Thursday, 31 March 2016

अनुज्ञापन - विदाई समारोह








-: अनुज्ञापन :-

श्री टी. के. रॉयचौधुरी
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार,
दिया असीम प्यार, सुदृढ़ आधार,
किया विश्वास का नव सँचार,
लिया, श्रद्धा, प्रेम, सम्मान का व्यवहार,
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार,
कर दूर सब भ्राँति,
रखी सर्वत्र शाँति,
अर्जित कर काँति
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार,
एम. एम. की गीता,
नियमों की बाइबिल,
प्रावधानों की कुरान,
हमारी राय, आप चौधरी,
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार,
रहें सुखी, प्रसन्न,
परिवार हो समृद्ध,
है गुहार हमारी,
करें नमन स्वीकार, श्री तुषार काँति रायचौधरी, 
अग्रज दें, आशीष हमें,
हों तकनीक से सम्पन्न,
बनें आकाशदीप,
तेल के सागर में,
खोजें काला सोना,
गहरे पानी में, 
करें नमन स्वीकार, माननीय तुषार.


श्री मुकुंदन

है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,
आज के दिन करके नमन,

विगत अतीत, एक इतिहास,
अनुभव का भंडार, आप के पास,
नेतृत्व का दृष्टिकोण, हमारी आस,
मानवीय संवेदना, हार्दिक स्पंदन,
है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,

एक स्तंभ, रहेगा याद,
निर्भीक निर्णय, हमारी साध,
प्रेरणा स्त्रोत, एक विश्वास ,
मर्यादा, परम्परा, शक्ति का संचन,   
है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,

अथक परिश्रम, कुशल निर्देशन,
सँचार, कल्पना, विचार मंथन,
सहज निर्णय, धैर्यवान श्रोता,
नवीन मार्ग, गहन चिंतन, 
है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,

करते प्रार्थना, सफ़ल भविष्य की,
जीवन के नव – सोपान आरंभ की,
स्वस्थ मन, विचार, व्यवहार की,
है यही, हमारा शुभ – चिंतन, 
है अभिनंदन, श्री मुकुंदन,



सतींद्र कुमार बक्शी

 
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

सरल व्यक्तित्व, सुमधुर मुस्कान,
नहीं करा कभी क्रोधा का भान,
हर आगंतुक को, दिया सदा सम्मान,

करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

विलक्षण प्रतिभा, सुझावों की खान,
है उपलब्ध यहाँ, हर चिंता का समाधान,
समस्याओं के झंझावात में, 
एक सुदृढ़ चट्टान,

करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

एसेट के हित में दिया, 
इच्छाओं का बलिदान,
खाली हाथ न कोई आया, 
करता हुआ गुणगान,
' बस दो मिनट' का, 
एक संक्षिप्त व्याख्यान,
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

'विन–विन' स्थितियों को ,
हम न सके पहचान,
मर्यादाओं के अनुबंधों में, 
किया नहीं अपमान,
सच बोला, कड़वा लगा, 
शुभेच्छु गए सब जान,
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

हो पदार्पण, जीवन के तृतीय चरण में,
स्वस्थ रहे, गृहस्थ का सोपान,
पर, इसमें भी प्रथम है, परमेश्वर का गान,
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

देते हैं शुभकामना, करते हैं प्रार्थना,
सुखद बने भावी जीवन, पाएँ यह वरदान,
ले जाएँ यादें सभी, करें ज्ञान का दान,
करें अभिवादन स्वीकार, 
बक्शी सतीन्द्र कुमार,

प्रकाश चंद नौटियाल

न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
हो आलोकित जीवन पथ,
पूरी आशाएँ, स्वप्नों का सँसार,
संतुष्टि का भाव, समृद्धि का भंडार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
हों आसीन,  उन्नति के उत्तुंग शिखर पर,
प्रगति के पंखों के साथ,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
श्रम का संबल, बुद्धिमत्ताका आधार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
सहिष्णुता का सागर, धैर्य का आगार,
विवेचन की क्षमता, पूर्णता की आकाँक्षा,
कर्मठता की लगन, विश्वास का सँचार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
प्रेम के प्रतीक, निर्लिप्त भाव,
निस्वार्थ कर्म, अडिग वचन,
सौहार्द्रता का व्यवहार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश,
हो सुखद जीवन, मानवता का आधार,
अध्यात्म का चंतन, पल्लवित निधि,
नाम के अनुरूप, पूर्ण सँसार,
न करें निराश, फैलाएँ प्रकाश.

श्री एस. सी. कोहली

हैं हमें प्रिय, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, वे प्रियतम किसी और के हैं,

है हमें श्रद्धा, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, श्रद्धालु कई और हैं,

हैं, हमें भक्ति,  पर कह नहीं सकते,
क्योंकि इनके भक्त अनंत हैं,

है हम पर कृपा, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि सभी इनके कृपा – पात्र हैं,

हैं कुशल प्रबंधक , पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, यह महा प्रबंधक हैं

हैं लब्ध सम्मान, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि सम्मान अभी ज़ारी हैं,

हैं गहन चिंतक, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, मुद्रा से प्रसन्न चित्त हैं,

हैं दूर दृष्टा, पर कह नहीं सकते,
क्योंकि, परख बारीकियों की है,

अत:, रहने देते हैं, इन्हें कोहली साहब ही,
क्योंकि ये अपने हैं, यह अपने हैं,

 

श्री रवींद्र कुमार


करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

गौरवमय अतीत, स्वर्णिम भविष्य,
दायित्व मुक्त, अध्यात्म सुधार,
स्वस्थ चिंतन, गहन विचार,
करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

प्रशस्त पथ, एक प्रेरणा,
समर्पित जीवन, दृढ़ चरित्र,
अतिशय सँचार , कल्पना साकार,
करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

करते प्रार्थना, सुख, सम्पन्नता की,
देते शुभ कामना, स्वस्थ जीवन की,
लेते आशीष, सुखद समय की,
जीवन की स्वर्णिम सँभवनाएँ अपार,   
करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

पितरानुज रहें, प्रसन्नचित्त, सदाबहार,
स्वप्नों के इंद्र धनुष हों साकार,
हो रहे सेवा निवृत्त, फ़िर भी हैं कुमार,
करें प्रणाम स्वीकार, श्रद्धेय कुमार,

 रमेश गोयल


1. जीते रहें, हँसते रहें, स्वस्थ रहें सदा,
    रहमत ऊपर वाले की, है अपार सम्पदा,
    है अपार सम्पदा, मेहर उसकी निराली,
    समृद्ध रहे परिवार, रहे सर्वदा ख़ुशहाली,
    प्रिय रमेश के जन्मदिन पर, यह हम गाते,
    उनकी मुसकान सदा, हमारा दिल जीते .

2. एक मीत पाए, शुभकामनाएं हमारी,
     प्यारी उसकी मुस्कान पर, हम जाते वारी,
    हम जाते वारी, बारम्बार उसे निरखाते,
    टकटकी लगा, आशीष उस पर बरसाते,
    शुभकामनाएं उसे दें, हर्ष का अतिरेक,
    न कोई दूजा है, निराला रमेश हमारा एक.

नत्थू लाल

मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,

मैरीन सर्वे के संत, 
आपने किया अजीब कमाल,
करी प्रदान नई दिशा, 
फूँकी उसमें जान,
स्थिर आधार शिला से, 
है स्थापित वर्तमान,
दूर दृष्टि, अथाह ज्ञान से, 
हल हुए सवाल,
मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,
ऑफ़शोर वर्क्स के संत, 
आपने किया अजीब कमाल,
कुशल नेतृत्व, सक्षम प्रशासक, 
सरल विचार,
संवेदन शील, मित्रवत स्वाभाविक व्यवहार,
गहन चिंतन, प्रसन्न मुद्रा, 
तकनीक बेमिसाल,
मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,
ई. एस. के संत, 
आपने किया अजीब कमाल,
अपार स्नेह, अनुपम निर्णय, 
अटूट विश्वास,
प्रगाढ़ श्रद्धा, स्पष्टा वक्ता, 
सुमधुर मुस्कान,
है आशा, शीघ्र होंगे हल, 
अनसुलझे सवाल,
मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,
ओ.एन.जी.सी. के संत, 
आपने किया अजीब कमाल,
गरिमामय अतीत, सुखद स्मृति, 
स्वर्णिम भविष्य,
अनसोचे सपने हों साकार, 
जिएँ स्वस्थ जीवन,
व्यस्त क्षणों को करेंयाद, 
थोड़ा समय निकाल,
मुक्त हृदय से करते स्वागत, 
आज आपका श्री लाल,
मैरीन सर्वे के संत, 
आपने किया अजीब कमाल.

प्रदीप कुमार दलाल
काटें केक, जलाएँ दीप, स्वागत है प्रदीप.
सौम्य मधुर स्वभाव, मृदु मुस्कान,
उन्नत विचार, प्रेम का आगार,
आपका आभार, स्वागत है कुमार,
काटें केक, जलाएँ दीप, स्वागत है प्रदीप.
गहन चिंतन, कुशल प्रबंधन,
सहयोग का आधार, दुर्लभ प्रवाल,
हल करे सवाल, स्वागत श्री दलाल,
काटें केक, जलाएँ दीप, स्वागत है प्रदीप.
पूरे साठ वसंत, उज्जवल भविष्य,
दें मार्ग दर्शन, रहें नहीं सवाल,
आज देते शुभ कामना, 
श्री प्रदीप कुमार दलाल
काटें केक, जलाएँ दीप, स्वागत है प्रदीप.

शिव चरन गुप्ता

कस्तूरी किरन, फैलाएँ शिव चरन,
अल्प सँपर्क, दीर्घ छाप,
कुशल नेतृत्व, अद्भुत क्षमता,
रोष रहित, मित्रवत व्यवहार,
कस्तूरी किरन, फैलाएँ शिव चरन, 
हों सफ़ल नव दायित्व में,
आशाएँ पूर्ण, स्वप्न साकार,
स्वर्णिम भविष्य, स्वस्थ परिवार,
कस्तूरी किरन, फैलाएँ शिव चरन,

हे ! जल, थल, नभ के स्वामी, करना तनिक विचार,
मेरे मरीन सर्वे पर भी रखना दृष्टि उदार ,
कस्तूरी किरन, फैलाएँ शिव चरन.

विजयेंद्र कुमार मित्तल
हैं हम नत मस्तक आज , मान्यवर श्री मित्तल ,
दृढ़ आस्था , अटूट विश्वास ,
विगत अतीत , एक इतिहास ,
कठोर परिश्रम , कुशल प्रबंधन ,
परिणाम रत , अडिग विचार , 
हैं हम नत मस्तक आज , मान्यवर श्री मित्तल ,
स्पष्ट वक्ता , निर्भीक नेता ,
भविष्य दृष्टा , वर्तमान सम्राट ,
लक्ष्य प्रेरित , अनवरत प्रयास ,
दायित्व मुक्त , स्वर्णिम सँसार ,
हैं हम नत मस्तक आज , मान्यवर श्री मित्तल ,
देते हैं शुभकामना , करते हैं प्रार्थना ,
हों उपलब्ध हमें , मार्ग दर्शन हेतु ,
करें भ्रमण , तीर्थाटन विदेशों में ,
रहें स्वस्थ , मुदित्, तनाव मुक्त , 
हैं हम नत मस्तक आज , मान्यवर श्री मित्तल ,