सी खुशी* अनेक, 
पूरे मिशन हो पाएँ, जब उद्देश्य हो नेक.
----------

रोग संतप्त जगत में, बड़े पुण्य का काम,
ऐसे कर्म हम करें, मिल जावे आराम,
मिल जावे आराम, *अनुभूति* व *गामखोरा*, 
सभी ने आगे आकर, मनोरंजन बिखेरा,
हास्य कवि सम्मेलन, रहा गजब संजोग,
हँस बोल कर मिल लें, तो मिट जाते सब रोग.
-----------

गतिविधियाँ ग्रुप पोस्ट की, दें अनेकता में एकता, 
ध्यान एक दूजे का रखें, करें सबकी सहायता, 
करें सबकी सहायता, राजनीति से रह कर दूर, 
आहत न हों भावनाएँ, ग्रुप छोड़ने को मजबूर, 
हँसी, मज़ाक, चुटकुले, सूचना और बधाइयाँ, 
सक्रिय सहयोग से सजीव रहें, ग्रुप की गतिविधियाँ. 
--------------

बात बात की बात में, बात को खींचे जाय,
समझाने से न चुपे, औरन को भड़काय,
औरन को भड़काय, करे बहस लगातार,
ज्ञान प्रदर्शन में, झलके दर्प, दंभ, अहंकार, 
शाँत चित्त से सोचें जरा, मिले सत्संग सौगात, 
ऐसी नौबत न लाइए, जो बिगड़ जाए बात.
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झाड़ झाड़ कर झाड़ को काट, किया झाड़ का नाश,
औद्योगीकरण के नाम पर, हुआ पर्यावरण विनाश, 
हुआ पर्यावरण विनाश, वनों का हुआ सफाया,
स्वच्छता अभियान की भेंट बता, कंक्रीट  जंगल बनाया,
नई दिशा दिखा कर किया, महाविकास जुगाड़,
स्वस्थ संतुलित जीवन हेतु, खूब लगाओ झाड़.
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नारी सुखी जहान में, जाको पति घर के काम कराय, 
बहू आन के सास की, सब बातें मान जाय,
सब बातें मान जाय, बेटा होवे आज्ञाकारी, 
सब घर पर रौब जमाय, बनी रहे पूरी अधिकारी,
जो मात पिता के साथ रहे, बन कर सब की प्यारी, 
राज करे परिवार पर पूरा, भारी आज की नारी.
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दर्प, दंभ ने किया, दिल को दुखी अपार,
प्रेम भाव बरज कर, झुलसाया मन प्यार,
झुलसाया मन प्यार, तोड़ अपनों से नाते,
कुटिल कटु वचनों से, बंद करीं सब बातें, 
दे कर कसम, वर्जना, न दिखलाओ गर्व, 
शाँति, सुख से जीवन जीओ, छोड़ दंभ और दर्प.
-------------

उभार उभार कर उभार रहे, सूक्ष्म वस्त्र तंग,
जनता फैशन समझ रही, दीख रहे सब अंग,
दीख रहे सब अंग, तुरत नज़र में सबके आए,
शोहदे कसके तंज, आपस में वे मुस्काए,
राखो कुल का मान, और परंपरागत संस्कार, 
तन ढक के वस्त्र से, मत शालीनता उभार.
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किसान के नसीब में गरीबी ही,
लिख रखी है, ऊपर वाले ने,
सियासत दानों को मज़ाक,
सूझता है, इनकी ज़िंदगी से.
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वन ज़ीरो नाइन एट हेल्प लाइन

छोटा मान के न करें, बच्चों पर अत्याचार, 
सजग बाल हैं, आज के, करते खूब विचार, 
करते खूब विचार, लगती भावनाओं पर चोट,
फौरन डायल कर सकें, *वन ज़ीरो नाइन एट*,
तुरत पुलिस आ जाए, ले हाथ में सोटा,
माफी माँगो बाद में, न समझो बच्चा छोटा.
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गुण अपने न छोड़ सके, पेड़ न होवे क्र्र ,
दोष पात बातावरण को, पाय अकड़ गुरूर.
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सुरा ही भरी सुराही में, दे आनंद अपार,
सुरूर सुरा का अप्रतिम, करे श्वास संचार, 
करे श्वास संचार, व्यथा, वेदना सब भूली,
शीतल, निर्मल मन किया, क्षुधा, क्लाँति हर ली,
क्षरण तन का करे, यदि सेवें आकंठ मदिरा,
अल्प मात्रा में सेवन, बन जाए सुधा यही सुरा.

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चलो, तुम्हें मनाते हैं.
कुछ झुकते हैं, कुछ झुकाते हैं, 
कुछ सुनते हैं, कुछ सुनाते हैं, 
कुछ रोते हैं, कुछ रुलाते हैं, 
चलो, तुम्हें मनाते हैं.
पुरानी बातें दोहराते हैं, 
अपनी व्यथा सुनाते हैं, 
आशंकाओं से घबराते हैं, 
चलो, तुम्हें मनाते हैं.
पीड़ा में स्वप्न सजाते हैं, 
नयी आशाएँ जगाते हैं, 
आज का जीवन जी जाते हैं .
चलो, तुम्हें मनाते हैं.
बीते को भुला कर, मन बहलाते हैं, 
निर्णय ले, स्वयँ को मजबूत बनाते हैं, 
बना रहे सद्भाव, प्रेम, यही दोहराते हैं, 
चलो, तुम्हें मनाते हैं .
----------
चलो, अब मान जाते हैं.
कुछ सुबकते हैं, कुछ चुपाते हैं, 
कुछ भड़कते हैं, कुछ सहमाते हैं, 
कुछ कसकते हैं, कुछ तरसाते हैं, 
चलो, अब मान जाते हैं.
दिल का हाल सुनाते हैं, 
बीते कल को बिसराते हैं, 
भावी कल पर हर्ष मनाते हैं, 
चलो, अब मान जाते हैं.
अपनों पर प्यार लुटाते हैं, 
भ्राँति दूर भगाते हैं, 
अहं को बिसराते हैं, 
चलो, अब मान जाते हैं.
हालात से बँध जाते हैं, 
सद्भाव, स्नेह बढ़ाते हैं,
सबको माफ़ कर जाते हैं, 
चलो, अब मान जाते हैं.

-------------
जीवन रहस्य : -

जीवन reset होएगा, तुरत मृत्यु के बाद,
तन को तो पार लगा दो, पर मन रहता अपवाद,
पर मन रहता अपवाद, भटकाती मोह माया,
ले स्वर्ग प्राप्ति की लालसा, जीवन व्यर्थ गँवाया,
करो निष्काम कर्म, काट कर ममता बंधन,
मिलेगा अनुुपम आनंद, सफल बनेगा जीवन.
-----------

भारत माँ की पीड़ा : - 

क्या तुम भारत माँ की संतान हो ?

क्या सच में, 
तुम भारत माँ की संतान हो ?
कभी झाँक कर देखो, अपने गरेबान को ,
अपने किए कर्म और अपनी पहचान को ,
समाज में अपने दायित्व और अभिमान को ,
बेगुनाही पर रोते, कराहते, बिलखते इंसान को ,
दर्द में दम तोड़ती, बेशर्मी झेलती माँ के अपमान को ,
क्या सच में, 
तुम भारत माँ की संतान हो ? 

कभी अनुभव किया है, भूखे के सम्मान को,
गरीब की बेटी की रोटी को तरसती ज़ुबान को,
अकाल पीड़ित के लाचार दीन ईमान को,
फुटपाथ पर बेर के ढेर, बेचने वाले के अनुमान को,
नर कंकाल को मिली भीख की मुस्कान को,
क्या सच में, 
तुम भारत माँ की संतान हो ?

कहीं देखा है, दंभी, अभिमानी के अज्ञान को,
पाखंडी, धूर्त, कुटिल के अभिमान को,
टुच्चे, लफंगे, गुंडे, छुटभैऐ की संतान को, 
हताश, बदकिस्मत, सम्राट किसान को,
एन.जी.ओ. को मिलने वाले अनुदान को,
क्या सच में,
तुम भारत माँ की संतान हो ?

यदि नहीं, तो देखो, पूर्वजों के बलिदान को,
ईश्वर के उपहार, जीवन के सम्मान को,
किसी ईमानदार, संतुष्ट, निरपराध जवान को,
आशीष देती माँ की नेक ज़ुबान को,
माँ भारतीय की रक्षा रत सैनिक के गुणगान को. 

करें नमन स्वर्णिम भविष्य के शुभचिंतक उपमान को.

---------

दान 

दान धर्म का फूल है, जीवन का उपहार,
दान से ही पाइए, परमातम का प्यार,
परमातम का प्यार, सुधर जाएगा जीवन,
इस से जो संतोष मिले, झूम उठेगा तन, मन, 
स्फूर्ति नयी आ जाएगी, महकेगा जीवन वितान,
गर चाहो जीना ढंग से, करो मुक्त हस्त से दान .

दान मूल है आस्था, जीवन का विश्वास,
आजीवन करते जाइए, जब तक रहती साँस,
जब तक रहती साँस, दान का आनंद उठाओ,
संतोषी बन दान कर, सफल मोक्ष को पाओ, 
माहात्म्य बता कर, प्यार से दिलवाओ  दान.
----------

जल संरक्षण

पीने को पानी नहीं , पड़ा सर्वत्र अकाल ,
खेती कैसे होएगी , मवेशी भए बेहाल ,
मवेशी भए बेहाल , उद्योग जगत में छाई मंदी ,
कपड़े भी धुल न पाएँ , फैली चहुँ ओर गंदी ,
बेकार किया जो पानी , बहते रहेंगे पसीने ,
संरक्षण जल का करो , तब बचेगा जल लायक पीने .
--------
पानी का जो नर , कर न सके सम्मान ,
ज़िंदगी बन जाएगी , उनकी नरक समान ,
उनकी नरक समान , रुक जाएगी प्रगति,
कृषि , उद्योग और सभ्यता में , हो जाएगी विसंगति ,
उन्नति कितनी भी हो जाए , जीवन होगा बेमानी ,
स्वर्णिम भविष्य के लिए , आज बचाओ पानी .

----------

संस्कार विरासत में मिले , निधि अनुपम अपार ,
परंपराएँ पुरातन निभ रहीं , जीवन का आधार ,
जीवन का आधार , पूरी श्रद्धा से पर्व मनाएँ ,
करके स्वागत शीर्ष प्रबंधन का , ढेरों आशिष पाएँ ,
हो वरद हस्त महिला समिति पर सदा , बना रहे अधिकार ,
साभार सुरक्षित कर रहे , सब परिपाटी औ संस्कार .

---------
फटेहाल
कुछ तो ख़ासियत है फटेहाल में, वातायन मुफ्त में नसीब है.
जो हैं वास्तविक गरीब, नेता भी पाँच साल में करीब हैं.
दो जून की रोटी की जुगाड़, श्रम शक्ति को रखता सजीव है.
मिल जाए पीने को पानी, तो शुक्रिया, वरना आँसू उन्हें नसीब है.
 
-----------
पत्नी
इच्छा का अपनी दमन , कभी न कर नादान ,
इस से प्रसन्न नहीं होंगी , पत्नी श्री भगवान .
पत्नी श्री भगवान , देखो अनुपम माया ,
थोड़ी सी तारीफ़ से , बदल जाती काया ,
बुरा न सोचो स्वप्न में , चाहो नित ही अच्छा ,
भली करेंगे राम , जो मन में माँगो इच्छा .
 
-------
ब्लैक मनी
लक्ष्मी कलुषित कर रहे , भारत माँ के पूत ,
समृद्धि सँवर्धन कर रहे , नेताओं के दूत ,
नेताओं के दूत , लाज न इनको आए ,
गरीब कमा कर, कर भरे़ं , ये देश बेच के खाए ,
निर्भय हो , दुष्कर्म करें , बन बैठे स्वामी ,
छल से बाहर भेजते , अपनी श्वेत लक्ष्मी .
------
वोट की राजनीति
कतराते नेता , एक गरीब की परछाईं से ,
पर लाज न आती, जब वोट माँगने जाते हैं ,
दुर्दशा पर , गरीब की , बेतुके बयान दे जाते हैं ,
पर , चुनाव से पहले , उसी जीव को चाँदी के जूते पहनाते हैं .
 
-------
अपना जीवन
दे रहे आज हम, यह सँदेश विशेष ,
याद करें, हरि नाम को, रखें न कोई क्लेश .
अपना जीवन वापस लाएँ,
कुछ कौतूहल कर जाएँ,
बचपन के दिन में खो जाएँ,
कुछ शरारतें फिर कर आएँ .
अपना जीवन वापस लाएँ,
....
गन्ने और रेवड़ी खाएँ,
जलेबी का रस टपकाएँ,
सत्तू घोल के पी जाएँ .
अपना जीवन वापस लाएँ,
....
कुरते में अपनी बाँह छिपाएँ,
डेढ़ टाँग की पैण्ट दिखाएँ,
जूते को  मोजा पहनाएँ .
अपना जीवन वापस लाएँ,
....
छप्पर पर ऊधम खूब मचाएँ,
भुसौरी में सब छुप जाएँ,
रेत के शीश महल बनाएँ . 
अपना जीवन वापस लाएँ,
....
यारों सँग गप्प लड़ाएँ ,
खान – पान की सुध बिसराएँ,
अपने  -  पराए का भेद मिटाएँ .
अपना जीवन वापस लाएँ,
....
बॉस के आदेश न अब सुन पाएँ,
न पगार, प्रोमोशन की चिंता सताएँ,
साथियों से सौहार्द्र बढ़ाएँ .
अपना जीवन वापस लाएँ,
....
आओ अब मस्ती में खो जाएँ .
जीवन अपने ढंग से जी जाएँ,
नहीं  कोई प्रतिबन्ध लगाएँ,
अपना जीवन वापस लाएँ,
....
सृजनात्मकता अपनी रखें बनाएँ,
पेश प्यार से सभी से आएँ,
गलती सब की हम बिसराएँ.
अपना जीवन वापस लाएँ,
....
दुआ माँगते रब से अपने, रखें ख्याल अनेक .
छाया रहे उल्लास मन में, द्वेष रहे न एक .
 
---------


- : महिला समिति : -

करते हैं स्वीकार , महिला समिति का सत्कार ,
हों सफ़ल उद्देश्य , स्वप्न साकार ,
अनथक प्रयास , उत्साह लगातार ,
सजीव चेतना , सौहार्द्रता का व्यवहार ,
करते हैं स्वीकार , महिला समिति का सत्कार ,

नृत्य , नाटक , स्पर्धा का प्रचार ,
स्वस्थ मनोरंजन , योग का विस्तार ,
नव कल्पना , मूर्त –रूप जीवन में साकार,
करते हैं स्वीकार , महिला समिति का सत्कार ,

समाज कल्याण , आपात भोगी सहायता , 
स्व: विकास , सतत प्रयास , राष्ट्र – निर्माण ,
कलापों में व्यस्त रहे , महिला - परिवार , 
करते हैं स्वीकार , महिला समिति का सत्कार ,

परस्पर सहयोग , विश्वास का आधार ,
श्रेष्टता की लगन , जीते पुरस्कार ,
हो प्रति वर्ष , यह समारोह बारंबार , 
करते हैं स्वीकार , महिला समिति का सत्कार .
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- : शादी : -

शादी !    शादी, दो परिवारों का मिलन है,
यह मिलन है, संस्कारों का,
विचारों का, परंपराओं का,
शादी, मात्र दो शरीरों का, आत्माओं का संबंध नहीं है,
यह जन्म – जन्म का नाता भी नहीं है,
शादी, एक आयोजन, दिखावा या शिष्टाचार भी नहीं है,
यह एक अवसर है, अपनी आस्थाओं के विश्वास का,
अंतरात्मा की आवाज़ का, अधूरे व्यक्तित्व की पूर्णता का,
परस्पर श्रद्धा का, एक दूसरे के सम्मान का,
भावनाओं की कद्र का, प्रेम के विकास का,
शादी, चिरंतन मान्यताओं को जीवंत करने का अवसर है,
मनोरंजन का, विचारों के विनिमय का,
समारोह का, चिंतन के विस्त्रत आयाम का,
तर्क–संगत विश्वास व नव तकनीक के विकास का,
इसलिए, शादी के पावन पर्व पर, मात्र बोझ न उतारें,
इसे उल्लास के साथ नव - रूप दें,
प्रेम का विकास करें, सफ़ल व सार्थक करें.

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- : उद्‍बोधन : -

हे मानव ! तुम ईश्वर की संतान हो,
प्रकृति का वरदान हो,
समस्या का निदान हो,

हे मानव ! तुम , भूत की अमानत हो,
वर्तमान के रचयिता हो,
भविष्य की धरोहर हो,

हे मानव ! तुम, बुद्धि के विकास हो,
बल के प्रताप हो,
विद्या के चिराग हो,

हे मानव ! तुम, ऊर्जा के स्त्रोत हो,
कल्पना के केंद्र हो ,
चिंतन के विषय हो,

हे मानव ! तुम, समस्त सँसार की अपेक्षा हो,
प्राणि जगत का आधार हो,
सृजन का विश्वास हो,

फ़िर क्यों ? इस छवि को धुँधलाते हो,
प्रेम की गरिमा घटाते हो,
परस्पर द्वेष को बढ़ाते हो,

फ़िर क्यों ? ईर्ष्या को उकसाते हो,
भाव को छुपाते हो,
क्रोध को जगाते हो,

फ़िर क्यों ? धन की लालसा में स्वयँ को जलाते हो,
झूठे मान की आकाँक्षा में स्वयँ को सताते हो,
क्षण - भंगुर सँसार में अमरत्व खोजते हो,

क्या यह संभव नहीं, कि भविष्य को हमारा उपहार हो,
इदंनमम्‌  का प्रसाद हो,
वसुधैव कुटुम्बकम् का प्रमाण हो,

क्यों न हम, स्वयँ शाँति से जिएँ,
दूसरों को शाँति से जीने दें,
सँसार का कल्याण करें, 

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