Monday, 14 March 2016

खान पान व संस्कृति











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समय आधुनिक हो गया, नहीं किसी के पास,


सारी जनता व्यस्त है, चाहे कोई खास.


भोजन की फुरसत नहीं, करते इतना काम,


धन का भी अभाव नहीं, आर्डर कर दो राम.



फास्ट फूड अब छा गया, दादा, दादी, लाल,


माता को छुट्टी मिली, काम लगे जंजाल.


पिज़्ज़ा बर्गर बन गए, खाने को तैयार,


कई लोग तैनात हैं, लाने को बेकरार.


घर बैठे खाना मिले, पका पकाया पाय,


चाट उंगली खा रहे, रकम फोन पर आय.


गुणवत्ता है कुछ नहीं, रखते नहीं ख़्याल,

 
बस धंधा चलता रहे, बनता जाए माल.

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गौरवमय इतिहास को, कर पाएं हम याद,


लें जब उससे प्रेरणा, बढ़े नहीं अवसाद.


अपने बच्चे सीख लें, चाल, चलन व्यवहार,


शामिल शिक्षा में रहें, धर्म, नीति, संस्कार.


बिना संस्कार के हुआ, सभी ज्ञान बेकार,


गुरु का भी दायित्व है, दें समझ और प्यार.


पहले गुरुकुल थे भले, शिष्य पढ़ें इक साथ,


खाना, सोना, सीखना, डाल हाथ में हाथ.


पनप रहे स्कूल में, हिंसा, नफरत बीज,


केवल हम ही श्रेष्ठ हैं, बाकी सब नाचीज़.


बहुत जरूरी है बढ़े, आपस का व्यवहार,


मेल जोल से सब रहें, सीखें शिष्टाचार.

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अपनी सेहत, आयु का, रखें सदा ही ख्याल,


चटखारे ले कर नहीं, चखें मुफ़्त का माल.


खाना वो ही खाइए, जो हम से पच पाय,


लालच अधिक करें नहीं, फौरन बाहर जाय.


बीमारी का भी करें, सभी समय में ध्यान,


खाद्य भक्ष्य ही खा सकें, धरें ध्यान भगवान.


अधिक कड़क खाना नहीं, दाॅंत नहीं मजबूत,


बचे खुचे भी आ गए, कहीं रहे न सबूत.


मिर्च मसाले से रखें, दूरी अधिक बनाय,


स्वाद जीभ पर ना चढ़े, हिचकी भी आ जाय.


बी.पी., सुगर घातक हैं, खतरे के संकेत,


सीमित भोजन ही भला, इन से बचें सचेत.


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भोजन होता स्वाद प्रद, चटनी और अचार,
इनके तड़के से लगे, बदला सा आहार.
ताजी चटनी से मिले, स्वाद और प्रोटीन,
अदरक, मिर्ची मिल करे, पूरी देह पसीन.
मौसम की सब्जी मिले, भोजन पौष्टिक होय,
बिना स्वाद भोजन मिले, मन से सुखी न कोय.
बड़े जतन से बना कर, बरसों रखा अचार,
एक्सपायरी हो नहीं, दादी नानी प्यार.
बड़ी विदेशी कंपनी, करें सफल व्यापार,
पैसे की सब धूम है, खट्टा कारोबार.
दीर्घ काल तक रख सकें, तेल वाला अचार,
गीला हाथ लगा अगर, हो जाता बेकार.

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अपनी भाषा पर करो, गर्व सहित अभिमान,


सब संभव प्रयास रहें, स्वयं का योगदान.


जननी सब भाषा रही, संस्कृत उसका नाम,


ग्रंथ पुराने लिख गए, संत ऋषियों के काम.


मुगलों ने आ कर रचा, एक विकट षडयंत्र,


विकृत किया इतिहास को, फूँक नाश का मंत्र.  


अब दायित्व उठा सकें. करें संस्कृत विकास,


राजभाषा का मान दें, रहे राष्ट्र की आस.

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जब कोई दावत दे जाए, बड़े प्रेम से हमें बुलाए,

आना तुम जरूर उस दिन, लगा रहेगा मेरा मन,

अच्छे कपड़ों में हम जाएँ, लोगों से मिल कर आएं.

दावत में पकवान उड़ाएं, अपनी रुचि का सब खाएं,

परवाह पेट की किए बिना, अपने रोगों को भुलाएं,

अच्छी बात है, यार मेरे, पर, व्यर्थ न कुछ भी जाए,

भोजन लें उतना ही, छोड़ न कुछ भी पाएं.

जा कर उसका मान बढ़ाएं, कभी बाद में उसे बुलाएं.

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गाजर में गुण बहुत हैं, इसको खाएं रोज,

सभी विटामिन मिल सकें, चमके मस्तक ओज.

गाजर का हलवा मधुर, सभी मिठाई जान,

मेवा हो यदि साथ मे, खाए भूखा मान.

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अपने भारत देश पर, करते हम अभिमान,

संस्कृति, कला, विज्ञान में, रही हमारी शान. 


रही देश में विविधता, हो भाषा, पोशाक,

खान पान भी अलग है, बात करें बेबाक.


धर्म भले ही अलग हों, अलग रहे भगवान,

मिलते नहीं विचार भी, सबका हो सम्मान.


राजनीति की पंक ने, देश किया बेहाल,

पक्षपात भी हो रहा, नेता मालामाल.


शिक्षा भी वैदिक मिली, रहा खास इतिहास,

गड़बड़ कोई कर गया, बना रहा परिहास.


भारत में फिर हो सके, वापस गौरव गान,

नाना विधि से हो रहा, भारत का यशगान.

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गरमी में सब चाहते, ताजे मीठे आम,

उनको जो ना चख सके, वो होता बदनाम.


रत्नागिरी, बनारसी, हापुस, केसर नाम,

छोड़े पीछे दसहरी, कहते अपने राम.


बारिश में चुसिया मिले, बनता सबका काम,

पाचक उसका रस रहे, मिले आम के दाम.


खट्टा, मीठा भी चले, फल, सब्जी अचार,

मँहगा, सस्ता सोचना, अब लगता बेकार.


अमझोरा, अचार पड़े, बढ़े स्वाद से दाम.

चखो आम की पापड़ी, छोड़ो सारे काम.


रोगी भी मधुमेह के, करें नहीं परहेज,

सभी जन संसार में, रखते आम सहेज.

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पाप पुण्य के फेर में, घूम रहा इंसान,

अनजाने में पुण्य हो, पाप बना अनजान.

अपनी करनी भुगतते, दोष नहीं भगवान,

अंत भले का हो भला, नहीं बुरे को मान.

नेक करम करते रहें, बिन सोचे परिणाम,

कष्ट किसी को ना मिले, ऐसे अपने काम.

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भूले से भूलें नहीं, भगवन भोलेनाथ ।

मनचाहा वरदान दें, रख दें सर पर हाथ ।।

भक्तों की मन कामना, सफल करें भगवान, 

सच्ची श्रद्धा भक्ति से, जो भी धरता ध्यान. 

सरल हृदय बिन द्वेष से, हो पूजा सत्कार, 

बिना कपट धारण किए, मानो हर उपकार. 

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केश प्रीशु के कट गए, मुंडन का संस्कार, 

जन्म बाल अर्पित किए, बीच नदी मझधार. 

केश साफ में प्रीशु का, दिखा शीश खल्वाट, चिकना दिखता शीश जब, लग जाती है वाट.

प्यारा दर्शन प्रीशु का, उमड़ा मन में लाड़, 
करें प्रार्थना ईश से, बनता रहे जुगाड. 
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लाइफ, वाइफ ओनली, गिव यू एवरी थिंग, 
व्हेन बोथ आर लवली, यू फील एज़ किंग. 
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प्लेज़र आन सैटरडे, अ नाइस वीक एंड,
लिव फुल डे विद फ़ैमिली, नो रेन आॅर विंड.
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विज़िट पेरेन्ट वीकली, आॅर कर्टसी फोन,
काल फील्स देम लवली, लुकिंग लाइक डाॅन.  
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अंग्रेज़ी दोहे रचें, मन में उठा विचार, 
सही शब्द मिलते नहीं, लेते मन को मार. 
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चरण अधूरे हैं विषम, लघु गुरू का अंत, 
शब्द कोष हैं खोजते, ज्ञान मांगते संत. 
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कमी ज्ञान की खल रही, कैसे हो अधिकार, 
भाषा अपनी ही भली, करिए इससे प्यार. 
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रोटी कड़क खाए हुए, गईं मुद्दतें बीत, 
स्वाद निराला था मिला, झलके उसमें प्रीत. 
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रोटी का था जायका, रहे स्वस्थ जब दाँत, 
अब तो मुश्किल से पचे, साथ न देवे आँत. 
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चूल्हे की रोटी दिखे, आता मुँह में नीर, 
मन मसोस कर रह रहे, किस से कह दें पीर. 
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सब मिल कर पिकनिक चले, खूब मनाई मौज, 
मुकाम में मकानी तय, शुक्रवार के रोज, 
शुक्रवार के रोज, आ गए सभी परिवार,
मस्ती करने चले, ले आए अपनी कार, 
खेला, खाया, नाश्ता, सादा भोजन गजब, 
अच्छे से आनंद हो, फिर से मिलें हम सब. 
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बहना तो तर गई, करके दरश बलराम,
बद्री, पुरी, द्वारिका, राम से पूरे चारों धाम,
राम से पूरे चारों धाम, पर मन सशंकित अभिराम,
सिगनल मोबाइल का, बोल न दे राम राम,
भला विनय ने करा दिया, सजा डाटा का गहना,
आशीष सदा देते रहें, जीजा और बहना.
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यह कैसी अनुभूति है.  
यह कैसी ..... 
अपनों के इस संगम में, 
सारे मिल कर मौज मनाते, 
जीवन का आनंद उठाते, 
एहसास सेवानिवृत्ति है, 
यह कैसी अनुभूति है. 
यह कैसी ..... 

ओ.एन.जी.सी. का आधार, 
संलिप्त गैस तेल व्यापार, 
श्रमिकों के मस्त परिवार,
रखते परस्पर प्यार, 
अद्भुत यह संस्कृति है, 
यह कैसी अनुभूति है.
यह कैसी ..... 

प्यार भरे संवाद की, 
आपसी सद्भाव की, 
सबके मददगार की, 
सुख-दुख के समाचार की, 
यह विचित्र रीति है, 
यह कैसी अनुभूति है. 
यह कैसी .....

सपनों होते साकार, 
बढ़ता अपना संसार, 
प्रकृति के अनुसार, 
बदलती परिणिति है, 
यह कैसी अनुभूति है. 
यह कैसी ..... 

करके विचार-विमर्श, 
जब लेते कोई निर्णय,
होता अच्छा परिणाम, 
होती सबकी सहमति,
यह कैसी अनुभूति है.
यह कैसी .....

आती जरावस्था, 
कठिन आवागमन, 
कम आपसी मिलन, 
होती अक्सर विस्मृति, 
यह कैसी अनुभूति है.
यह कैसी .....

बना रहे सदाचार, 
कल्पना हों साकार, 
सबका सहयोग प्रसार, 
आयोजन की प्रतिमूर्ति, 
यह कैसी अनुभूति है, 
यह कैसी ..... 
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मजमा गोलू जुटाती, मिले ऋचा जब साथ, 
लोनावला पक्का कर, जोड़े सबके हाथ, 
जोड़े सबके हाथ, होता शादी का भान, 
उड़द, कढ़ी, भात से, सामिष भोजन प्रमान, 
फोटो, ताश, खेला, गीत का छेड़ा नगमा, 
पिकनिक का आनंद, जमाता पूरा मजमा.
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संयुक्ता ने घुमाया, महानगर माॅस्को,
वॉल्वो यात्रा सुखी, मैट्रो में रुको, 
मैट्रो में रुको, एस्केलेटर से चढ़ो,
दरबार में खाना, लाइन से आगे बढ़ो, 
सब जगह का हाल बता, हल समस्या मुक्ता,
छियालीसों भारतीय, संभालती संयुक्ता. 
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मस्ती में सारे रहें, हम व आप सिपाही,
अजब उल्लास छा रहा, सभी जीवन राही,
सभी जीवन राही, रोज नव अनुभव पाते,
मास्को भवन, संस्कृति, परिवहन भी सिखाते, 
संयुक्ता के साथ में, पूरी टीम हँसती,
मिल कर सारे बिखेरें, पूरी अपनी मस्ती.
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अनुभूति दे प्रेरणा, उमंग, हास, परिहास, 
मुक्त जीवन तनाव से, लें खुले में श्वास,
लें खुले में श्वास, पत्नी विदेश घुमाएँ,
बिछड़े साथी साथ, कुछ पल आनंद उठाएँ, 
अनुभव, ज्ञान, विस्मय, लख विदेश की संस्कृति,
शारजाह, मास्को में, हो अद्भुत अनुभूति.
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चर्च में शादी देखी, रोहित व एबी गेल,
एक सुंदर सूट सजा, दूजी गाउन बेल, 
दूजी गाउन बेल, वचन दिला कर प्रसाद, 
साथ संगीत सस्वर, प्रार्थना व आशीर्वाद, 
जीवन धर्म का रहस्य, डो मी रे फा में खर्च,
अनुपम अवसर पाए, आ कर फतोर्दा चर्च.
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घूम घाम कर धूम से, अटक गई अब जान,
पूरब की सुंदर नगरी, कोलकता है नाम, 
कोलकता है नाम, प्यारी जगहें घूमो, 
बेलूर, दक्षिणेश्वर जा, माँ के चरण चूमो, 
हावड़ा ब्रिज, विक्टोरिया, रेशमी साड़ी लूम,
जाने कितनी जगह, जहाँ न पाते हम घूम.
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यात्रा के अगले कदम, बढ़े मैदान ओर,
घूम पर लख टाॅय रेल, दिल ले रहा हिलोर, 
दिल ले रहा हिलोर, इलम से सीमा झांकी,
गोल पहाड़ चाय बाग, मीन, मिरिक ताँँकी,
नौका विहार खुशी, दे अति आनंद मात्रा, 
इस्काॅन में ध्वनि प्रकाश, करे पूरी यात्रा.
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विश्राम गृह दुर्गम पथ, कराए नानी याद,
सरल, समतल नहीं कहीं, मन करता फरियाद, 
मन करता फरियाद, सर्वत्र छाईं सीढ़ियाँ,
चार बजे धूप चमके, दिवस मेघ वादियाँ,
शाॅपिंग माॅल रोड करें, घूमें टैक्सी धाम,
टाॅय ट्रेन अद्भुत चले, जगह जगह विश्राम.
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मार्ग पहाड़ी पर चले, कर गंतोक दीदार,
अतिथि गृह के रक्षकों का, करते हुए आभार,
करते हुए आभार, चार धाम छटा न्यारी, 
ज्योतिर्लिंग साथ में, साईं धाम फुलवारी,
सुखद सफर सोपान, दार्जिलिंग आकर पार्क,
जीवन भर याद हो, विषम रोमांचक मार्ग.

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यात्रा वन जाखरी से, शुरू हुई थी आज, 
अगले चरण में देखे, बुद्ध तिब्बती समाज, 
बुद्ध तिब्बती समाज, गंतोक की छबि न्यारी, 
माखन दीप जले दिखे, रंगीन पुष्प क्यारी, गणेश, हनुमान टोक, बोरटुक फाॅल मात्रा, 
तिशा व्यू प्वाइंट से, एम. जी. रोड तक यात्रा.
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राय बिनय की मान कर, चले विनय के साथ, 
सिक्किम भ्रमण रहा, पूरा विनय के माथ,
पूरा विनय के माथ, गए गंगटोक, दार्जिलिंग,
चांगू लेक, स्नो फाल, हवा लगे अति चिलिंग,
सेना मंदिर जाय के, मैगी, थुप्पू खाय,
घाटे का सौदा नहीं, लो भाई की राय.
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बार-बे-क्यू मना रहा, जन्मदिन लब्बू साथ, 
बढ़िया केक काट रही, मुग्धा बेटी साथ, 
मुग्धा बेटी साथ, असीमित व्यंजन वह खाए, 
सूप, चाट, स्टार्टर संग, मीठा मजा लगाए, 
मज़ा ही पेट भरे जब, परिवार न खाए क्यूँ, 
सारे भोजन पाएँ, देख ले बार-बे-क्यू. 
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पीली, फुड़िया, बड़ी, भाभी को मिल गई आज,
चतुर, छबीली, जोर से झाँके, दिखावन लागे लाज,
दिखावन लागे लाज, कष्ट में कराहती भारी,
सोफ़्रामाइसिन, मैगसैल्फ़, दूर न करे बीमारी, 
पट्टी फटी, बहुत भयंकर, हो गई पतली, ढीली,
बड़े कष्ट से चीरा मारा, कील निकाली पीली.
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साहस, धीरज धारिए, हो जब काल प्रहार,
कठिन, कुटिल आघात भी, बहे समय की धार,
बहे समय की धार, अपनी गति चला जाए,
दुर्दिन लगे खराब, भला दिन सबको भाए,
समय एक यंत्र है, लोहे को करे पारस,
मानव की पहचान है, उसी का अपना साहस.
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सरपट जीवन चाल में, जब आवै त्योहार, 
अधिक काम कर न थको, जो चढ़ जाए बुखार,
जो चढ़ जाए बुखार, रखो पेट संभाल,
लूज़ मोशन न मचा सके, गैस भरा धमाल, 
तबियत बिगड़ने से पहले, लो दवा फटाफट,
मजा जिंदगी का लो, बोर हो जब सरपट. 
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ब्रांडेड सामान की, अलग नई पहचान, 
गुणवत्ता का मापदंड, बिन बूझे तू मान,
बिन बूझे तू मान, न चाहे कोई वारंटी,
आश्वास्त दाम, न कोई रेट्स रीज़नेबिलिटी,
फैशन के नए आयाम, ग्राहक के मोस्ट वांटेड,
अधिक धन हो जाए, खरीदो सामान ब्रांडेड.
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मैडल मैराथन में मिला, मिला स्वास्थ्य संदेश,
तन मन सशक्त बने, रहे न कोई क्लेश,
रहे न कोई क्लेश, फिटनेस का अच्छी तैयारी,
रोज दौड़ते रहने से, आए कभी न कोई बीमारी, 
साहस बढ़ता रहे, चलें जब खूब पैदल,
विभिन्न प्रतियोगिताओं में, पाएँ जम कर मैडल.
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मुबारक बाद दें खुशी में, विषाद में हो सांत्वना,
परंपरा यह संस्कार की, धर्म करे स्थापना,
धर्म करे स्थापना, ईर्ष्या, वैमनस्य हो दूर,
हों सुखी, संपन्न सब, संवेदनाएँ भरपूर,
वसुधैव कुटुंबकम् संदेश के, बनें प्रचारक,
हर गम पर रो सकें, और खुशी पर दें मुबारक.
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कढ़ी, कचौड़ी देखि के, क्षुधा सब की बढ़ जाय,
असामान्य प्रयोग कर, नित नव व्यंजन पकाय,
नित नव व्यंजन पकाय, प्रेम से सबको परोसे,
अधिक भूख से जो खाय, पेट रहे ईश भरोसे,
अतिथि ग्रहण करे ससम्मान, मन की खुशी बढ़ी, 
*प्रीती* परोसे प्रीति से, जम कर खाओ स्पेशल कढ़ी.
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पत्नी अंतिम गुरू है, देवे व्यावहारिक ज्ञान,
तर्क रखे साक्ष्य सहित, हो अकाट्य प्रमान,
हो अकाट्य प्रमान, नहीं और सीख की वाँछा,
आपके हित की बात करे, सुझाव दे सबसे अच्छा, 
कुछ करने से पूर्व, सोचो भी न मनमानी,
हैं भलाई इसी में, मान लो, सच कहती पत्नी. 

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सुबह सुबह डिस्टर्ब करे, पप्पू, पेपर, दूध,
मीठी नींद से जगा रहा, सारिका माई का भूत, 
सारिका माई का भूत, विश्रुत देवे गाली, 
मम्मी पापा पूजा करें, किसने घंटी बजा ली,
दिन अच्छा बीत जाए, सबसे करो सुलह,
तन, मन स्वस्थ रहे, जागो प्यारे सुबह सुबह.
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मदरसा बीवियाँ जा रहीं, करने नए प्रयोग, 
मन से करना सीखतीं, जीवन का उपयोग, 
जीवन का उपयोग, हर बात में अकल लगाएँ, 
धन दौलत का मोल नहीं, प्रेम में खुशियाँ पाएँ, 
पता नहीं, कब गुल कोई दिख जाए सहसा,
सार यही है, जीवन नाटक, *बीवियों का मदरसा*.

बेटी ला मदरसे में, करो खूब उपकार,
बदले में न कोई अपेक्षा, अच्छा रखो व्यवहार, 
अच्छा रखो व्यवहार, देखे अल्ला ताला,
बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ, नेक तहज़ीब वाला,
पति निष्ठा, प्यार से, परिवार में बिठाए गोटी,
जा कर ससुराल में, संस्कार दिखाए बेटी.

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एक मनोवैज्ञानिक कुंडली : -

Body Language कह रही, अंतस के उद्गार,
रूठना, सिसकना, मनाना, या फिर जतलाना प्यार,
या फिर जतलाना प्यार, व्यक्त करे मन के भाव,
गुस्सा आवे नाक, मटकावे नैन या पटके पाँव,
अपनी भाषा, अपनी बोली, अनुभव करती age,
सद्भाव पूर्ण, विनम्र रखें, अपनी Body Language.

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सॉरी 

' सॉरी ' शब्द पवित्र है, पूर्णतया निष्पाप,
इसके कहने पर मिटें, मन के सब संताप,
मन के सब संताप, जब दिल से माँगें क्षमा,
क्लेश का अवसान हो, निराली इस की गरिमा,
मात्र इस के अनुभव से, ख़तम हो जाए दूरी,
मिल जाए अनुुपम आनंद, जब प्यार से बोलें सॉरी.
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मुश्किल नहीं होगी, अनुभव नया आएगा,
सुसंस्कार आपका, आत्मविश्वास बढ़ाएगा.
वाणी से आपके, प्यार ही छलकेगा,
हृदय में आपके, अनुराग ही उमड़ेगा,
करेंगे दिशा निर्देशन, आप सदा मेरा,
ऐसा मत मुझे सर्वदा भाएगा .
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ठंडी बरफ़ लगाइए, जब काट ले बर्र,
मन का संतोष सजाइए, चिंता होए फुर्र,
चिंता होए फुर्र, चित्त को रखें शाँत, 
थोड़े में कुशल मानिए, जब अंतस हो क्लाँत, 
आयुर्वेद अपनाओ, गर्मी में पकाओ भिंडी,
अदरक, लहसुन सेवन से, नहीं रहेगी ठंडी.
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ज़िंदगी जवान जी रहे , ज़िंदादिली के साथ ,
बचपन वापस आ गया , पा बच्चों का साथ, 
पा बच्चों का साथ , ख़ुशी हो गई दोगुनी ,
चार चाँद लग गए , खिल गई जीवन चाँदनी ,
सेवानिवृत्ति के बाद यापन , शेष जीवन सादगी ,
बने हयात , बरसे ख़ुशी , जिएँ भरपूर ज़िंदगी . 

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काल चक्र में ढल गया , मौसम का व्यवहार ,
गर्मी , वर्षा , शरद की , पुनरावृत्ति होती बारंबार .
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अभिरुचि

केला मुझे ना सूट करे, दुश्मन बना अचार,
खट्टे जब अँगूर हों, कैसे बढ़ेगा प्यार,
दही नाम से चौकसी,  ना घी -  तेल की  चाह,
चाय पिए जग जात  हैं, कॉफी देय सुलाय,
ऐसा टोटका दीजिए, भोजन सुस्वादु  बन जाय,
मैं भी भूखी ना रहूँ , पति ना गुस्सा खाय .
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खान पान

गड़बड़ गले में कर रहा, गोभी, गाजर का अचार,
खातिरदारी में झलक रहा, मेजबान का प्यार,
मेजबान का प्यार, नित नव पकवान खिलावें,
भूख, स्वाद से अधिक, भोजन का आग्रह दर्शावें,
पूरा परहेज करें, वरना पेट जाएगा अकड़,
संयमित सीमित भोजन, टालता पेट की गड़बड़.

खान पान से हो रहा , सेहत का विकास ,
विचार , ध्यान जगा रहे , एक नया विश्वास ,
एक नया विश्वास , पर प्रदूषण इसमें आए ,
बर्गर , पिज़्ज़ा नूडल्स , सभी को भाए ,
सेहत पहली चीज़ , बना रहे यह भान ,
स्वस्थ दिमाग बने , जब अच्छा हो खान पान .
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विदेशी भोजन बन रहा , लोकप्रिय आहार ,
बड़े चाव से खा रहे , बूढ़े , बच्चे , यार ,
बूढ़े , बच्चे , यार , हर जगह मँगाते ,
पार्टी , दावत का , न कोई अवसर गँवाते पौष्टिक खाना खाएँ , अच्छा , स्वादिष्ट और देशी ,
सेहत करें न खराब , तजें भोजन विदेशी .
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खानापूरी

खाना - पूरी में लगा, सारा सभ्य समाज,
पूरी निष्ठा से निभा रहे,सारे रीति -  रिवाज़,
सारे  रीति – रिवाज़, दिल से उन्हें निभाओ,
ढोंग, पाखंड को  छोड़, दिखावे पर मत जाओ,
बिन श्रृद्धा के होती नहीं, कभी मुराद पूरी,
दावत में जो बुला कर, कहते ‘ खा ना, पूरी ‘.
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